Showing posts with label दूर देश से. Show all posts
Showing posts with label दूर देश से. Show all posts

Sunday, October 6, 2019

महात्मा गांधी पर पाकिस्तान और चीन ने आज तक जारी नहीं किया डाक टिकट

दुनिया के ऐसे देश जिनका आपने शायद कभी नाम भी नहीं सुना होगा उन्होंने भी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के जीवन और कार्यों से प्रभावित होकर समय-समय पर डाक टिकट जारी किए हैं। अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, सऊदी अरब जैसे वो शक्तिशाली राष्ट्र हैं जिन्होंने बापू पर डाक टिकट जारी किए हैं। लेकिन पाकिस्तान और चीन उन कुछ राष्ट्रों में शामिल हैं, जिन्होंने आज तक बापू पर कोई डाक टिकट जारी नहीं किया।
डाक टिकट का विश्व इतिहास करीब 175 साल पुराना है। भारत में स्वतंत्रता के बाद पहला डाक टिकट 21 नवंबर 1947 को जारी हुआ था। जबकि महात्मा गांधी वह पहली शख्सियत थे, जिन पर भारत में पहला डाक टिकट 15 अगस्त 1948 को जारी किया। तब से लेकर दुनिया भर में महात्मा गांधी पर पांच सौ प्रकार के डाक टिकट जारी हो चुके हैं। भारत के बाद अमेरिका वह पहला विदेशी राष्ट्र था, जिसने बापू पर 26 जनवरी 1961 को डाक टिकट जारी किया। उसके बाद कांगो ने डाक टिकट जारी किया। जिस देश ब्रिटेन से बापू ने आजादी की लड़ाई लड़ी, उसने भी उनके निधन के 21 साल बाद डाक टिकट जारी किया।

1969 में करीब चालीस देशों ने बापू की जन्मशती मनाते हुए सत्तर प्रकार के डाक टिकट जारी किए। दक्षिण अफ्रीका जहां से गांधी के महात्मा बनने की शुरूआत हुई, उस महाद्वीप के भी तकरीबन सभी देशों ने बापू पर डाक टिकट जारी किए। इनके अलावा बांग्लादेश, श्रीलंका, भूटान, नेपाल, अफगानिस्तान, रुस, जर्मनी, फ्रांस, सऊदी अरब, तजाकिस्तान, डोमनिक गणराज्य जैसे देशों ने बापू पर डाक टिकट जारी कर सम्मान प्रकट किया है। रिटायर्ड आईएएस व बापू पर चार सौ से अधिक डाक टिकटों के प्रमुख संग्रहकर्ता एसके दास के अनुसार, कई अंजान देशों ने बापू पर डाक टिकट जारी किए हैं। लेकिन पाकिस्तान, चीन का ऐसा न करना हैरत में डालता है।

पाक, चीन में है प्रतिमा
विदेश मंत्रालय की वेबसाइट के अनुसार, बापू की 84 देशों में 110 स्थानों पर प्रतिमाएं स्थापित हैं। इनमें पाक और चीन भी शामिल हैं। जर्मनी-ब्रिटेन में 11-11, अमेरिका में आठ, दक्षिण अफ्रीका व कनाडा में 3-3 स्थानों पर बापू की प्रतिमाएं हैं। चीन में एकमात्र मूर्ति बीजिंग में लगी है। पाक के कराची में एक प्रतिमा बताई जाती है।

भारत ने सीमांत गांधी खान अब्दुल गफ्फार खान, मार्टिन लूथर किंग और नेल्सन मंडेला जैसी शख्सियतों पर भी टिकट जारी किए। दूसरे देशों की लोकप्रिय शख्सियत को सम्मान देने के लिए डाक टिकट जारी करने की परंपरा पूरे विश्व में है। तकरीबन सभी देशों ने बापू को सम्मान दिया है। 

ये अनजान देश भी जारी कर चुके डाक टिकट :

माइक्रोनेशिया (पैसाफिक ओशन में द्वीपों का समूह राष्ट्र), गिनी बिसाऊ, बेनिन, सोलोमन आईलैंड, जिब्राल्टर, सेंट विंसेंट, सांडा आईलैंड, स्कॉटलैंड(यूके अधिपत्य वाला राष्ट्र), बारामूडा, गुयाना, बाराबडोस, बहामास, सेंट लूसिया, जमैका, त्रिनिडाड एंड टोबेगो, एंटिगुआ(वेस्टइंडीज द्वीप समूह) 

उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव के पास डाक टिकटों का खजाना :

करीब 65 साल से डाक टिकटों का संग्रह कर रहे उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव सुरजीत के. दास के पास बापू से जुड़े करीब चार सौ डाक टिकट हैं। इनमें 1948 में बापू की हत्या के कुछ समय बाद एक साथ जारी चार बहुमूल्य टिकट भी हैं। इसमें आठ आना, 12 आना से लेकर दस रूपये तक के टिकट हैं। इस तरह के कुल 16 संग्रह प्रकाशित हुए थे। विदेश में ये संग्रह पांच लाख पाउंड (414 करोड़ रूपये) में बिक चुके हैं।

ये भी जानें-

-देश की 53 बड़ी व असंख्य छोटी सड़कें बापू के नाम से हैं
-विदेश में 48 सड़कें महात्मा गांधी के नाम पर हैं
-महात्मा गांधी ऐसे विदेशी शख्सियत हैं जिन पर सर्वाधिक डाक टिकट अनेकों देशों ने जारी किए हैं
-नोबल के लिए गांधी पांच पर बार नामांकित हुए, मगर उन्हें एक बार भी नहीं मिला
-गांधी पर डाक टिकट जारी करने का सिलसिला लगातार जारी है
- बापू और कस्तूरबा वह पहले दम्पत्ति थे जिन पर 1963 में भारत ने 20 पैसे का डाक टिकट जारी किया

Pakistan and China have not released any Postage stamp on Mahatma Gandhi till date.

Friday, October 4, 2019

महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर पोलैंड ने जारी किया स्मारक डाक टिकट

महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के अवसर पर पोलैंड ने 3 अक्टूबर, 2019 को एक स्मारक डाक टिकट जारी किया।  इस ऐतिहासिक दिन को फ्रांस, उज्बेकिस्तान और तुर्की जैसे देशों में भी याद किया गया। 

पोलैंड ने 3 अक्टूबर को महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के अवसर पर एक स्मारक डाक टिकट जारी किया। पोलैंड में भारतीय दूतावास ने ट्वीट किया, 'पोलिश पोस्ट (पोकज़्टा पोल्स्का) ने महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर एक स्मारक डाक टिकट जारी किया, जो गांधी जयंती के अवसर पर जारी किया गया था। '

इस ऐतिहासिक दिन को फ्रांस, उज्बेकिस्तान और तुर्की जैसे देशों में भी याद किया गया।  इससे पहले महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के मौके पर रूस ने एक विशेष डाक टिकट जारी किया है।  इस डाक टिकट को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 4 सितंबर को लॉन्च किया था। 

Polish Post (Poczta Polska )issued a Commemorative Stamp on the 150th Birth Anniversary of Mahatma Gandhiji which was released on the occasion of Gandhi Jayanti.

Thursday, October 3, 2019

महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर फ्रांस ने जारी किया डाक टिकट

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर दुनिया के कई देशों ने डाक टिकट जारी किए हैं। बापू की फोटो वाले एक डाक टिकट को फ्रांस की डाक सेवा कंपनी ला पोस्टे ने बनाया है। फ्रांस के भारतीय दूतावास ने यह जानकारी दी। वहीं, फिलीस्तीन के दूरसंचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री इशाक सेडर ने मंगलवार को मंत्रालय में भारत के प्रतिनिधि सुनील कुमार की उपस्थिति में डाक टिकट जारी किया।

इस अवसर पर मंत्री सेडर ने कहा कि महात्मा गांधी की याद में यह डाक टिकट जारी किया गया। उनकी विरासत और मूल्यों ने हमेशा से मानवता को राह दिखाने का काम किया है। इस दौरान सुनील कुमार कहा कि फिलिस्तीन का यह कदम दोनों देशों के बीच मजबूत ऐतिहासिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों को दिखाता है।

गौरतलब है कि कुछेक दिनों पहले ही  संयुक्त राष्ट्र में भी गांधी जयंती पर डाक टिकट जारी किया गया। इसके साथ ही उज्बेकिस्तान, तुर्की, फिलिस्तीन, श्रीलंका और अन्य कई देशों में भी इसी तरह के डाक टिकट जारी किए गए। 2007 से गांधी जयंती को हर साल अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाया जाता है।

Wednesday, September 25, 2019

संयुक्त राष्ट्र में महात्मा गांधी पर डाक टिकट जारी

संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य नेताओं ने महात्मा गांधी पर संयुक्त राष्ट्र डाक टिकट का उद्घाटन किया। यह डाक टिकट एक कार्यक्रम 'समकालीन विश्व में महात्मा गांधी की प्रासंगिकता' में जारी किया गया। इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी, बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जाई इन समेत अन्य विश्व नेताओं की उपस्थिति में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में गांधी सोलर पार्क का उद्घाटन किया। 

प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर  पर कहा कि गांधी जी ने उन लोगों को भी प्रेरणा दी जो उनसे कभी नहीं मिले। मार्टिन लूथर किंग और नेल्सन मंडेला की नीतियां और विचारधाराएं महात्मा गांधी के दृष्टिकोण पर ही आधारित थीं। उन्होंने कहा कि गांधी जी ने अपने जीवन में कभी प्रभाव पैदा करने की कोशिश नहीं की लेकिन यह प्रेरणा का स्रोत बन गया। हम ऐसे युग में रह रहे हैं जहां 'कैसे प्रभावित करें' का चलन है लेकिन गांधी जी का दृष्टिकोण 'कैसे प्रेरित करें' था।

वहीं, बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा कि गांधी जी एक सच्चे देशभक्त, राजनीतिज्ञ और संत थे। उन्होंने अपना जीवन मानव जाति के लिए समर्पित कर दिया। वह आशा की किरण और अंधेरे में प्रकाश की तरह थे। शेख हसीना ने कहा कि आम लोगों के प्रति गांधी जी के प्रेम और अहिंसा के आदर्शों ने तत्कालीन पाकिस्तानी नेताओं के शांतिप्रिय बंगालियों पर उत्पीड़न और अत्याचार के खिलाफ बंगबंधु शेख मुजीब के संघर्ष, असहयोग के दृष्टिकोण को आकार देने में योगदान दिया।

यह कार्यक्रम महात्मा गांधी के 150वें जयंती वर्ष को मनाने के लिए आयोजित किया गया था। जिसमें उनके विचारों और मूल्यों की आज के समय में लगातार प्रासंगिकता पर चर्चा की गई। 

Saturday, October 8, 2016

अमेरिकी डाक सेवा ने दिवाली पर जारी किया डाक टिकट

प्रकाश पर्व दीपावली त्यौहार की स्वीकार्यता अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी बढ़ रही है। दुनिया के तमाम देशों में रहने वाले भारतीय दीपावली पर्व को धूमधाम से मनाते हैं। तमाम देशों ने इस दिवस की महत्ता के कारण इस पर डाक टिकट भी जारी किए हैं। इसी क्रम में अमेरिकी डाक सेवाओं द्वारा भी न्यूयार्क में 5 अक्टूबर, 2016 को दिवाली पर डाक टिकट जारी किया गया। भारतीय अमेरिकियों और प्रभावशाली अमेरिकी सांसदों के सात वर्षों के सतत प्रयासों के बाद प्रकाश के इस त्यौहार के उपलक्ष्य में यह मुमकिन हो सका। भारतीय वाणिज्य दूतावास में  एक समारोह के दौरान इस डाक टिकट का अनावरण किया गया। अमेरिकी डाक सेवा (यूएसपीएस) ने ‘दिवाली फॉरएवर' डाक टिकट जारी कर हिन्दुओं का यह त्यौहार मनाया। 

इस डाक टिकट में सुनहरे पृष्ठभूमि में जलते पारंपरिक दीपक को स्थान दिया गया है । साथ ही इसके नीचे अंकित है ‘फॉरएवर यूएसए 2016' । कार्यक्रम में वाणिज्य महादूत रीवा गांगुली दास, सांसद कैरोलिन मालोनी, दिवाली टिकट परियोजना अध्यक्ष रंजू बत्रा, यूएसपीएस उपाध्यक्ष :मेल एंटरी एंड पेमेंट टेक्नोलॉजी: पृथा मेहरा, संयुक्त राष्ट्र में भारत के पूर्व स्थायी प्रतिनिधि हरदीप सिंह पुरी और प्रतिष्ठित भारतीय अमेरिकी वकील रवि बत्रा शामिल हुए ।

इस अवसर पर सांसद कैरोलिन मालोनी ने कहा, ‘कई वर्षों की कठिन मेहनत और हिमायत के बाद आखिरकार प्रकाश की जीत हुई । आज दिवाली के उपलक्ष्य में बहु-प्रतीक्षित स्मारक डाक टिकट जारी किया गया और अब यह त्यौहार क्रिसमस, क्वांजा, हानुका और ईद जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक जैसे प्रमुख त्यौहारों की श्रेणी में शामिल हो गया है।' अमेरिकी डाक सेवा (यूएसपीएस) की उपाध्यक्ष (मेल एंटरी एंड पेमेंट टेक्नोलॉजी) पृथा मेहरा ने कहा कि अमेरिकी डाक सेवा दिवाली के उपलक्ष्य में फॉरेवर डाक टिकट जारी कर गौरवान्वित  महसूस कर रहा है ।

Friday, February 13, 2015

Passion for ICC World Cup Cricket on Postage Stamps also

Good news for cricket and philately aficionados of the India is that postal department will make available souvenir sheet released by the New Zealand Post Commemorate ICC Cricket World Cup-2015, begin on 14 February, 2015.The biggest cricketing event is being co-hosted by Australia and New Zealand.Passion for Cricket World Cup is growing around the world. Everyone wants to collects items related to it as souvenirs. To commemorate this occasion, New Zealand Post has brought a souvenir sheet which is being made available in India also.  

Briefing about this Mr. Krishna Kumar Yadav, Director Postal Services, Allahabad Region said that based on the theme of ‘14 teams, one champion’, this souvenir sheet of stamps depicts the logo of cricket World Cup and colours of 14 participating nations in the form of cricket ball shaped stamps. We all may have seen Postage Stamps in various shapes, but it will be the first time that postage stamps will be issued in ball shape. Mr. Yadav also said that keeping in view Indian Cricket fans, 2 World Cup victories by India in 1983 and 2011 have been depicted on this stamp. 
Director Postal Services Mr. Krishna Kumar Yadav said that this souvenir sheet of 14 Postage Stamps is available for sale for rupees 400. A discount of 20 percent will be provided on pack of five sheets. Mr. Yadav said that these postage stamps are available in all Philatelic Bureaus. In Allahabad Region these stamps are available at Philatelic Bureau at Allahabad Head Post Office and Varanasi Head Post Office situated at Visheswarganj. Mr. Yadav also said that if required these stamps will be also sold from other Post Offices.



(Courtesy : Hindustan Times)

Tuesday, January 20, 2015

‘Parikalpana SAARC Summit Award’ to KK Yadav at International Bloggers Conference held in Bhutan

 Famous blogger and currently posted as Director Postal Services of Allahabad Region, Mr. Krishna Kumar Yadav,  have been awarded with ‘Parikalpana SAARC Summit Award’ during the Fourth international blogger’s conference held in Bhutan from 15-18th January, 2015 for his work in Hindi literature and reminiscence writings on blog. The award was conferred by the General Secretary of Bhutan Chamber of Commerce and Industry, Mr. Bhoop Shring and President of SAARC summit of women organization Mrs. Thinle Lamha. Under this award he was felicitated with Rs. 25000/- cash prize, Commendation certificate, memento, and Aṅgavastram. This information was shared by Mr. Ravindra Prabhat, organizer of ‘International Bloggers Conference.’ 

Famous at international and national level for his literary creativity, writer of 07 books and known for providing new dimensions to Hindi blogging and social media, Mr. Krishna Kumar Yadav have been felicitated earlier with more than 100 awards.
Mr. Krishna Kumar Yadav started his blogging career in 2008, and has been since operating more than ten blogs on various issues. He has motivated a number of people to enter the field of blogging and gave blogging new dimensions through his literary creativity. Mr. Krishna Kumar Yadav have two personal blogs, i.e. ‘Shabd srijan ki or’ (http://kkyadav.blogspot.com) which covers contemporary issues, poems, informative and research based articles etc., whereas ‘Daakiya Daak laya’ (http://dakbabu.blogspot.com) talks about changes in Postal services and various aspects. These blogs have been viewed by more than million people and are viewed and read from more than 100 countries across the world.

It is worthwhile to mention here that Mr. KK Yadav strongly dominates the field of blogging not only personally but along with the members of his family. While his daughter Akshitaa have been awarded with National Child Award by Government of India, his wife Akanksha Yadav is also a leading women blogger. Yadav couple have been also awarded with ‘Awadh Samman’ by Chief Minister of Uttar Pradesh Mr. Akhilesh Yadav; ‘Best blogger couple of the decade’ award on completion of decade of Hindi blogging and also felicitated in International Bloggers Conference held in Nepal last year. 


 During the conference held in Bhutan, Mr. Krishna Kumar Yadav also addressed the conference about propagation of Hindi especially in SAARC countries, various dimensions of blogging and role of social media in changing times. 

(Courtesy)

Friday, August 8, 2014

वर्चुअल होते संबंधों के बीच सात समुद्र पार भी राखी का क्रेज़


राखी का अटूट बंधन देशों की सरहदें नहीं जानता, तभी तो आज भी भाई-बहन के बीच प्यार का प्रतीक रक्षाबंधन सरहदों की सीमाएं लांघ रहा है।  तमाम बहनों द्वारा विदेशों में अपने भाईयों को डाक के माध्यम से राखियाँ भेजी जा रही हैं ।  इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि इलाहाबाद परिक्षेत्र के डाकघरों से लोगों द्वारा अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, मारीशस, मलेशिया, पोलैंड, जापान, थाईलैंड, स्वीडन, स्विट्जरलैंड, डेनमार्क, कनाडा, संयुक्त अरब अमीरात व अन्य तमाम देशों में न सिर्फ डाक द्वारा रक्षाबंधन  भेजे जा रहे हैं, बल्कि विदेशों से आयी तमाम राखी-डाक भी  डाकियों द्वारा इस समय रोज वितरित की जा रही है।

डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि वर्चुअल होते संबंधों के बीच राखी का धागा आज भी अपनी अहमियत रखता है। यही कारण है कि रक्षाबंधन के समय डाकघरों में राखियाँ भेजने वालों की लंबी कतारें लगती हैं। (स्रोत : समाचार पत्र)

Tuesday, December 18, 2012

भिन्न-भिन्न देशों में डाक सेवाएँ

हमारे देश भारत की पोस्टल सर्विस दुनिया की सबसे बड़ी पोस्टल सर्विस है। इस विभाग की स्थापना 1774 में वारेन हेस्टिंग्स ने की थी। चिट्ठियों को पोस्ट करते समय लगाए जाने वाले स्टैंप्स की शुरुआत भारत में 1852 में शुरू हुई। इसके बाद हर शहर और गांव में पोस्ट ऑफिस बनाए गए। इन पोस्ट ऑफिसों में चिट्ठियों को संभालने के साथ-साथ लोगों के पैसों को भी जमा करने का काम किया जाता है। पोस्ट ऑफिस कभी-कभी बैंक का काम भी करते हैं। आजकल भारतीय डाक विभाग रजिस्ट्री पोस्ट, स्पीड पोस्ट, बिजनेस पोस्ट और ग्रीटिंग पोस्ट से चिट्ठियों को भेजने का काम करता है। भारत में पोस्टमैन खाकी रंग की यूनिफॉर्म पहनता है।

भारत की डाक सेवा में एक खास बात यह है कि यहां एक खास तरह का पिन कोड होता है। यह पिन कोड 6 नम्बरों का होता है। पिन कोड पोस्ट ऑफिस का नंबर होता है। इसकी मदद से ही तुम तक चिट्ठियां पहुंच पाती हैं।

दुनिया भर में सबसे ऊंचाई पर बना पोस्ट ऑफिस भारत में है। यह हिमाचल प्रदेश के हिक्किम में स्थित है।

ब्रिटेन
लंदन में इस डिपार्टमेंट को रॉयल मेल के नाम से जाना जाता है। रॉयल मेल की स्थापना 1516 में की गई थी। ब्रिटेन का मेन पोस्ट ऑफिस इंग्लैंड में बनाया गया है। ब्रिटेन के रॉयल मेल के साथ एक खास बात यह है कि यहां पोस्ट बॉक्स को पिलर बॉक्स के नाम से जाना जाता है। इस विभाग ने एक खास तरह की सर्विस भी शुरू की है, जो अगले ही दिन चिट्ठियों को कहीं भी पहुंचा देती है। यह विभाग रॉयल मेल, बिजनेस सर्विस और नॉन पोस्टल सर्विस भी चलाती है।

अमेरिका
अमेरिका में डाक विभाग को यूएस मेल के नाम से जाना जाता है। यूएस मेल की स्थापना 1775 में की गई थी। यूएस मेल में सेना के लिए एक अलग सर्विस है, जिसेआर्मी पोस्ट ऑफिस और फील्ड पोस्ट ऑफिस कहा जाता है। साथ ही एक्सप्रेस मेल, मीडिया मेल, फस्र्ट क्लास मेल, लाइब्रेरी मेल और पार्सल पोस्ट इसकी खास सेवाएं हैं।

फ्रांस
फ्रांस में डाक विभाग को ला पोस्टे के नाम से जाना जाता है। इसकी स्थापना 1576 में की गई थी। इसका हेड क्वार्टर फ्रांस की राजधानी पेरिस में है। यह चिट्ठियां लाने के साथ ही साथ बैंक और कुरियर का भी काम करता है। ला पोस्टे के पोस्ट ऑफिस पीले रंग के होते हैं और देखने में बहुत सुन्दर लगते हैं।

यहां भी हैं प्रमुख पोस्ट ऑफिस

जर्मनी— जर्मनी में डाक विभाग को डूटस्चे पोस्ट के नाम से जाना जाता है। यह दुनिया की सबसे बड़ी कुरियर कंपनी है। इसका हेडक्वार्टर बॉन में बना हुआ है।

नॉर्वे— नार्वे में डाक सेवा को नॉर्वे पोस्ट के नाम से जाना जाता है। इसकी स्थापना 1647 में की गई थी। इसका हेडक्वार्टर ओस्लो में है।

चीन— चीन में डाक विभाग को चाइना पोस्ट या चुनघवा पोस्ट के नाम से जाना जाता है। चाइना पोस्ट की नींव 1949 में रखी गई थी। इसका हेडक्वार्टर चीन की राजधानी बीजिंग में है।

श्रीलंका— हमारे पड़ोसी देश श्रीलंका में डाक विभाग का नाम है श्रीलंका पोस्ट। श्रीलंका पोस्ट की नींव 1882 में रखी गई थी। इसका हेडक्वार्टर श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में है।
 
पाकिस्तान— पाकिस्तान में डाक विभाग को पाकिस्तान पोस्ट कहा जाता है। इसकी नींव 1947 में रखी गई थी। इसका हेडक्वार्टर इस्लामाबाद में है।

दुनिया भर की 5 बड़ी डाक सेवाएं
भारत
चीन
रूस
अमेरिका
जापान

Wednesday, November 7, 2012

Indo-Israel revelry on postal dept's new release

ALLAHABAD: Department of Posts has set rolling celebration of Deepawali. While special arrangements are being made for distribution of Deepawali greetings timely, a twin-set of postage stamps depicting Deepawali have been issued by India and Israel.
Director postal services Allahabad region Krishna Kumar Yadav said the stamps of Rs 5 denomination are being issued on the occasion of completion of 20 years diplomatic relations between India and Israel.
The festival of lights is celebrated as Deepawali in India and as 'Hanuka' in Israel.
'Deepawali' is the festival of lights and celebrated on the eve of 'Amavasya' in the Hindu month of Kartik in India.
The Hanuka is also celebrated as festival of lights in Israel. This is Jewish holiday festival of eight days started before 2{+n}{+d} century BC at the time of the Maccabean Revolt in Jerusalem at the time of re-dedication of holy temple in the form of memorials.
The candles are lit on windows and doors in a traditional way and this is also lit on nine-branched Menorah and also as Hanuka special lamps. The postal stamps are available in Philately Bureau, Allahabad head post office and Allahabad Kutchery head post office too.
 

Monday, November 5, 2012

दीपावली पर्व पर जारी हुए भारत-इजराइल संयुक्त डाक टिकट


भारतीय डाक विभाग ने दीपावली पर्व के लिए अभी से तैयारियां आरंभ कर दी हैं। जहाँ एक ओर दीपावली पर आने वाले ग्रीटिंग कार्डो के त्वरित निस्तारण हेतु विशेष प्रबंध किये जा रहे है, वहीं डाक विभाग ने दीपावली पर केन्द्रित दो डाक टिकट भी जारी किये है। रू0 5/ मूल्य वर्ग में उपलब्ध ये डाक टिकट भारत और इजरायल के बीच राजनयिक संबंध के बीस वर्ष पूरा होने के उपलक्ष्य में दोनों देशों द्वारा जारी किये गये है, जो प्रकाश के दो पर्व, दीपावली और हनुका को दर्शाते है।
 
 जहाँ भारत में दीपावली रोशनी का त्योहार है जो कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है, वहीं इजराइल में हनुका को प्रकाश पर्व के नाम से जाना जाता है। यह आठ दिन का यहूदी अवकाश होता है जो ईसा पूर्व की दूसरी सदी के मेक्केबिन विद्रोह के समय यरूशलम में होली टेम्पल के पुनः समर्पण के स्मरणोत्सव के रूप में मनाया जाता है। हनुका त्यौहार में भी खिड़कियों एवं दरवाजों पर मोमबत्तियां जलाने की परंपरा है और इसे नौ शाखाओं वाले मेनोराह अथवा हनुकिया नाम विशिष्ट दीप के रूप् में भी जलाया जाता है।
 
लोगों में दीपावली के लिए भेजी जाने वाली ग्रीटिंग कार्डो पर दीपावली वाले डाक टिकट लगाकर भेजने का उत्साह देखा जा रहा है। यही नही तमाम युवा एवं छात्रों में भी इन डाक टिकटों को ग्रीटिंग कार्ड के रचनात्मक रूप में भेजने की प्रवृत्ति देखी जा रही है। यह डाक टिकट सभी फिलेटली ब्यूरो में बिक्री के लिए उपलब्ध हैं !!

Wednesday, October 3, 2012

जब नील आर्मस्ट्रांग ने डाकघर जाकर लिफाफों पर लगवाई मुहर


डाक-लिफाफे हम अक्सर इस्तेमाल करते हैं, पर कभी उनके मूल्य के बारे में नहीं सोचते. कई बार यह इतने मूल्यवान हो जाते हैं कि आने वाली पीढियां इन्हें सहेज कर रखना चाहती हैं. ऐसा ही कुछेक वाकया प्रसिद्ध चाँद-यात्री नील आर्मस्ट्रांग के साथ भी हुआ. चाँद पर जाने के लिए उड़ान भरने से पहले नील आर्मस्ट्रांग ने सैकड़ों लिफाफों पर हस्ताक्षर कर अपने परिवार को दिया था। उन्होंने सोचा था कि यदि इस अंतरिक्ष यात्रा के दौरान उनकी मौत हो जाती है तो उनका परिवार इन लिफाफों की नीलामी से अर्जित धनराशि से अपना गुजारा कर लेगा। गौरतलब है कि नील आर्मस्ट्रांग धरती के इकलौते उपग्रह पर कदम रखने वाले पहले इनसान थे। हल ही में 25 अगस्त, 2012 को को 82 साल की उम्र में उनका निधन हो गया था।

वस्तुत: नील आर्मस्ट्रांग अंतरिक्ष यात्रा के पहले अपना जीवन बीमा कराना चाहते थे, ताकि किसी भी प्रकार कि अनहोनी से उन्हें धन-सुरक्षा मिल सके । लेकिन उस समय उनका वेतन सिर्फ 17 हजार डाॅलर था, जबकि बीमा का प्रीमियम 50 हजार डाॅलर था। ऐसे में उन्होंने अंतरिक्ष कार्यक्रम के चित्रों वाले सैकड़ो लिफाफों पर हस्ताक्षर करने का नायाब तरीका निकला। उन्होंने अपने साथ जा रहे माइकल कोलिंस और बज एल्ड्रिन से भी इन लिफाफों पर हस्ताक्षर करा लिए थे। वस्तुत: तीनों अंतरिक्ष यात्री चाहते थे कि उनके हस्ताक्षर वाले लिफाफों को ऊंची रकम मिले। इसीलिए तीनो ने खुद डाकघर जाकर इन लिफाफों पर मुहर लगवाई और उन्हें पैक कर दोस्तों को भेजा। इन लिफाफों पर उन खास तारीखों की मुहर लगवाई गई, जो इतिहास में दर्ज होने वाली थीं।

Thursday, August 30, 2012

भाभा के दुर्घटनाग्रस्त विमान की भारतीय डाक मिली

फ्रांस के मोंट ब्लांक पर्वतों में 46 वर्ष पहले दुर्घटनाग्रस्त हुए एयर इंडिया की उड़ान संख्या 101 का चिट्ठियों से भरा एक डिप्लोमेटिक बैग बरामद हुआ है। इस दुर्घटना में भारत के शीर्षस्थ परमाणु वैज्ञानिक होमी जहांगीर भाभा का भी निधन हो गया था।

आल्पस पर्वतमालाओं में स्थित मोंट ब्लांक में छुट्टियां मनाने आए एक पर्वतारोहियों ने पिछले सप्ताह जूट के बने इस बैग को एक ग्लेशियर पर पड़ा देखा था। मीडिया की खबरों के अनुसार इस बैग को एक पर्वत रक्षण दल के एक कर्मी आरुआं क्रिस्टमैन ने अपने एक मित्र के माध्यम से सफलतापूर्वक ढूंढ़ निकाला है।

क्रिस्टमैन ने अपनी इस खोज से बेहद उत्साहित होते हुए कहा कि हमें उम्मीद थी कि उस जगह से हमें हीरे अथवा सोने के कुछ आभूषण बरामद होंगे लेकिन पानी में भीगी कुछ डाक और कुछ भारतीय अखबार हमारे हाथ लगे। इस डाक को 46 वर्षों पहले ही अपने गंतव्य तक पहुंच जाना चाहिए था।

क्रिस्टमैन ने यह भी बताया कि यह बैग वहां पर इस स्थिति में मौजूद था जैसे किसी ने इसे जानबूझकर वहां रखा हो। घटनास्थल पर विमान का एक केबिन एक जूता कुछ केबल इत्यादि भी पडे़ हुए थे। इस बैग के ऊपर डिप्लोमेटिक मेल और भारत का विदेश मंत्रालय का नाम चस्पा है। बैग को चेमोनिक्स कस्बे के पुलिस विभाग को सौंप दिया गया है। पेरिस स्थित भारतीय दूतावास ने बताया है कि पुलिस ने फिलहाल उसे बैग की बरामदगी की सूचना नहीं दी है लेकिन दूतावास के अधिकारी इस संबंध में पड़ताल कर रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि 24 जनवरी 1966 को मोंट ब्लांक के ऊपर से गुजर रहा एयर इंडिया का बोइंग 707 विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। दुर्घटना के वक्त इसमें भाभा समेत 106 यात्री और 11 कर्मी दल के सदस्य सवार थे। दुर्घटना में कुल मिलाकर 117 लोगों की मौत हुई थी।

Saturday, June 2, 2012

एक मूक और बधिर डाकिया की कहानी

उत्तर-पूर्वी चीन के ल्याओ निन्ग प्रांत के पहाड़ क्षेत्र में एक मूक और बधिर डाकिया है, वह नहीं सुन सकता और नहीं कह सकता, हर दिन वह अकेला मोटरसाइकिल चलाकर पहाड़ क्षेत्र के पांच हजार से अधिक परिवारों को पत्र,अखबर और पार्सल भेजता है, प्रति साल में वह 25 हज़ार कि.मी.का रास्ता चलता है।

ह्वांग वेई हर दिन लोन्ग थान कस्बे के लोगों को सेवा देता है। लोन्ग थान कस्बे में 120 से अधिक गांव हैं, ये गांव 300 से अधिक वर्ग किलोमीटर में स्थित हैं, बीते दस से अधिक सालों में ह्वांग वेई इस कस्बे में एकमात्र डाकिया है।

इस मूक और बधिर डाकिया का नाम है ह्वांग वेई, 37 साल की उम्र है। गांव में रहने वाली सुश्री वांग को अखबार चाहिए, इसलिए ह्वांग वेई सुश्री वांग का स्थाई अतिथि बन गया है। सुश्री वांग ने कहा- हर बार वह हमारे पत्रों को ला सकता है, ठीक समय पर।

लोन्ग थान कस्बे के 60 प्रतिशत की गांव पहाड़ों में स्थित हैं, दूसरे 30 से अधिक प्रतिशत की गांव हालांकि मार्ग से बहुत दूर नहीं है, लेकिन इस क्षेत्र में दसियों खान स्टेशन हैं, हर पत्र भेजने के लिए दस से अधिक कि.मी. की दूरी चलने की जरूरत है।

वर्ष 2000 के जरवरी में 26 साल की उम्र वाला ह्वांग वेई डाकिया बन गया है, उसे यह काम बहुत पसंद है, इसलिए वह मेहनत से काम करता है, लोन्ग थान कस्बा पोस्ट ब्यूरो के प्रधान मा श्याओ पो ने कहा:

ह्वांग वेई से पहले डाकिया ने पत्र को हर व्यक्ति को नहीं दिया, डाकिया ने सब पत्रों को गांव समिति के दफ़्तर में रखा, लेकिन ह्वांग वेई खुद पत्र को हर लोग को देता है।

पत्रों को भेजने के अलावा, डाकिया पार्सल भेजता है, पार्सल में ये शामिल हैं कि जीवन उत्पादन और कृषि उत्पादन, इसलिए कुछ समय ह्वांग वेई को भारी पार्सल भेजना है, एक साल के 365 दिनों में ह्वांग वेई काम करता है। इस के प्रति ह्वांग वेई की मां ने कहा

देखो, उस के पास दो बड़ा थैला हैं, जिन में धुलाई चूर्ण,अंगूर मदिरा,बाल द्रव,साबुन और कीटनाशकदवा भी है।

मूक और बधिर लोग के रुप में ह्वांग वेई को काम करते हुए अधिक कठिनाई तोड़ना है, ह्वांग वेई के पास अपना उपाय है, ह्वां वेई की मां ने कहा

वह कह नहीं सकता, नहीं बुला सकता, इसलिए काम करते हए ह्वांग वेई एक बाँसुरी का प्रयोग करता है, बाँसुरी की आवाज सुनकर लोगों को ह्वांग वेई आ रहा है मालूम है।

उपभोगताओं को अधिक सुविधा देने के लिए ह्वांग वेई एक विशेष मानचित्र लेता है, जिस में हर परिवार का पता,नाम और कैसे जाने की खबर रिखा जाता है।

पहाड़ों में रहने वालों के लिए पत्र एक प्रमुख बाहर विश्व के साथ संपर्क रकने वाला साधन है, पहाड़ों ने रहने वालों को पोस्ट स्टेशन के लिए विशेष भावना है। त्यौहारों के दौरान पहाड़ों के बाहर रहने वाले पहाड़ों में रहने वालों को पत्र भेजते हैं, इसलिए त्यौहार के दौरान ह्वांग वेई बहुत व्यस्त है। छ्यान चिन ज़ी गांव के श्यू श्यांग छै ने कहा: हमारी गांव में कई लोगों को समान नाम है, उदाहरण के लिए कई लोगों का नाम वांग श्वी है, और कई लोगों का नाम सून शी श्वै है, इसलिए ह्वांग वेई के काम के लिए बहुत कठिनाई है।

ह्वांग वेई संजीदगी से काम करता है, एक ग्रीष्म में ह्वांग वेई एक कंपनी को पत्र भेजने गया, लेकिन पत्र लेने वाला कंपनी में नहीं था,उस ने पत्र लेने वाले की प्रतीक्षा की। चीज़ भेजने के अलावा ह्वांग वेई किसान दोस्तों के लिए मौखिक पत्र भेजता है। छ्यान चिन ज़ी गांव में रहने वाले चाओ योन्ग बिन ने कहा:

ह्वांग वेई अकसर हमारे को मदद करता है, वह हमारे लिए वे चीज़ भेजता है जो हमें चाहिए।

बीते 12 सालों में ह्वांग वेई पत्र भेजने के लिए 2 लाख 50 हजार कि.मी.का मार्ग चला, और कुल 60 हज़ार पत्रों को भेजा है, पहाड़ों में रहने वाले ह्वांग वेई की प्रशंसा करते हैं।

साभार



Tuesday, December 13, 2011

अजूबा...अब तलाक से भी बचाएंगे डाकघर !

कहते हैं पत्रों और संवेदनाओं का बड़ा गहरा रिश्ता है. कई बार पत्रों में कैद भावनाएं इतनी जीवंत हो उठती हैं कि रिश्तों में पसरता अविश्वास या दूरियाँ नजदीकियों में बदलने लगता है. शायद यही कारण है कि चीन के सरकारी डाकघर एक ऐसी मुहिम को बढ़ावा दे रहे हैं जिससे वहाँ बढ़ते तलाक की संख्या कम की जा सकेगी.

चीन के सरकारी डाकघर की इस योजना के अंतर्गत नवविवाहित जोड़े एक सील लिफ़ाफ़े में अपना प्रेम पत्र भेज सकेंगे जिसे उनके विवाह के सात साल बाद उनके जीवन साथी तक पहुँचा दिया जाएगा. इसके पीछे सोच यह है कि तलाक के बारे में सोचने वाले जोड़ों को समय रहते यह याद दिलाया जाए कि आख़िर वह एक दूसरे के नज़दीक क्यों आए थे.

आज की इस भागदौड़ वाली इंस्टेंट लाइफ में कईयों को डाकघर की यह मुहिम अनूठी लग रही है और यही कारण है कि चीनी जोड़े इसे अपनाने में पीछे नहीं हट रहे हैं.वह चाहते हैं कि उनका प्यार सात सालों तक परवान चढ़ता रहे, इसलिए वह डाकघर की इस योजना का लाभ उठा कर एक दूसरे को पत्र लिखने के बारे में सोच रहे हैं.

गौरतलब है कि चीन में पिछले दशक में असफल विवाहों की संख्या दोगुनी हुई है.पिछले साल 19 लाख 60 हज़ार जोड़ों ने तलाक की अर्ज़ी दी थी जो कि 2009 से 14.5 फ़ीसदी ज़्यादा है. एक ज़माने में चीन में बहुत कम तलाक होते थे, लेकिन अब वह आम हो गए हैं. दूसरे देशों की तरह यहां भी बढ़ती व्यक्तिगत स्वतंत्रता और आमदनी को इसके लिए ज़िम्मेदार ठहराया जा रहा है.

हाल में चीन में शादी के नियमों में परिवर्तन ने तलाक के मुद्दे को केंद्र बिंदु में ला दिया है.नया कानून आने से पहले अगर किसी जोड़े में तलाक होता था तो उनमें घर बराबर-बराबर बाँटा जाता था. लेकिन अब बँटवारा इस आधार पर होगा कि घर ख़रीदने में उनमें से किसने कितना पैसा लगाया है.यह एक बड़ा बदलाव है.ऐसे में घरों की बढ़ती कीमतों के साथ तलाक की दर में भी वृध्दि हो रही है.यही कारण है कि हाल के एक सर्वेक्षण में 70 फ़ीसदी चीनी महिलाओं ने कहा कि वह उसी पुरुष के साथ शादी करना पसंद करेंगी जिसके पास पहले से अपना कोई घर हो.जो भी हो, इस नए कानून से कई महिलाओं की चिंताएं बढ़ गई हैं.

ऐसे में चीन के सरकारी डाकघरों को उम्मीद है कि इस नई योजना से कुछ लोगो की तलाक के लिए अदालत का दरवाज़ा खटखटाने की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी. यही नहीं, लोगों में प्यार बरकरार रहे इसके लिए चीनी डाकघर विवाह की हर सालगिरह पर विशेष डाक टिकट, पोस्टकार्ड और यहाँ तक कि प्रेम पासपोर्ट भी जारी कर रहे हैं जिन पर हर सालगिरह पर मोहर लगाई जाती है. फ़िलहाल इस योजना के जनक और बीजिंग डाकघर के प्रबंधक सन बुक्सिन का मानना है कि इसकी सफलता का पता सात वर्ष के बाद ही लग पाएगा.जो भी हो, पर चीन के सरकारी डाक-घरों की यह मुहिम रोचक है और और माना जाना चाहिए कि इसका अंजाम भी खूबसूरत ही होगा.

Saturday, July 16, 2011

53 साल बाद पहुँचा प्रेम-पत्र

20 फरवरी 1958 को कॉलेज में पढ़ाई के दौरान एक अमेरिकी युवती को उसके प्रेमी ने डाक से प्रेम पत्र भेजा। महिला को यह खत अब जाकर है। उनकी उम्र अब 74 साल हो चुकी है और वह दादी मां हैं।

बात 1958 की है। अमेरिकी राज्य पेनसिल्वेनिया की यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रही वोनी नाम की युवती को एक युवक ने प्रेम पत्र लिखा। प्रेमी ने खत के बाहर सिर्फ यही लिखा कि, 'लव, फॉरएवर, वोनी।' यूनिवर्सिटी के पोस्ट बॉक्स में डाले गए इस प्रेम पत्र पर 20 फरवरी 1958 को मुहर लगी लेकिन इसके बाद प्यारी भरी चिट्ठी न जाने कहां गुम हो गई।

लेकिन प्रेमी ने हार नहीं मानीं। उन्होंने यूनिवर्सिटी को चेतावनी दी कि अगर खत वोनी तक नहीं पहुंचा तो वह आधिकारिक शिकायत दर्ज कराएंगे। यूनिवर्सिटी लगातार खत को ढूंढती रही। खोजबीन के दौरान इसी हफ्ते अचानक यूनिवर्सिटी के सामने पांच दशक पुराना यह प्रेम पत्र आ गया।

स्थानीय मीडिया में इस बारे में एक रिपोर्ट भी छपी। रिपोर्ट के जरिए वोनी की एक दोस्त ने उनसे संपर्क किया और बताया कि यूनिवर्सिटी तुम्हें 53 साल पुराना खत सौंपना चाहती है। यूनिवर्सिटी की प्रवक्ता क्रिस्टीन किंडल कहती हैं, 'इस पूरी प्रक्रिया में हमारा मकसद था कि 53 साल पुराने खत को गंतव्य तक पहुंचाया जाए।'

74 साल की वोनी को अब जाकर पुराने प्रेमी का यह खत मिला है। वोनी के बाल अब सफेद हो चुके हैं। उनके कई पोते और पोती हैं। उम्र के इस पड़ाव में मिला प्रेम पत्र वोनी को भावुक कर रहा है। खत लिखने वाले के संपर्क में वह नहीं हैं लेकिन प्यार की एक पुरानी डोर जिंदा है।
*************************************************

California (Pennsylvania), July 15 (AP): Much has happened in the 53 years since Vonnie sent Clark the letter, wondering why he had not called before going back to college.

They married later that year. He graduated. They had four children. They divorced. And he changed his name.

And, at last, the letter is wending its way to Clark ' that is, Muhammad Siddeeq ' who awaits its arrival with mixed emotions. "I'm curious, but I'm not sure I'd put it under the category of 'looking forward to it'," Siddeeq told the Pittsburgh Tribune-Review.

The letter, bearing four one-cent stamps postmarked February 1958 and addressed to Clark C. Moore, arrived in the mailroom at California University of Pennsylvania last week. School officials checked their files but could not figure out who Clark Moore was.

But his friends and family still lived in the area and saw media reports about the letter. They called Siddeeq, now 74 and living in Indianapolis, who had changed his name after converting to Islam.

"I never dreamed of anything like this," Siddeeq told the Washington Observer-Reporter. The letter, its stamps turned upside down as sign of love, arrived at California University of Pennsylvania on July 8, tucked inside some magazines.
Courtesy : www.telegraphindia.com – Sat, Jul 16, 2011

Wednesday, April 20, 2011

ब्रिटेन और आस्ट्रेलिया में विलियम-केट की शाही शादी पर डाक टिकट

ब्रिटेन के राजकुमार प्रिंस विलियम और केट मिडिलटन की शाही शादी से पहले ब्रिटिश डाक विभाग ने उनके सम्मान में डाक टिकट निकालने की तैयारी की है। यह डाक टिकट दो तरह के होंगे जिन पर यह जोड़ी आलिंगनबद्ध दिखाई देगी। इसके लिए फोटोग्राफर मारिया टेस्टिनो द्वारा खींची गई तस्वीर का इस्तेमाल किया जाएगा। ‘डेली एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक 1981 में चार्ल्स और डायना की शादी के समय उनके सम्मान में दो डाक टिकट जारी किए गए थे। विलियम इससे पहले भी दो बार डाक टिकटों पर दिख चुके हैं। पहली बार महारानी के 100वें जन्मदिन के उपलक्ष्य में। दूसरी बार अपने 21वें जन्मदिन के अवसर पर। इन टिकटों की बिक्री 21 अप्रैल से शुरु होगी। उल्लेखनीय है कि विलियम और केट की शादी 29 अप्रैल 2011 को होगी।


गौरतलब है कि 11 अप्रैल को आस्ट्रेलिया ने भी ब्रिटेन के राजकुमार प्रिंस विलियम और केट मिडलटन की शादी की स्मृति में एक विशेष डाक टिकट जारी किया है, जिसमें इस भावी दंपति को सगाई की रस्म के बाद की मुद्रा में दिखाया गया है। विभाग के प्रमुख अहमद फाहूर ने कहा,’हमें विश्वास है कि विशेष डाक टिकट लोगों को इस ऐतिहासिक और खुशी के मौके को अपनी यादों में संजोकर रखने का एक मौका देगा।’

Monday, April 18, 2011

सुब्रत राय 'सहारा' पर डाक टिकट ....??

ब्रिटेन की राष्ट्रीय डाक सेवा रायल मेल भारतीय कार्पोरेट दिग्गज एवं सहारा समूह के अध्यक्ष सुब्रत राय के सम्मान में डाक टिकट जारी करेगी। ब्रिटेन ने उनकी उपलब्धियों को देखते हुए प्रथम श्रेणी का डाक टिकट जारी करने की घोषणा की है। इस सम्मान पर श्री राय ने कहा, ‘मेरे पास रायल मेल का आभार व्यक्त करने के लिए शब्द नहीं हैं, मुझे नहीं लगता कि मैं इसके लायक हूँ। मैं इस सम्मान की गरिमा बनाए रखने की कोशिश करुँगा।’ ब्रिटेन की संसद के प्रवक्ता जान बर्को ने शिक्षा, खेल और प्रौढ़ शिक्षा के क्षेत्र में समूह की उपलब्धियों का स्वागत करते हुए कहा, ‘हम आपकी उपलब्धियों को सलाम करते हैं।’


************************************************************************************

सुब्रत राय पर ब्रिटेन के डाक विभाग द्वारा जारी होने वाले डाक टिकट की खबर तमाम अख़बारों में धड़ल्ले से छपी. कुछ समय पहले भोजपुरी गायक और अभिनेता मनोज तिवारी पर भी एक देश द्वारा डाक टिकट छपने की बातें मीडिया में आई थीं. पर इनका रहस्य ही कुछ और है ? वस्तुत: तमाम देश इस तरह के डाक टिकटों को कमर्शियल आधार पर बढ़ावा देते हैं. हाल ही में भारत में भी पर्सनालाइज्ड डाक टिकट आरंभ किये गए हैं, जिन्हें पिछले दिनों INDIPEX के दौरान बखूबी जारी भी किया गया. Business Standard अख़बार ने इस प्रकरण पर पूरी विस्तृत रिपोर्ट भी प्रकाशित की है. अख़बार लिखता है कि -'' A Royal Mail spokesperson said, “Royal Mail has a range of services which allow individuals or businesses to create a personalised label, which can feature their own image or logo next to a postage stamp.” “Companies and individuals around the world purchase Royal Mail’s customised stamp sheets and we are delighted to have produced these limited edition Business Customised sheets to mark this occasion. Our customised stamp products, Smilers and Business Customised services, are very popular with businesses and individuals, who create and purchase them to celebrate events which range from the birth of a baby to a significant event or achievement within their business.” .....तो क्या इंडियन सेलिब्रेटीज अपने को चर्चित बनाने के लिए इस तरह की ट्रिक का इस्तेमाल कर रहे हैं और मीडिया के माध्यम से उसे भुना भी रहे हैं. ऐसे डाक-टिकटों के पीछे छिपा हुआ यह वाकई रोचक पहलू है.

Tuesday, April 12, 2011

एलिजाबेथ टेलर के साथ दफन हुआ प्रेम पत्र भी

पत्र दिल के कितने करीब होते हैं, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि हाॅलीवुड की प्रख्यात अभिनेत्री एलिजाबेथ टेलर की कब्र में उनके पूर्व पति रिचर्ड बर्टन द्वारा उनके आखिरी दिनों में उन्हें भेजा गया पत्र भी रखा गया। अभिनेत्री एलिजाबेथ टेलर की मौत 23 मार्च 2011 को हुई थी और उन्हें लाॅस एंजिल्स के फारेस्ट लाॅन कब्रगाह में दफना दिया गया। हाॅलीवुड में दोनों का रोमांस यादगार माना जाता है। टेलर ने बर्टन के साथ दो बार शादी की थी। दूसरी बार टेलर से तलाक लेने के बाद बर्टन ने सुसान हंट से शादी की, लेकिन अपनी पहली पत्नी को नहीं भूल पाए। 1984 में उन्होंने टेलर को वापस लौटने के लिए प्यार भरा पत्र लिखा था। उसके बाद बर्टन की 58 साल की उम्र में मौत हो गई थी। टेलर पिछले 27 साल से यह पत्र अपने बिस्तर के पास रखती आ रही थीं।

Wednesday, January 5, 2011

दुनिया की सैर कराएगा डाक टिकट

ब्रिटेन के डाक विभाग ‘रॉयल मेल’ ने अपनी तरह का एक अनूठा डाक टिकट जारी किया है.अत्याधुनिक तकनीक से लैस ये डाक टिकट फ़ोन के ज़रिए आपको इंटरनेट से जोड़ देगा.डाक टिकट को तस्वीर के रुप में फ़ोन में कैद कर तुरंत संबंधित वेबसाइट तक पहुंचा जा सकता है. यानी डाक टिकट इंटरनेट के ज़रिए सूचनाओं का संसार और दुनिया के दरवाज़े खोलेगा.

‘रॉयल मेल’ का कहना है दुनियाभर में ये अपनी तरह पहला ऐसा डाक टिकट है.‘इमेज रेकॉगनिशन’ नामक तकनीक ने इस नए डाक टिकट को 21वीं सदी का अत्याधुनिक डाक टिकट बना दिया है.स्मार्टफ़ोन के ज़रिए यह तकनीक डाक टिकट पर छपी तस्वीर को ‘थ्री-डी’ तस्वीर की तरह दिखाएगी. इंटरनेट पर इस तस्वीर की खोज के बाद हमें उससे संबंधित सभी जानकारियां और वेबसाइट भी उपलब्ध होंगी.

नई तकनीक से लैस बुद्धिमान किस्म के ये डाक टिकट दुनिया के लिए मनोरंजन और जानकारियों का ख़ज़ाना खोल देंगे.
असल ज़िंदगी की तस्वीरों को इंटरनेट की दुनिया से जोड़ने वाली इस तकनीक का इस्तेमाल पहली बार किसी डाक टिकट पर किया जा रहा है.यह अद्भुत डाक टिकट ‘रॉयल मेल’ की एक खास श्रंखला का हिस्सा है.ब्रिटेन का डाक विभाग खास मौकों और ऐतिहासिक तारीख़ों पर अलग किस्म के डाक टिकट जारी करता है. इन टिकट के ज़रिए देश और संस्कृति के बारे में लोगों को जागरुक किया जाता है.

‘रॉयल मेल’ के प्रतिनिधी फ़िलिप पार्कर ने कहा, ''नई तकनीक से लैस बुद्धिमान किस्म के ये डाक टिकट दुनिया के लिए मनोरंजन और जानकारियों का ख़ज़ाना खोल देंगे. अगले कुछ महीनों में डाक टिकट इक्कठा करने के शौकीन चिठ्ठियों के ज़रिए इन टिकटों को पा सकेंगे.''

साभार : BBC हिंदी