Tuesday, March 12, 2013

डाक विभाग ने कुम्भ पर्व के अंतिम स्नान महाशिवरात्रि पर जारी किया विशेष डाक आवरण

डाक विभाग द्वारा कुम्भ पर्व में महाशिवरात्रि के स्नान (10 मार्च) पर विशेष आवरण का विरूपण एवं विमोचन जारी किया गया। इलाहाबाद प्रधान डाकघर में आयोजित कार्यक्रम में राजर्षिटंडन मुक्तविश्वविधालय के कुलपति प्रो. ए॰ के॰ बक्शी ने पोस्टमास्टर जनरल लेफ्टिनेंट कर्नल ए॰ के. गुप्ता व  निदेशक डाक सेवाएँ  कृष्ण कुमार यादव के साथ विशेष आवरण का विरूपण एवं विमोचन किया।

      इस अवसर पर अपने उदबोधन में मुख्य अतिथि प्रो॰ ए॰ के॰ बक्शी ने कहा कि भारत में प्राचीन काल से ही धर्म एवं आध्यात्म की एक लम्बी परंपरा रही है और कुम्भ उन सभी को आत्मसात करते हुए एक लघु भारत का एहसास है। उन्होने कुम्भ पर्व के अंतिम स्नान महाशिवरात्रि पर जारी विशेष आवरण की सराहना करते हुए कहा कि इनके माध्यम से प्रयाग एवं कुम्भ की संस्कृति देश ही नहीं विदेशों में भी सुवासित होगी। पोस्टमास्टर जनरल लेफ्टिनेंट कर्नल ए॰ के॰ गुप्ता ने महाशिवरात्रि पर्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि महाशिवरात्रि का पर्व फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी के दिन मनाया  जाता है। धर्मग्रंथों के अनुसार, इसी दिन भगवान शंकर और भगवती पार्वती का विवाह हुआ था। यह पर्व हमें कल्याणकारी कार्य करने के लिए प्रेरित करता है।
      इलाहाबाद क्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ  कृष्ण कुमार यादव ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि जैसे कुम्भ में भिन्न मत-मतांतर एवं धर्मों के अनुयायियों का समावेश होता है वैसे ही भगवान शंकर की प्रकृति भी समस्त विरोधाभाषों को समावेशित करते हुए एकता का संदेश देती है। श्री यादव ने कहा कि धर्म जीवन का एक मूलभूत तत्व है पर इसे आज सामाजिक सरकारों के साथ जोड़ने की जरूरत है।
      कार्यक्रम का संचालन सहायक निदेशक  आर॰ एन॰ यादव, अतिथियों का स्वागत प्रवर अधीक्षक डाकघर इलाहाबाद  रहमतुल्लाह व आभार ज्ञापन  ए॰ के॰ श्रीवास्तव, कुम्भ मेला अधिकारी (डाक) द्वारा किया गया। कार्यक्रम में सहायक निदेशक मधुसुदन प्रसाद मिश्रा, सीनियर पोस्टमास्टर टी. बी. सिंह, अधीक्षक आर॰ एन॰ यादव, निरीक्षक दीपक कुमार, अर्जित सोनी, रजनीश श्रीवास्तव सहित तमाम अधिकारी, कर्मचारी, फिलाटेलिस्ट, साहित्यकार आदि उपस्थित थे।

Sunday, March 10, 2013

Postal Department issued Special Cover on ‘Mahashivratri’ during Kumbh Mela at Prayagraj


Postal Department issued Special Cover and cancellation on ‘Mahashivratri’ on 10 March, 2013 in a programme organized at Allahabad Head Post Office. Special cover and cancellations were issued by Prof. A. K. Bakshi, Vice-chancellor of Rajarshi Tandon Open University, Allahabad along with Postmaster General, Allahabad Lt. Col. A. K. Gupta and Director Postal Services, Allahabad Mr. Krishna Kumar Yadav.
 
On the occasion in his address Chief Guest Prof. A. K. Bakshi said that in India, since the ancient times we have a rich tradition of spirituality, and Kumbh portrays a small India which assimilates this tradition. While praising the Special Cover issued on Mahashivratri, he said that through this cover the culture of Prayag and Kumbh will spread throughout the country and the world. On the occasion Postmaster General Lt. Col. A. K. Gupta explained the significance of Mahashivratri and told that the festival of Mahashivratri is celebrated on the fourteenth day in ‘Krishna Paksha’ of ‘Falgun’ month of Hindi calendar. As per our ancient scriptures this is the day when Lord Shiva and Goddess Parvati got married. This festival motivates us to indulge in welfare works of public interest.
 
Addressing the programme Mr. Krishna Kumar Yadav, Director Postal Services, Allahabad Region said that as the followers of various religions and spiritual beliefs assimilate at Kumbh similarly the nature of Lord Shiva assimilates all paradoxes and gives a message of unity and harmony. Mr. Yadav also said that religion is an integral aspect of life and today there is a need to link it with social concerns.
 
The proceedings of the programme were conducted by Assistant Directors Mr. R. N. Yadav. While Mr. Rahmatullah, Senior Superintendent of Post offices, Allahabad welcomed the guests, note of thanks were given by Mr. A. K. Srivastava, Kumbh Meladhikari (Postal). In the programme a number of people including Assistant Director Madhusudan Mishra, Mr. T. B. Singh, Senior Postmaster, Mr. R. N. Yadav, Assistant Superintendent, Inspector Deepak Kumar, Arjit Soni, Rajneesh Srivastava and many officers, employees, Philatelists etc. were present.

Prasad of Kashi at your door-step by Speed Post

ALLAHABAD: Shiv 'bhakt' (devotees) have reason to be happy as, if for any reason they are unable to visit and pay obeisance to their Lord Shiva on the auspicious occasion of Maha Shivratri, the department of Posts, will help deliver the 'prasad' (offering) of Lord Vishwanath from the historic Kashi Vishwanath temple at Varanasi at their doorstep.
Sharing details of the novel initiative with TOI, Krishna Kumar Yadav director Postal Services, Allahabad region said as per an agreement between Kashi Vishwanath Mandir Trust and department of Posts, the 'prasad' of Kashi Vishwanath Mandir will now be made available at home by Post. Under the scheme, one needs to send a money order of Rs 60/- to Senior Superintendent of Post offices, Varanasi (East) Division and receive in return 'bhabhuti' (holy ash) of the Mandir, a 'Rudraksh', a laminated photo of Lord Shiva and Shiv Chalisha as 'Prasad' sent by Kashi Vishwanath Mandir Trust.
As per legend, Varanasi is the city of Lord Shiva, and Kashi Vishwnath Mandir is a prime spot of religious attraction.
Yadav said besides from Kashi Vishwanath Mandir, 'prasad' of the renowned Shri Mahakaleshwar Jyotirling Mandir, Ujjain can also be ordered by post. To avail this facility you will have to send a Money order of Rs 151/- to Prashashak (Administrator), Shri Mahakaleshwar Mandir Prabandhan Committee and in return 'prasad' will be sent by Speed Post. The prasad pack contains 200 gms of dry fruit, 200 gm laddu, 'bhabhuti' and a photo of Lord Shri Mahakaleshwar.
He added that the 'prasad' is sent to the customers in water proof envelopes through Speed Post to ensure safety and purity in transit.

Courtesy : Times of India

Friday, March 8, 2013

Marking of International Women’s Day : India gets first all-women post office

The government on Friday opened the country’s first all-women post office here and announced plans to open more such branches completely operated by women employees.
 
“In coming days, I believe there will be more all-women post offices across country for convenience of women,” Telecom and IT Minister Kapil Sibal said.
 
While inaugurating first ‘All Women Post office’ in the country on the eve of International Women’s Day, he said the new post office branch will be completely operated by women employees and provide all facilities that are available at any other post offices. “This is first office in the country where all employees will be women. The government is looking into problem faced by woman and this is just a symbolic step,” Sibal said.
 
In the Union Budget government announced to set up an all-women bank by October-end. P Gopinath, Secretary, Department of Posts, said the department has plans to have one such post office in every metro cities and subsequently include all the large towns. (PTI)
 
(In Picture :INDIA’S FIRST ALL-WOMEN POST OFFICE : Inaugurated on 8th March by Mr. Kapil Sibbal, Union Minister of Communications & IT. Staff members of India’s first all-women post office soon after its inauguratin at Shastri Bhavan in New Delhi, marking International Women’s Day)

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर देश में खुला पहला महिला डाकघर

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर सरकार ने महिलाओं को तोहफा देते हुए देश का पहला महिला डाकघर खोला. राष्ट्रीय राजधानी के शास्त्री भवन में खुले इस डाकघर में सभी कर्मचारी महिलाएं हैं। सरकार ने इस तरह की और शाखाएं खोलने की योजना की भी घोषणा की।

डाकघर का उद्घाटन दूरसंचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री कपिल सिब्बल ने किया. कपिल सिब्बल ने कहा, 'आने वाले दिनों में मुझे विश्वास है देश भर में महिलाओं की सुविधाओं के लिये और महिला डाकघर खोला जाएगा।' अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर देश में पहली महिला शाखा का उद्घाटन करते हुए उन्होंने कहा कि नये डाकघर का परिचालन पूरी तरह महिला कर्मचारी करेंगी और अन्य डाकघरों में मौजूद सभी सुविधाएं यहां उपलब्ध होंगी।

सिब्बल ने कहा, 'यह देश का पहला डाकघर है जहां सभी कर्मचारी महिलाएं होंगी। सरकार उन समस्याओं पर गौर कर रही है जिसका सामना महिलाओं को करना पड़ता है और उस दिशा में यह एक सांकेतिक कदम है।' वित्त वर्ष 2013-14 के बजट में अक्तूबर के अंत तक महिला बैंक स्थापित करने की घोषणा की गयी है।
 डाक विभाग की सचिव पी गोपीनाथ ने कहा कि विभाग की इस प्रकार का डाकघर हर महानगर में खोलने की योजना है और बाद में इसे उन सभी बड़े शहरों में खोला जाएगा जहां कामकाजी महिलाओं की संख्या ज्यादा है। उन्होंने कहा, 'जब महिलाएं आपास में बातचीत करती हैं तो उनमें अलग संतोष का बोध होता है। इन सभी बातों को ध्यान में रखकर हम उन जगहों पर डाकघर खोलेंगे जहां बड़ी संख्या में महिलाएं हैं। हमने शुरू में ऐसा डाकघर खोलने के लिये मुंबई, चेन्नै, चंडीगढ़, लखनऊ, हैदराबाद तथा बेंगलुरु की पहचान की है।' गोपीनाथ ने कहा कि विभाग पुरानी दिल्ली में एक पखवाड़े के भीतर और महिला डाकघर खोलेगा। 

Thursday, March 7, 2013

महाशिवरात्रि पर घर बैठे डाक द्वारा काशी विश्वनाथ और महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर का प्रसाद

महाशिवरात्रि का दिन इस बार आपको निराश नहीं करेगा। यदि किसी कारणवश आप भोलेनाथ के दरबार में उपस्थित नहीं हो पाते हैं तो चिंता की कोई बात नहीं। डाक विभाग आपके घर बाबा का प्रसाद जरुर पहुंचा देगा। इस सम्बन्ध में जानकारी देते हुए इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि बनारस को भगवान शिव की नगरी कहा जाता है और काशी विश्वनाथ मंदिर यहाँ का प्रमुख धार्मिक स्थल है। डाक विभाग और काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट के बीच हुए एक एग्रीमेण्ट के तहत काशी विश्वनाथ मंदिर का प्रसाद डाक द्वारा भी लोगों को उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके तहत साठ रूपये का मनीआर्डर प्रवर डाक अधीक्षक, बनारस (पूर्वी) के नाम भेजना होता है और बदले में वहाँ से काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट के सौजन्य से मंदिर की भभूति, रूद्राक्ष, भगवान शिव की लेमिनेटेड फोटो और शिव चालीसा प्रेषक के पास प्रसाद रूप में भेज दिया जाता है।
डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने यह भी बताया कि काशी विश्वनाथ मंदिर के अलावा उज्जैन के प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर का प्रसाद भी डाक द्वारा मंगाया जा सकता है। इसके लिए प्रशासक, श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबन्धन कमेटी, उज्जैन को 151 रूपये का मनीआर्डर करना पड़ेगा और इसके बदले में वहाँ से स्पीड पोस्ट द्वारा प्रसाद भेज दिया जाता है। इस प्रसाद में 200 ग्राम ड्राई फ्रूट, 200 ग्राम लड्डू, भभूति और भगवान श्री महाकालेश्वर जी का चित्र शामिल है।
श्री यादव ने कहा कि इस प्रसाद को प्रेषक के पास एक वाटर प्रूफ लिफाफे में स्पीड पोस्ट द्वारा भेजा जाता है, ताकि पारगमन में यह सुरक्षित और शुद्ध बना रहे। तो अब आप भी घर बैठे भोले जी का प्रसाद ग्रहण कीजिये और मन ही मन में उनका पुनीत स्मरण कर आशीर्वाद लीजिए !!

Sunday, March 3, 2013

वीर-रस के कवि श्याम नारायण पाण्डेय पर निदेशक डाक सेवाएँ कृष्ण कुमार यादव ने जारी किया विशेष डाक आवरण

द्वितीय मण्डल स्तरीय आजमगढ़ डाक टिकट प्रदर्शनी ‘आजमपेक्स-2013’ का समापन वेस्ली इंटर कॉलेज आजमगढ़ में आयोजित भव्य समारोह में 3 मार्च को किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में इलाहाबाद व गोरखपुर परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ श्री कृष्ण कुमार यादव ने दूसरे दिन के कार्यक्रम का उदघाटन किया। श्री यादव ने इस अवसर पर वीर रस के कवि श्याम नारायण पाण्डेय (वर्ष 1907 में ग्राम डुमराव, जिला- आजमगढ़, संप्रति मऊ जनपद में जन्म।) पर विशेष डाक आवरण एवं विरूपण का विमोचन किया। आवरण जारी करने के साथ साथ मुख्य अतिथि श्री यादव ने रिमोट द्वारा इस विशेष आवरण के ब्लो-अप का भी अनावरण किया।

       वीर-रस के कवि श्याम नारायण पाण्डेय (1907 - 1991) पर जारी विशेष आवरण व विरूपण का विमोचन करते हुए निदेशक डाक सेवाएँ श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि श्याम नारायण पाण्डेय वीर रस के सुविख्यात हिन्दी कवि थे। आप केवल कवि ही नहीं अपितु अपनी ओजस्वी वाणी में वीर रस के अनन्यतम प्रस्तोता भी थे । देश-प्रेम और अपने संस्कृति के प्रति अनुराग ही श्याम नारायण पाण्डेय जी को वीर रस के प्रति आकर्षित करता था। तभी तो उन्होने ‘हल्दीघाटी’ व ‘जौहर’ जैसे उत्कृष्ट महाकाव्य रचे, जिनमें हल्दीघाटी (काव्य) सर्वाधिक लोकप्रिय और जौहर(काव्य) विशेष चर्चित हुए। हल्दीघाटी में वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप के जीवन और जौहर में चित्तौड की रानी पद्मिनी के आख्यान हैं। हल्दीघाटी के नाम से विख्यात राजस्थान की इस ऐतिहासिक वीर भूमि के लोकप्रिय नाम पर लिखे गये हल्दीघाटी महाकाव्य पर आपको उस समय का सर्वश्रेष्ठ सम्मान देव पुरस्कार प्राप्त हुआ था। श्री यादव ने कहा कि उन्होने आजीवन निश्चल भाव से साहित्य सृजन किया ।
 
अपने उदबोधन में निदेशक डाक सेवाएँ श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि आजमगढ़ की धरती सदैव से ही साहित्यिक-सांस्कृतिक रूप से उर्वर रही है। यह धरा महान विभूतियों की जन्मस्थली-कर्मस्थली रही है, जिन्होने आजमगढ़ का नाम दुनियाभर में फैलाया। ऐसी विभूतियों की स्मृतियों को सहेज कर रखना एवं युवा पीढ़ी को उनके बारे में बताना हमारा कर्तव्य है। डाक विभाग ऐसी विभूतियों पर समय-समय पर डाक टिकट व विशेष आवरण (लिफाफा) जारी कर समाज एवं राष्ट्र के प्रति अपने सामाजिक दायित्यों का निर्वहन करता है। श्री यादव ने कहा कि आजमगढ़ की विरासत, स्थापत्य, विभूतियों एवं यहाँ से जुड़े अन्य पहलुओं पर डाक-टिकट एवं विशेष आवरण जारी किए जाने को प्रस्ताव यदि प्राप्त होते हैं तो उन्हे बेहद खुशी होगी।

       प्रवर डाक अधीक्षक श्री वाई एन  द्विवेदी ने कहा कि एक लंबे अंतराल पश्चात आजमगढ़ में इस प्रकार का आयोजन कर बेहद खुशी हो रही है और जिस तरह से यंहा के लोगों ने प्रदर्शनी को हाथों हाथ लिया है, वह हमारे लिए उत्साहजनक है। इस अवसर पर डा0 शारदा सिंह, पूर्व प्राचार्य, डा0 डी पी, पूर्व प्राचार्य ने भी अपने उद्गार व्यक्त किए।

       मुख्य अतिथि निदेशक डाक सेवाएँ श्री कृष्ण कुमार यादव ने समापन समारोह में डाक टिकट प्रदर्शनी में विभिन्न ग्रुपों, चित्रकला प्रतियोगिता एवं प्रश्नोतरी में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान पाने वालों को पुरस्कृत किया।  अंतिम दिन होने के चलते माई स्टैम्प के प्रति लोगों का काफी उत्साह दिखा और काफी लोगों ने अपनी फोटो डाक टिकटों पर अंकित कराई।

       कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत प्रवर डाक अधीक्षक आजमगढ़ श्री वाई एन द्विवेदी एवं आभार ज्ञापन सहायक निदेशक त्रिवेणी प्रसाद ने किया। कार्यक्रम का संचालन एस एन मिश्रा ने किया। इस अवसर पर सीनियर पोस्टमास्टर जी एन प्रसाद, राजेश यादव, जे एम सिन्हा, अनवर जमाल, कमलनाथ यादव, दिलशेर यादव, आर एस सोनकर, डी बी त्रिपाठी, सरदार सिंह यादव सहित तमाम डाक विभाग के अधिकारी, फिलेटिलिस्ट, साहित्यकार एवं शिक्षाविद इत्यादि उपस्थित थे।

”आजमगढ़ डाक टिकट प्रदर्शनी” में ’’माई स्टैम्प’’ के तहत खुद की डाक टिकटें बनवाने के प्रति दिखा उत्साह

डाक विभाग द्वारा दो दिवसीय ”आजमगढ़ डाक टिकट प्रदर्शनी” (आजमपेक्स-2013, 2-3 मार्च 2013) के दौरान डाक विभाग की बहुचर्चित ' माई स्टैम्प' सेवा का भी शुभांरभ किया गया। इसके तह त चीफ पोस्टमास्टर जनरल, कर्नल कमलेश चन्द्र एवं निदेशक डाक सेवाएँ कृष्ण कुमार यादव सहित तमाम लोगों ने अपनी फोटो डाक टिकटों पर अंकित करायी।
 
आजमपेक्स-2013 के दौरान माई स्टैम्प सेवा 16 डाक-टिकटों के साथ उपलब्ध कराई जाएगी। इनमें सिनेरेरिया, डहलिया, लिली और पैन्सी फूलों वाले डाक-टिकट के अलावा 12 राशियों के डाक टिकट शामिल हैं। जहाँ बड़े लोगों में अपनी राशि के साथ डाक.टिकट का क्रेज रहाए वहीँ बच्चों ने रंग.बिरंगे फूलों वाले डाक.टिकटों के साथ अपनी फोटो वाली डाक.टिकटें बनवाईं। कई लोगों ने इस सु.अवसर का भरपूर फायदा उठाया और अपने पूरे परिवार को ही माई स्टैम्प के तहत डाक.टिकटों पर ला दिया। युवाओं में इसके तहत काफी उत्साह देखा गया।
 
 निदेशक कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि माई स्टैम्प के तहत अपनी तस्वीर वाले डाक-टिकट लगे पत्र देश भर में कहीं भी भेजे जा सकते हैं। इस सेवा का लाभ उठाने के लिए एक फार्म भरकर उसके साथ अपनी फोटो और 300 /-जमा करने होते हैं। एक शीट में कुल 12 डाक-टिकटों के साथ फोटो लगाई जा सकती है।

Saturday, March 2, 2013

पंडित अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध' की स्मृति में आजमगढ़ में विशेष डाक आवरण जारी

आज़मगढ़ ने तमाम साहित्यिक विभूतियों को पल्लवित-पुष्पित किया है। इन्हीं में से एक प्रमुख नाम है- कवि सम्राट पंडित अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध' का। 'हरिऔध' जी की स्मृति में भारतीय डाक विभाग ने 2 मार्च, 2013 को "आजमगढ़ डाक टिकट प्रदर्शनी” (आजमपेक्स-2013) के दौरान एक विशेष डाक आवरण और विरूपण जारी किया। उत्तर प्रदेश परिमंडल के चीफ पोस्टमास्टर जनरल कर्नल कमलेश चन्द्र ने इलाहाबाद/गोरखपुर परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ एवं चर्चित साहित्यकार व ब्लागर कृष्ण कुमार यादव की अध्यक्षता में आयोजित एक कार्यक्रम में इस विशेष डाक आवरण का विमोचन किया।

चीफ पोस्टमास्टर जनरल कर्नल कमलेश चन्द्र ने कहा कि पंडित अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध' जी द्वारा रचित खड़ी बोली के प्रथम महाकाव्य 'प्रिय प्रवास' का इस समय शताब्दी वर्ष भी मनाया जा रहा है, ऐसे में डाक विभाग द्वारा उन पर विशेष आवरण जारी किया जाना एक महत्वपूर्ण कदम माना जाना चाहिए।

चर्चित साहित्यकार एवं ब्लागर व सम्प्रति निदेशक डाक सेवाएँ कृष्ण कुमार यादव ने इस अवसर पर हरिऔध जी के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि हरिऔध जी ने गद्य और पद्य दोनों ही क्षेत्रों में हिंदी की सेवा की। वे द्विवेदी युग के प्रमुख कवि रहे है। उन्होंने सर्वप्रथम खड़ी बोली में काव्य-रचना करके यह सिद्ध कर दिया कि उसमें भी ब्रजभाषा के समान खड़ी बोली की कविता में भी सरसता और मधुरता आ सकती है।
 
श्री यादव ने कहा कि हरिऔध जी आधुनिक हिंदी खड़ी बोली के पितामह हैं। उन्होंने खड़ी बोली के प्रथम महाकाव्य 'प्रिय प्रवास' की रचना करके साहित्य-जगत में शीर्ष स्थान प्राप्त किया । आज भी हरिऔध जी का काव्य ग्रंथ 'प्रिय प्रवास' तथा 'वैदेही वनवास' हिंदी खड़ी भाषा के मील के पत्थर के रुप में स्वीकार किये जाते हैं। उन्होंने कहा कि हरिऔध जी ने विविध विषयों पर काव्य रचना की है। यह उनकी विलक्षण विशेषता है कि उन्होंने राम-सीता, कृष्ण-राधा जैसे धार्मिक विषयों के साथ-साथ आधुनिक समस्याओं को भी अपनी रचनाओं में लिया है और उन पर नवीन ढंग से अपने विचार प्रस्तुत किए हैं। वास्तव में देखा जाये तो प्राचीन और आधुनिक भावों के मिश्रण से 'हरिऔध' जी के काव्य में एक अद्भुत चमत्कार उत्पन्न हो गया है।
 
कार्यक्रम में साहित्यकार डा0 कन्हैया सिंह ने हरिऔध जी के जीवन पर प्र काश डा हुए कहा कि अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' (15 अप्रैल, 1865-16 मार्च, 1947) हिन्दी के एक सुप्रसिद्ध साहित्यकार है। इनका जन्म उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ जिले के निजामाबाद नामक स्थान में हुआ। सन १८८९ में हरिऔध जी को सरकारी नौकरी मिल गई। वे कानूनगो हो गए। इस पद से सन १९३२ में अवकाश ग्रहण करने के बाद हरिऔध जी ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में अवैतनिक शिक्षक के रूप से कई वर्षों तक अध्यापन कार्य किया। सन १९४१ तक वे इसी पद पर कार्य करते रहे। उसके बाद यह निजामाबाद वापस चले आए। इस अध्यापन कार्य से मुक्त होने के बाद हरिऔध जी अपने गाँव में रह कर ही साहित्य-सेवा कार्य करते रहे। अपनी साहित्य-सेवा के कारण हरिऔध जी ने काफी ख़्याति अर्जित की। हिंदी साहित्य सम्मेलन ने उन्हें एक बार सम्मेलन का सभापति बनाया और विद्यावाचस्पति की उपाधि से सम्मानित किया। सन १९४५ ई० में निजामाबाद में आपका देहावसान हो गया।

आजमगढ़ में 9 वर्ष बाद डाक टिकट प्रदर्शनी 'आजमपेक्स-2013' का आयोजन

हर डाक टिकट की अपनी एक कहानी है और इस कहानी को वर्तमान पीढ़ी के साथ जोड़ने की जरुरत है। इसी परंपरा में डाक विभाग द्वारा दो दिवसीय ”आजमगढ़ डाक टिकट प्रदर्शनी” (आजमपेक्स-2013) का उद्घाटन 2 मार्च 2013 को वेस्ली इंटर कॉलेज, आजमगढ़ में किया गया। प्रदर्शनी का उद्घाटन द्वीप प्रज्वलित कर और फीता काटकर, उ.प्र. परिमंडल के चीफ पोस्टमास्टर जनरल, कर्नल कमलेश चन्द्र द्वारा इलाहाबाद एवं गोरखपुर परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ कृष्ण कुमार यादव की अध्यक्षता में आयोजित भव्य कार्यक्रम में किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ बच्चियों द्वारा सरस्वती वंदना गाकर किया गया।

इस प्रदर्शनी में फिलेटलिस्टों द्वारा तमाम डाक टिकटों की प्रदर्शनी लगायी गयी। कुल 84 फ्रेमों में हजारों की संख्या में डाक-टिकट प्रदर्शित किए गये। इनमें डाक-टिकटों के माध्यम से सिनेमा के 100 वर्ष, भारत की महान नारी विभूतियाँ, राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी पर जारी डाक टिकट, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम पर जारी डाक टिकट, भारत के प्रिंस-स्टेट, विश्व के जंगी जहाज, विश्व की रेलवे प्रणालियाँ, क्वींस बैटन, इलाहाबाद से संबंधित विषयों पर जारी डाक-टिकटों से लेकर जैव विविधता, रोटरी, स्काउट एवं गाइड, रेड क्रास और एड्स, इत्यादि के विरूद्ध जागरूक करते तमाम रंग-बिरंगे डाक-टिकट प्रदर्शित किये गये। इनमें सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि विदेशों द्वारा जारी दुर्लभ डाक-टिकट व डाक-स्टेशनरी भी शामिल थे। प्रदर्शनी में वरिष्ठ फिलेटलिस्टों के अलावा तमाम बच्चों ने भी अपने डाक-टिकटों का प्रदर्शन किया। गौरतलब है कि आजमगढ़ में 9 वर्ष बाद इस तरह की प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है। इससे पूर्व वर्ष 2004 में डाक टिकट प्रदर्शनी आयोजित हुयी थी।

प्रदर्शनी के उद्घाटन पश्चात् आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि उ.प्र. परिमंडल के चीफ पोस्टमास्टर जनरल, कर्नल कमलेश चन्द्र ने कहा कि डाक विभाग सुदूर एवं छोटे-छोटे शहरों में भी डाक-टिकटों के प्रति अभिरुचि पैदा करने हेतु डाक टिकट प्रदर्शनी आयोजित करता है, ताकि आम जन को इससे जोड़ा जा सके। उन्होंने आजमगढ़ की गौरवशाली परम्परा के प्रचार-प्रसार व इसे समृद्ध करने पर जोर दिया। इस कड़ी में डाक-टिकट प्रमुख भूमिका निभा सकते हैं। कर्नल कमलेश चन्द्र ने इस प्रकार की प्रदर्शनियों को नियमित अंतराल पर आयोजित करने पर जोर दिया, ताकि अभिरुचि के रूप में फिलेटली का विकास हो सके।

इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवायें कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि सामान्यतः डाक टिकट एक छोटा सा कागज का टुकड़ा दिखता है, पर इसका महत्व और कीमत दोनों ही इससे काफी ज्यादा है । डाक टिकट वास्तव में एक नन्हा राजदूत है, जो विभिन्न देशों का भ्रमण करता है एवम् उन्हें अपनी सभ्यता, संस्कृति और विरासत से अवगत कराता है। निदेशक यादव ने कहा कि डाक टिकटों के द्वारा ज्ञान भी अर्जित किया जा सकता है। यह हमारी शिक्षा प्रणाली को और भी मजबूत बना सकते हैं।
 
 इस अवसर पर बच्चों हेतु फिलेटलिक वर्कशाप व कला प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। बच्चों ने जहाँ डाक टिकट प्रदर्शनी का आनंद लिया, वहीं फिलेटलिक डिपाजिट एकाउण्ट भी खोले गये। देर शाम सांस्कृतिक कार्यक्रम के तहत संगीत.संध्या का भी लोगों ने लुत्फ उठाया।

कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत प्रवर डाक अधीक्षक आजमगढ़ श्री वाई एन द्विवेदी एवं आभार ज्ञापन सहायक निदेशक त्रिवेणी प्रसाद ने किया। कार्यक्रम का संचालन एस एन मिश्रा ने किया। इस अवसर पर सीनियर पोस्टमास्टर जी एन प्रसाद, राजेश यादव, साहित्यकार डा0 कन्हैया सिंह, जगदीश प्रसाद बर्नवाल 'कुंद' , डी एन लाल एवं जे एम सिन्हा, अनवर जमाल सहित डाक विभाग के तमाम अधिकारी, कर्मचारी, विद्वतजन, पत्रकार एवं फिलेटिलिस्ट इत्यादि उपस्थित थे।