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Saturday, July 1, 2023

National Postal Workers Day (1 July) : वैश्विक स्तर पर डाककर्मियों की भूमिका में हो रहे तमाम परिवर्तन - पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव

विश्व भर में डाक सेवाओं में आमूल चूल परिवर्तन आये हैं। फिजिकल मेल से डिजिटल मेल के इस दौर में डाक सेवाओं में विविधता के साथ कई नए आयाम जुड़े हैं। डाककर्मी सरकारों और आमजन के बीच सेवाओं को प्रदान करने वाले एक अहम कड़ी के रूप में उभरे हैं। ऐसे में 1 जुलाई को पूरी दुनिया में  ‘नेशनल पोस्टल वर्कर्स डे’ के दिन डाककर्मियों का आभार व्यक्त करने का प्रचलन उभरा है। वाराणसी परिक्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि ‘नेशनल पोस्टल वर्कर डे’ की अवधारणा अमेरिका से आई, जहाँ वाशिंगटन राज्य के सीऐटल शहर में वर्ष 1997 में कर्मचारियों के सम्मान में इस विशेष दिवस की शुरुआत की गई। धीरे-धीरे इसे भारत सहित अन्य देशों में भी मनाया जाने लगा। यह दिन दुनिया भर में डाककर्मियों द्वारा की जाने वाली सेवा के सम्मान में मनाया जाता है।

वाराणसी परिक्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि डाककर्मियों की भूमिका में तमाम परिवर्तन आए हैं। ‘डाकिया डाक लाया’ के साथ  ‘डाकिया बैंक लाया’ भी अब उतना ही महत्वपूर्ण है। पत्रों व पार्सल के साथ-साथ आधुनिक दौर में लोगों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण चीजें पोस्टमैन ही घर-घर वितरित करता है। आधार कार्ड, पासपोर्ट, पैन कार्ड, वोटर आईडी, ड्राइविंग लाइसेंस, बैंक चेक बुक, एटीएम जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों के साथ-साथ विभिन्न मंदिरों के प्रसाद, दवाईयां और रक्षाबंधन पर्व पर राखियाँ भी डाकियों द्वारा ही पहुँचायी जा रही हैं। वाराणसी परिक्षेत्र में दो हजार से ज्यादा पोस्टमैन लोगों के दरवाजे पर हर रोज दस्तक लगाते हैं, जिनके द्वारा औसतन प्रति माह 6 लाख स्पीड पोस्ट व पंजीकृत पत्र और 13 लाख साधारण पत्रों का वितरण किया जा रहा है। ई-कामर्स को बढ़ावा देने हेतु कैश ऑन डिलीवरी, लेटर बाक्स से नियमित डाक निकालने हेतु नन्यथा मोबाईल एप एवं डाकियों द्वारा एण्ड्रोयड बेस्ड स्मार्ट फोन आधारित डिलीवरी और वित्तीय सेवाएं प्रदान करना जैसे तमाम कदम डाक विभाग की अभिनव पहल हैं।

पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि डाक विभाग का सबसे मुखर चेहरा डाकिया है। डाकिया की पहचान चिट्ठी-पत्री और मनीऑर्डर बाँटने वाली रही है, पर अब डाकिए के हाथ में स्मार्ट फोन और बैग में डिजिटल डिवाइस भी है। इण्डिया पोस्ट पेमेंट्स  बैंक के माध्यम से आर्थिक और सामाजिक समावेशन के तहत पोस्टमैन चलते-फिरते एटीएम के रूप में नई भूमिका निभा रहे हैं और जन सुरक्षा योजनाओं से लेकर आधार, डीबीटी, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, ई-श्रम कार्ड, वाहन बीमा,डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट तक की सुविधा प्रदान कर रहे हैं। घर-घर जाकर आईपीपीबी के अंतर्गत डाकियों द्वारा घर बैठे 5 वर्ष तक के बच्चों का आधार बनाने, आधार में मोबाइल नंबर अपडेट करने के तहत प्रति माह 20,000 लोगों का आधार नामांकन/अद्यतनीकरण का कार्य किया जा रहा है, वहीं 18,000 लोगों को आधार इनेबल्ड पेमेंट सिस्टम के माध्यम से घर बैठे उनके विभिन्न बैंक खातों  से नगदी उपलब्ध करायी जा रही है। आज भी डाककर्मी जाड़ा, गर्मी, बरसात की परवाह किये बिना सुदूर क्षेत्रों तक डाक सेवाएँ प्रदान कर रहे हैं।






















Tuesday, March 15, 2022

डाक विभाग द्वारा आधार में मोबाइल नंबर जोड़ने/संशोधन के लिए 15 मार्च को विशेष अभियान -पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव

आधार कार्ड में मोबाइल नंबर जोड़ने या संशोधन कराने के लिए अब परेशान नहीं होना पड़ेगा। अब अपने इलाके के डाकिया के माध्यम से भी आधार कार्ड में मोबाइल नंबर जोड़ा या संशोधित कराया जा सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में इससे बहुत सहूलियत मिलेगी। वाराणसी परिक्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव के निर्देश पर 6 जिलों - वाराणसी, भदोही, चंदौली, गाजीपुर, जौनपुर व बलिया में 15 मार्च, 2022 को इसके लिए विशेष अभियान चलाया जायेगा।

पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि डाक विभाग द्वारा इण्डिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक के माध्यम से अब सी.ई.एल.सी (चाइल्ड एनरोलमेंट लाइट क्लाइंट) सेवा के तहत अब डाकिया के माध्यम से आधार में मोबाइल नंबर अपडेशन का कार्य मात्र 50 रूपये (कर सहित) का निर्धारित शुल्क देकर आसानी से कराया जा सकता है। इसके अलावा मोबाइल एप के माध्यम से 5 साल से कम उम्र के बच्चों का नया आधार भी बनवाया जा सकता है। बच्चों का आधार नामांकन केवल संबंध प्रमाण पत्र (पीओआर) की सहायता से किया जा सकता है। इस हेतु माता-पिता अपने आधार या अन्य किसी मान्य पहचान पत्र की सहायता से अपने बच्चे का आधार पंजीकरण निःशुल्क करा सकते हैं।

पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि सी.ई.एल.सी के माध्यम से वाराणसी परिक्षेत्र में अब तक पोस्टमैनों द्वारा 3 लाख 32 हज़ार से ज्यादा लोगों के आधार में मोबाईल नंबर का संशोधन किया जा चुका है। इस सुविधा से  ग्रामीणों को अब आधार में मोबाइल नंबर जुडवाने या संशोधित करवाने हेतु शहर आने की आवश्यकता नहीं है।

प्रवर डाकघर अधीक्षक वाराणसी (पूर्वी) मंडल श्री राजन राव एवं डाक अधीक्षक (पश्चिमी) मंडल श्री संजय वर्मा ने बताया कि वाराणसी जनपद के विभिन्न शाखा डाकघरों के 161 डाकियों के माध्यम से आधार में मोबाइल नंबर में संशोधन की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।





Thursday, January 27, 2022

गणतंत्र दिवस परेड में डाक विभाग की झांकी में भारतीय डाक के आधुनिक रूप और महिला सशक्तीकरण को किया गया प्रदर्शित

डाक विभाग आम जन से जुड़ा हुआ है, ऐसे में गणतंत्र में इसकी भूमिका और भी अहम हो जाती है। 73वें गणतंत्र दिवस परेड में राजपथ पर विभिन्न राज्यों और सरकारी मंत्रालयों/विभागों की निकली झाँकियों (Tableau) में भारतीय डाक विभाग की झाँकी भी रही। इस झांकी का विषय “भारतीय डाक : संकल्‍प @75 - महिला सशक्‍तीकरण” रखा गया है। डाक विभाग की झांकी में भारतीय डाक की मजबूत पहुंच और आधुनिक रूप को प्रदर्शित किया। साथ ही इसमें लैंगिक समानता की दिशा में उठाए गए कदमों को प्रदर्शित करने के लिए महिला डाकघरों को भी दर्शाया गया।

डाक विभाग को गणतंत्र दिवस परेड में अपनी झांकी निकालने का अवसर 17 साल बाद प्राप्त हुआ है। इससे पहले डाक विभाग के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर 2005 में डाक विभाग ने अपनी झांकी निकाली थी। तब से अब तक डाक विभाग का चेहरा-मोहरा काफी बदल चुका है। न सिर्फ डाक विभाग ने अपनी सेवाओं में काफी विस्तार किया है, बल्कि कोरोना काल में तो ग्रामीण डाक सेवकों के जरिए ‘डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर’ योजनाओं के पैसे ग्रामीणों तक पहुंचाकर संकटकाल में उनका सबसे अच्छा साथी भी सिद्ध हुआ है।

आज जब देश अपनी स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है, तो इस कड़ी में भारतीय डाक गणतंत्र दिवस की अपनी झांकी के माध्यम से महिला सशक्‍तीकरण व तकनीक के प्रति अपनी प्रतिबद्धता प्रदर्शित करता नजर आया।  इस झांकी के जरिए केवल महिला कार्मिकों द्वारा कंप्यूटर व डिजिटल सुविधाओं से संचालित डाकघरों के माध्यम से यह दिखाने की कोशिश की गई है कि विभाग किस प्रकार महिला सशक्तीकरण पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। महिला डाकघरों में महिला कर्मचारियों को पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर सेवा प्रदान करते हुए दिखाया गया। इसी के प्रतीक स्वरूप झांकी के अग्रभाग में एक महिला पोस्टमैन की प्रतिमा थी, जिसके एक हाथ में डिजिटल डिवाइस तो दूसरे हाथ में पोस्टमैन की पहचान उसका थैला था। यह प्रौद्योगिकी के साथ परंपरा के मेल को दर्शाता है। साथ ही, रैंप के माध्‍यम से दर्शाए गए ‘दिव्‍यांगजनों के लिए अनुकूल डाकघर’ भी विभाग की सामाजिक प्रतिबद्धता को दोहराते दिखाई दिए।

महिला पोस्टमैन के साथ ही हरकारे की उभरी हुई आकृति भी दर्शाई गई, जो पिछले कई दशकों के दौरान भारतीय डाक में हुए कायाकल्‍प का प्रतीक है। इन दोनों चित्रों को सबके जाने-पहचाने लेटर बाक्‍स के आगे दर्शाया गया। झांकी के मध्य  भाग में श्रीनगर का तैरता (फ्लोटिंग) डाकघर दिखाया गया। इसके माध्‍यम से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के महत्‍वाकांक्षी कार्यक्रम ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान के अंतर्गत शुरू की गई ‘सुकन्‍या समृद्धि योजना’ पर बल दिया गया । गौरतलब है कि इंडिया पोस्‍ट पेमेंट्स बैंक के मामले में लगभग 50 प्रतिशत खाताधारक (2.24 करोड़) महिलाएं हैं, और ऐसे 98 प्रतिशत खाते उनके द्वार पर जाकर ही खोले गए हैं। झांकी के पिछले भाग में देश के सबसे पुराने जीपीओ, कोलकाता जीपीओ को दर्शाया गया, जोकि भारतीय डाक के गौरवशाली सफर का गवाह है, साथ ही देश की एक सुप्रसिद्ध इमारत भी है।

India Post tableau in Republic Day parade - India Post : 75 Years @ Resolve-Women Empowerment

The Department of Post's tableau at the Republic Day parade on 26th January, 2022 displayed the robust outreach and the modern face of India Post as well as all-women post offices to showcase the steps taken towards gender equality.

In its tableau, the department also displayed 'Divyang' friendly post offices. The front of the tableau featured a 'Post Woman', equipped with a digital device and a postman's bag, showcasing a perfect blend of technology and tradition with the the image of a 'Harkara' (foot Dak messenger) as side relief. The two images were set in the foreground of the ubiquitous red-letter box.

The middle part of the tableau featured the 'Floating Post Office' of Srinagar with girl child highlighting the Sukanya Samriddhi Yojna, a scheme under the "Beti Bachao-Beti Padhao" campaign of the Narendra Modi government.

The all-women post office showcased opportunities provided to women employees to serve shoulder-to-shoulder with men.

At the rear of the tableau was displayed Kolkata GPO, the oldest general post office at one of the iconic heritage buildings of India and a proud witness to the journey of India Post.

Adorning the tableau, there was a collage of stamps digitally printed on 'khadi', pertaining to the country's freedom struggle.

The Department of Post stands as a model employer of women, besides rendering financial inclusion services to women. Almost 50 per cent of account holders of the India Post payments bank, as well as the post office savings bank, are women.


Deccan Herald : Department of Post tableau showcases modern face of India Post, women empowerment

Republic Day Parade 2022: महिला सशक्तीकरण की झांकी प्रस्तुत करेगा भारतीय डाक विभाग

आजादी के पहले से गांव-गांव तक अपनी सेवाएं देता आ रहा भारतीय डाक विभाग इस बार गणतंत्र दिवस पर महिला सशक्तीकरण की झांकी प्रस्तुत करने जा रहा है। 26 जनवरी, 2022  को राजपथ पर निकलने वाली डाक विभाग की झांकी में एक युवा महिला पोस्टमैन हाथ में डिजिटल डिवाइस लिए हुए खड़ी दिखाई देगी। भारतीय डाक विभाग की ओर से इस झांकी के प्रोजेक्ट कोआर्डिनेटर की जिम्मेदारी निभा रहीं मुंबई क्षेत्र की पोस्टमास्टर जनरल (पीएमजी) स्वाती पांडे बताती हैं कि डाक विभाग को गणतंत्र दिवस परेड में अपनी झांकी निकालने का अवसर 17 साल बाद प्राप्त हुआ है। इससे पहले डाक विभाग के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर 2005 में डाक विभाग ने अपनी झांकी निकाली थी। तब से अब तक डाक विभाग का चेहरा-मोहरा काफी बदल चुका है। न सिर्फ डाक विभाग ने अपनी सेवाओं में काफी विस्तार किया है, बल्कि कोरोना काल में तो ग्रामीण डाक सेवकों के जरिए ‘डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर’ योजनाओं के पैसे ग्रामीणों तक पहुंचाकर संकटकाल में उनका सबसे अच्छा साथी भी सिद्ध हुआ है।


ये है झांकी का विषय

स्वाती पांडे बताती हैं कि आज जब देश अपनी स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है, तो इस कड़ी में भारतीय डाक गणतंत्र दिवस की अपनी झांकी के माध्यम से महिला सशक्‍तीकरण व तकनीक के प्रति अपनी प्रतिबद्धता प्रदर्शित करने जा रहा है। इस झांकी के जरिए केवल महिला कार्मिकों द्वारा कंप्यूटर व डिजिटल सुविधाओं से संचालित डाकघरों के माध्यम से यह दिखाने की कोशिश की गई है कि विभाग किस प्रकार महिला सशक्तीकरण पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। इस झांकी का विषय भी “भारतीय डाक : संकल्‍प@75 - महिला सशक्‍तीकरण” रखा गया है। इसी के प्रतीक स्वरूप झांकी के अग्रभाग में एक महिला पोस्टमैन की प्रतिमा होगी, जिसके एक हाथ में डिजिटल डिवाइस तो दूसरे हाथ में पोस्टमैन की पहचान उसका थैला होगा। यह प्रौद्योगिकी के साथ परंपरा के मेल को दर्शाएगा। साथ ही, रैंप के माध्‍यम से दर्शाए गए ‘दिव्‍यांगजनों के लिए अनुकूल डाकघर’ भी विभाग की सामाजिक प्रतिबद्धता को दोहराते दिखाई देंगे।

झांकी में दिखेगा यहां का डाकघर

महिला पोस्टमैन के साथ ही हरकारे की उभरी हुई आकृति दर्शाई गई है, जो पिछले कई दशकों के दौरान भारतीय डाक में हुए कायाकल्‍प का प्रतीक है। इन दोनों चित्रों को सबके जाने-पहचाने लेटर बाक्‍स के आगे दर्शाया गया है। झांकी के ट्रेलर भाग में श्रीनगर का तैरता (फ्लोटिंग) डाकघर दिखाया गया है। इसके माध्‍यम से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के महत्‍वाकांक्षी कार्यक्रम ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान के अंतर्गत शुरू की गई ‘सुकन्‍या समृद्धि योजना’ पर बल दिया गया है। इंडिया पोस्‍ट पेमेंट्स बैंक के मामले में लगभग 50 प्रतिशत खाताधारक (2.24 करोड़) महिलाएं हैं, और ऐसे 98 प्रतिशत खाते उनके द्वार पर जाकर ही खोले गए हैं। झांकी के पिछले भाग में देश के सबसे पुराने जीपीओ, कोलकाता जीपीओ को दर्शाया गया है, जोकि भारतीय डाक के गौरवशाली सफर का गवाह है, साथ ही देश की एक सुप्रसिद्ध इमारत भी है।

साभार : जागरण  -Republic Day Parade 2022: महिला सशक्तीकरण की झांकी प्रस्तुत करेगा भारतीय डाक विभाग

Thursday, January 6, 2022

Aadhar registration of children and updation of mobile number at doorstep through Postman

Department of Posts has expanded many services for the convenience of the public. The facility of Aadhaar enrollment and updation is available in Post Offices, which is of great benefit to the public. In continuation of this, Department of Posts has now started the CELC (Child Enrollment Light Client) service through India Post Payments Bank, in which Aadhaar registration for children below 5 years of age can be done at doorstep through Postman. People will also be able to update mobile number in their Aadhaar on their door step through Postman availing this service, said Mr. Krishna Kumar Yadav, Postmaster General, Varanasi Region.


Postmaster General Mr. Krishna Kumar Yadav said that under this, Aadhaar enrollment can be done with the help of Proof of Relationship (POR) for making new Aadhaar for children below 5 years of age through mobile app. For this, parents can get their child's Aadhar enrollment done with the help of their Aadhar or any other valid identity card. Postman will complete the registration process by clicking the photograph of the child through the CELC app installed in the IPPB mobile handset. It will be free of cost. After registration, postman will provide the Enrollment ID, through which the Aadhaar card of the child can also be downloaded by visiting the UIDAI website once Aadhaar is generated.

 Postmaster General Mr. Krishna Kumar Yadav further added that now there is no need to go anywhere for updation of mobile number in Aadhaar. It can be done easily at doorstep by paying the prescribed fee of only ₹ 50 (including tax) under CELC service through postman. This will also lead to prevention from corona infection and overcrowding, said Mr. Yadav.


Wednesday, January 5, 2022

डाक विभाग की पहल : अब घर बैठे डाकिया बनाएगा बच्चों का आधार कार्ड और करेगा मोबाइल नंबर अपडेट

डाक विभाग ने आमजन की सुविधाओं के लिए तमाम सेवाओं का विस्तार किया है। डाकघरों में नया आधार बनाने और आधार में अपडेशन की सुविधा उपलब्ध है, जिसका आमजन को काफी फायदा होता है। इसी क्रम में डाक विभाग ने इण्डिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक के माध्यम से अब सी.ई.एल.सी (चाइल्ड एनरोलमेंट लाइट क्लाइंट) सेवा आरम्भ की है, जिसमें घर बैठे डाकिया के माध्यम से 5 साल से कम उम्र के बच्चों का नया आधार बन सकेगा और लोग अपने आधार में मोबाइल नंबर अपडेशन भी करा सकेंगे। उक्त जानकारी वाराणसी परिक्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने दी।

पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि इसके अंतर्गत मोबाइल एप के माध्यम से 5 साल से कम उम्र के बच्चों का नया आधार बनवाने हेतु आधार नामांकन केवल संबंध प्रमाण पत्र (पीओआर) की सहायता से किया जा सकता है। इस हेतु माता-पिता अपने आधार या अन्य किसी मान्य पहचान पत्र की सहायता से अपने बच्चे का आधार पंजीकरण घर बैठे डाकिया के माध्यम से निःशुल्क करा सकते हैं। डाकिया वहीं पर आईपीपीबी मोबाइल हैंडसेट में इंस्टॉल सी.ई.एल.सी एप के माध्यम से बच्चे की फोटो लेकर पंजीकरण की प्रक्रिया पूर्ण करेगा। पंजीकरण पश्चात डाकिया एनरोलमेंट आई.डी (EID) उपलब्ध कराएगा, जिसके माध्यम से आधार बन जाने पर यू.आई.डी.ए.आई की वेबसाइट पर जाकर बच्चे का आधार कार्ड डाउनलोड भी किया जा सकेगा।

पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि अब आधार में मोबाइल नंबर अपडेशन के लिए कहीं भी जाने की जरुरत नहीं है, बल्कि घर बैठे ही डाकिया के माध्यम से सीईएलसी सेवा के तहत मात्र 50 रूपये (कर सहित) का निर्धारित शुल्क देकर आधार में मोबाइल नंबर अपडेशन आसानी से कराया जा सकता है। इससे कोरोना संक्रमण और भीड़भाड़ से भी बचाव होगा।







Wednesday, November 10, 2021

मोबाइलों के दौर के आशिक़ को क्या पता, रखते थे कैसे ख़त में कलेजा निकाल कर

'डाकखाना' - यह केवल एक शब्द नहीं, एक पूरी संस्कृति है। संचार की सबसे प्रारंभिक अवस्था से मनुष्य का साथ देने वाली चिट्ठी; संस्कृति में इतनी रची-बसी रही कि उस पर गीत लिखे गये। चिट्ठी, खत, पाती, नामा, लिफ़ाफ़ा, मजमून, नामाबर, डाकिया, तार, पोस्टकार्ड, डाकबाबू, लेटर बॉक्स, डाक टिकट और न जाने कितने ही शब्दों से सुसज्जित यह डाक-व्यवस्था शायरी और कविताओं के साथ साथ कहानी और उपन्यासों का भी महत्वपूर्ण अंग रही है।

'पीली चिट्ठी' मांगलिक अवसर का प्रतीक होती थी और कोना फटा हुआ पोस्टकार्ड अशुभ की सूचना लेकर आता था। चिट्ठी में लिखा गया एक-एक शब्द महत्वपूर्ण होता था। व्यक्तिगत चिट्ठियों में हाशिये पर की गई चित्रकारी देखकर पानेवाले को लिखनेवाले की मनोदशा का दर्शन हो जाता था।

चिट्ठी के प्रारम्भ में 'आपका पत्र मिला'; 'अत्रं कुशलं तत्रप्यस्तु'; हम सब यहाँ कुशलतापूर्वक हैं, आशा है आप सब भी कुशल होंगे' जैसे वाक्यांश औपचारिक होने के बावजूद रसपूर्ण लगते थे। इसी प्रकार 'बड़ों को चरण स्पर्श और छोटों को ढेर सारा प्यार' जैसा वाक्य चिट्ठी से पूरे परिवार को जोड़ देता था।

लेटर बॉक्स के नीचे सुरंग की कल्पना और रात में चिट्ठी पहुंचाने वाली परियों की कल्पना करने वाला बचपन भी डाक-संस्कृति के साथ ही कहीं गुम हो गया। डाकिये की प्रतीक्षा करने वाली दोपहरी भी अब समय के चक्र से विदा हो गई है।

साथ ही नदारद हो गये हैं वे गीत, जो डाक संस्कृति के इर्द-गिर्द रचे जाते थे। 'मास्टर जी की आई चिट्ठी'; 'हमने सनम को ख़त लिखा'; 'जाते हो परदेस पिया, जाते ही ख़त लिखना'; 'कबूतर जा-जा'; 'चिट्ठी आई है'; 'चिट्ठी न कोई संदेश'; 'ख़त लिख दे साँवरिया के नाम बाबू'; 'फूल तुम्हें भेजा है ख़त में'; 'डाकिया डाक लाया'; 'डाक बाबू आया'; 'संदेसे आते हैं; 'लिखे जो ख़त तुझे'; 'फूलों के रंग से दिल की क़लम से तुझको लिखी रोज़ पाती'; 'सुन ले बाबू ये पैग़ाम, मेरी चिट्ठी तेरे नाम'; 'तेरे खुशबू में बसे ख़त मैं जलाता कैसे' और 'मैंने ख़त महबूब के नाम लिखा' जैसे दर्जनों गीत हिंदी सिनेमा की तवारीख़ में हीरों की तरह जड़े हुए हैं।

कवि-सम्मेलनों में भी चिट्ठी का ख़ूब चलन रहा। मुझे अच्छी तरह याद है। हापुड़ के एक कवि-सम्मेलन में श्वेतकेशा ज्ञानवती सक्सेना जी ने एक गीत पढ़ा- 'ऐसे में क्या चिट्ठी लिखूँ, जब कोना फटने के दिन हैं!' गीत उनकी वय पर इतना एकरूप प्रतीत हुआ कि उसकी संवेदना ने भीतर तक सिहरन उत्पन्न कर दी थी। किशन सरोज जी का गीत 'कर दिये लो आज गंगा में प्रवाहित सब तुम्हारे पत्र, सारे चित्र तुम निश्चिंत रहना' श्रोताओं के मन और नयन दोनों को तर कर देता था। माया गोविंद जी का 'डाकिये ने द्वार खटखटाया, अनबाँचा पत्र लौटाया' गीत लोकप्रियता के कीर्तिमान खड़े कर गया। आज भी डॉ विष्णु सक्सेना जब अपने मुक्तक की चौथी पंक्ति पढ़ते हुए कहते हैं कि, 'उसने गुस्से में मेरा ख़त चबा लिया होगा' तो चिट्ठियों के सहारे जवान हुई हज़ारों प्रेम कहानियां जीवंत हो उठती हैं।

उर्दू शायरी भी इस विषय से भरी पड़ी है। 'नामाबर तू ही बता तूने तो देखे होंगे/कैसे होते हैं ख़त, जिनका जवाब आता है' सरीख़े सैंकड़ों अशआर लोगों की ज़ुबान पर चढ़े। 

दाग़ देहलवी साहब का मशहूर शेर 'तुम्हारे ख़त में नया इक सलाम किसका था/मैं था रक़ीब तो आख़िर वो नाम किसका था' किसी उपन्यास का कथानक बन जाने की क्षमता रखता है। 'लिफ़ाफ़ा देख के मजमून भाँप लेते हैं' जैसे मिसरे मुहावरे बनकर मक़बूल हो गये। हाल ही में वाशु पाण्डेय ने भी चिट्ठियों में बन्द मुहब्बत की इबारत को बयान करते हुए कहा कि, 'क़ासिद चिट्ठी तैश में आकर लिखी थी/ ले जाओ, पर देना मत शहज़ादी को'। 

तकनीक बदली तो यह सब कुछ फ़ना हो गया। मोबाइल पर एस.एम.एस या कंप्यूटर पर ईमेल भेजने वाली पीढ़ी को चिट्ठियों की उस जादुई दुनिया का अनुमान तक नहीं है। उदयप्रताप सिंह जी का ये शेर पढ़ते हुए आज भी मन तीन दशक पुरानी यादों में खो जाता है, 'मोबाइलों के दौर के आशिक़ को क्या पता, रखते थे कैसे ख़त में कलेजा निकाल कर'।

ब्याहता बिटिया की चिट्ठी मिलने पर माँ का खिला हुए चेहरा; हॉस्टल में रह रहे बेटे को चिट्ठी लिखती माँ की भीगी हुई पलकें; चिट्ठी में लिखे गये शब्दों के साथ अनलिखा दर्द पढ़ लेने का हुनर; हाशिये पर बनी चित्रकारी से मनोदशा पहचान लेने की कला और राखी के त्यौहार पर बहन की चिट्ठी खोलते भाइयों का कौतूहल अब देखने को नहीं मिलता।

'पिता के पत्र पुत्री के नाम' जैसी किताबें चिट्ठियों की अहमियत का चित्र प्रस्तुत करती हैं।

लेकिन आज 'ख़ून से लिख रहा हूँ स्याही न समझना' सरीख़े मिसरे दूर खड़े होकर धूल खा रहे लेटर बॉक्स देखकर बिलख पड़ते होंगे। निदा साहब की दो पंक्तियाँ रह-रहकर उस क़िरदार की याद दिलाती हैं जिसे हम डाकिया कहते थे - 'सीधा-सादा डाकिया जादू करे महान/एक ही थैले में भरे आँसू और मुस्कान'। 

टीवी और रेडियो पर चिट्ठियां भेजने का रिवाज़ अब इतिहास बन चुका है। संपादक के नाम पत्र और प्रकाशनार्थ रचना भेजने की क़वायद हम भूल चुके हैं। न ही संपादकों को अब 'खेद सहित' रचना लौटाने का स्वाद पता है। 

रमेश शर्मा जी के गीत का मुखड़ा एक पूरी परम्परा को श्रद्धांजलि देता हुआ जान पड़ता है - 'ओ दूरभाष की सुविधाओं, मुझे वो चिट्ठी लौटा दो!'

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(डाकखाना और चिट्ठियों पर लिखा यह भावपूर्ण लेख किसी ने मुझसे शेयर किया...लेखक का नाम नहीं पता। इसके लेखक को साधुवाद के साथ इसे यहाँ साभार शेयर कर रहा हूँ)

Saturday, October 16, 2021

सोशल मीडिया के दौर में भी पत्रों की अहमियत बरकरार -पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव

डाक विभाग नवीन सेवाओं और नई टेक्नोलॉजी के साथ अपनी सेवाओं के क्षितिज का निरंतर विस्तार करते हुए नित्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है। मोबाइल, ईमेल और सोशल मीडिया के इस दौर में भी पत्रों की अपनी अहमियत है। आज भी तमाम महत्वपूर्ण दस्तावेज - सरकारी व कोर्ट संबंधी पत्रों के साथ आधार कार्ड, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर आई कार्ड, पैन कार्ड, विभिन्न बैंकों की चेक बुक व एटीएम कार्ड डाकघरों से ही भेजे जाते हैं। 'राष्ट्रीय डाक सप्ताह' के अंतर्गत 'मेल दिवस' पर आयोजित 'ग्राहक सम्मेलन' को संबोधित करते हुए वाराणसी परिक्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने उक्त उद्गार व्यक्त किये। 16 अक्टूबर, 2021 को आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान डाक विभाग को स्पीड पोस्ट सेवा में सर्वाधिक बिजनेस देने हेतु भारतीय जीवन बीमा निगम, मंडलीय कार्यालय, भेलूपुर, फर्स्ट फॉरेन सर्विस और क्षेत्रीय कर्मचारी भविष्य निधि कार्यालय, पहड़िया को पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने सम्मानित भी किया।

पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव  ने कहा कि डाक विभाग विभिन्न व्यवसाय समूहों के हिसाब से विभिन्न प्रकार की योजनाएं संचालित कर रहा है। इसमें स्पीड पोस्ट, बिजनेस पार्सल, बिजनेस पोस्ट, मीडिया पोस्ट, बिल मेल सर्विस, रिटेल पोस्ट, लॉजिस्टिक्स पोस्ट, डायरेक्ट पोस्ट, ई-पोस्ट, ई-पेमेंट, इत्यादि  प्रमुख हैं। वाराणसी में कैंट प्रधान डाकघर परिसर में इंटरनेशनल बिजनेस सेंटर की स्थापना के बाद विदेशों में डाक भेजने में भी काफी सहूलियत हुई है। 


श्री यादव ने बताया कि, डाक विभाग ने तमाम कस्टमर फ्रेंडली सेवाएं आरंभ करके ग्राहकों  को अपनी तरफ आकर्षित किया है। श्री काशी विश्वनाथ सहित तमाम प्रसिद्ध मंदिरों के प्रसाद और पवित्र गंगा जल स्पीड पोस्ट से लोगों के पास पहुँच रहे हैं। पार्सल वितरण हेतु नोडल डिलीवरी सेंटर तो ई-कॉमर्स उत्पादों हेतु कैश ऑन डिलीवरी की सुविधा दी जा रही है। लेटर बॉक्स से नियमित निकासी हेतु 'नन्यथा' एप और डाक वितरण हेतु पोस्टमैन मोबाइल एप के माध्यम से डाकिया को हाईटेक बनाया गया है। आज डाकिया सिर्फ पत्र ही नहीं लाता, वह चलता-फिरता बैंक बनकर वित्तीय समावेशन में भी अहम भूमिका निभा रहा है।

इस अवसर पर वाराणसी पूर्वी मंडल के प्रवर अधीक्षक डाकघर राजन, डाक अधीक्षक श्री संजय वर्मा, सहायक निदेशक राम मिलन, सीनियर पोस्टमास्टर चंद्रशेखर सिंह  बरुआ, इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक मैनेजर मुक्ता, सहायक अधीक्षक अजय कुमार, आरके चौहान, निरीक्षक श्रीकांत पाल, वीएन द्विवेदी, इन्द्रजीत पाल, शशिकांत कन्नौजिया सहित तमाम अधिकारी और विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हुए।













डाकघरों में लोगों की सुविधा हेतु तमाम कस्टमर फ्रेंडली सेवाएं - पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव

सोशल मीडिया के दौर में भी पत्रों की अहमियत बरकरार -पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव

राष्ट्रीय डाक सप्ताह में मेल दिवस पर उत्कृष्ट ग्राहकों का हुआ सम्मान, पोस्टमास्टर जनरल केके यादव ने किया सम्मानित