Monday, October 13, 2014

सभ्यता, संस्कृति और विरासत से अवगत कराते हैं डाक टिकट - कृष्ण कुमार यादव


डाक विभाग द्वारा राष्ट्रीय डाक सप्ताह के तहत 13 अक्टूबर 2014 को फिलेटली दिवस के रूप में मनाया गया। इसका उद्देश्य इसका उद्देश्य डाक-टिकट संग्रह के प्रति लोगों में अभिरूचि विकसित करना और डाक टिकटों के माध्यम से युवा पीढी को डाक सेवाओं के इतिहास से जोड़ना था। इस अवसर पर स्कूली बच्चों हेतु क्विज, स्वच्छ भारत पर डाक टिकट डिजाइन प्रतियोगिता एवं फिलेटलिक वर्कशाप का भी आयोजन किया गया।

इस अवसर पर अपने संबोधन में इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि हर डाक टिकट की अपनी एक कहानी है और इस कहानी को वर्तमान पीढ़ी के साथ जोड़ने की जरुरत है। उन्होंने डाक टिकटों को संवेदना का संवाहक बताया, जो पत्र के माध्यम से भावनाओं को एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक पहुंचाते हैं। उन्होंने कहा कि सामान्यतः डाक टिकट एक छोटा सा कागज का टुकड़ा दिखता है, पर इसका महत्व और कीमत दोनों ही इससे काफी ज्यादा है। श्री यादव ने कहा कि डाक टिकट वास्तव में एक नन्हा राजदूत है, जो विभिन्न देशों का भ्रमण करता है एवम् उन्हें अपनी सभ्यता, संस्कृति और विरासत से अवगत कराता है।

डाक-टिकटों के संग्रह की दिलचस्प कहानी के बारे में बताते हुए निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव कि उन्नीसवीं शताब्दी के मध्य में यूरोप में एक अंग्रेज महिला को अपने श्रृंगार-कक्ष की दीवारों को डाक टिकटों से सजाने की सूझी और इस हेतु उसने सोलह हजार डाक-टिकट परिचितों से एकत्र किए और शेष हेतु सन् 1841 में ‘टाइम्स आफ लंदन’ समाचार पत्र में विज्ञापन देकर पाठकों से इस्तेमाल किए जा चुके डाक टिकटों को भेजने की प्रार्थना की। इसके बाद धीमे-धीमे पूरे विश्व में डाक-टिकटों का संग्रह एक शौक के रूप में परवान चढ़ता गया। आज भी लाखों लोग भारत में डाक टिकटों का संग्रह करते हैं।

डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने डाक टिकटों से युवाओं को जोडते हुए कहा कि डाक टिकटों के द्वारा ज्ञान भी अर्जित किया जा सकता है। यह हमारी शिक्षा प्रणाली को और भी मजबूत बना सकते हैं। लोगों को घर बैठे डाक-टिकटों के संग्रह से जोडने हेतु डाक विभाग ने फिलेटलिक डिपाजिट एकाउण्ट योजना भी आरम्भ की है, जिसके तहत न्यूनतम 200 रूपये से फिलेटलिक डिपाजिट एकाउण्ट‘‘ खोला जा सकता है और हर माह घर बैठे डाक टिकटें प्राप्त होती रहेंगी।  


कार्यक्रम में सीनियर फिलेटलिस्ट श्री अनिल रस्तोगी एवं डाॅ मनीषी बंसल ने छात्र-छात्राओं को डाक टिकट संग्रह की बारीकियों एवं लाभ के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इन दोनों को डाक निदेशक ने सम्मानित भी किया। इस दौरान बच्चों ने जहाँ फिलेटलिक ब्यूरो में तमाम नए-पुराने डाक टिकटों को देखकर आनंद लिया वही तमाम ने फिलेटलिक डिपाजिट खाते खोलकर इससे हमेशा के लिए भी अपने को जोड लिया।





डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कृत भी किया। इनमें क्विज प्रतियोगिता में हाॅली ट्रिनिटी स्कूल के पृथु शुक्ल को प्रथम, ज्वाला देवी विद्या मंदिर के योगेश सिंह को द्वितीय एवं रामानुजम पब्लिक स्कूल के मृत्युंजय मणि त्रिपाठी को तृतीय पुरस्कार प्राप्त हुआ। स्वच्छ भारत पर ’’डाक टिकट डिजाइन’’ प्रतियोगिता में जूनियर वर्ग में ज्वाला देवी विद्या मंदिर के ईशू सेठ व प्रखर खरे ने क्रमशः प्रथम व द्वितीय एवं सीनियर वर्ग में सेंट एंथनी गल्र्स कान्वेंट की  एलिस अंशु फिलिप (बाल श्री पुरस्कार विजेता) ने प्रथम,  श्रेया डे  ने द्वितीय तथा ज्वाला देवी विद्या मंदिर के आशीष कुमार यादव को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ।


कार्यक्रम में स्वागत श्री रहमतउल्लाह, प्रवर डाक अधीक्षक इलाहाबाद, आभार ज्ञापन श्री ओ.बी. सिंह, सीनियर पोस्टमास्टर एवं संचालन श्री ब्रजेश शर्मा, डाक निरीक्षक द्वारा किया गया।
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