Saturday, March 21, 2009

जब चिट्ठी का मजमून ही बदल गया...

एक गांव में एक स्त्री थी। उसके पति आई टी आई मे कार्यरत थे । वह अपने पति को पत्र लिखना चाहती थी, पर अल्पशिक्षित होने के कारण उसे यह पता नहीं था कि पूर्णविराम कहाँ लगेगा । इसीलिये उसका जहाँ मन करता था वहीं पूर्णविराम लगा देती थी। आखिरकार उसने चिट्टी इस प्रकार लिखी की उसका मजमून ही बदल गया. आप भी गौर करें और आनंद लें-

मेरे प्यारे जीवनसाथी मेरा प्रणाम आपके चरणों में । आप ने अभी तक चिट्टी नहीं लिखी मेरी सहेली कॊ । नौकरी मिल गयी है हमारी गाय को । बछडा दिया है दादाजी ने । शराब की लत लगा ली है मैंने । तुमको बहुत खत लिखे पर तुम नहीं आये कुत्ते के बच्चे । भेड़िया खा गया दो महीने का राशन । छुट्टी पर आते समय ले आना एक खूबसूरत औरत । मेरी सहेली बन गई है । और इस समय टीवी पर गाना गा रही है हमारी बकरी । बेच दी गयी है तुम्हारी माँ । तुमको बहुत याद कर रही है एक पड़ोसन । हमें बहुत तंग करती है तुम्हारी बहन । सिर दर्द मे लेटी है तुम्हरी पत्नी।
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