Saturday, November 10, 2018

रिटायर्ड पोस्टमास्टर फैजुल हसन कादरी ने पत्नी की याद में बनाया ताजमहल, अब उसी में हुए दफ़न

डाक विभाग का प्रेम से बहुत करीबी सम्बन्ध है। चिट्ठी-पत्री के दौर में न जाने कितनों की प्यार की दास्ताँ, डाक बाबू  के हाथ से ही होकर गुजरती थी। कई बार तो डाक बाबू बाबू ही इन पत्रों को पढ़कर सुनाया भी करते थे और कई बार तो दिल की दास्ताँ को पन्नों पर भी उतारा करते थे। पर इस बार जिस डाक बाबू  का जिक्र कर रहे हैं, वह बेहद अलग था।  उसने तो अपने प्यार को पन्नों की बजाय ताजमहल के रूप में खड़ा कर दिया। 
उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर के कसेर कलां गांव निवासी रिटायर्ड पोस्टमास्टर  फैजुल हसन कादरी (82) ने अपनी पत्नी की याद में एक ताजमहल खड़ा कर दिया। यह  ताजमहल असली ताजमहल से काफ़ी छोटा है,  यह किसी नदी के किनारे भी नहीं है, न इसमें पच्चीकारी का काम है और न ये कीमती पत्थरों से सजाया गया है। बस जज़्बा वही है जो शाहजहाँ का था। अपनी बेगम से बेपनाह मोहब्बत।  
इस मिनी ताजमहल के भीतर फैजुल हसन कादरी की बेगम तजम्मुली की कब्र है। फैजुल हसन ने तजम्मुली के इंतकाल के वक्त ही परिजनों से कह दिया था कि उन्हें भी बेगम की कब्र के निकट ही दफनाया जाए। उन्होंने उसी समय अपनी कब्र भी बनवा ली थी। फैजुल की यह इच्छा थी कि उनकी मौत के बाद उन्हें भी वहीं उनकी 'बेगम' तज्जमुली के बगल में ही दफनाया जाए। मोटरसाइकल से टक्कर लगने के बाद 9 नवंबर, 2018 की सुबह अलीगढ़ के एक अस्पताल में फैजुल हसन कादरी  की मौत हो गई। इस हादसे में मौत के बाद 'गरीबों के शाहजहाँ' और 'आधुनिक दौर के शाहजहाँ' नाम से प्रसिद्ध  फैजुल हसन कादरी के शव को ताजमहलनुमा इमारत के निचले हिस्से में बनीं उनकी बेगम की कब्र के करीब दफनाया गया।  
उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में स्थित यह  ताजमहल शाहजहां के आगरा वाले ताज जितना खूबसूरत बेशक न हो, लेकिन इसे बनवाने की वजह उतनी ही खूबसूरत है। यहां के रिटायर्ड पोस्टमास्टर फैजुल हसन कादरी (82) ने अपनी पत्नी की याद में अपना सबकुछ लगाकर इसे बनवाया था। हालांकि पैसों की कमी के चलते इसका काम पूरा नहीं हो सका। मोहब्बत के नाम पर ताजमहल जैसी इमारत बनाने वाले फैजुल की पत्नी पहले ही इसमें दफन हैं। 

वस्तुत: इस ताजमहल के पीछे भी एक कहानी है।  दिसंबर 2011 में फैजुल हसन कादरी की पत्नी तज्जमुली बेगम का निधन हुआ था। तब मौत से पहले तज्जमुली बेगम ने यह ख्वाहिश जताई थी कि चूंकि उनके कोई औलाद नहीं है इसलिए उनके जाने के बाद उनके नाम और खानदान को कोई कैसे याद रखेगा? इसके लिए अगर हम कुछ अनूठी इमारत बना जाएं तो लोग हमें याद रखेंगे। तभी फैजुल ने तय किया और तज्जुमली से वादा किया कि वह एक मिनी ताजमहल बनवाएंगे। फैजुल ने पत्नी की मौत के बाद  कसेर कलां में फरवरी 2012 में 50 गुणा 50 फुट की इस अद्भुत इमारत को बनवाना शुरू किया। इसके लिए फैजुल ने अपनी सारी जमा-पूंजी खर्च कर दी थी। अपने प्रॉविडेंड फंड की सारी रकम, खेत बेच कर मिली रकम और पत्नी के सारे गहने बेच कर मिली रकम फैजुल इसपर खर्च कर चुके थे। इमारत के निर्माण में क्षेत्र के लोगों ने आर्थिक मदद देनी चाही, लेकिन कहा कि वह इस इमारत के जरिए अपनी बेगम की यादों को संजो रहे हैं, लिहाजा किसी से कोई मदद नहीं लेंगे। फैजुल का सपना था कि उनका ताजमहल भी बिल्कुल वैसा ही हो जैसा आगरा का है। 12 लाख खर्च करने के बावजूद यह ताजमहल बेशक अधूरा रह गया हो लेकिन फिर भी शाहजहां की ही तरह यह तो कहा ही जा सकता है कि वह अपनी बेगम से बेइंतहा प्यार करते थे। फैजुल का यह ताज बलुआ पत्थर, लाल पत्थर, चूने, सीमेंट और लोहे से बना है। इसके चलते बुलंदशहर का यह इलाका आसपास के लोगों में काफी प्रसिद्ध  हो चुका है। बीबीसी को दिए एक साक्षात्कार में फैजुल हसन कादरी ने अपने मनोभावों को कुछ यूँ व्यक्त किया था- 

"छोड़ दो अब ये दुनिया तुम्हारी नहीं, दुनियावालों को बस एक नज़र देख लो। 
आज जन्नत सजी है तुम्हारे लिए, बाग-ए-जन्नत के बर्गोसज़र देख लो। 
जाओ बेगम फ़ैजुल हसन कादरी जन्नत में जाकर अपना घर देख लो।"

फैजुल हसन कादरी और उनके ताजमहल का जिक्र कभी अफ़सानों में  होगा या  नहीं,  लेकिन उनके जाने के बाद भी जब-जब लोग इस इमारत को देखेंगे तो उनकी दास्तां-ए-मोहब्बत का जिक्र जरूर होगा। 


Saturday, October 13, 2018

डाक टिकट वक्त के साथ बन जाते हैं अमूल्य दस्तावेज -डाक निदेशक केके यादव

डाक टिकट किसी भी राष्ट्र की सभ्यता, संस्कृति एवं विरासत के संवाहक हैं, जिनके माध्यम से वहाँ के इतिहास, कला, विज्ञान, व्यक्तित्व, वनस्पति, जीव-जन्तु, राजनयिक सम्बन्ध एवं जनजीवन से जुडे़ विभिन्न पहलुओं की जानकारी मिलती है। हर डाक टिकट के पीछे एक कहानी छुपी हुई है और इस कहानी से आज की युवा पीढ़ी को जोड़ने की जरूरत है। उक्त उद्गार लखनऊ (मुख्यालय) परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ श्री कृष्ण कुमार यादव ने राष्ट्रीय डाक सप्ताह के तहत लखनऊ जीपीओ में 12 अक्टूबर को आयोजित "फिलेटली दिवस' पर बतौर मुख्य अतिथि व्यक्त किये। श्री यादव ने गाँधी जी की 150 वीं जयंती के क्रम में "गाँधी जी द्वारा स्काउट ध्वजारोहण' व "स्काउट रैली : 1938 में गाँधी जी और अब्दुल गफ्फार खान" पर एक स्पेशल पोस्टल कवर भी जारी किया। इस अवसर पर स्कूली बच्चों हेतु सेमिनार, पत्र लेखन, ढाई आखर और प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता भी आयोजित की गयी, जिसमें तमाम स्कूली बच्चों ने भाग लिया। 

 डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव  ने इस अवसर पर अपने सम्बोधन में  कहा कि डाक टिकट सिर्फ भौतिक दूरियों को ही नहीं नापता बल्कि आत्मीयता भी बढ़ाता है। डाक विभाग की माई स्टैम्प सेवा के तहत अब लोगों की फोटो भी डाक टिकटों पर हो सकती है। छोटा सा कागज का टुकड़ा दिखने वाले डाक टिकट वक्त के साथ एक ऐसे अमूल्य दस्तावेज बन जाते हैं, जिनकी कीमत लाखों से करोड़ों रुपए में होती है। भारत में 1852 में जारी प्रथम डाक टिकट 'सिंदे टिकट' की कीमत आज 4 लाख से 35 लाख रुपए तक है तो दुनिया का सबसे महंगा डाक टिकट ब्रिटिश गुयाना द्वारा  सन् 1856 में जारी किया गया एक सेण्ट का डाक-टिकट है जो वर्ष 2014 में रिकॉर्ड 9.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर में बिका।

 श्री यादव ने कहा कि डाक टिकट वास्तव में एक नन्हा राजदूत है, जो विभिन्न देशों का भ्रमण करता है एवम् उन्हें अपनी सभ्यता, संस्कृति और विरासत से अवगत कराता है। यही कारण है कि ई-मेल और सोशल मीडिया के इस दौर में भी आज हाथों से लिखे पत्रों और डाक टिकटों की लाखों-करोड़ों में नीलामी होती है।  
लखनऊ जीपीओ के चीफ पोस्टमास्टर योगेंद्र मौर्य ने बताया कि फिलेटली डे पर तमाम स्कूली बच्चों ने डाकघर की कार्यप्रणाली के बारे में भी सीखा और राष्ट्रीय स्तर की ढाई आखर पत्र लेखन प्रतियोगिता में भाग लिया। 
कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत लखनऊ जीपीओ के चीफ पोस्टमास्टर योगेंद्र मौर्य और आभार ज्ञापन डिप्टी चीफ पोस्टमास्टर मधुसूदन मिश्र ने किया। इस अवसर पर डिप्टी चीफ पोस्टमास्टर टीपी सिंह, सहायक निदेशक आर एन यादव, लखनऊ फिलेटलिक सोसाइटी के अध्यक्ष बीएस भार्गव, उपाध्यक्ष दिनेश चंद्र शर्मा सहित तमाम विभागीय अधिकारी, फिलेटलिस्ट्स इत्यादि उपस्थित रहे .


   विभिन्न प्रतियोगिता के विजेताओं को निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव द्वारा पुरस्कृत किया गया। पत्र-लेखन प्रतियोगिता में जूनियर वर्ग में नितिन कुमार, अक्षिता सिन्हा व नंदिता अग्रवाल और सीनियर वर्ग में एसएन अली फराज, वासिया फातिमा व शताक्षी आनंद को क्रमश: प्रथम, द्वितीय व तृतीय पुरस्कार प्राप्त हुआ।  प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में जूनियर वर्ग में वन्दिता अग्रवाल, नितिन कुमार व प्रांजल और सीनियर वर्ग में नाजिर अली, मो. मियाम व अहमद अली को क्रमश: प्रथम, द्वितीय व तृतीय पुरस्कार प्राप्त हुआ।







Friday, October 12, 2018

India Post celebrates National Postal week : Philately Day in Lucknow GPO

“Philately day’’ was celebrated by Postal Dept. as a part of National Postal Week on 12th Oct 2018. On this occasion various programmes were held at Lucknow, including Philatelic workshop, letter writing competition and quiz competition for students to promote philately.
 On this occasion in inaugural function in Lucknow GPO Mr. Krishna Kumar Yadav, Director Postal Services, Lucknow (HQ) Region said that philately is not the only collection of stamps but it is also includes study of stamps.   Postage Stamps may also help in enriching and strengthening our education system. He said that every stamp has a story of their own and there is a need to link young generation with this story. He called Postage Stamps are “Carrier of emotions”, which carries emotions from one person to another.

 Mr. Krishna Kumar Yadav, Director Postal Services, told that generally Postage Stamps may look like a small piece of paper but there value and importance is much more. In fact Postage Stamp is a tiny ambassador, which travels across countries and teaches them about his country’s civilization, culture and heritage. It is an icon of a country’s people, their belief and philosophy, history, culture, heritage, ambitions and expectations. It is filled with enchanting vitality.
 On this occasion Mr.Yadav also told about interesting story about a European woman of 19th century who had an idea to decorate her dressing room with Postage Stamps, she collected sixteen thousand stamps from her acquaintances and for remaining she released an advertisement in “Times of London” and requested the readers to send used postage stamps to complete her collection. Thereafter collecting of stamps gained popularity as a hobby in the whole world in due course of time.

 Chief Postmaster, Lucknow GPO Mr. Yogendra Maurya  urged to School and Students to open Philatelic Deposit Account in Post Offices to get Stamps at their door step every month. He said that knowledge may also be acquired through Postage Stamps. The winners of various competitions were also distributed prize on the occasion.Function was also graced by RN Yadav, Assistant Director, CP Singh, MP Mishra, Deputy Chief Postmaster, BS Bhargava, President Lucknow Philatelic Society, Dinesh Chandra Sharma, Navin Singh.

Thursday, October 11, 2018

इण्डिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक का क्यूआर कार्ड : अंगूठा लगाइए और पैसा ट्रांसफर करिये


अगर आप अशिक्षित हों, अकाउंट नंबर भूल जाते हों, पिन नंबर के खोने व चोरी होने का डर लगता हो और बैंक के पेचीदा दावपेंच में उलझ जाते हों, तो परेशान होने की जरूरत नहीं। भारतीय डाक विभाग आपके लिए एक नई बैंकिंग सुविधा लेकर आया है आईपीपीबी (इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक)। न फार्म भरना है, न एटीएम चलाना सीखना है। जी हां, यह सच है। लखनऊ मुख्यालय परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि  डाक विभाग आईपीपीबी खाताधारकों को क्यूआर कार्ड (क्विक रिस्पांस कार्ड) दे रहा है, जो आपको किसी भी कला को सीखने की जरूरत खत्म कर देगा। बस, अंगूठा लगाओ, पैसा ट्रांसफर। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि बिना आपके अंगूठे के बिना  न तो कोई पैसा निकाल सकेगा न जमा कर सकेगा। 
इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक का शुभारंभ डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए किया गया। प्रधानमंत्री श्री नरेंद मोदी ने एक सितंबर, 2018 को इसकी शुरुआत की है। नोटबंदी के  बाद बैंक खातों में  जिस तरह से कालेधन को सफेद करने की कवायद हुई, उसको देखते हुई यह सबसे सटीक पहल है। इसको लेने के बाद न तो किसी एटीएम की जरूरत होगी न क्रेडिट कार्ड की। विश्व बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार देश भर में 19 करोड़ वयस्क अभी भी ऐसे हैं जिनके बैंक खाते मौजूद नहीं है।

क्यूआर कार्ड का फायदा

लखनऊ मुख्यालय परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि  आईपीपीबी का क्यूआर कार्ड का सबसे ज्यादा फायदा अशिक्षित और ग्रामीणों को मिलेगा। किसी भी जगह पैसा देने और लेने के लिए इसका इस्तेमाल किया जा सकेगा।  क्यूआर कार्ड को स्कैन करने के बाद हर बार बायोमेट्रिक के तौर पर अंगूठा लगाना होगा। जिसके बाद ही लेन-देन पूरा हो पाएगा। 

क्या है आईपीपीबी 

इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक अर्थात आईपीपीबी डाक विभाग की एक पहल है। लखनऊ मुख्यालय परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि  "आपका बैंक, आपके द्वार' की संकल्पना को लेकर स्टेप डोर बैंकिंग से लेकर ऑनलाइन बैंकिंग व मोबाईल बैंकिंग की सुविधा के लिए इंडिया पोस्ट पेमेंट्स  बैंक की शुरुआत हुई। इसमें खाताधारक अपने खाते में अधिकतम एक लाख रूपये की राशि जमा कर सकेगा। जीरो बैलेंस पर इसमें किसी भी व्यक्ति का खाता खुलेगा। दिन के खत्म होने तक खाते में एक लाख से ज्यादा मौजूद रकम डाकघर से लिंक खाते में ट्रांसफर हो जाएगी। इसमें खाताधारकों को चार प्रतिशत के हिसाब से ब्याज मिलेगा। 

डाकघर के बैंकिंग में बढ़ते कदम 
डाक विभाग भी अब कोर बैंकिंग सिस्टम से जुड़ चुका है। अब कोई भी डाक विभाग का खाताधारक किसी भी जगह से पैसा निकाल सकेगा। सभी डाक विभाग के लिंक हो जाने से यह सुविधा आम बैंकिंग की तरह आसान हो गई है। 

डाकघर बैंकिंग सुविधाएं

- नई चेक बुक के लिए कोई पैसा नहीं
- दूसरी चेक बुक इश्यू कराने पर पैसा नहीं 
- एटीएम के लिए पैसा नहीं
- डाक एटीएम से लेन-देन पर कोई चार्ज नहीं
- एक दिन में 40 हजार की रकम 
- डाक एटीएम को दूसरे एटीएम से महीने में पांच ट्रांजैक्शन फ्री 
----------------------
डाकघर खाते
लखनऊ मुख्यालय परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि  डाकघर में कई तरह के खाते खुलवाए जा सकते हैं।  इसमें बचत खाता,आवर्ती जमा खाता, सावधि जमा खात, मासिक आय योजना, राष्ट्रीय बचत पत्र, किसान विकास पत्र, लोक भविष्य निधि, वरिष्ठ नागरिक बचत योजना, और सुकन्या समृद्धि खाता शामिल हैं। 

प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना का लाभ 
- डाकघर में बैंकिंग सेवा का लाभ लेने वाले उपभोक्ताओं को मात्र 12 रूपये वार्षिक में प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के तहत दो लाख रुपये तक का एक्सीडेंटल बीमा का लाभ दिया जाता है। 

सुकन्या समृद्धि खाता 

बेटियों के लिए सुकन्या समृद्धि योजना एक प्रभावी योजना है। इसमें 10 साल तक की बेटियों का खाता खोला जाता है। न्यूनतम 250 रुपये खाते में जमा करने के साथ खाते को इस्तेमाल बेटियां ही बालिग होने पर कर सकती हैं। 

आवर्ती जमा योजना 
श्रमिक, कामगार, बुजुर्ग से लेकर विद्यार्थियों तक के लिए यह सबसे अहम योजना है। किसी गुल्लक की तरह इस योजना का लाभ उठाया जा सकता है, जिसमें ब्याज भी मिलता है। 
----------------------------

ऐतिहासिक परिदृश्य :
कोलकाता में पहली बार एक नवंबर 1833 को सरकारी बचत खाता योजना अस्तित्व में आई। बाद में बचत खाता योजना का विस्तार करने के लिए जिला बचत खाता योजना का आरंभ हुआ। जिला बचत बैंकों की स्थापना 1870 में हुई। इस प्रकार, डाकघर बचत बैंक की स्थापना बॉम्बे, मद्रास और कलकत्ता के तीन प्रेसीडेंसी शहरों को छोड़कर, एजेंसी विभाग के रूप में हुई। डाकघरों में बचत बैंक शुरू करने से पहले देश में बचत बैंक की संख्या 180 थी, लेकिन डाकघर बचत बैंक योजना के बाद देश में बचत बैंक की संख्या 180 से 4243 तक पहुंची और पहले साल के अंत तक करीब 40 हजार उपभोक्ता जुड़े और 28 लाख रुपये की राशि जमा हुई।

इण्डिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक की पहल : अंगूठा लगाइए और पैसा  ट्रांसफर करिये 
(साभार : हिंदुस्तान, लखनऊ)

Wednesday, October 10, 2018

उत्तर प्रदेश के सभी प्रधान डाकघरों से होगी एलईडी बल्ब, ट्यूबलाइट और पंखों की बिक्री

अब डाकघर बिजली बचाने में भी योगदान देंगे। उत्तर प्रदेश के डाक घरों से अब  एलईडी बल्ब, ट्यूबलाइट और पंखों की भी बिक्री की जाएगी। डाक विभाग इसे भारत सरकार की “उजाला” योजना के तहत क्रियान्वित करेगा। उत्तर प्रदेश के चीफ पोस्टमास्टर जनरल श्री वीपी सिंह ने इसका शुभारम्भ लखनऊ परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ श्री कृष्ण कुमार यादव और निदेशक मुख्यालय श्री राजीव उमराव की उपस्थिति में लखनऊ जीपीओ में विश्व डाक दिवस पर आयोजित एक कार्यक्रम में विभिन्न ग्राहकों को एलईडी बल्ब सौंपकर किया। 
इस अवसर पर चीफ पोस्टमास्टर जनरल श्री वीपी सिंह ने कहा कि यह डाक विभाग की ऊर्जा संरक्षण के अंतर्गत की गई पहल है, जिससे लोगों को काफी फायदा होगा।  प्रारम्भिक स्तर पर प्रदेश के प्रधान डाकघरों व मुख्य डाकघरों से इसकी बिक्री आरम्भ की जाएगी, जिसे चरणबद्ध रूप में अन्य डाकघरों तक भी ले जाया जायेगा।
लखनऊ (मुख्यालय) परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि डाक विभाग ने टेक्नालाजी के साथ अपने को अपडेट करते हुये कस्टमर-फ्रेंडली सेवाओं का दायरा बढ़ाया है और यह सेवा भी उसी कड़ी का अंग है। इसके तहत एलईडी बल्ब 70 रूपये, ट्यूबलाइट 220 रूपये और पंखा 1110 रूपये के किफायती मूल्य पर डाकघरों द्वारा उपलब्ध कराया जायेगा। फ़िलहाल इसकी शुरुआत बल्ब से की गई है और शीघ्र ही ट्यूबलाइट और पंखे भी बिक्री हेतु उपलब्ध कराये जायेंगे।

गौरतलब है कि ईईसीएल और भारतीय डाक विभाग के बीच एक समझौता के तहत यह कार्य किया जा रहा है। भारत सरकार की योजना है कि गांव-गांव तक एलईडी बल्ब का उपयोग हो, जिससे विद्युत ऊर्जा का अधिक से अधिक बचाव किया जा सके। यह बल्ब नौ वाट का है और  इस बल्ब की तीन साल की गारंटी भी दी जा रही है।

इस अवसर पर चीफ पोस्टमास्टर लखनऊ जीपीओ योगेन्द्र मौर्य सहायक निदेशक आर. एन यादव, भोला सिंह, डिप्टी चीफ पोस्टमास्टर एमपी मिश्र, टीपी सिंह डाक निरीक्षक कोमल दयाल सहित तमाम विभागीय अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।










Tuesday, October 9, 2018

India Post Celebrates 'World Post day' & 'National Postal Week' - 9th to 15th October

डाक विभाग देश के सबसे पुराने विभागों में से एक है जो कि देश के सामाजिक-आर्थिक विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह एक ऐसा संगठन है जो न केवल देश के भीतर बल्कि देश की सीमाओं से बाहर अन्य देशों तक पहुँचने में भी हमारी  मदद करता है। भूमंडलीकरण की अवधारणा सबसे पहले दुनिया भर में भेजे जाने वाले पत्रों के माध्यम से ही साकार हुई। पूरे विश्व में हर वर्ष 9 अक्टूबर को "अंतर्राष्ट्रीय डाक दिवस" और उसी क्रम में 9-15 अक्टूबर तक भारत में राष्ट्रीय डाक सप्ताह मनाया जायेगा। 
9 अक्टूबर को "अंतर्राष्ट्रीय डाक दिवस" मनाये जाने के बारे में लखनऊ (मुख्यालय) परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएं कृष्ण कुमार यादव ने कहा  कि 'एक विश्व-एक डाक प्रणाली' की अवधारणा को साकार करने हेतु 9 अक्टूबर, 1874 को 'यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन' की स्थापना बर्न, स्विटजरलैण्ड में की गई, जिससे विश्व भर में एक समान डाक व्यवस्था लागू हो सके। भारत प्रथम एशियाई राष्ट्र था, जो कि 1 जुलाई 1876 को इसका सदस्य बना। कालांतर में वर्ष 1969 में टोकियो, जापान में सम्पन्न यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन कांग्रेस में इस स्थापना दिवस को "विश्व डाक दिवस" के रूप में मनाने हेतु घोषित किया गया।  तब से पूरी दुनिया में  इस दिन को प्रतिवर्ष धूमधाम मनाया जाता है। विश्व डाक दिवस के क्रम में ही पूरे सप्ताह को राष्ट्रीय डाक सप्ताह के रूप में मनाया जायेगा, जिस दौरान तमाम कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे।



डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव, ने बताया कि लखनऊ परिक्षेत्र के डाक मंडलों में भी 'विश्व डाक दिवस' और तदन्तर 9 से 15 अक्टूबर तक 'राष्ट्रीय डाक सप्ताह' का आयोजन किया जा रहा है। इस क्रम में 9 अक्टूबर, 2015 को  ’विश्व डाक दिवस’ एवं  राष्ट्रीय डाक सप्ताह के तहत 10 अक्टूबर को बैंकिंग दिवस, 11  अक्टूबर को डाक जीवन बीमा दिवस, 12 अक्टूबर को फिलेटली दिवस, 13  अक्टूबर को व्यवसाय विकास दिवस और 15 अक्टूबर को मेल दिवस के रूप में मनाया जायेगा।  श्री यादव ने कहा कि इस दौरान जहां सेवाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार एवं राजस्व अर्जन में वृद्धि पर जोर दिया जायेगा, वहीं उत्कृष्टता हेतु डाक कर्मियों का सम्मान, कस्टमर मीट, डाक टिकट प्रदर्शनी, माई स्टैम्प, डाक सेवाओं की कार्य-प्रणाली को समझने हेतु स्कूली बच्चों द्वारा डाकघरों  का भ्रमण, पत्र लेखन प्रतियोगिता, बचत बैंक, सुकन्या समृद्धि योजना व डाक जीवन बीमा मेला, इत्यादि तमाम कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे। 

लखनऊ (मुख्यालय) परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएं कृष्ण कुमार यादव ने इस दौरान लखनऊ जीपीओ का विजिट कर 'विश्व डाक दिवस’ और  9-15 अक्टूबर तक मनाये जाने वाले  'राष्ट्रीय डाक सप्ताह' की तैयारियों का जायजा भी लिया।  इस दौरान चीफ पोस्टमास्टर श्री योगेंद्र कुमार मौर्य सहित तमाम अधिकारी उपस्थित रहे।