Monday, August 7, 2017

राखी के धागों की अहमियत अभी भी बरकरार, विदेशों में भी राखी का क्रेज : डाकघरों द्वारा अमेरिका, ब्रिटेन सहित तमाम देशों में भेजी गई राखियाँ

रेशम के धागों ने सोशल मीडिया पर चल रही वर्चुअल रखियों को बौना साबित कर दिया है। वाट्सएप, फेसबुक, स्काइपी, टेलीग्राम जैसे बड़े सोशल प्लेटफॉर्म को छोडकर बहनें, भाईयों की कलाइयाँ सजाने के लिए डाक से रंग-बिरंगी राखियाँ भेजना पसंद कर रही हैं । डाक विभाग भी इसके लिए मुस्तैद है और तमाम तैयारियाँ किए हुये है । राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर के निदेशक डाक सेवाएँ श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि वर्चुअल होते रिश्तों के बीच राखी के धागों की अहमियत अभी भी बरकरार है। तभी तो आज भी बहनें देश के साथ-साथ विदेशों में रह रहे अपने भाईयों को  डाक से राखी भेजना नहीं भूलती हैं और भाई भी इस दिन का बेसब्री से इंतज़ार करते हैं।

राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर के निदेशक डाक सेवाएँ श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि जोधपुर में इस दौरान एक लाख से ज्यादा राखियाँ पोस्टमैनों द्वारा वितरित की गईं और 85  हजार से ज्यादा राखियॉं जोधपुर के डाकघरों से बुक होकर देश-विदेश भेजी गईं। राखियों के त्वरित निस्तारण हेतु डाक विभाग द्वारा डाकघरों से लेकर रेलवे मेल सर्विस और सॉर्टिंग हब तक में अतिरिक्त स्टाफ लगाकर विशेष प्रबंध किये गए। 


राखी का क्रेज देश से बाहर विदेशों में भी खूब है। डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि जोधपुर से विदेशों के लिए भी स्पीड पोस्ट और रजिस्टर्ड डाक द्वारा खूब राखियाँ भेजी गईं। इनमें ज्यादातर राखियाँ संयुक्त राज्य अमेरिका, आस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब  और  कनाडा भेजी गई हैं। खाड़ी देशों  मे डाक भेजने वाले अधिकतर लोग मध्यम वर्ग के हैं। 

विदेशों में राखियाँ भेजने के लिए बहनें पहले से ही तैयारी करने लगती हैं, ताकि सही समय पर भाईयों को राखी पहुँच जाये और उनकी कलाई सूनी न रहे। श्री यादव ने बताया कि पिछले एक माह में 650 से अधिक राखियाँ जोधपुर के डाकघरों द्वारा विदेशों के लिए बुक की गईं। 

सावन के महीने में राखी सुरक्षित पहुंचे, इसके लिए भी डाक विभाग ने विशेष प्रबंध किये । रक्षाबंधन भेजने हेतु  वाटरप्रूफ डिजायनर लिफाफों का प्रबंध किया गया । प्रवर डाक अधीक्षक श्री बीआर सुथार ने बताया कि प्रधान डाकघर, जोधपुर द्वारा 5,342 लिफाफों की बिक्री की गई। 

रक्षाबंधन का त्यौहार भाई-बहन के प्यार और स्नेह का प्रतीक है, पर अब इसका दायरा भाई-बहन तक ही सीमित नहीं रहा। चर्चित ब्लॉगर व्  लेखिका सुश्री आकांक्षा यादव कहती हैं कि हाईटेक होते समाज में भी रिश्तों का जुड़ाव ख़त्म नहीं होता, तभी तो राखी के धागों की आत्मीयता अभी भी बरकरार है।



राखी के धागों की अहमियत अभी भी बरकरार : जोधपुर में एक लाख से ज्यादा राखियाँ पोस्टमैनों द्वारा हुई वितरित
विदेशों में भी राखी का क्रेज : डाकघरों द्वारा अमेरिका, ब्रिटेन सहित तमाम देशों में भेजी गई सैकड़ों राखियाँ



 देश में भाई-बहन के रिश्ते को प्रगाढ़ बनाने वाले रक्षाबंधन के त्यौहार पर देश-विदेशों में रह रहे भाइयों को भी बहनों ने डाक से हजारों राखियां भेजी है...
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