Monday, February 19, 2024

First airmail service in the world was introduced in Prayagraj on 18th February, 1911 - Postmaster General Krishna Kumar Yadav

डाक सेवाओं ने पूरी दुनिया में एक लम्बा सफर तय किया है। प्रयागराज को यह सौभाग्य प्राप्त है कि दुनिया की पहली हवाई डाक सेवा यहीं से आरम्भ हुई। वाराणसी एवं प्रयागराज परिक्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि यह ऐतिहासिक घटना 113 वर्ष पूर्व 18 फरवरी, 1911 को प्रयागराज में हुई थी। संयोग से उस साल कुंभ का मेला भी लगा था। उस दिन दिन  फ्रेंच पायलट मोनसियर हेनरी पिक्वेट ने एक नया इतिहास रचा था। वे अपने विमान में प्रयागराज से नैनी के लिए 6500 पत्रों को अपने साथ लेकर उड़े। विमान था हैवीलैंड एयरक्राफ्ट और इसने दुनिया की पहली सरकारी डाक ढोने का एक नया दौर शुरू किया।

पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव के अनुसार प्रयागराज में उस दिन डाक की उड़ान देखने के लिए लगभग एक लाख लोग इकट्ठे हुए थे जब एक विशेष विमान ने शाम को साढ़े पांच बजे यमुना नदी के किनारों से उड़ान भरी और वह नदी को पार करता हुआ 15 किलोमीटर का सफर तय कर नैनी जंक्शन के नजदीक उतरा जो प्रयागराज के बाहरी इलाके में सेंट्रल जेल के नजदीक था। आयोजन स्थल एक कृषि एवं व्यापार मेला था जो नदी के किनारे लगा था और उसका नाम ‘यूपी एक्जीबिशन’ था। इस प्रदर्शनी में दो उड़ान मशीनों का प्रदर्शन किया गया था। विमान का आयात कुछ ब्रिटिश अधिकारियों ने किया था। इसके कलपुर्जे अलग अलग थे जिन्हें आम लोगों की मौजूदगी में प्रदर्शनी स्थल पर जोड़ा गया।  प्रयागराज से नैनी जंक्शन तक का हवाई सफ़र आज से 113  साल पहले मात्र  13 मिनट में पूरा हुआ था।


पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि हालांकि यह उड़ान महज छह मील की थी, पर इस घटना को लेकर प्रयागराज में ऐतिहासिक उत्सव सा वातावरण था। ब्रिटिश एवं कालोनियल एयरोप्लेन कंपनी ने जनवरी 1911 में प्रदर्शन के लिए अपना एक विमान भारत भेजा था जो संयोग से तब प्रयागराज आया जब कुम्भ का मेला भी चल रहा था। वह ऐसा दौर था जब जहाज देखना तो दूर लोगों ने उसके बारे में ठीक से सुना भी बहुत कम था। ऐसे में इस ऐतिहासिक मौके पर अपार भीड होना स्वाभाविक ही था। इस यात्रा में हेनरी ने इतिहास तो रचा ही पहली बार आसमान से दुनिया के सबसे बडे प्रयाग कुंभ का दर्शन भी किया।

 पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव के अनुसार कर्नल वाई विंधाम ने पहली बार हवाई मार्ग से कुछ मेल बैग भेजने के लिए डाक अधिकारियों से संपर्क किया जिस पर उस समय के डाक प्रमुख ने अपनी सहर्ष स्वीकृति दे दी। मेल बैग पर ‘पहली हवाई डाक’ और ‘उत्तर प्रदेश प्रदर्शनी, इलाहाबाद’ लिखा था। इस पर एक विमान का भी चित्र प्रकाशित किया गया था। इस पर पारंपरिक काली स्याही की जगह मैजेंटा स्याही का उपयोग किया गया था। आयोजक इसके वजन को लेकर बहुत चिंतित थे, जो आसानी से विमान में ले जाया जा सके। प्रत्येक पत्र के वजन को लेकर भी प्रतिबंध लगाया गया था और सावधानीपूर्वक की गई गणना के बाद सिर्फ 6,500 पत्रों को ले जाने की अनुमति दी गई थी। विमान को अपने गंतव्य तक पहुंचने में 13 मिनट का समय लगा।

 भारत में डाक सेवाओं पर तमाम लेख और एक पुस्तक 'इंडिया पोस्ट : 150 ग्लोरियस ईयर्ज़' लिख चुके श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया  कि इस पहली हवाई डाक सेवा का विशेष शुल्क छह आना रखा गया था और इससे होने वाली आय को आक्सफोर्ड एंड कैंब्रिज हॉस्टल, इलाहाबाद को दान में दिया गया। इस सेवा के लिए पहले से पत्रों के लिए खास व्यवस्था बनाई गई थी। 18 फरवरी को दोपहर तक इसके लिए पत्रों की बुकिंग की गई। पत्रों की बुकिंग के लिए ऑक्सफोर्ड कैंब्रिज हॉस्टल में ऐसी भीड लगी थी कि उसकी हालत मिनी जी.पी.ओ सरीखी हो गई थी। डाक विभाग ने यहाँ तीन-चार कर्मचारी भी तैनात किए थे। चंद रोज में हॉस्टल में हवाई सेवा के लिए 3000 पत्र पहुँच गए। एक पत्र में तो 25 रूपये का डाक टिकट लगा था। पत्र भेजने वालों में प्रयागराज की कई नामी गिरामी हस्तियाँ तो थी हीं, राजा महाराजे और राजकुमार भी थे।










18 फरवरी 1911 को प्रयागराज में आरम्भ हुई थी दुनिया की पहली हवाई डाक सेवा - पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव

एयरमेल सेवा ने पूरा किया 113 सालों का सफरनामा, प्रयागराज से हुई थी शुरुआत

Postal services have come a long way all over the world.  Prayagraj has the privilege that the world's first air mail service started from here.  Postmaster General of Varanasi and Prayagraj Region  Mr. Krishna Kumar Yadav said that this historic event took place 113 years ago on 18th February 1911 in Prayagraj. Incidentally, Kumbh Mela was also held that year.  On that day, French pilot Monsieur Henri Pequet created a new history.  He took 6,500 letters from Prayagraj to Naini with him in his plane. The aircraft was Heavy land Aircraft and launched a new round of the world's first official postal carriage.

 According to Postmaster General Mr. Krishna Kumar Yadav, about one lakh people gathered at Prayagraj to see the Postal flight that day when a special aircraft took off from the banks of river Yamuna at around 5.30 PM, crossed the river after travelling for 15 kilometres and landed near Naini Junction which was near the Central Jail on the outskirts of Prayagraj. The venue of the event was an agricultural and trade fair which was on the banks of the river and was named 'UP Exhibition'. Two flying machines were on display at this exhibition.  The aircraft was imported by some British officers.  It's parts were unassembled which were assembled at the exhibition site in the presence of common people.  The air journey from Prayagraj to Naini Junction was completed 113 years ago in just 13 minutes.

 Postmaster General Mr. Krishna Kumar Yadav said that although this flight was just six miles, there was a historic festive atmosphere in Prayagraj.  In January 1911, the British and Colonial Aeroplane Company sent one of its aircraft to India, which incidentally came to Prayagraj when the Kumbh Mela was also going on.  It was such a time when people hardly heard about aeroplane.  In such situation, it was natural to be overcrouded on this historic occasion.  In this journey, Henry created history and for the first time, he also saw the world's largest Prayag Kumbh from the sky.

  According to Postmaster General Mr. Krishna Kumar Yadav, Colonel Y. Wyndham approached the postal authorities for sending some mail bags by air, to which the then Postal head gave his approval. The mail bag had 'First Air Mail' and 'Uttar Pradesh Exhibition, Allahabad' written on it.  A picture of an aircraft was also published on it.  Magenta ink was used instead of traditional black ink.  The organizers were very concerned about its weight, which could be easily carried in the aircraft.  Restrictions were also placed on the weight of each letter and only 6,500 papers were allowed to be carried after careful calculations.  It took the aircraft 13 minutes to reach its destination.

  Mr. Krishna Kumar Yadav, who has written several articles and a book 'India Post: 150 Glorious Years' on postal services in India, said that the special duty of this first air mail service was kept at six ana and the income from this was donated to Oxford and Cambridge hostels, Allahabad.  A special arrangement was made for this service in advance.  Letters were booked for this till noon on 18 February.  The Oxford Cambridge hostel was so crowded for booking of letters that its condition had become like mini GPO.  The postal department also deployed three-four employees here.  3000 letters for air service reached the hostel within a few days.  Among the letters, a letter was having postage stamp of Rs 25.  There were many famous celebrities of Prayagraj, Raja Maharaja and Rajkumar among those who sent letters.

In February 1911, the first airmail service in the world was started in Prayagraj - Postmaster General Krishna Kumar Yadav

Airmail service completed 113 years of journey, started in Prayagraj



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