Showing posts with label सफरनामा. Show all posts
Showing posts with label सफरनामा. Show all posts

Sunday, January 26, 2020

Lucknow GPO : General Post Office, Hazratganj illuminated on the eve of Republic Day

71वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर लखनऊ जीपीओ रंगीन रोशनी में नहाया नजर आया। रंग-बिरंगी लड़ियों से जीपीओ को सजाया गया है। लखनऊ मुख्यालय परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि लखनऊ जीपीओ  ऐतिहासिक होने के साथ-साथ राजधानी के चुनिन्दा हेरिटेज भवनों में शामिल है। हजरतगंज के हृदयस्थल में राजभवन और विधान सभा भवन के बगल में स्थित लखनऊ जीपीओ स्वतंत्रता आंदोलन की कई महत्वपूर्ण घटनाओं का यह गवाह रहा है। यहीं पर काकोरी कांड की सुनवाई हुई थी।
डाक निदेशक श्री केके यादव ने बताया कि एक जमाने में यहाँ अंग्रेजों का रिंग थियेटर हुआ करता था, 1929 से 1932 के दौरान  वर्तमान जीपीओ भवन अस्तित्व में आया। इसके समक्ष स्थित जीपीओ पार्क आज भी राजधानी में तमाम राजनैतिक और सामाजिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बिन्दु है।












हेरिटेज भवन होने के साथ-साथ आजादी की कई घटनाओं का गवाह रहा है लखनऊ जीपीओ - डाक निदेशक केके यादव



गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।
Happy Republic Day.
🇮🇳🇮🇳🇮🇳 🇮🇳🇮🇳🇮🇳



Wednesday, January 1, 2020

Postal Services in Lucknow : डाक सेवाओं के लिए अहम रहा वर्ष 2019, राजधानी लखनऊ में हुए तमाम नवाचार - डाक निदेशक केके यादव

डाक विभाग दिनों-ब-दिन अपने को अद्यतन कर रहा है, चाहे वह सेवाओं का मामला हो या टेक्नालॉजी का। वर्ष 2019 में भी डाक सेवाओं में तमाम नवाचार हुए। लखनऊ (मुख्यालय) परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि वर्ष 2019 में ग्रामीण डाकघरों को टेक्नोलॉजी से अद्यतन करने के लिए दर्पण सी०एस०आईं० का रोल आऊट किया गया।  शहरों में  लेटर बॉक्स को स्मार्ट बनाते हुए पत्र निकासी की सूचना के तात्कालिक अपडेशन के लिए 'नन्यथा' सॉफ्टवेयर की शुरुआत की गई।  ग्राहकों को डाक वितरण की वास्तविक समय वितरण सूचना उपलब्ध कराने के लिए 'पोस्टमैन मोबाइल एप्प' की शुरुआत की गई। ई कामर्स के दौर में पार्सल के त्वरित वितरण के लिए लखनऊ जीपीओ व चौक प्रधान डाकघर में नोडल डिलीवरी सेंटर बनाये गए, जहाँ से शहर भर के पार्सलों का वितरण होता है। पार्सल वितरण के लिए मेकेनाइज्ड बीट बनाते हुए मारुति वैन व मोटर साइकिल का इस्तेमाल आरम्भ किया गया।
केंद्र और राज्य सरकार की तमाम जनकल्याणकारी योजनाओं को डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के तहत लोगों से जोड़ने हेतु इण्डिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक खाते का इस्तेमाल किया जा रहा है। लखनऊ परिक्षेत्र में 3.27 लाख खाते खुल चुके हैं। डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि  "इंडिया पोस्ट पेमेंटस बैंक" के द्वारा संचालित आधार इनेबल्ड पेमेंट सिस्टम सेवा के अंतर्गत घर बैठे बिना किसी अतिरिक्त चार्ज के किसी भी बैंक से 10,000 रुपये तक निकालने की सुविधा की  सितंबर 2019 में शुरुआत हुई । ग्रामीण लोगों को डिजिटल ट्रांसेक्शन के लिए  प्रेरित करने के क्रम में IPPB सक्षम ग्राम बनाये गए।


 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' के तहत प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी  द्वारा आरम्भ की गई 'सुकन्या समृद्धि योजना' में लखनऊ डाक परिक्षेत्र ने पहल करते हुए नई इबारत लिखी । 2.41  लाख बेटियों के खाते खोले जा चुके हैं। वर्ष 2019 में इसके तहत 576 गाँवों में सभी योग्य बेटियों के खाते खुलवाकर उन्हें  सम्पूर्ण सुकन्या समृद्धि ग्राम बना दिया गया है। गंगाजल बिक्री को प्रधान डाकघरों के साथ-साथ वर्ष 2019 में चयनित उप डाकघरों में भी आरम्भ किया गया।

डाक टिकट संग्रह के प्रति लोगों में रूचि पैदा करने हेतु विभिन्न स्कूलों में फिलेटलिक सेमिनार व वर्कशॉप का आयोजन किया गया। डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव के अनुसार विभिन्न विद्यालयों में फिलेटलिक क्लब बनाकर विद्यार्थियों में रचनात्मक अभिरुचि विकसित करने पर जोर दिया गया। महात्मा गाँधी की 150 वीं जयंती पर लखनऊ जीपीओ में भव्य डाक टिकट प्रदर्शनी "अहिंसापेक्स -2019" का आयोजन, जिसका समापन उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने किया। अयोध्या में दीपोत्सव को यादगार बनाने हेतु राज्यपाल आनंदी बेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा "कॉरपोरेट माई स्टाम्प" जारी किया गया। भारतीय इत्र विषय पर ऊद और नारंगी फूल पर आधारित चार सुगंधित स्मारक डाक टिकट जारी हुए। पत्र-लेखन विधा को बढ़ावा देने हेतु ढाई आखर पत्र लेखन प्रतियोगिता के तहत "प्रिय बापू ! आप अमर हैं" विषय पर पत्र लेखन प्रतियोगिता का आयोजन हुआ।  पोस्टकार्ड 1 अक्टूबर, 2019 को वैश्विक स्तर पर 150 साल का हो गया।


"राष्ट्रीय डाक सप्ताह" के दौरान जागरूकता रैली, साईकिल रैली, बिजनेस मीट का आयोजन किया गया।  उत्तर प्रदेश डाक परिमंडल में उत्कृष्ट कार्य करने वाले डाक अधिकारियों व कर्मियों को महानिदेशक डाक नई दिल्ली मीरा हॉण्डा और चीफ पोस्ट मास्टर जनरल उ.प्र. परिमंडल कौशलेंद्र कुमार सिन्हा ने डाक सेवा अवार्ड से सम्मानित किया।  

लखनऊ जीपीओ में अमिताभ बच्चन अभिनीत गुलाबो सिताबो और  हजरतगंज स्थित चीफ पोस्टमास्टर जनरल कार्यालय में पति, पत्नी और वो फिल्म की शूटिंग हुई। डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव ने अभिनेता कार्तिक आर्यन को उनकी तस्वीर वाली 'माई स्टैम्प' भेंट किया, जिसे देखकर अभिनेता काफी रोमांचित हुए।  
वर्ष 2019 में डाक विभाग और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने मिलकर क्षय (टी०बी०) रोग को दूर भगाने की ठानी। उत्तर प्रदेश के 4 जनपदों -लखनऊ, आगरा, बदायूं और चंदौली में ये पायलट प्रोजेक्ट 15 जुलाई से आरम्भ हुआ। लखनऊ जीपीओ में आयोजित एक कार्यक्रम में  लखनऊ मुख्यालय परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ  कृष्ण कुमार यादव ने स्टेट टीबी ऑफिसर डॉ संतोष गुप्ता के साथ इसका शुभारम्भ किया। इससे डाकिया के माध्यम से  टी०बी० मरीजों के बलगम के नमूने तेजी से स्वास्थ्य विभाग के लैब तक पहुंचेंगे।  
लखनऊ (मुख्यालय) परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि चूँकि डाकघरों की पहुँच सर्वत्र है, अत: सरकार की तमाम कल्याणकारी योजनाओं से समाज के अंतिम व्यक्ति को जोड़ने में इसकी अहम भूमिका है। वर्ष 2019 में इसी भावना के अनुरूप डाक सेवाओं ने तमाम नए आयाम रचे।  






Sunday, October 1, 2017

Happy Birthday to India Post : Post Offices Completed 163 glorious years of services

संचार सेवायें सदैव से मानवीय जीवन का अभिन्न अंग रही हैं और इनमें डाक सेवाओं का प्रमुख स्थान है। यथापि संचार क्रान्ति के चलते तमाम नवीन तकनीकों का आविष्कार हुआ, पर डाक विभाग ने  समय के साथ नव तकनीक के प्रवर्तन एवं अपनी सेवाओं में विविधता व उन्नयन द्वारा अपनी निरन्तरता कायम रखी है। भारतीय डाक विश्व का सर्वाधिक वृहद डाक नेटवर्क है। समाज के सभी पक्षों को एकीकृत करते हुये लगातार 163  वर्षों से कायम अपनी विश्वसनीयता के साथ भारतीय डाक एकमात्र ऐसा संगठन है जो प्रतिदिन समाज के हर व्यक्ति के दरवाजे पर दस्तक लगाता है। आज इसी नेटवर्क व साख के चलते तमाम अन्य संगठन भी अपने उत्पादों और सेवाओं के प्रचार-प्रसार व बिक्री हेतु डाक विभाग के साथ हाथ मिला रहे हैं।

भारतीय डाक विभाग वर्ष 2017 में अपनी सेवाओं के 163 गौरवशावली वर्ष पूरा कर रहा है। 1 अक्टूबर 1854 को लार्ड डलहौजी के काल में विभाग के रूप में स्थापित डाक विभाग समय के विभिन्न पगचिन्हों का गवाह रहा है। आधुनिक डाक विभाग की कार्यप्रणाली से पूर्व भारत में प्राचीन काल से ही समय-समय पर विभिन्न डाक प्रणालियाँ प्रचलित थीं। वैदिक व उत्तर वैदिक काल में किसी न किसी रूप में दूतों का संदेशवाहक के रूप में जिक्र मिलता है। महाकवि कालिदास ने अपने काव्य मेघदूत में संदेशवाहक के रूप में मेघों की कल्पना की थी। भारतीय राज व्यवस्था में मौर्य काल के उद्गम के साथ ही ‘कबूतर-डाक‘ का आरम्भ मिलता है, जो कि कुषाण काल के बाद तक प्रभावी रहा। भारत में व्यवस्थित डाक का प्रथम लिखित इतिहास जियाउद्दीन बरनी द्वारा अलाउद्दीन खिलजी (1296) के समय का प्राप्त होता है, जिसने सैन्य सम्बन्धी नियमित जानकारी हेतु ‘पैदल डाक‘ और ‘घुड़सवार डाक‘ व्यवस्था कायम की। मु0 बिन तुगलक के शासन काल (1325-51) में भी इस व्यवस्था के कायम रहने का जिक्र उत्तर अफ्रीकी यात्री इब्नबतूता ने किया है। दिल्ली से दौलतगिरी राजधानी स्थानांतरित होने पर मु0 बिन तुगलक हेतु नियमित गंगा का जल पैदल और घुड़सवार डाक द्वारा ही ले जाया जाता था। शेरशाह सूरी (1541-45) ने अपने काल में डाक व्यवस्था को तीव्रता देने हेतु बंगाल से सिंध तक निर्मित सड़क किनारे एक निश्चित दूरी पर सरायों की व्यवस्था की, जहाँ पर दो घुड़सवार डाक को आगे ले जाने हेतु सदैव मुस्तैद रहते थे। मुगल सम्राट अकबर (1556-1603) ने घुड़सवार डाक के साथ-साथ ‘ऊँट-डाक‘ का भी आरम्भ किया। पर ये सारी ‘शाही डाक‘ सेवा केवल सम्राट, उसके प्रमुख दरबारियों, पुलिस और सेना हेतु ही थी।आम जनता से इनका कोई सरोकार नहीं था। शाही डाक सेवा के अलावा विभिन्न वर्गों की अपनी अलग-अलग डाक-सेवायें थीं। सम्पन्न सेठ-साहूकारों की अपनी ‘महजनी डाक सेवा‘ थी तो मारवाड़ (जोधपुर) में मिर्धा जाति के कतिपय लोगों द्वारा ‘मिर्धा डाक‘, चिल्का डाक एवं मेवाड़, मालवा आदि में ब्राह्मणों द्वारा चलायी गयी ‘ब्राह्मणी डाक‘ सेवा थी।

अंग्रेजों के भारत आगमन के साथ ही ईस्ट इंडिया कम्पनी ने सन् 1688 में मुंबई में एक डाकघर खोलकर अपनी पृथक डाक सेवा का श्रीगणेश कर डाला। इस कंपनी डाक सेवा के वाहक भी डाक धावक या घुड़सवार ही थे। सन् 1766 में राबर्ट क्लाइव ने भी इस संबंध में कुछ प्रयास किए और 27 मार्च 1776 को बंगाल में सर्वप्रथम नियमित डाक सेवा का आरम्भ किया।  इस हेतु जमींदारों को ‘डाक धावक‘ उपलब्ध कराने हेतु कहा गया और इस प्रकार ‘जमींदारी डाक‘ का आरम्भ हुआ।  पर सही अर्थों में आधुनिक डाक सेवा का आरम्भ वारेन हेस्टिंग्ज ने किया। 31 मार्च 1774 को कलकत्ता जीपीओ के गठन और पोस्टमास्टर जनरल की नियुक्ति पश्चात प्रथम बार प्रति सौ मील की दूरी हेतु दो आने के मूल्य वाले तांबे के टिकट सिक्के शुल्क के रूप में निर्धारित किये गये।  इसी दौरान प्रथम डाकिया की भी नियुक्ति हुई। वारेन हेस्टिंगस द्वारा संचालित व्यवस्था मात्र देश के मुख्य नगरों तक ही सीमित थी, अतः एक समानांतर ‘जिला डाक सेवा‘ का आविर्भाव हुआ।  इसका उद्देश्य जिले के मुख्यालय को जिले के शेष नगरों से जोड़ना था।  इसके व्यय का प्रबंध जमीदारों पर और नियंत्रण जिले के अधिकारियों द्वारा होता था।  इस व्यवस्था में पत्रों का वितरण सिपाही व चैकीदारों द्वारा होता जो अपनी मर्जी से पत्र शुल्क वसूलते।

 वर्ष 1837 में लागू ‘प्रथम डाकघर अधिनियम‘ ने डाक सेवाओं में क्रान्तिकारी परिवर्तन लाये। इसने सभी प्राइवेट डाक सेवाओं को समाप्त कर सरकार को डाक व्यवस्था पर अनन्य एकाधिकार दे दिया। आधुनिक डाक सेवाओं के इतिहास में पहली बार नियमित पोस्टमास्टर की नियुक्ति आरम्भ हुयी। इससे पूर्व जिले के अन्य वरिष्ठ अधिकारी ही अपने कर्तव्यों के साथ-साथ पोस्टमास्टर का भी दायित्व निर्वाह करते थे। इस अधिनियम के तहत ही प्रथमतः जनता हेतु डाक सेवायें खोली गईं और 1 अक्टूबर 1837 को प्रथम ‘जनता डाकघर‘ खोला गया।

वर्ष 1854 कई कारणों से भारतीय डाक के इतिहास में अविस्मरणीय रहेगा। प्रथमतः, लार्ड डलहौजी द्वारा 1 अक्टूबर 1854 को डाक विभाग को एक महानिदेशक श्री एल0पी0ए0बी0 रिडेल के अधीन लाना। द्वितीयतः, राष्ट्रीय स्तर पर प्रथमतः 1 अक्टूबर 1854 को डाक-टिकट जारी करना। यद्यपि इससे पूर्व 1852 में डाक टिकट जारी करके भारत एशिया में डाक टिकट जारी करने वाला प्रथम राष्ट्र बना था, पर वह मात्र सिंध प्रांत हेतु ही था। तृतीयतः, डाक टिकट के परिचय के साथ ही बिना दूरी का ध्यान रखे ‘एक समान डाक दर‘ को लागू करना। चतुर्थतः, ‘अखिल भारतीय डाक सेवा‘ का गठन। पंचम, सर्वप्रथम ‘लेटर बाक्स’ की स्थापना। षष्टम, पोस्टमास्टर जनरल को जीपीओ के कार्यक्षेत्र से मुक्त कर जीपीओ हेतु स्वतंत्र स्थापना की गयी।
सन् 1854 के बाद डाक विभाग द्वारा विभिन्न सेवाओं का आरम्भ हुआ- फील्ड पोस्ट आफिस (1856), लिफाफा (1856), अन्तर्देशीय पत्र (1857), रेलवे छँटाई सेवा (1863), शाखा डाकघर (1866), पंजीकृत लिफाफा (1866), पोस्ट बैग (1866), चलित डाकघर (1867), आर.एल.ओ. (1872), मुद्रित लिफाफा (1873), पंजीकृत पत्र पावती (1877), मूल्यदेय पार्सल सेवा (1877), बीमा पत्र (1878), पोस्टकार्ड (1879), मनीआॅर्डर (1880), डाकघर बचत बैंक (1882), टेलीग्राम संदेश (1883), डाक जीवन बीमा (1884), टेलीग्राम मनीअॅार्डर (1880), सैन्य पेंशन का वितरण (1890), सर्टिफिकेट आफ पोस्टिंग  (1897), एयर मेल सेवा (1911), नकद प्रमाण पत्र (1917), व्यापारिक जवाबी पत्र (1932), राजस्व टिकट बिक्री  (1934), इंडियन पोस्टल आर्डर (1935) इत्यादि। आजादी पश्चात तो भारतीय डाक ने तमाम नये आयाम छुये। भारतीय डाक को यह गौरव प्राप्त है कि अगर 1852 में तत्कालीन भारत के एक प्रांत सिंध ने एशिया का प्रथम डाक टिकट जारी कर इतिहास दर्ज कराया तो 21 फरवरी 1911 को इलाहाबाद से नैनी के मध्य विश्व की प्रथम एयर मेल सेवा आरम्भ करने का श्रेय भी भारत के ही खाते में दर्ज है। राष्ट्रमण्डल देशों में भारत पहला देश है जिसने सन् 1929 में हवाई डाक टिकट का विशेष सेट जारी किया।

भारत एक कृषि प्रधान एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था वाला देश है, जहाँ सेवाओं को अन्तिम व्यक्ति तक पहुंचाना ही सरकार की प्राथमिकता है। डाक विभाग ने प्रत्येक नागरिक के जीवन को प्रभावित किया है, चाहे वह डाक, बैंकिंग, जीवन बीमा और धनांतरण के माध्यम से हो अथवा रिटेल सेवाओं के माध्यम से। देश में 1,54,939 डाकघरों का नेटवर्क है जो कि विश्व का सबसे बड़ा नेटवर्क है। इनमें  से करीब 90 प्रतिशत डाकघर ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित है। विभाग का प्रमुख कार्यकलाप डाक की प्रोसेसिंग, पारेषण और इसका वितरण करना है। 5.62 लाख से अधिक पत्र-पेटिकाओं से डाक एकत्र की जाती है जिसे डाक कार्यालयों के नेटवर्क द्वारा प्रोसेस किया जाता है तथा इसे रेल, सड़क और वायु मार्ग से देश भर में प्रेषिती तक पहुँचाया जाता है। इसी प्रकार ई-एमओ, घर-घर धन प्रेषण सेवा, आईएमओ तत्काल मनीआर्डर जिसके जरिए धन तत्काल पहुँच जाता है तथा मोबाइल से मोबाइल मनीआर्डर के माध्यम से प्रेषण से पाने वाले के पास धन प्रेषित किया जाता है। इस प्रकार डाकघर एक देशव्यापी सेवा प्रदाता के रूप में कार्यरत है। 

भारतीय डाक ने समाज में अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए लोगों के कारोबार और वित्तीय आवश्यकताओं के अनुरूप अनेक व्यावसायिक एवं वित्तीय कार्यकालापों को प्रारंभ किया। विभाग ने नए अवसरों का पता लगाने तथा नई सेवाओं को विकसित करने में अपने को संलग्न किया। व्यवसायिक प्रक्रियाओं को पुनः व्यवस्थित करने तथा प्रचालनात्मक कार्यकुशलता पर विशेष ध्यान दिया गया है। आर्थिक उदारीकरण के इस युग में डाकघर सामाजिक लाभ भुगतान, मनरेगा भुगतान, आदि जैसे अपने सामाजिक दायित्वों तथा वाणिज्यिक और प्रतिस्पर्धी वातावरण की चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए तैयार है। पेमेंट बैंक का दर्जा मिलने के बाद डाक विभाग वित्तीय समावेशन में अहम भूमिका निभाने को तत्पर है। नेटवर्क और आईटी से युक्त डाकघर अपने देशव्यापी नेटवर्क के माध्यम से देश के कोने-कोने को कवर करते हुए एक प्रत्यक्ष लाभ अंतरण प्रदाता के रूप में स्थापित हो रहा है। जहाँ डाक विभाग एक ऐसा विशालतम नेटवर्क बना रहा जिसने अपने सेवाओं के साथ बहुत से लोगों के जीवन को प्रभावित किया, वहीं विश्वसनीयता और गति सेवा की महत्वपूर्ण विशेषताएं बन गईं। वैल्यू फार मनी, बहुविध वितरण चैनल, घर-घर तक सेवा की पहुँंच, ग्राहक का आराम महत्वपूर्ण हो गए। 
डाक सेवाओं को आधुनिक बनाने के लिए तमाम कदम उठाए गए हैं-नन्यथा सॉफ्टवेयर द्वारा लेटर बॉक्स की ई-क्लियरिंग, ई-कामर्स और पार्सल के लिए मेकनाइज्ड वितरण व्यवस्था, स्पीड पोस्ट, पंजीकृत पत्र और पार्सल के लिए ट्रेक एंड ट्रेस सुविधा, कैश ऑन डिलीवरी सुविधा। भारतीय डाक आईटी आधुनिकीकरण परियोजना-2012 डाक सेवाओं को प्रौद्योगिकी सम्पन्न, स्वावलम्बी, मार्केट लीडर में तब्दील करने हेतु उभर कर सामने आई। इसके द्वारा जहाँ डाकघरों  में कोर बैंकिंग लागू की गई है, वहीं आईटी परियोजना द्वारा देश के दूरस्थ और अंतिम छोर तक प्रौद्योगिकी के लाभ पहुँचा कर शहरी व ग्रामीण के बीच अंतर को कम किए जाने की भी आशा है। 
देश के हर कोने में, हर दरवाजे पर डाक विभाग की पहुँच है और वह लोगों के सुख-दुःख में बराबर रूप से जुड़ा हुआ है।  डाक सेवाएं नवीनतम टेक्नालॉजी  अपनाते हुए नित्य नए आयाम रच रही हैं। डाक विभाग अपनी बचत बैंक और बीमा सेवाओं को ऑनलाइन करने के बाद अब पेमेंट बैंकिंग क्षेत्र में भी कदम रखने जा रहा है।  ई-काॅमर्स को बढ़ावा देने हेतु कैश ऑन डिलीवरी, लेटर बाक्स से नियमित डाक निकालने हेतु नन्यथा मोबाईल एप एवं डाकियों द्वारा एण्ड्रोयड बेस्ड स्मार्ट फोन आधारित डिलीवरी जैसे तमाम कदम विभाग की "डिजिटल इण्डिया" के तहत की गई पहल हैं। आर्थिक और सामाजिक समावेशन के तहत ग्रामीण पोस्टमैन चलते -फिरते  एटीएम  के रूप में नई भूमिका निभाने को तत्पर है। 
डाक विभाग का उद्देश्य समावेशी विकास के तहत शहरों के साथ-साथ सुदूर ग्रामीण अंचल स्थित लोगों को भी सभी योजनाओं के तहत लाना है। ग्रामीण सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी प्रोजेक्ट  के तहत  ग्रामीण शाखा डाकघरों को भी हाईटेक किया जा रहा है जायेगा और वहाँ पर  हैण्डहेल्ड डिवाइस  दिया जा रहा है ।  इसके तहत  शाखा डाकघरों को सोलर चार्जिंग उपकरणों से जोडने के साथ-साथ मोबाइल थर्मल प्रिन्टर, स्मार्ट कार्ड रीडर, फिंगर प्रिन्ट स्कैनर, डिजिटल कैमरा एवं सिगनेचर व दस्तावेज स्कैनिंग के लिये यन्त्र भी मुहैया कराये जा रहे हैं ताकि ग्रामीण लोगों को इन सुविधाओं के लिये शहरों की तरफ न भागना पडे और घर बैठे ही वे अपना भुगतान प्राप्त कर सकें।

आर्थिक और वित्तीय समावेशन में डाक विभाग की अहम भूमिका है। डाकघरों में हर वर्ग और उम्र के हर पड़ाव के लिए अलग-अलग बचत और बीमा योजनाएँ हैं। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत प्रधानमंत्री श्री मोदी जी द्वारा 10 साल तक की बालिकाओं के लिए आरम्भ सुकन्या समृद्धि योजना से बालिकाओं का जहाँ आर्थिक सशक्तिकरण होगा, वहीं  उनकी उच्च शिक्षा और  विवाह में काफी सुविधा होगी। देश में मुख्यधारा से वंचित लोगों व उनके परिवारों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से आरम्भ अटल पेंशन योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना एवं प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के सफलतापूर्वक क्रियान्वयन में भी डाकघरों द्वारा  सक्रिय भूमिका का  निर्वहन किया जा रहा है। डाक विभाग देश के सबसे पुराने विभागों में से है। डाकघरों के मध्यम से तमाम कल्याणकारी योजनाओं को जरूरतमंद लोगों तक पहुँचाया जा सकता है।


कृष्ण कुमार यादव, 
निदेशक डाक सेवाएँ, 
राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर -342001 
http://dakbabu.blogspot.com/
https://www.facebook.com/KKYadav1977/

Wednesday, April 26, 2017

हिंदी ब्लॉगिंग के 14 साल : ब्लॉगिंग में डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव के परिवार की तीन पीढ़ियाँ सक्रिय

न्यू मीडिया के इस दौर में ब्लॉगिंग लोगों के लिए अपनी बात कहने का सशक्त माध्यम बन चुका है। राजनीति की दुनिया से लेकर फिल्म जगत, साहित्य से लेकर कला और संस्कृति से जुड़े तमाम नाम ब्लॉगिंग से जुडे हुए हैं।  21 अप्रैल 2003 को हिंदी का  प्रथम ब्लॉग ’नौ दो ग्यारह’ बना था, तबसे इसने कई पड़ावों को पार किया है। हिंदी ब्लॉगिंग के क्षेत्र में एक ऐसा भी परिवार है, जिसकी तीन पीढ़ियाँ ब्लॉगिंग से जुडी हैं। राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर के निदेशक डाक सेवाएं कृष्ण कुमार यादव, उनकी पत्नी आकांक्षा यादव और बिटिया अक्षिता ब्लॉगिंग के क्षेत्र में नित नए आयाम रच रहे हैं। उनके परिवार में पिताश्री राम शिव मूर्ति यादव भी ब्लॉगिंग से जुड़े हुए हैं।  सार्क देशों के सर्वोच्च 'परिकल्पना ब्लॉगिंग सार्क शिखर सम्मान' से सम्मानित एवं नेपाल, भूटान और श्रीलंका सहित तमाम देशों में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर्स सम्मेलन में सक्रिय भागीदारी निभाने वाले श्री यादव जहाँ अपने साहित्यिक रचनाधर्मिता हेतु "शब्द-सृजन की ओर" (http://kkyadav.blogspot.in/) ब्लॉग लिखते हैं, वहीं डाक विभाग को लेकर "डाकिया डाक लाया" (http://dakbabu.blogspot.in/) नामक उनका ब्लॉग भी चर्चित है।

वर्ष 2015 में हिन्दी का सबसे लोकप्रिय ब्लॉग 'शब्द-शिखर' (http://shabdshikhar.blogspot.com) को चुना गया और इसकी मॉडरेटर  आकांक्षा यादव को  हिन्दी में ब्लॉग लिखने वाली शुरूआती महिलाओं में गिना जाता है। ब्लॉगर दम्पति कृष्ण कुमार यादव और आकांक्षा यादव को  'दशक के श्रेष्ठ ब्लॉगर दम्पति',  'परिकल्पना ब्लॉगिंग सार्क शिखर सम्मान' के अलावा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा नवम्बर, 2012 में ”न्यू मीडिया एवं ब्लॉगिंग” में उत्कृष्टता के लिए ”अवध सम्मान से भी विभूषित किया जा  चुका  है। इस दंपती ने वर्ष 2008 में ब्लॉग जगत में कदम रखा और  विभिन्न विषयों पर आधारित दसियों ब्लॉग का संचालन-सम्पादन करके कई लोगों को ब्लॉगिंग की तरफ प्रवृत्त किया और अपनी साहित्यिक रचनाधर्मिता के साथ-साथ ब्लॉगिंग को भी नये आयाम दिये। नारी सम्बन्धी मुद्दों पर प्रखरता से लिखने वालीं आकांक्षा यादव का मानना है कि न्यू मीडिया के रूप में उभरी ब्लॉगिंग ने नारी-मन की आकांक्षाओं को मुक्ताकाश दे दिया है। आज एक लाख  से भी ज्यादा हिंदी ब्लॉग में लगभग एक तिहाई ब्लॉग महिलाओं द्वारा लिखे जा रहे  हैं।

ब्लॉगर दम्पति यादव की 10  वर्षीया सुपुत्री अक्षिता (पाखी) को भारत की सबसे कम उम्र की ब्लॉगर माना जाता है। अक्षिता की प्रतिभा को देखते हुए भारत सरकार ने  वर्ष 2011 में उसे "राष्ट्रीय बाल पुरस्कार" से सम्मानित किया, वहीं अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन, श्री लंका में उसे  "परिकल्पना कनिष्ठ सार्क ब्लॉगर सम्मान" से भी सम्मानित किया गया। उसका ब्लॉग  'पाखी की दुनिया'  (http://pakhi-akshita.blogspot.in/)  को 100 से ज्यादा देशों में देखा-पढा जाता है।

हिंदी ब्लॉगिंग की दशा और दिशा पर पुस्तक लिख रहे चर्चित ब्लॉगर कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि,  आज ब्लाॅग सिर्फ जानकारी देने का माध्यम नहीं बल्कि संवाद, प्रतिसंवाद, सूचना विचार और अभिव्यक्ति का भी सशक्त ग्लोबल मंच है। आज हर आयु-वर्ग के लोग इसमें सक्रिय हैं, शर्त सिर्फ इतनी है कि की-बोर्ड पर अंगुलियाँ चलाने का हुनर हो।
ब्लॉगिंग मीडिया के दौर  का सशक्त माध्यम 
(साभार : कामयाब कलम, बीकानेर 22 अप्रैल, 2017)

हिन्दी ब्लॉगिंग ने पूरा किया  14  साल का सफर  :  21 अप्रैल को बना था हिंदी का पहला ब्लॉग
हिंदी ब्लॉगिंग में  डाक निदेशक  कृष्ण कुमार यादव  के परिवार की तीन पीढ़ियाँ सक्रिय 
(साभार : जनगण, राजस्थान 22 अप्रैल, 2017)

हिन्दी ब्लॉगिंग ने पूरा किया  14  साल का सफर,  
हिंदी ब्लॉगिंग में  डाक निदेशक केके  यादव के परिवार की तीन पीढ़ियाँ सक्रिय
 (साभार : जलते दीप, जोधपुर  22 अप्रैल, 2017)



 (साभार : दैनिक युगपक्ष, बीकानेर 22 अप्रैल, 2017)