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Tuesday, November 14, 2017

डाक निदेशक केके यादव की पुत्री अक्षिता को सबसे कम उम्र में ”राष्ट्रीय बाल पुरस्कार” पाने का गौरव

बाल दिवस की बात हो तो उन बाल प्रतिभाओं का जिक्र  भी जरूरी हो जाता है, जिन्होंने कम उम्र में ही सफलता के नये कीर्तिमान रचे। भारत सरकार द्वारा हर साल 14 नवम्बर को विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट उपलब्धि हासिल करने वाले बच्चों को ’राष्ट्रीय बाल पुरस्कार’ प्रदान किये जाते हैं। चार वर्ष से पन्द्रह वर्ष की आयु-वर्ग के बच्चे इस पुरस्कार को प्राप्त करने के पात्र हैं। पर इसे सबसे कम उम्र में प्राप्त करने का गौरव जोधपुर में रह रही अक्षिता (पाखी) को प्राप्त है। वर्ष 2011 में मात्र 4 साल 8 माह की आयु में ही अक्षिता को  'कला’ और ’ब्लॉगिंग’ के लिए भारत सरकार  द्वारा बाल दिवस पर  ’राष्ट्रीय बाल पुरस्कार’ से  विज्ञान भवन  में नवाजा गया। अक्षिता ने इसे जहाँ सबसे कम उम्र में पाने का कीर्तिमान बनाया, वहीं ब्लॉगिंग के लिए भी भारत सरकार द्वारा राजकीय स्तर पर प्रथम सम्मान-पुरस्कार पाने का गौरव प्राप्त किया। यही नहीं, इससे पूर्व अक्षिता को नई दिल्ली में अप्रैल, 2011 में हुए अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन में उत्तराखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री डा. रमेश पोखरियाल ”निशंक” द्वारा ‘श्रेष्ठ नन्ही ब्लॉगर‘ के सम्मान से भी नवाजा जा चुका है।


 हैपी आवर्स  स्कूल, जोधपुर  में कक्षा 5  की छात्रा अक्षिता बड़ी होकर आई.ए.एस ऑफिसर बनने की तमन्ना रखती है।  उसके  पिता श्री कृष्ण कुमार यादव राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर के निदेशक डाक सेवाएं पद पर पदस्थ हैं व मम्मी श्रीमती आकांक्षा एक कालेज में प्रवक्ता रही हैं। दोनों ही जन चर्चित साहित्यकार व सक्रिय ब्लॉगरभी हैं।

 अक्षिता के पिता श्री कृष्ण कुमार यादव बताते हैं कि, अक्षिता को शुरू से ही ड्राइंग बनाना बहुत अच्छा लगता है। उसके बनाए चित्रों को सहेजने और अक्षिता की गतिविधियों को ब्लॉग के माध्यम से  लोगों के सामने प्रस्तुत करने के  विचारस्वरुप  24 जून 2009 को  “पाखी की दुनिया” (http://pakhi-akshita.blogspot.in/ ) नाम से अक्षिता का ब्लॉग अस्तित्व में आया। देखते ही देखते करीब एक लाख से अधिक हिन्दी ब्लॉगों में इस ब्लॉग की रेटिंग बढ़ती गई और आज इस ब्लॉग पर 460  से भी ज्यादा पोस्ट प्रकाशित हो चुकी हैं और 260  से ज्यादा लोग इसका अनुसरण करते हैं। इस ब्लॉग पर अकल्पनीय प्रतिक्रियाएं  प्राप्त हुईं और 100 से ज्यादा देशों में इसे देखा-पढ़ा जाता है। अक्षिता और उसका ब्लॉग ‘पाखी की दुनिया‘ फेसबुक (https://www.facebook.com/AkshitaaSingh/ ) पर भी उपलब्ध है, जहाँ 1883  लोग इसे पसंद करते हैं।

अक्षिता को देश-दुनिया में तमाम सम्मान भी प्राप्त हुए हैं। अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन, श्री लंका (25 मई 2015) में उसे ”परिकल्पना कनिष्ठ सार्क ब्लॉगर सम्मान” से सम्मानित किया जा चुका है। विभिन्न मंचों पर महिला एवं बाल विकास मंत्री, भारत सरकार, श्रीमती कृष्णा तीरथ, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री डा. रमेश पोखरियाल ”निशंक”, केंद्रीय हिंदी संस्थान के उपाध्यक्ष डा. अशोक चक्रधर, फिल्म अभिनेत्री शबाना आजमी, सांसद डिम्पल यादव और दबंग फेम म्यूजिक-कम्पोजर वाजिद खान भी इस नन्ही ब्लॉगर को सम्मानित कर चुके हैं।  

 21वीं सदी टेक्नालाजी की है। आज बच्चा कलम बाद में पकड़ता है, मोबाइल, टेलीवीजिन कम्प्यूटर व लैपटॉप पर हाथ पहले से ही फिराने लगता है। ऐसे में नन्ही प्रतिभा अक्षिता (पाखी) को देखकर यही कहा जा सकता है कि प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं, बशर्तें उसे अनुकूल वातावरण व परिवेश मिले। अक्षिता (पाखी) को श्रेष्ठ नन्ही ब्लॉगर और सबसे कम उम्र में राष्ट्रीय बाल पुरस्कार मिलना यह दर्शाता है कि बच्चों में आरंभ से ही सृजनात्मक-शक्ति निहित होती है। उसे इग्नोर करना या बड़ों से तुलना करने की बजाय यदि उसे बाल-मन के धरातल पर देखा जाय तो उसे पल्लवित-पुष्पित किया जा सकता है।







Monday, May 11, 2015

स्पीड पोस्ट फ़ास्ट है कूरियर कंपनियों से : कैग का अध्ययन

डाक विभाग को इसकी सेवाओं के लिए कठघरे में खड़ा करने वालों के सामने स्पीड पोस्ट ने उजली तस्वीर पेश की है। कैग (नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक) ने अपनी एक हालिया रपट में कहा है कि निजी कूरियर कंपनियों के मुकाबले स्पीड पोस्ट ने केवल समय से पहले माल डिलीवर किया है बल्कि इसका डिलीवरी प्रतिशत भी उनके मुकाबले काफी बेहतर है। कैग ने यह आकलन आठ सर्किल में एक अध्ययन के माध्यम से किया है।  निजी कूरियर कंपनी और डाक विभाग के स्पीड पोस्ट के बीच पत्र-माल डिलीवरी को लेकर किए गए इस अध्ययन में कैग ने गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, तमिलनाडु, दिल्ली, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश सर्किल को शामिल किया गया था। 

इस तरह किया गया अध्ययन 

 सभी डाक सर्किल में एक निश्चित संख्या में परीक्षण पत्र भेजे गए थे। इसमें चुनिंदा निजी कूरियर कंपनियों को शामिल किया गया था और उसी के आधार पर यह अध्ययन तैयार किया गया था। डाक विभाग के स्पीड पोस्ट की बात करें तो वर्ष 1986 में स्थापित इस सेवा की पहुंच अब देश के सभी बड़े स्थान तक है। डाक विभाग की कुल आय में करीब 10 प्रतिशत से अधिक का योगदान स्पीड पोस्ट से आता है। 

यह निकाले गए निष्कर्ष 

स्थानीय स्तर पर जहां पत्र-माल डिलीवरी में स्पीड पोस्ट का प्रतिशत 98 प्रतिशत था, वहीं कोरियर सेवा का प्रतिशत 93.55 प्रतिशत था। 

बड़े शहर के मामलों में डाक विभाग ने जहां डिलीवरी में 99.05 प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया तो कूरियर कंपनियों का प्रतिशत 92.17 प्रतिशत रहा। 

तहसील स्तर पर स्पीड पोस्ट की डिलीवरी का आंकड़ा 100 प्रतिशत रहा तो वहीं कूरियर कंपनियों ने 83.54 प्रतिशत डिलीवरी का आंकड़ा हासिल किया। 

सभी स्तर पर डिलीवरी की बात करें तो स्पीड पोस्ट का आंकड़ा जहां 98.94 प्रतिशत रहा तो वहीं कूरियर कंपनियों का डिलीवरी प्रतिशत 90.24 प्रतिशत रहा।

Sunday, November 9, 2014

Young litterateur and Director Postal Services KK Yadav to be given Dushyant Kumar Award


A renowned literary and cultural organization, 'Aagman' has selected the Director Postal Services, Allahabad Region and a young litterateur, Krishna Kumar Yadav , for this year's 'Dushyant Kumar Award'. It will be conferred on him on November 23 in Noida during its annual felicitation function. This information was provided by Pawan Jain, founder of 'Aagman'.

It is worthwhile to mention here that Apart from being a Senior officer in Government service, Mr. Krishna Kumar Yadav is active in the field of literature, writing, blogging, and social media and has published 07 books namely 'Abhilasha' (Poem Collection), 'Abhivyaktiyon ke bahane' and 'Anubhutiyan aur vimarsh' (Eassay collection), India Post: 150 Glorious Years,  'Krantiyagya : 1857-1947 ki gatha',  'Jungle me cricket' (Children Poetry) and recently published '16 ane 16 log'. His creative works are published in various magazines and journals issued in country and abroad, web magazines published on the internet and blogs. 

 Mr. Yadav has been felicitated by more than hundred awards and honorary degrees by different literary and social institutions including 'Awadh Award' by Mr. Akhilesh Yadav, Chief Minister of Uttar Pradesh, 'Sahitya Samman' by Mr. Keshari Nath Tripathi, Governor of West Bengal, Vigyan Parishad Centenary Award by Mr. Shekhar Dutt, Governor of Chhattisgarh, ‘Best Couple Blogger of the Decade’,   Honorary Doctorate by Vikramshila Hindi Vidyapeeth, Bhagalpur-Bihar,  ‘Dr Ambedker National Fellowship’ Award by Bhartiya Dalit Sahitya Akademi, New Delhi.


(Courtesy : The Pioneer, 7 November 2014)


(Courtesy : Hindustan Times, 7 November 2014)

Wednesday, October 22, 2014

दीपावली पर आशाओं के दीप जगमगाएँ

दीपावली सिर्फ घरों को जगमगाने वाला पर्व नहीं है बल्कि यह मानव हृदय को आलोकित करने वाला पर्व भी है। हमारी परम्परा एक तरफ दीपावली के दिन घरों को साफ-सुथरा कर गणेश-लक्ष्मी के रूप में सुख-समृद्धि का आह्वान करती है, वहीं रात के अंधियारे में आशाओं के दीप जगमगाते हैं तो निराशा के काले घने बादल स्वमेव छँटते जाते हैं। 

दीपावली जहाँ मन से विकार, कटुता, निराशा, अवसाद और अन्य नकारात्मक प्रवृत्तियों को बाहर निकालती है, वहीँ दीये की रोशनी तमाम कीट-पतंगों और गन्दगी को ख़त्म करती है। 

दीपावली एक सामाजिक त्यौहार है, इसके साथ कइयों की रोजी-रोटी जुडी हुई है। 'ज्योत से ज्योत जलाते चलो' की परम्परा में एक दीया हजारों दीयों को रोशन कर सकता है, पर झालर और बल्ब दूसरे झालरों और बल्बों को रोशन नहीं कर सकते।

 दीपावली सुख, स्वास्थ्य और सामाजिक सद्भाव का पर्व है। पर पटाखों के शोर-शराबे के बीच फैलता प्रदूषण और हानिकारक कीटों को आमंत्रित करती विदेशी झालरें और इन सब पर व्यय किये गए करोड़ों रूपये इस पवित्र त्यौहार के मूल भाव को ही ख़त्म करने पर तुले हैं। आतिशबाजी और पटाखों की आड़ में खर्च होने वाले करोड़ों रूपये किसी गरीब व्यक्ति को दो वक़्त की रोटी दे सकते हैं। विदेशी आतिशबाजी से दूर रहकर न केवल प्रदूषण से निजात पाया जा सकता है, बल्कि निज बंधुओं के जीवन में खुशियाँ भी भरी जा सकती है।


!! आप सभी को दीपावली पर्व पर सपरिवार शुभकामनाएँ !!

Sunday, August 10, 2014

जन्मदिन के बहाने ...

10 अगस्त को हमारा जन्मदिन है और रक्षाबंधन भी। इस शुभ दिन पर हमने खूब सारे पौधे लगाए। जब ये पौधे बड़े होकर लहलहाएंगे, उन पर फूल खिलेंगे, फल उगेंगे तो चिड़ियों की चहचहाहट के बीच प्रकृति भी हमें दिल से आशीष देगी.





जन्मदिन सिर्फ सेलिब्रेशन तक नहीं होता।  जन्मदिन के बहाने पिछले एक साल के पन्ने पलटकर देखना भी होता है कि क्या कमियाँ रहीं, क्या उपलब्धियाँ रहीं।  क्या खोया, क्या पाया। इसके साथ ही अगले सालों के लिए दृढ निश्चय होकर फिर आगे बढ़ जाने का नाम भी है जन्मदिन। क्योंकि जिंदगी निरंतर चलने का नाम है और यह चलना सिर्फ पाँवों पर नहीं होता, बल्कि इसमें बहुत कुछ जुड़ता जाता है !! 
(चित्र में : हमारे जीवन की पहली फोटो, जो कि बचपन में ली गई थी)



Saturday, December 14, 2013

Bharatiya Dalit Sahitya Akademi felicitated Director Postal Services Krishna Kumar Yadav

ALLAHABAD: Bharatiya Dalit Sahitya Akademi felicitated director, Postal Services, Allahabad region, Krishna Kumar Yadav, with Lord Buddha National Fellowship Award-2013 at the 29th National Conference of Dalit writers on 12-13 December, 2013 in New Delhi. The award was conferred to him for his contribution in literature, social work and to promote social harmony in society.
It is worth to mention here that earlier, Yadav has been felicitated by more than 50 awards and honorary degrees by many literary and social institutions for his dynamic personality, creativity, administrative abilities and perpetual literary creativity.
Apart from being a senior officer in postal services, 36 years old Yadav is active in the field of literature, writing, blogging, and social media and has published six books namely, 'Abhilasha' (a collection of poems), 'Abhivyaktiyon ke bahane' and 'Anubhutiyan ur vimarsh' (essay collection), 'India Post: 150 Glorious Years (2006) and 'Krantiyagya: 1857-1947 ki gatha' (2007),' Jungle me cricket' (poems for children). His creative works are published in various magazines and journals issued in country and abroad, web magazines published on the internet and blogs.
It may be noted here that Bharatiya Dalit Sahitya Akademi was founded by late Babu Jagjivan Ram in 1984 for promotion and conservation of literature and culture.
Courtesy : Times of India, 14 Dec. 2013
http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2013-12-14/allahabad/45189938_1_literature-vimarsh-creativity


(Director Postal Services KK Yadav felicitated : Times of India, 14 Dec. 2013)


(Director Postal Services KK Yadav felicitated : The Pioneer, 14 Dec. 2013)

(KK Yadav felicitated with "Lord Buddha National Fellowship Award-2013" : Northern India Patrika, 15 Dec. 2013)



Monday, August 15, 2011

स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनायें !!

आइये हम सभी आजादी के इस जश्न में शामिल हों और भारत को एक समृद्ध राष्ट्र बनायें.
स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनायें !! जय हिंद !! जय भारत !!

Sunday, October 17, 2010

विजयदशमी की बधाई !!


दशहरे की परम्परा भगवान राम द्वारा त्रेतायुग में रावण के वध से भले ही आरम्भ हुई हो, पर द्वापरयुग में महाभारत का प्रसिद्ध युद्ध भी इसी दिन आरम्भ हुआ था। विजयदशमी सिर्फ इस बात का प्रतीक नहीं है कि अन्याय पर न्याय अथवा बुराई पर अच्छाई की विजय हुई थी बल्कि यह बुराई में भी अच्छाई ढूँढ़ने का दिन होता है।....विजयदशमी की हार्दिक बधाई !!

Saturday, February 27, 2010

!! होली की शुभकामनायें !!


मानवता की हो पिचकारी.
रंग भरा हो प्यार का.
आओ सब मिलकर खेलें होली.
भीग जाये तन-मन यार का !

!! होली की शुभकामनायें !!

Monday, January 18, 2010

ब्लागर- साहित्यकार-प्रशासक के.के. यादव के निदेशक बनने पर अभिनन्दन व विदाई


ब्लागिंग और साहित्य के क्षेत्र में सक्रिय तथा भारतीय डाक सेवा के अधिकारी कृष्ण कुमार यादव व "डाकिया डाक लाया" ब्लाग के सूत्रधार को निदेशक पद पर प्रोन्नति के उपलक्ष्य में कानपुर में 17 जनवरी, 2010 को आयोजित एक समारोह में भावभीनी विदाई दी गई। केंद्र सरकार के एक अधिकारी के साथ-साथ साहित्यकार व ब्लागर के रूप में चर्चित केके यादव की विदाई पर कानपुर में आयोजित इस कार्यक्रम में तमाम प्रमुख साहित्यकार, बुद्विजीवी, शिक्षाविद, पत्रकार, अधिकारीगण मौजूद थे।

इस मौके पर कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार पद्मश्री गिरिराज किशोर ने कहा कि प्रशासन के साथ-साथ साहित्यिक दायित्वों का निर्वहन बेहद जटिल कार्य है पर कृष्ण कुमार यादव ने इसका भलीभांति निर्वहन कर रचनात्मकता को बढ़ावा दिया। गिरिराज किशोर ने इस बात पर जोर दिया कि आज समाज और राष्ट्र को ऐसे ही अधिकारी की जरूरत है जो पदीय दायित्वों के कुशल निर्वहन के साथ-साथ मानवीय संवेदनाओं से भी अपने को जोड़ सके। जीवन में लोग ऐसे पदों पर आते-जाते हैं, पर मनुष्य का व्यक्तित्व ही उसकी विराटता का परिचायक होता है। मानस संगम के संयोजक डॉ बद्री नारायण तिवारी ने कहा कि केके यादव जहां एक कर्तव्यनिष्ठ एवं ईमानदार अधिकारी की भूमिका अदा कर रहे हैं, वहीं एक साहित्य साधक एवं सशक्त रचनाधर्मी के रूप में भी अपने दायित्वों का बखूबी निर्वहन कर रहे हैं। विशिष्ट अतिथि के रुप में उपस्थित टीआर यादव, संयुक्त निदेशक कोषागार, कानपुर मण्डल ने एक कहावत के माध्यम से साहित्यकार केके यादव को इंगित करते हुए कहा कि कोई भी पद महत्वपूर्ण नहीं होता बल्कि उसे धारण करने वाला व्यक्ति अपने गुणों से उसे महत्वपूर्ण बनाता है। एक ही पद को विभिन्न समयावधियों में कई लोग धारण करते हैं पर उनमें से कुछ ही पद और पद से परे कार्य करते हुए समाज में अपनी अमिट छाप छोड़ पाते हैं, केके यादव इन्हीं में एक हैं। समाजसेवी एवं व्यवसायी सुशील कनोडिया ने कहा कि यह कानपुर का गौरव है कि केके यादव जैसे अधिकारियों ने न सिर्फ यहां से बहुत कुछ सीखा बल्कि यहां लोगों के प्रेरणास्त्रोत भी बने।

वरिष्ठ बाल साहित्यकार डॉ राष्ट्रबन्धु ने अपने अनुभवों को बांटते हुए कहा कि वे स्वयं डाक विभाग से जुड़े रहे हैं, ऐसे में केके यादव जैसे गरिमामयी व्यक्तित्व को देखकर हर्ष की अनुभूति होती है। सामर्थ्य की संयोजिका गीता सिंह ने कहा कि बहुआयामी प्रतिभा सम्पन्न श्री यादव अपने कार्यों और रचनाओं में प्रगतिवादी हैं और जमीन से जुडे़ हुए व्यक्ति हैं। उत्कर्ष अकादमी के निदेशक डॉ प्रदीप दीक्षित ने कहा कि केके यादव इस बात के प्रतीक हैं कि साहित्य हमारे जाने-पहचाने संसार के समानांतर एक दूसरे संसार की रचना करता है और हमारे समय में हस्तक्षेप भी करता है। जेके किड्स स्कूल के प्रबन्धक इन्द्रपाल सिंह सेंगर ने श्री यादव को युवाओं का प्रेरणास्त्रोत बताया। केके यादव पर संपादित पुस्तक ‘‘बढ़ते चरण शिखर की ओर‘‘ के संपादक दुर्गाचरण मिश्र ने कहा कि उनकी नजर में वे डाक विभाग के पहले ऐसे अधिकारी हैं, जिन्होंने नगर में रहकर नये कीर्तिमान स्थापित किये। इसी कारण उन पर पुस्तक भी संपादित की गई। प्रेस इन्फारमेशन ब्यूरो इंचार्ज एमएस यादव ने आशा व्यक्त की कि श्री यादव जैसे कर्तव्यनिष्ठ अधिकारियों के चलते लोगों का साहित्य प्रेम बना रहेगा। नगर हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ एसपी शुक्ल ने कहा कि श्री यादव कम समय में ज्यादा उपलब्धियों को समेटे न सिर्फ एक अधिकारी हैं बल्कि साहित्य-कला को समाज में उचित स्थान दिलाने के लिए कटिबद्ध भी दिखते हैं। कवयित्री गीता सिंह चौहान ने श्री यादव की संवेदनात्मक अनुभूति की प्रशंसा की। सहायक निदेशक बचत राजेश वत्स ने श्री यादव के सम्मान में कहा कि वे डाक विभाग जैसे बड़े उपक्रम में जो अपने कठोर अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा व ईमानदारी के लिए प्रसिद्ध है। जिला बचत अधिकारी विमल गौतम ने श्री यादव के कार्यकाल के दौरान महत्वपूर्ण उपलब्धियों को इंगित किया तो सेवानिवृत्त अपर जिलाधिकारी श्यामलाल यादव ने श्री यादव को एक लोकप्रिय अधिकारी बताया।

केके यादव ने इस अवसर पर कहा कि अब तक कानपुर में उनका सबसे लम्बा कार्यकाल रहा है और इस दौरान उन्हें यहां से बहुत कुछ सीखने का मौका मिला। यहां के परिवेश ने न सिर्फ उनकी सृजनात्मकता में वृद्धि की बल्कि उन्नति की राह भी दिखाई। वे विभागीय रूप में भले ही यहां से जा रहे हैं पर कानपुर से उनका भावनात्मक संबंध हमेशा बना रहेगा। केके यादव की प्रोन्नति के अवसर पर नगर की तमाम साहित्यिक-सामाजिक संस्थाओं ने अभिनन्दन एवं सम्मान किया। इनमें मानस संगम, उप्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन युवा प्रकोष्ठ, विधि प्रकोष्ठ, सामर्थ्य, उत्कर्ष अकादमी, मानस मण्डल जैसी तमाम चर्चित संस्थाएं शामिल हैं।
दैनिक जागरण में "भाई साहब" स्तम्भ के चर्चित कार्टूनिस्ट अंकुश जी ने इस अवसर पर के.के. यादव का एक चित्र भी बनाकर भेंट किया.

Thursday, December 24, 2009

Monday, September 28, 2009

विजयदशमी की बधाई !!

दशहरे की परम्परा भगवान राम द्वारा त्रेतायुग में रावण के वध से भले ही आरम्भ हुई हो, पर द्वापरयुग में महाभारत का प्रसिद्ध युद्ध भी इसी दिन आरम्भ हुआ था। विजयदशमी सिर्फ इस बात का प्रतीक नहीं है कि अन्याय पर न्याय अथवा बुराई पर अच्छाई की विजय हुई थी बल्कि यह बुराई में भी अच्छाई ढूँढ़ने का दिन होता है।....विजयदशमी की हार्दिक बधाई !!

Saturday, August 15, 2009

स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनायें !!

आइये हम सभी आजादी के इस जश्न में शामिल हों और भारत को एक समृद्ध राष्ट्र बनायें.
स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनायें !! जय हिंद !! जय भारत !!

Monday, August 10, 2009

जन्मदिन मुबारक हो !!


*** डाकिया बाबू की तरफ़ से "डाकिया डाक लाया" ब्लॉग के सूत्रधार कृष्ण कुमार यादव जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें ***

भारतीय डाक सेवा के अधिकारी बन
अपने कृतित्व-मान को और बढ़ाया
प्रशासन और साहित्य का हुआ समन्वय
इस बेजोड़ संतुलन ने सबको चौंकाया

बाइस जुलाई दो हजार तीन को
सूरत में पहले-पहल नियुक्ति पाये
वरिष्ठ डाक अधीक्षक पद प्राप्त कर
डाक विभाग का गौरव खूब बढ़ाये

स्ूारत, लखनऊ और कानपुर में
पद की गौरव-गरिमा खूब बढ़ाई
लिख डेढ़ सौ वर्षों का डाक इतिहास
दूर-दूर तक नाम औष् ख्याति पाई

आये जब से डाक विभाग में आप
लग गया फिलेटली का नया शौक
करते संग्रह डाक-टिकटों का खूब
रुचियांँ हैं इनकी और भी अनेक

जिज्ञासु प्रवृत्ति के रहे सदैव से
तार्किक विश्लेषण खूब करते हैं
चिंतन-मनन की अनुपम दुनिया में
जी भर यह आनन्द से रमते हैं

सूरत और कानपुर मण्डलों में आपने
सुन्दर डाक टिकट प्रदर्शनी करवायी
खूबसूरत स्मारिका किया सम्पादित
ज्ञानवर्धन कर युवा पीढ़ी भी हर्षायी

डाक विभाग में खूब बने लोकप्रिय
अराजकता कभी नहीं सह पाते हैं
किसी काम में यदि कुछ हुई गड़बड़ी
तो फिर अपनी त्योरियां चढ़ाते हैं

सुहृदय, मिलनसार और साहित्य प्रेमी
सबसे अन्तर्मन से वह जुड़ जाते हैं
एक बार जब बने निकटता आपसे
सब जन उनके सादर गुण गाते हैं !!
(साभार: बढ़ते चरण शिखर की ओर)

Friday, June 5, 2009

विश्व पर्यावरण दिवस पर लगायें पौधे

!!! आइये धरा की रक्षा का संकल्प लें और पर्यावरण को समृद्ध करें !!!


(विश्व पर्यावरण दिवस पर पौधा लगाते भारतीय डाक सेवा के अधिकारी के.के.यादव)

Monday, January 26, 2009

डाक टिकटों के आईने में स्वतंत्रता संग्राम

*गणतंत्र दिवस की शुभकामनाओं सहित*
(वर्ष २००४ में भारतीय डाक के १५० वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में अगले वर्ष २६ जनवरी २००५ को प्रथम बार भारतीय डाक विभाग ने गणतंत्र दिवस परेड में अपनी झांकी प्रस्तुत की थी.यह एक स्मरणीय तथ्य है )

Thursday, January 1, 2009