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Wednesday, April 26, 2017

भारत में महात्मा गाँधी पर जारी डाक टिकट ब्रिटेन में 41़4 करोड़ रुपए में बिके

महात्मा गाँधी दुनिया भर के देशों में डाक टिकटों पर स्थान पाते रहे हैं और भारत में भी सबसे ज्यादा डाक टिकट गाँधी जी के ही विभिन्न रूपों, उनसे जुडी घटनाओं पर जारी हुए हैं। महात्मा गांधी आज भी दुनिया के लिए प्रेरणा का स्त्रोत हैं। लोगों के मन में उनके प्रति सम्मान में कमी नही आई है, उनसे जुड़ी चीजों के लिए उत्साह कम नहीं हुआ है। हाल ही में ब्रिटेन में भारतीय डाक टिकटों की सर्वाधिक बोली लगी है। महात्मा गांधी पर जारी दुर्लभ डाक टिकट रिकॉर्ड पांच लाख पौंड (लगभग 4.1 करोड़ रुपये) में बिका है। चार डाक टिकटों के सेट को एक ऑस्ट्रेलियाई ने खरीदा।

डाक टिकटों की खुदरा बिक्री करने वाली ब्रिटिश कंपनी स्टेनली गिबन्स ने बताया कि महात्मा गांधी पर 1948 में 10 रुपये का डाक टिकट जारी किया गया था। इसे तत्कालीन गवर्नर जनरल के सचिवालय ने आधिकारिक इस्तेमाल के लिए जारी किया था। इन पर अंग्रेजी भाषा में सर्विस’ लिखा हुआ है। इनमें से अब सिर्फ 13 डाक टिकट ही चलन में हैं। बैंगनी-भूरे रंग के इन डाक टिकटों पर महात्मा गांधी की तस्वीर है। इसके चार टिकटों का एक सेट डाक टिकटों का संग्रह करने वाले एक ऑस्ट्रेलियाई व्यक्ति ने खरीदा। उन्होंने भारतीय डाक टिकटों के लिए सर्वाधिक कीमत चुकाई।

गिबन्स के बयान के अनुसार, इसके अलावा चार डाक टिकटों का एक सेट महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के स्वामित्व वाले रॉयल फिलटेलिक कलेक्शन के पास है। इसे दुनिया के सबसे बड़े डाक टिकटों का निजी संग्रह माना जाता है। गौरतलब है  कि स्टैनली गिबन्स ने गांधीजी पर दस रुपये के एक डाक टिकट को पिछले साल उरुग्वे के एक व्यक्ति को 1.6 लाख पाउंड यानी करीब एक करोड़ 32 लाख रुपये में बेचा था। इस साल मार्च में 'चार आने' का एक दुर्लभ भारतीय डाक टिकट 1.1 लाख पौंड (करीब 91 लाख रुपये) में बेचा गया था। उस डाक टिकट पर महारानी विक्टोरिया के युवावस्था की तस्वीर गलत ढंग से लगी थी। हालांकि नीलामी में सर्वाधिक कीमत में बिकने का रिकॉर्ड ब्रिटिश गुयाना के एक सेंट के डाक टिकट के नाम है। इसे जून 2014 में एक अनाम खरीदार को 74 लाख पौंड (करीब 61 करोड़ रुपये) में बेचा गया था।
20 April, 2017

Monday, September 5, 2016

मदर टेरेसा को संत घोषित करने पर भारतीय डाक विभाग ने जारी किया डाक टिकट


मदर टेरेसा को वेटिकन सिटी में आयोजित समारोह में 4 सितंबर, 2016 को कैथोलिक ईसाइयों के सबसे बड़े धर्म गुरु पोप फ्रांसिस ने संत घोषित किया। जीते जी नोबेल पुरस्कार और भारत रत्न सहित 124 बड़े पुरस्कारों से सम्मानित मदर टेरेसा को निधन के बाद यह सबसे बड़ी श्रद्धांजलि है। 8 साल में भारत से चौथी और तीसरी महिला संत होंगी मदर टेरेसा। मदर टेरेसा विदेश (अल्बानिया) में जन्मी पहली कैथोलिक हैं जिन्हें भारतीय मानकर संत का दर्ज दिया जा रहा है।

इस विशिष्ट दिवस पर यादगार रूप में भारतीय डाक विभाग ने मुंबई के डिवाइन चाइल्ड हाई स्कूल में रविवार को आयोजित समारोह में केंद्रीय संचार राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने एक विशेष स्मारक डाक टिकट जारी किया। इस मौके पर कोलकाता स्थित मिशनरीज ऑफ चैरिटी के प्रतिनिधि के के रूप में बिशप एग्नेलो ग्रेसियास और सिस्टर रुबेला की उपस्थिति उल्लेखनीय थी। 

India Post released a Commemorative Postage Stamp on “Saint Teresa” on the occasion of her Canonization by Hon'ble Minister (State) of Communications Shri Manoj Sinha.

Tuesday, September 15, 2015

महात्मा गांधी से सम्बंधित सर्वाधिक डाक टिकटों का संग्रह कर बनाया नया विश्व रिकॉर्ड


डाक टिकटों की दुनिया में महात्मा गाँधी का नाम सर्वोपरि है।  अधिकतर लोग गांधी जी से जुड़े डाक टिकटों का संग्रह करते हैं। पर रायपुर(छत्‍तीसगढ़) के डॉ. भानुप्रताप सिंह ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के सबसे अधिक डाक टिकट का संग्रह कर नया विश्व रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। 

पेशे से डॉक्टर डॉ. भानुप्रताप सिंह ने बताया कि गिनीज में इससे पहले महात्मा गांधी ने नाम पर कैटेगिरी नहीं थी। सालों की मेहनत से उन्होंने यह रिकॉर्ड बनाया, साथ ही उन्हें इस कैटेगिरी को गिनीज में जुड़वाने में भी बहुत मेहनत करनी पड़ी। गिनीज से पहले लिमका बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी बिगेस्ट कलेक्शन ऑफ महात्मा गांधी स्टैम्प में उनका  नाम आ चुका है। साथ ही उन्होंने महात्मा गांधी पर एक किताब 'बापू- ए जर्नी फ्रॉम मोहनदास टू महात्मा' भी लिखी है।

डॉ. भानुप्रताप सिंह के पुराने रिकॉर्ड

- 2013 में रोलैण्ड हिल थीम पर स्टैम्प कलेक्शन में गिनीज में अपना नाम, जो कि पहले जयपुर के अरविंद झा के नाम पर था, उसे तोड़कर नया रिकॉर्ड कायम किया, जिसमें उन्होंने 1200 के रिकॉर्ड को अपने 1671 से तोड़ा।

- लिमका में इनरेगुलर सिक्कों का रिकॉर्ड

- बिगेस्ट साइज ऑफ एनवेलेप का रिकॉर्ड

- रंगीन सिक्कों के कलेक्शन का रिकॉर्ड

- अलग-अलग प्रकार के सिक्कों का रिकॉर्ड

- डाक सिक्कों का रिकॉर्ड

- क्वाइन ऑन स्टैम्प का रिकॉर्ड

- फर्स्ट  डे कवर का रिकॉर्ड

- रोल एंड हिल रिकॉर्ड

- क्वीन एलिजाबेथ स्टैम्प का रिकार्ड के आलावा कई रिकॉर्ड अपने नाम किए हैं।

वर्ल्ड रिकॉर्ड की दुनिया में कदम

डॉ. भानुप्रताप बताते हैं कि बचपन से ही उन्हें चीजों के कनेक्शन का शौक था, जिसे देखकर उन्हें वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने का आइडिया आया। वे दूसरे देशों के महारथियों की चीजें के कलेक्ट करते ही थे, पर भारतीय होने के नाते उन्हें महात्मा गांधी पर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने का सोचा और अपने इस सपने को पूरा किया।

Tuesday, September 8, 2015

डाक टिकटों पर दिखेंगे अब्दुल कलाम से लेकर माउंटेन मैन दशरथ मांझी


डाक टिकटों पर अब तमाम महान हस्तियों के दर्शन होंगे।  पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम से लेकर बिहार के माउंटेन मैन दशरथ मांझी के सम्मान में भारत सरकार डाक टिकट जारी करेगी. इनके अलावा देश के 25 अन्य महान हस्तियों पर भी डाक टिकट जारी होगा. जाने माने गायकों, लेखकों, स्वतंत्रता सेनानियों और चित्रकारों पर भी सरकार डाक टिकट जारी करने वाली है और इसके डिजाइन के लिए सरकार ने आम लोगों से राय मांगी है।  


डाक विभाग ने 30 जनवरी, 2015 को स्वच्छ भारत अभियान पर स्मृति डाक टिकट जारी किया था। इस डाक टिकट के डिजाइन पर फैसला भी खुली प्रतिस्पर्धा के जरिए किया गया था। महिला सशक्तिकरण पर भी 15 अगस्त, 2015 को एक स्मृति डाक टिकट को जारी किया गया था। इसके डिजाइन पर भी आम लोगों की राय से फैसला लिया गया था। द्रीय संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने यह भी कहा कि लोगों को टिकटों से जुड़ी सूचना मिल सके इसके लिए एक मोबाइल ऐप तैयार किया जाना चाहिए।

केंद्रीय मंत्री रविशंकर ने कहा कि डाक विभाग ने महाकवि विद्यापति, महात्मा गांधी, राजेंद्र प्रसाद, जयप्रकाश नारायण, जननायक कर्पूरी ठाकुर, भारतीय जनता पर्टी के नेता कैलाशपति मिश्र, रवींद्रनाथ टैगोर, छत्रपति शिवाजी समेत 25 देश के महान हस्तियों पर डाक टिकट जारी करने का फैसला किया है. ज्ञात हो कि विद्यापति, गांधी और टैगोर पर डाक टिकट पहले भी जारी हो चुका है. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के नेता भूपेश गुप्त  की याद में भी डाक टिकट जारी करने का फैसला लिया है.

Friday, October 31, 2014

डाक टिकटों पर सरदार पटेल

सरदार वल्लभ भाई पटेल (31 अक्टूबर, 1875 - 15 दिसम्बर, 1950) (गुजराती: સરદાર વલ્લભભાઈ પટેલ) भारत के स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी एवं स्वतन्त्र भारत के प्रथम गृहमंत्री थे।  उन्हें नवीन भारत का  निर्माता भी कहा जाता है । राष्ट्रीय एकता के बेजोड़ शिल्पी रहे पटेल वास्तव में  भारतीय जनमानस अर्थात किसान की आत्मा थे। भारत के  स्वतंत्रता संग्राम मे उनका महत्वपूर्ण योगदान है। भारत की आजादी के बाद वे प्रथम गृह मंत्री और उपप्रधानमंत्री बने। उन्हे भारत का 'लौह पुरूष' भी कहा जाता है।

वल्लभभाई पटेल का जन्म नडियाद, गुजरात में एक पाटीदार कृषक ज़मीदार परिवार में हुआ था। वे झवेरभाई पटेल एवं लदबा की चौथी संतान थे। सोमभाई, नरसीभाई और विट्टलभाई उनके अग्रज थे। उनकी शिक्षा मुख्यतः स्वाध्याय से ही हुई। लन्दन जाकर उन्होंने बैरिस्टर की पढाई की और वापस आकर अहमदाबाद में वकालत करने लगे। महात्मा गांधी के विचारों से प्रेरित होकर उन्होने भारत के स्वतन्त्रता आन्दोलन में भाग लिया। बारडोली में सशक्त सत्याग्रह करने के चलते ही वहां की महिलाओं ने उन्हें  'सरदार' की उपाधि दी।  

आजादी पश्चात गृह मंत्री के रूप में उनकी पहली प्राथमिकता देसी रियासतों (राज्यों) को भारत में मिलाना था। इसको उन्होने बिना कोई खून बहाये सम्पादित कर दिखाया। केवल हैदराबाद के आपरेशन पोलो के लिये उनको सेना भेजनी पडी। भारत के एकीकरण में उनके महान योगदान के लिये उन्हे भारत का लौह पुरूष के रूप में जाना जाता है। सरदार पटेल के ऐतिहासिक कार्यों में सोमनाथ मंदिर का पुनर्निमाण, गांधी स्मारक निधि की स्थापना, कमला नेहरू अस्पताल की रूपरेखा आदि कार्य सदैव स्मरण किए जाते रहेंगे। सन 1991  में उन्हें मरणोपरान्त भारत रत्न से सम्मानित किया गया। 

सरदार पटेल की स्मृति में उनके योगदान को रेखांकित करने के लिए भारत सहित तमाम देशों ने उन पर डाक-टिकट जारी किये हैं। 




(सरदार वल्लभभाई पटेल पर यह 'स्टैम्प बुकलेट' हमने तब जारी की थी, जब हम सूरत (गुजरात) मंडल में बतौर पहली पोस्टिंग, सीनियर सुपरिंटेंडेंट ऑफ़ पोस्ट ऑफिसेज के पद पर कार्यरत थे। 24 वर्षों बाद आयोजित 'सूरत डाक टिकट प्रदर्शनी' (22-23 दिसंबर, 2003) के दौरान इस स्टैम्प बुकलेट की मात्र 500 प्रतियाँ जारी की गई थीं और हर बुकलेट पर अलग नंबर अंकित था।)

(Detail : SURATPEX District Philatelic Exhibition, 22 Dec 2003, Rs.70/-, 12 special stamps, 3 sets of 4 different, of Greetings issue, Surat Division of Vadodara Region of Gujarat Circle, 500 Individually Numbered)










( Postage Stamp sheetlet released on Sardar Vallabhbhai  Patel by Palau country on 11 march, 2011)


( Souvenir Sheet  released on Sardar Vallabhbhai  Patel by Venezuela country on 26 January,  1998)

31 अक्टूबर 2013 को सरदार वल्लभ भाई पटेल की 137वीं जयंती के मौके पर गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुजरात के नर्मदा जिले में सरदार वल्लभ भाई पटेल के स्मारक का शिलान्यास किया। इसका नाम 'एकता की मूर्ति' (स्टैच्यू ऑफ यूनिटी) रखा गया है। यह मूर्ति 'स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी' (93 मीटर) से दुगनी ऊंची बनेगी। इस प्रस्तावित प्रतिमा को एक छोटे चट्टानी द्वीप पर स्थापित किया जाना है जो केवाड़िया में सरदार सरोवर बांध के सामने नर्मदा नदी के मध्य में है। सरदार वल्लभ भाई पटेल की यह प्रतिमा दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति होगी तथा यह 5 वर्ष में लगभग 2500 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होनी है.

लौहपुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती को आज पुरे देश में राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाया गया।  सरदार पटेल जी की जयंती पर शत-शत नमन !!

Friday, September 19, 2014

संगीतकारों के बाद अब साहित्यकारों पर डाक टिकट

विख्यात विभूतियों पर डाक टिकट जारी करने की कड़ी को आगे बढ़ाते हुए डाक विभाग अब साहित्यकारों पर डाक टिकट जारी करने की तैयारी कर रहा है। इसकी शुरुआत हिंदी के महान साहित्यकारों से की जा सकती है। पिछले दिनों संचार मंत्री  के हवाले  से विभिन्न अख़बारों ने इसके संकेत दिए। साहित्य जगत लोगों को इन डाक टिकटों  का बेसब्री  इंतज़ार रहेगा। 

गौरतलब है कि डाक विभाग ने तीन सितंबर, 2014 को ही आठ संगीतकारों पर एक साथ डाक टिकट जारी किया था। डाक टिकटों के इस सेट में भारतीय शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में जानी मानी हस्तियों जैसे पंडित रविशंकर, पंडित भीम सेन जोशी, सुश्री डीके पट्टाम्मल, पंडित मल्लिकार्जुन मंसूर, सुश्री गंगूबाई हंगल, पंडित कुमार गंधर्व, उस्ताद विलायत खां और उस्ताद अली अकबर खां आदि शामिल हैं। 

संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने  कहा कि डाक टिकट महज लिफाफे पर चिपकने वाले स्टांप नहीं, यह संस्कृति के राजदूत हैं।

Thursday, September 4, 2014

India Post pay tribute to legends of classical music by Stamps


Music has always been an important aspect of Indian life. There have been many maestros who have nurtured Indian classical music and have made its presence felt in the National and International arena. India Post has paid a tribute to such legendary maestros of Indian Classical Music by releasing a set of eight stamps on Indian Musicians. 

Mr. Krishna Kumar Yadav, Director Postal Services, Allahabad Region told that Dept. of Post has issued 8 stamps on 3rd September, 2014 based on Indian Musicians, which includes  Ali Akbar Khan, Bhimsen Joshi, D.K. Pattammal, Kumar Gandharva, Mallikarjun Mansur, Ravi Shankar and Vilayat Khan. Stamps issued on Ravi Shankar and Bhimsen Joshi are in denomination of Rs. 25/- whereas  other stamps are in denomination of Rs. 5/- only.


Mr. Krishna Kumar Yadav, told that these stamps are available in Allahabad Region at Philatelic Bureaus of Allahabad Head Post Office and Varanasi Head Post Office. Stamps worth more than Rs. 25,000 have been sold to the customers on first day in Allahabad. These customers include not only fans of music but apart from youngsters and school children also include government officials, Judges, Doctors, Engineers, Advocates, and people from Corporate World. Many of these people are procuring these postage stamps for gifting to other persons also. Other than above, these stamps and other items are being also dispatched by registered post to 801 Philatelic Deposit Account holders of Allahabad Philatelic Bureau, added Mr. KK Yadav.

Director Mr. Yadav also told that total 46 lakhs stamps and  4 lakh miniature sheets have been printed. Apart from these, First Day Cover and Information Brochure have also been issued, which are available for Rs. 5/- each respectively. 





भारतीय संगीतकारों को समर्पित 8 डाक टिकट जारी

भारतीय जीवन में संगीत का विशेष महत्व है। शास्त्रीय संगीत जो कि रागों पर आधारित है, देश में लोक जीवन का आधार रहा है। फिल्मों, म्यूजिक एलबमों, लोकगीतों आदि में इसके विभिन्न रूपों का प्रयोग किया गया है। यहाँ अनेक ऐसे संगीतकार हुए हैं जिन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत को आगे बढ़ाया है तथा राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर इसे लोकप्रिय बनाया है। भारतीय डाक विभाग ने शास्त्रीय संगीत की ऐसी महान विभूतियों को डाक टिकटों पर स्थान दिया है। 

इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि 3 सितम्बर 2014 को डाक विभाग ने ’’भारतीय संगीतकार’’ शीर्षक से आठ डाक टिकटों का सेट तथा एक मिनिएचर शीट जारी किया है। इनमें अली अकबर खान, भीमसेन जोशी, डीके पट्टम्माल, गंगूबाई हंगल, कुमार गंधर्व, मल्लिकार्जुन मंसूर, रवि शंकर और विलायत खान शामिल हैं। इनमें रवि शंकर व भीमसेन जोशी पर जारी डाक टिकट 25 रूपये मूल्यवर्ग के व अन्य पर जारी डाक टिकट 5 रूपये के हैं । भारत के राष्ट्रपति श्री प्रणव मुखर्जी जी ने  इन डाक टिकटों को एक कार्यक्रम में समारोहपूर्वक जारी किया.

डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि इलाहाबाद परिक्षेत्र में ये डाक टिकटें इलाहाबाद प्रधान डाकघर और वाराणसी प्रधान डाकघर में स्थित फिलेटलिक ब्यूरो में उपलब्ध हैं । उन्होंने बताया कि इलाहाबाद में पहले दिन ही 25,000 से ज्यादा राशि के डाक टिकटों को लोगों ने हाथों-हाथ खरीदा। इनमें सिर्फ संगीत प्रेमी और फिलेटलिस्ट ही नहीं बल्कि स्कूली बच्चों  और युवाओं के अलावा विभिन्न कार्यक्षेत्रों में  कार्य करने वाले अधिकारी, जज, डाॅक्टर, इंजीनियर, वकील से लेकर कारपोरेट जगत से जुड़े लोग तक शामिल हैं। इनमें से कई लोग तो इन डाक टिकटों को लोगों को गिफ्ट भी कर रहे हैं। इसके अलावा इलाहाबाद फिलेटलिक ब्यूरो से नियमित रूप से जुड़े 801 फिलेटलिक डिपाजिट एकाउंट होल्डर्स को भी यह डाक टिकट व अन्य सामग्री रजिस्टर्ड डाक से भेजी जा रही है। 

डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने यह भी जोड़ा कि वेट आॅफसेट प्रक्रिया से मुद्रित कुल 46 लाख डाक टिकट देशभर में जारी किये गये हैं।  इनमें 25 रूपये मूल्य वर्ग वाले हर डाक टिकट 8 लाख की संख्या में एवं 5 रूपये मूल्यवर्ग वाले प्रत्येक डाक टिकट 5 लाख की संख्या में मुद्रित हुए हैं। प्रथम दिवस आवरण एवं विवरणिका के साथ-साथ 4 लाख मिनीएचर शीट और प्रत्येक डाक टिकट की 1 लाख शीटलेट भी जारी की गयी हैं। 












Wednesday, February 26, 2014

जब सचिन तेंदुलकर ने अंजलि को लिखा खत

खतों की भी अपनी एक खूबसूरत दुनिया है। दुनिया की तमाम नामचीन हस्तियों ने इन खतों के माध्यम से ही अपने प्रेम को भी जिया है। तथी तो महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने मोबाइल से पहले के उस जमाने को याद किया, जब वह अंजलि को खत लिखते थे और जब उन्हें खत का जवाब मिलता था तो वह अपनी पत्नी की ’खूबसूरत’ लिखावट में खो जाया करते थे। तेंदुलकर को अपनी पत्नी के लिए पत्र लिखने से पहले भी मेहनत करनी पड़ती थी।

 स्टार बल्लेबाज ने चेन्नई में 26 फ़रवरी  2014 को यहाँ हैंडराइटिंग को बढ़ावा देने के कार्यक्रम के दौरान मुस्कराते हुए कहा, ’क्रिकेट गेंद को हिट करना मेरे लिए नैसर्गिक था, लेकिन अंजलि को पत्र लिखते समय मैं यह जाँच करता रहता था कि मैं क्या लिख रहा हूँ।  उन दिनों मोबाइल नहीं हुआ करते थे तथा संचार के एम मात्र साधन लैंडलाइन फोन या पत्र हुआ करते थे। मैंने पत्र लिखने शुरू किए। 

मैंने अपने माता-पिता को पत्र लिखने से शुरूआत की और बाद में कुछ पत्र (पत्नी) अंजलि के लिए भी लिखे।’ उन्होंने याद किया कि किस तरह से उनके माता-पिता ने उन्हें पेन थामना और लिखना सिखाया था। 

Thursday, December 5, 2013

Sachin Tendulkar 'stamps' a hit among fans



Sachin Tendulkar may have retired from Cricket, but his craze among his admirers is going to last for some time. His fans want to collect things related to him as souvenirs. Postal Department has issued two commemorative postage stamps on Sachin Tendulkar to commemorate his 200th Test Match on 14 November, 2013 and people are crazy to collect these stamps.

            Mr. Krishna Kumar Yadav, Director Postal Services of Allahabad Region told that to honor Sachin Tendulkar, who is the only player to have played 200 test matches, Postal Department has issued a set of two commemorative stamps, a miniature sheet, and a mixed sheetlet, which depicts the journey of his test career from his debut test to recent one. These stamps were issued on 14 November but since the print order was large due to huge demand, they were made available in Philatelic Bureaus across the country in phased manner.

            Mr. Krishna Kumar Yadav, told that these stamps are available in Allahabad Region at Philatelic Bureaus of Allahabad and Varanasi. More than 1,000 customers have purchased these stamps with Sachin Tendulkar’s image. This number includes not only youngsters and school children who are fans of Cricket and Sachin but government officers working in various fields, Judges, Doctors, Engineers, Advocates, Sport Persons and people from Corporate World. Not only Allahabad, but people are coming from nearby districts to purchase these stamps, many of these people are procuring these postage stamps for gifting to other persons. Other than above, these stamps and other items are being also dispatched by registered post to 788 Philatelic Deposit Account holders of Allahabad Philatelic Bureau added Mr. Yadav.


            Director Mr. Yadav also told that these stamps are available in the denominations of rupees 20/- each. Department of Posts has got these stamps printed in huge quantity. It includes 30.1 lakh each postage stamps, 24.1 lakh miniature sheets and 16.1 lakh sheetlets (sheet of 16 stamps). Apart from these, First Day Cover and Information Brochure have also been issued, which are available for Rs. 20/- and Rs. 5/- respectively. 

(Pl. also read this news in Times of India, 5 Dec. 2013 @ 

सचिन तेंदुलकर पर जारी डाक टिकटों के लिए दिखा क्रेज


सचिन तेंदुलकर ने भले ही क्रिकेट से सन्यास ले लिया हो पर उनके चाहने वालों में उनका क्रेज अभी भी बरकरार है। सचिन से जुड़ी चीजों को उनके फैन्स यादगार रूप में संजो कर रखना चाहते हैं। भारतीय डाक विभाग ने सचिन तेंदुलकर के 200वें टेस्ट मैच पर 14 नवम्बर, 2013 को दो डाक टिकट जारी किये थे और इन डाक टिकटों को लोग हाथों-हाथ ले रहे हैं। इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि 200 टेस्ट मैच खेलने वाले एक मात्र खिलाड़ी सचिन रमेश तेंदुलकर को सम्मान देने की खातिर डाक विभाग ने दो डाक टिकटों का सेट, एक मिनीएचर शीट और एक मिक्स शीटलेट जारी की, जिसमें उनके टेस्ट कैरियर की शुरूआत से हाल के मैच की यात्रा को दर्शाया गया है। यह डाक टिकट 14 नवम्बर को ही जारी हो गया था, पर भारी संख्या में इसका प्रिंट आर्डर होने के चलते देशभर के डाकघरों के फिलेटलिक ब्यूरो में इसे फेज्ड मैनर में उपलब्ध कराया गया। 


डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि इलाहाबाद परिक्षेत्र में ये डाक टिकट इलाहाबाद और वाराणसी स्थित फिलेटलिक ब्यूरो में उपलब्ध हैं  और ब्यूरो में प्राप्ति के एक सप्ताह के भीतर ही 1,000 से ज्यादा लोगों ने सचिन के चित्र वाले इन डाक टिकटों को खरीदा है। इनमें सिर्फ क्रिकेट और सचिन के दीवाने स्कूली बच्चे और युवा पीढ़ी ही नहीं शामिल हैं, बल्कि विभिन्न कार्यक्षेत्रों में  कार्य करने वाले अधिकारी, जज, डाक्टर, इंजीनियर, वकील, खिलाड़ी से लेकर कारपोरेट जगत से जुड़े लोग तक शामिल हैं। सिर्फ इलाहाबाद ही नहीं, अगल-बगल के जिलों से भी लोग इन डाक टिकटों को खरीदने आ रहे हैं और इनमें से कई लोग तो इन डाक टिकटों को लोगों को गिफ्ट भी कर रहे हैं। इसके अलावा इलाहाबाद फिलेटलिक ब्यूरो से नियमित रूप से जुड़े 788 फिलेटलिक डिपाजिट एकाउंट होल्डर्स को भी यह डाक टिकट व अन्य सामग्री रजिस्टर्ड डाक से भेजी जा रही है। 

श्री यादव ने बताया कि ये डाक टिकट 20-20 रूपये के मूल्यवर्ग में उपलब्ध है। डाक विभाग ने सचिन तेंदुलकर से जुड़े इन डाक टिकटों को भारी संख्या में मुद्रित कराया है। इनमें 30.1 लाख डाक टिकटें, 24.1 लाख मिनीएचर शीट व 16.1 शीटलेट (16 डाक टिकटों की शीट) शामिल हैं । इसके अलावा इस पर प्रथम दिवस आवरण एवं विवरणिका भी जारी की गयी है, जिनका मूल्य क्रमशः 20 रूपये व 5 रूपये है। 

साभार :

Thursday, November 14, 2013

आखिर डाक टिकटों पर भी आ ही गए सचिन तेंदुलकर



जीवित होते हुए डाक-टिकटों पर आने का  भारत में विरले लोगों को ही सम्मान मिला है। आज 14 नवम्बर, 2013 को इस कड़ी में एक नाम जुड़ गया मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर का, जब उनके 200 वें टेस्ट मैच को यादगार बनाने के लिए भारतीय डाक विभाग ने दो स्मारक डाक टिकट जारी किए। 20 रूपये मूल्य वर्ग में जारी ये प्रत्येक दोनों डाक टिकट 30.1 लाख की  संख्या में मुद्रित हो रहे हैं, ताकि उनके चाहने  वाले इसे यादगार रूप में सहेज कर रख सकें। इसके साथ 24.1 लाख मिनिएचर शीट और 16 .1 लाख शीटलेट्स भी मुद्रित कराई जा रहे हैं।  पर अभी ये डाक टिकट पाने के लिए थोडा इंतज़ार करना होगा, आखिर इतनी ज्यादा संख्या में जो छाप रहे हैं। इन्हें फेज्ड  मैनर में विभिन्न फिलेटलिक ब्यूरोज में उपलब्ध कराया जायेगा। 





(Photos Courtesy : Mid day)




Monday, May 6, 2013

सुरैया, स्मिता पाटिल, देवानंद, राजेश खन्ना, यश चोपड़ा सहित 50 फ़िल्मी हस्तियाँ अब डाक-टिकटों पर




भारतीय सिनेमा के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में भारतीय डाक विभाग ने एक साथ 50 डाक टिकटों की श्रृंखला जारी की है जो कि अब तक का सबसे बड़ा डाक टिकट निर्गम है। इन्हें 6 मिनिएचर शीट में जारी किया गया है। इनमें हिंदी फिल्मों के अभिनेता, अभिनेत्रियाँ, निर्माता निर्देशक, पटकथा और संवाद लेखक, गीतकार- संगीतकार इत्यादि शामिल हैं। इससे पूर्व अभी तक सर्वाधिक 12 डाक टिकट ज्योतिष राशियों पर जारी किये गए थे । जिन प्रमुख हस्तियों पर डाक टिकट जारी हुए हैं, उनमें अभिनेत्रियों में सुरैया, स्मिता पाटिल, दुर्गा खोटे, गीता दत्त, भानुमती इत्यादि तो अभिनेता- निर्देशक में देवानंद, यश चोपड़ा, अशोक कुमार, भालजी पेंढारकर, राजेश खन्ना, शम्मी कपूर, सोहराब मोदी, तपन सिन्हा, सी . वी . श्रीधर इत्यादि शामिल हैं। 3 मई को इसे राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने जारी किया.

पूरी सूची आप यहाँ देख  सकते हैं-

M/S No. 1: Ashok Kumar, Bhalji Pendharkar, Dhirendranath Ganguly, B. N. Sirkar, Bhupen Hazarika, Durga Khote, B. R. Chopra, Dev Anand and Hrishikesh Mukherjee.

M/S No. 2: Majrooh Sultanpuri, Naushad, Nitin Bose, Prithviraj Kapoor, Raichand Boral, Ruby Myers, Sohrab Modi, Tapan Sinha and Yash Chopra.

M/S No. 3: Allu Ramalingiah, Balraj Sahni, C.V. Sridhar, Kamaal Amrohi, Ashok Mehta, Bhanumathi, Chetan Anand and Geeta Dutt.

M/S No. 4: Kannadasan, Mehmood, Nagesh, Prem Nazir, Madan Mohan, Motilal, O. P. Nayyar and R. D. Burman.

M/S No. 5: Raj Khosla, Rajesh Khanna, Salil Chowdhury, Shailendra, Rajendra Kumar, S. V. Ranga Rao, Sanjeev Kumar and Shakeel Badayuni.

M/S No. 6: Shammi Kapoor, Smita Patil, Tarachand Barjatya, Utpal Dutt, Shankar Jaikishan, Suraiya, T. R. Sundaram and Vishnu Vardhan.





Saturday, May 4, 2013

हिंदी सिनेमा के सौ साल पर राष्ट्रपति ने किए 50 फ़िल्मी हस्तियों पर डाक टिकट जारी


भारतीय सिनेमा के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में भारतीय डाक विभाग ने एक साथ पचास  डाक टिकटों की श्रृंखला जारी की है. हिंदी सिनेमा के तमाम प्रमुख स्तंभों को इनमें स्थान दिया गया है. दरअसल  सूचना प्रसारण मंत्रालय ने डाक विभाग से अनुरोध किया था कि वह ऐसे डाक टिकट जारी करे , जो सिनमा के 100 साल के बहुरेंगी पक्षों पर केंद्रित हो और उनकी छवि इनमें दिखे। डाक विभाग ने इस बारे में अपनी सहमति दी और तदनुसार राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने  3 मई को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्करों के वितरण के दौरान इन विशेष डाक टिकटों का अनावरण किया । गौरतलब है कि दादा साहेब फाल्के की पहली फीचर फिल्म राजा हरिश्चंद्र भी इसी दिन रिलीज हुई थी, जिसे पहली हिंदी फिल्म माना  जाता है. 

भारतीय डाक विभाग द्वारा इस अवसर पर पचास डाक टिकट जारी  किया जाना अब तक का सबसे बड़ा डाक टिकट निर्गम है। नमें हिंदी फिल्मों के अभिनेता, अभिनेत्रियाँ, निर्माता निर्देशक, पटकथा और संवाद लेखक, गीतकार- संगीतकार  इत्यादि शामिल हैं। इससे पूर्व अभी तक सर्वाधिक 12 डाक टिकट ज्योतिष राशियों पर जारी किये गए थे । जिन प्रमुख हस्तियों पर डाक टिकट जारी  हुए हैं, उनमें अभिनेत्रियों में सुरैया, स्मिता पाटिल, दुर्गा खोटे, गीता दत्त, भानुमती इत्यादि तो अभिनेता- निर्देशक में  देवानंद, यश चोपड़ा, अशोक कुमार, भालजी पेंढारकर, राजेश खन्ना, शम्मी कपूर, सोहराब मोदी, तपन सिन्हा, सी . वी  . श्रीधर  इत्यादि शामिल हैं।

- कृष्ण कुमार यादव @ www.dakbabu.blogspot.com/ 

(In Picture : The President, Shri Pranab Mukherjee releasing the commemorative postage stamp on 50 iconic film personalities of Indian cinema, at the 60th National Film Awards function, in New Delhi on May 03, 2013. The Union Minister for Communications and Information Technology, Shri Kapil Sibal and the Minister of State (Independent Charge) for Information & Broadcasting, Shri Manish Tewari and the Secretary, Ministry of Information & Broadcasting, Shri Uday Kumar Varma are also seen.)

Sunday, March 3, 2013

वीर-रस के कवि श्याम नारायण पाण्डेय पर निदेशक डाक सेवाएँ कृष्ण कुमार यादव ने जारी किया विशेष डाक आवरण

द्वितीय मण्डल स्तरीय आजमगढ़ डाक टिकट प्रदर्शनी आजमपेक्स-2013’ का समापन वेस्ली इंटर कॉलेज आजमगढ़ में आयोजित भव्य समारोह में 3 मार्च को किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में इलाहाबाद व गोरखपुर परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ श्री कृष्ण कुमार यादव ने दूसरे दिन के कार्यक्रम का उदघाटन किया। श्री यादव ने इस अवसर पर वीर रस के कवि श्याम नारायण पाण्डेय (वर्ष 1907 में ग्राम डुमराव, जिला- आजमगढ़, संप्रति मऊ जनपद में जन्म।) पर विशेष डाक आवरण एवं विरूपण का विमोचन किया। आवरण जारी करने के साथ साथ मुख्य अतिथि श्री यादव ने रिमोट द्वारा इस विशेष आवरण के ब्लो-अप का भी अनावरण किया।

       वीर-रस के कवि श्याम नारायण पाण्डेय (1907 - 1991) पर जारी विशेष आवरण व विरूपण का विमोचन करते हुए निदेशक डाक सेवाएँ श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि श्याम नारायण पाण्डेय वीर रस के सुविख्यात हिन्दी कवि थे। आप केवल कवि ही नहीं अपितु अपनी ओजस्वी वाणी में वीर रस के अनन्यतम प्रस्तोता भी थे । देश-प्रेम और अपने संस्कृति के प्रति अनुराग ही श्याम नारायण पाण्डेय जी को वीर रस के प्रति आकर्षित करता था। तभी तो उन्होने हल्दीघाटीजौहर जैसे उत्कृष्ट महाकाव्य रचे, जिनमें हल्दीघाटी (काव्य) सर्वाधिक लोकप्रिय और जौहर(काव्य) विशेष चर्चित हुए। हल्दीघाटी में वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप के जीवन और जौहर में चित्तौड की रानी पद्मिनी के आख्यान हैं। हल्दीघाटी के नाम से विख्यात राजस्थान की इस ऐतिहासिक वीर भूमि के लोकप्रिय नाम पर लिखे गये हल्दीघाटी महाकाव्य पर आपको उस समय का सर्वश्रेष्ठ सम्मान देव पुरस्कार प्राप्त हुआ था। श्री यादव ने कहा कि उन्होने आजीवन निश्चल भाव से साहित्य सृजन किया ।
 
अपने उदबोधन में निदेशक डाक सेवाएँ श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि आजमगढ़ की धरती सदैव से ही साहित्यिक-सांस्कृतिक रूप से उर्वर रही है। यह धरा महान विभूतियों की जन्मस्थली-कर्मस्थली रही है, जिन्होने आजमगढ़ का नाम दुनियाभर में फैलाया। ऐसी विभूतियों की स्मृतियों को सहेज कर रखना एवं युवा पीढ़ी को उनके बारे में बताना हमारा कर्तव्य है। डाक विभाग ऐसी विभूतियों पर समय-समय पर डाक टिकट व विशेष आवरण (लिफाफा) जारी कर समाज एवं राष्ट्र के प्रति अपने सामाजिक दायित्यों का निर्वहन करता है। श्री यादव ने कहा कि आजमगढ़ की विरासत, स्थापत्य, विभूतियों एवं यहाँ से जुड़े अन्य पहलुओं पर डाक-टिकट एवं विशेष आवरण जारी किए जाने को प्रस्ताव यदि प्राप्त होते हैं तो उन्हे बेहद खुशी होगी।

       प्रवर डाक अधीक्षक श्री वाई एन  द्विवेदी ने कहा कि एक लंबे अंतराल पश्चात आजमगढ़ में इस प्रकार का आयोजन कर बेहद खुशी हो रही है और जिस तरह से यंहा के लोगों ने प्रदर्शनी को हाथों हाथ लिया है, वह हमारे लिए उत्साहजनक है। इस अवसर पर डा0 शारदा सिंह, पूर्व प्राचार्य, डा0 डी पी, पूर्व प्राचार्य ने भी अपने उद्गार व्यक्त किए।

       मुख्य अतिथि निदेशक डाक सेवाएँ श्री कृष्ण कुमार यादव ने समापन समारोह में डाक टिकट प्रदर्शनी में विभिन्न ग्रुपों, चित्रकला प्रतियोगिता एवं प्रश्नोतरी में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान पाने वालों को पुरस्कृत किया।  अंतिम दिन होने के चलते माई स्टैम्प के प्रति लोगों का काफी उत्साह दिखा और काफी लोगों ने अपनी फोटो डाक टिकटों पर अंकित कराई।

       कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत प्रवर डाक अधीक्षक आजमगढ़ श्री वाई एन द्विवेदी एवं आभार ज्ञापन सहायक निदेशक त्रिवेणी प्रसाद ने किया। कार्यक्रम का संचालन एस एन मिश्रा ने किया। इस अवसर पर सीनियर पोस्टमास्टर जी एन प्रसाद, राजेश यादव, जे एम सिन्हा, अनवर जमाल, कमलनाथ यादव, दिलशेर यादव, आर एस सोनकर, डी बी त्रिपाठी, सरदार सिंह यादव सहित तमाम डाक विभाग के अधिकारी, फिलेटिलिस्ट, साहित्यकार एवं शिक्षाविद इत्यादि उपस्थित थे।

”आजमगढ़ डाक टिकट प्रदर्शनी” में ’’माई स्टैम्प’’ के तहत खुद की डाक टिकटें बनवाने के प्रति दिखा उत्साह

डाक विभाग द्वारा दो दिवसीय ”आजमगढ़ डाक टिकट प्रदर्शनी” (आजमपेक्स-2013, 2-3 मार्च 2013) के दौरान डाक विभाग की बहुचर्चित ' माई स्टैम्प' सेवा का भी शुभांरभ किया गया। इसके तह त चीफ पोस्टमास्टर जनरल, कर्नल कमलेश चन्द्र एवं निदेशक डाक सेवाएँ कृष्ण कुमार यादव सहित तमाम लोगों ने अपनी फोटो डाक टिकटों पर अंकित करायी।
 
आजमपेक्स-2013 के दौरान माई स्टैम्प सेवा 16 डाक-टिकटों के साथ उपलब्ध कराई जाएगी। इनमें सिनेरेरिया, डहलिया, लिली और पैन्सी फूलों वाले डाक-टिकट के अलावा 12 राशियों के डाक टिकट शामिल हैं। जहाँ बड़े लोगों में अपनी राशि के साथ डाक.टिकट का क्रेज रहाए वहीँ बच्चों ने रंग.बिरंगे फूलों वाले डाक.टिकटों के साथ अपनी फोटो वाली डाक.टिकटें बनवाईं। कई लोगों ने इस सु.अवसर का भरपूर फायदा उठाया और अपने पूरे परिवार को ही माई स्टैम्प के तहत डाक.टिकटों पर ला दिया। युवाओं में इसके तहत काफी उत्साह देखा गया।
 
 निदेशक कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि माई स्टैम्प के तहत अपनी तस्वीर वाले डाक-टिकट लगे पत्र देश भर में कहीं भी भेजे जा सकते हैं। इस सेवा का लाभ उठाने के लिए एक फार्म भरकर उसके साथ अपनी फोटो और 300 /-जमा करने होते हैं। एक शीट में कुल 12 डाक-टिकटों के साथ फोटो लगाई जा सकती है।

Saturday, March 2, 2013

पंडित अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध' की स्मृति में आजमगढ़ में विशेष डाक आवरण जारी

आज़मगढ़ ने तमाम साहित्यिक विभूतियों को पल्लवित-पुष्पित किया है। इन्हीं में से एक प्रमुख नाम है- कवि सम्राट पंडित अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध' का। 'हरिऔध' जी की स्मृति में भारतीय डाक विभाग ने 2 मार्च, 2013 को "आजमगढ़ डाक टिकट प्रदर्शनी” (आजमपेक्स-2013) के दौरान एक विशेष डाक आवरण और विरूपण जारी किया। उत्तर प्रदेश परिमंडल के चीफ पोस्टमास्टर जनरल कर्नल कमलेश चन्द्र ने इलाहाबाद/गोरखपुर परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ एवं चर्चित साहित्यकार व ब्लागर कृष्ण कुमार यादव की अध्यक्षता में आयोजित एक कार्यक्रम में इस विशेष डाक आवरण का विमोचन किया।

चीफ पोस्टमास्टर जनरल कर्नल कमलेश चन्द्र ने कहा कि पंडित अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध' जी द्वारा रचित खड़ी बोली के प्रथम महाकाव्य 'प्रिय प्रवास' का इस समय शताब्दी वर्ष भी मनाया जा रहा है, ऐसे में डाक विभाग द्वारा उन पर विशेष आवरण जारी किया जाना एक महत्वपूर्ण कदम माना जाना चाहिए।

चर्चित साहित्यकार एवं ब्लागर व सम्प्रति निदेशक डाक सेवाएँ कृष्ण कुमार यादव ने इस अवसर पर हरिऔध जी के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि हरिऔध जी ने गद्य और पद्य दोनों ही क्षेत्रों में हिंदी की सेवा की। वे द्विवेदी युग के प्रमुख कवि रहे है। उन्होंने सर्वप्रथम खड़ी बोली में काव्य-रचना करके यह सिद्ध कर दिया कि उसमें भी ब्रजभाषा के समान खड़ी बोली की कविता में भी सरसता और मधुरता आ सकती है।
 
श्री यादव ने कहा कि हरिऔध जी आधुनिक हिंदी खड़ी बोली के पितामह हैं। उन्होंने खड़ी बोली के प्रथम महाकाव्य 'प्रिय प्रवास' की रचना करके साहित्य-जगत में शीर्ष स्थान प्राप्त किया । आज भी हरिऔध जी का काव्य ग्रंथ 'प्रिय प्रवास' तथा 'वैदेही वनवास' हिंदी खड़ी भाषा के मील के पत्थर के रुप में स्वीकार किये जाते हैं। उन्होंने कहा कि हरिऔध जी ने विविध विषयों पर काव्य रचना की है। यह उनकी विलक्षण विशेषता है कि उन्होंने राम-सीता, कृष्ण-राधा जैसे धार्मिक विषयों के साथ-साथ आधुनिक समस्याओं को भी अपनी रचनाओं में लिया है और उन पर नवीन ढंग से अपने विचार प्रस्तुत किए हैं। वास्तव में देखा जाये तो प्राचीन और आधुनिक भावों के मिश्रण से 'हरिऔध' जी के काव्य में एक अद्भुत चमत्कार उत्पन्न हो गया है।
 
कार्यक्रम में साहित्यकार डा0 कन्हैया सिंह ने हरिऔध जी के जीवन पर प्र काश डा हुए कहा कि अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' (15 अप्रैल, 1865-16 मार्च, 1947) हिन्दी के एक सुप्रसिद्ध साहित्यकार है। इनका जन्म उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ जिले के निजामाबाद नामक स्थान में हुआ। सन १८८९ में हरिऔध जी को सरकारी नौकरी मिल गई। वे कानूनगो हो गए। इस पद से सन १९३२ में अवकाश ग्रहण करने के बाद हरिऔध जी ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में अवैतनिक शिक्षक के रूप से कई वर्षों तक अध्यापन कार्य किया। सन १९४१ तक वे इसी पद पर कार्य करते रहे। उसके बाद यह निजामाबाद वापस चले आए। इस अध्यापन कार्य से मुक्त होने के बाद हरिऔध जी अपने गाँव में रह कर ही साहित्य-सेवा कार्य करते रहे। अपनी साहित्य-सेवा के कारण हरिऔध जी ने काफी ख़्याति अर्जित की। हिंदी साहित्य सम्मेलन ने उन्हें एक बार सम्मेलन का सभापति बनाया और विद्यावाचस्पति की उपाधि से सम्मानित किया। सन १९४५ ई० में निजामाबाद में आपका देहावसान हो गया।