Monday, September 29, 2014

हिंदी को सिर्फ पखवाड़ा नहीं, रोजमर्रा से जोड़कर देखने की जरूरत - डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव

हिंदी हमारे रोजमर्रा की भाषा है और इसे सिर्फ पखवाड़ा से जोड़कर देखने की जरूरत नहीं है। सरकारी कार्य में हिंदी को बढ़ावा देने के लिए दिल से कार्य करें ताकि हिंदी को जो राष्ट्रभाषा का दर्जा दिया गया है वह सही मायने में प्राप्त हो सकें। उक्त उद्गार हिंदी पखवाड़ा के समापन अवसर पर 29 सितंबर को सिविल लाइंस स्थित पोस्टमास्टर जनरल, इलाहाबाद परिक्षेत्र कार्यालय में  निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव ने व्यक्त किये।  श्री यादव ने कहा कि हिन्दी भारतीय संस्कृति के मूल तत्वों की अभिव्यक्ति का माध्यम होने के साथ-साथ भारत के संविधान में वर्णित भावनात्मक एकता को सुदृढ़ करने का जरिया भी है। यह भाषा देश की एकता और अखंडता का बढ़ावा देने में भी सहायक रही है। हिंदी को यदि राजभाषा का संवैधानिक दर्जा दिया गया है तो उसके पीछे इसके समृद्ध ऐतिहासिक विरासत एवं स्वत्रतंत्रता आदोलन में प्रखर भूमिका रही है। जरूरत इस बात की है कि हम इसके प्रचार-प्रसार और विकास के क्रम में आयोजनों से परे अपनी दैनिक दिनचर्या से भी जोड़ें।


निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव ने इस अवसर पर हिंदी पखवाड़ा के पोस्टमास्टर जनरल कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम के विजेताओं को सम्मानित भी किया। निबंध प्रतियोगिता हेतु विक्रम सिंह, अजय प्रकाश दिवाकर, आर. के. श्रीवास्तव, हिन्दी टंकण हेतु विनीत टन्डन, राजेन्द्र प्रसाद यादव, रत्नेश कुमार तिवारी एवं स्लोगन प्रतियोगिता हेतु राम बहादुर, इजलेश कुमार, अशोक कुमार पांडेय को क्रमशः प्रथम, द्वितीय व तृतीय पुरस्कार से सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन श्री राम शुक्ला ने किया। कार्यक्रम के आरंभ में इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव का सहायक निदेशक श्री मधुसूदन प्रसाद मिश्र ने स्वागत किया और हिंदी पखवाड़ा के दौरान आयोजित कार्यक्रमों की रूपरेखा पर प्रकाश डाला। 

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