Monday, August 3, 2020

Rakhi mail delivery by Postmen on Sunday : डाक विभाग ने रविवार को भी पहुँचाई लोगों तक राखी, डाकिया बाबू को लोगों ने कहा शुक्रिया

रक्षाबंधन पर्व पर किसी भाई की कलाई सूनी न रहे, इसके लिए डाक विभाग ने रविवार (2 अगस्त, 2020) को भी राखी डाक के वितरण के लिए विशेष प्रबंध किए। लखनऊ मुख्यालय परिक्षेत्र के अधीन लखनऊ, फैज़ाबाद, रायबरेली, बाराबंकी, सीतापुर, अम्बेडकरनगर जनपदों में डाकियों ने  रविवार को लोगों के घर राखी डाक पहुँचाई। उक्त जानकारी लखनऊ मुख्यालय परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ श्री कृष्ण कुमार यादव ने दी। पोस्टमैनों ने लगभग 10 हजार लोगों को राखी डाक रविवार को पहुँचाई । राखी मिलने से प्रसन्न लोगों ने भी दिल खोलकर डाक विभाग की इस पहल की सराहना की और डाकिया बाबू का शुक्रिया व्यक्त किया। रक्षाबंधन की सुबह भी डाक विभाग प्राप्त राखी डाक को लोगों तक पहुंचाएगा।
 डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि, ऐसे तमाम लोग जो आपदा की इस घड़ी में कोरोना वॉरियर्स के रूप में काम कर रहे हैं और घर से दूर हैं, उन तक भी बहनों द्वारा भेजी गई राखी डाकियों द्वारा पहुँचाई गई। लखनऊ पुलिस के कोविड केयर हेल्प डेस्क में कार्य करने वाले पुलिसकर्मियों से लेकर डॉक्टर्स और पैरामेडिकल स्टाफ तक को रविवार को राखी डाक वितरित की गई। 


गौरतलब है कि कोरोना संक्रमण के चलते शहर में भी बहनें अपने भाईयों को स्पीड पोस्ट द्वारा ही राखी और गिफ्ट भेज रही हैं। अकेले लखनऊ के डाकघरों से अब तक एक लाख से ज्यादा राखी डाक भेजी जा चुकी हैं, वहीं लगभग दो लाख राखी डाक का लखनऊ में वितरण किया जा चुका है। इस साल एक नया ट्रेंड भी देखने को मिल रहा है कि बहनें राखियों के साथ भाईयों को मास्क, सैनिटाइजर व गिलोय भी भेज रही हैं। लखनऊ जीपीओ से अपने भाई को राखी भेजने वाली आकांक्षा कहती हैं कि, रक्षा सूत्र के साथ-साथ कोरोना संक्रमण से बचाव में मास्क, सैनिटाइजर व गिलोय जैसी चीजें भाई की रक्षा करेंगी।
गोमतीनगर में रहने वाले राहुल कुमार  ने बताया कि वे अपनी बहन द्वारा भेजी गई राखी अब तक न प्राप्त होने पर मायूस हो चले थे, पर संडे की सुबह जब पोस्टमैन ने घर पर आकर राखी का लिफाफा दिया तो खुशी का ठिकाना न रहा।









Saturday, August 1, 2020

Raksha Bandhan Festival : लखनऊ के डाकघरों से भेजी गईं एक लाख से ज्यादा राखी डाक, विदेशों में भी स्पीड पोस्ट द्वारा राखी भेज रही हैं बहनें

रक्षाबंधन का त्यौहार जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, राखी भेजने का कार्य भी उतना ही तेज हो गया है। कोरोना संक्रमण के बीच इस बार की राखी भी अलग तरह से मनाई जा रही है। बहनें डाकघरों से स्पीड पोस्ट द्वारा अपने भाईयों को राखी भेज रही हैं तो भाई भी एडवांस में बहनों को गिफ्ट भेज रहे हैं। लखनऊ मुख्यालय परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि कोरोना संक्रमण और बारिश के मौसम के बीच राखी सुरक्षित रूप में व तीव्र गति से भेजी जा सके, इसके लिए डाक विभाग ने विशेष प्रबन्ध किये हैं। राखी त्यौहार के मद्देनजर रविवार (2 अगस्त) को भी राखी डाक का पोस्टमैनों द्वारा वितरण किया जायेगा, ताकि किसी भाई की कलाई सूनी न रहे।  
डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि लखनऊ परिक्षेत्र के डाकघरों से 12 हजार से ज्यादा वाटरप्रूफ डिजायनर राखी लिफाफों की बिक्री हो चुकी है। डाक विभाग इन लिफाफों पर कोरोना से बचाव के स्लोगन इस्तेमाल करके लोगों को कोविड 19 के प्रति जागरूक भी कर रहा है। पूर्व वर्षों की अपेक्षा इस वर्ष डाक द्वारा राखी भेजने की तादाद बढ़ी है, क्योंकि कोविड 19 के चलते तमाम बहनें अपने भाईयों के पास नहीं पहुँच पा रही हैं। अकेले लखनऊ के डाकघरों से अब तक एक लाख से ज्यादा राखी डाक भेजी जा चुकी हैं, वहीं लगभग दो लाख राखी डाक का लखनऊ में वितरण किया जा चुका है। इस साल एक नया ट्रेंड भी देखने को मिल रहा है कि बहनें राखियों के साथ भाईयों को मास्क, सैनिटाइजर व गिलोय भी भेज रही हैं।

डाक निदेशक श्री यादव ने कहा कि, बंद ट्रेन संचालन व अन्य ट्रांसपोर्ट साधनों के सीमित आवागमन के मद्देनजर डाक विभाग ने अपना स्वयं का रोड ट्रांसपोर्ट नेटवर्क तैयार किया है, ताकि राखी सहित तमाम डाक को तेजी से आगे भेजा जा सके। देश के साथ-साथ विदेशों में भी स्पीड पोस्ट द्वारा राखी भेजी जा रही है। संयुक्त राज्य अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस, संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों में रह रहे अपने भाईयों को बहनें स्पीड पोस्ट द्वारा राखी भेज रही हैं।
चीफ पोस्टमास्टर, लखनऊ जीपीओ  श्री आर.एन यादव ने बताया  कि राखी डाक की स्पेशल सॉर्टिंग के साथ-साथ इनका त्वरित वितरण भी सुनिश्चित किया जा रहा है। राखी पर्व के चलते सामान्य दिनों से डाक लगभग दुगुनी हो गई है। प्रवर अधीक्षक रेल डाक सेवा, लखनऊ श्री बीपी त्रिपाठी ने बताया कि, राखी पोस्ट की सॉर्टिंग हेतु आरएमएस में स्पेशल सेट चलाये जा रहे हैं, ताकि डाक को तेजी से गंतव्य हेतु रवाना किया जा सके।















कोरोना काल में डाक से राखी भेजने की बढ़ी तादाद, डाक विभाग ने राखी हेतु किये विशेष प्रबंध, रविवार को भी होगा राखी डाक का वितरण 

लखनऊ के डाकघरों से भेजी गईं एक लाख से ज्यादा राखी डाक, विदेशों में भी स्पीड पोस्ट द्वारा राखी भेज रही हैं बहनें 


Friday, July 31, 2020

Munshi Premchand Birth Anniversary : डाककर्मी के पुत्र मुंशी प्रेमचंद ने लिखी साहित्य की नई इबारत -डाक निदेशक केके यादव


हिन्दी साहित्य के इतिहास में उपन्यास सम्राट के रूप में प्रसिद्ध मुंशी प्रेमचंद के पिता अजायब राय श्रीवास्तव डाकमुंशी के रूप में कार्य करते थे। ऐसे में प्रेमचंद का डाक-परिवार से अटूट सम्बन्ध था। मुंशी प्रेमचंद को पढ़ते हुए पीढ़ियाँ बड़ी हो गईं। उनकी रचनाओं से बड़ी आत्मीयता महसूस होती है। ऐसा लगता है मानो इन रचनाओं के  पात्र हमारे आस-पास ही मौजूद हैं। प्रेमचंद जयंती (31 जुलाई) की पूर्व संध्या पर उक्त उद्गार चर्चित ब्लॉगर व साहित्यकार एवं लखनऊ मुख्यालय परिक्षेत्र  के निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव ने व्यक्त किये। 

डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि लमही, वाराणसी में जन्मे डाककर्मी के पुत्र मुंशी प्रेमचंद ने साहित्य की नई इबारत  लिखी। आज भी तमाम साहित्यकार व् शोधार्थी लमही में उनकी जन्मस्थली की यात्रा कर प्रेरणा पाते हैं। हिंदी कहानी तथा उपन्यास के क्षेत्र में 1918 से 1936  तक के कालखंड को 'प्रेमचंद युग' कहा जाता है। प्रेमचंद साहित्य की वैचारिक यात्रा आदर्श से यथार्थ की ओर उन्मुख है। मुंशी प्रेमचंद स्वाधीनता संग्राम के भी सबसे बड़े कथाकार हैं। श्री यादव ने बताया कि, प्रेमचंद की स्मृति में भारतीय डाक विभाग की ओर से 30  जुलाई 1980 को उनकी जन्मशती के अवसर पर 30  पैसे मूल्य का एक डाक टिकट भी जारी किया जा चुका है।




डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि, प्रेमचन्द के साहित्यिक और सामाजिक विमर्श आज भूमंडलीकरण के दौर में भी उतने ही प्रासंगिक हैं और उनकी रचनाओं के पात्र आज भी समाज में कहीं न कहीं जिन्दा हैं। प्रेमचंद ने साहित्य को सच्चाई के धरातल पर उतारा। प्रेमचन्द जब अपनी रचनाओं में समाज के उपेक्षित व शोषित वर्ग को प्रतिनिधित्व देते हैं तो निश्चिततः इस माध्यम से वे एक युद्ध लड़ते हैं और गहरी नींद सोये इस वर्ग को जगाने का उपक्रम करते हैं। श्री यादव ने कहा कि प्रेमचन्द ने अपने को किसी वाद से जोड़ने की बजाय तत्कालीन समाज में व्याप्त ज्वलंत मुद्दों से जोड़ा। उनका साहित्य शाश्वत है और यथार्थ के करीब रहकर वह समय से होड़ लेती नजर आती हैं।



















डाककर्मी के पुत्र मुंशी प्रेमचंद ने लिखी साहित्य की नई इबारत-कृष्ण कुमार यादव-निदेशक डाक सेवाएँ

आज भी प्रासंगिक हैं प्रेमचन्द के साहित्यिक व सामाजिक विमर्श - डाक निदेशक केके यादव