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Thursday, October 8, 2020

World Post Day : बदल रहा है डाक सेवाओं का चेहरा

विश्व भर में डाक सेवाओं का अपना एक लम्बा इतिहास रहा है। एक दौर में संचार का सबसे सुलभ माध्यम डाक सेवाएं ही रही हैं। भारत में डाक विभाग देश के सबसे पुराने विभागों में से एक है जो कि देश के सामाजिक-आर्थिक विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह एक ऐसा संगठन है जो न केवल देश के भीतर बल्कि देश की सीमाओं से बाहर अन्य देशों तक पहुँचने में भी हमारी  मदद करता है। भूमंडलीकरण की अवधारणा सबसे पहले दुनिया भर में भेजे जाने वाले पत्रों के माध्यम से ही साकार हुई। दुनिया के एक कोने से दूसरे कोने तक यदि पत्र अबाध रूप से आ-जा रहे हैं तो इसके पीछे ‘यूनिवर्सल पोस्टल‘ यूनियन का बहुत बड़ा योगदान है, जिसकी स्थापना 9 अक्टूबर 1874 को स्विटजरलैंड में हुई थी। यह 9 अक्टूबर पूरी दुनिया में ‘विश्व डाक दिवस‘ के रूप में मनाया जाता है।

डाक-सेवाओं में वैश्विक स्तर पर तमाम क्रांतिकारी परिवर्तन आए हैं और भारत भी इन परिवर्तनों से अछूता नहीं हैं। भारत एक कृषि प्रधान एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था वाला देश है, जहाँ सेवाओं को अन्तिम व्यक्ति तक पहुंचाना ही सरकार की प्राथमिकता है। डाकघरों में बुनियादी डाक सेवाओं के अतिरिक्त बैंकिंग, वित्तीय व बीमा सेवाएं भी उपलब्ध हैं। भारतीय डाक विभाग वर्ष 1882 से बचत बैंक सेवाओं और 1884 से डाक जीवन बीमा के क्षेत्र में है। देश में लगभग डेढ़ लाख से ज्यादा डाकघरों का नेटवर्क है जो कि विश्व का सबसे बड़ा नेटवर्क है। इनमें से करीब 90 प्रतिशत डाकघर ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित है। ’दर्पण’  प्रोजेक्ट के तहत गाँव में स्थित  शाखा डाकघरों को भी  हाईटेक किया जा रहा है। एक तरफ जहाँ डाक-विभाग सार्वभौमिक सेवा दायित्व के तहत सब्सिडी आधारित विभिन्न डाक सेवाएं दे रहा है, वहीं पहाड़ी, जनजातीय व दूरस्थ द्वीप समूह जैसे क्षेत्रों में भी उसी दर पर डाक सेवाएं उपलब्ध करा रहा है।

वक़्त के साथ पत्रों की जगह पहले ई-मेल, फिर एस.एम.एस., फिर सोशल नेटवर्किंग साइट्स और अब वाट्सएप जैसी सुविधा ने ले ली है। ऐसे में व्यक्तिगत पत्रों की संख्या में कमी होना स्वाभाविक भी था। विश्व भर में डाक की मात्रा में कमी आने के परिणामस्वरूप नई परिस्थितियों से उत्पन्न चुनौतियों का सामना करने के उद्देश्य से डाक विभाग द्वारा अपनी सेवाओं का उन्नयन तथा विविधीकरण किया जा रहा है। लोगों की अपेक्षाओं का ध्यान रखते हुए नई सेवाएं आरम्भ की जा रही हैं। ई-गवर्नेंस और वित्तीय समावेशन के लिए तमाम कदम उठाये जा रहे हैं। जिस टेक्नोलॉजी ने डाकघरों  को चुनौती दी, उसी टेक्नोलॉजी को आधार बनाकर डाक सेवाएं इस चुनौती को अवसर में बदलने की तरफ आगे बढ़ रही  हैं।

देश में व्यक्तिगत पत्रों की संख्या संचार क्रांति के बाद भले ही कम हुई हो, लेकिन अभी भी सालाना करीब 576.25 करोड़ डाक सामग्रियाँ आ रही हैं, जिनमें 501.81 करोड़ सामान्य पत्र हैं। पत्रों के त्वरित वितरण हेतु और पार्सल व ई-कॉमर्स पर ज़ोर के साथ के दौर में नई टेक्नालॉजी आधारित डिलीवरी की जरूरत है। ऐसे में ई-कामर्स को बढ़ावा देने हेतु कैश ऑन डिलीवरी, लेटर बाक्स से नियमित डाक निकालने हेतु नन्यथा मोबाईल एप एवं डाकियों द्वारा एण्ड्रोयड बेस्ड स्मार्ट फोन आधारित डिलीवरी जैसे तमाम कदम डाक विभाग की अभिनव  पहल हैं। स्पीड पोस्ट, पंजीकृत पत्र और पार्सल के लिए ट्रेक एंड ट्रेस सुविधा डाक विभाग में पहले से ही है। इन सबकी मॉनिटरिंग के लिए ’मेल नेटवर्क ऑप्टिमाइजेशन प्रोजेक्ट’ और ’पार्सल नेटवर्क ऑप्टिमाइजेशन प्रोजेक्ट’ आरम्भ किये गए हैं। हाल ही में डाक विभाग ने एक पृथक पार्सल निदेशालय भी खोला है, जो कि पार्सल के व्यवसाय में डाकघरों की भागीदारी में अभिवृद्धि सुनिश्चित करेगा।

डाकघरों का चेहरा बदला है तो कार्य में भी काफी परिवर्तन आया है। ’प्रोजेक्ट एरो’ ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसने न सिर्फ डाकघरों में एकरूपता लाते हुए इसकी ब्रांडिंग की, बल्कि कार्य के स्तर पर भी सुधारात्मक पहल की।  वित्तीय समावेशन की बात करें तो डाकघरों  की बचत योजनाओं में निवेश अभी भी सर्वाधिक सुरक्षित है। इसे सीबीएस से जोड़ने के बाद डाकघर बचत बैंक ग्राहकों के लिए नेट और मोबाइल बैंकिंग सेवा भी आरम्भ की गई है। डाकघर और बैंकों के एटीएम को आपस में जोड़ने से लोगों को काफी सहूलियत हो गई है। प्रधानमंत्री मोदी जी की महत्वाकांक्षी "बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' योजना के तहत बेटियों के सुकन्या समृद्धि खाते खोले जाने से लेकर अटल पेंशन योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना व जीवन ज्योति बीमा योजना तक में डाकघर अहम भूमिका निभा रहे हैं । भारतीय डाक ने समाज में अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए लोगों के कारोबार और वित्तीय आवश्यकताओं के अनुरूप अनेक व्यावसायिक एवं वित्तीय कार्यकालापों को प्रारंभ किया। विभाग ने नए अवसरों का पता लगाने तथा नई सेवाओं को विकसित करने में अपने को संलग्न किया। व्यवसायिक प्रक्रियाओं को पुनः व्यवस्थित करने तथा प्रचालनात्मक कार्यकुशलता पर विशेष ध्यान दिया गया है। यही कारण है कि डाकघरों में जनसुविधा के मद्देनजर तमाम नई सेवाएं आरम्भ हुई हैं। आधार नामांकन व अपडेशन केंद्र, पोस्ट ऑफिस पासपोर्ट सेवा केंद्र, रेलवे के टिकटों की बिक्री, गंगाजल की बिक्री, सेनिटाइजर व मास्क की बिक्री, ऊर्जा संरक्षण हेतु एलईडी बल्बों की बिक्री, कॉमन सर्विस सेंटर , हर घर में बिजली पहुँचाने हेतु घरों का सर्वे जैसे तमाम कार्य आज डाकघरों के माध्यम से हो रहे हैं।

डाक विभाग का सबसे मुखर चेहरा डाकिया है। डाकिया की पहचान चिट्ठी-पत्री और मनीऑर्डर बाँटने वाली रही है, पर अब डाकिए के हाथ में स्मार्ट फोन है और बैग में एक डिजिटल डिवाइस भी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा सितंबर 2018 में इण्डिया पोस्ट पेमेंट्स  बैंक के शुभारम्भ के बाद आर्थिक और सामाजिक समावेशन के तहत ग्रामीण पोस्टमैन चलते-फिरते  एटीएम  के रूप में नई भूमिका निभा रहे हैं। इण्डिया पोस्ट पेमेंट्स  बैंक गाँवो, कस्बों और दूरदराज के इलाकों में बैंकिंग सुविधाओं से वंचित तथा कम बैंकिंग वाले इलाकों में भुगतान बैंक के जरिए लोगों में अपनी पैठ बना रहा है।

डाक सेवाएं हमारे लिए कई बार  गर्व के क्षण भी उत्पन्न करती हैं। लॉकडाउन और कोरोना के दौर में जब ट्रांसपोर्ट के सभी साधन बंद हो गए, उस समय डाक विभाग ने अपना रोड ट्रांसपोर्ट नेटवर्क विस्तारित करते हुए देश के कोने-कोने में जरूरतमंदों और अस्पतालों को दवाईयाँ, मास्क, पीपीई किट्स, वेंटिलेटर से लेकर कोविड 19 की टेस्टिंग किट्स तक पहुँचाई। यहाँ तक कि सामाजिक सरोकार के तहत डाक विभाग की लाल गाड़ियों के माध्यम से लोगों को राशन और अन्य खाद्य सामग्री का वितरण किया गया। स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने 'मन की बात' में डाक विभाग की इस पहल की सराहना की। कोरोना काल में लोगों को नकदी की समस्या से न जूझना पड़े, इसके लिए डाकियों और ग्रामीण डाक सेवकों ने आधार इनेबल्ड पेमेंट सिस्टम के माध्यम से लोगों को घर बैठे उनके बैंक खातों से राशि निकाल कर दी। इससे जहाँ बैंकों में भीड़ से निजात मिली, सोशल डिस्टेंसिंग का भी पालन हो सका।

 वस्तुतः अपने नेटवर्क और आईटी टेक्नोलॉजी से युक्त डाकघर अपने देशव्यापी नेटवर्क के माध्यम से देश के कोने-कोने को कवर करते हुए एक प्रत्यक्ष लाभ अंतरण प्रदाता के रूप में स्थापित हो रहा है। आज डाक विभाग एक ऐसा विशालतम नेटवर्क बना रहा है, जिसने अपने सेवाओं के साथ बहुत से लोगों के जीवन को प्रभावित किया है।


-कृष्ण कुमार यादव, पोस्टमास्टर जनरल, वाराणसी परिक्षेत्र

Wednesday, October 16, 2019

Dak Sewa Award Function in Uttar Pradesh Circle : महानिदेशक डाक ने प्रदान किये डाक सेवा अवार्ड

उत्तर प्रदेश डाक परिमंडल में उत्कृष्ट कार्य करने वाले डाक अधिकारियों व कर्मियों को डाक सेवा अवार्ड से सम्मानित करने के साथ मंगलवार, 15 अक्तूबर  को राष्ट्रीय डाक सप्ताह समारोह का समापन हो गया। लखनऊ जीपीओ में आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में महानिदेशक डाक नई दिल्ली मीरा हॉण्डा मौजूद रहीं। जबकि अध्यक्षता चीफ पोस्ट मास्टर जनरल उप्र परिमंडल कौशलेंद्र कुमार सिन्हा ने की। मुख्य अतिथि मीरा हॉण्डा व चीफ पोस्टमास्टर जनरल कौशलेंद्र ने प्रशस्ति-पत्र देकर सभी को सम्मानित किया। 
डाक सेवा अवार्ड के तहत मुजफ्फरनगर कुतेरसा के ग्रामीण शाखा डाकपाल सुदेश चंद्र जैन, मेरठ कैंट में पोस्टमैल प्रदीप कुमार, उप्र परिमंडल लखनऊ में स्टैनोग्राफर दिनेश बाबू, हापुड़ में पोस्टमास्टर अरुण मोहन शंखधर, बीएनपीएल केंद्र नोएडा में मैनेजर अभय सिंह, सर्तकता अधिकारी लखनऊ मंडल शशि कुमार उत्तम, प्रवर अधीक्षक डाकघर कानपुर हिमांशु कुमार मिश्र, डाक सहायक बस्ती प्रियंका श्रीवास्तव को विभिन्न श्रेणियों में पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर स्वच्छता पुरस्कार श्रेणी में बरेली प्रधान डाकघर, नेशनल सॉर्टिँग हब कानपुर और  नेशनल सॉर्टिंग हब लखनऊ को पुरस्कार प्रदान किया गया। 

समारोह में पोस्टमास्टर जनरल गोरखपुर त्रिशलजीत सेठी, पोस्टमास्टर जनरल इलाहाबाद सुवेंदु कुमार स्वेन, पोस्टमास्टर जनरल बरेली संजय सिंह, पोस्टमास्टर जनरल कानपुर विनोद कुमार वर्मा, पोस्टमास्टर जनरल आगरा अग्बेष उपमन्यु, निदेशक डाक सेवाएं मुख्यालय राजीव उमराव, निदेशक डाक सेवाएं मुख्यालय परिक्षेत्र केके यादव, निदेशक डाक सेवाएं गाजियाबाद सुप्रियो घोष, प्रवर अधीक्षक डाक लखनऊ मंडल आलोक कुमार ओझा और चीफ पोस्ट मास्टर जीपीओ आरएन यादव उपस्थित रहे। 
समारोह के अंत में निदेशक डाक सेवाएं (मुख्यालय) परिक्षत्र कृष्ण कुमार  यादव ने अतिथियों का धन्यवाद करते हुए डाक सेवाओं से अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने का आह्वान किया। 


Thursday, October 10, 2019

World Post Day : विश्व डाक दिवस' पर लखनऊ में जागरूकता रैली का आयोजन

50वें 'विश्व डाक दिवस' के अवसर पर डाक सेवाओं के बारे में जन-जागरूकता लाने और व्यापक प्रचार-प्रसार के क्रम में डाक विभाग द्वारा 9 अक्टूबर को राजधानी लखनऊ में एक विशाल रैली का आयोजन किया गया। उत्तर प्रदेश के चीफ पोस्टमास्टर जनरल श्री कौशलेन्द्र कुमार सिन्हा ने निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव और श्री राजीव उमराव की उपस्थिति में परिमण्डल कार्यालय से हरी झंडी दिखाकर रैली को रवाना किया। 

इस संबंध में जानकारी देते हुए लखनऊ मुख्यालय परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि, रैली के दौरान डाक विभाग की तमाम योजनाओं को पोस्टर एवं बैनर के माध्यम से प्रदर्शित किया गया। रैली के दौरान डाककर्मियों द्वारा डाकघरों में दी जा रही  तमाम सेवाओं- स्पीड पोस्ट, बिजनेस पार्सल, बचत बैंक, डाक जीवन बीमा, इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक, सुकन्या समृद्धि योजना,  फिलेटली, आधार नामांकन और अपडेशन, पोस्ट ऑफिस पासपोर्ट सेवा केंद्र अटल पेंशन योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना,इत्यादि से संबंधित जानकारी देकर लोगों का ध्यान आकृष्ट किया गया। डाक निदेशक श्री यादव ने बताया कि, रैली का उद्देश्य डाक सेवाओं के साथ-साथ भारत सरकार द्वारा चलाई जा रही अन्य योजनाओं- स्वच्छता अभियान, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, डिजिटल इंडिया, वित्तीय समावेशन, सिंगल यूज प्लास्टिक से मुक्ति के बारे में भी जागरूक करना था। 

हजरतगंज स्थित चीफ पोस्टमास्टर जनरल कार्यालय से निकलकर हजरतगंज मेट्रो स्टेशन, अटल चौक, जीपीओ, विधान भवन, भाजपा कार्यालय, नॉवेल्टी, लालबाग होते हुए   रैली चीफ पोस्टमास्टर जनरल कैम्पस में समाप्त हुई। इस अवसर पर चीफ पोस्टमास्टर आर एन यादव, प्रवर डाक अधीक्षक आलोक ओझा, सतर्कता अधिकारी शशि कुमार उत्तम, सहायक निदेशक भोला शाह, एपी अस्थाना, आरके वर्मा, विजेंद्र सहित तमाम अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।
डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि लखनऊ रीजन के सभी मंडलों में 9 से 15 अक्टूबर तक राष्ट्रीय डाक सप्ताह का आयोजन किया जाएगा और इस दौरान विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे। इस क्रम में 9 अक्टूबर  को  ’विश्व डाक दिवस’, 10 अक्टूबर को बैंकिंग दिवस, 11  अक्टूबर को डाक जीवन बीमा दिवस, 12 अक्टूबर को फिलेटली दिवस, 14 अक्टूबर को व्यवसाय विकास दिवस और 15 अक्टूबर को मेल दिवस के रूप में मनाया जायेगा।

चीफ पोस्टमास्टर आर एन यादव ने बताया कि विश्व डाक दिवस पर विभिन्न स्कूलों के बच्चों ने जीपीओ और चौक प्रधान डाकघर का भ्रमण कर डाक सेवाओं और उनमें आ रहे परिवर्तन के बारे में जाना।











Wednesday, October 9, 2019

Happy World Post Day

विश्व डाक दिवस (9 अक्टूबर) पर आप सभी को हार्दिक बधाईयाँ और शुभकामनायें !!
Happy World Post Day.





World Post day & National Postal week : विश्व डाक दिवस और राष्ट्रीय डाक सप्ताह का आयोजन

डाक विभाग देश के सबसे पुराने विभागों में से एक है जो कि देश के सामाजिक-आर्थिक विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह एक ऐसा संगठन है जो न केवल देश के भीतर बल्कि देश की सीमाओं से बाहर अन्य देशों तक पहुँचने में भी हमारी  मदद करता है। भूमंडलीकरण की अवधारणा सबसे पहले दुनिया भर में भेजे जाने वाले पत्रों के माध्यम से ही साकार हुई। पूरे विश्व में हर वर्ष 9 अक्टूबर को "अंतर्राष्ट्रीय डाक दिवस" और उसी क्रम में 9-15 अक्टूबर तक भारत में राष्ट्रीय डाक सप्ताह मनाया जायेगा। उक्त जानकारी लखनऊ मुख्यालय परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ कृष्ण कुमार यादव ने दी। 


इसलिए मनाया जाता है विश्व डाक दिवस-
9 अक्टूबर को "अंतर्राष्ट्रीय डाक दिवस" मनाये जाने के बारे में लखनऊ (मुख्यालय) परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएं कृष्ण कुमार यादव ने कहा  कि 'एक विश्व-एक डाक प्रणाली' की अवधारणा को साकार करने हेतु 9 अक्टूबर, 1874 को 'यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन' की स्थापना बर्न, स्विटजरलैण्ड में की गई, जिससे विश्व भर में एक समान डाक व्यवस्था लागू हो सके। भारत प्रथम एशियाई राष्ट्र था, जो कि 1 जुलाई 1876 को इसका सदस्य बना। कालांतर में वर्ष 1969 में टोकियो, जापान में सम्पन्न यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन कांग्रेस में इस स्थापना दिवस को "विश्व डाक दिवस" के रूप में मनाने हेतु घोषित किया गया।  तब से पूरी दुनिया में  इस दिन को प्रतिवर्ष धूमधाम मनाया जाता है। विश्व डाक दिवस के क्रम में ही पूरे सप्ताह को राष्ट्रीय डाक सप्ताह के रूप में मनाया जायेगा, जिस दौरान तमाम कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे।
विश्व डाक दिवस के क्रम में राष्ट्रीय डाक सप्ताह का आयोजन-
डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव, ने बताया कि लखनऊ परिक्षेत्र के डाक मंडलों में भी 'विश्व डाक दिवस' और तदन्तर 9 से 15 अक्टूबर तक 'राष्ट्रीय डाक सप्ताह' का आयोजन किया जा रहा है। इस क्रम में 9 अक्टूबर  को  ’विश्व डाक दिवस’, 10 अक्टूबर को बैंकिंग दिवस, 11  अक्टूबर को डाक जीवन बीमा दिवस, 12 अक्टूबर को फिलेटली दिवस, 14 अक्टूबर को व्यवसाय विकास दिवस और 15 अक्टूबर को मेल दिवस के रूप में मनाया जायेगा।  श्री यादव ने कहा कि इस दौरान जहाँ  सेवाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार एवं राजस्व अर्जन में वृद्धि पर जोर दिया जायेगा, वहीं उत्कृष्टता हेतु डाक कर्मियों का सम्मान, कस्टमर मीट, डाक टिकट प्रदर्शनी, माई स्टैम्प, डाक सेवाओं की कार्य-प्रणाली को समझने हेतु स्कूली बच्चों द्वारा डाकघरों  का भ्रमण, पत्र लेखन प्रतियोगिता, बचत बैंक, सुकन्या समृद्धि योजना, इण्डिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक व डाक जीवन बीमा मेला, इत्यादि तमाम कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे। 

बदल रहा है डाकघरों का चेहरा और भूमिका -
वक्त के साथ पत्रों का स्वरूप भी बदल गया है। व्यक्तिगत पत्रों का स्थान बिजनेस डाक और पार्सल ने ले लिया। ऐसे में डाक विभाग ने भी नई टेक्नालाजी आधारित सेवाएं शुरू की हैं । डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि, ट्रेक एंड ट्रेस सुविधा, ई-कामर्स को बढ़ावा देने हेतु कैश ऑन डिलीवरी, लेटर बाक्स से नियमित डाक निकालने हेतु नन्यथा मोबाईल एप एवं डाकियों द्वारा एण्ड्रोयड बेस्ड स्मार्ट फोन आधारित डिलीवरी जैसे तमाम कदम डाक विभाग की अभिनव  पहल हैं। डाकघरों में कोर बैंकिंग के बाद इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक के माध्यम से वित्तीय समावेशन को बढ़ावा दिया जा रहा है । आधार इनेब्ल्ड पेमेंट सिस्टम लागू कर डाक विभाग ने बैंकिंग क्षेत्र में नई क्रांति ला दी है । डाक निदेशक श्री यादव ने कहा कि, डाकघरों की ब्रांडिंग के लिए  'प्रोजेक्ट एरो' के बाद टेकनालजी स्तर पर डाक विभाग अपने कार्यालयों में कोर सिस्टम इंटीग्रेशन प्रोजेक्ट लागू कर उन्हें पूर्ण रूप से डिजिटल और पेपरलेस बनाने की ओर अग्रसर है। ग्रामीण क्षेत्र के डाकघरों को दर्पण प्रोजेक्ट के माध्यम  से हाइटेक बनाकर डिजिटल इंडिया की संकल्पना को साकार किया जा रहा है । डाकघरों में जनसुविधा के मद्देनजर तमाम नई सेवाएं आरम्भ हुई हैं। आधार नामांकन व अपडेशन केंद्र, पोस्ट ऑफिस पासपोर्ट सेवा केंद्र, रेलवे के टिकटों की बिक्री,  गंगाजल की बिक्री, ऊर्जा संरक्षण हेतु एलईडी बल्बों की बिक्री जैसे तमाम कार्य आज डाकघरों के माध्यम से हो रहे हैं। 

सोशल मीडिया के दौर में भी पत्रों का क्रेज-
डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि, सोशल मीडिया ने भले ही संवाद के माध्यम बदल दिए हैं, पर आज भी पत्र लिखने वालों के उत्साह में कमी नहीं आई है। राजधानी लखनऊ के डाकघरों से प्रति माह औसतन 6 हजार अंतर्देशीय पत्र, 9 हजार लिफाफे और 10 हजार पोस्टकार्ड की बिक्री होती है। अंतर्देशीय पत्र  2.50 ₹ में, साधारण लिफाफा 5 ₹ में और साधारण पोस्टकार्ड 50 पैसे में मिलते हैं।

 2009 ईसा पूर्व लिखा गया था दुनिया का पहला पत्र -
पत्रों की अपनी एक खूबसूरत दुनिया है।  सभ्यता के आरंभ से ही मानव किसी न किसी रूप में पत्र लिखता रहा है। डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि दुनिया का सबसे पहला खत 2009 ईसा पूर्व बेबीलोन के खंडरों से मिला था, जो एक प्रेमी ने अपनी प्रेमिका के विरह के भाव से ओतप्रोत होकर लिखा था। भावनाओं की बयार इस कद थी कि प्रेमी ने मिट्टी के फर्श को खोदते हुए ‘मैं तुमसे मिलने आया था, पर तुम नहीं मिली’ का संदेश जाने से पहले प्रेमिका के लिए छोड़ा। इस संदेश में कितनी तड़प थी इसका अंदाजा वही लगा सकता है जिसके लिए वह लिखा गया।

विश्व डाक दिवस : समय के साथ बदल रहा डाकघर 

विश्व डाक दिवस : चिट्ठी-पत्री के सिवा डाकघर का लोगों से ढेरों सरोकार 


विश्व डाक दिवस : खत देखकर समझ आ जाता था मजमून 

देश के सामाजिक-आर्थिक विकास में डाकघर की अहम भूमिका-डाक निदेशक केके यादव 




Saturday, October 13, 2018

डाक टिकट वक्त के साथ बन जाते हैं अमूल्य दस्तावेज -डाक निदेशक केके यादव

डाक टिकट किसी भी राष्ट्र की सभ्यता, संस्कृति एवं विरासत के संवाहक हैं, जिनके माध्यम से वहाँ के इतिहास, कला, विज्ञान, व्यक्तित्व, वनस्पति, जीव-जन्तु, राजनयिक सम्बन्ध एवं जनजीवन से जुडे़ विभिन्न पहलुओं की जानकारी मिलती है। हर डाक टिकट के पीछे एक कहानी छुपी हुई है और इस कहानी से आज की युवा पीढ़ी को जोड़ने की जरूरत है। उक्त उद्गार लखनऊ (मुख्यालय) परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ श्री कृष्ण कुमार यादव ने राष्ट्रीय डाक सप्ताह के तहत लखनऊ जीपीओ में 12 अक्टूबर को आयोजित "फिलेटली दिवस' पर बतौर मुख्य अतिथि व्यक्त किये। श्री यादव ने गाँधी जी की 150 वीं जयंती के क्रम में "गाँधी जी द्वारा स्काउट ध्वजारोहण' व "स्काउट रैली : 1938 में गाँधी जी और अब्दुल गफ्फार खान" पर एक स्पेशल पोस्टल कवर भी जारी किया। इस अवसर पर स्कूली बच्चों हेतु सेमिनार, पत्र लेखन, ढाई आखर और प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता भी आयोजित की गयी, जिसमें तमाम स्कूली बच्चों ने भाग लिया। 

 डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव  ने इस अवसर पर अपने सम्बोधन में  कहा कि डाक टिकट सिर्फ भौतिक दूरियों को ही नहीं नापता बल्कि आत्मीयता भी बढ़ाता है। डाक विभाग की माई स्टैम्प सेवा के तहत अब लोगों की फोटो भी डाक टिकटों पर हो सकती है। छोटा सा कागज का टुकड़ा दिखने वाले डाक टिकट वक्त के साथ एक ऐसे अमूल्य दस्तावेज बन जाते हैं, जिनकी कीमत लाखों से करोड़ों रुपए में होती है। भारत में 1852 में जारी प्रथम डाक टिकट 'सिंदे टिकट' की कीमत आज 4 लाख से 35 लाख रुपए तक है तो दुनिया का सबसे महंगा डाक टिकट ब्रिटिश गुयाना द्वारा  सन् 1856 में जारी किया गया एक सेण्ट का डाक-टिकट है जो वर्ष 2014 में रिकॉर्ड 9.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर में बिका।

 श्री यादव ने कहा कि डाक टिकट वास्तव में एक नन्हा राजदूत है, जो विभिन्न देशों का भ्रमण करता है एवम् उन्हें अपनी सभ्यता, संस्कृति और विरासत से अवगत कराता है। यही कारण है कि ई-मेल और सोशल मीडिया के इस दौर में भी आज हाथों से लिखे पत्रों और डाक टिकटों की लाखों-करोड़ों में नीलामी होती है।  
लखनऊ जीपीओ के चीफ पोस्टमास्टर योगेंद्र मौर्य ने बताया कि फिलेटली डे पर तमाम स्कूली बच्चों ने डाकघर की कार्यप्रणाली के बारे में भी सीखा और राष्ट्रीय स्तर की ढाई आखर पत्र लेखन प्रतियोगिता में भाग लिया। 
कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत लखनऊ जीपीओ के चीफ पोस्टमास्टर योगेंद्र मौर्य और आभार ज्ञापन डिप्टी चीफ पोस्टमास्टर मधुसूदन मिश्र ने किया। इस अवसर पर डिप्टी चीफ पोस्टमास्टर टीपी सिंह, सहायक निदेशक आर एन यादव, लखनऊ फिलेटलिक सोसाइटी के अध्यक्ष बीएस भार्गव, उपाध्यक्ष दिनेश चंद्र शर्मा सहित तमाम विभागीय अधिकारी, फिलेटलिस्ट्स इत्यादि उपस्थित रहे .


   विभिन्न प्रतियोगिता के विजेताओं को निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव द्वारा पुरस्कृत किया गया। पत्र-लेखन प्रतियोगिता में जूनियर वर्ग में नितिन कुमार, अक्षिता सिन्हा व नंदिता अग्रवाल और सीनियर वर्ग में एसएन अली फराज, वासिया फातिमा व शताक्षी आनंद को क्रमश: प्रथम, द्वितीय व तृतीय पुरस्कार प्राप्त हुआ।  प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में जूनियर वर्ग में वन्दिता अग्रवाल, नितिन कुमार व प्रांजल और सीनियर वर्ग में नाजिर अली, मो. मियाम व अहमद अली को क्रमश: प्रथम, द्वितीय व तृतीय पुरस्कार प्राप्त हुआ।