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Thursday, August 12, 2010

अब एड्रेस प्रूफ कार्ड भी बनाएगा डाक-विभाग

डाक विभाग अभी तक लोगों के पते पर चिट्ठियाँ ही पहुँचाता रहा है, पर अब लोगों के लिए एड्रेस प्रूफ कार्ड भी बनाएगा। इस कार्ड का विभिन्न कार्यों हेतु इस्तेमाल किया जा सकेगा। यह कार्ड कोई भी वैध भारतीय नागरिक जिसकी उम्र 18 वर्ष से ऊपर है, बनवा सकता है। इसके लिए सम्बंधित वितरण डाकघर से 10 रूपये का एक फार्म लेकर भरना होगा, जिसमें व्यक्ति का पूरा नाम, माता-पिता/पति-पत्नी इत्यादि का नाम, जन्म तिथि, वर्तमान पता व इस पते पर रहने की अवधि, स्थाई पता, किरायेदार की स्थिति में मकान मालिक के बारे में जानकारी, रोजगारपरक होने पर उसकी जानकारी व परिचय पत्र की फोटो काॅपी, रोजगार प्रदाता का पता व ईमेल आई0 डी0, व्यक्ति का टेलीफोन नम्बर, बल्ड ग्रुप, पहचान का चिन्ह इत्यादि जानकारियाँ एकत्र की जाएंगी। यह फार्म संबंधित वितरण डाकघर से ही खरीदा व जमा किया जाएगा। फार्म के साथ दो फोटो भी जमा करवाने होंगे। इन सब अपचैरिकताओं के बाद जनसंपर्क निरीक्षक (डाक) द्वारा फार्म में भरी गई सूचनाओं को सत्यापित किया जाएगा ओर तत्पश्चात सभी जानकारियां सही पाए जाने पर एड्रेस प्रूफ कार्ड जारी किया जाएगा।
इस सारी प्रक्रिया के लिए 240 रूपये का शुल्क डाकघर में जमा करवाना होगा। डाक विभाग के लिए यह कार्ड मेंसर्स यू0 टी0 आई0 टेक्नालाॅजी सर्विज लिमेटड द्वारा तैयार किया जाएगा जो कि अल्ट्रा टच फिनिश पर आधारित होगा। यह कार्ड तीन वर्ष के लिए वैध होगा और पुनः नवीनीकरण 140 रूपये जमाकर कराया जा सकता है। डुप्लीकेट कार्ड हेतु 90 रूपये डाकघर में जमा करने होंगे। एड्रेस प्रूफ कार्ड पर एक यूनिक नम्बर दर्ज होगा जिसमें संबंधित प्रधान डाकघर का संक्षिप्त नाम और चार अंकों का क्रमांक एवं जारी होने का वर्ष दर्ज होगा। गौरतलब है कि यह योजना पहली बार तमिलनाडु सर्किल द्वारा आरम्भ की गई थी। वहाँ पर इसे काफी अच्छा रिस्पांस मिला। इसके बाद इसे अखिल भारतीय स्तर पर लागू किया जा रहा है।

Wednesday, August 12, 2009

डाकघर द्वारा जारी होते हैं पहचान पत्र

पिछले दिनों प्रतिष्ठित औद्योगिक घराने, सिंहानिया परिवार के एक सदस्य डाकघर आए और उन्होने डाकघर पहचान पत्र बनाने के लिए अनुरोध किया। सुनकर आश्चर्यमिश्रित प्रसन्नता का अहसास हुआ कि यह योजना लोगों के बीच आज भी लोकप्रिय और प्रासंगिक है। यह योजना काफी पुराने समय में, जब पत्राचार पद्धति पर डाकघर का एकाधिकार था एवं देश की अधिकतर जनसंख्या सूचना प्रेषण एवं धन प्रेषण के लिए डाकघर पर आश्रित थी उस समय कम्पनियों एवं जनता के अन्य लोग जो सरकारी, अर्धसरकारी एवं निजी कार्यों के लिए बाहर जाते थे, उनको डाकपाल के द्वारा मंगाई जाने वाली डाक सामग्री प्राप्त करने में असुविधा से बचाने के लिए डाकघर पहचान पत्र जारी करने की योजना शुरू की गई थी। आज पहचान के तमाम अन्य साधन जैसे ड्राइविंग लाइसेन्स, पैन कार्ड, इलेक्शन कमीशन का कार्ड एवं अन्य प्रकार के पहचान पत्रों के समकक्ष ही डाकघर के पहचान पत्र ने भी अपनी पहचान, लोकप्रियता एवं प्रासंगिकता बना रखी है।

यह पहचान पत्र किसी भी शहर में वहाँ के प्रधान डाकघर से जारी किया जाता है। प्रधान डाकघर से निःशुल्क फार्म प्राप्त कर, इसे भरकर अपना एक पासपोर्ट साइज का फोटो चिपकाकर एवं एक फोटो साथ में लगाकर 10 रूपये का डाक टिकट लगाकर डाकघर में जमा किया जाता है। डाकघर के सक्षम अधिकारी के द्वारा पता एवं व्यक्ति की जांच की जाती है एवं इसके उपरान्त पहचान पत्र जारी कर दिया जाता है। इस पहचान पत्र में जन्मतिथि, ऊंचाई एवं पहचान चिन्ह भी अंकित होता है। इस कार्ड की वैधता तीन वर्ष की है। यह पहचान पत्र नगण्य शुल्क एवं सरल प्रक्रिया में जारी हो जाता है जो जन-साधारण के लिए बहुद्देशीय एवं सुगम्य है।