Friday, December 28, 2012

भारतीय मुद्रा परिषद् के शताब्दी वर्ष पर डाक विभाग ने जारी किया विशेष आवरण

मुद्रा और डाक-टिकट दोनों ही सभ्यता व संस्कृति के संवाहक हैं। इनके माध्यम से जहाँ तत्कालीन इतिहास व अर्थव्यवस्था की जानकारी मिलती है, वहीं ये विभिन्न पीढि़यों में संचारित होकर विभिन्न काल खंडों के मध्य पुल का भी कार्य करते हैं। उक्त उदगार इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव ने भारतीय मुद्रा परिषद के शताब्दी वर्ष पर ’विशेष आवरण’ जारी करते हुए व्यक्त किये ।
 
बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी के प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग में 28 दिसम्बर 2012 को आयोजित समारोह में डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने सिक्कों एवं डाक-टिकटों को एकत्र करने के अपने अनुभवों को समझा करते हुए इनके ऐतिहासिक व सांस्कृतिक पहलुओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने प्राचीन इतिहास के विनिर्माण में मुद्राओं का अध्ययन महत्वपूर्ण बताया और डाक टिकटों के विशिष्ट अवारण के सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक महत्व का ब्यौरा भी प्रस्तुत किया। श्री यादव ने युवा पीढ़ी को भी इनसे जोड़ने की बात कही।
 
भारतीय मुद्रा परिषद के शताब्दी वर्ष समारोह के मुख्य अतिथि रूप में बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के कुलपति डा. लालजी सिंह ने जहाँ भारतीय डाक विभाग द्वारा परिषद पर विशेष आवरण जारी करने को महत्वपूर्ण कदम बताया वहीं संग्रहालय द्वारा प्रकाशित जर्नलस को ज्ञान में बढ़ोतरी के लिए सहायक बताया। डा0 सिंह ने कहा कि मुद्राओं के माध्यम से इतिहास का ज्ञान, विज्ञान को पुष्ट करने के लिए आधार मुहैया कराता है एवं इसका सुव्यवस्थित अध्ययन कर लक्ष्य को पाया जाता है।
 
भारतीय मुद्रा परिषद के अध्यक्ष प्रो. पारसनाथ सिंह ने अतिथियों का स्वागत करते हुये अपने सम्बोधन में मुद्रा परिषद की ऐतिहासिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भारतीय मुद्रा परिषद की स्थापना 28 दिसम्बर 1910 को इलाहाबाद में हुई थी। कालांतर में बी एच यू के कुलपति डा0 सर्वपल्ली राधाकृष्णन के प्रयास से इसे 1961 में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में स्थापित किया गया। 1966 में काशी नरेश विभूति नारायण सिंह ने भवन का शिलान्यास किया था।
 
इस अवसर पर कुलपति डा. लालजी सिंह और निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव ने मुद्रा परिषद की शोध पत्रिका का विमोचन भी किया। गौरतलब है कि अब तक पत्रिका के 73 अंक प्रकाशित हो चुके हैं और 2500 देशी-विदेशी मुद्राशास्त्री इसके आजीवन सदस्य है।
 
कार्यक्रम का आरम्भ मदन मोहन मालवीय की आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण से हुआ। आभार ज्ञापन भारतीय मुद्रा परिषद के मुख्य सचिव प्रो. मोहम्मद नसीम ने किया। कार्यक्रम में प्रवर डाक अधीक्षक श्री शिव सहाय मिश्र, सहायक डाक अधीक्षक प्रभाकर त्रिपाठी, श्री बी के शर्मा, सीनियर पोस्टमास्टर श्री एस एम राय सहित बीएचयू के प्रशासनिक अधिकारी, प्रोफेसर, मुद्राशास्त्री एवं शोध छात्र उपस्थित थे।
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