Thursday, October 1, 2015

भारतीय डाक : 161 वर्षों का सफरनामा


 1 अक्टूबर 1854 को स्थापित डाक विभाग का इतिहास सभ्यता, संस्कृति और अर्थव्यवस्था से अभिन्न रूप से जुड़ा हुआ है। सुख-दुख के हर पल में लोगों की थाह लेने वाला डाक विभाग पूरब से पश्चिम तक और उत्तर से दक्षिण तक समूचे भारत कीे संचार व्यवस्था को एक डोरी में बाँधता है। डाक विभाग ने सदियों की करवटें देखी हैं और न जाने इसके आगोश में इतिहास के कितने पहलू छुपे हुये हैं। आज भले ही इंटरनेट, मोबाइल और सोशल मीडिया का जमाना हो, पर 161  साल बाद भी डाक सेवाएं अपनी प्रासंगकिता बनाए हुए है। 

संचार सेवायें सदैव से मानवीय जीवन का अभिन्न अंग रही हैं और इनमें डाक सेवाओं का प्रमुख स्थान है। यथापि संचार क्रान्ति के चलते तमाम नवीन तकनीकों का आविष्कार हुआ, पर डाक विभाग ने  समय के साथ नव तकनीक के प्रवर्तन एवं अपनी सेवाओं में विविधता व उन्नयन द्वारा अपनी निरन्तरता कायम रखी है। भारतीय डाक विश्व का सर्वाधिक वृहद डाक नेटवर्क है। समाज के सभी पक्षों को एकीकृत करते हुये लगातार 160 वर्षों से कायम अपनी विश्वसनीयता के साथ भारतीय डाक एकमात्र ऐसा संगठन है जो प्रतिदिन समाज के हर व्यक्ति के दरवाजे पर दस्तक लगाता है। आज इसी नेटवर्क व साख के चलते तमाम अन्य संगठन भी अपने उत्पादों और सेवाओं के प्रचार-प्रसार व बिक्री हेतु डाक विभाग के साथ हाथ मिला रहे हैं। 

 भारतीय डाक विभाग वर्ष 2015 में अपनी सेवाओं के 161 गौरवशावली वर्ष पूरा कर रहा है। 1 अक्टूबर 1854 को लार्ड डलहौजी के काल में विभाग के रूप में स्थापित डाक विभाग समय के विभिन्न पगचिन्हों का गवाह रहा है। आधुनिक डाक विभाग की कार्यप्रणाली से पूर्व भारत में प्राचीन काल से ही समय-समय पर विभिन्न डाक प्रणालियाँ प्रचलित थीं। वैदिक व उत्तर वैदिक काल में किसी न किसी रूप में दूतों का संदेशवाहक के रूप में जिक्र मिलता है। महाकवि कालिदास ने अपने काव्य मेघदूत में संदेशवाहक के रूप में मेघों की कल्पना की थी। भारतीय राज व्यवस्था में मौर्य काल के उद्गम के साथ ही ‘कबूतर-डाक‘ का आरम्भ मिलता है, जो कि कुषाण काल के बाद तक प्रभावी रहा। भारत में व्यवस्थित डाक का प्रथम लिखित इतिहास जियाउद्दीन बरनी द्वारा अलाउद्दीन खिलजी (1296) के समय का प्राप्त होता है, जिसने सैन्य सम्बन्धी नियमित जानकारी हेतु ‘पैदल डाक‘ और ‘घुड़सवार डाक‘ व्यवस्था कायम की। मु0 बिन तुगलक के शासन काल (1325-51) में भी इस व्यवस्था के कायम रहने का जिक्र उत्तर अफ्रीकी यात्री इब्नबतूता ने किया है। दिल्ली से दौलतगिरी राजधानी स्थानांतरित होने पर मु0 बिन तुगलक हेतु नियमित गंगा का जल पैदल और घुड़सवार डाक द्वारा ही ले जाया जाता था। शेरशाह सूरी (1541-45) ने अपने काल में डाक व्यवस्था को तीव्रता देने हेतु बंगाल से सिंध तक निर्मित सड़क किनारे एक निश्चित दूरी पर सरायों की व्यवस्था की, जहाँ पर दो घुड़सवार डाक को आगे ले जाने हेतु सदैव मुस्तैद रहते थे। मुगल सम्राट अकबर (1556-1603) ने घुड़सवार डाक के साथ-साथ ‘ऊँट-डाक‘ का भी आरम्भ किया। पर ये सारी ‘शाही डाक‘ सेवा केवल सम्राट, उसके प्रमुख दरबारियों, पुलिस और सेना हेतु ही थी।  आम जनता से इनका कोई सरोकार नहीं था। शाही डाक सेवा के अलावा विभिन्न वर्गों की अपनी अलग-अलग डाक-सेवायें थीं। सम्पन्न सेठ-साहूकारों की अपनी ‘महजनी डाक सेवा‘ थी तो मारवाड़ (जोधपुर) में मिर्धा जाति के कतिपय लोगों द्वारा ‘मिर्धा डाक‘, चिल्का डाक एवं मेवाड़, मालवा आदि में ब्राह्मणों द्वारा चलायी गयी ‘ब्राह्मणी डाक‘ सेवा थी।

अंग्रेजों के भारत आगमन के साथ ही ईस्ट इंडिया कम्पनी ने सन् 1688 में मुंबई में एक डाकघर खोलकर अपनी पृथक डाक सेवा का श्रीगणेश कर डाला। इस कंपनी डाक सेवा के वाहक भी डाक धावक या घुड़सवार ही थे। सन् 1766 में राबर्ट क्लाइव ने भी इस संबंध में कुछ प्रयास किए और 27 मार्च 1776 को बंगाल में सर्वप्रथम नियमित डाक सेवा का आरम्भ किया।  इस हेतु जमींदारों को ‘डाक धावक‘ उपलब्ध कराने हेतु कहा गया और इस प्रकार ‘जमींदारी डाक‘ का आरम्भ हुआ।  पर सही अर्थों में आधुनिक डाक सेवा का आरम्भ वारेन हेस्टिंग्ज ने किया। 31 मार्च 1774 को कलकत्ता जीपीओ के गठन और पोस्टमास्टर जनरल की नियुक्ति पश्चात प्रथम बार प्रति सौ मील की दूरी हेतु दो आने के मूल्य वाले तांबे के टिकट सिक्के शुल्क के रूप में निर्धारित किये गये।  इसी दौरान प्रथम डाकिया की भी नियुक्ति हुई। वारेन हेस्टिंगस द्वारा संचालित व्यवस्था मात्र देश के मुख्य नगरों तक ही सीमित थी, अतः एक समानांतर ‘जिला डाक सेवा‘ का आविर्भाव हुआ।  इसका उद्देश्य जिले के मुख्यालय को जिले के शेष नगरों से जोड़ना था।  इसके व्यय का प्रबंध जमीदारों पर और नियंत्रण जिले के अधिकारियों द्वारा होता था।  इस व्यवस्था में पत्रों का वितरण सिपाही व चैकीदारों द्वारा होता जो अपनी मर्जी से पत्र शुल्क वसूलते।

वर्ष 1837 में लागू ‘प्रथम डाकघर अधिनियम‘ ने डाक सेवाओं में क्रान्तिकारी परिवर्तन लाये। इसने सभी प्राइवेट डाक सेवाओं को समाप्त कर सरकार को डाक व्यवस्था पर अनन्य एकाधिकार दे दिया। आधुनिक डाक सेवाओं के इतिहास में पहली बार नियमित पोस्टमास्टर की नियुक्ति आरम्भ हुयी। इससे पूर्व जिले के अन्य वरिष्ठ अधिकारी ही अपने कर्तव्यों के साथ-साथ पोस्टमास्टर का भी दायित्व निर्वाह करते थे। इस अधिनियम के तहत ही प्रथमतः जनता हेतु डाक सेवायें खोली गईं और 1 अक्टूबर 1837 को प्रथम ‘जनता डाकघर‘ खोला गया।


वर्ष 1854 कई कारणों से भारतीय डाक के इतिहास में अविस्मरणीय रहेगा। प्रथमतः, लार्ड डलहौजी द्वारा 1 अक्टूबर 1854 को डाक विभाग को एक महानिदेशक श्री एल0पी0ए0बी0रिडेल के अधीन लाना। द्वितीयतः, राष्ट्रीय स्तर पर प्रथमतः 1 अक्टूबर 1854 को डाक-टिकट जारी करना। यद्यपि इससे पूर्व 1852 में डाक टिकट जारी करके भारत एशिया में डाक टिकट जारी करने वाला प्रथम राष्ट्र बना था, पर वह मात्र सिंध प्रांत हेतु ही था। तृतीयतः, डाक टिकट के परिचय के साथ ही बिना दूरी का ध्यान रखे ‘एक समान डाक दर‘ को लागू करना। चतुर्थतः, ‘अखिल भारतीय डाक सेवा‘ का गठन। पंचम, सर्वप्रथम ‘लेटर बाक्स’ की स्थापना। षष्टम, पोस्टमास्टर जनरल को जीपीओ के कार्यक्षेत्र से मुक्त कर जीपीओ हेतु स्वतंत्र स्थापना की गयी।

          सन् 1854 के बाद डाक विभाग द्वारा विभिन्न सेवाओं का आरम्भ हुआ- फील्ड पोस्ट आफिस (1856), लिफाफा (1856), अन्तर्देशीय पत्र (1857), रेलवे छँटाई सेवा (1863), शाखा डाकघर (1866), पंजीकृत लिफाफा (1866), पोस्ट बैग (1866), चलित डाकघर (1867), आर.एल.ओ. (1872), मुद्रित लिफाफा (1873), पंजीकृत पत्र पावती (1877), मूल्यदेय पार्सल सेवा (1877), बीमा पत्र (1878), पोस्टकार्ड (1879), मनीआॅर्डर (1880), डाकघर बचत बैंक (1882), टेलीग्राम संदेश (1883), डाक जीवन बीमा (1884), टेलीग्राम मनीअॅार्डर (1880), सैन्य पेंशन का वितरण (1890), सर्टिफिकेट आफ पोस्ंिटग (1897), एयर मेल सेवा (1911), नकद प्रमाण पत्र (1917), व्यापारिक जवाबी पत्र (1932), राजस्व टिकट बिक्री  (1934), इंडियन पोस्टल आर्डर (1935) इत्यादि। आजादी पश्चात तो भारतीय डाक ने तमाम नये आयाम छुये। भारतीय डाक को यह गौरव प्राप्त है कि अगर 1852 में तत्कालीन भारत के एक प्रांत सिंध ने एशिया का प्रथम डाक टिकट जारी कर इतिहास दर्ज कराया तो 21 फरवरी 1911 को इलाहाबाद से नैनी के मध्य विश्व की प्रथम एयर मेल सेवा आरम्भ करने का श्रेय भी भारत के ही खाते में दर्ज है। राष्ट्रमण्डल देशों में  भारत पहला देश है जिसने सन् 1929 में हवाई डाक टिकट का विशेष सेट जारी किया।

भारत एक कृषि प्रधान एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था वाला देश है, जहाँ सेवाओं को अन्तिम व्यक्ति तक पहुंचाना ही सरकार की प्राथमिकता है। डाक विभाग ने प्रत्येक नागरिक के जीवन को प्रभावित किया है, चाहे वह डाक, बैंकिंग, जीवन बीमा और धनांतरण के माध्यम से हो अथवा रिटेल सेवाओं के माध्यम से। 31 मार्च 2012 की स्थिति के अनुसार देश में इसका 1,54,822 डाकघरों का नेटवर्क है जो कि विश्व का सबसे बड़ा नेटवर्क है। इनमें  से 1,39,086 डाकघर ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित है। विभाग का प्रमुख कार्यकलाप डाक की प्रोसेसिंग, पारेषण और इसका वितरण करना है। 5.62 लाख से अधिक पत्र-पेटिकाओं से डाक एकत्र की जाती है जिसे डाक कार्यालयों के नेटवर्क द्वारा प्रोसेस किया जाता है तथा इसे रेल, सड़क और वायु मार्ग से देश भर में पे्रषिती तक पहुँचाया जाता है। इसी प्रकार ई-एमओ, घर-घर धन प्रेषण सेवा, आईएमओ तत्काल मनीआर्डर जिसके जरिए धन तत्काल पहुँच जाता है तथा मोबाइल से मोबाइल मनीआर्डर के माध्यम से प्रेषण से पाने वाले के पास धन प्रेषित किया जाता है। इस प्रकार डाकघर एक देशव्यापी सेवा प्रदाता के रूप में कार्यरत है। 

भारतीय डाक ने समाज में अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए लोगों के कारोबार और वित्तीय आवश्यकताओं के अनुरूप अनेक व्यावसायिक एवं वित्तीय कार्यकालापों को प्रारंभ किया। विभाग ने नए अवसरों का पता लगाने तथा नई सेवाओं को विकसित करने में अपने को संलग्न किया। व्यवसायिक प्रक्रियाओं को पुनः व्यवस्थित करने तथा प्रचालनात्मक कार्यकुशलता पर विशेष ध्यान दिया गया है। आर्थिक उदारीकरण के इस युग में डाकघर सामाजिक लाभ भुगतान, मनरेगा भुगतान, आदि जैसे अपने सामाजिक दायित्वों तथा वाणिज्यिक और प्रतिस्पर्धी वातावरण की चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए तैयार है। नेटवर्क और आईटी से युक्त डाकघर अपने देशव्यापी नेटवर्क के माध्यम से देश के कोने-कोने को कवर करते हुए एक प्रत्यक्ष लाभ अंतरण प्रदाता के रूप में स्थापित हो रहा है। जहाँ डाक विभाग एक ऐसा विशालतम नेटवर्क बना रहा जिसने अपने सेवाओं के साथ बहुत से लोगों के जीवन को प्रभावित किया, वहीं विश्वसनीयता और गति सेवा की महत्वपूर्ण विशेषताएं बन गईं। वैल्यू फार मनी, बहुविध वितरण चैनल, घर-घर तक सेवा की पहुँंच, ग्राहक का आराम महत्वपूर्ण हो गए। भारतीय डाक आईटी आधुनिकीकरण परियोजना-2012 डाक सेवाओं को प्रौद्योगिकी सम्पन्न, स्वावलम्बी, मार्केट लीडर में तब्दील करने हेतु उभर कर सामने आई। इसके द्वारा जहाँ डाकघरों  में कोर बैंकिंग लागू की जा रही है, वहीं आईटी परियोजना द्वारा देश के दूरस्थ और अंतिम छोर तक प्रौद्योगिकी के लाभ पहुँचा कर शहरी व ग्रामीण के बीच अंतर को कम किए जाने की भी आशा है। 

( कृष्ण कुमार यादव  2001 बैच के भारतीय डाक सेवा के अधिकारी हैं। साथ ही सामाजिक, साहित्यिक और समसामयिक मुद्दों से सम्बंधित विषयों पर प्रमुखता से लेखन करने वाले वे साहित्यकार, विचारक और ब्लॉगर भी हैं। उनकी विभिन्न विधाओं में सात पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। वर्तमान में वे राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर में निदेशक डाक सेवाएँ पद पर कार्यरत हैं।)




-कृष्ण कुमार यादव, 
निदेशक डाक सेवाएँ, 
राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर -342001 
 ई-मेलः kkyadav.t@gmail.com  ब्लॉग : http://dakbabu.blogspot.in/

Tuesday, September 29, 2015

हिंदी पखवाड़े तक सीमित न रहे हिन्दी - कृष्ण कुमार यादव


 हिंदी पखवाड़ा के समापन अवसर पर जोधपुर प्रधान डाकघर में 28 सितंबर, 2015 को एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के आरंभ में मुख्य अतिथि राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर के निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव का सीनियर पोस्टमास्टर श्री हेमराज राठौड ने स्वागत किया और हिंदी पखवाड़ा के दौरान आयोजित कार्यक्रमों की रूपरेखा पर प्रकाश डाला। 

मुख्य अतिथि के रूप में अपने उद्बोधन में राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर के निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि सृजन एवं अभिव्यक्ति की दृष्टि से हिंदी दुनिया की अग्रणी भाषाओं में से एक है। हिंदी हमारे रोजमर्रा की भाषा है और इसे सिर्फ पखवाड़ा से जोड़कर देखने की जरूरत नहीं है। जरूरत इस बात की है कि हम इसके प्रचार-प्रसार और विकास के क्रम में आयोजनों से परे अपनी दैनिक दिनचर्या से भी जोड़ें ।

श्री यादव ने कहा कि डिजिटल क्रान्ति के इस युग में हिन्दी इन्टरनेट की दुनिया में भी तेजी से पाँव पसार रही है। आज की युवा पीढ़ी सोशल मीडिया और ब्लाॅगिंग के माध्यम से हिन्दी को नये रूप में स्वीकार रही है। उन्होंने कहा कि हिन्दी में विश्व भाषा बनने की क्षमता है। आज हिन्दी सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के तमाम देशों में बोली जाती है। विश्व के लगभग 150 विश्वविद्यालयों में हिन्दी पढ़ाई जाती है। दुनिया में चीनी भाषा के बाद हिन्दी बोलने वालों की संख्या सर्वाधिक है। आज जहाँ कम्प्यूटर एवं इंटरनेट पर हिन्दी की लोकप्रियता चरम पर है, वहीं विदेशों से लोग भारत में हिन्दी सीखने के लिए आ रहे है। श्री यादव ने हिन्दी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज परिवर्तन और विकास की भाषा के रूप में हिन्दी के महत्व को नये सिरे से रेखांकित किया जा रहा है। डाक निदेशक श्री यादव ने जोर देकर कहा कि ऐसे में हिन्दी की प्रतिष्ठा के लिये सरकारी कार्यक्रमों से परे अगर हर हिन्दी भाषी ठान ले कि उसे हिन्दी में ही कार्य करना है तो हिन्दी को आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता। 

 प्रवर डाक अधीक्षक, जोधपुर मंडल श्री पी आर करेला ने कहा कि हिंदी हमारी मातृभाषा के साथ-साथ राजभाषा भी है और लोगों तक पहुँच स्थापित करने के लिए टेक्नॅालाजी स्तर पर इसका व्यापक प्रयोग करने की जरूरत है। सीनियर पोस्टमास्टर श्री हेमराज राठौड ने कहा कि हिंदी पूरे देश को जोड़ने वाली भाषा है और सरकारी कामकाज में भी इसे बहुतायत में अपनाया जाना चाहिये।

हिंदी पखवाड़ा के दौरान प्रधान डाकघर में आयोजित कार्यक्रम के विजेताओं को इस अवसर पर निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव ने सम्मानित भी किया। निबंध प्रतियोगिता में दुर्ग सिंह भाटी, नीतू प्रजापत, सुनील जोशी और कमल खन्ना एवं डाकिया संवर्ग में सत्य प्रकाश, वाद-विवाद प्रतियोगिता में रूपाराम, रमेश सोठवाल, नरेंद्र सोनी और प्रवीण कुमार वैष्णव एवं काव्य पाठ प्रतियोगिता में नीतू प्रजापत को पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 

 कार्यक्रम का संचालन सुनील जोशी ने किया और आभार ज्ञापन सहायक डाक अधीक्षक (मुख्यालय) श्री विनय कुमार खत्री द्वारा किया गया। 




Monday, September 28, 2015

अब पोस्टमैन बनने के लिए बीटेक छात्र भी होड़ में

इसे सरकारी नौकरी के प्रति मोह कहें या शिक्षित बेरोजगारी का उदाहरण कि जिस पद के लिए अहर्ता मात्र 10 वीं पास है, उसके लिए उच्च शिक्षा प्राप्त - एम. ए.,  एम. एस. सी और यहाँ तक कि बी-टेक की डिग्री लिए इंजीनियर भी आवेदन कर रहे हैं।  यह नजारा देखने को मिला राजस्थान डाक परिमंडल द्वारा रविवार, 27 सितंबर, 2015 को आयोजित हुई पोस्टमैन और मेल गार्ड्स की परीक्षा में। पहले डाक विभाग इन पदों को विभागीय पदोन्नति के माध्यम से भरता था, पर अब पोस्टमैन बनने के लिए खुली प्रतियोगिता परीक्षा के माध्यम से चयन होता है। ऐसे में पोस्टमैन बनने के लिए युवाओं में होड़ लगी हुई है। राजस्थान में 155 पोस्टमैन और 12 मेल गार्ड पदों पर नियुक्ति के लिए 1, 47, 974 लोगों ने आवेदन किया, जिनमें से कई उच्च शिक्षा प्राप्त अभ्यर्थी भी हैं, जबकि पोस्टमैन के लिए न्यूनतम अहर्ता मात्र 10 वीं पास है। 

राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर के निदेशक डाक सेवाएँ कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि पश्चिमी क्षेत्र में पोस्टमैन के 49 और मेल गार्ड के 04 पदों के लिए जोधपुर और बीकानेर में परीक्षा आयोजित की गई।  इनमें जोधपुर में 15, 402 के सापेक्ष 10,424 और बीकानेर में  12, 473 के सापेक्ष कुल 8,027 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए। परीक्षा शांतिपूर्वक और सौहाद्रपूर्ण माहौल में संपन्न हुई।  

बीटेक डिग्रीधारी और हाईटेक छात्रों द्वारा पोस्टमैन की परीक्षा दिए जाने पर निदेशक श्री यादव ने कहा कि आज का पोस्टमैन भी टेक्नॉलजी से जुड़ा हुआ है और उसे अपना कार्य सुचारू रूप से सम्पादित करने हेतु कंप्यूटर का ज्ञान आवश्यक है।  समाज में डाकिया की अपनी अलग ही प्रतिष्ठा है और सरकारी सेवा के स्थायित्व के साथ-साथ उसका वेतन भी कई निजी कंपनियों से बढ़िया और आकर्षक है। श्री यादव ने कहा कि डाक विभाग आई. टी. मॉडर्नाइजेशन के दौर से गुजर रहा है और ऐसे में यदि बीटेक डिग्रीधारी और हाईटेक लोग विभाग में आते हैं या पोस्टमैन बनने के लिए आकर्षित होते हैं  तो इसे एक शुभ संकेत के रूप में देखा जाना चाहिए !!







Thursday, September 24, 2015

हिंदी पखवाड़ा के तहत डाक विभाग में हुई कविता प्रतियोगिता


हिंदी पखवाड़ा के तहत डाक विभाग द्वारा जोधपुर में 23 सितंबर, 2015 को पोस्टमास्टर जनरल कार्यालय के सभा कक्ष में कविता प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर के निदेशक डाक सेवाएँ कृष्ण कुमार यादव ने अपने उद्बोधन में कहा कि कविता हमारे जीवन मूल्यों का प्रतिबिम्ब है। कविता आत्मा का मौलिक व विशिष्ट संगीत है, जो मानव में संस्कार रोपती हैै।  एक ऐसा संस्कार जो सभी को प्रदत्त है पर जरूरत है उसके खोजे जाने, महसूस करने और गढ़ने की। यही कारण है कि सम्वेदनाओं  का प्रस्फुटन होते ही कविता स्वतः फूट पड़ती है। हिंदी साहित्यकार एवं कवि  के रूप में भी चर्चित श्री यादव ने कहा कि काव्य-सृजन निरा कला कर्म या बौद्विक कवायद भर नहीं है बल्कि यह अपने भीतर एक और बड़ी लेकिन समानांतर दुनिया को समाए हुए है। कविता स्वयं की व्याख्या भी करती है एवं बहुत कुछ अनकहा भी छोड़ देती है। इस अनकहे को ढूँढ़ने की अभिलाषा ही एक कवि-मन को अन्य से अलग करती है।  



कार्यक्रम के दौरान डाक विभाग के तमाम प्रतिभागियों ने अपनी रचनाएं पेश कीं। इनमें सहायक डाक अधीक्षक पुखराज राठौड़, अनिल कौशिक, डाक निरीक्षक राजेंद्र भाटी, विनोद कुमार पुरोहित, रमेश चन्द्र गुर्जर, नरेंद्र कुमार वर्मा इत्यादि ने हिंदी में कवितायेँ सुनाकर वाहवाही बटोरी। राजेंद्र भाटी ने कारगिल का शहीद कविता सुनाकर लोगों को भाव विभोर किया तो विनोद कुमार पुरोहित ने अध्यात्म पर याचना कविता सुनाई।  अनिल कौशिक ने पिता की भूमिका पर कविता सुनाकर भाव विह्वल किया तो पुखराज राठौड़ ने महाराणा प्रताप की गाथा को जीवंत किया। इस दौरान डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव ने अपनी एक कविता के माध्यम से कविता की भूमिका को भी रेखांकित किया -कविता है वेदना की अभिव्यक्ति/कविता है एक विचार/कविता है प्रकृति की सहचरीे/कविता है क्रान्ति की नजीर/कविता है शोषितों की आवाज/कविता है रसिकों का साज/कविता है सृष्टि और प्रलय का निर्माण/कविता है मोक्ष और निर्वाण/कभी यथार्थ, तो कभी कल्पना के आगोश में/कविता इस ब्रह्माण्ड से भी आगे है/शायद इसीलिए कहा गया है/जहाँ न पहुँचे रवि वहाँ पहुँचे कवि।

इस दौरान सहायक निदेशक (राजभाषा) कान सिंह राजपुरोहित ने कहा कि साहित्य में सबसे लोकप्रिय विधा कविता को ही माना जाता है क्योंकि कविता मनुष्य के कण्ठ में सहज ही समा जाती है। हमारे वेद, पुराण इत्यादि सभी काव्यमय रूप में ही लिखे गए हैं और अपनी गेयता के चलते स्वत: लोगों की जुबान पर चढ़ जाते हैं।

कार्यक्रम का संचालन डाक निरीक्षक सुदर्शन सामरिया और आभार-ज्ञापन राजेंद्र भाटी ने किया।  इस दौरान डाक विभाग के तमाम अधिकारी और कर्मचारीगण उपस्थित रहे।  


Tuesday, September 15, 2015

महात्मा गांधी से सम्बंधित सर्वाधिक डाक टिकटों का संग्रह कर बनाया नया विश्व रिकॉर्ड


डाक टिकटों की दुनिया में महात्मा गाँधी का नाम सर्वोपरि है।  अधिकतर लोग गांधी जी से जुड़े डाक टिकटों का संग्रह करते हैं। पर रायपुर(छत्‍तीसगढ़) के डॉ. भानुप्रताप सिंह ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के सबसे अधिक डाक टिकट का संग्रह कर नया विश्व रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। 

पेशे से डॉक्टर डॉ. भानुप्रताप सिंह ने बताया कि गिनीज में इससे पहले महात्मा गांधी ने नाम पर कैटेगिरी नहीं थी। सालों की मेहनत से उन्होंने यह रिकॉर्ड बनाया, साथ ही उन्हें इस कैटेगिरी को गिनीज में जुड़वाने में भी बहुत मेहनत करनी पड़ी। गिनीज से पहले लिमका बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी बिगेस्ट कलेक्शन ऑफ महात्मा गांधी स्टैम्प में उनका  नाम आ चुका है। साथ ही उन्होंने महात्मा गांधी पर एक किताब 'बापू- ए जर्नी फ्रॉम मोहनदास टू महात्मा' भी लिखी है।

डॉ. भानुप्रताप सिंह के पुराने रिकॉर्ड

- 2013 में रोलैण्ड हिल थीम पर स्टैम्प कलेक्शन में गिनीज में अपना नाम, जो कि पहले जयपुर के अरविंद झा के नाम पर था, उसे तोड़कर नया रिकॉर्ड कायम किया, जिसमें उन्होंने 1200 के रिकॉर्ड को अपने 1671 से तोड़ा।

- लिमका में इनरेगुलर सिक्कों का रिकॉर्ड

- बिगेस्ट साइज ऑफ एनवेलेप का रिकॉर्ड

- रंगीन सिक्कों के कलेक्शन का रिकॉर्ड

- अलग-अलग प्रकार के सिक्कों का रिकॉर्ड

- डाक सिक्कों का रिकॉर्ड

- क्वाइन ऑन स्टैम्प का रिकॉर्ड

- फर्स्ट  डे कवर का रिकॉर्ड

- रोल एंड हिल रिकॉर्ड

- क्वीन एलिजाबेथ स्टैम्प का रिकार्ड के आलावा कई रिकॉर्ड अपने नाम किए हैं।

वर्ल्ड रिकॉर्ड की दुनिया में कदम

डॉ. भानुप्रताप बताते हैं कि बचपन से ही उन्हें चीजों के कनेक्शन का शौक था, जिसे देखकर उन्हें वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने का आइडिया आया। वे दूसरे देशों के महारथियों की चीजें के कलेक्ट करते ही थे, पर भारतीय होने के नाते उन्हें महात्मा गांधी पर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने का सोचा और अपने इस सपने को पूरा किया।

Saturday, September 12, 2015

अब डाकघरों के माध्यम से भी उपलब्ध होगी ''प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना'' व ''प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना''

प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना व प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना अब डाकघरों के माध्यम से भी उपलब्ध है। सभी प्रधान डाकघरों व सीबीएस डाकघरों में इस योजना का लाभ लोग खाता खोल कर ले सकते हैं। उक्त सम्बन्ध में जानकारी देते हुए राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर के निदेशक डाक डाक सेवाएँ कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि  भारत सरकार द्वारा डाक विभाग के विशाल नेटवर्क एवं जन-जन तक पहुँच को देखते हुए, इन जन सुरक्षा योजनाओं को डाक विभाग के माध्यम से संचालित करने का निर्णय किया गया है। यह योजनायें राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र के 177 सी.बी.एस. प्लेटफार्म पर संचालित समस्त प्रधान डाकघरों एवं उप डाकघरों में उपलब्ध होंगी। 


निदेशक श्री यादव ने इन योजनाओं के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि  प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के तहत खाताधारकों को 330 रुपये में दो लाख रुपये का बीमा लाभ प्राप्त होगा। इस योजना को 18 वर्ष से 50 वर्ष तक के उम्र वाले खाताधारक ले सकते हैं। वहीं प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के तहत खाताधारकों को 12 रुपये में दो लाख रुपये का दुर्घटना बीमा का लाभ मिलेगा। इसके लिए धारक को केवल 12 रुपये प्रति वर्ष अर्थात 1 रुपये प्रति माह की राशि प्रीमियम के तौर पर देनी होगी।  यह योजना 18 वर्ष से 70 वर्ष तक के खाताधारकों के लिये है। प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना वस्तुत: एक बीमा पॉलिसी हैं, जिसके तहत मृत्यु एवम पूर्णतः विकलांग होने पर 2 लाख रूपये एवम आंशिकतौर पर अपंग होने पर 1 लाख रुपये  बीमा  राशि दी जायेगी|  


डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव  ने कहा कि उक्त दोनों योजनाओं के लिये आवेदकों का सीबीएस डाकघर में खाता होना आवश्यक है तथा खाताधारक डाकघर में प्रपत्र भर कर इन योजनाओं से जुड़ सकते हैं। अगर किसी उपभोक्ता का एक या अधिक बचत खाते हैं तब वे किसी एक बचत खाते के जरिये योजना से जुड़ सकते हैं। इसके अन्तर्गत दो फोटो, एक पहचान पत्र, पता प्रमाण पत्र व जन्मप्रमाण पत्र की प्रतिलिपि देना आवश्यक होगा। यह योजनायें डाकघर से जुड़ी होने के कारण धारक को प्रीमियम भरने की चिंता से मुक्ति मिलेगी क्यूंकि यह राशि सीधे खाते से काट ली जाएगी। यह बीमा योजनायें 1 साल तक वैध रहेगी जिसे प्रति  वर्ष नवीनीकरण करवाना होगा | जो खाताधारक इन योजनाओं का लाभ बैंक के माध्यम से प्राप्त कर चुके हैं,  उन्हें यह बीमा लाभ डाकघर से उपलब्ध नहीं होगा। इन बीमा योजनाओं से जुड़ने के लिए आधार कार्ड का होना जरुरी हैं |

Friday, September 11, 2015

'विश्व हिंदी सम्मेलन' पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जारी किया डाक टिकट


विश्व हिंदी सम्मेलन अपनी छटा डाक टिकटों पर भी बिखेरेगा।  मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में  तीन दिवसीय 10वें विश्व हिंदी सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में 10 सितंबर, 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्व हिंदी सम्मेलन पर 5 रूपये का विशेष डाक टिकट जारी किया। इस डाक टिकट पर 10वें विश्व हिंदी सम्मेलन का शुभंकर बना हुआ है। विश्व हिंदी सम्मेलन का आयोजन स्थल लाल परेड मैदान माखनलाल चतुर्वेदी नगर में बदल चुका है। मुख्य आयोजन रामधारी सिंह दिनकर सभागार में हो रहा है। उद्घाटन मंच पर डाक विभाग द्वारा तैयार डाक टिकट का प्रधानमंत्री ने विमोचन किया। 


इस दौरान संचार मंत्री रविशंकर प्रसाद, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, मध्यप्रदेश के राज्यपाल राम नरेश यादव, पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केशरी नाथ त्रिपाठी, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित तमाम राजनेता, साहित्यकार, बुद्धिजीवी इत्यादि मौजूद थे। 

Wednesday, September 9, 2015

डाक टिकटों पर झलकेंगे रामायण-महाभारत के वृतांत


भारतीय डाक विभाग जल्द ही प्राचीन ग्रंथों के वृतांतों को डाक टिकट पर उकेरने की योजना को अमलीजामा पहनाने जा रहा है। विभाग डाक टिकटों पर रामायण और महाभारत के वृतांत को दर्शाएगा।

उक्त टिकटों की श्रृंखला को विभाग द्वारा दशहरे के दौरान  जारी करने की योजना है । प्रथम चरण में विभाग द्वारा उक्त दोनों ग्रंथों पर आठ लाख डाक टिकट छपवाए जाएंगे। टिकटों की श्रृंखला में कुरुक्षेत्र में हुए महाभारत के रण एवं रामायण के प्रमुख किस्सों को दर्शाया जाएगा। 

पिछले दिनों महिला सशक्तिकरण के उपर डाक टिकट जारी करते हुए संचार मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने कहा, ‘मैंने इस बारे में डाक टिकट संग्रह बोर्ड के साथ चर्चा की है। डाक टिकटें रामायण और महाभारत श्रृंखला पर जारी की जानी चाहिए। यह देश की महान सांस्कृतिक धारणाओं का सम्मान होना चाहिए।’ उन्होंने कहा कि विभिन्न हस्तियों पर जारी डाक टिकटें केवल स्मृति के तौर पर सहेज कर रखने के लिये नहीं बल्कि नियमित उपयोग के लिये उपलब्ध होंगी।

Tuesday, September 8, 2015

डाक टिकटों पर दिखेंगे अब्दुल कलाम से लेकर माउंटेन मैन दशरथ मांझी


डाक टिकटों पर अब तमाम महान हस्तियों के दर्शन होंगे।  पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम से लेकर बिहार के माउंटेन मैन दशरथ मांझी के सम्मान में भारत सरकार डाक टिकट जारी करेगी. इनके अलावा देश के 25 अन्य महान हस्तियों पर भी डाक टिकट जारी होगा. जाने माने गायकों, लेखकों, स्वतंत्रता सेनानियों और चित्रकारों पर भी सरकार डाक टिकट जारी करने वाली है और इसके डिजाइन के लिए सरकार ने आम लोगों से राय मांगी है।  


डाक विभाग ने 30 जनवरी, 2015 को स्वच्छ भारत अभियान पर स्मृति डाक टिकट जारी किया था। इस डाक टिकट के डिजाइन पर फैसला भी खुली प्रतिस्पर्धा के जरिए किया गया था। महिला सशक्तिकरण पर भी 15 अगस्त, 2015 को एक स्मृति डाक टिकट को जारी किया गया था। इसके डिजाइन पर भी आम लोगों की राय से फैसला लिया गया था। द्रीय संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने यह भी कहा कि लोगों को टिकटों से जुड़ी सूचना मिल सके इसके लिए एक मोबाइल ऐप तैयार किया जाना चाहिए।

केंद्रीय मंत्री रविशंकर ने कहा कि डाक विभाग ने महाकवि विद्यापति, महात्मा गांधी, राजेंद्र प्रसाद, जयप्रकाश नारायण, जननायक कर्पूरी ठाकुर, भारतीय जनता पर्टी के नेता कैलाशपति मिश्र, रवींद्रनाथ टैगोर, छत्रपति शिवाजी समेत 25 देश के महान हस्तियों पर डाक टिकट जारी करने का फैसला किया है. ज्ञात हो कि विद्यापति, गांधी और टैगोर पर डाक टिकट पहले भी जारी हो चुका है. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के नेता भूपेश गुप्त  की याद में भी डाक टिकट जारी करने का फैसला लिया है.

Saturday, August 29, 2015

रक्षाबंधन और डाकघरों का संबंध है पुराना


राखी और पोस्ट ऑफिस का सम्बन्ध बहुत पुराना है।  यही कारण है कि रक्षाबंधन के समय डाकघरों में राखियाँ भेजने वालों की लंबी कतारें लगती हैं और सिर्फ देश ही नहीं विदेशों में भी खूब राखियाँ भेजी जा रही हैं। राखी का धागा ऑनलाइन होते  इस युग में  आज भी अपनी अहमियत रखता है।
 (साभार : राजस्थान पत्रिका, 29 अगस्त, 2015) 


Sunday, August 23, 2015

भारतीय डाक विभाग को पेमेंट बैंकिंग के लिए मिला लाइसेंस


भारतीय डाक विभाग सहित 11 संस्थानों को भारतीय रिज़र्व बैंक ने 'पेमेंट बैंकों' के लिए लाइसेंस जारी करने की मंज़ूरी  20 अगस्त को दे दी है। रिज़र्व बैंक को पेमेंट बैंक लाइसेंस के लिए 41 अर्जियां मिली थीं, जिनमें से 11 को लाइसेंस के योग्य पाया गया। गौरतलब है कि पेमेंट बैंक के लिए रिज़र्व बैंक ने 2013 में डिस्कशन पेपर जारी किया था. इसके बाद नचिकेत मोर कमेटी का गठन किया गया. बाद में रिज़र्व बैंक ने पेमेंट बैंक के लाइसेंस जारी करने के लिए नियम-क़ायदे तय किए.

अरबपति मुकेश अंबानी, कुमारमंगलम बिड़ला की कंपनियों के साथ साथ सुनील भारती मित्तल की भारती एयरटेल, डाक विभाग और विदेशी स्वामित्व वाली दूरसंचार कंपनी वोडाफोन सहित 11 कंपनियों को रिजर्व बैंक ने बुधवार को भुगतान बैंक चलाने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी। भुगतान बैंक लोगों से जमा स्वीकार करेंगे और धन का प्रेषण करेंगे। इस तरह के बैंक किसी को कर्ज नहीं देंगे। मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड  जिसने हाल ही में भारतीय स्टेट बैंक के साथ भागीदारी की घोषणा की, के साथ-साथ एयरटेल एम-कामर्स सविर्सिज लिमिटेड, आदित्य बिड़ला नुवो, वोडाफोन एम-पैसा, टेक महिन्द्रा और डाक विभाग को रिजर्व बैंक से भुगतान बैंक शुरू करने के लिये सैद्धांतिक तौर पर मंजूरी मिल गई। सनफार्मा के प्रवर्तक दिलीप शांतिलाल सांघवी और पे-टीएम के विजय शेखर शर्मा को अपनी व्यक्तिगत हैसियत में भी भुगतान बैंक के लिये सैद्धांतिक मंजूरी मिली है।

इसके अलावा चोलामंडलम् डिस्ट्रीब्यूशन सर्विसिज, फिनो पे-टेक और नेशनल सिक्युरिटीज डिपाजिटरी लिमिटेड :एनएसडीएल: को भी इसके लिये मंजूरी दी गई है। कुल मिलाकर 41 आवेदकों में से 11 कंपनियों को व्यक्तियों को भुगतान बैंक के लिये सैद्धांतिक मंजूरी दी गई है। भुगतान बैंक लाइसेंस के तहत कंपनियों को शुरूआत में ग्राहकों से एक लाख रुपये तक की जमा राशि स्वीकार करने की मंजूरी होगी। ये बैंक अपने ग्राहकों को इंटरनेट बैंकिंग, धन प्रेषण सुविधा देने के साथ साथ बीमा एवं म्यूचुअल फंड योजना भी बेचेंगे।  इसके अलावा भुगतान बैंक अपने ग्राहकों को एटीएम, डेबिट कार्ड जारी कर सकेंगे लेकिन क्रेडिट कार्ड देने की अनुमति नहीं होगी। भुगतान बैंक की शुरूआत हेतु 18 महीने की  समय सीमा भी तय की गई है। 

पेमेंट बैंक की विशेषतायें :

पेमेंट बैंक में हर खाताधारक अधिकतम एक लाख रुपए तक की राशि जमा कर सकता है.
इसके माध्यम से पैसे का लेन-देन किया जा सकता है. ये बैंक ग्राहकों को एटीएम/डेबिट कार्ड जारी कर सकते हैं.
पेमेंट बैंक इंटरनेट बैंकिंग के ज़रिए लेन-देन की सुविधा भी देंगे.
पेमेंट बैंक से बैंकिंग सि‍स्‍टम में कैशलेस ट्रांजेक्‍शन को बढ़ावा मि‍लेगा.
पेमेंट बैंक नियमित बैंकों की तरह कर्ज़ नहीं दे सकते. क्रेडिट कार्ड भी जारी नहीं कर सकते.
ये बैंक अपने पास नक़दी या सरकारी प्रतिभूतियां ही रख सकते हैं.

Friday, August 14, 2015

जब देश की आजादी पर जारी हुआ डाक टिकट

आजादी के उपलक्ष्य में भारतीय डाक विभाग ने  साढ़े तीन आना (यानि चौदह पैसा) का एक डाक टिकट जारी किया था।  इस पर तिरंगे ध्वज के चित्र के साथ जय हिन्द शब्द मुद्रित है। कई लोग ऐसा सोचते हैं की यह डाक टिकट 15 अगस्त, 1947 को जारी हुआ होगा, पर ऐसा नहीं है।  स्वतंत्रता पश्चात 21नवंबर,1947 को प्रथम भारतीय डाक टिकट साढ़े तीन आने का ‘जयहिंद’ जारी किया गया। 



नेहरू जी ने आजादी के बाद, लाल किले से अपने पहले भाषण का समापन भी , 'जय हिन्द' से किया था। उस समय डाक विभाग को सूचना  भेजी गई कि नए डाक टिकट आने तक, डाक टिकट चाहे अंग्रेज राजा जॉर्ज की ही मुखाकृति की उपयोग में आए लेकिन उस पर मुहर 'जय हिन्द' की लगाई जाए। 31 दिसम्बर 1947 तक यही मुहर चलती रही। 

हिंदुस्तान अख़बार में डाकखाने की इस मुहर पर प्रथम पृष्ठ पर समाचार भी प्रकाशित था। 

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शताब्दियों की दासता के बाद जब भारत में स्वतंत्रता का मंगल प्रभात हुआ था तो सबकी आँखों में एक नई रोशनी टिमटिमाई थी।  नए सपने, नई सोच, नए जज्बे .... वाकई आज हमने एक लंबा सफ़र तय कर लिया है। आजादी के 69वें साल में प्रवेश कर रहे हैं। स्वतंत्रता दिवस पर हार्दिक शुभकामनायें !! 

Wednesday, August 12, 2015

अब वाटरप्रूफ डिजायनर लिफाफे में भेजें राखी

हर बहन चाहती है कि उसके द्वारा भेजी जा रही राखी सुरक्षित और तीव्रता से उसके भाई के पास पहुँच सके। ऐसे में बहनों द्वारा भाईयों की कलाइयों पर बँधने वाली राखी सुरक्षित रूप में व तीव्र गति से भेजी जा सके, इसके लिए डाक विभाग ने विशेष प्रबन्ध किये हैं। इस संबंध में जानकारी देते हुए राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर के निदेशक डाक सेवाएं  कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि राखियों को सुरक्षित भेजने हेतु प्रधान डाकघरों द्वारा विशेष रुप से निर्मित डिजाइनदार राखी लिफाफों की ब्रिकी आरम्भ की जा रही है। 


डाक निदेशक श्री यादव ने कहा कि ये राखी लिफाफे वाटर प्रूफ तथा सुरक्षा की दृष्टि से मजबूत हैं, जिससे मानसून के मौसम में भी बहनों द्वारा भेजी गई राखियाँ सुदूर रहने वाले भाइयों तक सुरक्षित पहुँच सकें। राखी लिफाफों को चिपकाने हेतु इनमें विशेष स्टिकर का प्रयोग किया गया है जिससे लेई या गम की आवश्यकता नहीं होगी। 11 सेमी X 22 सेमी आकार के इन राखी लिफाफों का मूल्य रुपया 7.50 है जो डाक शुल्क के अतिरिक्त है। वाटरप्रूफ लिफाफे के बाएं हिस्से के ऊपरी भाग में भारतीय डाक के लोगों के साथ अंग्रेजी में राखी शब्द लिखा गया है। श्री यादव ने कहा  कि रंगीन और डिजाइनदार होने की वजह से इन्हें अन्य डाकों से अलग करने में समय की बचत और पर्व के पूर्व वितरण कराने में सहुलियत होगी।  जोधपुर प्रधान डाकघर सहित सभी प्रधान डाकघरों से इसकी बिक्री शुरू कर दी गई है।