Wednesday, April 7, 2010

पत्रों पर आधारित फिल्म 'जैपनीज वाइफ'

पत्रों की दुनिया किसे नहीं भाती. फोन और एसएमएस के सूचना और संपर्क-सूत्र बनने के इस दौर में भी पत्र के जरिये अपनी भावनाएं व्यक्त करना लोग भूले नहीं हैं. तभी तो अभी भी पत्रों की दुनिया पर फ़िल्में बनती रहती हैं. पंकज उदास द्वारा नाम फिल्म में गाया गया गाना- चिट्ठी आई है हर किसी की जुबान पर चढ़ा था. हाल ही में ' वेलकम टू सज्जनपुर' फिल्म की थीम भी पत्र ही थे. अब मशहूर फिल्मकार अपर्णा सेन ने सूचना और भावभिव्यक्ति के इस सबसे पुराने माध्यम पत्र लेखन की थीम पर ' जैपनीज वाइफ' फिल्म का निर्माण किया है. यह फिल्म अंग्रेजी राइटर कुणाल बसु की शॉर्ट स्टोरी पर बेस्ड है। यह फिल्म अंग्रेजी और बांग्ला में बनी है।

फिल्म में नायक और नायिका पत्र-मित्र हैं। यह फिल्म सुंदरवन के टीचर स्नेहमोय और जापानी लडकी मियोग की अनूठी प्रेम कहानी पर आधारित है। ये दोनों पत्रों के जरिए एक दूसरे से मिलते हैं और दोनों में प्यार हो जाता है। और तो और दोनों पत्रों के माध्यम से शादी भी कर लेते हैं। सुन रहे हैं न, अभी तक नेट पर लोग शादियाँ कर लेते थे, अब पत्रों द्वारा. सबसे रोचक तो यह है कि पत्र-मित्रता द्वारा हुई उनकी शादी को 15 साल हो गए हैं, लेकिन उन्होंने एक दूसरे को देखा तक नहीं है। तो आप भी डाकिया बाबू के साथ इस फिल्म का लुत्फ़ उठाईयेगा और एक बार फिर से पत्रों कि दुनिया में पहुँच जाइएगा !!
(चित्र में फिल्म की नायिका राईमा सेन )
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