Sunday, November 25, 2018

टॉप ब्लॉग्स में शामिल हुआ डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव का ब्लॉग 'डाकिया डाक लाया'

देश-विदेश में इंटरनेट पर हिंदी के व्यापक प्रचार-प्रसार और ब्लॉगिंग के माध्यम से अपनी रचनाधर्मिता को विस्तृत आयाम देने वाले लखनऊ (मुख्यालय) परिक्षेत्र, उत्तर प्रदेश  के निदेशक डाक सेवाएं कृष्ण कुमार यादव के ब्लॉग  "डाकिया डाक लाया" (http://dakbabu.blogspot.in/) को  टॉप हिंदी ब्लॉग्स में शामिल किया गया है। वर्ष 2008 से ब्लॉगिंग में सक्रिय एवम  ''दशक के श्रेष्ठ हिंदी ब्लॉगर दम्पति'' और  सार्क देशों के सर्वोच्च ''परिकल्पना ब्लॉगिंग सार्क शिखर सम्मान'' से सम्मानित  कृष्ण कुमार यादव के ब्लॉग  को इंडियन टॉप ब्लॉग्स द्वारा हाल ही में जारी  हिंदी के सर्वश्रेष्ठ 125  ब्लॉगों की डायरेक्टरी में स्थान दिया गया है। वर्तमान में हिंदी में एक लाख से ज्यादा ब्लॉग संचालित हैं। श्री यादव इससे पूर्व पोर्टब्लेयर, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह, इलाहाबाद-वाराणसी, जोधपुर, राजस्थान  में भी निदेशक डाक सेवाएं के पद पर रह चुके हैं।   
 गौरतलब है  कि डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव नेपाल, भूटान और श्रीलंका सहित तमाम देशों में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर्स सम्मेलन में सम्मानित हो चुके हैं।  उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव द्वारा वर्ष  2012 में श्री यादव को  ”न्यू मीडिया एवं ब्लाॅगिंग” में उत्कृष्टता के लिए ''अवध सम्मान'' से भी विभूषित किया जा  चुका है। सौ से ज्यादा देशों में देखे-पढ़े जाने वाले इनके ब्लॉग 'डाकिया डाक लाया' पर अब तक 945 पोस्ट प्रकाशित हैं। इसे पाँच लाख से ज्यादा लोगों ने पढ़ा है। 

ब्लॉगिंग के साथ-साथ कृष्ण कुमार यादव साहित्य और लेखन में भी सक्रिय हैं।  विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित  होने के साथ-साथ, अब तक श्री यादव की 7 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। देश-विदेश में  शताधिक सम्मानों से विभूषित  कृष्ण कुमार यादव एक लंबे समय से ब्लॉग और सोशल  मीडिया के माध्यम से हिंदी साहित्य एवं विविध विधाओं में अपनी रचनाधर्मिता को प्रस्फुटित करते हुये अपनी व्यापक पहचान बना चुके हैं।
















Friday, November 23, 2018

उत्तर प्रदेश के सभी डाकघर अब कोर सिस्टम इंटीग्रेटर (CSI) से जुड़े

 उत्तर प्रदेश डाक परिमंडल के सभी डाकघर अब कोर सिस्टम इंटीग्रेटर (सीएसआई) से जुड़ गये हैं। लखनऊ डाक मंडल और लखनऊ जीपीओ द्वारा अंतिम चरण में 20 नवम्बर 2018 को इससे जुड़ने के बाद उत्तर प्रदेश की सभी 68 इकाईयां अपने 2301 डाकघरों के माध्यम से टेक्नालॉजी के नए दौर में प्रवेश कर चुकी हैं। डाकघरों में कोर बैकिंग, कोर इंश्योरेंस और दर्पण प्रोजेक्ट के बाद आईटी आधुनिकीकरण परियोजना के भाग के रूप में कोर सिस्टम इंटीग्रेटर (सीएसआई) का आरम्भ किया हैे । संचार क्रांति के इस दौर में अब डाकघर अद्यतन टेक्नालॉजी के साथ नई इबारत लिखने को तैयार हैं। सीएसआई प्रोजेक्ट लागू होने से सभी सेवाओं के लिए एक काॅमन प्लेटफार्म उपलब्ध होगा जिसके द्वारा ग्राहकों को अच्छी और त्वरित सेवाएं मिलेगी । उक्त उद्गार बतौर मुख्य अतिथि श्री वी.पी. सिंह, चीफ पोस्टमास्टर जनरल, उत्तर प्रदेश परिमण्डल ने 20 नवम्बर 2018 को चौक प्रधान डाकघर लखनऊ में “कोर सिस्टम इंटीग्रेटर“ का शुभारम्भ करते हुए व्यक्त किये । इस अवसर पर चीफ पोस्टमास्टर जनरल  ने ग्राहकों को स्पीड पोस्ट बुकिंग की सीएसआई जनरेटेड रसीद भी दिया । 

लखनऊ (मुख्यालय) परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवायें श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि भारत सरकार के डिजिटल इण्डिया अभियान से अब डाकघर भी जुड़ रहे हैं। डाकघरों में बुकिंग, वितरण, बचत व बीमा सम्बन्धी विभिन्न कार्यों  के लिए अभी भिन्न-भिन्न  साॅफ्टवेयरों  का इस्तेमाल किया जाता है । इन सभी को एक ही प्लेटफार्म पर लाने से त्वरित और सुव्यवस्थित कार्य होगा।  इस प्रणाली से विभाग के कर्मचारियों के सभी रिकार्ड जैसे कर्मचारियों की उपस्थिति, व्यक्तिगत डाटा, सर्विस बुक, कर्मचारियों की छुट्टी आदि कार्य आनलाइन हो जाएगा। कर्मचारियों के सभी कार्यो की प्रगति विभाग के शीर्ष अधिकारी भी आनलाइन देख सकते है। 
श्री यादव ने  बताया कि हर स्तर पर कोर सिस्टम इंटीग्रेटर लागू हो जाने के बाद डाक विभाग पूरी तरह  मेल आपरेशन, वित्त व लेखा, इन्वेंटरी प्रक्योरमेंट, एच.आर, और पे-रोल जैसे तमाम कार्य कोर सिस्टम इंटीग्रेशन के माध्यम से सम्पन्न होंगे । श्री यादव ने कहा कि इससे भविष्य में प्रशासन की गतिविधियों जैसे भर्ती, प्रशिक्षण, पदोन्नति, वेतन और प्रदर्शन प्रबंधन में सुधार होगा। कॉल सेंटर, वेब पोर्टल और मोबाइल डिवाइसेज के माध्यम से ग्राहक सेवा प्रदान करने के साथ यह डाकघर काउंटरों की कार्यात्मकताओं को भी बढ़ाएगा और डाकघरों को पेपरलेस बनाएगा। 

प्रवर डाक अधीक्षक लखनऊ मंडल शशि कुमार उत्तम ने बताया कि कोर सिस्टम इंटीग्रेटर के लिए टी. सी. एस. द्वारा सॉफ्टवेयर तैयार किया गया है और इसके लिए स्टाफ को भलीभाँति ट्रेनिंग भी दी गई है, ताकि वे इसे सुचारु रूप से क्रियान्वित कर सकें। 

इस अवसर पर लखनऊ (मुख्यालय) परिक्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल श्री राजकुमार महाराज, निदेशक मुख्यालय श्री राजीव उमराव, सहायक पोस्टमास्टर जनरल एच.के.मिश्रा, सहायक निदेशक आर.एन.यादव, भोला शाह, ए.बी.सिंह  व सीनियर पोस्टमास्टर प्रधान डाकघर चौक एस.आर.गुप्ता सहित तमाम अधिकारी-कर्मचारीगण उपस्थित रहे ।







Saturday, November 10, 2018

रिटायर्ड पोस्टमास्टर फैजुल हसन कादरी ने पत्नी की याद में बनाया ताजमहल, अब उसी में हुए दफ़न

डाक विभाग का प्रेम से बहुत करीबी सम्बन्ध है। चिट्ठी-पत्री के दौर में न जाने कितनों की प्यार की दास्ताँ, डाक बाबू  के हाथ से ही होकर गुजरती थी। कई बार तो डाक बाबू बाबू ही इन पत्रों को पढ़कर सुनाया भी करते थे और कई बार तो दिल की दास्ताँ को पन्नों पर भी उतारा करते थे। पर इस बार जिस डाक बाबू  का जिक्र कर रहे हैं, वह बेहद अलग था।  उसने तो अपने प्यार को पन्नों की बजाय ताजमहल के रूप में खड़ा कर दिया। 
उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर के कसेर कलां गांव निवासी रिटायर्ड पोस्टमास्टर  फैजुल हसन कादरी (82) ने अपनी पत्नी की याद में एक ताजमहल खड़ा कर दिया। यह  ताजमहल असली ताजमहल से काफ़ी छोटा है,  यह किसी नदी के किनारे भी नहीं है, न इसमें पच्चीकारी का काम है और न ये कीमती पत्थरों से सजाया गया है। बस जज़्बा वही है जो शाहजहाँ का था। अपनी बेगम से बेपनाह मोहब्बत।  
इस मिनी ताजमहल के भीतर फैजुल हसन कादरी की बेगम तजम्मुली की कब्र है। फैजुल हसन ने तजम्मुली के इंतकाल के वक्त ही परिजनों से कह दिया था कि उन्हें भी बेगम की कब्र के निकट ही दफनाया जाए। उन्होंने उसी समय अपनी कब्र भी बनवा ली थी। फैजुल की यह इच्छा थी कि उनकी मौत के बाद उन्हें भी वहीं उनकी 'बेगम' तज्जमुली के बगल में ही दफनाया जाए। मोटरसाइकल से टक्कर लगने के बाद 9 नवंबर, 2018 की सुबह अलीगढ़ के एक अस्पताल में फैजुल हसन कादरी  की मौत हो गई। इस हादसे में मौत के बाद 'गरीबों के शाहजहाँ' और 'आधुनिक दौर के शाहजहाँ' नाम से प्रसिद्ध  फैजुल हसन कादरी के शव को ताजमहलनुमा इमारत के निचले हिस्से में बनीं उनकी बेगम की कब्र के करीब दफनाया गया।  
उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में स्थित यह  ताजमहल शाहजहां के आगरा वाले ताज जितना खूबसूरत बेशक न हो, लेकिन इसे बनवाने की वजह उतनी ही खूबसूरत है। यहां के रिटायर्ड पोस्टमास्टर फैजुल हसन कादरी (82) ने अपनी पत्नी की याद में अपना सबकुछ लगाकर इसे बनवाया था। हालांकि पैसों की कमी के चलते इसका काम पूरा नहीं हो सका। मोहब्बत के नाम पर ताजमहल जैसी इमारत बनाने वाले फैजुल की पत्नी पहले ही इसमें दफन हैं। 

वस्तुत: इस ताजमहल के पीछे भी एक कहानी है।  दिसंबर 2011 में फैजुल हसन कादरी की पत्नी तज्जमुली बेगम का निधन हुआ था। तब मौत से पहले तज्जमुली बेगम ने यह ख्वाहिश जताई थी कि चूंकि उनके कोई औलाद नहीं है इसलिए उनके जाने के बाद उनके नाम और खानदान को कोई कैसे याद रखेगा? इसके लिए अगर हम कुछ अनूठी इमारत बना जाएं तो लोग हमें याद रखेंगे। तभी फैजुल ने तय किया और तज्जुमली से वादा किया कि वह एक मिनी ताजमहल बनवाएंगे। फैजुल ने पत्नी की मौत के बाद  कसेर कलां में फरवरी 2012 में 50 गुणा 50 फुट की इस अद्भुत इमारत को बनवाना शुरू किया। इसके लिए फैजुल ने अपनी सारी जमा-पूंजी खर्च कर दी थी। अपने प्रॉविडेंड फंड की सारी रकम, खेत बेच कर मिली रकम और पत्नी के सारे गहने बेच कर मिली रकम फैजुल इसपर खर्च कर चुके थे। इमारत के निर्माण में क्षेत्र के लोगों ने आर्थिक मदद देनी चाही, लेकिन कहा कि वह इस इमारत के जरिए अपनी बेगम की यादों को संजो रहे हैं, लिहाजा किसी से कोई मदद नहीं लेंगे। फैजुल का सपना था कि उनका ताजमहल भी बिल्कुल वैसा ही हो जैसा आगरा का है। 12 लाख खर्च करने के बावजूद यह ताजमहल बेशक अधूरा रह गया हो लेकिन फिर भी शाहजहां की ही तरह यह तो कहा ही जा सकता है कि वह अपनी बेगम से बेइंतहा प्यार करते थे। फैजुल का यह ताज बलुआ पत्थर, लाल पत्थर, चूने, सीमेंट और लोहे से बना है। इसके चलते बुलंदशहर का यह इलाका आसपास के लोगों में काफी प्रसिद्ध  हो चुका है। बीबीसी को दिए एक साक्षात्कार में फैजुल हसन कादरी ने अपने मनोभावों को कुछ यूँ व्यक्त किया था- 

"छोड़ दो अब ये दुनिया तुम्हारी नहीं, दुनियावालों को बस एक नज़र देख लो। 
आज जन्नत सजी है तुम्हारे लिए, बाग-ए-जन्नत के बर्गोसज़र देख लो। 
जाओ बेगम फ़ैजुल हसन कादरी जन्नत में जाकर अपना घर देख लो।"

फैजुल हसन कादरी और उनके ताजमहल का जिक्र कभी अफ़सानों में  होगा या  नहीं,  लेकिन उनके जाने के बाद भी जब-जब लोग इस इमारत को देखेंगे तो उनकी दास्तां-ए-मोहब्बत का जिक्र जरूर होगा। 


Tuesday, October 16, 2018

उत्तर प्रदेश के राज्यपाल ने उत्कृष्ट कार्य करने वाले डाककर्मियों को ‘डाक सेवा अवार्ड’ से किया सम्मानित

उत्तर प्रदेश डाक परिमंडल में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले डाककर्मियों को उत्तर प्रदेश के राज्यपाल श्री राम नाईक ने लखनऊ जीपीओ में आयोजित एक भव्य समारोह में ‘डाक सेवा अवार्ड-2018’ से सम्मानित किया। राष्ट्रीय डाक सप्ताह के समापन अवसर पर 15 अक्टूबर, 2018 को आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि राज्यपाल ने वैयक्तिक श्रेणी में 6 डाक कर्मियों और स्वच्छता हेतु 3 कार्यालयों सहित कुल 9 डाक सेवा अवार्ड प्रदान किये। 


उत्तर प्रदेश के राज्यपाल श्री राम नाईक ने इसके अंतर्गत लखनऊ जीपीओ के पोस्टमैन श्री भरत सिंह, मैनपुरी में सहन शाखा डाकघर के ब्रांच पोस्टमास्टर श्री सतेंद्र सिंह, क्षेत्रीय कार्यालय गोरखपुर के डाक सहायक श्री नीतीश गौड़, परिमंडल कार्यालय, लखनऊ के अनुभाग पर्यवेक्षक श्री रंजीत सिंह, उरई उपमंडल, झाँसी  के सहायक डाक अधीक्षक श्री राजीव तिवारी और गाजियाबाद मंडल की प्रवर डाक अधीक्षक सुश्री प्रियंका मिश्रा को 'डाक सेवा अवार्ड' के तहत प्रशस्ति-पत्र और नकद राशि देकर राज्यपाल द्वारा सम्मानित किया गया। स्वच्छ्तम कार्यालय के तहत डाकघर श्रेणी में लखनऊ जीपीओ, रेल डाक सेवा कार्यालय श्रेणी में झांसी आरएमएस और स्पीड पोस्ट सेण्टर श्रेणी में स्पीड पोस्ट सेंटर, आगरा को सम्मान मिला।
इस अवसर पर अपने सम्बोधन में राज्यपाल श्री राम नाईक ने कहा कि, भारतीय डाक विभाग देश के सबसे पुराने विभागों में से एक है। 164 वर्षो के अपने सफ़र में चरैवेति-चरैवेति भावना के साथ डाक विभाग नित्य आगे बढ़ रहा है। देश में बचत खाते की शुरुआत डाकघरों से हुई और हाल ही में प्रधानमंत्री जी ने समाज के अंतिम व्यक्ति का खाता खोलने की पहल करते हुए इण्डिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक का शुभारम्भ किया। पेमेंट बैंक आरम्भ होने के बाद प्रदेश में बैंको से भी ज्यादा शाखाये डाकघरो के पास हैं। राज्यपाल ने स्वच्छता अभियान की चर्चा करते हुए स्वच्छता हेतु कार्यालयों को दिए जा रहे डाक सेवा अवार्ड की सराहना की। उन्होंने कहा कि संचार के बदलते साधनों  के साथ नवीन टेक्नोलॉजी को अपनाते हुए डाकघरों ने जनोपयोगी सेवाओं को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। केंद्र सरकार की तमाम अग्रणी योजनाओं को डाक विभाग के माध्यम से प्रमुखता से लागू किया जा रहा  है। लखनऊ जीपीओ की स्थापत्य कला, सजावट और यहाँ के काउंटर मैनेजमेंट को देखकर राज्यपाल ने कहा की यहाँ आकर एयरपोर्ट की अनुभूति होती है
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के चीफ पोस्टमास्टर जनरल श्री विनय प्रकाश सिंह ने उत्तर प्रदेश में डाक सेवाओं के बढ़ते कदम की चर्चा करते हुए कहा कि बदलते परिवेश में डाक विभाग नई भूमिका निभाने के लिए तत्पर है। बचत, बैंकिंग, बीमा, ई-कॉमर्स जैसे क्षेत्रों में डाकघर नवीन टेक्नालॉजी के साथ लोगों की जरूरतें पूरा कर रहे हैं। इण्डिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक आरम्भ होने के बाद  दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों में भी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के तहत तमाम सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का पैसा सीधे लोगों के खाते में पहुँच जायेगा।  समाज के अंतिम व्यक्ति तक सरकार की तमाम सामाजिक सुरक्षा और जनकल्याणकारी  योजनाओं को  क्रियान्वित करने के लिए डाक विभाग प्रतिबद्ध है।
लखनऊ (मुख्यालय) परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ श्री कृष्ण कुमार यादव ने आभार ज्ञापन करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की डाक सेवाओं के इतिहास में यह पहली बार है जब राज्यपाल महोदय द्वारा उत्कृष्ट सेवाओं हेतु  "डाक सेवा अवार्ड"  दिए जा रहे हैं। सम्मान और पुरस्कार सदैव प्रोत्साहन का कार्य करते हैं और लोगों के लिए प्रेरणा का कार्य भी करते हैं। ऐसे में यह सुअवसर डाक विभाग को और भी ऊँचाइयों पर ले जायेगा।







इस अवसर पर बरेली क्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल श्री आरकेबी सिंह, आगरा क्षेत्र की पोस्टमास्टर जनरल श्रीमती मनीषा सिन्हा, कानपुर क्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल श्री विनोद कुमार वर्मा, वाराणसी क्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल श्री प्रणव कुमार, गोरखपुर क्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल श्री संजय सिंह, निदेशक मुख्यालय श्री राजीव उमराव, चीफ पोस्टमास्टर श्री योगेंद्र मौर्य, सहायक निदेशक आर. एन. यादव, भोला शाह, आरके मिश्र, ओम प्रकाश चौहान, एपी अस्थाना, मधुसूदन मिश्र, टीपी सिंह सहित तमाम विभागीय अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. जेके अवस्थी ने किया।