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Tuesday, November 21, 2017

अब डिजिटल होगी आपकी लोकेशन, ई-एड्रेस योजना के लिए सरकार ने डाक विभाग को सौंपा जिम्मा

अब आधार के बाद जल्द ही आवासीय या प्रफेशनल अड्रेस डिजिटल होने जा रहा है। केंद्र सरकार आधार की तरह ही लोगों के अड्रेस को भी डिजिटल करना चाह रही है। डाक विभाग को इस पायलट प्रॉजेक्ट की जिम्मेदारी दी गई है। इस प्रॉजेक्ट के तहत 3 पिन कोड लोकेशन वाली प्रॉपर्टी के लिए एक 6 अक्षरों वाला डिजिटल अड्रेस दिया जाएगा।

विभिन्न अड्रेस के लिए ई-लोकेशन के आइडिया का मकसद इसे प्रॉपर्टी संबंधी विभिन्न प्रकार की जानकारियों से जोड़ना है। इससे प्रॉपर्टी टाइटल और मालिकाना हक, प्रॉपर्टी टैक्स रिकॉर्ड, बिजली, पानी और गैस जैसी चीजों के उपभोग की जानकारी मिल सकेगी। अगर इस प्रॉजेक्ट को सफलता मिली तो सरकार इसे राष्ट्रीय स्तर पर लागू कर सकती है। 

नोएडा और दिल्ली में पायलट प्रोजेक्ट की होगी शुरुआत 

फ़िलहाल, ई-लोकेशन (eLoc) पायलट प्रॉजेक्ट की मंजूरी दिल्ली और नोएडा को दो पोस्टल पिन कोड के लिए दी गई है। इसके बाद इसका राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार किया जाएगा। डिजिटल पहचान के ई-अड्रेस का इस्तेमाल मौजूदा पोस्टल अड्रेस के लिए भी किया जा सकेगा। डाक विभाग ने निजी मैपिंग कंपनी 'मैपमाईइंडिया' को इस पायलट प्रॉजेक्ट की जिम्मेदारी दी है।  डाक विभाग द्वारा जारी परिपत्र के अनुसार इस योजना में जुटाए गए साक्ष्यों का इस्तेमाल डाक विभाग डिजिटल अड्रेस के लिए कर सकता है। यह राष्ट्रीय स्तर के लिए प्रॉजेक्ट के लिए भी सही होगा। सभी तरह के डेटा डाक  विभाग के पास रहेंगे और निजी कंपनी इसका व्यवसायिक इस्तेमाल नहीं कर पाएगी।
कॉम्प्लेक्स अड्रेसस की पहचान करना होगा आसान

मैपमाईइंडिया के एमडी राकेश वर्मा ने कहा कि ई-लिंकेज के जरिए कॉम्प्लेक्स अड्रेसस की पहचान करना आसान होगा और उसे अन्य सेवाओं से भी जोड़ा जा सकता है। मौजूदा समय में देश में कई हिस्सों के अड्रेस का पता करना मुश्किल होता है। इस परियोजना का उदेश्य डिजिटल अड्रेसिंग सिस्टम के प्रभाव को दर्शाना भी है। डाक विभाग इस प्रक्रिया में डेटा शेयर कर मदद करेगा। 

इसरो और भुवन की सहायता से होगी मैपिंग 

मैपमाईइंडिया ने एक बयान जारी कर दावा किया है कि उसने डिजिटल अड्रेस के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी और डेटा जुटाना शुरू हो चुका है। कंपनी इसरो और नैशनल सैटलाइट इमैजरी सर्विस 'भुवन' के सहयोग से प्रभावकारी मैपिंग करेगी।

Now Government of India start mapping of E-address digitally, Postal Department has been given responsbility

Government of India to start e-address scheme for e-location of address

Thursday, August 12, 2010

अब एड्रेस प्रूफ कार्ड भी बनाएगा डाक-विभाग

डाक विभाग अभी तक लोगों के पते पर चिट्ठियाँ ही पहुँचाता रहा है, पर अब लोगों के लिए एड्रेस प्रूफ कार्ड भी बनाएगा। इस कार्ड का विभिन्न कार्यों हेतु इस्तेमाल किया जा सकेगा। यह कार्ड कोई भी वैध भारतीय नागरिक जिसकी उम्र 18 वर्ष से ऊपर है, बनवा सकता है। इसके लिए सम्बंधित वितरण डाकघर से 10 रूपये का एक फार्म लेकर भरना होगा, जिसमें व्यक्ति का पूरा नाम, माता-पिता/पति-पत्नी इत्यादि का नाम, जन्म तिथि, वर्तमान पता व इस पते पर रहने की अवधि, स्थाई पता, किरायेदार की स्थिति में मकान मालिक के बारे में जानकारी, रोजगारपरक होने पर उसकी जानकारी व परिचय पत्र की फोटो काॅपी, रोजगार प्रदाता का पता व ईमेल आई0 डी0, व्यक्ति का टेलीफोन नम्बर, बल्ड ग्रुप, पहचान का चिन्ह इत्यादि जानकारियाँ एकत्र की जाएंगी। यह फार्म संबंधित वितरण डाकघर से ही खरीदा व जमा किया जाएगा। फार्म के साथ दो फोटो भी जमा करवाने होंगे। इन सब अपचैरिकताओं के बाद जनसंपर्क निरीक्षक (डाक) द्वारा फार्म में भरी गई सूचनाओं को सत्यापित किया जाएगा ओर तत्पश्चात सभी जानकारियां सही पाए जाने पर एड्रेस प्रूफ कार्ड जारी किया जाएगा।
इस सारी प्रक्रिया के लिए 240 रूपये का शुल्क डाकघर में जमा करवाना होगा। डाक विभाग के लिए यह कार्ड मेंसर्स यू0 टी0 आई0 टेक्नालाॅजी सर्विज लिमेटड द्वारा तैयार किया जाएगा जो कि अल्ट्रा टच फिनिश पर आधारित होगा। यह कार्ड तीन वर्ष के लिए वैध होगा और पुनः नवीनीकरण 140 रूपये जमाकर कराया जा सकता है। डुप्लीकेट कार्ड हेतु 90 रूपये डाकघर में जमा करने होंगे। एड्रेस प्रूफ कार्ड पर एक यूनिक नम्बर दर्ज होगा जिसमें संबंधित प्रधान डाकघर का संक्षिप्त नाम और चार अंकों का क्रमांक एवं जारी होने का वर्ष दर्ज होगा। गौरतलब है कि यह योजना पहली बार तमिलनाडु सर्किल द्वारा आरम्भ की गई थी। वहाँ पर इसे काफी अच्छा रिस्पांस मिला। इसके बाद इसे अखिल भारतीय स्तर पर लागू किया जा रहा है।