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Sunday, October 8, 2023

World Post Day 2023 : 'Together for Trust' theme to be celebrated

Department of Posts is one of the oldest department of the country which plays an important role in the socio- economic development of the country. 'World Post Day' is celebrated all over the world on 9 October. This year its theme is 'Together for Trust'. In the journey from 'Dakiya daak laya' to 'Dakiya bank laya', India Post has created many new dimensions. Postal services has been witness to many historical and important events. It also helps us to reach other countries beyond the borders.


'National Postal Week' will be celebrated from 9-13 October and every day will be focused on a particular product or service.

9 October - World Post Day

10 October – Vittiya Sashaktikaran Diwas

11 October - Philately Day

12 October - Mails and Parcels Day

13 October - Antyodaya Diwas

The purpose of World Post Day is to create awareness about the Post's role in the everyday life of people and businesses, as well as it's contribution to global, social and economical development. To realize the concept of 'One World - One Postal System', 'Universal Postal Union' was established on 9 October 1874 in Bern, Switzerland, so that uniform postal system could be implemented across the world. India was the first Asian nation, which became its member on 1 July 1876. Later in 1969, at the Universal Postal Union Congress held in Tokyo, Japan, this foundation day was declared to be celebrated as 'World Post Day'.

During the National Postal Week emphasis would be laid on wide publicity of Postal services and increase its customer base. Students from various schools will visit post offices to understand the working of Postal Services, Philately Quiz, Stamp Design and Dhai Aakhar letter writing competition, Seminars, Workshops, felicitation of Postal officials, Dakghar Niryat Kendra, Customers Meet, Saving Bank Services, Postal Life Insurance, Financial empowerment camps will be organized in every district including Sukanya Samriddhi Yojana, MSSC, and India Post Payments Bank products etc. Awareness cum Aadhar enrolment and updation camps be organized in remote areas.

 'World Post Day' will be celebrated on 9th October with the theme 'Together for Trust'

 Postal services has been a witness to many historical and important events

National Postal Week celebration with the aim of 'Antyodaya through financial empowerment' 

 Postal services playing important role in the socio-economic development of the country 

Sunday, January 9, 2022

India Post Office celebrates Neeraj Chopra's Tokyo heroics by installing 'Golden' letter box in his hometown in Haryana


The world's largest postal network, India Post, has come up with a special gesture to honor India's 'Golden Boy' Neeraj Chopra in his hometown for spearheading the nation's historic campaign in the 2020 edition of the Tokyo Olympics. Neeraj entered his name in the history books by ending India's 100-year wait for a medal in athletics at the grandest stages of them all - the Olympics. 

Neeraj managed to produce a throw of 87.58 to clinch the historic gold medal in the final of the men's javelin event at the Tokyo Games 2020. Celebrating Neeraj's path-breaking gold medal win in his hometown, the Indian Post has installed a golden letterbox in Haryana. With an increased brand value, superstar Neeraj has signed several endorsement deals following a memorable campaign in the Summer Games 2020. 

Painting the letterbox gold, the India Post has also opted to give Neeraj a special mention. “In honor of Javelin Throw Gold Medal Winner Tokyo Olympics 2020 Shri Neeraj Chopra," the Indian Post has engraved the special message on the customized letterbox. A tweet about the Indian Post's incredible gesture for Neeraj has garnered the attention of the netizens on social media. 

On the work front, Tokyo Olympic gold medalist Neeraj had kickstarted his 90-day off-season training at the Chula Vista Elite Athlete Training Centre in California last month. The poster boy of javelin in India is gearing up for the 2022 World Athletics Championships, Commonwealth Games and Asian Games at the prestigious training center.

Neeraj is India's second-ever individual Olympic gold medalist after celebrated shooter Abhinav Bindra. Earlier, Neeraj was conferred with the Major Dhyan Chand Khel Ratna award. Neeraj had also emerged as the most-searched personality by Indians in 2021 on Google. The Athletics Federation of India has extended the contract of Neeraj's coach Klaus Bartonietz till the Paris Olympics in 2024.

Wednesday, November 10, 2021

मोबाइलों के दौर के आशिक़ को क्या पता, रखते थे कैसे ख़त में कलेजा निकाल कर

'डाकखाना' - यह केवल एक शब्द नहीं, एक पूरी संस्कृति है। संचार की सबसे प्रारंभिक अवस्था से मनुष्य का साथ देने वाली चिट्ठी; संस्कृति में इतनी रची-बसी रही कि उस पर गीत लिखे गये। चिट्ठी, खत, पाती, नामा, लिफ़ाफ़ा, मजमून, नामाबर, डाकिया, तार, पोस्टकार्ड, डाकबाबू, लेटर बॉक्स, डाक टिकट और न जाने कितने ही शब्दों से सुसज्जित यह डाक-व्यवस्था शायरी और कविताओं के साथ साथ कहानी और उपन्यासों का भी महत्वपूर्ण अंग रही है।

'पीली चिट्ठी' मांगलिक अवसर का प्रतीक होती थी और कोना फटा हुआ पोस्टकार्ड अशुभ की सूचना लेकर आता था। चिट्ठी में लिखा गया एक-एक शब्द महत्वपूर्ण होता था। व्यक्तिगत चिट्ठियों में हाशिये पर की गई चित्रकारी देखकर पानेवाले को लिखनेवाले की मनोदशा का दर्शन हो जाता था।

चिट्ठी के प्रारम्भ में 'आपका पत्र मिला'; 'अत्रं कुशलं तत्रप्यस्तु'; हम सब यहाँ कुशलतापूर्वक हैं, आशा है आप सब भी कुशल होंगे' जैसे वाक्यांश औपचारिक होने के बावजूद रसपूर्ण लगते थे। इसी प्रकार 'बड़ों को चरण स्पर्श और छोटों को ढेर सारा प्यार' जैसा वाक्य चिट्ठी से पूरे परिवार को जोड़ देता था।

लेटर बॉक्स के नीचे सुरंग की कल्पना और रात में चिट्ठी पहुंचाने वाली परियों की कल्पना करने वाला बचपन भी डाक-संस्कृति के साथ ही कहीं गुम हो गया। डाकिये की प्रतीक्षा करने वाली दोपहरी भी अब समय के चक्र से विदा हो गई है।

साथ ही नदारद हो गये हैं वे गीत, जो डाक संस्कृति के इर्द-गिर्द रचे जाते थे। 'मास्टर जी की आई चिट्ठी'; 'हमने सनम को ख़त लिखा'; 'जाते हो परदेस पिया, जाते ही ख़त लिखना'; 'कबूतर जा-जा'; 'चिट्ठी आई है'; 'चिट्ठी न कोई संदेश'; 'ख़त लिख दे साँवरिया के नाम बाबू'; 'फूल तुम्हें भेजा है ख़त में'; 'डाकिया डाक लाया'; 'डाक बाबू आया'; 'संदेसे आते हैं; 'लिखे जो ख़त तुझे'; 'फूलों के रंग से दिल की क़लम से तुझको लिखी रोज़ पाती'; 'सुन ले बाबू ये पैग़ाम, मेरी चिट्ठी तेरे नाम'; 'तेरे खुशबू में बसे ख़त मैं जलाता कैसे' और 'मैंने ख़त महबूब के नाम लिखा' जैसे दर्जनों गीत हिंदी सिनेमा की तवारीख़ में हीरों की तरह जड़े हुए हैं।

कवि-सम्मेलनों में भी चिट्ठी का ख़ूब चलन रहा। मुझे अच्छी तरह याद है। हापुड़ के एक कवि-सम्मेलन में श्वेतकेशा ज्ञानवती सक्सेना जी ने एक गीत पढ़ा- 'ऐसे में क्या चिट्ठी लिखूँ, जब कोना फटने के दिन हैं!' गीत उनकी वय पर इतना एकरूप प्रतीत हुआ कि उसकी संवेदना ने भीतर तक सिहरन उत्पन्न कर दी थी। किशन सरोज जी का गीत 'कर दिये लो आज गंगा में प्रवाहित सब तुम्हारे पत्र, सारे चित्र तुम निश्चिंत रहना' श्रोताओं के मन और नयन दोनों को तर कर देता था। माया गोविंद जी का 'डाकिये ने द्वार खटखटाया, अनबाँचा पत्र लौटाया' गीत लोकप्रियता के कीर्तिमान खड़े कर गया। आज भी डॉ विष्णु सक्सेना जब अपने मुक्तक की चौथी पंक्ति पढ़ते हुए कहते हैं कि, 'उसने गुस्से में मेरा ख़त चबा लिया होगा' तो चिट्ठियों के सहारे जवान हुई हज़ारों प्रेम कहानियां जीवंत हो उठती हैं।

उर्दू शायरी भी इस विषय से भरी पड़ी है। 'नामाबर तू ही बता तूने तो देखे होंगे/कैसे होते हैं ख़त, जिनका जवाब आता है' सरीख़े सैंकड़ों अशआर लोगों की ज़ुबान पर चढ़े। 

दाग़ देहलवी साहब का मशहूर शेर 'तुम्हारे ख़त में नया इक सलाम किसका था/मैं था रक़ीब तो आख़िर वो नाम किसका था' किसी उपन्यास का कथानक बन जाने की क्षमता रखता है। 'लिफ़ाफ़ा देख के मजमून भाँप लेते हैं' जैसे मिसरे मुहावरे बनकर मक़बूल हो गये। हाल ही में वाशु पाण्डेय ने भी चिट्ठियों में बन्द मुहब्बत की इबारत को बयान करते हुए कहा कि, 'क़ासिद चिट्ठी तैश में आकर लिखी थी/ ले जाओ, पर देना मत शहज़ादी को'। 

तकनीक बदली तो यह सब कुछ फ़ना हो गया। मोबाइल पर एस.एम.एस या कंप्यूटर पर ईमेल भेजने वाली पीढ़ी को चिट्ठियों की उस जादुई दुनिया का अनुमान तक नहीं है। उदयप्रताप सिंह जी का ये शेर पढ़ते हुए आज भी मन तीन दशक पुरानी यादों में खो जाता है, 'मोबाइलों के दौर के आशिक़ को क्या पता, रखते थे कैसे ख़त में कलेजा निकाल कर'।

ब्याहता बिटिया की चिट्ठी मिलने पर माँ का खिला हुए चेहरा; हॉस्टल में रह रहे बेटे को चिट्ठी लिखती माँ की भीगी हुई पलकें; चिट्ठी में लिखे गये शब्दों के साथ अनलिखा दर्द पढ़ लेने का हुनर; हाशिये पर बनी चित्रकारी से मनोदशा पहचान लेने की कला और राखी के त्यौहार पर बहन की चिट्ठी खोलते भाइयों का कौतूहल अब देखने को नहीं मिलता।

'पिता के पत्र पुत्री के नाम' जैसी किताबें चिट्ठियों की अहमियत का चित्र प्रस्तुत करती हैं।

लेकिन आज 'ख़ून से लिख रहा हूँ स्याही न समझना' सरीख़े मिसरे दूर खड़े होकर धूल खा रहे लेटर बॉक्स देखकर बिलख पड़ते होंगे। निदा साहब की दो पंक्तियाँ रह-रहकर उस क़िरदार की याद दिलाती हैं जिसे हम डाकिया कहते थे - 'सीधा-सादा डाकिया जादू करे महान/एक ही थैले में भरे आँसू और मुस्कान'। 

टीवी और रेडियो पर चिट्ठियां भेजने का रिवाज़ अब इतिहास बन चुका है। संपादक के नाम पत्र और प्रकाशनार्थ रचना भेजने की क़वायद हम भूल चुके हैं। न ही संपादकों को अब 'खेद सहित' रचना लौटाने का स्वाद पता है। 

रमेश शर्मा जी के गीत का मुखड़ा एक पूरी परम्परा को श्रद्धांजलि देता हुआ जान पड़ता है - 'ओ दूरभाष की सुविधाओं, मुझे वो चिट्ठी लौटा दो!'

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(डाकखाना और चिट्ठियों पर लिखा यह भावपूर्ण लेख किसी ने मुझसे शेयर किया...लेखक का नाम नहीं पता। इसके लेखक को साधुवाद के साथ इसे यहाँ साभार शेयर कर रहा हूँ)

Thursday, October 1, 2020

Happy Birthday to India Post : 166 साल का हो गया भारतीय डाक विभाग

भारतीय डाक विभाग एक अक्टूबर, 2020  को 166 साल का हो गया।  वक्त के साथ विभाग ने खुद को ढाला और आधुनिकता के साथ भी तालमेल बिठाया। एक अक्टूबर, 1854 को डाक विभाग की स्थापना हुई थी। उस वक्त ये महज पत्र को भेजने का माध्यम था मगर आज डाक विभाग बैंकिंग, बीमा, पासपोर्ट, रेल टिकट, आधार आदि बनवाने की सुविधा भी दे रहा है। वहीं लॉकडाउन के दौरान तो डाकविभाग ने दवाएं, पीपीईकिट,सैनिटाइजर को भी लोगों तक पहुंचाया। उक्त जानकारी वाराणसी परिक्षेत्र के नवागत पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने दी। 

वाराणसी परिक्षेत्र के नवागत पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने डाक विभाग से जुड़े यादगार पलों को साझा करते हुए कहा कि, भारतीय डाक विभाग की  ऐतिहासिकता और विरासत की समृद्ध परम्परा को कभी भुलाया नहीं जा सकता है। 1 अक्टूबर का दिन डाक विभाग के लिए कई कारणों से बेहद महत्वपूर्ण है- लार्ड डलहौजी द्वारा एक अक्टूबर 1854 को डाक विभाग को एक महानिदेशक एलपीएबी रिडेल के अधीन लाना। राष्ट्रीय स्तर पर पहली बार एक अक्टूबर, 1854 को डाक-टिकट जारी करना।  हालांकि इससे पहले 1852 में डाक टिकट जारी करके भारत एशिया में डाक टिकट जारी करने वाला प्रथम राष्ट्र बना था, मगर वह मात्र सिंध प्रांत के लिए था। डाक टिकट के परिचय के साथ ही बिना दूरी का ध्यान रखे 'एक समान डाक दर" को लागू करना। 'अखिल भारतीय डाक सेवा" का गठन। सर्वप्रथम 'लेटर बाक्स" की स्थापना। पोस्टमास्टर जनरल को जीपीओ के कार्यक्षेत्र से मुक्त कर जीपीओ की स्वतंत्र स्थापना। 

पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया  कि वाराणसी परिक्षेत्र में  वाराणसी परिक्षेत्र में  कुल 1699 डाकघर  हैं। इनमें छह प्रधान डाकघर, 268 उप डाकघर और 1425 शाखा डाकघर हैं।  वाराणसी परिक्षेत्र के डाकघरों में बचत खातों की कुल संख्या 36 लाख है।  सुकन्या समृद्धि योजना के खातों की संख्या एक  लाख 68 हजार है।  इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक के खातों की संख्या लगभग तीन लाख है। श्री यादव ने स्मारक डाक टिकटों की परंपरा के बारे में बताया कि डाक विभाग प्रति वर्ष लगभग 60  स्मारक डाक टिकट जारी करता है। यह सभी राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय विषयों पर आधारित होते हैं। जो  लिमिटेड एडिशन में होते हैं। वक्त के साथ इनकी कीमत बढ़ती जाती है।

पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि डाक विभाग के कार्यों में वक़्त के साथ तमाम परिवर्तन आये हैं। विभाग अपने मूल वजूद डाक वितरण की सेवाओं को हमेशा से  मजबूती देता रहा है । डाक विभाग ने समय के साथ खुद को अपेडट रखा। बदलते वक्त के साथ डाक विभाग का प्रारूप भी बदला है।  डाक विभाग सिर्फ चिट्ठी वितरित करने का काम नहीं करता है बल्कि, उसका कार्य क्षेत्र और व्यापक हो चुका है। अब कारपोरेट डाक और बिजनेस डाक का दौर है।आज डाकघर जनता के बीच रिटेल सेवाओं को उपलब्ध कराने वाला साधन भी बन गया है।  आईटी मॉर्डनेइजेशन प्रोजेक्ट के माध्यम से डाक सेवाओं को प्रौद्योगिकी संपन्न, मार्केट लीडर में तब्दील करने के लिए विभाग सदैव तत्पर है। इसके द्वारा डाकघरों में कोर बैंकिंग, कोर इंश्योरेंस व कोर सिस्टम इंटीग्रेशन लागू किया गया है। दूरस्थ और अंतिम छोर तक डाकघरों में प्रौद्योगिकी के लाभ पहुंचा कर शहरी व ग्रामीण के बीच अंतर को कम किया जाना महत्वपूर्ण कार्य है।




Sunday, December 15, 2019

'Nanyatha' makes Letter Boxes smart : Post Offices begin e-monitoring of letter boxes by ‘Nanyatha’ in Lucknow

In the era of new technology now Letter Boxes will be getting smart. This is now possible with the implementation of the Electronic Monitoring of Letter Box Clearance through the Nanyatha software developed by Department of Posts. The programme helps to know the status of letters dropped in the box and functioning of the delivery system in the postal network through Internet.

Mr. Krishna Kumar Yadav, Director Postal Services, Lucknow HQ Region told that Real time based and GPS enabled mobile software ‘Nanyatha’ is aimed at monitoring the clearance of letter boxes planted at various locations attached to post offices. This application helps in uploading the data about the location of  Letter Box, date and time of clearance, Number of letters and the person who has cleared  to the web MIS having the address https://appost.in/nanyatha, when  the bar code is scanned using a smart phone.  
Explaining the system, Director Mr. Krishna Kumar Yadav said that in Lucknow City there are 201 letter boxes, each letter box is assigned a unique barcode consisting of a pin code followed by a twelve-digit serial number. After capturing the location, letter box attendant opens it, counts the number of letters inside, and scans the barcode fixed inside through the hand set by using the installed android application. Then the attendant enters his/her name and the number of articles cleared through the app on the smartphone, which gets uploaded on the server, said Mr. Yadav.

This software also facilitates the members of public to know the states of letter clearance which is posted in a particular letter box. With this software, customers by a click of mouse can know whether the letters dropped by them in letter boxes are collected or not. It is also possible to know the date, time and name of the postman who picked up the letters, said Mr. Yadav. It also provides MIS to the Postal department to know the volume of letters posted in a letter box and thereby to rationalize the letter boxes. 
'Nanyatha' makes Postal Letter Boxes smart (Courtesy : The Pioneer, Lucknow)

Department of Posts begins e-monitoring of letter boxes by ‘Nanyatha’ in Lucknow

Mobile app ‘Nanyatha’ for electronics clearance of letter boxes in Lucknow

Thursday, December 12, 2019

Letter Box clearance by Nanyatha : 'नन्यथा' द्वारा अब स्मार्ट हुई लखनऊ में लेटर बॉक्स से पत्रों की निकासी

वक़्त के साथ कदमताल करते हुए डिजिटल इण्डिया (Digital India) और स्मार्ट गवर्नेंस (Smart Governance) की तरफ कदम बढ़ाते हुए डाक विभाग अब लेटर बॉक्स को भी स्मार्ट बना रहा है। अब लेटर बॉक्स से  पत्रों की निकासी को सॉफ्टवेयर आधारित करके  इसे नई टेक्नालॉजी से जोड़ा जा रहा है। लखनऊ मुख्यालय परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव (Mr. Krishna Kumar Yadav, Director Postal Services, Lucknow HQ Region) ने  बताया  कि 'नन्यथा' (Nanyatha) सॉफ्टवेयर के जरिये लेटर बॉक्स की मेकेनाइज्ड निकासी व्यवस्था आरम्भ की गई है। श्री यादव ने कहा कि रीयल टाइम आधारित और जीपीएस से लैस इस सॉफ्टवेयर के माध्यम से जहाँ पत्रों की निकासी की नियमित मॉनिटरिंग हो सकेगी, वहीं आम जन भी http://www.appost.in/nanyatha/ वेबसाइट पर जाकर अपने क्षेत्र के लेटर बॉक्स की अवस्थिति के साथ-साथ यह देख सकेंगे कि उनके क्षेत्र का लेटर बॉक्स प्रतिदिन नियमित रूप से खुलता है या नहीं और इसमें से कितने पत्र निकलते हैं। पारदर्शिता के साथ-साथ इससे डाक विभाग को लेटर बाक्सों के औचित्य स्थापन में भी सुविधा मिलेगी।  

डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने इसकी कार्यप्रणाली के बारे में बताया कि, इसके तहत हर लेटर बॉक्स (Letter Box) के अंदर 12 अंकों  का यूनिक बार कोड लगाया जाता है, जिसमें प्रारम्भिक 6 अंक पिनकोड (Pincode) को दर्शाते हैं। डाककर्मी किसी भी लेटर बॉक्स से पत्रों की निकासी करेगा तो पहले वह अपने पास स्थित एंड्रायड बेस्ड स्मार्ट मोबाइल फोन में  स्थित 'नन्यथा एप' (NANYATHA Mobile App) से उस लेटर बॉक्स के बार कोड को स्कैन करके उसमें निकले  कुल पत्रों की संख्या को उसी स्थान से अपलोड करेगा। इससे लेटर बॉक्स की लोकेशन सहित पत्रों की संख्या व निकासी की तारीख और समय सॉफ्टवेयर के माध्यम से तुरंत अपलोड हो जायेगा। फिलहाल, इसे नगरीय सीमा के भीतर अवस्थित डाकघरों में आरम्भ किया गया है। लखनऊ (Lucknow) में इस तरह के कुल 201 लेटर बॉक्स हैं, जिनमें से 155 लखनऊ मंडल के अधीन और 46 जीपीओ के अधीन हैं।  

निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि लेटर बॉक्स निकासी की इस  व्यवस्था से  आम जनता को यह आसानी से पता लग जाएगा कि जिस लेटर बॉक्स में पत्र डाला गया है उसकी निकासी कितने बजे हुई। इसके अलावा किसी क्षेत्र विशेष में  स्थित लेटर बॉक्स की निकासी प्रतिदिन समयानुसार हो रही है अथवा नहीं की सूचना विभाग के साथ साथ जनता को भी उपलब्ध हो जाएगी, जिससे इस कार्य  में  और अधिक पारदर्शिता आएगी।  यही नहीं इस व्यवस्था से प्रत्येक लेटर बॉक्स में  कितने पत्र (Letters) पोस्ट किए गए इत्यादि से संबंधित आँकड़ों का डाटाबेस उपलब्ध हो सकेगा तथा डाक विभाग (Department of Posts) को यह सुनिश्चित करने में आसानी रहेगी कि किस क्षेत्र में  लेटर बॉक्स लगवाने की अधिक आवश्यकता है। इससे जनता की शिकायतों में भी  कमी आएगी।











अब स्मार्ट हुई  लेटर बॉक्स से पत्रों की निकासी : 'नन्यथा' सॉफ्टवेयर के माध्यम से लेटर बॉक्स की मेकेनाइज्ड निकासी व्यवस्था

संचार के सबसे पुराने माध्यम 'लेटर बॉक्स' का नवीनतम माध्यम 'स्मार्ट फोन' से हुआ मिलन

पारदर्शिता के साथ-साथ डाक विभाग को लेटर बाक्सों के औचित्य स्थापन में भी हुई सुविधा-डाक निदेशक केके यादव



Friday, September 23, 2016

संचार के सबसे पुराने माध्यम 'लेटर बॉक्स' का नवीनतम माध्यम 'स्मार्ट फोन' से हुआ मिलन

लेटर बॉक्स किसी परिचय का मोहताज नहीं है। सड़क के किनारे, लाल रंग का एक बॉक्स, जो बिना किसी मौसम की परवाह किये हम-सभी के सुख-दुःख को आगे बढ़ाता है। पत्र, खत या चिट्ठी जो भी कहें,  कभी संचार का पर्याय माना जाता था यह लाल बॉक्स।  पर जैसे-जैसे टेक्नॉलाजी बदलती गई, लोग इसे भी भूलते गए।  पर लेटर बॉक्स अभी भी वहीं पर है।  हो सकता है, इसमें पड़ने वाली चिट्ठियों की संख्या कम हो गई हो, पर यह अभी भी लोगों की सेवा करने के लिए तत्पर है।  तभी तो लोग यह शिकायत लेकर आते हैं कि हमारे इलाके का लेटर बॉक्स कई दिनों से नहीं खुल रहा है या हमारे क्षेत्र में भी एक लेटर बॉक्स लगवा दीजिये। 

 लेटर बॉक्स लोगों के स्टेट्स का भी प्रतीक है। जिनके घर के सामने लेटर बॉक्स लगे होते हैं, वे लोगों को सगर्व बताते हैं कि लेटर बॉक्स के सामने वाला घर ही तो हमारा है या लेटर बॉक्स वाली गली से मुड़ लीजियेगा। पत्र लेखन की विधा को जिन्दा रखने में लेटर बॉक्स का बड़ा महत्व है।  न जाने कितनी खट्टी-मीठी यादें अपने में सहेजे हुए है लेटर बॉक्स। खुशामदी से लेकर शिकवा-शिकायत तक को अपने में सहेज कर रखता है। 

मुझे एक घटनाक्रम याद आता है, जब हर सुबह डाकिया लेटर बॉक्स से पत्र निकलने जाता तो उसे सिंदूरी रंग से रँगा हुआ और फूलों के हार के साथ पाता। जब यह लंबे समय तक यह होता रहा तो डाकिया ने एक दिन ठान ही लिया कि इसका पता लगाकर रहेगा। भोर में ही वह वहां छुपकर बैठ गया।  कुछ देर बाद देखा कि एक महिला वहां आकर लेटर बॉक्स को सिंदूरी रंग से पोतकर उस पर फूल चढ़ा रही है।  वह दौड़कर उस महिला के पास  गया और इसका कारण पूछा तो उस महिला का मासूम जवाब सुनकर डाकिया भी हतप्रभ रह गया-" यह लेटर बॉक्स तो हमारे लिए हनुमान जी का रूप है। इसमें हम परदेश  में रह रहे अपने पिया को चिट्ठी डालते हैं और यह हनुमान जी की तरह उनके पास पहुँचा आता है। मुझे अपने पिया से यह जोड़ता है।" 

खैर, वक़्त के साथ कदमताल करते हुए डाक विभाग अब लेटर बॉक्स को भी स्मार्ट बना रहा है। अब लेटर बॉक्स से पत्रों की निकासी को साफ्टवेयर आधारित मोबाईल एप 'नन्यथा' (Nanyatha) से जोड़कर  इसे नई टेक्नालॉजी से जोड़ा जा रहा है।  इसी क्रम में पिछले दिनों कई प्रधान डाकघरों में इसके शुभारम्भ के लिए जाना हुआ। फूल-माला से सजे-धजे लेटर बॉक्स अपनी अलग ही रंगत बिखेर रहे थे। स्टाफ के लोगों का कहना था कि डाक विभाग की सबसे बड़ी पहचान लेटर बॉक्स हैं, पर उन्होंने पहली बार इसे फूलों से इतना सजा-धजा और सुवासित देखा। डाकघर आने वाले लोग और रोड से गुजर रहे भी एकबारगी ठिठक कर इस पुष्पहार से सुसज्जित लेटर बॉक्स को जरूर देखते। कोई पूछता कि क्या आज लेटर बॉक्स का जन्मदिन है तो नई पीढ़ी के लोग इसके साथ शान से अपनी सेल्फी लेते। ...... आखिर, संचार के  सबसे पुराने माध्यम 'लेटर बॉक्स' का नवीनतम माध्यम 'स्मार्ट फोन' से मिलन जो हो रहा था। 


रीयल टाइम आधारित और जीपीएस से लैस इस सॉफ्टवेयर के माध्यम से जहाँ लेटर बॉक्स से पत्रों की निकासी की नियमित मॉनिटरिंग हो सकेगी, वहीं आम जन भी http://www.appost.in/nanyatha/ वेबसाइट पर जाकर अपने क्षेत्र के लेटर बॉक्स की अवस्थिति के साथ-साथ यह देख सकेंगे कि उनके क्षेत्र का लेटर बॉक्स प्रतिदिन नियमित रूप से खुलता है या नहीं और इसमें से कितने पत्र निकलते हैं। पारदर्शिता के साथ-साथ इससे डाक विभाग को लेटर बाक्सों के औचित्य स्थापन में भी सुविधा मिलेगी।



इसके तहत हर लेटर बॉक्स के अंदर 12 अंकों  का यूनिक बार कोड लगाया जायेगा, जिसमें प्रारम्भिक 6 अंक पिनकोड को दर्शायेंगे। डाककर्मी किसी भी लेटर बॉक्स से पत्रों की निकासी करेगा तो पहले वह अपने पास स्थित एंड्रायड बेस्ड स्मार्ट मोबाइल फोन में  स्थित 'नन्यथा एप' से उस लेटर बॉक्स के बार कोड को स्कैन करके उसमें निकले  कुल पत्रों की संख्या को उसी स्थान से अपलोड करेगा | इससे लेटर बॉक्स की लोकेशन सहित पत्रों की संख्या व निकासी की तारीख और समय सॉफ्टवेयर के माध्यम से तुरंत अपलोड हो जायेगा।

Sunday, August 28, 2016

Mobile app ‘Nanyatha’ for electronics clearance of letter boxes in Jodhpur launched by Director Postal Services KK Yadav


In the era of new technology now Letter Boxes will be getting smart. This is now possible with the implementation of the Electronic Monitoring of Letter Box Clearance through the Nanyatha software developed by Department of Posts. The programme helps to know the status of letters dropped in the box and functioning of the delivery system in the postal network through Internet.


Launching the service at Jodhpur Head Post Office on 27 August, 2016 Krishna Kumar Yadav, Director Postal Services, Rajasthan Western Region, Jodhpur said that Real time based and GPS enabled mobile software ‘Nanyatha’ is aimed at monitoring the clearance of letter boxes planted at various locations attached to post offices. This application helps in uploading the data about the location of  Letter Box, date and time of clearance, Number of letters and the person who has cleared  to the web MIS having the address https://appost.in/nanyatha, when  the bar code is scanned using a smart phone.  




Explaining the system, Director Mr. Krishna Kumar Yadav said that each letter box is assigned a unique barcode consisting of a pin code followed by a twelve-digit serial number. After capturing the location, letter box attendant opens it, counts the number of letters inside, and scans the barcode fixed inside through the hand set by using the installed android application. Then the attendant enters his/her name and the number of articles cleared through the app on the smartphone, which gets uploaded on the server, said Mr. Yadav.


This software also facilitates the members of public to know the states of letter clearance which is posted in a particular letter box. With this software, customers by a click of mouse can know whether the letters dropped by them in letter boxes are collected or not. It is also possible to know the date, time and name of the postman who picked up the letters, said Mr. Yadav. It also provides MIS to the Postal department to know the volume of letters posted in a letter box and thereby to rationalize the letter boxes.

In Jodhpur City 113 letter boxes are installed, where everyday more than 3,000 letters are posted by public. In First phase 22 letter boxes in the jurisdiction of Jodhpur Head Post Office have been covered under this scheme. “We will implement it first in Jodhpur and later, scale it up to the entire Western Region,” Mr. Yadv said.

Saturday, August 27, 2016

अब स्मार्ट होगी लेटर बॉक्स से पत्रों की निकासी : 'नन्यथा' सॉफ्टवेयर के माध्यम से लेटर बॉक्स की मेकेनाइज्ड निकासी व्यवस्था का डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव ने जोधपुर में किया शुभारंभ

वक़्त के साथ कदमताल करते हुए डिजिटल इण्डिया और स्मार्ट गवर्नेंस की तरफ कदम बढ़ाते हुए डाक विभाग अब लेटर बॉक्स को भी स्मार्ट बना रहा है। अब लेटर बॉक्स से  पत्रों की निकासी को सॉफ्टवेयर आधारित करके  इसे नई टेक्नालॉजी से जोड़ा जा रहा है।  इसी क्रम में  राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर के निदेशक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव ने  जोधपुर प्रधान डाकघर में 27 अगस्त को 'नन्यथा' (Nanyatha) सॉफ्टवेयर के जरिये लेटर बॉक्स की मेकेनाइज्ड निकासी व्यवस्था का शुभारंभ किया। श्री यादव ने कहा कि रीयल टाइम आधारित और जीपीएस से लैस इस सॉफ्टवेयर के माध्यम से जहाँ पत्रों की निकासी की नियमित मॉनिटरिंग हो सकेगी, वहीं आम जन भी http://www.appost.in/nanyatha/ वेबसाइट पर जाकर अपने क्षेत्र के लेटर बॉक्स की अवस्थिति के साथ-साथ यह देख सकेंगे कि उनके क्षेत्र का लेटर बॉक्स प्रतिदिन नियमित रूप से खुलता है या नहीं और इसमें से कितने पत्र निकलते हैं। पारदर्शिता के साथ-साथ इससे डाक विभाग को लेटर बाक्सों के औचित्य स्थापन में भी सुविधा मिलेगी। 


डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने  इस नई व्यवस्था के बारे में विस्तार से चर्चा करते हुए बताया कि, इसके तहत हर लेटर बॉक्स के अंदर 12 अंकों  का यूनिक बार कोड लगाया जायेगा, जिसमें प्रारम्भिक 6 अंक पिनकोड को दर्शायेंगे। डाककर्मी किसी भी लेटर बॉक्स से पत्रों की निकासी करेगा तो पहले वह अपने पास स्थित एंड्रायड बेस्ड स्मार्ट मोबाइल फोन में  स्थित 'नन्यथा एप' से उस लेटर बॉक्स के बार कोड को स्कैन करके उसमें निकले  कुल पत्रों की संख्या को उसी स्थान से अपलोड करेगा | इससे लेटर बॉक्स की लोकेशन सहित पत्रों की संख्या व निकासी की तारीख और समय सॉफ्टवेयर के माध्यम से तुरंत अपलोड हो जायेगा।  



निदेशक श्री यादव ने कहा कि लेटर बॉक्स निकासी की इस नई व्यवस्था के लागू होने से अब आम जनता को यह आसानी से पता लग जाएगा कि जिस लेटर बॉक्स में पत्र डाला गया है उसकी निकासी कितने बजे हुई। इसके अलावा किसी क्षेत्र विशेष में  स्थित लेटर बॉक्स की निकासी प्रतिदिन समयानुसार हो रही है अथवा नहीं की सूचना विभाग के साथ साथ जनता को भी उपलब्ध हो जाएगी, जिससे इस कार्य  में  और अधिक पारदर्शिता आएगी।  यही नहीं इस व्यवस्था से प्रत्येक लेटर बॉक्स में  कितने पत्र पोस्ट किए गए इत्यादि से संबंधित आँकड़ों का डाटाबेस उपलब्ध हो सकेगा तथा डाक विभाग को यह सुनिश्चित करने में आसानी रहेगी कि किस क्षेत्र में  लेटर बॉक्स लगवाने की अधिक आवश्यकता है। इससे जनता की शिकायतों में भी  कमी आएगी।

डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने यह भी बताया कि जोधपुर जिला मुख्यालय पर 113 लेटर बॉक्स लगे हुए है जिसमें आम जनता प्रतिदिन लगभग 3,000 से 3,500 तक पत्र पोस्ट करती है| उन्होंने कहा कि यह सेवा आरंभ मे जोधपुर प्रधान डाकघर में आरम्भ की जा रही है, जिसके अधीन कुल 22 लेटर बॉक्स लगे हुए हैं।  श्री यादव ने कहा कि शीघ्र ही शास्त्री नगर, नंदन वन, कचहरी, रेजीडेंसी रोड सहित तमाम डाकघरों में यह तकनीक आरम्भ की जाएगी। राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र के अधीन सभी 13 जिलों में भी इस सेवा को आरम्भ किया जायेगा, जिनमें जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर, चुरू, झुञ्झुनु, नागौर, पाली, सीकर, सिरोही, जालोर, हनुमानगढ़ एवं श्रीगंगानगर जिले शामिल है।

इस अवसर पर सीनियर पोस्टमास्टर एल. एस. पटेल, सहायक निदेशक इशरा राम, सहायक डाक अधीक्षक  विनय कुमार खत्री, डाक निरीक्षक राजेंद्र सिंह भाटी सहित तमाम विभागीय अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

लेटर बॉक्स जीपीएस से जुड़े, घर बैठे जान सकेंगे कब निकली डाक (साभार : दैनिक भास्कर, 28 अगस्त 2016)

लेटर बॉक्स की मेकेनाइज्ड निकासी व्यवस्था शुरू (साभार : राजस्थान पत्रिका, 28 अगस्त 2016)

अब लेटर बॉक्स से पत्रों की निकासी होगी स्मार्ट (साभार : दैनिक नवज्योति, 28 अगस्त 2016)

अब स्मार्ट होगी लेटर बॉक्स से पत्रों की निकासी 
'नन्यथा' सॉफ्टवेयर के माध्यम से लेटर बॉक्स की मेकेनाइज्ड निकासी व्यवस्था का डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव ने जोधपुर में किया शुभारंभ (साभार : दैनिक युगपक्ष,28 अगस्त 2016)

स्मार्ट होगी लेटर बॉक्स से पत्रों की निकासी (साभार : राष्ट्रदूत, 28 अगस्त 2016)