Friday, December 5, 2014

डाक विभाग का होगा कायाकल्प : बीमा, बैंक, ई-कॉमर्स के क्षेत्र में लाने की सिफारिश

डाकघरों का कायाकल्प करने के लिए बनी सुब्रमण्यम समिति ने तमाम ऐसे सुझाव दिए हैं, कि उसकी रिपोर्ट भी यदि उसी गंभीरता से सरकार लागू कर दे तो जल्द ही देश के डाकघरों का हुलिया ही बदल जाएगा।  भारतीय डाक में बदलाव करने पर सुझाव देने के लिए  पूर्व कैबिनेट सचिव टीएसआर सुब्रमण्यम की अध्यक्षता में गठित इस समिति ने तीन महीने के भीतर गुरुवार, 4 दिसंबर 2014  को अपनी रिपोर्ट दे दी। रिपोर्ट में डाक विभाग को तत्काल रूप से बैंकिंग, बीमा व ई-कॉमर्स क्षेत्र में लाने की सिफारिश की गई है। वहीं, आधार कार्ड व सरकारी पेंशन सेवा क्षेत्र में भी डाक विभाग की सेवा लेने की बात कही गई है।  साथ ही इंडिया पोस्ट में कॉरपोरेट सेक्टर के बीच बिजनेस टू बिजनेस सेवा देने के लिए एक नई शाखा बनाने का सुझाव दिया गया है। 

संचार व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने इन सुझावों के बारे में आश्वासन दिया कि सरकार इसे प्राथमिकता के तौर पर लेगी और जल्द से जल्द फैसला किया जाएगा।  उन्होंने यह भी कहा कि डाक विभाग की मदद से कॉमन सर्विस सेंटर के जरिए ई-डिलीवरी सेवा को अंजाम दिया जा सकता है। प्रसाद ने कहा कि ई-कॉमर्स के क्षेत्र में डाक विभाग बड़ी भूमिका निभा सकता है। डाक विभाग अपने नेटवर्क के माध्यम से मधुबनी पेंटिंग्स से लेकर तिरुपुर के टेक्सटाइल तक की बिक्री कर सकता है।

कमेटी की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय डाक विभाग के पास 1.55 लाख पोस्टमैन का नेटवर्क है जिसका इस्तेमाल बिजनेस कॉरस्पांडेंट के रूप किया जा सकता है। इनके माध्यम से ग्रामीण इलाके में स्वास्थ्य, फसल, दुर्घटना व अन्य प्रकार की बीमा सेवा को शुरू किया जा सकता है। डाक विभाग को इन सेवाओं से जोड़ने के लिए अलग-अलग सब्सिडियरी कंपनी बनाने की सिफारिश की गई है। समिति ने सुझाव दिया है कि भारतीय पोस्ट को पांच अलग-अलग सहयोगी इकाइयों (सब्सिडियरी) में बांट दिया जाना चाहिए। एक सब्सिडियरी डाक व्यवस्था का मौजूदा काम को जारी रखेगी। इसके अलावा बैंकिंग, बीमा व ई-कॉमर्स में अलग-अलग सहयोगी इकाइयां काम करेंगी। पांचवी सब्सिडियरी गांवों में शहरों जैसी सेवाओं का पहुंचाने व बिजनेस टू बिजनेस सेवाओं के लिए काम करेगी। समिति ने तीन सौ तरह की सेवाओं को चिन्हित किया है जो यह सब्सिडियरी कर सकती है। इनमें सिर्फ डाक वाली मुख्य सब्सिडियरी सब्सिडी वाले मॉडल पर काम करेगी, लेकिन अन्य सभी काम मुनाफे के आधार पर होगा।

सुब्रमण्यम ने बताया, 'हमारी सिफारिश के आधार पर अगर कदम उठाए जाते हैं तो भारतीय डाकघरों में कार्यरत किसी भी कर्मचारी की नौकरी नहीं जाएगी, बल्कि पांच लाख नई नौकरियां पैदा होंगी।' ग्रामीण जनता को बहुत ही तेजी से वित्तीय समावेश का फायदा पहुंचाया जा सकेगा। बैंकिंग से जुड़ी सब्सिडियरी का नाम पोस्ट बैंक ऑफ इंडिया (भारतीय डाक बैंक) रखा जा सकता है। यह बैंक हर तरह की बैंकिंग सेवा देगा। इसी तरह से बीमा क्षेत्र में गठित कंपनी जीवन बीमा, फसल बीमा व स्वास्थ्य बीमा की सुविधा दे सकती है। चूंकि ई-कॉमर्स भारत में तेजी से विकसित हो रहा है, इसलिए भारतीय डाक को इसका फायदा उठाने के लिए अभी से मुस्तैद हो जाना चाहिए।

देश भर में 1.50 लाख से ज्यादा डाकघर हैं, जो बैंक, बीमा व ई-कॉमर्स की शाखा के लिए रीढ़ की हड्डी का काम कर सकते हैं। फिलहाल भारतीय डाक के राजस्व में सालाना 48 फीसद की वृद्धि हो रही है। इसके उलट खर्चे में 78 फीसद का इजाफा हो रहा है। इसकी तमाम सेवाएं घाटे में चल रही हैं।

समिति के सुझाव--
1. बैंक, बीमा व ई-कॉमर्स के लिए तीन सब्सिडियरी बनाई जाएं
2. पोस्ट बैंक ऑफ इंडिया के नाम से शुरू करे बैंकिंग सेवा
3. कॉरपोरेट सेक्टर की मदद के लिए बने अलग इकाई
4. तीन सौ तरह की सेवाएं दे सकता है भारतीय डाक
5. गांवों में शहरों जैसी सेवा पहुंचाने में हो डाकघरों का इस्तेमाल

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देश भर में फैले डाकघरों के नेटवर्क का लाभ उठाने के लिए गठित कार्यबल ने बैंकिंग, बीमा और ई-कॉमर्स के क्षेत्र में डाकघर के सेवा-विस्तार के लिए संचार एवं सूचना प्रो़द्योगिकी  मंत्रालय के तहत डाक विभाग के मातहत होल्डिंग कंपनी के अंग के रुप में तीन सहायक कंपनियां गठित करने का सुझाव दिया है। पूर्व कैबिनेट सचिव श्री टीसीआर सुब्रमणियन के नेतृत्व में कार्यबल की रिपोर्ट आज नई दिल्ली में संचार एवं सूचना तकनीक मंत्री श्री रवि शंकर प्रसाद को सौंपी गई।

सभी पांच सहायक कंपनियों को रणनीतिक व्यापार इकाई – एस बी यू कहा जाएगा। दो अन्य सहायक कंपनियां व्यावसायिक आधार पर आम लोगों के लिए बिल संग्रहण और आवेदन पत्र, दस्तावेज़ एवं प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराने जैसेी ई-सेवाएं और थर्ड पार्टी उत्पाद के वितरण का काम करेंगी। अन्य सहायक कंपनी एजेंसी आधार पर आधार राशन कार्ड, विकास पत्र जैसी सरकारी सेवाएं वितरित करेंगी। रिपोर्ट में यह भी प्रस्तावित है कि प्रत्येक रणनीतिक व्यापार इकाई – एस बी यू का अपना स्‍वतंत्र बोर्ड होगा जो व्‍यावसायिक तौर पर लाभ के लिए काम करेगा। प्रत्‍येक एस बी यू समय-समय पर भागीदारी का आयोजन करेगा। इन कामों को कानूनी आधार देने के लिए एक नया डाक कानून लाना भी प्रस्‍तावित है।

रिपोर्ट स्‍वीकार करने के बाद संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि कार्यबल की सिफारिशों पर प्राथमिकता के आधार पर संरचनात्‍मक प्रतिक्रिया दी जायेगी। उन्‍होंने बताया कि देश में डाक विभाग की संभावनाओं को निखारने की जरूर महसूस होने पर उन्‍होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी से आग्रह किया था जिस पर उन्‍होंने कार्यबल गठित करने की अनुमति देकर तुरंत प्रतिक्रिया दी थी। उन्‍होंने उम्‍मीद जताई कि डाक विभाग के विशाल नेटवर्क का देश में ई-कामर्स बूम को देखते हुए पूरा दोहन किया जायेगा। उन्‍होंने आश्‍वस्‍त किया कि विभाग की पुनर्संरचना के दौरान किसी भी कर्मचारी को हटाया नहीं जायेगा। उन्‍होंने यह भी बताया कि पोस्‍ट कार्ड और अन्‍य डाक सेवाओं की कीमत में किसी भी तरह की बढ़ोतरी नहीं की जायेगी।
इससे पहले कार्यबल के अध्‍यक्ष श्री टीसीआर सुब्रमणियन ने कहा कि देश के 6 लाख से ज्‍यादा गांवों में बैंकिंग और वित्‍तीय सेवाएं उपलब्‍ध नहीं हैं, ऐसे में यह महसूस किया गया कि ग्रामीण गरीबों के वित्‍तीय समावेशन में योगदान के लिए व्‍यावसायिक तौर पर संगठित भारतीय पोस्‍ट बैंक प्रमुख भूमिका निभायेगा। उन्‍होंने यह भी उम्‍मीद जताई कि अगले 3 से 5 साल में 5 लाख से ज्‍यादा नई नौकरियों उपलब्‍ध की जा सकेंगी।

इस साल 21 अगस्‍त को गठित कार्यबल के सदस्‍य निम्‍नलिखित थे :-

1. श्री टीसीआर सुब्रमणियन, पूर्व कैबिनेट सचिव-अध्‍यक्ष
2. श्री टी वी मोहन दास पाई, बैंगलोर-सदस्‍य
3. श्री जी एन बाजपई, मुंबई, सेबी के पूर्व अध्‍यक्ष-सदस्‍य
4. श्री रवीन्‍द्र एच. ढोलकिया, आईआईएम, अहमदाबाद-सदस्‍य
5. श्री आर एस शर्मा, सचिव (ई एण्‍ड आईटी), भारत सरकार – सदस्‍य
6. श्री एल सी गोयल, सचिव, ग्रामीण विकास विभाग, भारत सरकार – सदस्‍य
7. श्री राकेश गर्ग, सचिव दूरसंचार विभाग, भारत सरकार, - सदस्‍य
8. सुश्री कावेरी बनर्जी सचिव डाक विभाग- सदस्‍य
9. श्री कमलेश्‍वर प्रसाद, डाक विभाग – सदस्‍य
10. श्री वासुमित्र, सीपीएमजी, दिल्‍ली सर्कल, डाक विभाग –सदस्‍य सचिव   
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