Tuesday, July 31, 2012

डाक-मुंशी के पुत्र थे उपन्यास सम्राट प्रेमचन्द

हिन्दी साहित्य के इतिहास में उपन्यास सम्राट के रूप में अपनी पहचान बना चुके प्रेमचंद का वास्तविक नाम धनपत राय श्रीवास्तव था. वह एक कुशल लेखक, जिम्मेदार संपादक और संवेदशील रचनाकार थे. प्रेमचंद का जन्म 31 जुलाई, 1880 को वाराणसी से लगभग चार मील दूर लमही नामक ग्राम में हुआ था. इनका संबंध एक गरीब कायस्थ परिवार से था. इनकी माता का नाम आनन्दी देवी था. इनके पिता अजायब राय श्रीवास्तव डाकमुंशी के रूप में कार्य करते थे.ऐसे में प्रेमचंद का डाक-परिवार से अटूट सम्बन्ध था.

जब प्रेमचंद के पिता गोरखपुर में डाकमुंशी के पद पर कार्य कर रहे थे उसी समय गोरखपुर में रहते हुए ही उन्होंने अपनी पहली रचना लिखी. यह रचना एक अविवाहित मामा से सम्बंधित थी जिसका प्रेम एक छोटी जाति की स्त्री से हो गया था. वास्तव में कहानी के मामा कोई और नहीं प्रेमचंद के अपने मामा थे, जो प्रेमचंद को उपन्यासों पर समय बर्बाद करने के लिए निरन्तर डांटते रहते थे. मामा से बदला लेने के लिए ही प्रेमचंद ने उनकी प्रेम-कहानी को रचना में उतारा. हालांकि प्रेमचंद की यह प्रथम रचना उपलब्ध नहीं है, क्योंकि उनके मामा ने क्रुद्ध होकर पांडुलिपि को अग्नि को समर्पित कर दिया था.

प्रेमचंद बचपन से ही काफी खुद्दार रहे. 1920 का दौर... गाँधी जी के रूप में इस देश ने एक ऐसा नेतृत्व पा लिया था, जो सत्य के आग्रह पर जोर देकर स्वतन्त्रता हासिल करना चाहता था। ऐसे ही समय में गोरखपुर में एक अंग्रेज स्कूल इंस्पेक्टर जब जीप से गुजर रहा था तो अकस्मात एक घर के सामने आराम कुर्सी पर लेटे, अखबार पढ़ रहे एक अध्यापक को देखकर जीप रूकवा ली और बडे़ रौब से अपने अर्दली से उस अध्यापक को बुलाने को कहा । पास आने पर उसी रौब से उसने पूछा-‘‘तुम बडे़ मगरूर हो। तुम्हारा अफसर तुम्हारे दरवाजे के सामने से निकल जाता है और तुम उसे सलाम भी नहीं करते।’’ उस अध्यापक ने जवाब दिया-‘‘मैं जब स्कूल में रहता हूँ तब मैं नौकर हूँ, बाद में अपने घर का बादशाह हूँ।’’अपने घर का बादशाह यह शख्सियत कोई और नहीं, वरन् उपन्यास सम्राट प्रेमचंद थे, जो उस समय गोरखपुर में गवर्नमेन्ट नार्मल स्कूल में सहायक अध्यापक के पद पर कार्यरत थे।

प्रेमचंद बहुमुखी प्रतिभा संपन्न साहित्यकार थे. उनकी रचनाओं में तत्कालीन इतिहास की झलक साफ दिखाई देती है. यद्यपि प्रेमचंद के कालखण्ड में भारत कई प्रकार की प्रथाओं और रिवाजों, जो समाज को छोटे-बड़े और ऊंच-नीच जैसे वर्गों में विभाजित करती है, से परिपूर्ण था इसीलिए उनकी रचनाओं में भी इनकी उपस्थिति प्रमुख रूप से शामिल होती है. प्रेमचंद का बचपन बेहद गरीबी और दयनीय हालातों में बीता. मां का चल बसना और सौतेली मां का बुरा व्यवहार उनके मन में बैठ गए थे. वह भावनाओं और पैसे के महत्व को समझते थे. इसीलिए कहीं ना कहीं उनकी रचनाएं इन्हीं मानवीय भावनाओं को आधार मे रखकर लिखे जाते थे. उन्होंने अपनी रचनाओं में जन साधारण की भावनाओं, परिस्थितियों और उनकी समस्याओं का मार्मिक चित्रण किया था. उनकी कृतियाँ भारत के सर्वाधिक विशाल और विस्तृत वर्ग की कृतियाँ हैं. इसके अलावा प्रेमचंद ने लियो टॉल्सटॉय जैसे प्रसिद्ध रचनाकारों के कृतियों का अनुवाद भी किया जो काफी लोकप्रिय रहा.
प्रेमचंद जी के पिता अजायब राय डाक-कर्मचारी थे, अत: प्रेमचंद जी अपने ही परिवार के हुए।आज उनकी जयंती पर शत-शत नमन। डाक-परिवार अपने ऐसे सपूतों पर गर्व करता है व उनका पुनीत स्मरण करता है।प्रेमचंद की स्मृति में भारतीय डाक विभाग की ओर से 31 जुलाई, 1980 को उनकी जन्मशती के अवसर पर 30 पैसे मूल्य का एक डाक टिकट भी जारी किया गया !!

(प्रेमचंद जी पर मेरा विस्तृत आलेख साहित्याशिल्पी पर पढ़ सकते हैं)

Thursday, July 26, 2012

Postal department releases four stamps on Olympic Games

Department of Posts, India has issued a set of four commemorative postage stamps and a souvenir sheet for the London Olympic Games starting from July 27.

Talking to TOI, Krishna Kumar Yadav, Director Postal Services, Allahabad said "two postage stamps are available in Rs. 5/- denomination and two are of Rs. 20". He added that the printed stamps in the number 4 lacs each have the portrayal of sportsmen engaged in Volleyball, Rowing, Sailing and badminton.

Four lakh souvenir sheets are also issued in 'Wet Offset' printing process by Indian Security Press, Nasik. Yadav also maintained that the information brochure released with postage stamps has a detailed report in respect of London Olympic Games.

The London Olympic commencing on July 27 with the theme slogan 'Inspite a Generation' are a much awaited event for the sports enthusiasts across the globe. The slogan reflects one of London's key Olympic legacy pledges which is 'to inspire a generation of young people to take part in local volunteering, cultural and physical activity.

Director also informed that these stamps are available in philatelic bureau, Allahabad Head Post Office for sale.

There was a craze among philatelist and youth to purchase these stamps at first day of release.

Courtesy : Times of India

Wednesday, July 25, 2012

ओलम्पिक का क्रेज : भारतीय डाक विभाग ने जारी किए 4 डाक टिकट

भारतीय डाक विभाग ने लंदन में 27, जुलाई 2012 से शुरु होने वाले ओलम्पिक खेल के मद्देनजर 25, जुलाई 2012 को 4 डाक टिकट जारी किये। इनमें से 2 डाक टिकट 5/- रू0 मूल्य वर्ग के व अन्य 2 डाक टिकट 20/- रू0 मूल्य वर्ग में उपलब्ध हैं। चार-चार लाख की संख्या में छपे इन डाक टिकटों पर वालीबाल, रोविंग, सेलिंग एवं बैडमिन्टन खिलाडि़यों का सुन्दर चित्रण किया गया है। इण्डियन सिक्योरिटी प्रेस, नासिक द्वारा वेट आॅफसेट रूप में मुद्रित इन डाक टिकटों के साथ चार लाख स्मारिका शीट भी जारी की गयी हैं।

इन डाक टिकटों के साथ जारी सूचना विवरणिका में लदंन ओलम्पिक खेलों के बारे में विस्तृत जानकारी दी गयी है। गौरतलब है कि ’इंस्पायर ए जनरेशन’ के नारे के साथ 27 जुलाई, 2012 को शुरू होने वाले लंदन ओलम्पिक खेलों का पूरे विश्व के खेल प्रेमियों को बेसब्री से इंतजार है। इस नारे में लंदन की ओलम्पिक विरासत के प्रमुख नारों में से एक की झलक मिलती है, जो इस प्रकार है ’युवा पीढ़ी को स्थानीय स्वयंसेवा, सांस्कृतिक एवं शारीरिक कार्याकलापों में भाग लेने के लिए प्रेरित करना।’

ये डाक टिकट सभी फिलेटिलिक ब्यूरो में बिक्री के लिए उपलब्ध हैं। पहले दिन ही इन डाक टिकटों के लिए फिलेटलिस्ट एवं युवाओं में काफी क्रेज देखा गया।

Tuesday, July 24, 2012

Raksha Bandhan celebrations: Postal Dept. comes up with special rakhi envelopes

For the safe and sure delivery of 'rakhis', the postal department has introduced special tamper proof and waterproof 'rakhi' envelopes. These envelopes are available at the post offices across the country.

Director, postal services, Allahabad Region, Krishna Kumar Yadav said since Rakshabandhan is celebrated during monsoon season, when the weather is very humid, and paper envelopes get moist, these specially designed rakhi envelopes offer a better option.

These rakhi envelopes are offered in dimension of 11 cm x 22 cm these envelopes are priced at Rs. 7/- per envelop excluding Postal charges.

These designer envelopes are available in six varieties.

Special feature of these envelopes is "Peal and Seal" mechanism which do not require use of gums or adhesives and are easy to use and dispose off.

Yadav said that special arrangements have been made at all Head Post Offices of Allahabad Region including Allahabad Head Post Office and Allahabad Kutchery Head Post Office for safe and time bound delivery of Rakhi Mail.Besides this Special Post Boxes are arranged in the premises of these offices for the purpose of sending Rakhis and which are not mingled with other mails. Once sorted out they are dispatched to their respective destinations to ensure timely delivery.

Apart from this separate boxes are made available for metro cities like Delhi, Kolkata, Chennai and Mumbai to save time in sorting and speed up delivery on time. He further told that if the mail volume increases, additional arrangements will be made for delivery on time.


Courtesy : Times of India

Saturday, July 21, 2012

डाकघरों से रक्षाबंधन के पर्व पर डिजाइनदार राखी लिफाफों की ब्रिकी


राखी का त्यौहार भारतीय संस्कृति का एक प्रमुख त्यौहार है जो प्रत्येक वर्ष श्रावण मास में मनाया जाता है। इस वर्ष भाई-बहन के प्यार का प्रतीक यह पर्व 2 अगस्त को पड़ रहा है। आज इस आधुनिकता एवम विज्ञान के दौर में संसार मे सब कुछ हाईटेक हो गया है। वहीं हमारे त्यौहार भी हाईटेक हो गए है। इन्टरनेट व एस0एम0एस0 के माध्यम से आप किसी को कहीं भी राखी की बधाई दे सकते है। किन्तु जो प्यार, स्नेह, आत्मीयता एवं अपनेपन का भाव बहन द्वारा भाई की कलाई पर राखी बाँधने पर है वो इस हाईटेक राखी में नही है। इस सम्बन्ध में हिन्दी फिल्म का एक मशहूर गाना याद आता है-‘‘बहना ने भाई की कलाई पर प्यार बाँधा है, कच्चे धागे से सारा संसार बाँधा है।‘‘ इन पंक्तियों में छुपा भाव इस पर्व की सार्थकता में चार चाँद लगा देता है। डाक विभाग इन भावनाओं को हर साल आपके दरवाजे तक पहुँचाता है, सो इस साल भी तैयार है।


बहनों द्वारा राखियों को सुरक्षित एवं सुगमता से भेजने के लिए डाक विभाग ने छ: तरह के लिफाफे जारी किये गये हैं। 11 सेमी X 22 सेमी आकार के इन राखी लिफाफों का मूल्य रुपया 7/- है जो डाक शुल्क के अतिरिक्त है। ये लिफाफे पूर्णतया वाटर प्रूफ, मजबूत, पारगमन के दौरान न फटने, रंगबिरंगे एवं राखी की विभिन्न डिजाइनों से भरपूर है। राखी लिफाफों को चिपकाने हेतु इनमें विशेष स्टिकर का प्रयोग किया गया है जिससे लेई या गम की आवश्यकता नहीं होगी। इसके चलते जहाँ राखी प्राप्त करने वाले को प्रसन्नता होगी, वहीं इनकी छंटाई में भी आसानी होगी। यही नहीं राखी डाक को सामान्य डाक से अलग रखा जा रहा है। लोगों की सुविधा के लिए डाकघरों में अलग से डलिया लगाई गयी हैं, जिन पर स्थान का नाम लिखा है। पोस्ट की गई राखियों को उसी दिन विशेष बैग द्वारा सीधे गंतव्य स्थानों को प्रेषित कर दिया जा रहा है, ताकि उनके वितरण में किसी भी प्रकार की देरी न हो। ऐसे सभी भाई जो अपने घर से दूर है तथा देश की सीमा के सजग प्रहरी हमारे जवान जो बहुत ही दुर्गम परिस्थियो मे भी देश की सुरक्षा मे लगे है उन सभी की कलाई पर बँधने वाली राखी को सुरक्षित भेजे जाने के लिए भी डाक विभाग ने विशेष प्रबन्ध किये हैं। तो आप भी रक्षाबन्धन का इन्तजार कीजिए और इन्तजार कीजिए डाकिया बाबू का जो आपकी राखी को आप तक पहुँचाना सुनिश्चित करेंगे और भाई-बहन के इस प्यार भरे दिवस के गवाह बनेंगे।

Thursday, July 19, 2012

कहाँ गई वो चिट्ठियाँ



कहाँ गये वो दिन, जब आती थी चिट्ठियाँ
दुख-सुख का पैगाम, लाती थी चिट्ठियाँ।
दिल से लिखी इबारत, दिल में उतर जाती थी,
लिखने वाले की यादें, तरोताजा कर जाती थी चिट्ठियाँ।
पढ़ते-पढ़ते लिखने वाले की, तस्वीर उभर आती थी,
जब हाल-ए-दिल सुनाकर, बतियाती थी चिट्ठियाँ।
आँसू से लिखी चिट्ठियाँ, नयन डबडबाती थी,
भाव-विहवल कर ऑंखें, बरसाती थी चिट्ठियाँ।
चिट्ठी में लिख हर बात, दिल को छू जाती थीं,
दिल के तार हिलाती, कागज भिगों जाती थी चिट्ठियाँ।
गाँॅव का हाल सुनाकर, गाँव की याद कराती थी
अम्मा-बाबुजी की दुआओ, आशीषों से सहलाती थी चिट्ठियाँ।
खैर-खबर सुनाती नाचती-नचाती, हर्षाती थी,
बावला बनाती थी जब, हाथ में आती थी चिट्ठियाँ।
खुशियो की सौगात, प्यार की बरसात बन जाती थी,
भावनाओं के सागर में, गोते लगाती थी चिट्ठियाँ।
सब्र का बाँध तोड़कर बेकरारों सा बेचैन बनाती थी,
डाकिया का इंतजार करवाती, राह तकवाती थी चिट्ठियाँ।
जिन्हें पढ़ते-पढ़ते हम, खो जाते थे सीने से लगा,
सो जाते थे, ख्यालो-ख्वाबों में डूबाती थी चिट्ठियाँ ।
जिन्हें सहेज रखते थे, मीठी यादों की की तरह-दीवानों को तरह,
नायाब खजानों की तरह, जब संदूक में मिल जाती थी चिट्ठियाँ ।
अपनेपन का अहसास कराती हिचकियों का
राज बताती थी, तकिये के नीचे मिल जाती थी चिट्ठियाँ।
संदेशों का पैगाम सुनाती, बहुत सुकून पहुँचाती थी
जब अम्बा माथे से लगा, सीने से लगाती थी चिट्ठियाँ।
कहाँ गई वे अनमोल चिट्ठियाँ, जो जीने का सहारा बन जाती थी,
प्यार-दुलार जताती, हर्षो-उल्लास, उमंग से भर जाती चिट्ठियाँ।

-महेंद्र कुमार सिरोठिया, 119, मानस भवन,11, आर.एन.टी.मार्ग इंदौर

Friday, July 13, 2012

Postmen help determine consumer price index

The postmen in rural areas are also collecting the prices of different food products and consumer items. This is being done under an agreement signed between the Central Statistical Organisation (CSO) and the postal department to prepare consumer price index (CPI) of the rural areas, said director, postal services, Allahabad region, Krishna Kumar Yadav.

He said in rural areas, two different kinds of surveys are being conducted by the postal employees. One involves the cost survey of rice, wheat, sugar and kerosene provided to below poverty line (BPL) card holders or other customers under public distribution system (PDS).

The second is the survey of articles being sold in the selected rural areas. Yadav added that around 248 products like pulses, various milk products, oil, meat, fish, rice, wheat, cereals, corn, vegetables, fruits, sugar, honey, spices, tea, coffee, tobacco, beetle nut, fuel, shoes, cosmetics, clothes, bed sheets, mosquito net, medicines, tutor fee, sports material, phone charges, stationary, and various other domestic products and services are covered in the survey.

Giving the reasons for the involvement of rural areas in the index list, Yadav said: "CPI is a medium to find the rate of inflation. Earlier, inflation was calculated on the basis of the cost price of the products sold in the urban areas. However, around 70 per cent of the population lives in rural areas and markets are flourishing in these areas as well. So, there was a need to include the cost price of the articles sold in the rural market." Survey is done every month and finally the data is uploaded on the CSO website by the postal department.

The data collection work is going in 20 selected post offices in Allahabad region. Some of them are Sewaith (Phaphamau SO), Lawayan Kalan Uparhar (TSI, SO), Kokhraj Uperhar (Bharwari SO) and Panara Gopalpur (Sarai Akil SO) in Allahabad Division, in Ghazipur (Chhawani Line SO) Chhawani Vise, (Zamania SO), Nariyaon Urf Umarganj, in Mirzapur (Kachhawa SO) Mahamalpur,

Courtesy : Times of India

Thursday, July 12, 2012

आटा, दाल और चीनी का भाव भी रख रहा डाकिया

चिट्ठी, मनीआर्डर के अलावा डाकियों ने अब दाल, चावल, तेल, घी, चीनी और दवाओं समेत करीब ढाई सौ वस्तुओं के भाव की जानकारी करने का काम भी शुरू कर दिया है। ग्रामीण इलाकों से डाकिया द्वारा संकलित इस जानकारी के आधार पर ही उपभोक्ता मूल्य सूचकांक बन रहा है।

डाक विभाग अब राष्ट्रीय स्तर पर सटीक वास्तविक मूल्य सूचकांक तैयार करने में भी सहयोग कर रहा है। केंद्रीय सांख्यिकी संगठन ने इस कार्य के लिए डाक विभाग के देशव्यापी नेटवर्क का इस्तेमाल करने के लिए एक अनुबंध किया है। इसके तहत ग्रामीण इलाकों में डाटा एकत्रीकरण शुरू किया गया है।

इस संबंध में निदेशक डाक सेवाएं, कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के तहत ग्रामीण क्षेत्र में डाक कर्मियों के माध्यम से दो तरह के सर्वेक्षण कराए जा रहे हैं। पहला, जनवितरण प्रणाली के तहत प्रदान किए जाने वाले चावल, गेहूं, आटा, चीनी और केरोसिन को बीपीएल व अंत्योदय ग्राहकों को दिए जाने वाले मूल्यों का सर्वेक्षण। दूसरा, गांवों में लगने वाली बाजारों व दुकानों पर बिकने वाले सामानों के मूल्यों का सर्वेक्षण। इसमें करीब 248 वस्तुएं शामिल हैं। पूर्व में देश में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक शहर की दुकानों पर बिकने वाले रोजमर्रा के सामानों के आधार पर तैयार किया जाता था। अब गांवों के बाजारों में बिकने वाली रोजमर्रा की वस्तुओं के मूल्यों के बारे में जानकारी एकत्र करने का काम डाकिया कर रहे। इनमें इलाहाबाद के सेवइथ (फाफामऊ), लवायनकला उपरहार (टीएसएल नैनी), कोखराज उपरहार (भरवारी), पनारा गोपालपुर (सरायअकिल) समेत इलाहाबाद परिश्रेत्र में चयनित 20 डाकघरों के माध्यम से यह सर्वेक्षण कराया जा रहा है। डाक कर्मियों द्वारा एकत्रित 31 पृष्ठ के आंकड़ों को केंद्रीय सांख्यिकी संगठन की वेबसाइट पर डाक विभाग द्वारा फीड किया जा रहा है।


साभार : जागरण और प्रेसनोट

Thursday, July 5, 2012

Now, get 'prasad' of Vishwanath & Mahakal temple through post

With the start of holy month of Shrawan on Wednesday, the Indian Postal Service department too has come up with an auspicious announcement for the Shiva devotees. The department has entered into an agreement with the Kashi Vishwanath temple of Varanasi and Mahakaleshwar temple of Ujjain whereby it will deliver the 'prasad' from these two temples to the devotees via post.

Director postal services, Allahabad region, Krishna Kumar Yadav said, "Following an agreement between the Indian Postal Services and the Kashi Vishwanath temple trust, the Prasad of Kashi Vishwanath temple can be provided to any devotee through post. The individual will have to send a money order of Rs 60 in the name of Postal Superintendent, Varanasi (East) and in return the postal department would send a packet containing 'bhabhuti' (ashes), Rudraksh, a laminated photo of Lord Shiva and Shiv Chalisa to the sender, courtesy, the authorities of the temple's trust".

Yadav said devotees can also get 'prasad' of Mahakaleshwar Jyotirlinga temple of Ujjain. For getting the Prasad, an individual will have to send a money order of Rs 151 in the name of Manager Shri Mahakaleshwar temple management committee, Ujjain. The temple authorities, in return, would send the prasad through post. The prasad would comprise 200 grams of dry fruits, 200 grams of ladoo, 'bhabhuti' and the photo of Mahakaleshwar.

"The Prasad would be send in a water proof envelope so that it does not get damaged or spoil during its transportation, from the temple to the hands of devotees", said Yadav.

Courtesy : Times of India

Wednesday, July 4, 2012

डाक से घर बैठे पायें काशी विश्वनाथ और महाकाल का प्रसाद

सावन के मौसम में शिव की आराधना के लिए तमाम तैयारियां हो रही हैं. कहीं उनका दरबार सज रहा है तो कहीं आनलाइन आरती का प्रबंध किया जा रहा है. पर अब देश के किसी भी कोने में बैठे शिवभक्त काशी विश्वनाथ मंदिर, बनारस और महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन का प्रसाद भी घर बैठे ग्रहण कर सकेंगें. डाक विभाग यह सौगात लेकर आया है.

यह जानकारी देते हुए इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि डाक विभाग और काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट के बीच हुए एक एग्रीमेण्ट के तहत काशी विश्वनाथ मंदिर का प्रसाद डाक द्वारा भी लोगों को उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके तहत साठ रूपये का मनीआर्डर प्रवर डाक अधीक्षक, बनारस (पूर्वी) के नाम भेजना होता है और बदले में वहाँ से काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट के सौजन्य से मंदिर की भभूति, रूद्राक्ष, भगवान शिव की लेमिनेटेड फोटो और शिव चालीसा प्रेषक के पास प्रसाद रूप में भेज दिया जाता है।

श्री यादव ने बताया कि काशी विश्वनाथ मंदिर के अलावा उज्जैन के प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर का प्रसाद भी डाक द्वारा मंगाया जा सकता है। इसके लिए प्रशासक, श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबन्धन कमेटी, उज्जैन को 151 रूपये का मनीआर्डर करना पड़ेगा और इसके बदले में वहाँ से स्पीड पोस्ट द्वारा प्रसाद भेज दिया जाता है। इस प्रसाद में 200 ग्राम ड्राई फ्रूट, 200 ग्राम लड्डू, भभूति और भगवान श्री महाकालेश्वर जी का चित्र शामिल है। निदेशक श्री यादव ने बताया कि इस प्रसाद को प्रेषक के पास एक वाटर प्रूफ लिफाफे में स्पीड पोस्ट द्वारा भेजा जाता है, ताकि पारगमन में यह सुरक्षित और शुद्ध बना रहे। (साभार : हिंदुस्तान और दैनिक जागरण अख़बार में प्रकाशित समाचार)

Monday, July 2, 2012

डाक प्रशिक्षण केन्द्र, वड़ोदरा के स्वर्ण जयंती अवसर पर विशेष आवरण (Special Cover) का विमोचन

गुजरात, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश डाक परिमंडलों के कर्मचारियों की प्रशिक्षण सम्बन्धी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए डाक प्रशिक्षण केन्द्र, वड़ोदरा की स्थापना दिनांक ०१.०७.१९६२ को मानसिक अस्पताल परिसर, कारेली बाग़, वड़ोदरा में की गयी थी बाद में १९८५ में डाक प्रशिक्षण केन्द्र को अपने वर्तमान परिसर हवाई अड्डे के सामने, हरनी रोड, वडोदरा में स्थानांतरित किया गया इस केंद्र में डाक विभाग के समस्त कर्मचारियों और अधिकारीयों के प्रारंभिक व् सेवान्तगर्त आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कीये जाते है इस प्रशिक्षण केंद्र शुरू में भारतीय डाक की परंपरागत सेवाओं की संचालन प्रक्रियाओं पर प्रशिक्षण प्रदान दिया जाता था और अब इसके अलावा भारतीय डाक की प्रीमियम सेवाओं और सॉफ्टवेयर के संचालन की प्रक्रिया पर आधुनिक उपकरणों का उपयोग करके प्रशिक्षण दिया जाता है इस केंद्र में प्रशिक्षण कार्यक्रमों को अभिकल्पित व् आयोजित करने के सुविधा है तथा यह केंद्र की वार्षिक १००००० व्यक्ति दिन प्रशिक्षण नियंत्रित करने के क्षमता है

डाक प्रशिक्षण केन्द्र, वड़ोदरा के स्वर्ण जयंती समारोह पर एक विशेष आवरण (Special Cover) का विमोचन ०१.०७.२०१२ को डाक प्रशिक्षण केन्द्र, वड़ोदरा के पद्मिनी सभा गृह में आयोजित समारोह में किया गया श्री कमलेश्वर प्रसाद, सदस्य (एचआरडी), डाक सेवा बोर्ड, नई दिल्ली ने यह विशेष आवरण जारी किया इसी अवसर पर डाक प्रशिक्षण केन्द्र ने डाक संचालन और प्रबंधन पर एक त्रैमासिक पत्रिका का प्रकाशन भी शुरू किया है, इस पत्रिका का प्रथम अंक भी इस अवसर पर जारी किया गया

इस अवसर पर श्री गणेश वी. सावलेश्वरकर, निदेशक, डाक प्रशिक्षण केन्द्र, वडोदरा ने डाक प्रशिक्षण केन्द्र के इतिहास के बारे में जानकारी दी

श्री ए.के. ए. जोशी, पीएमजी, विजयवाड़ा और पूर्व निदेशक पीटीसी, वडोदरा, श्रीमती वी. टी. शेठ, सेवानिवृत्त मुख्य महा डाकपाल (CPMG), गुजरात सर्किल और पूर्व निदेशक, पीटीसी, वडोदरा ने भी समारोह में भाग लिया इस अवसर पर उपस्थित अन्य गणमान्य व्यक्तियों में पीएमजी, वडोदरा, पीएमजी, राजकोट, डीपीएस, वडोदरा और डीपीएस, अहमदाबाद भी सामिल थे

साभार : प्रशांत पंड्या