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Wednesday, October 12, 2022

पिन कोड की स्वर्ण जयंती के अवसर पर संचार राज्य मंत्री देवुसिंह चौहान ने जारी किया स्मारक डाक टिकट

भारत सरकार में संचार राज्य मंत्री श्री देवुसिंह चौहान ने पिन कोड की स्वर्ण जयंती के अवसर पर 12 अक्टूबर, 2022 को  गुजरात के गांधीनगर में स्मारक डाक टिकट जारी किया। उन्होंने ई-पासबुक को भी लॉन्च किया जो पीओएसबी योजनाओं के खाताधारकों के लिए एक सुविधा है। इसके तहत एक ऑनलाइन वेबपेज के जरिये निम्नलिखित सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी-


बैलेंस इंक्वायरी - सभी योजनाओं के लिए शुरू की जाएगी।

मिनी स्टेटमेंट - एसबी, पीपीएफ और एसएसए के लिए शुरू किया जाएगा।

पूर्ण विवरण - लॉन्च पर उपलब्ध नहीं होगा। इसे बाद में शामिल किया जाएगा।


वेबपेज के लिए लिंक इंडिया पोस्ट की वेबसाइट यानी www.indiapost.gov.inऔर आईपीपीबी की वेबसाइट www.ippbonline.com पर उपलब्ध होगा।आने वाले दिनों में इसे विभाग के पोस्टइन्फो ऐप के जरिये भी उपलब्ध कराया जाएगा। इसके निम्‍नलिखित फायदे होंगे-

खाता शेष या लेन-देन संबंधी जानकारी के लिए पासबुक प्रिंट करने के लिए डाकघर जाने की आवश्यकता नहीं होगी जिससे बहुत सारे मैनुअल काम बच जाएगा।

इसे दिन में किसी भी समय और यहां तक कि छुट्टियों पर भी ऐक्सेस किया जा सकता है।

इसके लिए अलग से इंटरनेट बैंकिंग क्रेडेंशियल या मोबाइल बैंकिंग ऐप की आवश्यकता नहीं होगी।

सरल एवं उपयोगकर्ता के अनुकूल वेबपेज बेहतर ग्राहक अनुभव प्रदान करेगा।

यह सब मुफ्त उपलब्ध होगा।

संदर्भ के लिए विवरण को डाउनलोड किया जा सकेगा।


मंत्री ने 'पीएलआई मोबाइल ट्रेनिंग ऐप'को भी लॉन्च किया गया जो न केवल ऑनलाइन प्रशिक्षण प्रदान करेगा बल्कि ऑनलाइन लाइसेंस परीक्षा आयोजित करने की सुविधा भीप्रदान करेगा। इस ऐप में ऑडियो/विजुअल मोड में प्रशिक्षण सामग्री और एक किताब भी उपलब्‍ध है जो प्रशिक्षण सामग्री का एक सरल संकलन है।


Tuesday, October 4, 2022

PIN code turns 50 as India completes 75 years of Independence : Live Quiz on PIN by MyGov

पत्रों से हम सभी का नाता रहा है। पत्रों पर लिखे जाने वाले पिनकोड की अहमियत भी खूब है, इसी के माध्यम से विभिन्न स्थानों की लोकेशन चिन्हित की जाती है। भारत में पिन कोड प्रणाली की 15 अगस्त, 1972 को शुरुआत हुई। ऐसे में, 'आजादी का अमृत महोत्सव' काल में डाक विभाग ने पोस्टल इंडेक्स नंबर (पिन) की स्वर्ण जयंती के अवसर पर माईगव प्लैटफॉर्म पर एक विशेष प्रश्‍नोत्‍तरी (क्विज) का लाइव आयोजन किया है। वाराणसी परिक्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि यह प्रश्‍नोत्‍तरी, डाक विभाग के उत्पादों और सेवाओं के बारे में नागरिकों में जागरूकता पैदा करने के साथ-साथ विशेष रूप से पिन कोड के उपयोग को प्रोत्साहित करने का भी एक प्रयास है। इसमें किसी भी भारतीय नागरिक द्वारा  https://quiz.mygov.in/quiz/pincode-quiz/ लिंक पर जाकर भागीदारी की जा सकती है।

पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि यह प्रश्‍नोत्‍तरी “आजादी का अमृत महोत्सव” का भाग है जिसमें  7 अक्तूबर, 2022 की रात्रि 11:30 बजे तक प्रतिभागिता की जा सकेगी। डाक विभाग के कर्मचारी और उनके परिवार के सदस्य इस प्रश्‍नोत्‍तरी में भाग नहीं ले सकते। इस समयबद्ध प्रश्‍नोत्‍तरी प्रतियोगिता में प्रतिभागी को 300 सेकंड में 15 प्रश्नों के उत्तर देने होंगे तथा प्रश्‍नोत्‍तरी, हिन्‍दी और अंग्रेजी, दोनों भाषाओं में उपलब्ध होगी। प्रत्येक डाक परिमंडल (राज्य) से सबसे अधिक अंक प्राप्‍त करने वाले 75 प्रतिभागियों को प्रश्‍नोत्‍तरी के विजेताओं के रूप में चुना जाएगा और प्रत्येक चयनित विजेता को डाक-टिकटों का गिफ्ट हैंपर दिया जाएगा। विजेताओं का चयन, दिए गए सही उत्तरों की उच्चतम संख्या के आधार पर किया जाएगा। यदि उच्चतम अंक प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों की संख्या 75 से अधिक होती है, तो उनमें से विजेताओं का चयन, प्रश्‍नोत्‍तरी को पूरा करने में लिए गए समय के आधार पर किया जाएगा। कोई भी प्रतिभागी, प्रतियोगिता में केवल एक ही बार जीत का पात्र होगा। प्रतियोगी को अपना नाम, ई-मेल पता, टेलीफोन नंबर, डाक पता और पिन कोड संबंधी जानकारी देनी होगी।

(The six-digit pin code used by India Post to deliver mail was created August 15, 1972 by Shriram Bhikaji Velankar, who was an additional secretary in the union communications ministry. Known as the 'father of the postal index code system', Velankar was also a senior member of the Posts and Telegraphs Board.)






पिन कोड की स्वर्ण जयंती के अवसर डाक विभाग द्वारा माईगव प्लेटफॉर्म पर विशेष क्विज

डाक विभाग की विभिन्न योजनाओं और पहलों से भी अवगत कराएगी क्विज प्रतियोगिता

भारत में 15 अगस्त, 1972 को आरम्भ हुई थी पिनकोड प्रणाली

Tuesday, November 21, 2017

अब डिजिटल होगी आपकी लोकेशन, ई-एड्रेस योजना के लिए सरकार ने डाक विभाग को सौंपा जिम्मा

अब आधार के बाद जल्द ही आवासीय या प्रफेशनल अड्रेस डिजिटल होने जा रहा है। केंद्र सरकार आधार की तरह ही लोगों के अड्रेस को भी डिजिटल करना चाह रही है। डाक विभाग को इस पायलट प्रॉजेक्ट की जिम्मेदारी दी गई है। इस प्रॉजेक्ट के तहत 3 पिन कोड लोकेशन वाली प्रॉपर्टी के लिए एक 6 अक्षरों वाला डिजिटल अड्रेस दिया जाएगा।

विभिन्न अड्रेस के लिए ई-लोकेशन के आइडिया का मकसद इसे प्रॉपर्टी संबंधी विभिन्न प्रकार की जानकारियों से जोड़ना है। इससे प्रॉपर्टी टाइटल और मालिकाना हक, प्रॉपर्टी टैक्स रिकॉर्ड, बिजली, पानी और गैस जैसी चीजों के उपभोग की जानकारी मिल सकेगी। अगर इस प्रॉजेक्ट को सफलता मिली तो सरकार इसे राष्ट्रीय स्तर पर लागू कर सकती है। 

नोएडा और दिल्ली में पायलट प्रोजेक्ट की होगी शुरुआत 

फ़िलहाल, ई-लोकेशन (eLoc) पायलट प्रॉजेक्ट की मंजूरी दिल्ली और नोएडा को दो पोस्टल पिन कोड के लिए दी गई है। इसके बाद इसका राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार किया जाएगा। डिजिटल पहचान के ई-अड्रेस का इस्तेमाल मौजूदा पोस्टल अड्रेस के लिए भी किया जा सकेगा। डाक विभाग ने निजी मैपिंग कंपनी 'मैपमाईइंडिया' को इस पायलट प्रॉजेक्ट की जिम्मेदारी दी है।  डाक विभाग द्वारा जारी परिपत्र के अनुसार इस योजना में जुटाए गए साक्ष्यों का इस्तेमाल डाक विभाग डिजिटल अड्रेस के लिए कर सकता है। यह राष्ट्रीय स्तर के लिए प्रॉजेक्ट के लिए भी सही होगा। सभी तरह के डेटा डाक  विभाग के पास रहेंगे और निजी कंपनी इसका व्यवसायिक इस्तेमाल नहीं कर पाएगी।
कॉम्प्लेक्स अड्रेसस की पहचान करना होगा आसान

मैपमाईइंडिया के एमडी राकेश वर्मा ने कहा कि ई-लिंकेज के जरिए कॉम्प्लेक्स अड्रेसस की पहचान करना आसान होगा और उसे अन्य सेवाओं से भी जोड़ा जा सकता है। मौजूदा समय में देश में कई हिस्सों के अड्रेस का पता करना मुश्किल होता है। इस परियोजना का उदेश्य डिजिटल अड्रेसिंग सिस्टम के प्रभाव को दर्शाना भी है। डाक विभाग इस प्रक्रिया में डेटा शेयर कर मदद करेगा। 

इसरो और भुवन की सहायता से होगी मैपिंग 

मैपमाईइंडिया ने एक बयान जारी कर दावा किया है कि उसने डिजिटल अड्रेस के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी और डेटा जुटाना शुरू हो चुका है। कंपनी इसरो और नैशनल सैटलाइट इमैजरी सर्विस 'भुवन' के सहयोग से प्रभावकारी मैपिंग करेगी।

Now Government of India start mapping of E-address digitally, Postal Department has been given responsbility

Government of India to start e-address scheme for e-location of address

Wednesday, November 12, 2008

अब 'पिन कोड' की जगह 'पिन प्लस'

भूमण्डलीकरण एवं उदारीकरण के दौर में जैसे-जैसे बहुराष्ट्रीय कंपनियों का विस्तार होता गया और संचार-प्रोद्योगिकी के क्षेत्र में नई तकनीकों का आविष्कार होता गया, डाक विभाग भी इससे अछूता नहीं रहा। स्वतन्त्रता की 25वीं वर्षगाँठ पर 15 अगस्त 1972 को भारतीय डाक विभाग ने डाक सेवाओं को तीब्र बनाने हेतु छः अंको की पिन कोड व्यवस्था लागू की थी। इनमें से प्रथम 3 अंक सार्टिंग यूनिट और अंतिम 3 अंक वितरण डाकघर को चिन्हित करते हैं। व्यक्तिगत/घरेलू पत्रों के वितरण में पिनकोड व्यवस्था से काफी सहूलियत पैदा हुई। पर जैसे-जैसे चिटिठ्यों की बजाय मेल सेक्टर बिजनेस टू बिजनेस (B2B) और बिजनेस टू कस्टमर्स (B2C) की ओर प्रवृत होता गया, नई सेवाओं की आवश्यकता पड़ी। इसी क्रम में एक कदम आगे बढ़ाते हुए भारतीय डाक विभाग ने पिनकोड सेवा को व्यापक बनाते हुए ‘पिनप्लस‘ सेवा आरम्भ की है। 11 अंकीय पिनप्लस सेवा में प्रथम 6 अंक पिनकोड के होंगे और तत्पश्चात 5 प्लस अंक होंगे। इस 5 प्लस अंक में से प्रथम 2 अंक पोस्टमैन की बीट दर्शाते हैं और अंतिम 3 अंक वितरण विन्दु को दर्शाते हैं। पोस्टबाक्स व पोस्टबैग सेवा को भी पिनप्लस से जोड़ा गया है। इसमें 5 प्लस अंक में प्रथम 2 अंक 00 होंगे और अंतिम 3 अंक पोस्टबाक्स व पोस्टबैग संख्या को दर्शाते हैं। किसी भी प्रकार के संशय को दूर करने हेतु पिनकोड के बाद एक विभाजक रेखा खींची जायेगी, तत्पश्चात 5 अंक का प्लस कोड लिखा जायेगा। पिनप्लस सेवा आरम्भ होने के बाद जहाँ डाक वितरण में काफी आसानी हो जायेगी, वहीं इसके माध्यम से ज्यादा मात्रा में डाक प्राप्त करने वाले व्यक्ति/संस्थायें, विभिन्न सरकारी/कोरपोरेट संस्थानों का अपना एक अलग पिनप्लस कोड हो सकेगा। सीधे अर्थों में समझें तो जहाँ पिनकोड वितरण डाकघर तक की स्थिति दर्शाता है, वहीं पिनप्लस सेवा में न सिर्फ पोस्टमैन बीट बल्कि डाक प्राप्त करने वाले व्यक्ति/संस्थान को भी चिन्हित किया जायेगा। आदर्श स्थिति तो तब उत्पन्न होगी जब डाक भेजने हेतु नाम व पता लिखने की जरूरत नहीं पड़े, मात्र पिनप्लस कोड के आधार पर डाक पहुँच जाये। एक उदाहरण के माध्यम से इसे समझना आसान होगा। लखनऊ जी0पी0ओ0 के वितरण क्षेत्र में अवस्थित राज्यपाल कार्यालय को ले। लखनऊ जी0पी0ओ0 का पिनकोड 226001 है। यदि बीट नं0 45 का पोस्टमैन राज्यपाल की डाक बाटता है और राज्यपाल कार्यालय वितरण विन्दु को 222 कोड आवंटित किया जाता है तो पिनप्लस कोड होगा- 226001- 45222। यदि भारत के किसी कोने में बैठा व्यक्ति उत्तर प्रदेश के राज्यपाल को पत्र लिखता है और उसपर नाम व पता लिखने की वजाय मात्र पिनप्लस कोड- 226001-45222 अंकित कर दे तो उक्त डाक सुगमता के साथ राज्यपाल कार्यालय को वितरित हो जायेगी।

Tuesday, November 11, 2008

क्या है पिन कोड ??

हम सबका सामना कभी न कभी चिट्ठियों से जरूर होता है। इन चिट्ठियों में चाहे वे पोस्टकार्ड हों, लिफाफे या अंतर्देशीय पत्र, एक पता लिखने का स्थान तय होता है। इस स्थान में सबसे नीचे छह खाने बने होते हैं, जिस पर पिनकोड लिखा जाता है। आप जानते हैं कि यह पिन कोड क्या है और इसे लिखना क्यों जरूरी होता है? पिन कोड का अर्थ है- पोस्ट इंडेक्स नंबर और इसे लिखने से पत्र को सही स्थान पर पहुँचाने में मदद मिलती है। 

 दरअसल, हमारा देश अति विशाल है। यहाँ लाखों गाँव व कस्बे हैं। यहाँ एक ही नाम वाले दो या इससे भी अधिक स्थान हो सकते हैं। जैसे-औरंगाबाद महाराष्ट्र में है और बिहार में भी। जयपुर एक शहर भी है और एक गाँव भी। ऐसी स्थिति में डाक विभाग को चिट्ठी सही जगह और समय से पहुँचाने में बड़ी परेशानी होती थी। इससे बचने के लिए ही पिन कोड की व्यवस्था 15 अगस्त, 1972 से शुरू की गई। इस व्यवस्था के अंतर्गत देश को कुल आठ मुख्य क्षेत्रों में बांटा गया। फिर इसके उपक्षेत्र बनाए गए। अंत में डाक बांँटने वाले डाकघरों को भी एक कोड द्वारा निर्धारित किया गया। इस व्यवस्था में छह अंकों के पिन कोड का पहला अंक क्षेत्र को, दूसरा और तीसरा उपक्षेत्र या स्थान को तथा अंतिम तीन अंक वितरण केंद्रों को दर्शाता है। 

आठ मुख्य क्षेत्रों को एक से लेकर आठ संख्या तक निर्धारित किया गया है, जिसके अंतर्गत निम्न स्थान या क्षेत्र आते हैं- अंक 1- दिल्ली, चंडीगढ़, पंजाब, हरियाणा, हिमांचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर अंक 2- उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड अंक 3- राजस्थान, गुजरात, दमन-दीव, नागर-हवेली अंक 4- मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, गोवा अंक 5- कर्नाटक, आंध्र प्रदेश अंक 6- तमिलनाडु, लक्षद्वीप, केरल अंक 7- पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह, मणिपुर, नागालैंड, मेघालय, त्रिपुरा, सिक्किम, असम, अरूणाचल प्रदेश अंक 8- बिहार, झारखंड