Monday, September 28, 2015

अब पोस्टमैन बनने के लिए बीटेक छात्र भी होड़ में

इसे सरकारी नौकरी के प्रति मोह कहें या शिक्षित बेरोजगारी का उदाहरण कि जिस पद के लिए अहर्ता मात्र 10 वीं पास है, उसके लिए उच्च शिक्षा प्राप्त - एम. ए.,  एम. एस. सी और यहाँ तक कि बी-टेक की डिग्री लिए इंजीनियर भी आवेदन कर रहे हैं।  यह नजारा देखने को मिला राजस्थान डाक परिमंडल द्वारा रविवार, 27 सितंबर, 2015 को आयोजित हुई पोस्टमैन और मेल गार्ड्स की परीक्षा में। पहले डाक विभाग इन पदों को विभागीय पदोन्नति के माध्यम से भरता था, पर अब पोस्टमैन बनने के लिए खुली प्रतियोगिता परीक्षा के माध्यम से चयन होता है। ऐसे में पोस्टमैन बनने के लिए युवाओं में होड़ लगी हुई है। राजस्थान में 155 पोस्टमैन और 12 मेल गार्ड पदों पर नियुक्ति के लिए 1, 47, 974 लोगों ने आवेदन किया, जिनमें से कई उच्च शिक्षा प्राप्त अभ्यर्थी भी हैं, जबकि पोस्टमैन के लिए न्यूनतम अहर्ता मात्र 10 वीं पास है। 

राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर के निदेशक डाक सेवाएँ कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि पश्चिमी क्षेत्र में पोस्टमैन के 49 और मेल गार्ड के 04 पदों के लिए जोधपुर और बीकानेर में परीक्षा आयोजित की गई।  इनमें जोधपुर में 15, 402 के सापेक्ष 10,424 और बीकानेर में  12, 473 के सापेक्ष कुल 8,027 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए। परीक्षा शांतिपूर्वक और सौहाद्रपूर्ण माहौल में संपन्न हुई।  

बीटेक डिग्रीधारी और हाईटेक छात्रों द्वारा पोस्टमैन की परीक्षा दिए जाने पर निदेशक श्री यादव ने कहा कि आज का पोस्टमैन भी टेक्नॉलजी से जुड़ा हुआ है और उसे अपना कार्य सुचारू रूप से सम्पादित करने हेतु कंप्यूटर का ज्ञान आवश्यक है।  समाज में डाकिया की अपनी अलग ही प्रतिष्ठा है और सरकारी सेवा के स्थायित्व के साथ-साथ उसका वेतन भी कई निजी कंपनियों से बढ़िया और आकर्षक है। श्री यादव ने कहा कि डाक विभाग आई. टी. मॉडर्नाइजेशन के दौर से गुजर रहा है और ऐसे में यदि बीटेक डिग्रीधारी और हाईटेक लोग विभाग में आते हैं या पोस्टमैन बनने के लिए आकर्षित होते हैं  तो इसे एक शुभ संकेत के रूप में देखा जाना चाहिए !!







Thursday, September 24, 2015

हिंदी पखवाड़ा के तहत डाक विभाग में हुई कविता प्रतियोगिता


हिंदी पखवाड़ा के तहत डाक विभाग द्वारा जोधपुर में 23 सितंबर, 2015 को पोस्टमास्टर जनरल कार्यालय के सभा कक्ष में कविता प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर के निदेशक डाक सेवाएँ कृष्ण कुमार यादव ने अपने उद्बोधन में कहा कि कविता हमारे जीवन मूल्यों का प्रतिबिम्ब है। कविता आत्मा का मौलिक व विशिष्ट संगीत है, जो मानव में संस्कार रोपती हैै।  एक ऐसा संस्कार जो सभी को प्रदत्त है पर जरूरत है उसके खोजे जाने, महसूस करने और गढ़ने की। यही कारण है कि सम्वेदनाओं  का प्रस्फुटन होते ही कविता स्वतः फूट पड़ती है। हिंदी साहित्यकार एवं कवि  के रूप में भी चर्चित श्री यादव ने कहा कि काव्य-सृजन निरा कला कर्म या बौद्विक कवायद भर नहीं है बल्कि यह अपने भीतर एक और बड़ी लेकिन समानांतर दुनिया को समाए हुए है। कविता स्वयं की व्याख्या भी करती है एवं बहुत कुछ अनकहा भी छोड़ देती है। इस अनकहे को ढूँढ़ने की अभिलाषा ही एक कवि-मन को अन्य से अलग करती है।  



कार्यक्रम के दौरान डाक विभाग के तमाम प्रतिभागियों ने अपनी रचनाएं पेश कीं। इनमें सहायक डाक अधीक्षक पुखराज राठौड़, अनिल कौशिक, डाक निरीक्षक राजेंद्र भाटी, विनोद कुमार पुरोहित, रमेश चन्द्र गुर्जर, नरेंद्र कुमार वर्मा इत्यादि ने हिंदी में कवितायेँ सुनाकर वाहवाही बटोरी। राजेंद्र भाटी ने कारगिल का शहीद कविता सुनाकर लोगों को भाव विभोर किया तो विनोद कुमार पुरोहित ने अध्यात्म पर याचना कविता सुनाई।  अनिल कौशिक ने पिता की भूमिका पर कविता सुनाकर भाव विह्वल किया तो पुखराज राठौड़ ने महाराणा प्रताप की गाथा को जीवंत किया। इस दौरान डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव ने अपनी एक कविता के माध्यम से कविता की भूमिका को भी रेखांकित किया -कविता है वेदना की अभिव्यक्ति/कविता है एक विचार/कविता है प्रकृति की सहचरीे/कविता है क्रान्ति की नजीर/कविता है शोषितों की आवाज/कविता है रसिकों का साज/कविता है सृष्टि और प्रलय का निर्माण/कविता है मोक्ष और निर्वाण/कभी यथार्थ, तो कभी कल्पना के आगोश में/कविता इस ब्रह्माण्ड से भी आगे है/शायद इसीलिए कहा गया है/जहाँ न पहुँचे रवि वहाँ पहुँचे कवि।

इस दौरान सहायक निदेशक (राजभाषा) कान सिंह राजपुरोहित ने कहा कि साहित्य में सबसे लोकप्रिय विधा कविता को ही माना जाता है क्योंकि कविता मनुष्य के कण्ठ में सहज ही समा जाती है। हमारे वेद, पुराण इत्यादि सभी काव्यमय रूप में ही लिखे गए हैं और अपनी गेयता के चलते स्वत: लोगों की जुबान पर चढ़ जाते हैं।

कार्यक्रम का संचालन डाक निरीक्षक सुदर्शन सामरिया और आभार-ज्ञापन राजेंद्र भाटी ने किया।  इस दौरान डाक विभाग के तमाम अधिकारी और कर्मचारीगण उपस्थित रहे।  


Tuesday, September 15, 2015

महात्मा गांधी से सम्बंधित सर्वाधिक डाक टिकटों का संग्रह कर बनाया नया विश्व रिकॉर्ड


डाक टिकटों की दुनिया में महात्मा गाँधी का नाम सर्वोपरि है।  अधिकतर लोग गांधी जी से जुड़े डाक टिकटों का संग्रह करते हैं। पर रायपुर(छत्‍तीसगढ़) के डॉ. भानुप्रताप सिंह ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के सबसे अधिक डाक टिकट का संग्रह कर नया विश्व रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। 

पेशे से डॉक्टर डॉ. भानुप्रताप सिंह ने बताया कि गिनीज में इससे पहले महात्मा गांधी ने नाम पर कैटेगिरी नहीं थी। सालों की मेहनत से उन्होंने यह रिकॉर्ड बनाया, साथ ही उन्हें इस कैटेगिरी को गिनीज में जुड़वाने में भी बहुत मेहनत करनी पड़ी। गिनीज से पहले लिमका बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी बिगेस्ट कलेक्शन ऑफ महात्मा गांधी स्टैम्प में उनका  नाम आ चुका है। साथ ही उन्होंने महात्मा गांधी पर एक किताब 'बापू- ए जर्नी फ्रॉम मोहनदास टू महात्मा' भी लिखी है।

डॉ. भानुप्रताप सिंह के पुराने रिकॉर्ड

- 2013 में रोलैण्ड हिल थीम पर स्टैम्प कलेक्शन में गिनीज में अपना नाम, जो कि पहले जयपुर के अरविंद झा के नाम पर था, उसे तोड़कर नया रिकॉर्ड कायम किया, जिसमें उन्होंने 1200 के रिकॉर्ड को अपने 1671 से तोड़ा।

- लिमका में इनरेगुलर सिक्कों का रिकॉर्ड

- बिगेस्ट साइज ऑफ एनवेलेप का रिकॉर्ड

- रंगीन सिक्कों के कलेक्शन का रिकॉर्ड

- अलग-अलग प्रकार के सिक्कों का रिकॉर्ड

- डाक सिक्कों का रिकॉर्ड

- क्वाइन ऑन स्टैम्प का रिकॉर्ड

- फर्स्ट  डे कवर का रिकॉर्ड

- रोल एंड हिल रिकॉर्ड

- क्वीन एलिजाबेथ स्टैम्प का रिकार्ड के आलावा कई रिकॉर्ड अपने नाम किए हैं।

वर्ल्ड रिकॉर्ड की दुनिया में कदम

डॉ. भानुप्रताप बताते हैं कि बचपन से ही उन्हें चीजों के कनेक्शन का शौक था, जिसे देखकर उन्हें वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने का आइडिया आया। वे दूसरे देशों के महारथियों की चीजें के कलेक्ट करते ही थे, पर भारतीय होने के नाते उन्हें महात्मा गांधी पर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने का सोचा और अपने इस सपने को पूरा किया।

Saturday, September 12, 2015

अब डाकघरों के माध्यम से भी उपलब्ध होगी ''प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना'' व ''प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना''

प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना व प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना अब डाकघरों के माध्यम से भी उपलब्ध है। सभी प्रधान डाकघरों व सीबीएस डाकघरों में इस योजना का लाभ लोग खाता खोल कर ले सकते हैं। उक्त सम्बन्ध में जानकारी देते हुए राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर के निदेशक डाक डाक सेवाएँ कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि  भारत सरकार द्वारा डाक विभाग के विशाल नेटवर्क एवं जन-जन तक पहुँच को देखते हुए, इन जन सुरक्षा योजनाओं को डाक विभाग के माध्यम से संचालित करने का निर्णय किया गया है। यह योजनायें राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र के 177 सी.बी.एस. प्लेटफार्म पर संचालित समस्त प्रधान डाकघरों एवं उप डाकघरों में उपलब्ध होंगी। 


निदेशक श्री यादव ने इन योजनाओं के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि  प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के तहत खाताधारकों को 330 रुपये में दो लाख रुपये का बीमा लाभ प्राप्त होगा। इस योजना को 18 वर्ष से 50 वर्ष तक के उम्र वाले खाताधारक ले सकते हैं। वहीं प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के तहत खाताधारकों को 12 रुपये में दो लाख रुपये का दुर्घटना बीमा का लाभ मिलेगा। इसके लिए धारक को केवल 12 रुपये प्रति वर्ष अर्थात 1 रुपये प्रति माह की राशि प्रीमियम के तौर पर देनी होगी।  यह योजना 18 वर्ष से 70 वर्ष तक के खाताधारकों के लिये है। प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना वस्तुत: एक बीमा पॉलिसी हैं, जिसके तहत मृत्यु एवम पूर्णतः विकलांग होने पर 2 लाख रूपये एवम आंशिकतौर पर अपंग होने पर 1 लाख रुपये  बीमा  राशि दी जायेगी|  


डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव  ने कहा कि उक्त दोनों योजनाओं के लिये आवेदकों का सीबीएस डाकघर में खाता होना आवश्यक है तथा खाताधारक डाकघर में प्रपत्र भर कर इन योजनाओं से जुड़ सकते हैं। अगर किसी उपभोक्ता का एक या अधिक बचत खाते हैं तब वे किसी एक बचत खाते के जरिये योजना से जुड़ सकते हैं। इसके अन्तर्गत दो फोटो, एक पहचान पत्र, पता प्रमाण पत्र व जन्मप्रमाण पत्र की प्रतिलिपि देना आवश्यक होगा। यह योजनायें डाकघर से जुड़ी होने के कारण धारक को प्रीमियम भरने की चिंता से मुक्ति मिलेगी क्यूंकि यह राशि सीधे खाते से काट ली जाएगी। यह बीमा योजनायें 1 साल तक वैध रहेगी जिसे प्रति  वर्ष नवीनीकरण करवाना होगा | जो खाताधारक इन योजनाओं का लाभ बैंक के माध्यम से प्राप्त कर चुके हैं,  उन्हें यह बीमा लाभ डाकघर से उपलब्ध नहीं होगा। इन बीमा योजनाओं से जुड़ने के लिए आधार कार्ड का होना जरुरी हैं |

Friday, September 11, 2015

'विश्व हिंदी सम्मेलन' पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जारी किया डाक टिकट


विश्व हिंदी सम्मेलन अपनी छटा डाक टिकटों पर भी बिखेरेगा।  मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में  तीन दिवसीय 10वें विश्व हिंदी सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में 10 सितंबर, 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्व हिंदी सम्मेलन पर 5 रूपये का विशेष डाक टिकट जारी किया। इस डाक टिकट पर 10वें विश्व हिंदी सम्मेलन का शुभंकर बना हुआ है। विश्व हिंदी सम्मेलन का आयोजन स्थल लाल परेड मैदान माखनलाल चतुर्वेदी नगर में बदल चुका है। मुख्य आयोजन रामधारी सिंह दिनकर सभागार में हो रहा है। उद्घाटन मंच पर डाक विभाग द्वारा तैयार डाक टिकट का प्रधानमंत्री ने विमोचन किया। 


इस दौरान संचार मंत्री रविशंकर प्रसाद, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, मध्यप्रदेश के राज्यपाल राम नरेश यादव, पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केशरी नाथ त्रिपाठी, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित तमाम राजनेता, साहित्यकार, बुद्धिजीवी इत्यादि मौजूद थे। 

Wednesday, September 9, 2015

डाक टिकटों पर झलकेंगे रामायण-महाभारत के वृतांत


भारतीय डाक विभाग जल्द ही प्राचीन ग्रंथों के वृतांतों को डाक टिकट पर उकेरने की योजना को अमलीजामा पहनाने जा रहा है। विभाग डाक टिकटों पर रामायण और महाभारत के वृतांत को दर्शाएगा।

उक्त टिकटों की श्रृंखला को विभाग द्वारा दशहरे के दौरान  जारी करने की योजना है । प्रथम चरण में विभाग द्वारा उक्त दोनों ग्रंथों पर आठ लाख डाक टिकट छपवाए जाएंगे। टिकटों की श्रृंखला में कुरुक्षेत्र में हुए महाभारत के रण एवं रामायण के प्रमुख किस्सों को दर्शाया जाएगा। 

पिछले दिनों महिला सशक्तिकरण के उपर डाक टिकट जारी करते हुए संचार मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने कहा, ‘मैंने इस बारे में डाक टिकट संग्रह बोर्ड के साथ चर्चा की है। डाक टिकटें रामायण और महाभारत श्रृंखला पर जारी की जानी चाहिए। यह देश की महान सांस्कृतिक धारणाओं का सम्मान होना चाहिए।’ उन्होंने कहा कि विभिन्न हस्तियों पर जारी डाक टिकटें केवल स्मृति के तौर पर सहेज कर रखने के लिये नहीं बल्कि नियमित उपयोग के लिये उपलब्ध होंगी।

Tuesday, September 8, 2015

डाक टिकटों पर दिखेंगे अब्दुल कलाम से लेकर माउंटेन मैन दशरथ मांझी


डाक टिकटों पर अब तमाम महान हस्तियों के दर्शन होंगे।  पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम से लेकर बिहार के माउंटेन मैन दशरथ मांझी के सम्मान में भारत सरकार डाक टिकट जारी करेगी. इनके अलावा देश के 25 अन्य महान हस्तियों पर भी डाक टिकट जारी होगा. जाने माने गायकों, लेखकों, स्वतंत्रता सेनानियों और चित्रकारों पर भी सरकार डाक टिकट जारी करने वाली है और इसके डिजाइन के लिए सरकार ने आम लोगों से राय मांगी है।  


डाक विभाग ने 30 जनवरी, 2015 को स्वच्छ भारत अभियान पर स्मृति डाक टिकट जारी किया था। इस डाक टिकट के डिजाइन पर फैसला भी खुली प्रतिस्पर्धा के जरिए किया गया था। महिला सशक्तिकरण पर भी 15 अगस्त, 2015 को एक स्मृति डाक टिकट को जारी किया गया था। इसके डिजाइन पर भी आम लोगों की राय से फैसला लिया गया था। द्रीय संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने यह भी कहा कि लोगों को टिकटों से जुड़ी सूचना मिल सके इसके लिए एक मोबाइल ऐप तैयार किया जाना चाहिए।

केंद्रीय मंत्री रविशंकर ने कहा कि डाक विभाग ने महाकवि विद्यापति, महात्मा गांधी, राजेंद्र प्रसाद, जयप्रकाश नारायण, जननायक कर्पूरी ठाकुर, भारतीय जनता पर्टी के नेता कैलाशपति मिश्र, रवींद्रनाथ टैगोर, छत्रपति शिवाजी समेत 25 देश के महान हस्तियों पर डाक टिकट जारी करने का फैसला किया है. ज्ञात हो कि विद्यापति, गांधी और टैगोर पर डाक टिकट पहले भी जारी हो चुका है. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के नेता भूपेश गुप्त  की याद में भी डाक टिकट जारी करने का फैसला लिया है.

Saturday, August 29, 2015

रक्षाबंधन और डाकघरों का संबंध है पुराना


राखी और पोस्ट ऑफिस का सम्बन्ध बहुत पुराना है।  यही कारण है कि रक्षाबंधन के समय डाकघरों में राखियाँ भेजने वालों की लंबी कतारें लगती हैं और सिर्फ देश ही नहीं विदेशों में भी खूब राखियाँ भेजी जा रही हैं। राखी का धागा ऑनलाइन होते  इस युग में  आज भी अपनी अहमियत रखता है।
 (साभार : राजस्थान पत्रिका, 29 अगस्त, 2015) 


Sunday, August 23, 2015

भारतीय डाक विभाग को पेमेंट बैंकिंग के लिए मिला लाइसेंस


भारतीय डाक विभाग सहित 11 संस्थानों को भारतीय रिज़र्व बैंक ने 'पेमेंट बैंकों' के लिए लाइसेंस जारी करने की मंज़ूरी  20 अगस्त को दे दी है। रिज़र्व बैंक को पेमेंट बैंक लाइसेंस के लिए 41 अर्जियां मिली थीं, जिनमें से 11 को लाइसेंस के योग्य पाया गया। गौरतलब है कि पेमेंट बैंक के लिए रिज़र्व बैंक ने 2013 में डिस्कशन पेपर जारी किया था. इसके बाद नचिकेत मोर कमेटी का गठन किया गया. बाद में रिज़र्व बैंक ने पेमेंट बैंक के लाइसेंस जारी करने के लिए नियम-क़ायदे तय किए.

अरबपति मुकेश अंबानी, कुमारमंगलम बिड़ला की कंपनियों के साथ साथ सुनील भारती मित्तल की भारती एयरटेल, डाक विभाग और विदेशी स्वामित्व वाली दूरसंचार कंपनी वोडाफोन सहित 11 कंपनियों को रिजर्व बैंक ने बुधवार को भुगतान बैंक चलाने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी। भुगतान बैंक लोगों से जमा स्वीकार करेंगे और धन का प्रेषण करेंगे। इस तरह के बैंक किसी को कर्ज नहीं देंगे। मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड  जिसने हाल ही में भारतीय स्टेट बैंक के साथ भागीदारी की घोषणा की, के साथ-साथ एयरटेल एम-कामर्स सविर्सिज लिमिटेड, आदित्य बिड़ला नुवो, वोडाफोन एम-पैसा, टेक महिन्द्रा और डाक विभाग को रिजर्व बैंक से भुगतान बैंक शुरू करने के लिये सैद्धांतिक तौर पर मंजूरी मिल गई। सनफार्मा के प्रवर्तक दिलीप शांतिलाल सांघवी और पे-टीएम के विजय शेखर शर्मा को अपनी व्यक्तिगत हैसियत में भी भुगतान बैंक के लिये सैद्धांतिक मंजूरी मिली है।

इसके अलावा चोलामंडलम् डिस्ट्रीब्यूशन सर्विसिज, फिनो पे-टेक और नेशनल सिक्युरिटीज डिपाजिटरी लिमिटेड :एनएसडीएल: को भी इसके लिये मंजूरी दी गई है। कुल मिलाकर 41 आवेदकों में से 11 कंपनियों को व्यक्तियों को भुगतान बैंक के लिये सैद्धांतिक मंजूरी दी गई है। भुगतान बैंक लाइसेंस के तहत कंपनियों को शुरूआत में ग्राहकों से एक लाख रुपये तक की जमा राशि स्वीकार करने की मंजूरी होगी। ये बैंक अपने ग्राहकों को इंटरनेट बैंकिंग, धन प्रेषण सुविधा देने के साथ साथ बीमा एवं म्यूचुअल फंड योजना भी बेचेंगे।  इसके अलावा भुगतान बैंक अपने ग्राहकों को एटीएम, डेबिट कार्ड जारी कर सकेंगे लेकिन क्रेडिट कार्ड देने की अनुमति नहीं होगी। भुगतान बैंक की शुरूआत हेतु 18 महीने की  समय सीमा भी तय की गई है। 

पेमेंट बैंक की विशेषतायें :

पेमेंट बैंक में हर खाताधारक अधिकतम एक लाख रुपए तक की राशि जमा कर सकता है.
इसके माध्यम से पैसे का लेन-देन किया जा सकता है. ये बैंक ग्राहकों को एटीएम/डेबिट कार्ड जारी कर सकते हैं.
पेमेंट बैंक इंटरनेट बैंकिंग के ज़रिए लेन-देन की सुविधा भी देंगे.
पेमेंट बैंक से बैंकिंग सि‍स्‍टम में कैशलेस ट्रांजेक्‍शन को बढ़ावा मि‍लेगा.
पेमेंट बैंक नियमित बैंकों की तरह कर्ज़ नहीं दे सकते. क्रेडिट कार्ड भी जारी नहीं कर सकते.
ये बैंक अपने पास नक़दी या सरकारी प्रतिभूतियां ही रख सकते हैं.

Friday, August 14, 2015

जब देश की आजादी पर जारी हुआ डाक टिकट

आजादी के उपलक्ष्य में भारतीय डाक विभाग ने  साढ़े तीन आना (यानि चौदह पैसा) का एक डाक टिकट जारी किया था।  इस पर तिरंगे ध्वज के चित्र के साथ जय हिन्द शब्द मुद्रित है। कई लोग ऐसा सोचते हैं की यह डाक टिकट 15 अगस्त, 1947 को जारी हुआ होगा, पर ऐसा नहीं है।  स्वतंत्रता पश्चात 21नवंबर,1947 को प्रथम भारतीय डाक टिकट साढ़े तीन आने का ‘जयहिंद’ जारी किया गया। 



नेहरू जी ने आजादी के बाद, लाल किले से अपने पहले भाषण का समापन भी , 'जय हिन्द' से किया था। उस समय डाक विभाग को सूचना  भेजी गई कि नए डाक टिकट आने तक, डाक टिकट चाहे अंग्रेज राजा जॉर्ज की ही मुखाकृति की उपयोग में आए लेकिन उस पर मुहर 'जय हिन्द' की लगाई जाए। 31 दिसम्बर 1947 तक यही मुहर चलती रही। 

हिंदुस्तान अख़बार में डाकखाने की इस मुहर पर प्रथम पृष्ठ पर समाचार भी प्रकाशित था। 

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शताब्दियों की दासता के बाद जब भारत में स्वतंत्रता का मंगल प्रभात हुआ था तो सबकी आँखों में एक नई रोशनी टिमटिमाई थी।  नए सपने, नई सोच, नए जज्बे .... वाकई आज हमने एक लंबा सफ़र तय कर लिया है। आजादी के 69वें साल में प्रवेश कर रहे हैं। स्वतंत्रता दिवस पर हार्दिक शुभकामनायें !! 

Wednesday, August 12, 2015

अब वाटरप्रूफ डिजायनर लिफाफे में भेजें राखी

हर बहन चाहती है कि उसके द्वारा भेजी जा रही राखी सुरक्षित और तीव्रता से उसके भाई के पास पहुँच सके। ऐसे में बहनों द्वारा भाईयों की कलाइयों पर बँधने वाली राखी सुरक्षित रूप में व तीव्र गति से भेजी जा सके, इसके लिए डाक विभाग ने विशेष प्रबन्ध किये हैं। इस संबंध में जानकारी देते हुए राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर के निदेशक डाक सेवाएं  कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि राखियों को सुरक्षित भेजने हेतु प्रधान डाकघरों द्वारा विशेष रुप से निर्मित डिजाइनदार राखी लिफाफों की ब्रिकी आरम्भ की जा रही है। 


डाक निदेशक श्री यादव ने कहा कि ये राखी लिफाफे वाटर प्रूफ तथा सुरक्षा की दृष्टि से मजबूत हैं, जिससे मानसून के मौसम में भी बहनों द्वारा भेजी गई राखियाँ सुदूर रहने वाले भाइयों तक सुरक्षित पहुँच सकें। राखी लिफाफों को चिपकाने हेतु इनमें विशेष स्टिकर का प्रयोग किया गया है जिससे लेई या गम की आवश्यकता नहीं होगी। 11 सेमी X 22 सेमी आकार के इन राखी लिफाफों का मूल्य रुपया 7.50 है जो डाक शुल्क के अतिरिक्त है। वाटरप्रूफ लिफाफे के बाएं हिस्से के ऊपरी भाग में भारतीय डाक के लोगों के साथ अंग्रेजी में राखी शब्द लिखा गया है। श्री यादव ने कहा  कि रंगीन और डिजाइनदार होने की वजह से इन्हें अन्य डाकों से अलग करने में समय की बचत और पर्व के पूर्व वितरण कराने में सहुलियत होगी।  जोधपुर प्रधान डाकघर सहित सभी प्रधान डाकघरों से इसकी बिक्री शुरू कर दी गई है। 




Saturday, August 8, 2015

Bay village in Jhunjhunu became the first 100% covered Sukanya Samriddhi Scheme village in Rajasthan

आज का दौर बेटियों का है। बेटियाँ समाज में नित नये मुकाम हासिल कर रही हैं। बेटियों की समृद्धि और खुशहाली में ही समाज का भविष्य टिका हुआ है। इसीलिए बेटियों की उच्च शिक्षा और उनके विवाह में सुविधा के लिए 10 वर्ष तक की बेटियों हेतु डाकघरों में सुकन्या समृद्धि योजना आरंभ की गयी है। उक्त उद्गार राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर के निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव ने झुंझुनू के नवलगढ़ स्थित बाय गाँव में सुकन्या समृद्धि योजना के लिये 7 अगस्त को आयोजित मेले में व्यक्त किये।


मुख्य अतिथि के रूप में अपने सारगर्भित सम्बोधन में राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर के निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव ने 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' के अंतर्गत बालिकाओं  के राष्ट्र निर्माण पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि सुकन्या समृद्धि योजना सिर्फ निवेश का एक माध्यम नहीं है, बल्कि यह बालिकाओं के उज्ज्वल व समृद्ध भविष्य से भी जुड़ा हुआ हैं। इस योज़ना के आर्थिक के साथ साथ सामाजिक आयाम महत्वपूर्ण हैं। इसमे जमा धनराशि पूर्णतया बेटियों के लिए ही होगी, जो उनकी शिक्षा, कैरियर  एवं विवाह में उपयोगी होगी। श्री यादव ने कहा कि 21 वीं  सदी में बेटियों की भूमिका अहम हो गई हैं और सुकन्या समृद्धि योज़ना बेटियों के सपनों को पूरा करने का सशक्त माध्यम हैं। उन्होने कहा कि.हर बेटी को उसके जन्म पर अभिभावकों द्वारा सुकन्या समृद्धि खाता उपहार स्वरूप देकर नई परम्परा का सूत्रपात करना चाहिये।

इस अवसर पर झुञ्झुनू मण्डल के अधीक्षक डाकघर श्री के॰ एल॰ सैनी ने कहा कि यह स्कीम 10 साल तक की बच्चियों के लिए है। इसमें एक वित्तीय वर्ष में न्यूनतम 1,000 और अधिकतम डेढ़ लाख रूपये तक जमा किये जा सकते हैं। इस योजना में खाता खोलने से मात्र 14 वर्ष तक धन जमा कराना होगा। ब्याज दर 9.2 प्रतिशत हैं और जमा धनराशि में आयकर छूट का भी प्रावधान है।
    
कार्यक्रम की विशिष्ठ अतिथि श्रीमति तारा पूनिया, सरपंच बाय ग्राम पंचायत ने इस योजना की भूरि-भूरि प्रशंसा कर लोकप्रिय एवं कल्याणकारी योजना बताया तथा कहा कि बालिकाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में उठाया गया यह प्रयास एक मील का पत्थर साबित होगा। उन्होने कहा कि यह अत्यन्त ही सौभाग्य की बात हैं कि इस गाँव की 10 वर्ष तक की समस्त योग्य बालिकाओं के सुकन्या खाते खोलकर, उनका गाँव राजस्थान का प्रथम “सम्पूर्ण सुकन्या समृद्धि योजना ग्राम” बन गया हैं।    

इस दौरान बाय गाँव  की समस्त कुल 215 बालिकाओं के खाते खोले गये। इसके बाद झुंझुनू का बाय गाँव बना राजस्थान का प्रथम सम्पूर्ण सुकन्या समृद्धि योजना गाँव बन गया है। उपस्थित बच्चियों व उनके अभिवावकों को निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव ने पासबुकें व उपहार देकर उनके सुखी व समृद्ध भविष्य की कामना की। इस अवसर पर डाक निदेशक के.के.यादव ने सरपंच श्रीमती तारा पूनियां के प्रयासों की सराहना की और आशा व्यक्त की कि बेटियों के लिए ऐसे प्रयास अन्य गांवों में भी किये जायेंगे। श्री यादव ने श्रीमती पूनियां को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित भी किया।

        स्वागत संभाषण  झुञ्झुनू मण्डल के अधीक्षक डाकघर श्री के॰ एल॰ सैनी द्वारा, आभार ज्ञापन सहायक अधीक्षक डाकघर  श्री जी॰ एन॰ कनवाड़िया द्वारा एवं कार्यक्रम का संचालन श्री एस॰के॰ पोरवाल द्वारा किया गया। इस अवसर पर क्षेत्रीय कार्यालय जोधपुर के सहायक अधीक्षक पुखराज राठौड़ , निरीक्षक डाक राजेन्द्र सिंह भाटी, नवलगढ़ उप मंडल के निरीक्षक आर.पी.कुमावत, श्री अनिल मीणा, ब्रांच पोस्टमास्टर, बाय तथा डाक विभाग के तमाम अधिकारी-कर्मचारियों के साथ ग्रामवासी, स्कूली बच्चे और उनके अभिभावक व अध्यापक भी शामिल हुए।


















झुंझुनू का बाय गाँव बना राजस्थान का प्रथम सम्पूर्ण सुकन्या समृद्धि योजना गाँव।
साभार : दैनिक भास्कर, 8 अगस्त 2015 



बेटियाँ कर रही हैं मुकाम हासिल। 
साभार : राजस्थान पत्रिका, 8 अगस्त 2015