Wednesday, November 5, 2008

भारतीय डाक: सदियों का सफरनामा

भारतीय डाक प्रणाली ने आम जनता को संचार का सबसे सस्ता और सुगम साधन सुलभ करा सामाजिक-आर्थिक विकास में अनूठी भूमिका निभाई है। बीती डेढ़ सदी में कई पड़ावों से गुजरती हुई, भारतीय डाक के बेमिसाल संस्था बन चुकी है। जाने-माने लेखक मुल्कराज आनंद ने डाक विभाग के शताब्दी वर्ष में वृहद आयामों को समेटे एक पुस्तक
‘‘ स्टोरी आफ द इंडियन पोस्ट आफिस‘‘ लिखी थी। इसके पश्चात डाक प्रणाली नित उन्नत और परिष्कृत स्वरूप में हमारे सामने आती गई। डाक विभाग के 150 वर्ष पूरा होने पर नेशनल बुक ट्रस्ट ने ‘‘ भारतीय डाक: सदियों का सफरनामा‘‘ नाम से एक पुस्तक प्रकाशित की, जिसके लेखक चर्चित फौजी पत्रकार अरविन्द कुमार सिंह। भारत जैसे विशाल और विविधता पूर्ण देश में सांस्कृतिक आदान-प्रदान, व्यापार, घरेलू अर्थव्यवस्था, सामाजिक एकीकरण को सहेजे डाक विभाग का विशाल तंत्र न केवल हर दरवाजे पर दस्तक लगाता है बल्कि इंटरनेट के इस युग में हाथ से लिखे गये शब्दों का भावनात्मक महत्व भी बरकरार रहता है। जिला डाक व्यवस्था, राजा महराजाओं की अनूठी डाक सेवा, हरकारा, कबूतर डाक सेवा, हवाई डाक सेवा, भारतीय सेना डाक सेवा, स्पीड पोस्ट सेवा के साथ-साथ बचत बैंक, मनीआर्डर, आर0एल0ओ0 जैसे तमाम पड़ाव इस पुस्तक में विवेचित हैं। भारत के सचार मंत्री, महानिदेशक की सूची के साथ-साथ भारतीय डाक प्रणाली की प्रमुख घटनाओं को एक नजर में प्रस्तुत करना इस पुस्तक को विशिष्टता देता है। 44 अध्यायों एवं 406 पृष्ठों में समाहित यह पुस्तक वाकई एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है जिसमें डाक सेवाओं के विभिन्न रंग दिखते हैं।
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