Thursday, October 9, 2014

Postal Dept. will celebrate 'World Post Day' and 'National Postal Week' from 9-15 October

Postal Department has come a long way from the times of ‘Daak Runners’ to the age of Computers. Today, various new techniques have been invented through Information and Communication Technology but the Department of Posts has maintained its market share through innovative use of modern technology, range of diverse products based on modern ICT. It has also utilized its vast network through collaborations with various organizations and sale of their products and services through Post Offices, said Mr. Krishna Kumar Yadav, Director Postal Services, Allahabad Region. He told that World Post Day is celebrated each year on 9th October, the anniversary of the establishment of the Universal Postal Union (UPU) in 1874 in the Swiss capital, Bern. It was declared World Post Day by the UPU Congress held in Tokyo, Japan, in 1969.



Mr. Krishna Kumar Yadav, Director Postal Services, Allahabad Region said that Allahabad Postal Region and its other Postal Divisions will celebrate the World Post Day and National Postal Week from 9th to 15 October, 2014. 

During National Postal Week, 9th October (World Post day), 10th October (Savings Bank Day), 11th October (Mail Day), 13th October (Philately Day), 14th October (Business Development Day) and 15th October (Postal Life Insurance Day) will be celebrated, said Mr. Yadav. 

During this ceremony all out efforts will be made to popularize Postal Services and earn maximum revenue. Other than these, Customer meets, visit of Post Offices by school students, letter writing, quiz and painting competitions, workshop for the promotion of Philately as a hobby among the youth, Savings Bank and Postal Life Insurance Melas and honoring of personnel’s/ institutions for their contribution in revenue realization of the department will also be held added Mr. KK Yadav. Cleanness-campaigen of Post Offices and Mail Offices will also be an important aspect during this Postal week.




“विश्व डाक दिवस’ और “राष्ट्रीय डाक सप्ताह” पर डाक विभाग करेगा तमाम कार्यक्रम

’कबूतर’ से लेकर ’कम्प्यूटर’ तक डाक सेवाओं ने एक लम्बा सफर तय किया है। वर्तमान में सूचना एवं संचार क्रान्ति के चलते तमाम नवीन तकनीकों का आविष्कार हुआ है, पर डाक-विभाग ने समय के साथ नव-तकनीक के प्रवर्तन, अपनी सेवाओं में विविधता एवं अपने व्यापक नेटवर्क के चलते विभिन्न संगठनों के उत्पादों व सेवाओं के वितरण एवं बिक्री हेतु उनसे गठजोड़ करके अपनी निरन्तरता कायम रखी है। पूरी दुनिया में 9 अक्टूबर को विश्व डाक दिवस के रूप में मनाया जाता है। 

कृष्ण कुमार यादव, निदेशक डाक सेवायें, इलाहाबाद परिक्षेत्र ने बताया कि 09 अक्टूबर 1874 को ’’यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन’’ के गठन हेतु बर्न, स्विटजरलैण्ड में 22 देशों ने एक संधि पर हस्ताक्षर किया था, इसी कारण 09 अक्टूबर को कालान्तर में ‘‘विश्व डाक दिवस‘‘ के रूप में मनाना आरम्भ किया गया। यूनीवर्सल पोस्टल यूनियन का सदस्य बनने वाला भारत प्रथम एशियाई राष्ट्र था, जो कि 1 जुलाई 1876 को इसका सदस्य बना। वर्ष 1969 में टोकियो, जापान में सम्पन्न यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन, कांग्रेस में सर्वप्रथम 9 अक्टूबर को विश्व डाक दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की गयी।

डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि इलाहाबाद परिक्षेत्र के डाक मंडलों में भी विश्व डाक दिवस और
तदन्तर 9 से 15 अक्टूबर तक राष्ट्रीय डाक सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में राष्ट्रीय डाक सप्ताह के तहत 10 अक्टूबर को बचत बैंक दिवस, 11 अक्टूबर को मेल दिवस, 13 अक्टूबर को फिलेटली दिवस, 14 अक्टूबर को व्यवसाय विकास दिवस व 15 अक्टूबर को डाक जीवन बीमा दिवस के रूप में मनाया जायेगा। इस दौरान स्कूली बच्चे भी डाकघर का भ्रमण करेंगे और डाक सेवाओं की कार्य-प्रणाली को समझेंगे।

निदेशक डाक सेवायें श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि इस दौरान जहांँ सेवाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार एवं राजस्व अर्जन में वृद्धि पर जोर दिया जायेगा, वहीं उत्कृष्टता हेतु डाक कर्मियों का सम्मान, कस्टमर मीट, डाक टिकट संग्रह के प्रति युवाओं में अभिरुचि पैदा करने हेतु कार्यशाला, स्कूली छात्र-छात्राओं द्वारा डाकघरों का विजिट, पत्र लेखन, प्रश्नोत्तरी व पेन्टिंग प्रतियोगितायें, बचत बैंक व डाक जीवन बीमा मेला इत्यादि तमाम कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे।

9 अक्टूबर - विश्व डाक दिवस
10 अक्टूबर - बचत बैंक दिवस,
11 अक्टूबर - मेल दिवस, 
13 अक्टूबर - फिलेटली दिवस, 
14 अक्टूबर - व्यवसाय विकास दिवस 
15 अक्टूबर - डाक जीवन बीमा दिवस









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राष्‍ट्रीय डाक सप्‍ताह 9-15 अक्‍तूबर, 2014 

प्रत्‍येक वर्ष 09 अक्‍तूबर को विश्‍व डाक दिवस मनाया जाता है। स्‍वीडेन की राजधानी बर्नें में 1874 में यूनवर्सल पोस्‍टल यूनियन (यूपीयू) की स्‍थापना समारोह मनाने के लिए विश्‍व डाक दिवस मनाया जाता है। 1969 में जापान के तोक्‍यू में हुई यूनवर्सल पोस्‍टर यूनियन की कांग्रेस द्वारा 09 अक्‍तूबर को विश्‍व डाक दिवस घोषित किया गया था। तब से पूरी दुनिया में डाक सेवाओं की महत्ता बताने के लिए डाक दिवस मनाया जाता है। 

भारतीय डाक विभाग 09 से 15 अक्‍तूबर 2015 तक राष्‍ट्रीय डाक सप्‍ताह मना रहा है। विश्‍व डाक दिवस का उद्देश्‍य लोगों की जिन्‍दगी तथा व्‍यवसाय में डाक क्षेत्र की भूमिका तथा देश के सामाजिक एवं आर्थिक विकास में इसके योगदान के प्रति जागरूकता फैलाना है। राष्‍ट्रीय डाक सप्‍ताह के हिस्‍से के रूप में विभाग बचत बैंक दिवस, मेल दिवस, डाक टिकट दिवस, व्‍यवसाय विकास दिवस तथा पीएलआई दिवस मना रहा है ताकि विभाग द्वारा दी जाने वाली विभिन्‍न सेवाओं पर जोर दिया जा सके। 

डाक विभाग 150 वर्ष से अधिक समय से मेल, स्‍पीड पोस्‍ट, पार्सल सेवा, डाकघर बचत बैंक, डाकघर बीमा योजना तथा विशेष और निश्‍चित डाक टिकट जारी करने संबंधी सेवा देश के सभी भागों में देता रहा है। विभाग लोगों को ‘’माई स्‍टैम्‍प’’ सेवा लोगों को दे रहा है। माई स्‍टैम्‍प डाक टिकटों का पर्सनलाइज व्‍यक्‍तिपरक पत्रों का ब्रान्‍ड नाम है। यह व्‍यक्‍तिपरक सेवा चुनिंदा डाक टिकटों के निकट उपभोक्‍ता के अगूंठे के फोटो, संस्‍थान के चित्र तथा लोगो, कलाकृति चित्र, विरासत वाले भवनों, प्रसिद्ध पर्यटक केंद्र, ऐतिहासिक शहरों, वन्‍य जीव, अन्‍य पशुओं और पक्षी के फोटो की प्रिन्‍ट के जरिए दी जाती है। 

विभाग ने उपभोक्‍ताओं की बदलती आवश्‍यकताओं को ध्‍यान में रखते हुए स्‍पीड पोस्‍ट, एक्‍सप्रेस/बिजनेस पार्सल, बिजनेस पोस्‍ट, ई-पोस्‍ट, धन भेजने वाली सेवा शुरू की है। डाकघरों के विशाल नेटवर्क को देखते हुए भारतीय डाक विभाग ई-पेंमेंट के तहत बिल क्‍लैक्‍शन तथा रिटेल थर्ड पार्टी उत्‍पाद पेश कर रहा है। 

भारतीय डाक विभाग भारतीय रेल के यात्री आरक्षण प्रणाली के तहत रेल टिकटों के आरक्षण की सेवा भी दे रहा है। पूरे देश में लगभग 300 डाकघरों में यह सुविधा है। 

डाक विभाग ने दिल्‍ली और कोलकाता में ऑटोमोटेड मेल प्रोसेसिंग केंद्रों की स्‍थापना की है ताकि ऑटोमेटेड मेल ग्रिड बनाया जा सके। ऑटोमेटेड मेल प्रोसेसिंग केंद्र में एक घंटे में 50 हजार से अधिक मेल की प्रोसेसिंग होती है। राष्‍ट्रीय डाक सप्‍ताह के दौरान उपभोक्‍ताओं विशेषकर बच्‍चों को ऑटोमेटेड मेल प्रोसेसिंग केंद्र की यात्रा के लिए प्रोत्‍साहित किया जाता है। 

उभर रहे ई-कॉमर्स बाजार के अनुरूप पार्सल उत्‍पाद को नया रूप दिया गया है तथा डिलिवरी पर नकद (सीओडी) सुविधा शुरू की गई है। देश में आधुनिक पार्सल केंद्र स्‍थापित किए जा रहे हैं। ई-कॉमर्स कंपनियों की जरूरतों का पूरा करने के लिए विभाग पार्सल नेटवर्क विकसित कर रहा है। कारगर और शीघ्र डिलिवरी के लिए पार्सलों की डिलिवरी तथा एक्‍सप्रेस मेल की योजना बड़े शहरों में बनाई जा रही है। 

डाक विभाग 4909 करोड़ रुपए की लागत से सूचना प्रौद्योगिकी परियोजना के जरिए टेक्‍नोलॉजी ला रहा है। इससे देश के 1.5 लाख डाकघरों में सभी मेल तथा वित्‍तीय सेवाएं इलैक्‍ट्रोनिक माध्‍यम से दी जाएंगी। 


Tuesday, October 7, 2014

Governor of W. Bengal felicitated KK Yadav, Director Postal Services for contribution in Literature


 The Governor of west Bengal Mr. Keshri Nath Tripathi felicitated Mr. Krishna Kumar Yadav, Director Postal Services, Allahabad Region for his contribution in Literature. The programme was organized on 5th October in Mirjapur. Award was conferred to him for his contribution in promotion of Hindi language and to enrich Hindi literature.

It is worthwhile to mention here that Mr. Yadav has written 7 books and has been felicitated by more than hundred awards and honorary degrees by different literary and social institutions for his dynamic personality, creativity, administrative abilities and perpetual literary creativity. 


On this occasion Justice Giridhar Malveey,  Professor  Peeyush Ranjan Agrawal, Vice chancellor of Purvanchal University, Jaunpur, Professor Nageshvar Rao, Pro Vice Chancellor of IGNOU, Professor Punjab Singh, Ex. Vice Chancellor of BHU, Film Actor Kunal Singh, Ex Minister of Education Mr. Surjit Singh Dang and many other dignitaries were present.

Courtesy


Friday, October 3, 2014

डाक विभाग ने चलाया स्वच्छता अभियान : गाँधी जयन्ती पर डाक अधिकारियों व कर्मचारियों ने ली स्वच्छता शपथ

स्वच्छ भारत के संकल्प के साथ डाक विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों ने गाँधी जयंती पर राष्ट्रीय स्वच्छता अभियान के क्रम में विभिन्न डाकघरों प्रशासनिक कार्यालयों में स्वच्छता शपथ ली। इलाहाबाद प्रधान डाकघर कैम्पस में स्थित पोस्टमास्टर जनरल कार्यालय, प्रवर डाक अधीक्षक कार्यालय, पोस्टल स्टोर डिपो और प्रधान डाकघर के अधिकारियों/कर्मचारियों को इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव ने शपथ दिलाई। शपथ के तहत डाकघरों के साथ-साथ अपने घर, परिवार, मोहल्ले की स्वच्छता हेतु भी शपथ दिलायी गयी। सभी ने शपथ ली कि हर वर्ष 100 घंटे यानि कि हर सप्ताह 2 घंटे श्रमदान करके स्वच्छता के संकल्प को चरितार्थ करेंगे और अन्य 100 व्यक्तियों को भी यह शपथ दिलायेंगे।   

इस अवसर पर पोस्टमास्टर जनरल श्री एमई हक और निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव ने कैम्पस
में श्रमदान कर स्वच्छता हेतु लोगों को अभिपे्ररित किया। इसके बाद हर डाक अधिकारी व कर्मचारी ने तन्मयता से श्रमदान किया। इस दौरान यह निर्धारित हुआ कि प्रत्येक शुक्रवार को डाक विभाग के अधिकारी व कर्मचारी 2 घंटे श्रमदान करेंगे।

गाँधी जयंती पर उनकी स्मृतियों को सहेजते हुए डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि डाक सेवाओं से महात्मा गाँधी जी का आत्मीय रिश्ता रहा है। उनके लिखे पत्र आज भी देश-दुनिया में धरोहर के रूप में सुरक्षित है। गाँधीजी पर सर्वाधिक डाक टिकट जारी होने का रिकार्ड भी है और भारत सहित अधिकतर देशों ने किसी न किसी रूप में उनपर डाक टिकट जारी किये हैं, जो उनकी लोकप्रियता और वर्तमान में प्रासंगकिता दोनों को दर्शाता है। 

इस अवसर पर प्रवर डाक अधीक्षक श्री रहमतउल्लाह, सहायक निदेशक श्री टीबी सिंह, मधुसूदन मिश्रा, अधीक्षक पीएसडी श्री पीआर पाल, सीनियर पोस्टमास्टर श्री ओबी सिंह सहित हर अधिकारी-कर्मचारी ने श्रमदान में भाग लेकर स्वच्छता अभियान को आगे बढ़ाया।



स्वच्छता शपथ

महात्मा गाँधी ने हमें देश के लिए जीना सिखाया।

महात्मा गाँधी ने गुलामी की जंजीरों को तोड़ के मांँ  भारती को आजाद किया।

आओ हम संकल्प करें -

गंदगी दूर करना - यही भारत माता की बहुत बड़ी सेवा है।

मैं शपथ लेता/लेती हूँ कि:

-स्वयं स्वच्छता के लिए हर वर्ष 100 घंटे यानि कि हर सप्ताह दो घंटे श्रम दान करके स्वच्छता के संकल्प को चरितार्थ करूँगा/करूँगी।

-न गंदगी करूँगा/करूँगी, न गंदगी करने दूँगा/दूँगी।

-मैं सबसे पहले स्वयं से, मेरे परिवार से, मेरे मोहल्ले से, मेरे कार्यस्थल से, स्वच्छता की शुरूआत करूँगा/करूँगी।

-हम सब जानते हैं कि दुनिया के वही देश स्वच्छ हैं, जिनके नागरिक गंदगी नहीं करते हैं।

-हम गाँव-गाँव, गली-गली स्वच्छता अभियान का प्रचार करते रहेंगे। 

-मैं आज जो शपथ ले रहा हूँ/रही हूँ, यह शपथ 100 व्यक्तियों को भी दिलवाऊँगा/दिलवाऊँगी, जो हर साल 100 घंटे स्वच्छता के काम में देंगे।


-गाँधी जी के सपनों का भारत सिर्फ आजाद भारत नहीं, स्वच्छ साफ-सुथरा भारत है। इसके लिए मैं प्रतिबद्ध रहूँगा/रहूँगी।


Dept. of Post conducted cleaning drive on Gandhi Jayanti : Officials took Pledge for Cleanliness

On the occasion of Gandhi Jayanti, the Officers and officials of Department of Post took Pledge in Allahabad GPO campus and other Post offices for cleanliness with the resolution to clean India under cleanliness drive. Mr. Krishna Kumar Yadav Director postal services Allahabad sworn in officers and other employees of office of Postmaster General, Office of Sr Supdt Post offices, Postal store depot and Head Post Office Allahabad in the Allahabad GPO campus. The members of postal family were made to pledge for cleanliness of their home, locality along with their offices. Everyone took Pledge for voluntary labour of 100 hours every year i.e. 2 hour per week to materialize the resolution of sanitation.

On this occasion Mr. M.E. Haque Postmaster General and Mr. Krishna Kumar Yadav Director Postal services took initiative of cleanliness by sweeping the campus of Allahabad GPO and plantation to motivate the staff. After this every employee of Department of Post did sanitation with dedication. It was also decided that every employee of the department will participate in voluntary labour for two hours on every Friday.




Mr. Krishna Kumar Yadav Director Postal Services also said that Mahatma Gandhi was closely related to Department of Post and letters written by him are the jewels for the world and has been protected as heritage. A record number of Postage stamps have been issued on Gandhiji and every country including India has issued postage stamp on him, which indicates both his popularity and current relevancy.

On this occasion Mr. Rahmatullah, Sr. Supdt. Of POs, Mr. T.B. Singh & Mr. M.P. Mishra Asst. Director, Mr. P.R Pal Supdt. Postal Store Depot and Mr. O. B. Singh Sr. Postmaster have also participated in voluntary labour along with other employees to kick start the sanitation process.

Wednesday, October 1, 2014

भारतीय डाक : 160 वर्षों का गौरवशाली सफरनामा

संचार सेवायें सदैव से मानवीय जीवन का अभिन्न अंग रही हैं और इनमें डाक सेवाओं का प्रमुख स्थान है। यथापि संचार क्रान्ति के चलते तमाम नवीन तकनीकों का आविष्कार हुआ, पर डाक विभाग ने  समय के साथ नव तकनीक के प्रवर्तन एवं अपनी सेवाओं में विविधता व उन्नयन द्वारा अपनी निरन्तरता कायम रखी है। भारतीय डाक विश्व का सर्वाधिक वृहद डाक नेटवर्क है। समाज के सभी पक्षों को एकीकृत करते हुये लगातार 160 वर्षों से कायम अपनी विश्वसनीयता के साथ भारतीय डाक एकमात्र ऐसा संगठन है जो प्रतिदिन समाज के हर व्यक्ति के दरवाजे पर दस्तक लगाता है। आज इसी नेटवर्क व साख के चलते तमाम अन्य संगठन भी अपने उत्पादों और सेवाओं के प्रचार-प्रसार व बिक्री हेतु डाक विभाग के साथ हाथ मिला रहे हैं। 

 भारतीय डाक विभाग वर्ष 2014 में अपनी सेवाओं के 160 गौरवशावली वर्ष पूरा कर रहा  है। 1 अक्टूबर 1854 को लार्ड डलहौजी के काल में विभाग के रूप में स्थापित डाक विभाग समय के विभिन्न पगचिन्हों का गवाह रहा है। आधुनिक डाक विभाग की कार्यप्रणाली से पूर्व भारत में प्राचीन काल से ही समय-समय पर विभिन्न डाक प्रणालियाँ प्रचलित थीं। वैदिक व उत्तर वैदिक काल में किसी न किसी रूप में दूतों का संदेशवाहक के रूप में जिक्र मिलता है। महाकवि कालिदास ने अपने काव्य मेघदूत में संदेशवाहक के रूप में मेघों की कल्पना की थी। भारतीय राज व्यवस्था में मौर्य काल के उद्गम के साथ ही ‘कबूतर-डाक‘ का आरम्भ मिलता है, जो कि कुषाण काल के बाद तक प्रभावी रहा। भारत में व्यवस्थित डाक का प्रथम लिखित इतिहास जियाउद्दीन बरनी द्वारा अलाउद्दीन खिलजी (1296) के समय का प्राप्त होता है, जिसने सैन्य सम्बन्धी नियमित जानकारी हेतु ‘पैदल डाक‘ और ‘घुड़सवार डाक‘ व्यवस्था कायम की। मु0 बिन तुगलक के शासन काल (1325-51) में भी इस व्यवस्था के कायम रहने का जिक्र उत्तर अफ्रीकी यात्री इब्नबतूता ने किया है। दिल्ली से दौलतगिरी राजधानी स्थानांतरित होने पर मु0 बिन तुगलक हेतु नियमित गंगा का जल पैदल और घुड़सवार डाक द्वारा ही ले जाया जाता था। शेरशाह सूरी (1541-45) ने अपने काल में डाक व्यवस्था को तीव्रता देने हेतु बंगाल से सिंध तक निर्मित सड़क किनारे एक निश्चित दूरी पर सरायों की व्यवस्था की, जहाँ पर दो घुड़सवार डाक को आगे ले जाने हेतु सदैव मुस्तैद रहते थे। मुगल सम्राट अकबर (1556-1603) ने घुड़सवार डाक के साथ-साथ ‘ऊँट-डाक‘ का भी आरम्भ किया। पर ये सारी ‘शाही डाक‘ सेवा केवल सम्राट, उसके प्रमुख दरबारियों, पुलिस और सेना हेतु ही थी।  आम जनता से इनका कोई सरोकार नहीं था। शाही डाक सेवा के अलावा विभिन्न वर्गों की अपनी अलग-अलग डाक-सेवायें थीं। सम्पन्न सेठ-साहूकारों की अपनी ‘महजनी डाक सेवा‘ थी तो मारवाड़ (जोधपुर) में मिर्धा जाति के कतिपय लोगों द्वारा ‘मिर्धा डाक‘, चिल्का डाक एवं मेवाड़, मालवा आदि में ब्राह्मणों द्वारा चलायी गयी ‘ब्राह्मणी डाक‘ सेवा थी।

 अंग्रेजों के भारत आगमन के साथ ही ईस्ट इंडिया कम्पनी ने सन् 1688 में मुंबई में एक डाकघर खोलकर अपनी पृथक डाक सेवा का श्रीगणेश कर डाला। इस कंपनी डाक सेवा के वाहक भी डाक धावक या घुड़सवार ही थे। सन् 1766 में राबर्ट क्लाइव ने भी इस संबंध में कुछ प्रयास किए और 27 मार्च 1776 को बंगाल में सर्वप्रथम नियमित डाक सेवा का आरम्भ किया।  इस हेतु जमींदारों को ‘डाक धावक‘ उपलब्ध कराने हेतु कहा गया और इस प्रकार ‘जमींदारी डाक‘ का आरम्भ हुआ।  पर सही अर्थों में आधुनिक डाक सेवा का आरम्भ वारेन हेस्टिंग्ज ने किया। 31 मार्च 1774 को कलकत्ता जीपीओ के गठन और पोस्टमास्टर जनरल की नियुक्ति पश्चात प्रथम बार प्रति सौ मील की दूरी हेतु दो आने के मूल्य वाले तांबे के टिकट सिक्के शुल्क के रूप में निर्धारित किये गये।  इसी दौरान प्रथम डाकिया की भी नियुक्ति हुई। वारेन हेस्टिंगस द्वारा संचालित व्यवस्था मात्र देश के मुख्य नगरों तक ही सीमित थी, अतः एक समानांतर ‘जिला डाक सेवा‘ का आविर्भाव हुआ।  इसका उद्देश्य जिले के मुख्यालय को जिले के शेष नगरों से जोड़ना था।  इसके व्यय का प्रबंध जमीदारों पर और नियंत्रण जिले के अधिकारियों द्वारा होता था।  इस व्यवस्था में पत्रों का वितरण सिपाही व चैकीदारों द्वारा होता जो अपनी मर्जी से पत्र शुल्क वसूलते।

वर्ष 1837 में लागू ‘प्रथम डाकघर अधिनियम‘ ने डाक सेवाओं में क्रान्तिकारी परिवर्तन लाये। इसने सभी प्राइवेट डाक सेवाओं को समाप्त कर सरकार को डाक व्यवस्था पर अनन्य एकाधिकार दे दिया। आधुनिक डाक सेवाओं के इतिहास में पहली बार नियमित पोस्टमास्टर की नियुक्ति आरम्भ हुयी। इससे पूर्व जिले के अन्य वरिष्ठ अधिकारी ही अपने कर्तव्यों के साथ-साथ पोस्टमास्टर का भी दायित्व निर्वाह करते थे। इस अधिनियम के तहत ही प्रथमतः जनता हेतु डाक सेवायें खोली गईं और 1 अक्टूबर 1837 को प्रथम ‘जनता डाकघर‘ खोला गया।

वर्ष 1854 कई कारणों से भारतीय डाक के इतिहास में अविस्मरणीय रहेगा। प्रथमतः, लार्ड डलहौजी द्वारा 1 अक्टूबर 1854 को डाक विभाग को एक महानिदेशक श्री एल0पी0ए0बी0रिडेल के अधीन लाना। द्वितीयतः, राष्ट्रीय स्तर पर प्रथमतः 1 अक्टूबर 1854 को डाक-टिकट जारी करना। यद्यपि इससे पूर्व 1852 में डाक टिकट जारी करके भारत एशिया में डाक टिकट जारी करने वाला प्रथम राष्ट्र बना था, पर वह मात्र सिंध प्रांत हेतु ही था। तृतीयतः, डाक टिकट के परिचय के साथ ही बिना दूरी का ध्यान रखे ‘एक समान डाक दर‘ को लागू करना। चतुर्थतः, ‘अखिल भारतीय डाक सेवा‘ का गठन। पंचम, सर्वप्रथम ‘लेटर बाक्स’ की स्थापना। षष्टम, पोस्टमास्टर जनरल को जीपीओ के कार्यक्षेत्र से मुक्त कर जीपीओ हेतु स्वतंत्र स्थापना की गयी।

सन् 1854 के बाद डाक विभाग द्वारा विभिन्न सेवाओं का आरम्भ हुआ- फील्ड पोस्ट आफिस (1856), लिफाफा (1856), अन्तर्देशीय पत्र (1857), रेलवे छँटाई सेवा (1863), शाखा डाकघर (1866), पंजीकृत लिफाफा (1866), पोस्ट बैग (1866), चलित डाकघर (1867), आर.एल.ओ. (1872), मुद्रित लिफाफा (1873), पंजीकृत पत्र पावती (1877), मूल्यदेय पार्सल सेवा (1877), बीमा पत्र (1878), पोस्टकार्ड (1879), मनीआॅर्डर (1880), डाकघर बचत बैंक (1882), टेलीग्राम संदेश (1883), डाक जीवन बीमा (1884), टेलीग्राम मनीअॅार्डर (1880), सैन्य पेंशन का वितरण (1890), सर्टिफिकेट आफ पोस्टिंग  (1897), एयर मेल सेवा (1911), नकद प्रमाण पत्र (1917), व्यापारिक जवाबी पत्र (1932), राजस्व टिकट बिक्री  (1934), इंडियन पोस्टल आर्डर (1935) इत्यादि। आजादी पश्चात तो भारतीय डाक ने तमाम नये आयाम छुये। भारतीय डाक को यह गौरव प्राप्त है कि अगर 1852 में तत्कालीन भारत के एक प्रांत सिंध ने एशिया का प्रथम डाक टिकट जारी कर इतिहास दर्ज कराया तो 21 फरवरी 1911 को इलाहाबाद से नैनी के मध्य विश्व की प्रथम एयर मेल सेवा आरम्भ करने का श्रेय भी भारत के ही खाते में दर्ज है। राष्ट्रमण्डल देशों में भारत पहला देश है जिसने सन् 1929 में हवाई डाक टिकट का विशेष सेट जारी किया।

भारत एक कृषि प्रधान एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था वाला देश है, जहाँ सेवाओं को अन्तिम व्यक्ति तक पहुंचाना ही
सरकार की प्राथमिकता है। डाक विभाग ने प्रत्येक नागरिक के जीवन को प्रभावित किया है, चाहे वह डाक, बैंकिंग, जीवन बीमा और धनांतरण के माध्यम से हो अथवा रिटेल सेवाओं के माध्यम से। 31 मार्च 2012 की स्थिति के अनुसार देश में इसका 1,54,822 डाकघरों का नेटवर्क है जो कि विश्व का सबसे बड़ा नेटवर्क है। इनमें  से 1,39,086 डाकघर ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित है। विभाग का प्रमुख कार्यकलाप डाक की प्रोसेसिंग, पारेषण और इसका वितरण करना है। 5.62 लाख से अधिक पत्र-पेटिकाओं से डाक एकत्र की जाती है जिसे डाक कार्यालयों के नेटवर्क द्वारा प्रोसेस किया जाता है तथा इसे रेल, सड़क और वायु मार्ग से देश भर में पे्रषिती तक पहुँचाया जाता है। इसी प्रकार ई-एमओ, घर-घर धन प्रेषण सेवा, आईएमओ तत्काल मनीआर्डर जिसके जरिए धन तत्काल पहुँच जाता है तथा मोबाइल से मोबाइल मनीआर्डर के माध्यम से प्रेषण से पाने वाले के पास धन प्रेषित किया जाता है। इस प्रकार डाकघर एक देशव्यापी सेवा प्रदाता के रूप में कार्यरत है। 

भारतीय डाक ने समाज में अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए लोगों के कारोबार और वित्तीय आवश्यकताओं के अनुरूप अनेक व्यावसायिक एवं वित्तीय कार्यकालापों को प्रारंभ किया। विभाग ने नए अवसरों का पता लगाने तथा नई सेवाओं को विकसित करने में अपने को संलग्न किया। व्यवसायिक प्रक्रियाओं को पुनः व्यवस्थित करने तथा प्रचालनात्मक कार्यकुशलता पर विशेष ध्यान दिया गया है। आर्थिक उदारीकरण के इस युग में डाकघर सामाजिक लाभ भुगतान, मनरेगा भुगतान, आदि जैसे अपने सामाजिक दायित्वों तथा वाणिज्यिक और प्रतिस्पर्धी वातावरण की चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए तैयार है। नेटवर्क और आईटी से युक्त डाकघर अपने देशव्यापी नेटवर्क के माध्यम से देश के कोने-कोने को कवर करते हुए एक प्रत्यक्ष लाभ अंतरण प्रदाता के रूप में स्थापित हो रहा है। जहाँ डाक विभाग एक ऐसा विशालतम नेटवर्क बना रहा जिसने अपने सेवाओं के साथ बहुत से लोगों के जीवन को प्रभावित किया, वहीं विश्वसनीयता और गति सेवा की महत्वपूर्ण विशेषताएं बन गईं। वैल्यू फार मनी, बहुविध वितरण चैनल, घर-घर तक सेवा की पहुँंच, ग्राहक का आराम महत्वपूर्ण हो गए। भारतीय डाक आईटी आधुनिकीकरण परियोजना-2012 डाक सेवाओं को प्रौद्योगिकी सम्पन्न, स्वावलम्बी, मार्केट लीडर में तब्दील करने हेतु उभर कर सामने आई। इसके द्वारा जहाँ डाकघरों  में कोर बैंकिंग लागू की जा रही है, वहीं आईटी परियोजना द्वारा देश के दूरस्थ और अंतिम छोर तक प्रौद्योगिकी के लाभ पहुँचा कर शहरी व ग्रामीण के बीच अंतर को कम किए जाने की भी आशा है। 


निदेशक डाक सेवाएं
इलाहाबाद परिक्षेत्र, इलाहाबाद (उ.प्र.)-211001


Monday, September 29, 2014

इलाहाबाद सिटी उपडाकघर अब नए विभागीय भवन में

इलाहाबाद में जानसेनगंज स्थित इलाहाबाद सिटी उपडाकघर ने दिनांक 29.09.2014 को रेलवे स्टेशन के समीप, रेलवे मेल सर्विस कैम्पस स्थित नये विभागीय भवन (प्रयाग होटल के सामने) में कार्य करना आंरभ कर दिया। इस अवसर पर इलाहाबाद क्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल श्री एम. ई. हक ने  निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव संग फीता काटकर इसका शुभारंभ किया। पोस्टमास्टर जनरल श्री एम. ई. हक ने कहा कि सिटी डाकघर के नये भवन में आने से कर्मचारियों व ग्राहकों दोनों के लिए एक सुखद वातावरण पैदा होगा।

इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि इलाहाबाद शहर में इलाहाबाद सिटी प्रथम उपडाकघर है जो विभागीय भवन मंे शिफ्ट हुआ है। यह नव-अवस्थित उपडाकघर पुरानी जगह पर स्थित इलाहाबाद सिटी डाकघर से मात्र 500 मीटर की दूरी पर स्थित है। नये विभागीय भवन में ग्राहकांे की सुविधा हेतु पूर्ण कम्प्यूटरीकृत रूप में 4 काउंटर बनाये गये हंै। इसके अलावा सहायक डाक अधीक्षक (सेन्ट्रल) का कार्यालय भी इसी भवन में कार्यरत होगा।


गौरतलब है कि इलाहाबाद सिटी डाकघर से जानसेनगंज, अहमदगंज, दायराशाह अजमल, कल्याणी देवी, चैक, कीटगंज, वी.एन.मार्ग, हिन्दी साहित्य सम्मेलन, बहादुरगंज, मुट्ठीगंज, कटघर, हटिया, कृष्णानगर, मीरापुर, रोशनबाग, नेहरू नगर व नुरूल्लाह रोड इत्यादि इलाकों की डाक वितरण का कार्य होता है। 

इस अवसर पर प्रवर डाक अधीक्षक श्री रहमतउल्लाह, सहायक डाक अधीक्षक श्री पी.सी. तिवारी, पोस्टमास्टर श्री जी.के. मिश्रा सहित तमाम अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

Allahabad City Post Office (Johnsentganj) shifted to new deptl. Building


Allahabad City Post Office situated at Johnstenganj has started working in a new departmental building near Allahabad Railway Station (in front of Prayag Hotel) in the campus of Railway Mail Service wef 29 September, 2014. On this occasion, Post Master General Mr. M. E. Haque inaugurated the functioning by ribbon cutting at new building.  Post Master General Mr. M. E. Haque said that after shifting to new building, staff and customers will have a pleasant atmosphere. Now other services shall be started at this Sub Post Office.


Mr. Krishna Kumar Yadav, Director Postal Services, Allahabad Region said that Allahabad City Post Office is the first Sub Post office in Allahabad city started functioning in departmental building. This newly shifted Post Office is at a distance of about 500 meters from the old place. In the new Post Office working in departmental building, four fully computerized counters have been started for customers. Other than this the office of Assistant Superintendent of Post Office (Central) will also work in the same building.

It is worthwhile to mention here that Allahabad City Post Office delivers mail for areas of Johnstenganj, Ahmadganj, Dairashah Azmal, Kalyani Devi, Chowk, Kudganj, V. N. Marg, Hindi Sahitya Sammelan, Bahadurganj, Mutthiganj, Katghar, Hatia, Krishnanagar, Meerapur, Roshanbagh, Nehru Nagar, and Nurullah Road etc.


On this occasion a number of officers including Senior Superintendent of Post Offices Mr. Rahmatullah, Asst. Director Mr. MP Mishra, Assistant Supdt. of Posts P. C. Tiwari, Postmaster Mr. G. K. Mishra were present. 

हिंदी को सिर्फ पखवाड़ा नहीं, रोजमर्रा से जोड़कर देखने की जरूरत - डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव

हिंदी हमारे रोजमर्रा की भाषा है और इसे सिर्फ पखवाड़ा से जोड़कर देखने की जरूरत नहीं है। सरकारी कार्य में हिंदी को बढ़ावा देने के लिए दिल से कार्य करें ताकि हिंदी को जो राष्ट्रभाषा का दर्जा दिया गया है वह सही मायने में प्राप्त हो सकें। उक्त उद्गार हिंदी पखवाड़ा के समापन अवसर पर 29 सितंबर को सिविल लाइंस स्थित पोस्टमास्टर जनरल, इलाहाबाद परिक्षेत्र कार्यालय में  निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव ने व्यक्त किये।  श्री यादव ने कहा कि हिन्दी भारतीय संस्कृति के मूल तत्वों की अभिव्यक्ति का माध्यम होने के साथ-साथ भारत के संविधान में वर्णित भावनात्मक एकता को सुदृढ़ करने का जरिया भी है। यह भाषा देश की एकता और अखंडता का बढ़ावा देने में भी सहायक रही है। हिंदी को यदि राजभाषा का संवैधानिक दर्जा दिया गया है तो उसके पीछे इसके समृद्ध ऐतिहासिक विरासत एवं स्वत्रतंत्रता आदोलन में प्रखर भूमिका रही है। जरूरत इस बात की है कि हम इसके प्रचार-प्रसार और विकास के क्रम में आयोजनों से परे अपनी दैनिक दिनचर्या से भी जोड़ें।


निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव ने इस अवसर पर हिंदी पखवाड़ा के पोस्टमास्टर जनरल कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम के विजेताओं को सम्मानित भी किया। निबंध प्रतियोगिता हेतु विक्रम सिंह, अजय प्रकाश दिवाकर, आर. के. श्रीवास्तव, हिन्दी टंकण हेतु विनीत टन्डन, राजेन्द्र प्रसाद यादव, रत्नेश कुमार तिवारी एवं स्लोगन प्रतियोगिता हेतु राम बहादुर, इजलेश कुमार, अशोक कुमार पांडेय को क्रमशः प्रथम, द्वितीय व तृतीय पुरस्कार से सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन श्री राम शुक्ला ने किया। कार्यक्रम के आरंभ में इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव का सहायक निदेशक श्री मधुसूदन प्रसाद मिश्र ने स्वागत किया और हिंदी पखवाड़ा के दौरान आयोजित कार्यक्रमों की रूपरेखा पर प्रकाश डाला। 

Hindi Pakhwara is not an event only but we need to look at its broader aspect - KK Yadav

A programme was organized in Postmaster General Office, Allahabad Region on the occasion of closing ceremony on Hindi Pakhwara on 29th September, 2014. In the beginning of the programme, Mr. MP Mishra, Asstt. Director welcomed Mr. Krishna Kumar Yadav, Director Postal Services, Allahabad Region and briefed about the programme organized during Hindi Pakhwara.


Mr.Krishna Kumar Yadav, Director Postal Services, Allahabad region said that Hindi is our mother tongue and one should not connect it with Pakhwara only. He also highlighted the role of postal department in popularizing Hindi and said that using its vast network, postal department had united the nation and played an important role in implementation of Rajbhasha policies. Director Mr. Yadav further said that Hindi is not just a language but also a symbol of cultural heritage, which is uniting languages across the country and had played an important role in emotional unity and promotion of cultural diversity of the country. He addressed the officers and the employees and urged to encourage Hindi in government work whole heartedly so that the status of national language could reflect in true spirit.

Mr. Krishna Kumar Yadav, Director Postal Services, Allahabad felicitated the winners of various competition organized at Postmaster General Office. For Essay writing Vikram Singh, Ajay Prakash Diwakar, R K Srivastava, for Hindi typing Vineet Tandon, Rajendra Kumar Yadav, Ratnesh Kumar Tiwari and for slogan competition Ram Bahadur, Ijlesh Kumar and Ashok Kumar Pandey were awarded respectively with first, second and third prize.  The programme was conducted by Sree Ram Shukla.




Sunday, September 28, 2014

हिन्दी हमारी अन्तरात्मा और भावनाओं की भाषा है - डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव

हिन्दी हमारी अन्तरात्मा और भावनाओं की भाषा है जो साहित्य-कला-संस्कृति की त्रिवेणी को एकाकार करती है। सृजन एवं अभिव्यक्ति की दृष्टि से यह दुनिया की अग्रणी भाषाओं में से एक है। डिजिटल क्रान्ति के इस युग में हिन्दी इन्टरनेट की दुनिया में भी तेजी से पाँव पसार रही है। आज की युवा पीढ़ी सोशल मीडिया और ब्लाॅगिंग के माध्यम से हिन्दी को नये रूप में स्वीकार रही है। उक्त उद्गार मुख्य अतिथि के रूप में अपने उद्बोधन में इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव ने 'हिंदी पखवाड़ा' के समापन अवसर पर वाराणसी प्रधान डाकघर में 27 सितम्बर को आयोजित एक कार्यक्रम में व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि हिन्दी में विश्व भाषा बनने की क्षमता है। आज हिन्दी सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के तमाम देशों में बोली जाती है। विश्व के लगभग 150 विश्वविद्यालयों में हिन्दी पढ़ाई जाती है। दुनिया में चीनी भाषा के बाद हिन्दी बोलने वालों की संख्या सर्वाधिक है। आज जहाँ कम्प्यूटर एवं इंटरनेट पर हिन्दी की लोकप्रियता चरम पर है, वहीं विदेशों से लोग भारत में हिन्दी सीखने के लिए आ रहे है। श्री यादव ने हिन्दी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज परिवर्तन और विकास की भाषा के रूप में हिन्दी के महत्व को नये सिरे से रेखांकित किया जा रहा है। डाक निदेशक श्री यादव ने जोर देकर कहा कि ऐसे में हिन्दी की प्रतिष्ठा के लिये सरकारी कार्यक्रमों से परे अगर हर हिन्दी भाषी ठान ले कि उसे हिन्दी में ही कार्य करना है तो हिन्दी को आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता। 


कार्यक्रम के आरंभ में मुख्य अतिथि इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव का प्रवर डाक अधीक्षक श्री राज किशोर ने स्वागत किया और हिंदी पखवाड़ा के दौरान आयोजित कार्यक्रमों की रूपरेखा पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर प्रवर डाक अधीक्षक, वाराणसी पूर्वी मंडल श्री राज किशोर ने कहा कि हिंदी हमारी मातृभाषा के साथ-साथ राजभाषा भी है और लोगों तक पहुँच स्थापित करने के लिए टेक्नॅालाजी स्तर पर इसका व्यापक प्रयोग करने की जरूरत है। डाक अधीक्षक, वाराणसी पश्चिमी मंडल श्री टी.बी. सिंह ने कहा कि हिंदी पूरे देश को जोड़ने वाली भाषा है और सरकारी कामकाज में भी इसे बहुतायत में अपनाया जाना चाहिये।




निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव ने इस अवसर पर हिंदी पखवाड़ा के दौरान प्रवर डाक अधीक्षक एवं वाराणसी प्रधान डाकघर में आयोजित कार्यक्रम के विजेताओं को सम्मानित भी किया। प्रवर अधीक्षक कार्यालय में निबंध प्रतियोगिता हेतु संदीप कुमार गुप्ता, सुप्रीता गुप्ता, अंकिता मिश्रा एवं टंकण प्रतियोगिता हेतु मुरारी लाल, संदीप कुमार गुप्ता, प्रतिमा मिश्रा को क्रमशः प्रथम, द्वितीय व तृतीय पुरस्कार से सम्मानित किया। इस क्रम में वाराणसी प्रधान डाकघर में हिन्दी टंकण हरि शंकर यादव, अभिषेक पांडेय, रितु शर्मा, निबन्ध मुनव्वर अली, रंजना प्रजापति, अब्दुल कादिर क्रमशः प्रथम, द्वितीय व तृतीय पुरस्कार से सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन गणेश प्रसाद ने किया। कार्यक्रम में आभार सीनियर पोस्टमास्टर श्री एच जी वर्मा द्वारा किया गया। 


Hindi is the language of our soul and emotions - KK Yadav


A programme was organized in Varanasi HPO on 27 Sept. 2014 to mark the closing of Hindi Pakhwara. The programme started with the felicitation of Mr. Krishna Kumar Yadav, Director Postal Services, by Mr Rajkishore, SSPOs Varanasi East Division, who also outlined the details of various programmes, held during the fortnight.


Speaking on the occasion, Chief Guest Mr. Krishna Kumar Yadav, Director Postal Services, Allahabad Region, said that Hindi is the language of our soul and emotions, which integrates literature, culture and art. In terms of creativity and power of expression of thought Hindi is unparalleled. Mr. Yadav said that in this age of digital revolution, Hindi is also getting polular in the domain of internet. The Young generation of the country is embracing Hindi in the form of social media and blogging. Hindi has the caliber to become a universal language. At present, Hindi is used not only in India but a number of other countries of the world. Hindi is being taught in more than 150 universities of the world. After Chinese language number of Hindi speaking people is the largest in the world. Today, while the popularity of Hindi is spreading rapidly on computer and internet, people from other countries are coming to India to learn Hindi. Elaborating the importance of Hindi, Mr. Yadav said that the importance of Hindi is being realized as the language of change and development. He emphasized that apart from official programmes, if every Hindi speaking person decides that he will work in Hindi, rise of Hindi as a global language will be unstoppable.


Mr Rajkishore, Sr. Supdt of Post Offices Varanasi East Division said that Hindi is not only our mother tounge its also our official language, and there's a need to broden its use through technology to ensure maxium outreach among masses. Mr. T B. Singh, Superintendent Post Offices, Varanasi West said that Hindi is a language integrates the whole nation and its use in official work shall be promoted.



Mr. Krishna Kumar Yadav, Director Postal Services, felicitated the winner of various competition organized at Divisional Office Varanasi and Varanasi HPO. In Divisional office for Essay writing Sandeep Kumar Gupta, Supreeta Gupta, Ankita Mishra, for typing competition Murari Lal, Sandeep Kumar Gupta, and Pratima Mishra were awarded respectively with first, second and third prize.  Similarly, in Varanasi HPO, for Typing competition, Harishankar Yadav, Abhsihek Pandey, and Ritu Sharma, for Essay competition Munnawar Ali, Ranjana Prajapati, Abdul Kadir, were awarded respectively with first, second and third prize. The proceedings of the programme were conducted by Ganesh Prasad. Vote of thanks was expressed by Mr. H. G. Verma, Senior Post Master.



Friday, September 26, 2014

परिवर्तन और विकास की भाषा के रूप में समृद्ध हो रही है हिन्दी - केके यादव, डाक निदेशक

 हिंदी पखवाड़ा के समापन अवसर पर सिविल लाइंस स्थित इलाहाबाद प्रधान डाकघर में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के आरंभ में मुख्य अतिथि इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव का प्रवर डाक अधीक्षक श्री रहमतउल्लाह ने स्वागत किया और हिंदी पखवाड़ा के दौरान आयोजित कार्यक्रमों की रूपरेखा पर प्रकाश डाला। 

इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव ने इस अवसर पर अपने सम्बोधन में कहा कि जिन देशों में अपनी मातृभाषा के प्रति सम्मान है वहाँ विकास भी ज्यादा हुआ है। ऐसे में हिन्दी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हिन्दी भारत की आत्मा है। इसमें देश को एक सूत्र में बांधने की पर्याप्त शक्ति है। उन्होंने कहा कि हिन्दी में विश्व भाषा बनने की क्षमता है। सृजन एवं अभिव्यक्ति की दृष्टि से यह दुनिया की अग्रणी भाषाओं में से एक है। आज हिन्दी सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के तमाम देशों में बोली जाती है। विश्व के लगभग 150 विश्वविद्यालयों में हिन्दी पढ़ाई जाती है। दुनिया में चीनी भाषा के बाद हिन्दी बोलने वालों की संख्या सर्वाधिक है। आज जहाँ कम्प्यूटर एवं इंटरनेट पर हिन्दी की लोकप्रियता चरम पर है, वहीं विदेशों से लोग भारत में हिन्दी सीखने के लिए आ रहे है। श्री यादव ने हिन्दी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज परिवर्तन और विकास की भाषा के रूप में हिन्दी के महत्व को नये सिरे से रेखांकित किया जा रहा है।


प्रवर डाक अधीक्षक इलाहाबाद मंडल श्री रहमतउल्लाह ने कहा कि हिंदी पखवाड़े का आयोजन का उद्देश्य सिर्फ हिंदी की चिंता के लिए नहीं होता बल्कि इसकी उन्नति व प्रगति कैसी हो इसे भी संज्ञान में लेने की आवश्यकता है। सीनियर पोस्टमास्टर, प्रधान डाकघर इलाहाबाद श्री ओ. बी. सिंह ने कहा कि हिंदी पूरे देश को जोड़ने वाली भाषा है और सरकारी कामकाज में भी इसे बहुतायत में अपनाया जाना चाहिये। 

निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव ने इस अवसर पर हिंदी पखवाड़ा के दौरान प्रवर अधीक्षक डाकघर एवं इलाहाबाद प्रधान डाकघर में आयोजित कार्यक्रम के विजेताओं को सम्मानित भी किया। प्रवर अधीक्षक कार्यालय में निबंध प्रतियोगिता हेतु अंकित कुमार तिवारी, प्रियम शर्मा, प्रेम शंकर एवं स्लोगन प्रतियोगिता हेतु प्रेमशंकर, सीरत दुबे, नेहा अग्रवाल को क्रमशः प्रथम, द्वितीय व तृतीय पुरस्कार से सम्मानित किया। इस क्रम में इलाहाबाद प्रधान डाकघर में हिन्दी गीत, भाषण, निबन्ध एवं स्लोगन प्रतियोगिताओं में शशिभूषण पांडेय, विभु कुमार, राधेश्याम पांडेय, जीपी मांझी, स्वाती अग्रवाल, अमर सिंह, ओमप्रकाश पांडेय, को पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम का संचालन डाक निरीक्षक दीपक कुमार ने किया।