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Tuesday, November 21, 2017

अब डिजिटल होगी आपकी लोकेशन, ई-एड्रेस योजना के लिए सरकार ने डाक विभाग को सौंपा जिम्मा

अब आधार के बाद जल्द ही आवासीय या प्रफेशनल अड्रेस डिजिटल होने जा रहा है। केंद्र सरकार आधार की तरह ही लोगों के अड्रेस को भी डिजिटल करना चाह रही है। डाक विभाग को इस पायलट प्रॉजेक्ट की जिम्मेदारी दी गई है। इस प्रॉजेक्ट के तहत 3 पिन कोड लोकेशन वाली प्रॉपर्टी के लिए एक 6 अक्षरों वाला डिजिटल अड्रेस दिया जाएगा।

विभिन्न अड्रेस के लिए ई-लोकेशन के आइडिया का मकसद इसे प्रॉपर्टी संबंधी विभिन्न प्रकार की जानकारियों से जोड़ना है। इससे प्रॉपर्टी टाइटल और मालिकाना हक, प्रॉपर्टी टैक्स रिकॉर्ड, बिजली, पानी और गैस जैसी चीजों के उपभोग की जानकारी मिल सकेगी। अगर इस प्रॉजेक्ट को सफलता मिली तो सरकार इसे राष्ट्रीय स्तर पर लागू कर सकती है। 

नोएडा और दिल्ली में पायलट प्रोजेक्ट की होगी शुरुआत 

फ़िलहाल, ई-लोकेशन (eLoc) पायलट प्रॉजेक्ट की मंजूरी दिल्ली और नोएडा को दो पोस्टल पिन कोड के लिए दी गई है। इसके बाद इसका राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार किया जाएगा। डिजिटल पहचान के ई-अड्रेस का इस्तेमाल मौजूदा पोस्टल अड्रेस के लिए भी किया जा सकेगा। डाक विभाग ने निजी मैपिंग कंपनी 'मैपमाईइंडिया' को इस पायलट प्रॉजेक्ट की जिम्मेदारी दी है।  डाक विभाग द्वारा जारी परिपत्र के अनुसार इस योजना में जुटाए गए साक्ष्यों का इस्तेमाल डाक विभाग डिजिटल अड्रेस के लिए कर सकता है। यह राष्ट्रीय स्तर के लिए प्रॉजेक्ट के लिए भी सही होगा। सभी तरह के डेटा डाक  विभाग के पास रहेंगे और निजी कंपनी इसका व्यवसायिक इस्तेमाल नहीं कर पाएगी।
कॉम्प्लेक्स अड्रेसस की पहचान करना होगा आसान

मैपमाईइंडिया के एमडी राकेश वर्मा ने कहा कि ई-लिंकेज के जरिए कॉम्प्लेक्स अड्रेसस की पहचान करना आसान होगा और उसे अन्य सेवाओं से भी जोड़ा जा सकता है। मौजूदा समय में देश में कई हिस्सों के अड्रेस का पता करना मुश्किल होता है। इस परियोजना का उदेश्य डिजिटल अड्रेसिंग सिस्टम के प्रभाव को दर्शाना भी है। डाक विभाग इस प्रक्रिया में डेटा शेयर कर मदद करेगा। 

इसरो और भुवन की सहायता से होगी मैपिंग 

मैपमाईइंडिया ने एक बयान जारी कर दावा किया है कि उसने डिजिटल अड्रेस के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी और डेटा जुटाना शुरू हो चुका है। कंपनी इसरो और नैशनल सैटलाइट इमैजरी सर्विस 'भुवन' के सहयोग से प्रभावकारी मैपिंग करेगी।

Now Government of India start mapping of E-address digitally, Postal Department has been given responsbility

Government of India to start e-address scheme for e-location of address

Monday, October 17, 2016

To take weather reports to farmers, Meteorological Department turns to Postmen

The India Meteorological Department (IMD) has a new job for postmen. Looking to collect and deliver weather information to remote villages, the IMD’s Agricultural Meteorology Division, or AgriMet, wants them to step in and help.

“The postman will be given a template form when he goes to a village. It will have basic questions, like cropping pattern of the village, land usage, etc. He has to fill the form and get phone numbers of some farmers,” Dr Nabansu Chattopadhyay, deputy director general at AgriMet, said.

The postal department will feed this information to their servers, and IMD officials will then access it to churn out circle-level, custom-made weather and crop forecast.

Chattopadhyay said the decision to rope in the Postal Department was taken during a brainstorming session last month on how to disseminate AgriMet advisories to farmers.

“Timely and precise weather-based advisories are invaluable for farmers to plan their crop cycle. Through the Kisan portal and other services, we have managed to reach 19 million farmers. But we aim to reach all 90 million farmers in India with custom-made weather and crop advisories,” he said.

Chattopadhyay said that in places where even mobile network does not exist, a postman could make all the difference.
The IMD also plans to mount LED screens at village post offices, where weather and crop information would be shown through the day. “All the screens will be connected to the remote server, and information collected by postmen will be used to churn out the advisories,” Chattopadhyay said.

At the moment, five villages — in Gujarat, Uttar Pradesh, Uttarkhand, Punjab and Andhra Pradesh — have been selected for the trial run of the project, and a budget is being worked out.

According to Chattopadhyay, of the 1,54,239 post offices in India, 1,39,222 are in rural areas.

Referring to an economic impact analysis study by the National Council of Applied Economic Research, Chattopadhyay said that at least 25 per cent of the farmers who relied on AgriMet reported an increase in their net income. “The service has the potential of generating net economic benefit of up to Rs 3.3 lakh crore when such advisories are fully utilised by all 90 million farmers,” he said.

Apart from the postal department, AgriMet plans to use services such as farmer’s cooperatives and agricultural produce market committees to ensure their advisories reach all corners.

Wednesday, July 22, 2015

Postinfo brings Post Offices to mobile

Now, one will not have to visit a post office to enquire about the status of their postal dispatches or interest accrued on investments in financial schemes. For the benefit of customers, the postal department has launched mobile app 'Postinfo' that would provide all information available on mobile screen. The android based app is available free of cost. 

The app also allows a customer to save information for future reference and share it with others through bluetooth, messaging apps, WhatsApp and facebook. 


The tracking facility would help people trace the location of insured letter, value payable letter, registered packets, periodicals, insured parcel and electronic money order (e-MO) among others. 

The users can view the status of their articles by entering the article number and pressing the track button. It will instantly display details of their article on real time basis. 

Through the app, people would also be able to avail the facility of calculating interest accrued and total amount on their savings accounts. It would also provide information on various financial schemes launched by the department. 

"The app can also help customers calculate postage price to be paid for all types of articles based on the weight entered by the user through a 'postage calculator' feature of the app. The unique feature of the app is that in a single query it shows chargeable tariff for all postal items," 

Similarly premium calculator is another feature. The Postal department is offering various types of life insurance policies. The users can check the premium payable for all eligible types of postal or rural postal life insurance policies on the basis of the input entered. Similarly, interest can be calculated on all small saving schemes, including Central government's ambitious scheme, 'Sukanya Samriddhi yojana', recurring deposits, time deposit, monthly income scheme, senior citizen savings scheme, national savings certificate and kisan vikas patra among a number of others."

Tuesday, May 12, 2015

अब एटीएम मशीन से कर सकेंगे स्पीड पोस्ट

एटीएम मशान से पैसे तो सभी निकालते हैं. अब एटीएम मशीन की मदद से आप अपने पार्सल और लेटर भी भेज पाएंगे. जी हां, भारतीय डाक  का आंध्र प्रदेश सर्किल जल्द  ही यह सेवा शुरू करने पर विचार कर रहा है. इसके लिए डाक विभाग स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के साथ करार करेगा. अभी हाल ही में डाक विभाग ने  पोस्ट ऑफिस  सेविंग बैंक सेवा एटीएम के लिए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से करार किया है. इसके लिए एसबीआई ने आंध्र प्रदेश में 95 एटीएम उपलब्ध कराए हैं. इस बात की जानकारी आध्र प्रदेश सर्किल के चीफ पोस्ट मास्टर जनरल बी वी सुधाकर ने दी. 

इस नई योजना के तहत आपको स्पीड पोस्ट करने के लिए लिए डाक घर जाने के बजाए अपने नजदीकी एटीएम तक जाना होगा. एटीएम से स्पीड पोस्ट भेजने की प्रक्रिया में महज दो मिनट का समय लगेगा. व्यक्ति को एटीएम पर पहुंचकर उसमें स्पीड बुकिंग का विकल्प चुनना होगा। इसके बाद एटीएम मशीन से ही लगी एक मशीन से लेटर या पार्सल का भार मापा जाएगा।इसके तुंरत बाद एटीएम स्क्रीन पर जरूरी फीस दिखाई देगी, जिसका भुगतान क्रेडिट या डेबिट कार्ड से करना होगा। भुगतान के बाद बारकोड वाली दो रसीद मिल जाएंगी। इन दोनों रसीदों में से एक को पार्सल के साथ लगाना होता है और दूसरा रिकॉर्ड के लिए अपने पास रखना होगा। प्रक्रिया पूरी होने पर पार्सल को वहां इसके लिए बने बॉक्स में डालना होगा।  इसके बाद डाकिया वहां आएगा और भारतीय स्टेट बैंक के एटीएम से लेटर या पार्सल ले जाएगा और निर्धारित पते पर पहुंचा देगा। 

Monday, May 11, 2015

भारतीय डाक ऎप और ई-कॉमर्स केन्द्र शुरू

नई दिल्ली। संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने लोगों को स्मार्टफोन पर डाक विभाग की सेवाओं से जुड़ी जानकारियां उपलब्ध कराने के उद्देश्य से भारतीय डाक मोबाइल ऎप और ऑनलाइन कारोबार या खुदरा कारोबारियों के ग्राहकों तक त्वरित डिलिवरी के लिए देश के पहले ई-कॉमर्स केन्द्र का शुभारंभ किया। प्रसाद ने कहा कि देश में ई-कॉमर्स कारोबार तेजी से बढ़ रहा है और इस क्षेत्र में विश्वसनीयता के साथ समय पर आपूर्ति करने वालों की जरूरत है।

भारतीय डाक का 1.54 लाख केन्द्रों का विशाल नेटवर्क है और इसमें से 1.34 लाख डाकघर ग्रामीण क्षेत्रों में है जहां किसी की पहुंच नहीं है। उन्होंने कहा कि डाक विभाग ने ई-कॉमर्स आपूर्ति शुरू करने के साथ ही कैश ऑन डिलिवरी भी शुरू कर किया है, क्योंकि लोगों को माल मिलने पर भुगतान करने की आदत है। भारतीय डाक का कैश ऑन डिलिवरी अभी 500 करोड़ रूपए का है और आने वाले दिनों में इसमें भारी बढ़ोतरी की उम्मीद है। प्रसाद ने भारतीय डाक के कर्मचारियों से लोगों के बीच डाकघरों की विश्वसनीयता बढ़ाने, प्रौद्योगिकी का उपयोग बढ़ाने के साथ समय के हिसाब से बदलाव में भागीदार बनने का आ±वान किया और कहा कि इस प्रक्रिया में एक भी कर्मचारी की नौकरी नहीं जाएगी।

उन्होंने कहा कि समय के साथ बदलाव जरूरी है और ऎसा नहीं होने पर समय के साथ चलना संभव नहीं हो पाता है। प्रसाद ने कहा कि ई-कॉमर्स डिलिवरी में भारतीय डाक की सबसे बड़ी हिस्सेदारी होनी चाहिए और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित सभी डाकघरों के बाहर एक महीने के भीतर आकर्षक एवं बड़ा बोर्ड लग जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अब हर कोई मोबाइल फोन पर सभी तरह की जानकारी चाहता है और इसके मद्देनजर सेंटर फॉर एक्सलेंस इन पोस्टल टेक्नोलॉजी, मैसूर ने मोबाइल ऎप बनाया है जिसे एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम वाले स्मार्टफोन पर डाउनलोड किया जा सकता है। इसमें भारतीय डाक में बुक कराई गई वस्तुओं की ट्रैकिंग, डाकघरों के बारे में जानकारी, डाक टिकट का आंकलन, डाक जीवन बीमा के प्रीमियम की गणना के साथ ही डाक विभाग द्वारा संचालित लघु बचत योजनाओं पर ब्याज दरों की गणना करने की सुविधा उपलब्ध है।

इस मौके पर डाक विभाग की सचिव कावेरी बनर्जी ने कहा कि संफदरजंग एयरपोर्ट स्थित इस ई-कॉमर्स केन्द्र की क्षमता प्रतिदिन 30 हजार पैकेटों के हैंडलिंग की है और विमान एवं ट्रेन के माध्यम से 24 घंटे में पैकटों को गन्तव्य तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। उन्होंने बताया कि डाक विभाग अमेजन, पेटीएम, येपमी, स्नैपडील, फ्लिपकार्ट जैसे ऑनलाइन कारोबार करने वाली कंपनियों के पैकटों की आपूर्ति की जा रही है और उनकी शिकायतों के निवारण की ऑनलाइन व्यवस्था की गई है। इसके तहत बुक पैकटों को बीमा कवर भी दिया जाता है और ग्राहकों के पास से पैकटों को यहां लाने की भी व्यवस्था की गई है।

Friday, December 5, 2014

डाक विभाग का होगा कायाकल्प : बीमा, बैंक, ई-कॉमर्स के क्षेत्र में लाने की सिफारिश

डाकघरों का कायाकल्प करने के लिए बनी सुब्रमण्यम समिति ने तमाम ऐसे सुझाव दिए हैं, कि उसकी रिपोर्ट भी यदि उसी गंभीरता से सरकार लागू कर दे तो जल्द ही देश के डाकघरों का हुलिया ही बदल जाएगा।  भारतीय डाक में बदलाव करने पर सुझाव देने के लिए  पूर्व कैबिनेट सचिव टीएसआर सुब्रमण्यम की अध्यक्षता में गठित इस समिति ने तीन महीने के भीतर गुरुवार, 4 दिसंबर 2014  को अपनी रिपोर्ट दे दी। रिपोर्ट में डाक विभाग को तत्काल रूप से बैंकिंग, बीमा व ई-कॉमर्स क्षेत्र में लाने की सिफारिश की गई है। वहीं, आधार कार्ड व सरकारी पेंशन सेवा क्षेत्र में भी डाक विभाग की सेवा लेने की बात कही गई है।  साथ ही इंडिया पोस्ट में कॉरपोरेट सेक्टर के बीच बिजनेस टू बिजनेस सेवा देने के लिए एक नई शाखा बनाने का सुझाव दिया गया है। 

संचार व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने इन सुझावों के बारे में आश्वासन दिया कि सरकार इसे प्राथमिकता के तौर पर लेगी और जल्द से जल्द फैसला किया जाएगा।  उन्होंने यह भी कहा कि डाक विभाग की मदद से कॉमन सर्विस सेंटर के जरिए ई-डिलीवरी सेवा को अंजाम दिया जा सकता है। प्रसाद ने कहा कि ई-कॉमर्स के क्षेत्र में डाक विभाग बड़ी भूमिका निभा सकता है। डाक विभाग अपने नेटवर्क के माध्यम से मधुबनी पेंटिंग्स से लेकर तिरुपुर के टेक्सटाइल तक की बिक्री कर सकता है।

कमेटी की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय डाक विभाग के पास 1.55 लाख पोस्टमैन का नेटवर्क है जिसका इस्तेमाल बिजनेस कॉरस्पांडेंट के रूप किया जा सकता है। इनके माध्यम से ग्रामीण इलाके में स्वास्थ्य, फसल, दुर्घटना व अन्य प्रकार की बीमा सेवा को शुरू किया जा सकता है। डाक विभाग को इन सेवाओं से जोड़ने के लिए अलग-अलग सब्सिडियरी कंपनी बनाने की सिफारिश की गई है। समिति ने सुझाव दिया है कि भारतीय पोस्ट को पांच अलग-अलग सहयोगी इकाइयों (सब्सिडियरी) में बांट दिया जाना चाहिए। एक सब्सिडियरी डाक व्यवस्था का मौजूदा काम को जारी रखेगी। इसके अलावा बैंकिंग, बीमा व ई-कॉमर्स में अलग-अलग सहयोगी इकाइयां काम करेंगी। पांचवी सब्सिडियरी गांवों में शहरों जैसी सेवाओं का पहुंचाने व बिजनेस टू बिजनेस सेवाओं के लिए काम करेगी। समिति ने तीन सौ तरह की सेवाओं को चिन्हित किया है जो यह सब्सिडियरी कर सकती है। इनमें सिर्फ डाक वाली मुख्य सब्सिडियरी सब्सिडी वाले मॉडल पर काम करेगी, लेकिन अन्य सभी काम मुनाफे के आधार पर होगा।

सुब्रमण्यम ने बताया, 'हमारी सिफारिश के आधार पर अगर कदम उठाए जाते हैं तो भारतीय डाकघरों में कार्यरत किसी भी कर्मचारी की नौकरी नहीं जाएगी, बल्कि पांच लाख नई नौकरियां पैदा होंगी।' ग्रामीण जनता को बहुत ही तेजी से वित्तीय समावेश का फायदा पहुंचाया जा सकेगा। बैंकिंग से जुड़ी सब्सिडियरी का नाम पोस्ट बैंक ऑफ इंडिया (भारतीय डाक बैंक) रखा जा सकता है। यह बैंक हर तरह की बैंकिंग सेवा देगा। इसी तरह से बीमा क्षेत्र में गठित कंपनी जीवन बीमा, फसल बीमा व स्वास्थ्य बीमा की सुविधा दे सकती है। चूंकि ई-कॉमर्स भारत में तेजी से विकसित हो रहा है, इसलिए भारतीय डाक को इसका फायदा उठाने के लिए अभी से मुस्तैद हो जाना चाहिए।

देश भर में 1.50 लाख से ज्यादा डाकघर हैं, जो बैंक, बीमा व ई-कॉमर्स की शाखा के लिए रीढ़ की हड्डी का काम कर सकते हैं। फिलहाल भारतीय डाक के राजस्व में सालाना 48 फीसद की वृद्धि हो रही है। इसके उलट खर्चे में 78 फीसद का इजाफा हो रहा है। इसकी तमाम सेवाएं घाटे में चल रही हैं।

समिति के सुझाव--
1. बैंक, बीमा व ई-कॉमर्स के लिए तीन सब्सिडियरी बनाई जाएं
2. पोस्ट बैंक ऑफ इंडिया के नाम से शुरू करे बैंकिंग सेवा
3. कॉरपोरेट सेक्टर की मदद के लिए बने अलग इकाई
4. तीन सौ तरह की सेवाएं दे सकता है भारतीय डाक
5. गांवों में शहरों जैसी सेवा पहुंचाने में हो डाकघरों का इस्तेमाल

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देश भर में फैले डाकघरों के नेटवर्क का लाभ उठाने के लिए गठित कार्यबल ने बैंकिंग, बीमा और ई-कॉमर्स के क्षेत्र में डाकघर के सेवा-विस्तार के लिए संचार एवं सूचना प्रो़द्योगिकी  मंत्रालय के तहत डाक विभाग के मातहत होल्डिंग कंपनी के अंग के रुप में तीन सहायक कंपनियां गठित करने का सुझाव दिया है। पूर्व कैबिनेट सचिव श्री टीसीआर सुब्रमणियन के नेतृत्व में कार्यबल की रिपोर्ट आज नई दिल्ली में संचार एवं सूचना तकनीक मंत्री श्री रवि शंकर प्रसाद को सौंपी गई।

सभी पांच सहायक कंपनियों को रणनीतिक व्यापार इकाई – एस बी यू कहा जाएगा। दो अन्य सहायक कंपनियां व्यावसायिक आधार पर आम लोगों के लिए बिल संग्रहण और आवेदन पत्र, दस्तावेज़ एवं प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराने जैसेी ई-सेवाएं और थर्ड पार्टी उत्पाद के वितरण का काम करेंगी। अन्य सहायक कंपनी एजेंसी आधार पर आधार राशन कार्ड, विकास पत्र जैसी सरकारी सेवाएं वितरित करेंगी। रिपोर्ट में यह भी प्रस्तावित है कि प्रत्येक रणनीतिक व्यापार इकाई – एस बी यू का अपना स्‍वतंत्र बोर्ड होगा जो व्‍यावसायिक तौर पर लाभ के लिए काम करेगा। प्रत्‍येक एस बी यू समय-समय पर भागीदारी का आयोजन करेगा। इन कामों को कानूनी आधार देने के लिए एक नया डाक कानून लाना भी प्रस्‍तावित है।

रिपोर्ट स्‍वीकार करने के बाद संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि कार्यबल की सिफारिशों पर प्राथमिकता के आधार पर संरचनात्‍मक प्रतिक्रिया दी जायेगी। उन्‍होंने बताया कि देश में डाक विभाग की संभावनाओं को निखारने की जरूर महसूस होने पर उन्‍होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी से आग्रह किया था जिस पर उन्‍होंने कार्यबल गठित करने की अनुमति देकर तुरंत प्रतिक्रिया दी थी। उन्‍होंने उम्‍मीद जताई कि डाक विभाग के विशाल नेटवर्क का देश में ई-कामर्स बूम को देखते हुए पूरा दोहन किया जायेगा। उन्‍होंने आश्‍वस्‍त किया कि विभाग की पुनर्संरचना के दौरान किसी भी कर्मचारी को हटाया नहीं जायेगा। उन्‍होंने यह भी बताया कि पोस्‍ट कार्ड और अन्‍य डाक सेवाओं की कीमत में किसी भी तरह की बढ़ोतरी नहीं की जायेगी।
इससे पहले कार्यबल के अध्‍यक्ष श्री टीसीआर सुब्रमणियन ने कहा कि देश के 6 लाख से ज्‍यादा गांवों में बैंकिंग और वित्‍तीय सेवाएं उपलब्‍ध नहीं हैं, ऐसे में यह महसूस किया गया कि ग्रामीण गरीबों के वित्‍तीय समावेशन में योगदान के लिए व्‍यावसायिक तौर पर संगठित भारतीय पोस्‍ट बैंक प्रमुख भूमिका निभायेगा। उन्‍होंने यह भी उम्‍मीद जताई कि अगले 3 से 5 साल में 5 लाख से ज्‍यादा नई नौकरियों उपलब्‍ध की जा सकेंगी।

इस साल 21 अगस्‍त को गठित कार्यबल के सदस्‍य निम्‍नलिखित थे :-

1. श्री टीसीआर सुब्रमणियन, पूर्व कैबिनेट सचिव-अध्‍यक्ष
2. श्री टी वी मोहन दास पाई, बैंगलोर-सदस्‍य
3. श्री जी एन बाजपई, मुंबई, सेबी के पूर्व अध्‍यक्ष-सदस्‍य
4. श्री रवीन्‍द्र एच. ढोलकिया, आईआईएम, अहमदाबाद-सदस्‍य
5. श्री आर एस शर्मा, सचिव (ई एण्‍ड आईटी), भारत सरकार – सदस्‍य
6. श्री एल सी गोयल, सचिव, ग्रामीण विकास विभाग, भारत सरकार – सदस्‍य
7. श्री राकेश गर्ग, सचिव दूरसंचार विभाग, भारत सरकार, - सदस्‍य
8. सुश्री कावेरी बनर्जी सचिव डाक विभाग- सदस्‍य
9. श्री कमलेश्‍वर प्रसाद, डाक विभाग – सदस्‍य
10. श्री वासुमित्र, सीपीएमजी, दिल्‍ली सर्कल, डाक विभाग –सदस्‍य सचिव   

Saturday, November 8, 2014

Now get India Post's Philatelic Stamps through Snapdeal also

Department of Post has started online marketing and sell of its Stamps and Philatelic products with e-Commerce company Snapdeal. Under the tie-up Department of Post is offering a host of products on Snapdeal, which include Philatelic Stamps, Presentation Packs, Miniature Sheets, Special Albums and blow-up of popular stamps. Mr. Krishna Kumar Yadav, Director Postal Services, Allahabad Region told that in its effort to keep up with the changing taste of Indian Customers, Department of Post is evolving itself to serve its customers better. This tie-up is another step in this direction.

Mr. Krishna Kumar Yadav, Director Postal Services, Allahabad Region said that for a long time Dept. of Post has been offering Philatelic Products through Philatelic Bureaus and Philatelic Counters across the country. But with this tie-up with e-commerce companies like Snapdeal, India Post wants to broaden its reach to the new generation of tech savvy youths and netizens. Mr. Yadav added that to popularize Philately and offers its products in a better way Dept. of Post has also launched a dedicated website http://postagestamps.gov.in, which has all the details about philatelic stamps, such as History of Philately in India, link to purchase stamps online through Snapdeal and e-Post office portal, Stamps issue Calendar, details of Stamps since 1947, various guidelines, forms etc.

Mr. Yadav also told that the items offered by Department of Posts are available on www.snapdeal.com under the category ‘Antiques and Collectibles’. The items on sale include, Philatelic Stamps issued by Department of Posts on Mahatma Gandhi, Sachin Tendulkar, FIFA World Cup, 100 years of Indian Cinema, Collector pack of the year-2013 and many other popular stamps. 

http://www.snapdeal.com/products/hobbies/?q=Brand%3AIndia%20Post%20%28Philately%20and%20Stamps%29

अब घर बैठे स्नैपडील पर आॅनलाइन खरीदें डाक टिकट व फिलेटेलिक सामग्री

डाक विभाग भी अब अपने उत्पादों को ई-कामर्स के इस दौर में आॅनलाइन शापिंग के माध्यम से बिक्री करेगा। इसकी शुरूआत डाक टिकटों व अन्य फिलेटेलिक सामग्रियों से की गयी है। इस संबंध में जानकारी देते हुए इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि डाक विभाग और ई-कामर्स वेबसाइट ’स्नैपडील’ के मध्य हुए एक समझौते के तहत विभिन्न डाक टिकट, फिलेटलिक कलेक्टर्स पैक, डाक टिकट एलबम और फिलेटली से संबंधित पुस्तकें अब स्नैपडील के माध्यम से आॅनलाइन खरीदी जा सकती हैं। 

डाक निदेशक श्री यादव ने बताया कि डाक विभाग फिलेटलिक ब्यूरो और काउंटर्स के माध्यम से एक लम्बे समय से पूरे देश में डाक टिकट व अन्य फिलेटलिक सामग्री की बिक्री करता रहा है, लेकिन इस समझौते के बाद अब घर बैठे लोगोें के लिए डाक टिकट व अन्य उत्पाद खरीदना आसान हो जायेगा। युवा पीढ़ी जोकि आॅनलाइन शापिंग को हाथों-हाथ लेती है, इसके माध्यम से डाक टिकटों से जुड़ सकेगी। 

डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने यह भी बताया कि डाक विभाग ने फिलेटली को प्रोत्साहित करने के लिए एक समर्पित वेबसाइट  http://postagestamps.gov.in आरंभ की है, जहाँ डाक टिकटों के बारे में जानकारी से लेकर फिलेटली का इतिहास एवं विकास, स्टैम्प इश्यू कैलेंडर और 1947 से लेकर अब तक जारी सभी डाक टिकटों को प्रदर्शित किया गया है। इस वेबसाइट पर ई-पोस्ट आॅफिस पोर्टल और स्नैपडील के माध्यम से आॅनलाइन खरीद का लिंक भी दिया गया है। डाक विभाग द्वारा उपलब्ध कराये जा रहे डाक टिकट और अन्य सामग्री स्नैपडील www.snapdeal.com के ’एन्टीक एण्ड कलेक्टेबल्स’ (Antiques and Collectibles)  श्रेणी में जाकर आॅनलाइन खरीदी जा सकती है। यहाँ पर तमाम लोकप्रिय हस्तियों पर जारी डाक टिकट,  मसलन महात्मा बुद्ध, महात्मा गाँधी, सचिन तेंदुलकर, से लेकर सिनेमा के 100 वर्षों और फीफा वर्ल्ड  कप पर जारी डाक टिकटों के अलावा 2013 के सभी डाक टिकटों का संकलन पैक इत्यादि उपलब्ध हैं ।   


Monday, February 17, 2014

अब आरटीआई के शुल्‍क का भुगतान इलेक्‍ट्रॉनिक इंडियन पोस्‍टल ऑर्डर (ई-आईपीओ) द्वारा

भारतीय डाक विभाग  ने देश में रहने वाले भारतीय नागरिकों के लिए इलेक्‍ट्रॉनिक इंडियन पोस्‍टल ऑर्डर (ई-आईपीओ) की शुरूआत की है। इससे पहले पिछले साल 22 मार्च 2013 को डाक विभाग ने दुनियाभर में रहने वाले भारतीय नागरिकों के लिए ई-आईपीओ की सेवा शुरू की थी, जिससे विदेशों में रहने वाले भारतीय नागरिकों को आरटीआई अधिनियम 2005 के तहत कोई भी सूचना पाने के लिए ऑनलाइन भुगतान की सुविधा मिल सके। 

ई-आईपीओ एक ऐसी सुविधा है, जिसका इस्‍तेमाल आरटीआई के शुल्‍क का इलेक्‍ट्रॉनिक इंडियन पोस्‍टल ऑर्डर खरीदकर ऑनलाइन भुगतान करने के लिए किया जाता है। यह सुविधा ई-पोस्‍ट ऑफिस पोर्टल-www.epostoffice.gov.in अथवा इंडिया पोस्‍ट वेबसाइट- www.indiapost.gov.in से हासिल की जा सकती है। शुल्‍क का ऑनलाइन भुगतान करने के बाद भुगतान की रसीद की कॉपी आरटीआई आवेदन पत्र के साथ लगानी होती है। इस सेवा की शुरूआत करते हुए इंडिया पोस्‍ट की सचिव श्रीमती पी गोपीनाथ ने बताया कि सेवा को शुरू करने में डाक विभाग के अलावा एनआईसी और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के संयुक्‍त प्रयास शामिल हैं। इस मौके पर उन्‍होंने भारत में रहने वाले एक भारतीय नागरिक के लिए पहला ई-आईपीओ जारी कर इसे एक आरटीआई कार्यकर्ता को सौंप दिया।

इस सेवा के तहत आवेदनकर्ता को इंडिया पोस्‍ट-www.epostoffice.gov.in के ई-पोस्‍ट ऑफिस अथवा इंडिया पोस्‍ट-www.indiapost.gov.in पर जाकर अपना नाम रजिस्‍टर कर पहली बार एक प्रोफाइल बनाना होगा। इस उद्देश्‍य के लिए किसी भी बैंक के डेबिड और क्रेडिट दोनों ही कार्डों का इस्‍तेमाल किया जा सकेगा।

श्रीमती पी गोपीनाथ ने दो अन्‍य सेवाओं की शुरूआत भी की है। एक है-स्‍थानीय आधारित पिन कोड सर्च डॉयरेक्‍टरी और दूसरा-ई-पोस्‍ट सर्विस के लिए मूल्‍य संवर्द्धन। स्‍थानीय आधारित पिन कोड सर्च डॉयरेक्‍टरी का इस्‍तेमाल स्‍थानीय लोग स्‍थानीय कोड और स्‍थानीय आवश्‍यकताओं के लिए कर सकेंगे। अपने पत्रों आदि सामग्री पर लोकल लेवल के पिन कोड के सही इस्‍तेमाल से पत्र भेजने की प्रक्रिया में काफी तेजी आएगी। इस सुविधा का इस्‍तेमाल इंडिया पोस्‍ट वेबसाइट के जरिए हो सकेगा। 

इस समय ई-पोस्‍ट अपने ग्राहकों को देशभर के 1,55,000 डाकघरों के एक बड़े नेटवर्क के जरिए देशभर में कहीं भी अपना संदेश भेजने की सुविधा प्रदान करता है। ये संदेश इलेक्‍ट्रॉनिक ट्रांसमिशन के जरिए भी भेजे जा सकते हैं और हार्ड कॉपी के जरिए भी। इसके अलावा कॉर्पोरेट वर्ग के ग्राहक विशेष दरों पर ई-पोस्‍ट और अन्‍य सुविधाएं भी ले सकते हैं। ई-पोस्‍ट सर्विस में जो नई सुविधाएं जोड़ी गई हैं वे हैं-अनेक से एक-इस सुविधा के तहत एक ही ई-पोस्‍ट संदेश को कई संदेश भेजने वालों की तरफ से किसी एक संदेशा पाने वाले के ई-मेल बॉक्‍स में भेजा जा सकेगा। एक से अनेक-इस सुविधा के जरिए एक ही ई-पोस्‍ट संदेश को एक भेजने वाले व्‍यक्ति से संदेश पाने वाले कई व्‍यक्तियों के ई-मेल में भेजा जा सकेगा। 

Wednesday, May 15, 2013

Workshop for Branch Postmasters held at Varanasi Head Post Office



VARANASI: In a bid to create awareness among the postal employees about new technologies and methods to be introduced soon in all rural post offices, a one-day workshop was organised at the head post office at Visheshwarganj on Sunday.
The workshop was in line with the department of post's (DoP) ambitious'India Post 2012' project under which IT modernisation of post offices has to be ensured. Director, postal services, Allahabad region, Krishna Kumar Yadav said that it is the priority of the government to take technological advancements to rural level so that rural areas can have better participation in the development of the nation. To do so, he said, branch post offices located in rural areas will now be made high-tech. Netbook and hand-held devices will be made available to these post offices along with mobile thermal printer, smart card reader, finger print scanner, digital camera for signature and document scanning and making transactions.
Yadav emphasised on increasing the revenue at rural level and asked branch post masters to pursue every rural household to open a savings bank account with the post office. He also suggested that every postal division should adopt one major organisation and 15 villages for implementation of Sampoorna Bima Gram Scheme and also that MNREGA and BPL accounts should be opened promptly.
DoP aims at linking the post offices with core banking solution (CBS) to revolutionise banking at rural level. After CBS linkage, the customers of post offices will be able to avail services like net banking, mobile banking and ATM. One of the most important role post offices will play after CBS linkage will be in direct cash transfer under different schemes of the government for subsidy to poor people, Yadav said.
Postal employees were felicitated for performing better by the director. Senior officials of post offices, branch postmasters and gramin dak sewaks of rural areas of Varanasi and Sant Ravidas Nagar (Bhadohi) districts participated in the workshop.

In Picture : Krishna Kumar Yadav, Director Postal Services, Allahabad Region addressing Branch Post masters at Varanasi Head post Office


Friday, April 5, 2013

Postal department launches service to transfer money via Mobile Phone



ALLAHABAD: Sending and receiving a money order will be easier now than ever as India Post introduces money order facility through mobile phones. Under the Mobile Money Transfer Service (MMTS) minimum amount of Rs. 1,000 and maximum of Rs. 10,000 can be sent in a single transaction, whereas there is no limit to the maximum number of transactions made in a day.
Inaugurating the service at Allahabad Kutchery Head Post Office, Krishna Kumar Yadav director Postal Services Allahabad region said Mobile Money Transfer is a financial service is a facility for remittance and receiving of money at selected post offices. The director launched the service by sending money from Allahabad Kutchery Head Post Office to Pratapgarh Head Post Office.
Yadav said rates of the service have been fixed low, keeping in mind needs of customers. A person sending money through MMTS will be charged Rs 45 for sending money in the range of Rs 1,000-Rs 1,500, Rs 79 for an amount between Rs 1,501 and Rs 5,000 and Rs 112 for money transfer for an amount from Rs 5,001 to Rs 10,000.
In the pilot phase this service has been started in 136 post offices of Uttar Pradesh, whereas 19 offices of Allahabad Region have been covered in this phase. It will be the priority of the department to cover offices in rural and remote areas under the service. In Allahabad, the service has been started in Bamaila, Atraura and Aura branch post offices, Mau Aima Sub Office and Allahabad Kutchery Head Post Office.
Yadav added that the Department of Post had partnered with state-run BSNL to launch the mobile money transfer service. BSNL will handle the technology backend for the department and provide connectivity.
Under Mobile Money Transfer Service, customers will have the facility to send money anywhere in the country. Specially designed mobile handsets with preinstalled mobile money transfer application have been provided to the offices selected to carry out this service.
The sender needs to visit the identified post office where the service is available, deposit the amount and give the receiver's details in the prescribed form. After this, the sender would get a six-digit transfer code on the mobile phone, which one would need to send to the recipient via SMS or through any other mean. Similar SMS will also be sent to the receiver and the counter clerk automatically by the system, but only the SMS sent to the sender will contain the six-digit secret code. The recipient can claim the money at a nearby post office, by showing the transaction code and verifying one's identity. Recipient also needs to withdraw money within seven days of transaction.
On the occasion of inauguration of the service senior superintendent of Post Offices, Allahabad, Rahmatullah, assistant directors R N Yadav and M P Mishra, Postmaster Allahabad Kutchery, HPO A K Shukla, and others were present along with other officials.


Thursday, April 4, 2013

डाक विभाग ने इलाहाबाद में शुरू की मोबाइल मनी ट्रान्सफर सेवा

अब मनीआर्डर मिलना और भी आसान हो जायेगा. डाक विभाग डाक विभाग अब मोबाइल के माध्यम से मनीआर्डर सेवा उपलब्ध करायेगा. इस सेवा का कचहरी प्रधान डाकघर में शुभारम्भ करते हुए इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि मोबाइल मनीट्रान्सफर एक वित्तीय सेवा है, जिसके तहत दूसरों को पैसे भेजे जाने व भेजे गए पैसे को चुने हुए डाकघरों में प्राप्त करने की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है. इस सेवा में न्यूनतम रू० 1000/- एवं अधिकतम रू०10000/- एक बार में भेजे जा सकते हैं, जबकि एक दिन में जितनी बार ग्राहक चाहे पैसे भेज सकता है.निदेशक श्री यादव ने कचहरी प्रधान डाकघर से प्रतापगढ़ प्रधान डाकघर पैसे भेजकर मोबाइल मनीट्रान्सफर सेवा का शुभारम्भ किया.

निदेशक डाक सेवाएं, इलाहाबाद क्षेत्र श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि इस सेवा की दरें बहुत प्रतिस्पर्धी रखी गई हैं. रु० 1000 से 1500 तक 45 रुपये जबकि रु०1501 से रु०5000 तक 79 रुपये वहीँ रु० 5001 से रु०10000 तक भेजने के लिए ग्राहक को 112 रूपये देने होंगे. शुरुआती दौर में यह सेवा उत्तर प्रदेश के 136 डाकघरों में उपलब्ध कराई जाएगी जब कि इलाहाबाद परिक्षेत्र के 19 डाकघरों में यह सेवा शुरू की जा रही है. इस सेवा से ग्रामीण व दूरदराज के इलाकों विशेषतःशाखा डाकघरों को जोड़ना प्राथमिकता है. इलाहाबाद मंडल के बमैला, अतरौरा,औरा शाखा डाकघरों, मऊआइमा उप डाकघर व इलाहाबाद कचहरी प्रधान डाकघर में यह सेवा शुरू की जा रही है.

श्री कृष्ण कुमार यादव ने इस सेवा के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि इसके लिए भारतीय डाक विभाग ने बी०एस०एन०एल० के साथ एक करार कर यह नई सेवा शुरू की है. इस करार के तहत बी०एस०एन०एल० इस सेवा हेतु तकनीकी सहायता एवं कनेक्टिविटी उपलब्ध कराएगा. मोबाइल मनीट्रान्सफर सेवा के अंतर्गत ग्राहकों को देश में कहीं भी पैसे भेजे जाने की सुविधा उपलब्ध करायी जा रही है. फिलहाल शुरूआती दौर में यह सेवा देश के चुनिन्दा डाकघरों में ही उपलब्ध करायी जा रही है. सेवा प्रदाता डाकघरों में विशेष मोबाइल उपलब्ध कराये जा रहे हैं, जिसमें एक विशेष सॉफ्टवेयर लोड होगा इसके माध्यम से ही मोबाइल मनीट्रान्सफर सेवा का परिचालन किया जायेगा.

श्री यादव ने इस सेवा के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि मोबाइल मनीट्रान्सफर सेवा से पैसे भेजने के लिए ग्राहक को चयनित डाकघर पहुँच कर एक फार्म भरना होगा. लेन-देन (Transaction) सफल होने पर पैसे भेजने वाले डाक सहायक, ग्राहक एवं प्राप्तकर्ता तीनों के पास सन्देश(SMS) द्वारा सूचना स्वत: पहुँच जाएगी. केवल ग्राहक के पास भेजे गए सन्देश में गुप्त कोड होगा जो वह फोन,एस०एम०एस० या किसी अन्य माध्यम से प्राप्तकर्ता को बताएगा. पैसे प्राप्त करते के लिए प्राप्तकर्ता निर्धारित डाकघर पहुँच कर अपनी फोटोयुक्त पहचान पत्र एवम् एस०एम०एस० दिखाकर, पैसे भेजने वाले द्वारा बताया गया, 6 अंकों का गुप्त कोड बताएगा. तदनुसार उसे मिनटों में डाकघर द्वारा पैसे का भुगतान कर दिया जाएगा.

इस सेवा के शुभारम्भ के अवसर पर प्रवर अधीक्षक डाकघर इलाहाबाद श्रीरहमतुल्लाह, सहायक निदेशक आर०एन० यादव, एम०पी० मिश्र, पोस्टमास्टर ए०के० शुक्ला आदि सहित अन्य अधिकारी, कर्मचारीगण उपस्थित रहे.                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                           

Thursday, February 28, 2013

Budget 2013: India post finds CBS proposal as a great developmental step

NEW DELHI: Union Budget of 2013-14 has come with a major development proposition for India post. Not only postal department big shots, but even small postal service agents are also happy with the announcement of Finance Minister.

"Government has initiated an ambitious IT driven project to modernize the postal network at a cost of Rs. 4,909 crore. Post offices will become part of the core banking solution and offer real time banking services. I propose to provide Rs. 32 crore for the project in 2013-14," said the FM in his budget speech.

Clear enough, the initiative will be a big shot in the arm of Indiapost that already is a major small savings service provider in India. "We are happy with the decision as we have been asking for this since long.

CBS will empower us to go full fledged in banking services," said Mr. John Samuel, Chief Post Master General of J & K who also plays a vital role in visualizing Indiapost's modernization and new business sector.

Although India post has always traditionally remained as a major agency facilitating small savings especially in rural areas, it was never allowed to initiate full-fledged banking services.

Moreover, manual operation of postal department versus electronic and cyber age core banking solution of all other banks have pushed Indiapost to back bench in providing financial services.

But, "Indiapost has 1.55 lakh establishments in India touching deepest interiors. This is almost double of total 83,000 establishments of all banks put together. With introduction of modernized services, now we will be able to contribute in a big way to GoI's targeted financial inclusion drive in India," said Mr. Samuel.

Beside the postal top brasses, "It is great for us too as now we can increase our service volume and earn even higher through postal services," said Mr. T K Das, a veteran postal savings agent.

Sunday, December 30, 2012

Instant money order a boon for customers


ALLAHABAD: Gone are the days when you waited anxiously for the postman to arrive with money order. India Post's i-MO is a web-based instant money transfer service offered by India Post to transfer money between two resident individuals within India.
Director postal services, Allahabad region, Krishna Kumar Yadav told TOI that money transferred through i-MO can be received by the payee within few minutes of the transfer. To make this user more cost-efficient for customers i-MO tariffs have been reduced lately.

I-MO is an instant, reliable, affordable and most convenient way for transferring money within the country, for sending an amount up to Rs 50,000 a customer has to pay only Rs 120. Now, customers have to pay Rs 100 for an amount of Rs 1,000-10,000, Rs 110 for transfer between Rs 10,001 and 30,000, and Rs 120 for transfer between Rs 30,001 and Rs 50,000. The facility of ordinary money order is already being provided by India Post, in which Rs five is charged per Rs 100. The instant money order is much faster and efficient compared to ordinary money order.
 
Further Mr. KK Yadav added that, to send money through i-MO, a customer is required to fill a "To Remit Payment Form" and submit it with money and i-MO commission at i-MO post office counter. i-MO counter clerk will give a printed receipt immediately after booking the i-MO that contains 16 digits i-MO number. This 16 digits i-MO number has to be conveyed by sender to the receiver over phone, SMS, or e-Mail or any other means. Receiver can collect money from any designated i-MO Post Office counter on presentation of the 16 digits i-MO number. He will be required to fill up a simple "To Make Payment Form" and submit it along with a copy of any of the prescribed Identity Proofs.
 

Saturday, December 15, 2012

भारतीय डाक विभाग की ऑनलाइन सेवाएँ

जमाना अब काफी हाईटेक हो गया है। हर क्षेत्र में ऑनलाइन सेवाओं की बढ़ोतरी हो रही है। समय एवं धन की बचत के लिए ऑनलाइन सेवाओं पर काफी जोर दिया जा रहा है। इस मामले में भारतीय डाक विभाग भी पीछे नहीं है। ग्राहकों की सहूलियत एवं सेवाओं में पारदर्शिता के मद्देनजर डाक विभाग अपनी अधिकतर सेवाएं ऑनलाइन तरीके से भी उपलब्ध कराने की कोशिश कर रहा है। गौरतलब है कि दुनिया में सबसे ज्यादा डाकघर भारत में हैं एवं भारतीय डाक विभाग काफी सफलतापूर्वक इसका संचालन भी कर रहा है। आज भी भारत में आधारभूत ढ़ांचों का पूर्ण विकास नहीं हो पाया है एवं देश के दूर-दराज के इलाकों में डाकघर ही लेन-देन जैसे महत्वपूर्ण कार्य को भी अंजाम देता है। इस लेख के जरिए हम डाकघर विभाग द्वारा प्रदान किए जा रहे कुछ महत्वपूर्ण ऑनलाइन सेवाओं की चर्चा कर रहे हैं।
ऑनलाइन मनी ऑर्डर
आम तौर पर मनी ऑर्डर भेजने के लिए आपको डाक घर में जाकर फार्म भरना होता है लेकिन क्या आप जानते हैं कि घर बैठे-बैठे भी आप मनी ऑर्डर भेज सकते हैं। ग्राहक अब ऑनलाइन तरीके से भी मनी ऑर्डर भेज सकते हैं। आईसीआईसीआई बैंक का स्मार्ट मनी ऑर्डर एक विशेष सेवा है जो ग्राहकों को भारत में कही भी यह सेवा उपलब्ध कराता है। इसके लिए आपको आईसीआईसीआई बैंक का अपना ऑनलाइन एकाउंट नंबर लॉगइन करने की आवश्यता होगी। ग्राहक को रकम एवं प्राप्तकर्ता का पता भी दर्ज कराना होगा। यह रकम भारतीय डाक विभाग द्वारा संबंधित पते पर (जिस पते पर ग्राहक भेजना चाहता है) पहुंचा दिया जाएगा। स्मार्ट मनी ऑर्डर में किसी तरह की कोई रूकावट नहीं है एवं इसे आप अपने गांव, शहर या अपने घर, कहीं से भी (जहां इंटरनेट की सुविधा हो) भेज सकते हैं।

एनआरआई भी उठा सकते हैं लाभ- इस सुविधा का लाभ एनआरआई भी उठा सकते हैं। पर उन्हें इसके लिए इंडिया का स्थानीय पता दर्ज कराना होगा। यह सेवा वर्ष भर चौबीसों घंटे उपलब्ध है। इंडिया पोस्ट इस सेवा के बदले मनी ऑर्डर की राशि का 5 फीसदी कमीशन के रूप में लेता है जबकि आईसीआईसीआई बैंक इस सेवा के बदले 25 रुपये प्रोसेसिंग फीस प्रति मनी ऑर्डर एवं सर्विस टैक्स के रूप में लेता है।

डिलिवरी टाइम-डिलिवरी प्राप्त होने में लगने वाला समय दरअसल डाक विभाग के पोस्टल सर्विस विभाग द्वारा तय होता (आमतौर पर 15 कार्यदिवस) है।

क्या होगा यदि मनी ऑर्डर प्राप्त न हो- मनी ऑर्डर जिस पते पर भेजा गया है एवं जिस व्यक्ति के लिए भेजा गया है यदि वह संबंधित पत पर न मिले तो उस सूरत में पोस्ट मास्टर प्राप्तकर्ता के पते पर मनी ऑर्डर आने का एक नोटिस देता है एवं उसे सात कार्यदिवस में पोस्ट ऑफिस से प्राप्त करना होता है। यदि तय कार्य दिवस में मनी ऑर्डर पोस्ट ऑफिस से प्राप्त नहीं किया तो विभाग इसे भेजने वाले को रिफंड कर देता है।

इंस्टेंट मनी ऑर्डर (आईएमओ)
इंस्टेंट मनी ऑर्डर भारतीय डाक विभाग द्वारा प्रदान किया जाने वाली एक महत्वपूर्ण सेवा है। इंस्टेंट ऑनलाइन मनी ट्रांसफर एक तेज, सुरक्षित एवं विश्वसनीय सर्विस है। आईएमओ, पोस्ट ऑफिस द्वारा शुरू किया गया एक वेब आधारित मनी ट्रांसफर सेवा है। आईएमओ की सुविधा युक्त पोस्ट ऑफिस के जरिए आप 1,000 रुपये से लेकर 50,000 रुपये तक की रकम ट्रांसफर कर सकते हैं। इस सेवा ने डाक विभाग की कार्य पद्धति में काफी परिवर्तन ला दिया है। इसने मनी ऑर्डर सेवा में आमूल-चूल बदलाव किए हैं।

इस सेवा के लिए एक फार्म भरना होता है। उसके बाद इसे आईएमओ पोस्ट ऑफिस के काउंटर पर जमा कराना होता है एवं काउंटर क्लर्क तुरंत आईएमओ बुक करता है एवं इसका एक प्रिंटेड रसीद ग्राहक को देता है जिसमें एक कम्प्यूटर जनित 16 अंको का गुप्त नंबर दर्ज होता है। इस अंक के बारे में क्लर्क को भी पता नहीं होता। मनी ट्रांसफर करने वाले व्यक्ति के लिए यह जरूरी है कि सुरक्षा मानकों एवं विश्वसनीयता के मद्देनजर इस नंबर को एसएमएस, ई-मेल या फोन के जरिए प्राप्तकर्ता (जिसे पैसे भेजे गए हैं) को बता दे ताकि उसकी सही पहचान की जा सके। क्योंकि इसी नंबर को उसे (प्राप्तकर्ता) पोस्ट ऑफिस में दिखाना पड़ता है।
 
ई-पोस्ट कॉरपोरेट सर्विस
भारतीय डाक विभाग ने ई-पोस्ट कॉरपोरेट सर्विस लांच किया है इसके जरिए कंपनियां पूरे देश में कही भी इंटरनेट के जरिए बिजनेस ईमेल भेज सकती है। इस सेवा का लाभ उठाने के लिए संबंधित कंपनियों को डाक विभाग के साथ एक बिजनेस एकाउंट खुलवाना होता ( इस पर कोई चार्ज नहीं लगता) है एवं इसके बाद कंपनी डाक विभाग को ईमेल भेजेगी। विभाग इस ईमेल का प्रिंट लेकर संबंधित पते पर पहुंचा देगा। डाक विभाग प्रिटिंग, पैकेजिंग, पोस्ट प्रिंटिंग एवं डिलीवरी सभी काम करता है। कंपनी ने इसके लिए दिल्ली एवं कोलकाता में दो प्रिंटिंग सेट अप भी स्थापित किए हैं। कंपनियों को बिजनेस ईमेल से संबंधित सारे डाटा उपलब्ध कराने होंते हैं। इसके बाद डाक विभाग प्रोग्रामिंग एवं लेआउट, प्रिंट, पैकेज एवं डिलीवरी से संबंधित सारे कार्य करता है एवं प्रति पेज के हिसाब से 6 रुपये चार्ज करता है। इस ईमेल सुविधा में क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट, मोबाइल फोन बिल एवं बाजार संबंधित अन्य सूचनाएं भी शामिल हो सकती हैं।

इंटरनेट न होने पर भी ई-पोस्ट सेवा- यदि आप ई-पोस्ट प्रीपेड कार्ड का इस्तेमाल कर रहे हैं तो चाहे दोनों पक्ष इंटरनेट के जरिए न भी जुड़ें हो तब भी आप ऑनलाइन तरीके से पत्र भेज सकते हैं। गौरतलब है कि इंडिया पोस्ट ई-पोस्ट सेवा के जरिए ग्राहकों को ऑनलाइन तरीके से भी लेटर भेजने की सेवा उपलब्ध करा रहा है। यह मैसेज पेन ड्राइव में भी दिया जा सकता है। डाक विभाग की ईपोस्ट सेवा देश के बाहर भी अपनी सेवाएं देता है। लेकिन देश के बाहर इस सेवा को डाक विभाग द्वारा सिर्फ इलैक्ट्रॉनिक फॉर्मेट में भेजा जाता है। इसकी हार्ड कॉपी नहीं भेजी जाती है।

ऑनलाइन भरें आवेदन फॉर्म
डाक विभाग अपने ग्राहकों को ऑनलाइन आवेदन फॉर्म जमा करने की इजाजत देता है। इस सेवा के जरिए अब अभ्यर्थी पोस्ट ऑफिस के जरिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए संबंधित ग्राहक को प्रति आवेदन के हिसाब से 20 रुपये चुकाना होगा। हालांकि आवेदन की हार्ड कॉपी आवेदक को बाद में रजिस्टर्ड डाक से भी भेजना पड़ता है।

ऑनलाइन जांचें स्पीड पोस्ट

भारतीय डाक विभाग ने स्पीड पोस्ट एवं एक्सप्रेस पार्सल के ऑनलाइन ट्रैकिंग की भी सुविधा दी है। इस सेवा के जरिए ग्राहक यह ट्रैक कर सकते हैं कि उनका पार्सल कहां तक पहुंचा है। इतना ही नहीं आप पार्सल एवं एक्सप्रेस पार्सल कंसाइनमेंट की डेलिवरी रिकार्ड को भी ट्रैक कर सकते हैं।


कौन-कौन सी सुविधाएं होंगी ट्रैक-स्पीड पोस्ट (डॉमेस्टिक ईएमएस), इंटरनेशनल ईएमएस, इलैक्ट्रॉनिक मनी ऑर्डर (ईएमओ), रजिस्टर्ड ईमेल, एक्सप्रेस पार्सल, इलैक्ट्रॉनिक वैल्यू पेबल पार्सल (ईवीपीपी) जैसी सुविधाओं को आप ऑनलाइन ट्रैक कर सकते हैं।

कैसे करें ट्रैक- ट्रैकिंग नंबर बॉक्स में पोस्टल आर्टिकल नंबर डालें। उसके बाद गो बटन पर क्लिक करें। ध्यान रहे ट्रैकिंग नंबर फॉर्मेट हमेशा 13 अंकों का होता है। कोई जल्दबाजी न करें एवं इन नंबर को सावधानीपूर्वक बॉक्स में डालें।

इस पर रखें ध्यान- यदि पार्सल को ट्रैक करना चाहते हैं एवं आपने इससे संबंधित प्रक्रिया भी अपनाई है पर इससे संबंधित कोई सूचना नहीं मिल रही तो घबराएं नहीं। यह न समझें कि आपका पार्सल भेजा ही नहीं गया है। यह संभव है कि स्कैनिंग में देरी हो रही हो, इसलिए ट्रैकिंग संबंधित सूचना नहीं प्राप्त हो रही हो। ऐसा नहीं है कि पार्सल भेजते ही आपको ट्रैकिंग संबंधित सूचना मिल जाए। इसमें थोडा़ समय लगता है।
 
एनएससी रिटर्न की ऑनलाइन गणना

डाक विभाग ने अपने ग्राहकों को एनएससी स्कीमों में मिलने वाली रिटर्न की गणना के लिए ऑनलाइन कैलकुलेटर की व्यवस्था की है। विभाग ने ऐसा संबंधित स्कीम में पारदर्शिता बरतने के मद्देनजर किया है।


 एसएमएस स्टेटस सेवा

ग्राहकों को बेहतर सेवा उपलब्ध कराने के लिए डाकविभाग ने स्पीड पोस्ट एवं ईएमओ (इलैक्ट्रॉनिक मनी ऑडर्र) के लिए एसएमएस ट्रैकिंग सुविधा लांच की है। इस सुविधा को अन्य डाक सेवाओं पर भी उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।

इंटरनेट बैंकिंग सुविधा

भारतीय डाक विभाग ग्राहकों के लिए जल्द ही इंटरनेट बैंकिंग सुविधा शुरू करने वाला है। इसके अलावा डाक विभाग एटीएम भी स्थापित करेगा। विभाग अपने ग्राहकों को डेबिट कार्ड भी जारी करने की योजना पर काम कर रहा है। इससे आसान ऑनलाइन ट्रांजैक्शन में मदद मिलेगी। इंडिया पोस्ट बैंकों से इस संबंध में समझौता करने की कोशिश कर रहा है ताकि उसके डेबिट कार्ड ग्राहकों को कोई परेशानी न हो। डाक विभाग जल्द ही दूर-दराज के इलाकों में अपनी पहुंच का फायदा उठाने के लिए स्वयं का बैंकिंग सेट-अप लगानेे के लिए भी जोर आजमाइश कर रहा है।

ऑनलाइन आरटीआई

डाक विभाग ने ऑनलाइन आरटीआई दायर करने की सुविधा भी दी है। आप चाहें तो घर बैठे-बैठे आरटीआई दायर कर सकते हैं। भारतीय नागरिक के अलावा देश के बाहर यात्रा पर गए लोग या एनआरआई भी दुनिया में कहीं से भी डाक विभाग के माध्यम से आरटीआई दायर कर सकते हैं।

डाक विभाग ने एक पोर्टल लांच किया जिसके जरिए देश के बाहर से भी ऑनलाइन आरटीआई दायर कर सकते हैं। पहले देश के बाहर रह रहे भारतीयों को आरटीआई दाखिल करने में काफी परेशानी होती थी क्योंकि इसके लिए आवश्यक फीस विदेशी करेंसी में कैसे जमा किया जाए इसका कोई स्पष्ट नियम नहीं था। इसलिए पहले ऐसे आवदेकों को भारत में रह रहे सगे -संबंधियों पर निर्भर रहना पड़ता था।

Courtesy : Money Mantra