Saturday, August 29, 2009

पानी में पोस्ट आफिस

पानी में पोस्ट आफिस। है ना अजूबा। पर यह अजूबा नहीं बिल्कुल सच है। पानी के अन्दर यह पोस्ट आफिस, साउथ पेसिफिक आइलैंड में स्थिति एक छोटे से देश वनुवातु में मौजूद है। सबसे रोचक बात यह है कि यह दुनिया का पहला पोस्ट आफिस है, जो पानी के अंदर स्थित है। फाइबर ग्लास से बने इस पोस्ट आफिस में कुल चार कर्मचारी हैं, जिनकी ड्यूटी शिट में होती है। पानी में काम करने के लिए ये कर्मचारी विशेष रूप से प्रशिक्षित किये जाते हैं। तैराकी और स्कूबा डाइविंग में वे माहिर होते हैं। पोस्ट आफिस के कार्यों से परे इसका दुनिया भर के पर्यटकों में अच्छा-खासा क्रेज है। इस पोस्ट आफिस से पर्यटक वाटरप्रूफ काड्र्स की खरीददारी करते हैं और पानी के अंदर ही रहकर संदेश लिखकर अपने परिजनों को इसी पोस्ट आफिस से प्रेषित भी करते हैं। तो आपको भी कभी मौका मिले तो इस पोस्ट आफिस से अपनों को कार्ड और संदेश भेजने का मौका न छोड़ियेगा।

Tuesday, August 25, 2009

अब स्पीड पोस्ट हेतु वाटरप्रूफ व डिजाइनर लिफाफे

डाक विभाग ने अपनी प्रीमियम सेवा स्पीड पोस्ट की विशिष्टता के मद्देनजर डिजाइनर वाटरप्रूफ लिफाफे जारी किये हैं। सफेद और हल्का भूरा कलर में उपलब्ध ये लिफाफे वजन में हल्के, वाटरप्रूफ होने के साथ-साथ पारवाहन के दौरान भी नही फटेंगे। इन लिफाफों का आकार सामान्य लिफाफों से बड़ा है तथा ये 16.2 X 22.9 सेमी0 साइज में उपलब्ध हैं। ये लिफाफे 5 रूपये की कीमत पर उपलब्ध कराये जायेंगे और पोस्टेज चार्ज अतिरिक्त होंगे। गौरतलब है कि इससे पूर्व डाक विभाग ने राखी भेजने हेतु भी वाटरप्रूफ एवं डिजाइनर लिफाफे जारी किये हैं। लिफाफे पर स्पीड पोस्ट का लोगो अंकित है तथा स्पीड पोस्ट सेवा के बारे में जानकारियाँ भी अंकित हैं। इस लिफाफे पर प्रेषक का नाम लिखने की सुविधा पीछे दी हुई है। एक तरफ ये डिजाइनर लिफाफे स्पीड पोस्ट की ब्राण्डिंग करेंगे वहीं लोगों द्वारा भेजी जाने वाली स्पीड पोस्ट बेहतर और सुरक्षित ढंग से अपने गंतव्य पर पहुँच सकेगी।

Saturday, August 15, 2009

स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनायें !!

आइये हम सभी आजादी के इस जश्न में शामिल हों और भारत को एक समृद्ध राष्ट्र बनायें.
स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनायें !! जय हिंद !! जय भारत !!

Wednesday, August 12, 2009

डाकघर द्वारा जारी होते हैं पहचान पत्र

पिछले दिनों प्रतिष्ठित औद्योगिक घराने, सिंहानिया परिवार के एक सदस्य डाकघर आए और उन्होने डाकघर पहचान पत्र बनाने के लिए अनुरोध किया। सुनकर आश्चर्यमिश्रित प्रसन्नता का अहसास हुआ कि यह योजना लोगों के बीच आज भी लोकप्रिय और प्रासंगिक है। यह योजना काफी पुराने समय में, जब पत्राचार पद्धति पर डाकघर का एकाधिकार था एवं देश की अधिकतर जनसंख्या सूचना प्रेषण एवं धन प्रेषण के लिए डाकघर पर आश्रित थी उस समय कम्पनियों एवं जनता के अन्य लोग जो सरकारी, अर्धसरकारी एवं निजी कार्यों के लिए बाहर जाते थे, उनको डाकपाल के द्वारा मंगाई जाने वाली डाक सामग्री प्राप्त करने में असुविधा से बचाने के लिए डाकघर पहचान पत्र जारी करने की योजना शुरू की गई थी। आज पहचान के तमाम अन्य साधन जैसे ड्राइविंग लाइसेन्स, पैन कार्ड, इलेक्शन कमीशन का कार्ड एवं अन्य प्रकार के पहचान पत्रों के समकक्ष ही डाकघर के पहचान पत्र ने भी अपनी पहचान, लोकप्रियता एवं प्रासंगिकता बना रखी है।

यह पहचान पत्र किसी भी शहर में वहाँ के प्रधान डाकघर से जारी किया जाता है। प्रधान डाकघर से निःशुल्क फार्म प्राप्त कर, इसे भरकर अपना एक पासपोर्ट साइज का फोटो चिपकाकर एवं एक फोटो साथ में लगाकर 10 रूपये का डाक टिकट लगाकर डाकघर में जमा किया जाता है। डाकघर के सक्षम अधिकारी के द्वारा पता एवं व्यक्ति की जांच की जाती है एवं इसके उपरान्त पहचान पत्र जारी कर दिया जाता है। इस पहचान पत्र में जन्मतिथि, ऊंचाई एवं पहचान चिन्ह भी अंकित होता है। इस कार्ड की वैधता तीन वर्ष की है। यह पहचान पत्र नगण्य शुल्क एवं सरल प्रक्रिया में जारी हो जाता है जो जन-साधारण के लिए बहुद्देशीय एवं सुगम्य है।

Monday, August 10, 2009

जन्मदिन मुबारक हो !!


*** डाकिया बाबू की तरफ़ से "डाकिया डाक लाया" ब्लॉग के सूत्रधार कृष्ण कुमार यादव जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें ***

भारतीय डाक सेवा के अधिकारी बन
अपने कृतित्व-मान को और बढ़ाया
प्रशासन और साहित्य का हुआ समन्वय
इस बेजोड़ संतुलन ने सबको चौंकाया

बाइस जुलाई दो हजार तीन को
सूरत में पहले-पहल नियुक्ति पाये
वरिष्ठ डाक अधीक्षक पद प्राप्त कर
डाक विभाग का गौरव खूब बढ़ाये

स्ूारत, लखनऊ और कानपुर में
पद की गौरव-गरिमा खूब बढ़ाई
लिख डेढ़ सौ वर्षों का डाक इतिहास
दूर-दूर तक नाम औष् ख्याति पाई

आये जब से डाक विभाग में आप
लग गया फिलेटली का नया शौक
करते संग्रह डाक-टिकटों का खूब
रुचियांँ हैं इनकी और भी अनेक

जिज्ञासु प्रवृत्ति के रहे सदैव से
तार्किक विश्लेषण खूब करते हैं
चिंतन-मनन की अनुपम दुनिया में
जी भर यह आनन्द से रमते हैं

सूरत और कानपुर मण्डलों में आपने
सुन्दर डाक टिकट प्रदर्शनी करवायी
खूबसूरत स्मारिका किया सम्पादित
ज्ञानवर्धन कर युवा पीढ़ी भी हर्षायी

डाक विभाग में खूब बने लोकप्रिय
अराजकता कभी नहीं सह पाते हैं
किसी काम में यदि कुछ हुई गड़बड़ी
तो फिर अपनी त्योरियां चढ़ाते हैं

सुहृदय, मिलनसार और साहित्य प्रेमी
सबसे अन्तर्मन से वह जुड़ जाते हैं
एक बार जब बने निकटता आपसे
सब जन उनके सादर गुण गाते हैं !!
(साभार: बढ़ते चरण शिखर की ओर)

Saturday, August 8, 2009

डाकिया









छोड़ दिया है उसने
लोगों के जज्बातों को सुनना

लम्बी-लम्बी सीढियाँ चढ़ने के बाद
पत्र लेकर
झट से बंद कर
दिए गए
दरवाजों की आवाज
चोट करती है उसके दिल पर

चाहता तो है वह भी
कोई खुशी के दो पल उससे बाँटे
किसी का सुख-दुःख वो बाँटे
पर उन्हें अपने से ही फुर्सत कहाँ?

समझ रखा है उन्होंने, उसे
डाक ढोने वाला हरकारा
नहीं चाहते वे उसे बताना
चिट्ठियों में छुपे गम
और खुशियों के राज

फिर वो परवाह क्यों करे?
वह भी उन्हें कागज समझ
बिखेर आता है सीढ़ियों पर

इन कागजी जज्बातों में से
अब लोग उतरकर चुनते हैं
अपनी-अपनी खुशियों
और गम के हिस्से
और कैद हो जाते हैं अपने में।

कृष्ण कुमार यादव

Saturday, August 1, 2009

डाकिया बाबू राखी लाया

राखी का त्यौहार भारतीय संस्कृति का एक प्रमुख त्यौहार है जो प्रत्येक वर्ष श्रावण मास में मनाया जाता है। आज इस आधुनिकता एवम विज्ञान के दौर में संसार मे सब कुछ हाईटेक हो गया है। वहीं हमारे त्यौहार भी हाईटेक हो गए है। इन्टरनेट व एस0एम0एस0 के माध्यम से आप किसी को कहीं भी राखी की बधाई दे सकते है। किन्तु जो प्यार, स्नेह, आत्मीयता एवं अपनेपन का भाव बहन द्वारा भाई की कलाई पर राखी बाँधने पर है वो इस हाईटेक राखी में नही है। इस सम्बन्ध में हिन्दी फिल्म का एक मशहूर गाना याद आता है-‘‘बहना ने भाई की कलाई पर प्यार बाँधा है, कच्चे धागे से सारा संसार बाँधा है।‘‘ इन पंक्तियों में छुपा भाव इस पर्व की सार्थकता में चार चाँद लगा देता है। डाकिया बाबू इन भावनाओं को हर साल आपके दरवाजे तक पहुँचाता है, सो इस साल भी तैयार है।

बहनों द्वारा राखियों को सुरक्षित एवं सुगमता से भेजने के लिए डाक विभाग ने पाँच तरह के लिफाफे जारी किये गये हैं। ये लिफाफे पूर्णतया वाटर प्रूफ, मजबूत, पारगमन के दौरान न फटने, रंगबिरंगे एवं राखी की विभिन्न डिजाइनों से भरपूर है। इसके चलते जहाँ राखी प्राप्त करने वाले को प्रसन्नता होगी, वहीं इनकी छंटाई में भी आसानी होगी। यही नहीं राखी डाक को सामान्य डाक से अलग रखा जा रहा है। लोगों की सुविधा के लिए डाकघरों में अलग से डलिया लगाई गयी हैं, जिन पर स्थान का नाम लिखा है। पोस्ट की गई राखियों को उसी दिन विशेष बैग द्वारा सीधे गंतव्य स्थानों को प्रेषित कर दिया जा रहा है, ताकि उनके वितरण में किसी भी प्रकार की देरी न हो। ऐसे सभी भाई जो अपने घर से दूर है तथा देश की सीमा के सजग प्रहरी हमारे जवान जो बहुत ही दुर्गम परिस्थियो मे भी देश की सुरक्षा मे लगे है उन सभी की कलाई पर बँधने वाली राखी को सुरक्षित भेजे जाने के लिए भी डाक विभाग ने विशेष प्रबन्ध किये हैं। तो आप भी रक्षाबन्धन का इन्तजार कीजिए और इन्तजार कीजिए डाकिया बाबू जो आपकी राखी को आप तक पहुँचाना सुनिश्चित करेंगे और भाई-बहन के इस प्यार भरे दिवस के गवाह बनेंगे।