Wednesday, October 10, 2018

उत्तर प्रदेश के सभी प्रधान डाकघरों से होगी एलईडी बल्ब, ट्यूबलाइट और पंखों की बिक्री

अब डाकघर बिजली बचाने में भी योगदान देंगे। उत्तर प्रदेश के डाक घरों से अब  एलईडी बल्ब, ट्यूबलाइट और पंखों की भी बिक्री की जाएगी। डाक विभाग इसे भारत सरकार की “उजाला” योजना के तहत क्रियान्वित करेगा। उत्तर प्रदेश के चीफ पोस्टमास्टर जनरल श्री वीपी सिंह ने इसका शुभारम्भ लखनऊ परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ श्री कृष्ण कुमार यादव और निदेशक मुख्यालय श्री राजीव उमराव की उपस्थिति में लखनऊ जीपीओ में विश्व डाक दिवस पर आयोजित एक कार्यक्रम में विभिन्न ग्राहकों को एलईडी बल्ब सौंपकर किया। 
इस अवसर पर चीफ पोस्टमास्टर जनरल श्री वीपी सिंह ने कहा कि यह डाक विभाग की ऊर्जा संरक्षण के अंतर्गत की गई पहल है, जिससे लोगों को काफी फायदा होगा।  प्रारम्भिक स्तर पर प्रदेश के प्रधान डाकघरों व मुख्य डाकघरों से इसकी बिक्री आरम्भ की जाएगी, जिसे चरणबद्ध रूप में अन्य डाकघरों तक भी ले जाया जायेगा।
लखनऊ (मुख्यालय) परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि डाक विभाग ने टेक्नालाजी के साथ अपने को अपडेट करते हुये कस्टमर-फ्रेंडली सेवाओं का दायरा बढ़ाया है और यह सेवा भी उसी कड़ी का अंग है। इसके तहत एलईडी बल्ब 70 रूपये, ट्यूबलाइट 220 रूपये और पंखा 1110 रूपये के किफायती मूल्य पर डाकघरों द्वारा उपलब्ध कराया जायेगा। फ़िलहाल इसकी शुरुआत बल्ब से की गई है और शीघ्र ही ट्यूबलाइट और पंखे भी बिक्री हेतु उपलब्ध कराये जायेंगे।

गौरतलब है कि ईईसीएल और भारतीय डाक विभाग के बीच एक समझौता के तहत यह कार्य किया जा रहा है। भारत सरकार की योजना है कि गांव-गांव तक एलईडी बल्ब का उपयोग हो, जिससे विद्युत ऊर्जा का अधिक से अधिक बचाव किया जा सके। यह बल्ब नौ वाट का है और  इस बल्ब की तीन साल की गारंटी भी दी जा रही है।

इस अवसर पर चीफ पोस्टमास्टर लखनऊ जीपीओ योगेन्द्र मौर्य सहायक निदेशक आर. एन यादव, भोला सिंह, डिप्टी चीफ पोस्टमास्टर एमपी मिश्र, टीपी सिंह डाक निरीक्षक कोमल दयाल सहित तमाम विभागीय अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।










Tuesday, October 9, 2018

India Post Celebrates 'World Post day' & 'National Postal Week' - 9th to 15th October

डाक विभाग देश के सबसे पुराने विभागों में से एक है जो कि देश के सामाजिक-आर्थिक विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह एक ऐसा संगठन है जो न केवल देश के भीतर बल्कि देश की सीमाओं से बाहर अन्य देशों तक पहुँचने में भी हमारी  मदद करता है। भूमंडलीकरण की अवधारणा सबसे पहले दुनिया भर में भेजे जाने वाले पत्रों के माध्यम से ही साकार हुई। पूरे विश्व में हर वर्ष 9 अक्टूबर को "अंतर्राष्ट्रीय डाक दिवस" और उसी क्रम में 9-15 अक्टूबर तक भारत में राष्ट्रीय डाक सप्ताह मनाया जायेगा। 
9 अक्टूबर को "अंतर्राष्ट्रीय डाक दिवस" मनाये जाने के बारे में लखनऊ (मुख्यालय) परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएं कृष्ण कुमार यादव ने कहा  कि 'एक विश्व-एक डाक प्रणाली' की अवधारणा को साकार करने हेतु 9 अक्टूबर, 1874 को 'यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन' की स्थापना बर्न, स्विटजरलैण्ड में की गई, जिससे विश्व भर में एक समान डाक व्यवस्था लागू हो सके। भारत प्रथम एशियाई राष्ट्र था, जो कि 1 जुलाई 1876 को इसका सदस्य बना। कालांतर में वर्ष 1969 में टोकियो, जापान में सम्पन्न यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन कांग्रेस में इस स्थापना दिवस को "विश्व डाक दिवस" के रूप में मनाने हेतु घोषित किया गया।  तब से पूरी दुनिया में  इस दिन को प्रतिवर्ष धूमधाम मनाया जाता है। विश्व डाक दिवस के क्रम में ही पूरे सप्ताह को राष्ट्रीय डाक सप्ताह के रूप में मनाया जायेगा, जिस दौरान तमाम कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे।



डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव, ने बताया कि लखनऊ परिक्षेत्र के डाक मंडलों में भी 'विश्व डाक दिवस' और तदन्तर 9 से 15 अक्टूबर तक 'राष्ट्रीय डाक सप्ताह' का आयोजन किया जा रहा है। इस क्रम में 9 अक्टूबर, 2015 को  ’विश्व डाक दिवस’ एवं  राष्ट्रीय डाक सप्ताह के तहत 10 अक्टूबर को बैंकिंग दिवस, 11  अक्टूबर को डाक जीवन बीमा दिवस, 12 अक्टूबर को फिलेटली दिवस, 13  अक्टूबर को व्यवसाय विकास दिवस और 15 अक्टूबर को मेल दिवस के रूप में मनाया जायेगा।  श्री यादव ने कहा कि इस दौरान जहां सेवाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार एवं राजस्व अर्जन में वृद्धि पर जोर दिया जायेगा, वहीं उत्कृष्टता हेतु डाक कर्मियों का सम्मान, कस्टमर मीट, डाक टिकट प्रदर्शनी, माई स्टैम्प, डाक सेवाओं की कार्य-प्रणाली को समझने हेतु स्कूली बच्चों द्वारा डाकघरों  का भ्रमण, पत्र लेखन प्रतियोगिता, बचत बैंक, सुकन्या समृद्धि योजना व डाक जीवन बीमा मेला, इत्यादि तमाम कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे। 

लखनऊ (मुख्यालय) परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएं कृष्ण कुमार यादव ने इस दौरान लखनऊ जीपीओ का विजिट कर 'विश्व डाक दिवस’ और  9-15 अक्टूबर तक मनाये जाने वाले  'राष्ट्रीय डाक सप्ताह' की तैयारियों का जायजा भी लिया।  इस दौरान चीफ पोस्टमास्टर श्री योगेंद्र कुमार मौर्य सहित तमाम अधिकारी उपस्थित रहे। 




विश्व डाक दिवस @ राष्ट्रीय डाक सप्ताह : पत्रों की खूबसूरत दुनिया

पत्रों की अपनी एक खूबसूरत दुनिया है।  सभ्यता के आरंभ से ही मानव किसी न किसी रूप में पत्र लिखता रहा है। कहते हैं कि दुनिया का सबसे पहला खत 2009 ईसा पूर्व बेबीलोन के खंडरों से मिला था, जो एक प्रेमी ने अपनी प्रेमिका के विरह के भाव से ओतप्रोत होकर लिखा था। भावनाओं की बयार इस कद थी कि प्रेमी ने मिट्टी के फर्श को खोदते हुए ‘मैं तुमसे मिलने आया था, पर तुम नहीं मिली’ का संदेश जाने से पहले प्रेमिका के लिए छोड़ा। इस संदेश में कितनी तड़प थी इसका अंदाजा वही लगा सकता है जिसके लिए वह लिखा गया। 

डाक विभाग एक संदेश दूसरे तक पहुंचाने का काम करता है। ईसा पूर्व आरंभ से ही मानव किसी न किसी रूप में संदेश देता रहा है। दीवारों पर चित्रकारी से लेकर मूर्तियों तक। छोटे और तेजी से संदेश पहुंचाने का सबसे पहले वाहक कबूतर बने। इनको सबसे पहले डाकिए के रूप में आज भी जाना जाता है। धीरे-धीरे  तेजी से संदेश भेजने के लिए घोड़ों का इस्तेमाल हुआ। ये रियासतों के बीच दौड़ते थे। रियासतों के बीच संदेश का आदान-प्रदान करने के लिए डाक नेटवर्क 1727 से अस्तित्व में आया। धीरे-धीरे रियासतों में डाकघर बनने लगे और इनमें एकरूपता लाने के लिए इनको जोड़ा गया। 
(Heritage Building Lucknow GPO)


ऐतिहासिक परिदृश्य-

- पहला डाकघर कोलकाता में आरंभ हुआ। इसके बाद तत्कालीन तीन प्रेसिडेंसियों कोलकाता (1774), चेन्नई (1786) और मुम्बई (1793) में जनरल पोस्ट ऑफिस स्थापित हुए। 
- 1837 में भारतीय डाकघर अधिनियम बना। 
- 1854 में अधिक व्यापक  भारतीय डाकघर अधिनियम बना। भारत के ब्रिटिश क्षेत्रों में डाक ढुलाई का एकाधिकार डाकघरों को इसी के बाद मिला। 
- वर्तमान डाक प्रणाली भारतीय डाकघर अधिनियम, 1854 के साथ अस्तित्व में आई। 
- इसी के साथ रेल डाक सेवा तथा भारत से ग्रेट ब्रिटेन और चीन तक एक समुद्री डाक सेवा प्रारंभ हुई। 
- 'एक विश्व-एक डाक प्रणाली' की अवधारणा को साकार करने हेतु 9 अक्टूबर, 1874 को 'यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन' की स्थापना बर्न, स्विटजरलैण्ड में की गई, जिससे विश्व भर में एक समान डाक व्यवस्था लागू हो सके। भारत प्रथम एशियाई राष्ट्र था, जो कि 1 जुलाई 1876 को इसका सदस्य बना। 
- इसके बाद भारतीय डाकघर अधिनियम 1898 पारित हुआ, जिसके बाद डाक सेवाओं को विनियमित किया गया। 
- वर्ष 1969 में टोकियो, जापान में सम्पन्न यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन कांग्रेस में यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन' के स्थापना दिवस को "विश्व डाक दिवस" के रूप में मनाने हेतु घोषित किया गया।  तब से पूरी दुनिया में  इस दिन को प्रतिवर्ष धूमधाम मनाया जाता है। विश्व डाक दिवस के क्रम में ही भारत में पूरे सप्ताह को राष्ट्रीय डाक सप्ताह के रूप में मनाया जाता है। 
-इस प्रकार डाक  विभाग का यह सफर तय हुआ और एक अक्टूबर, 2018 को डाक विभाग ने अपने 164 साल पूरे किए। 
कभी अंग्रेजों का थियेटर हुआ करता था हजरतगंज स्थित लखनऊ जीपीओ 
(साभार : दैनिक हिंदुस्तान, लखनऊ, 9 अक्टूबर 2018)


लाल डिब्बे जो गुमनाम गलियों से घर तक पहुंचाते थे-
डाक विभाग के लाल डिब्बे (लेटर बाक्स) बेतरतीब हमें मोहल्लों के भीतर गुमनाम गलियों से घरों तक ले जाते थे। एक समय था जब लोग कहते थे कि फलां जगह पहुंचकर तीन कदम चलकर लाल डिब्बे से दायें मुड़ते ही 10 कदम पर मेरा मकान दिखेगा। पहले डाकिए भी लोगों का पता मुंहजुबानी याद रखते थे। लेकिन, 15 अगस्त 1972 से पिन कोड सिस्टम लागू होने के बाद यह थोड़ा मुश्किल हो गया। वहीं, दादा-दादी, नाना-नानी का हाथ पकड़कर लाल डिब्बे तक जाना भी धीरे-धीरे गुम हो गया। वर्तमान में अब चिटि्ठयां ऑनलाइन जा रही है। सोशल मीडिया का प्रभाव बढ़ने से लाल डिब्बे लुप्त होते गए। 

कई महान विभूतियाँ रही हैं डाकघर में -

साइकिल से गली-गली घूमकर घंटियां बजाकर चिटि्ठयां पहुंचाने वाले इन डाक बाबू को कम मत आंकिए। कई महान हस्तियां भी डाक विभाग से जुड़ी है। जिन्होंने चिटि्ठयां बांटने से लेकर बाबू तक का काम किया। अमेरिका के राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन पोस्टमैन थे तो ब्रिटिश  भारत के वायसराय लार्ड रीडिंग भी डाक विभाग से जुड़े थे। फिल्म निर्माता राजेंद्र सिंह बेदी से लेकर देवानंद भी डाक विभाग में काम कर चुके हैं। मुंशी प्रेमचंद के पिता डाक विभाग में क्लर्क थे। पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के पिता भी डाक-तार विभाग में  कर्मचारी थे । 

मात्र 25 से 50 पैसे में मिलने वाले पोस्टकार्ड की कितनी अहमियत है इससे ही पता चलता है कि अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह में एक डाक  को बांटने के लिए डाकिया आज भी एक आईलैंड से दूसरे आईलैंड का सफर तय करता है। डाक से भेजे जाने वाला एक-एक सन्देश बहुत अहम होता है। डाक विभाग निरंतर बदलते परिवेश के साथ अपने को ढालने का काम कर रहा है। 
कृष्ण कुमार  यादव, निदेशक डाक सेवाएं, लखनऊ (मुख्यालय) परिक्षेत्र।


विश्व डाक दिवस पर विशेष : लफ्जों में छिपे जज्बात बयां करते थे ख़त 
(साभार : दैनिक जागरण, लखनऊ, 9 अक्टूबर 2018)

Wednesday, October 3, 2018

Philatelic Exhibition & Seminar organized in Lucknow GPO on 150th birth anniversary of Mahatma Gandhi

Mahatma Gandhi's name is not only a name, but it's an ideology. Gandhiji gave the knowledge of Satyagraha, truth and non-violence, cleanliness, dialogue and self-discipline, today the whole world is convinced and doing research on them. The above thoughts were expressed by Mr. Krishna Kumar Yadav, Director Postal Services, Lucknow (HQ) Region while inaugurating the Philatelic Exhibition & Seminar on the 150th birth anniversary of Mahatma Gandhi in Lucknow GPO. On this occasion Mr. Yadav also released a Special Cover with cancellation on Celebration of 150th birth anniversary of Mahatma Gandhi with 'Swachhatata hi sewa' theme.  

In his address, Director, Postal Services, Mr. Krishna Kumar Yadav said that this is the relevance of Gandhiji's ideas that today the highest number of postage stamps in the world have been issued on Mahatma Gandhi as personality. The auction of letters written by Gandhiji is getting auctioned in millions of rupees. Through the postage stamps Gandhiji's life and his ideas can be transformed among young generation. Mr. Yadav said that today's new generation wants to see Gandhiji in a new way. He is presenting them not as a saint but as a practical idealist. Gandhi was the only popular person in the world who made innovative experiments about himself in public and his views on ethics, economic issues and his ethical thinking on public issues in today's public are relevant.
Chief Postmaster Yogendra Maurya said that In Philatelic Exhibition, eminent philatelists of Uttar Pradesh displayed the Gandhi related Stamps in 60 frames. More than 2,500 stamps released on Mahatma Gandhi by 125 countries were displayed in Exhibition. 

On this occasion Quiz competition, Essay writing & letter writing competition was also organised for Students, where students of various schools actively participated. Director Postal Services Mr. Krishna Kumar Yadav distributed the prizes to Philatelists and winners of various competitions.   

Function was also graced by RN Yadav, Assistant Director, CP Singh, Deputy Chief Postmaster, BS Bhargava, President Lucknow Philatelic Society, Navin Singh, Secretary, Lucknow Philatelic Society.  



Philatelic Exhibition & Seminar organized in Lucknow GPO on 150th birth anniversary of Mahatma Gandhi 
Highest numbers of Stamps across world issued on Mahatma gandhi-Krishna Kumar Yadav, Director Postal Services Lucknow

गाँधी जी की 150वीं जयंती : दुनिया में सबसे ज्यादा डाक टिकट महात्मा गाँधी पर जारी-डाक निदेशक केके यादव

महात्मा गाँधी सिर्फ एक नाम ही नहीं, बल्कि विचारधारा का नाम है। सत्याग्रह, सत्य व अहिंसा, स्वच्छता, संवाद, स्वानुशासन की जो सीख गाँधी जी ने दी, आज सम्पूर्ण दुनिया इसकी कायल है और इन पर शोध कर रही है। उक्त विचार लखनऊ (मुख्यालय) परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव ने लखनऊ जीपीओ में  महात्मा गाँधी की 150वीं जयंती समारोह के क्रम में आयोजित डाक टिकट प्रदर्शनी और सेमिनार का शुभारम्भ करते हुए कहीं। इस अवसर पर श्री यादव ने महात्मा गाँधी की 150 वीं जयंती और स्वच्छता पर एक विशेष आवरण (लिफाफा) व् विरूपण भी जारी किया। 
इस अवसर पर अपने सम्बोधन में निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि यह गाँधी जी के विचारों की प्रासंगिकता है कि आज दुनिया में सबसे ज्यादा डाक टिकट व्यक्तित्व के रूप में महात्मा गाँधी पर ही जारी हुए हैं। गाँधी जी के लिखे पत्रों की लाखों-करोड़ों रूपये में नीलामी हो रही है। डाक टिकटों के माध्यम से गाँधी जी के जीवन और उनके विचारों को नई पीढ़ी के बीच प्रसारित किया जा सकता है। 
श्री यादव ने कहा कि आज की नयी पीढ़ी गाँधी जी को एक नए रूप में देखना चाहती है। वह उन्हें एक सन्त के रूप में नहीं वरन् व्यवहारिक आदर्शवादी के रूप में प्रस्तुत कर रही है। गाँधी जी दुनिया के एकमात्र लोकप्रिय व्यक्ति थे जिन्होंने सार्वजनिक रूप से स्वयं को लेकर अभिनव प्रयोग किए और आज भी सार्वजनिक जीवन में नैतिकता, आर्थिक मुद्दों पर उनकी नैतिक सोच व धर्म-सम्प्रदाय पर उनके विचार प्रासंगिक हैं। 



लखनऊ जीपीओ के चीफ पोस्टमास्टर योगेंद्र मौर्य ने बताया कि जीपीओ में 60 फ्रेमों में भारत के साथ-साथ दुनिया के लगभग 125 देशों में गाँधी जी पर जारी ढाई हजार डाक टिकटों को फिलेटलिस्ट्स द्वारा प्रदर्शित किया गया, जिसका विद्यार्थियों के साथ-साथ लखनऊवासियों ने रोचकता के साथ आनंद लिया।  


इस अवसर पर स्कूली बच्चों हेतु निबंध लेखन, पत्र लेखन का भी आयोजन किया गया। कार्यक्रम के अंत में डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव ने फिलेटलिस्टों और बच्चों को सम्मानित भी किया।   
कार्यक्रम को सहायक निदेशक आर एन यादव, डिप्टी चीफ पोस्टमास्टर टीपी सिंह, लखनऊ फिलेटलिक एसोसिएशन के अध्यक्ष बीएस भार्गव व सचिव नवीन सिंह ने भी सम्बोधित किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. जेके अवस्थी ने किया। 






दुनिया में सबसे ज्यादा डाक टिकट व्यक्तित्व के रूप में महात्मा गाँधी पर हुए जारी-डाक निदेशक केके यादव

लखनऊ जीपीओ में गाँधी की 150वीं जयंती समारोह पर आयोजित डाक टिकट प्रदर्शनी व सेमिनार का डाक निदेशक केके यादव ने किया शुभारम्भ