Wednesday, December 24, 2014

डाक विभाग और स्नैपडील में हुआ करार : अब आनलाइन बुक होंगी बनारसी साडि़याँ, स्पीड पोस्ट से होगी तत्काल डिलिवरी

बनारसी साडि़याँँ पूरी दुनिया में मशहूर हैं। चाहे शादी-ब्याह का अवसर हो या अन्य कोई त्योहार, इन्हें खरीदने हेतु लोग दूर-दूर से आते हैं। कई बार वे मन मसोस कर भी रह जाते हैं कि, काश बनारसी साड़ी उन्हें मात्र एक क्लिक पर वाजिब दाम में उपलब्ध हो जाए। इसी प्रकार बुनकर भी चाहते हैं कि बिना किसी बिचैलिये के उनके काम की सराहना हो और उन्हें अपनी मेहनत का वाजिब मूल्य भी मिल सके।

इसी के मद्देनजर डाक विभाग अब बनारसी साड़ी के बुनकरों को एक प्लेटफार्म मुहैया कराएगा। इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि डाक विभाग द्वारा बनारसी साड़ी के विक्रय हेतु मेसर्स स्नैपडील डॉट कॉम के सहयोग से एक आनलाइन पोर्टल की शुरुआत की जा रही है, जिसमें बुनकरों एवं फुटकर विक्रेताओं को सीधे उपभोक्ताओं के संपर्क में लाने के लिए प्लेटफार्म उपलब्ध कराया जाएगा। 'सुशासन दिवस' के अवसर पर 25 दिसंबर को आरम्भ हो रही इस योजना के अंतर्गत कोई भी व्यक्ति या फर्म बनारसी साड़ी व अन्य सम्बंधित उत्पादों  के ऑनलाइन विक्रय हेतु वाराणसी प्रधान डाकघर में अपने आपको पंजीकृत करा सकता है। श्री यादव ने बताया कि, पंजीकृत व्यक्ति/फर्म स्नैपडील डॉट कॉम के साथ मिलकर वस्तु का विक्रय मूल्य तय करेंगे एवं विक्रय हेतु वस्तु का विवरण (फोटोग्राफ एवं वस्तु के मूल्य सहित) स्नैपडील डॉट कॉम वेबसाइट पर उपलब्ध कराया जाएगा। जिससे देश-विदेश के किसी भी कोने में बैठा व्यक्ति उक्त वेबसाइट के माध्यम से अपने पसंद की बनारसी साड़ी हेतु अग्रिम भुगतान कर आनलाइन आर्डर कर सकेगा। उक्त आर्डर की प्राप्ति पर पंजीकृत व्यक्ति/फर्म एवं डाकघर को एक संदेश वेबसाइट के माध्यम से प्राप्त होगा जिसके उपरांत पंजीकृत व्यक्ति/फर्म उपभोक्ता की पसंद की उक्त वस्तु को डाकघर में लाकर स्पीड पोस्ट सेवा के माध्यम से उपभोक्ता को प्रेषित करेगा। स्पीड पोस्ट से भेजने पर त्वरित और सुनिश्चित वितरण की गारंटी रहेगी। 

डाक निदेशक श्री यादव ने कहा कि, यह भारतीय डाक विभाग की एक महत्वाकांक्षी योजना है और इसके तहत बुनकरों से कोई भी शुल्क नहीं लिया जायेगा।   इस योजना का उद्देश्य बुनकरों/कलाकारों  को अधिक से अधिक लाभ दिलाना एवं उपभोक्ताओं को उचित कीमत पर वास्तविक वस्तु उपलब्ध करना है।
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Tuesday, December 23, 2014

’इलाफिलेक्स 2015’ में दिखेगा डाक टिकटों का इतिहास : उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र में होगी डाक टिकट प्रदर्शनी

डाक टिकट सिर्फ पत्र भेजने का ही माध्यम नहीं हैं, बल्कि इनके माध्यम से हम अपनी साहित्य, कला, संस्कृति, पर्यावरण एवं महान व्यक्तित्वों के साथ तमाम महत्वपूर्ण घटनाक्रमों के बारे में भी जान सकते हैं। इसी के मद्देनजर डाक विभाग द्वारा इलाहाबाद में दो दिवसीय डाक टिकट प्रदर्शनी ’’इलाफिलेक्स 2015’’ का आयोजन 9-10 जनवरी 2015 को किया जा रहा है। 

इस सम्बन्ध में जानकारी देते हुए इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि डाक विभाग द्वारा उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र में स्थित कला वीथिका में आयोजित होने वाली उक्त प्रदर्शनी में देश-विदेश के तमाम बहुमूल्य डाक टिकट प्रदर्शित किये जाएंगे। इसमें सिर्फ इलाहबाद ही नहीं बल्कि बाहर के भी फिलेटलिस्ट अपने डाक-टिकटों व अन्य फिलेटलिक सामग्रियों की प्रदर्शनी लगाएंगे। डाक निदेशक श्री यादव ने बताया कि इस प्रदर्शनी के माध्यम से लोग जहां तमाम डाक टिकटों के पीछे छिपी कहानी से अपने को जोड़ सकेंगे वहीं युवाओं में डाक टिकट संग्रह के प्रति अभिरुचि भी विकसित की जाएगी। 

इस प्रदर्शनी के दौरान करीब 80 फ्रेमों में डाक टिकट प्रदर्शित किये जाएंगे। इनमें आमंत्रित वर्ग एवं प्रतियोगिता वर्ग में सीनियर व जूनियर दो भाग होंगे। श्री यादव ने बताया कि जो लोग इस डाक टिकट प्रदर्शनी में भाग लेना चाहते हैं वे निश्चित प्रोफार्मा में अपनी प्रविष्टि 31 दिसम्बर 2014 तक प्रवर डाक अधीक्षक, इलाहाबाद मण्डल के कार्यालय में जमा करा सकते हैं। प्रदर्शनी के दौरान स्कूली बच्चों हेतु फिलेटलिक वर्कशाप, पत्र-लेखन, स्टैम्प डिजाइन एवं क्विज जैसी तमाम आर्कषक प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया जायेगा।






Thursday, December 18, 2014

CIC recommends ordinary postal stamp as RTI fee instrument

People seeking information under RTI Act may now be able to use postal stamps as application fee if a recommendation of the Central Information Commission is accepted by the Centre. 

Two Information Commissioners in two separate cases-- R K Jain and Raghubir Singh-- have made a common recommendation to the Department of Personnel and Training for implementing postal stamps as a mode of payment of RTI fee thus reducing hassles of applicants. 

RTI users now have to pay a fee of Rs 10 either in cash, bank demand draft or Indian Postal Order to get information. 

Some authorities like Army and Indian air force refuse to accept applications drawn in favour of Accounts Officer despite clear directives of the Department of Personnel and Training causing hassles to applicants. 

"The appellant has submitted that the postal department's recommendation for use of ordinary postal stamps for payment of RTI fee is both practical and user friendly. The Commission finds merit in the appellant's submissions and would urge the DoPT to consider this at the earliest. 

"In this connection it is noted that the government of Tamil Nadu has already allowed payment of RTI fee by affixing court fee stamps, Information Commissioner Basant Seth said in the matter of activist R K Jain. 

Agreeing with Seth, Information Commissioner Sridhar Acharyulu also issued an exhaustive order on the issue recommending to DoPT to avail the opportunity of giving New Year Gift to the citizens by permitting and publicising the use of ordinary postal stamps for the payment of RTI fee. 

"Accepting postal stamps for RTI fee would resolve many difficulties in payment, besides preventing wastage of public money in returning or rejecting the IPOs or spending much larger amounts than Rs 10, for realising Rs 10, and avoidable litigation," he said. 

Acharyulu said returning the IPO to the appellant involves writing a letter on a white paper, covering in an envelop, spending public office's time which could have been used for some other productive work besides spending Rs 25 or Rs 30 for speed post. 

The case relates to applicant Raghubir Singh whose application was rejected an year ago as it was not correctly drawn in the favour of authority designated by the Directorate of Education, Government of Delhi. 

"In all the public authority will be spending approximately Rs 35 to Rs 50. It will also cause unnecessary expenditure for the appellant, who has already spend Rs 20 to get a postal order for Rs 10. For returning and taking a different IPO he has to spend again the same amount," Acharyulu said. 

The Commissioner said spending Rs 50 to reject the IPO worth Rs 10 on silly grounds would amount to wastage of Rs 50 plus Rs 60. 

"By accepting to deposit the postal order of Rs 10, they would be preventing expenditure of Rs 60 and use Rs 10," he said. 

He said it is a misuse of the power of PIO to reject to receive RTI application and the fee amounting to harassment of the applicant. 

"It is also a kind of denial of information. Any kind of delay in furnishing of information on such grounds, violates the letter and spirit of RTI Act on several counts," he said. 

Issuing a show cause notice for denying information, the Commissioner directed all the PIOs of Public Authority to submit separate reports to this Commission explaining how many IPOs they have rejected so far and what are the grounds of rejection, from January 2014 to December 10, 2014, within 15 days from the date of receipt of this order.

Director Postal Services, KK Yadav honoured with "Prayag Gaurav" for administrative achievements

Mr. Krishna Kumar Yadav, Director Postal Services, Allahabad Region was conferred with the "Prayag Gaurav" for his administrative achievements. Mr. Yadav got this honor in a programme organized by the "Prayag Gaurav Samman Evam Sanskritik Aayojan Jan Seva Samiti" in the auditorium of Vigyan Parishad Prayag, Allahabad on 13th December 2014. Professor Girish Chandra Tripathi, Chancellor of Banaras Hindu University honoured Mr. Yadav in the gracious presence of Justice S R Singh, Mr. Ashok Mehta, Additional Solicitor and Mayor of Allahabad Mrs. Abhilasha Gupta. The programme was chaired by the Justice Sudhir Narayan, Member of Kaveri Tribunal.

Nazim Ansari, Founder President of the organizing committee, told that many dignitaries in Allahabad are working in different fields and this award is a attempt to provide a new identity to their achievements. On the occasion 12 celebrities from different fields were awarded with 'Prayag Gaurav' honour.  In addition to Mr. Krishna Kumar Yadav, Director Postal Services, Allahabad Region, Professor Ali Ahmad Fatmi for Literature, Professor Badri Narayan and Mr. Sanjay Srivastava in the filed of education, Dr. S.P Singh and Dr. S. P. Narayan in the field of Medical, Mr. Anil Kumar Gupta in the field of Social Service, Mr. Atul Yaduvanshi in the field of acting, Mr. Mahesh Chandra Chaturvedi in the field of Law & Justice, Mr. Dinesh Singh in the field of journalism, Mr. Omkar Nath Khanna and Archana Tulsiyani in the field of business were also awarded with the 'Prayag Gaurav' honour on this occasion. 

It is important to add here that the choice of the celebrities to be honoured was made by a committee headed by Justice Sakha Ram Singh. On this occasion Mr. Rajeev Anand, Sardar Ajeet Singh, Rajendra Tiwari (Dukaanji), Dr. A Raja and several other dignitaries were present.


Sunday, December 7, 2014

ई-कॉमर्स सेवाओं में अपना योगदान बढ़ाने के लिए डाक विभाग ने उठाये कदम

भारतीय डाक विभाग देश में तेजी से बढ़ रही ई-कॉमर्स सेवाओं में अपना योगदान बढ़ाने के लिए खुद को नए कलेवर में ढाल रहा है। इन सेवाओं के लिए वह डेटा केंद्र स्थापित कर रहा है, डाकियों को जरूरी उपकरण दिए जा रहे हैं और डिलीवरी पर नकदी मिलने जैसी सुविधाओं के लिए सॉफ्टवेयर लागू कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक आधुनिकीकरण परियोजना पर एक अंतर मंत्रालई संचालन समिति द्वारा नजर रखी जा रही है। इस समिति में वित्त मंत्रालय, इलेक्ट्रॉनिक्स व सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के अधिकारी एवं अन्य भागीदार शामिल हैं। इसमें कोई शक नहीं कि  कि डाक और पार्सल गंतव्य तक पहुंचाने में विशाल नेटवर्क रखने वाला भारतीय डाक देशभर में डिलीवरी सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए सर्वोत्तम एजेंसी है।

पिछले दिनों दूरसंचार एवं आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भारतीय डाक को एक ऐसा ढांचा तैयार करने को कहा  है जिससे स्थानीय कारीगरों को भी अपने उत्पादों की ऑनलाइन बिक्री करने का अवसर मिले।  उन्होंने कहा कि 'मैंने भारतीय डाक से ऐसा ढांचा तैयार करने को कहा है जिसमें काशी के कारीगरों के अलावा मेरठ के हथकरघा व तिरूपुर के कारीगर डाक विभाग की पहुंच का फायदा उठा सकें और ई-कॉमर्स क्षेत्र में एक बड़ा ब्रांड बन सकें।' प्रसाद ने कहा कि सरकार की नीति संतुलित विकास की होनी चाहिए। ऐसा ढांचा लाने की जरूरत है जो एकतरफा न होकर भागीदारी वाला हो।

गौरतलब है कि  भारतीय डाक का डाक नेटवर्क दुनिया में सबसे बड़ा है। देश में भारतीय डाक के करीब 1.55 लाख डाक घर हैं। सूत्रों ने कहा कि इस परियोजना के तहत ई-कॉमर्स फर्मों को वेब आधारित एकीकरण प्रणाली और निगरानी सेवा उपलब्ध कराने की भी संभावना तलाशी जा रही है। भारतीय डाक करीब 15,000 डाकियों को हाथ में लेकर चलने वाले उपकरण एवं डाक कार्यालयों में अन्य हार्डवेयर उपलब्ध कराएगी जिनकी खरीद दिसंबर 2015 तक पूरी होने की संभावना है। इन उपकरणों से ग्रामीण इलाके इलेक्ट्रॉनिक संपर्क से जुड़ जाएंगे।

इस बीच  ई-कॉमर्स कंपनियों के साथ भागीदारी करने के बाद से विभाग के कारोबार में कई गुना का इजाफा हुआ है। डाक विभाग द्वारा साझा किए गए उद्योग के अनुमान के अनुसार देश में ई-कॉमर्स कारोबार 2012 में 6 अरब डालर था जिसके 2021 तक 76 अरब डॉलर पर पहुंच जाने की उम्मीद है। 


Friday, December 5, 2014

डाक विभाग का होगा कायाकल्प : बीमा, बैंक, ई-कॉमर्स के क्षेत्र में लाने की सिफारिश

डाकघरों का कायाकल्प करने के लिए बनी सुब्रमण्यम समिति ने तमाम ऐसे सुझाव दिए हैं, कि उसकी रिपोर्ट भी यदि उसी गंभीरता से सरकार लागू कर दे तो जल्द ही देश के डाकघरों का हुलिया ही बदल जाएगा।  भारतीय डाक में बदलाव करने पर सुझाव देने के लिए  पूर्व कैबिनेट सचिव टीएसआर सुब्रमण्यम की अध्यक्षता में गठित इस समिति ने तीन महीने के भीतर गुरुवार, 4 दिसंबर 2014  को अपनी रिपोर्ट दे दी। रिपोर्ट में डाक विभाग को तत्काल रूप से बैंकिंग, बीमा व ई-कॉमर्स क्षेत्र में लाने की सिफारिश की गई है। वहीं, आधार कार्ड व सरकारी पेंशन सेवा क्षेत्र में भी डाक विभाग की सेवा लेने की बात कही गई है।  साथ ही इंडिया पोस्ट में कॉरपोरेट सेक्टर के बीच बिजनेस टू बिजनेस सेवा देने के लिए एक नई शाखा बनाने का सुझाव दिया गया है। 

संचार व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने इन सुझावों के बारे में आश्वासन दिया कि सरकार इसे प्राथमिकता के तौर पर लेगी और जल्द से जल्द फैसला किया जाएगा।  उन्होंने यह भी कहा कि डाक विभाग की मदद से कॉमन सर्विस सेंटर के जरिए ई-डिलीवरी सेवा को अंजाम दिया जा सकता है। प्रसाद ने कहा कि ई-कॉमर्स के क्षेत्र में डाक विभाग बड़ी भूमिका निभा सकता है। डाक विभाग अपने नेटवर्क के माध्यम से मधुबनी पेंटिंग्स से लेकर तिरुपुर के टेक्सटाइल तक की बिक्री कर सकता है।

कमेटी की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय डाक विभाग के पास 1.55 लाख पोस्टमैन का नेटवर्क है जिसका इस्तेमाल बिजनेस कॉरस्पांडेंट के रूप किया जा सकता है। इनके माध्यम से ग्रामीण इलाके में स्वास्थ्य, फसल, दुर्घटना व अन्य प्रकार की बीमा सेवा को शुरू किया जा सकता है। डाक विभाग को इन सेवाओं से जोड़ने के लिए अलग-अलग सब्सिडियरी कंपनी बनाने की सिफारिश की गई है। समिति ने सुझाव दिया है कि भारतीय पोस्ट को पांच अलग-अलग सहयोगी इकाइयों (सब्सिडियरी) में बांट दिया जाना चाहिए। एक सब्सिडियरी डाक व्यवस्था का मौजूदा काम को जारी रखेगी। इसके अलावा बैंकिंग, बीमा व ई-कॉमर्स में अलग-अलग सहयोगी इकाइयां काम करेंगी। पांचवी सब्सिडियरी गांवों में शहरों जैसी सेवाओं का पहुंचाने व बिजनेस टू बिजनेस सेवाओं के लिए काम करेगी। समिति ने तीन सौ तरह की सेवाओं को चिन्हित किया है जो यह सब्सिडियरी कर सकती है। इनमें सिर्फ डाक वाली मुख्य सब्सिडियरी सब्सिडी वाले मॉडल पर काम करेगी, लेकिन अन्य सभी काम मुनाफे के आधार पर होगा।

सुब्रमण्यम ने बताया, 'हमारी सिफारिश के आधार पर अगर कदम उठाए जाते हैं तो भारतीय डाकघरों में कार्यरत किसी भी कर्मचारी की नौकरी नहीं जाएगी, बल्कि पांच लाख नई नौकरियां पैदा होंगी।' ग्रामीण जनता को बहुत ही तेजी से वित्तीय समावेश का फायदा पहुंचाया जा सकेगा। बैंकिंग से जुड़ी सब्सिडियरी का नाम पोस्ट बैंक ऑफ इंडिया (भारतीय डाक बैंक) रखा जा सकता है। यह बैंक हर तरह की बैंकिंग सेवा देगा। इसी तरह से बीमा क्षेत्र में गठित कंपनी जीवन बीमा, फसल बीमा व स्वास्थ्य बीमा की सुविधा दे सकती है। चूंकि ई-कॉमर्स भारत में तेजी से विकसित हो रहा है, इसलिए भारतीय डाक को इसका फायदा उठाने के लिए अभी से मुस्तैद हो जाना चाहिए।

देश भर में 1.50 लाख से ज्यादा डाकघर हैं, जो बैंक, बीमा व ई-कॉमर्स की शाखा के लिए रीढ़ की हड्डी का काम कर सकते हैं। फिलहाल भारतीय डाक के राजस्व में सालाना 48 फीसद की वृद्धि हो रही है। इसके उलट खर्चे में 78 फीसद का इजाफा हो रहा है। इसकी तमाम सेवाएं घाटे में चल रही हैं।

समिति के सुझाव--
1. बैंक, बीमा व ई-कॉमर्स के लिए तीन सब्सिडियरी बनाई जाएं
2. पोस्ट बैंक ऑफ इंडिया के नाम से शुरू करे बैंकिंग सेवा
3. कॉरपोरेट सेक्टर की मदद के लिए बने अलग इकाई
4. तीन सौ तरह की सेवाएं दे सकता है भारतीय डाक
5. गांवों में शहरों जैसी सेवा पहुंचाने में हो डाकघरों का इस्तेमाल

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देश भर में फैले डाकघरों के नेटवर्क का लाभ उठाने के लिए गठित कार्यबल ने बैंकिंग, बीमा और ई-कॉमर्स के क्षेत्र में डाकघर के सेवा-विस्तार के लिए संचार एवं सूचना प्रो़द्योगिकी  मंत्रालय के तहत डाक विभाग के मातहत होल्डिंग कंपनी के अंग के रुप में तीन सहायक कंपनियां गठित करने का सुझाव दिया है। पूर्व कैबिनेट सचिव श्री टीसीआर सुब्रमणियन के नेतृत्व में कार्यबल की रिपोर्ट आज नई दिल्ली में संचार एवं सूचना तकनीक मंत्री श्री रवि शंकर प्रसाद को सौंपी गई।

सभी पांच सहायक कंपनियों को रणनीतिक व्यापार इकाई – एस बी यू कहा जाएगा। दो अन्य सहायक कंपनियां व्यावसायिक आधार पर आम लोगों के लिए बिल संग्रहण और आवेदन पत्र, दस्तावेज़ एवं प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराने जैसेी ई-सेवाएं और थर्ड पार्टी उत्पाद के वितरण का काम करेंगी। अन्य सहायक कंपनी एजेंसी आधार पर आधार राशन कार्ड, विकास पत्र जैसी सरकारी सेवाएं वितरित करेंगी। रिपोर्ट में यह भी प्रस्तावित है कि प्रत्येक रणनीतिक व्यापार इकाई – एस बी यू का अपना स्‍वतंत्र बोर्ड होगा जो व्‍यावसायिक तौर पर लाभ के लिए काम करेगा। प्रत्‍येक एस बी यू समय-समय पर भागीदारी का आयोजन करेगा। इन कामों को कानूनी आधार देने के लिए एक नया डाक कानून लाना भी प्रस्‍तावित है।

रिपोर्ट स्‍वीकार करने के बाद संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि कार्यबल की सिफारिशों पर प्राथमिकता के आधार पर संरचनात्‍मक प्रतिक्रिया दी जायेगी। उन्‍होंने बताया कि देश में डाक विभाग की संभावनाओं को निखारने की जरूर महसूस होने पर उन्‍होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी से आग्रह किया था जिस पर उन्‍होंने कार्यबल गठित करने की अनुमति देकर तुरंत प्रतिक्रिया दी थी। उन्‍होंने उम्‍मीद जताई कि डाक विभाग के विशाल नेटवर्क का देश में ई-कामर्स बूम को देखते हुए पूरा दोहन किया जायेगा। उन्‍होंने आश्‍वस्‍त किया कि विभाग की पुनर्संरचना के दौरान किसी भी कर्मचारी को हटाया नहीं जायेगा। उन्‍होंने यह भी बताया कि पोस्‍ट कार्ड और अन्‍य डाक सेवाओं की कीमत में किसी भी तरह की बढ़ोतरी नहीं की जायेगी।
इससे पहले कार्यबल के अध्‍यक्ष श्री टीसीआर सुब्रमणियन ने कहा कि देश के 6 लाख से ज्‍यादा गांवों में बैंकिंग और वित्‍तीय सेवाएं उपलब्‍ध नहीं हैं, ऐसे में यह महसूस किया गया कि ग्रामीण गरीबों के वित्‍तीय समावेशन में योगदान के लिए व्‍यावसायिक तौर पर संगठित भारतीय पोस्‍ट बैंक प्रमुख भूमिका निभायेगा। उन्‍होंने यह भी उम्‍मीद जताई कि अगले 3 से 5 साल में 5 लाख से ज्‍यादा नई नौकरियों उपलब्‍ध की जा सकेंगी।

इस साल 21 अगस्‍त को गठित कार्यबल के सदस्‍य निम्‍नलिखित थे :-

1. श्री टीसीआर सुब्रमणियन, पूर्व कैबिनेट सचिव-अध्‍यक्ष
2. श्री टी वी मोहन दास पाई, बैंगलोर-सदस्‍य
3. श्री जी एन बाजपई, मुंबई, सेबी के पूर्व अध्‍यक्ष-सदस्‍य
4. श्री रवीन्‍द्र एच. ढोलकिया, आईआईएम, अहमदाबाद-सदस्‍य
5. श्री आर एस शर्मा, सचिव (ई एण्‍ड आईटी), भारत सरकार – सदस्‍य
6. श्री एल सी गोयल, सचिव, ग्रामीण विकास विभाग, भारत सरकार – सदस्‍य
7. श्री राकेश गर्ग, सचिव दूरसंचार विभाग, भारत सरकार, - सदस्‍य
8. सुश्री कावेरी बनर्जी सचिव डाक विभाग- सदस्‍य
9. श्री कमलेश्‍वर प्रसाद, डाक विभाग – सदस्‍य
10. श्री वासुमित्र, सीपीएमजी, दिल्‍ली सर्कल, डाक विभाग –सदस्‍य सचिव   

Sunday, November 30, 2014

SAARC Summit Award to Krishna Kumar Yadav

Famous blogger and currently posted as Director Postal Services of Allahabad Region, Mr. Krishna Kumar Yadav,  will be awarded with ‘Parikalpana SAARC Summit Award’ during the Fourth international blogger’s conference to be held in Bhutan from 15-18th January, 2015 for his work in Hindi literature and reminiscence writings on blog. Under this award he will be felicitated with rupees 25000/- cash prize, Commendation certificate, memento, and Aṅgavastra. This information was shared by Mr. Ravindra Prabhat,organizer of ‘International Bloggers Conference.’ 

Mr. Krishna Kumar Yadav started his blogging career in 2008, and has been since operating more than ten blogs on various issues. He has motivated a number of people to enter the field of blogging and gave blogging new dimensions through his literary creativity. Mr. Krishna Kumar Yadav have two personal blogs, i.e. ‘Shabd srijan ki oar’”(http://kkyadav.blogspot.com) which covers contemporary issues, poems, informative and research based articles etc., whereas ‘Daakiya Daak laya’ (http://dakbabu.blogspot.com) covers history of Postal Services, information about famous personalities related with Postal services, letters, intriguing world of Postage Stamps. These blogs have been viewed by more than million people and are viewed and read from more than 100 countries across the world. 

It is worthwhile to mention here that Mr. Yadav have been awarded with a number of reputed awards for New Media and Blogging at national and international level, Which includes ‘Awadh Samman’ by Chief Minister of Uttar Pradesh Mr. Akhilesh Yadav, ‘Best blogger couple of the decade’ award together with his wife, ‘Parikalpana literary award’ in Nepal during the International Bloggers Conference.

During the conference to be held in Bhutan discussion will also be about propagation of Hindi, various dimensions of blogging as new media, role of social media in changing times. It is worthwhile to mention here that recently during his visit to Bhutan, Prime Minister Narendra Modi has highlighted historical and cultural relations between India and Bhutan and emphasized on mutual harmony and cooperation. This International Bloggers Conference to be held in Bhutan is also in effort in the same direction.

 Blogger Krishna Kumar Yadav to be awarded during International Bloggers meet in Bhutan
(Times of India, 29 November 2014)

Director Postal Services Krishna Kumar Yadav to get SAARC Summit Award
(Hindustan Times, 29 November 2014)

Wednesday, November 26, 2014

पत्र लेखन विधा के प्रोत्साहन हेतु 44वीं यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन पत्र लेखन प्रतियोगिता का 4 जनवरी, 2015 को आयोजन

युवाओं में पत्र लेखन विधा को प्रोत्साहित करने के लिए हर वर्ष यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर पत्र लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है। इसी क्रम में  15 वर्ष (31 मार्च 2015 के अनुसार) तक के बच्चों के लिए वैश्विक स्तर पर 4 जनवरी 2015, रविवार को 10.00 बजे से 11.00 बजे तक ‘‘उस संसार के बारे में हमें बताइये, जिसमें आप विकसित होना चाहते हैं’’ ¼Tell us about the world you want to grow up in½ विषय पर 44वीं यूपीयू पत्र लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया जायेगा। पत्र अंग्रेजी या संविधान की आठवीं सूची में निर्दिष्ट किसी भी भाषा में 800 शब्दों की सीमा में लिखना होगा।


इस संबंध में जानकारी देते हुए इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि  इस प्रतियोगिता का आयोजन सभी डाक सर्किल/परिक्षेत्रों के मुख्यालय पर किया जायेगा। उत्तर प्रदेश में इस प्रतियोगिता का आयोजन इलाहाबाद, लखनऊ, गोरखपुर, कानपुर, आगरा, बरेली और गाजियाबाद में किया जायेगा। श्री यादव ने यह भी बताया कि यदि विभिन्न स्कूलों-कालेजों के प्रधानाचार्य चाहें तो उक्त प्रतियोगिता डाक विभाग से मिलकर अपने स्तर पर भी स्वतंत्र रूप से करा सकते है। डाक विभाग प्रतियोगी प्रविष्टियों को उनसे एकत्र कर परिमंडलीय कार्यालय, लखनऊ को भेजेगा।

डाक निदेशक श्री यादव ने बताया कि प्रतियोगिता हेतु आवेदन करने की अन्तिम तिथि 22 दिसम्बर 2014 है। प्रतियोगिता हेतु आवेदन करने का प्रारूप सम्बन्धित प्रवर अधीक्षक/अधीक्षक कार्यालय से प्राप्त किया जा सकता है, हालांकि सभी मण्डलीय अधीक्षकों को व्यापक प्रचार व प्रमुख स्कूलों को प्रारूप उपलब्ध कराने के निर्देश दिये गये हैं ।

निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि पत्र लेखन प्रतियोगिता का मूल्यांकन परिमण्डलीय स्तर पर किया जायेगा तथा श्रेष्ठ तीन पत्र लेखन को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मिलित करने हेतु डाक निदेशालय, नई दिल्ली भेजा जायेगा। राष्ट्रीय स्तर पर श्रेष्ठ तीन प्रतियोगियों को क्रमशः रू0 5000, रू0 3000 व रू0 2000 का प्रथम, द्वितीय व तृतीय पुरस्कार प्रमाणपत्र सहित दिया जायेगा। इसके अलावा प्रत्येक परिमण्डल की सर्वश्रेष्ठ प्रविष्टि को 1000 रूपये का सांत्वना  पुरस्कार व प्रमाण पत्र दिया जायेगा। राष्ट्रीय स्तर पर सर्वोत्तम प्रविष्टि को यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन के पास आधिकारिक प्रविष्टि के रूप में भेजा जायेगा। 

44th Universal Postal Union Letter writing competition to be held on 4th January, 2015

To promote letter writing, Universal Postal Union organizes letter writing competition at International Level every year. Mr. Krishna Kumar Yadav, Director Postal Services, Allahabad Region told that school children of up to the age of 15 years (as on 31st March, 2015) may take part in this competition, which will be held on 4th of January, 2015 from 10:00 to 11:00 A.M. at the headquarter of all Postal Circles/ Regions. In Uttar Pradesh, apart from Allahabad it will be organized at Lucknow, Gorakhpur, Kanpur, Agra, Ghaziabad and Bareilly. 

The topic for 44th UPU letter writing competition is "Tell us about the world you want to grow up in." Composition must be presented in the form of letter not exceeding 800 words. It may be written in English or any language listed in the 8th schedule of the Constitution of India. Mr. Yadav further added that the reputed schools may organize this competition for their students independently as well. Concerned school principals may contact Sr. Supdt. of Post Offices for this. 

Last date of application for the competition is 22th December, 2014. He said that application forms for the competition may be obtained from the office of concerned Senior Supdt./ Supdt. of Post Offices, in the mean while all Divisional heads have been instructed to ensure wide publicity and supply of forms to all schools, said Mr. Yadav.

Director Mr. Krishna Kumar Yadav told that these letters will be evaluated in Lucknow at Circle level and three best letters will be sent to Postal Directorate, New Delhi for inclusion at National Level. Three best participants at National level will be awarded first, second and third prizes with a cash reward of Rs. 5,000, 3,000 and 2,000. While one best entry from each Circle will also be awarded with a cash reward of Rs. 1,000 as consolation prize. The best entry at the National level shall qualify as the official Indian entry for this International level competition. 

(Courtesy)

Tuesday, November 18, 2014

डाकघरों में 'किसान विकास पत्र' फिर से शुरू, 100 महीने में होगा धन दुगुना

छोटे निवेशकों के बीच कभी बेहद लोकप्रिय रहा किसान विकास पत्र (केवीपी) एक बार फिर से डाकघरों में मिलेगा। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आज 18 नवम्बर, 2014 को  को इसे जारी किया। करीब तीन साल बाद 'किसान विकास पत्र' यानी केवीपी को नए कलेवर में मंगलवार को फिर से लॉन्च किया गया। इसमें कम से कम एक हजार रुपए निवेश करना होगा। फिर एक हजार के गुणक में जितना चाहें, उतना निवेश कर सकते हैं। नए रूप में किसान विकास पत्र 1,000, 5,000, 10,000 और 50,000 रुपये के मूल्य वर्ग में उपलब्ध होगा। इसे अकेले या संयुक्त नाम से खरीदा जा सकेगा। किसान विकास पत्र में ढाई साल का लॉक इन पीरियड रखा गया है, जबकि यह 100 महीने (आठ साल चार महीने) में परिपक्व (मेच्योर) होगा। परिपक्वता पर निवेशकों को दोगुनी रकम मिलेगी।

अनगिनत बार ट्रांसफर की सुविधा

इसके सर्टिफिकेट सिंगल या ज्वाइंट नामों से जारी किए जाएंगे। ये सर्टिफिकेट एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को अनगिनत बार ट्रांसफर किए जा सकेंगे। इसके अलावा, एक पोस्ट ऑफिस से देश में कहीं भी ट्रांसफर करने की सुविधा भी उपलब्ध होगी। इसके अलावा, इसके साथ नॉमिनेशन का विकल्प भी होगा। किसान विकास पत्र को गिरवी रख कर बैंकों से कर्ज भी लिया जा सकेगा।

ढाई साल बाद कैश कराने की सुविधा
                 
इस बार निवेशकों को 1000, 5000, 10000 और 50000 रुपए के किसान विकास पत्र उपलब्ध होंगे। किसान विकास पत्र में निवेश की कोई ऊपरी सीमा नहीं होगी। इस बार लॉन्च किसान विकास पत्र की खासियत यह होगी कि अगर निवेशक चाहे तो इसे दो साल और छह महीने के लॉक इन पीरियड के बाद भुना सकेगा। इसके बाद इसे हर छह महीने की अवधि के बाद पूर्व निश्चित मैच्योरिटी वैल्यू पर भुनाया जा सकेगा। 

पोस्ट ऑफिस में होंगे उपलब्ध

शुरुआत में किसान विकास पत्र बिक्री के लिए पोस्ट ऑफिसों में उपलब्ध होंगे, लेकिन जल्दी ही इन्हें सरकारी बैंकों की चुनिंदा शाखाओं के जरिए भी लोगों को उपलब्ध कराया जाएगा।

विकास हेतु होगा इस्तेमाल 

वित्त मंत्रालय ने कहा कि केवीपी न सिर्फ छोटे निवेशकों के लिए निवेश का सुरक्षित विकल्प होगा, बल्कि इसके जरिये देश में बचत दर बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। वित्त मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि केवीपी से छोटे निवेशक धोखाधड़ी वाली योजनाओं से भी बच सकेंगे। इस योजना के तहत जुटाई गई राशि सरकार के पास रहेगी जिसका इस्तेमाल केंद्र और राज्यों की विकास योजनाओं में किया जाएगा।


साल 1988 में पहली बार हुआ था लॉन्च

किसान विकास पत्र को पहली बार एक अप्रैल 1988 को लॉन्च किया गया था। उस समय इसका मैच्योरिटी पीरियड साढ़े पांच साल था, यानी इतनी अवधि में इसमें लगाए गए पैसे दोगुने हो जाते थे। बाद में जब ब्याज दरें घटीं, तो मैच्योरिटी पीरियड बढ़ने लगा। साल 2011 में जब इसे बंद किया गया, तो इसका मैच्योरिटी पीरियड सात साल 11 महीने था।

बजट में हुई थी घोषणा

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने जुलाई में पेश बजट में इसे फिर से लॉन्च किए जाने की घोषणा की थी। श्यामला गोपीनाथ की रिपोर्ट सामने आने के बाद दिसंबर 2011 में इस पर रोक लगा दी गई थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि इस स्कीम का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग के लिए किया जा रहा था।

गाजीपुर प्रधान डाकघर में कोर बैंकिंग सेवा का डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव ने किया उद्घाटन


गाजीपुर प्रधान डाकघर में कोर बैकिंग सोल्यूशन (सीबीएस) सेवा का उदघाटन 17 नवम्बर 2014 को इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव द्वारा किया गया। इस अवसर पर शिलापट्ट का अनावरण कर एवं दीप प्रज्जवलित कर गाजीपुर प्रधान डाकघर के सीबीएस से जुड़ने का उन्होंने शुभारंभ किया। 
उदघाटन करते हुए इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि गाजीपुर में गाजीपुर प्रधान डाकघर सीबीएस प्रणाली के तहत कार्य करने वाला प्रथम डाकघर है। प्रधान डाकघर के सीबीएस से जुड़ने पर यह देश के अन्य सीबीएस डाकघरों से जुड़ गया है। सीबीएस से जुड़ने के बाद एनीव्हेयर एनीटाइम बैंकिंग के तहत क्रमबद्ध रूप में धीरे-धीरे ग्राहकों को आन लाइन बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, नेट बैंकिंग और एटीएम इत्यादि का लाभ मिल सकेगा, जिससे गाजीपुर प्रधान डाकघर के 2 लाख 71 हजार से ज्यादा खाताधारक लाभान्वित होंगे। इनमें खाताधारकों का 3 अरब 21 करोड़ रूपये जमा है। इसके तहत यह अब संचय पोस्ट के बजाय फिनैकल साफ्टवेयर पर काम होगा और सेन्ट्रल सर्वर से प्रधान डाकघर सीधे जुड़ जायेगा, जिससे आॅनलाइन लेन-देन में सहूलियत होगी। 

डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि गाजीपुर प्रधान डाकघर में शीघ्र ही एटीएम सुविधा भी उपलब्ध करायी जायेगी। उन्होंने कहा कि अब सभी खाते 10 नंबरों के हो जायेंगे और सभी ग्राहकों को कम्प्यूटराइज्ड पासबुक मिलेगी। श्री यादव ने बताया कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश में गाजीपुर प्रधान डाकघर  को लेकर कुल 146 डाकघर सीबीएस के तहत कार्य करना आरंभ कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि शीघ्र ही गाजीपुर के अन्य डाकघरों को सीबीएस के तहत लाने का प्रयास किया जायेगा।

गाजीपुर मंडल के डाक अधीक्षक श्री आरपी सिंह ने कहा कि अब बचत अभिकर्ताओं को भी सहूलियत होगी और वे पोर्टल पर जाकर घर बैठे लोगों का पैसा जमा कर सकेंगे और तद्नुसार उत्पन्न कोड डाकघर आकर बताने पर, वह लिंक हो जायेगा। यही नहीं अब अभिकर्ताओं का कमीशन उनके डाकघर बचत खाता में सीधे जायेगा। 

कार्यक्रम में पोस्टमास्टर श्री जेबी राम, सहायक डाक अधीक्षक सर्वश्री पीके पाठक, डाक निरीक्षक बृजेश शर्मा, मारुत नंदन, श्री शत्रुघन शाह, सहित तमाम अधिकारी, कर्मचारी, बचत अभिकर्तागण व नागरिक उपस्थित थे।





CBS inaugurated in Ghazipur Head Post Office by Director Postal Services KK Yadav

Core banking service (CBS) was inaugurated at Ghazipur Head Post Office on 17th November, 2014 by Mr. Krishna Kumar Yadav, Director Postal Services, Allahabad Region. On this occasion, he announced launch of Core banking services at Ghazipur Head Post Office by unveiling inauguration stone and lighting lamp. 

In his inaugural address Director Postal Services, Mr. Krishna Kumar Yadav said that Ghazipur Head Post Office is the first Post Office in Ghazipur to start functioning under CBS. Under Core banking, as a part of any time anywhere banking, online banking, mobile banking and net banking facilities and ATM facilities etc. will be provided to customers, in a systematic manner. With the launch of this facility more than 2 lac 71 thousand account holders of  Ghazipur Head Post Office will be benefitted. Total deposits at Ghazipur Head Post Office amounts more than 3 Arab 21 Crore Rs.  Mr. Yadav further said that Under CBS work bill be now done on Finacle software in place of Sanchay Post, and this office will be now linked to central server at Mumbai. He further said that now new 10 digit account numbers will be allotted to all accounts and customers will get the facility of computerized passbook. Director Mr. Krishna Kumar Yadav told that now 146 Post offices in Uttar Pradesh has started functioning on CBS platform including Ghazipur HPO.

Superintendent of Post Offices, Ghazipur Division  Mr. RP singh said that after launch of CBS, Saving Agents can make deposit from their home using the agent portal, after showing the code provided at the portal money will be deposited in the accounts by Post office. Not only this, now commission of the agents will be directly credited to their Post Office Saving Bank Account. He also said that efforts will be made to bring more office of Ghazipur under Core banking.  
On this occasion Postmaster, Ghazipur HPO Mr. J. B Ram, Assistant Superintendent of Posts Mr. PK Pathak, Ram Saran and Inspector of Posts, Mr. Brijesh Sharma, Marut nandan, Shatrughan Shah and a number of officers, employees, and Saving Scheme agents were present. 









Friday, November 14, 2014

जब पहली बार जारी हुए बाल-दिवस पर डाक टिकट : 2014 रहा बाल दिवस डाक टिकट से अछूता

बाल दिवस को हर साल डाक विभाग डाक टिकट जारी कर यादगार बनाता है।  पर देश में इस बार 14 नवंबर को बाल दिवस के मौके पर डाक टिकट जारी नहीं किया जाएगा। वर्ष 1957 से 2013 तक लगातार 57 वर्षो से देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के जन्म दिन के अवसर पर डाक टिकट जारी होते आए हैं, लेकिन इस बार यह परम्परा टूट गई।

डाक विभाग की ओर से हर वर्ष स्कूली बच्चों की देशव्यापी चित्रकारी प्रतियोगिता आयोजित जाती है और उसके विजेता बच्चे की चित्रकारी पर बाल दिवस के अवसर पर डाक टिकट जारी किया जाता है। इस वर्ष  यह प्रतियोगिता भी नहीं आयोजित की गई ।

गौरतलब है कि वर्ष 1949 में संयुक्त राष्ट्र संघ ने सभी देशों को बाल दिवस मनाने के लिए कहा और इसके लिए सभी देशों को छूट दी गई कि वे अपने सामाजिक-सांस्कृतिक माहौल के हिसाब से किसी भी दिन को बालदिवस के लिए तय करें। सभी देशों ने अपने महापुरूषों, प्रतीक चिन्हों, धर्म, नस्ल आदि से जुड़ी तिथियों पर बाल दिवस घोषित कर रखे हैं। भारत ने प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के बच्चों से विशेष प्रेम और उनकी चाचा नेहरू की छवि के चलते उन्हीं के जन्म दिवस 14 नवंबर को बाल दिवस घोषित किया।

भारत में नेहरू के जीवनकाल में ही वर्ष 1954 से इसकी शुरूआत की गई। वर्ष 1957 से बाल दिवस के अवसर पर डाक टिकट जारी करने की शुरूआत की गई और पिछले साल (2013) तक इस परंपरा का निर्वाह किया गया। देश में 1977 से 1980, 1989 से 1991  और 1996 से 2004 के बीच गैर-कांग्रेसी सरकारें रही। उस दौरान भी बाल दिवस पर चित्रकारी प्रतियोगिता और डाक टिकट जारी होने की परम्परा को बरकरार रखा गया, लेकिन यह पहला मौका है, जब यह परम्परा निभाई नहीं गई और बाल दिवस बिना डाक टिकटों के रहा।

जब जारी हुए पहली बार बाल-दिवस पर डाक टिकट : 
भारतीय डाक विभाग प्रतिवर्ष बाल-दिवस पर डाक टिकट जारी करता रहा है।  यह सिलसिला वर्ष 1957 में आरम्भ हुआ, जब  बाल दिवस पर पहली बार तीन स्मारक डाक टिकट जारी किये गये, जो बाल पोषण (8 पैसे, केला खाता बालक), बाल शिक्षा (15 पैसे, स्लेट पर लिखती लड़की) व बाल मनोरंजन (90 पैसे, मिट्टी का बना बांकुरा घोड़ा) के प्रतीक थे। 



उस समय दस हजार फोटोग्राफ्स में से चयनित शेखर बार्कर व रीता मल्होत्रा को क्रमशः बाल पोषण व बाल शिक्षा पर जारी डाक टिकटों पर अंकित किया गया। स्लेट पर लिखती लड़की रीता मल्होत्रा कानपुर की थी। ठीक पचास वर्ष बाद वर्ष 2007 में बाल दिवस पर डाक टिकट जारी होने के दौरान शेखर बार्कर व रीता मल्होत्रा को भी आमंत्रित किया गया, पर रीता मल्होत्रा को शायद खोजा न जा सका। सोशल मीडिया और नेटवर्किंग के इस दौर में शायद किसी दिन संभवत: रीता मल्होत्रा का पता भी लग सके !!