Tuesday, June 16, 2020

कोरोना आपदा में संकटमोचक बना डाक विभाग, विषम परिस्थितियों में भी डाककर्मी निभा रहे अहम जिम्मेदारी

सीधा-साधा डाकिया जादू करे महान, एक ही थैले में भरे आँसू और मुस्कान। निदा फ़ाज़ली का यह शेर आज भी उतना ही प्रासंगिक लगता है। देश पर जब भी कोई विपदा आई तो डाकिया बाबू अपनी जान हथेली पर लेकर सामने खड़े नजर आये। पहाड़ों से लेकर नदियों की लहरों तक, समुद्र के बीच द्वीपों से लेकर रेगिस्तान तक, हर जगह डाक विभाग की उपस्थिति दिखेगी। डाक सेवाएँ अनवरत चलती रहती हैं। तभी तो कोरोना से जंग में डाकिया और ग्रामीण डाक सेवक हर दरवाजे पर दस्तक लगा रहा है। वास्तव में देखें तो ग्रामीण क्षेत्रों में डाकिया भारत सरकार का नुमाइंदा भी है। उसकी सक्रियता लोगों को आश्वस्त करती है कि सरकार अपना कार्य ठीक से कर रही है।  एक तरफ कोरोना से संक्रमण का डर दूसरी तरफ परिवार वालों द्वारा घर से बाहर निकलने पर रोक ...... पर इसके बावजूद अपनी जान हथेली पर लेकर ये 'कोरोना वॉरियर्स' लोगों को राशन, दवाएँ पहुँचाने से लेकर डोर-स्टेप पर बैंक खातों से डीबीटी व नकद निकासी की सुविधा दे रहे हैं।
उत्तर प्रदेश परिमंडल के चीफ पोस्टमास्टर जनरल कौशलेन्द्र कुमार सिन्हा कहते हैं कि, "कोरोना विपदा के इस समय में सरकार ने डाक सेवाओं को आवश्यक सेवाओं में रखा है। हर दरवाजे तक डाकिया व ग्रामीण डाक सेवक पहुँचकर लोगों को सेवा दे रहे हैं। घर-घर, खेत-खलिहान, अस्पताल, जंगल तथा नदी में नाव  पर जाकर लोगों को धन निकासी की सुविधा, दवा व मेडिकल उपकरण पहुंचाने जैसे कार्यों से इन्होंने अपनी पहचान जनता के दिलों में 'कोरोना योद्धा' के रूप में बना ली है। हम उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए उन्हें प्रोत्साहन दे रहे हैं। उत्तर प्रदेश में लॉकडाउन आरम्भ होने से अब तक 35 लाख से अधिक लोगों  को घर बैठे एईपीएस के माध्यम से 5 अरब 85 करोड़ रुपये की राशि उनके बैंक खातों से निकालकर दी गई। डाककर्मियों ने आपसी सहयोग से राशि एकत्र कर लोगों को राशन, सब्जियाँ व फूड पैकेट भी उपलब्ध कराये हैं। "  
ऐसा नहीं है कि ऐसी आपदा पहली बार आई है। डाक विभाग इससे पूर्व भी ऐसे समय पर संकटमोचक बनकर उभरा है। लखनऊ मुख्यालय परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ  कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि, "इससे पहले भी जब देश में मलेरिया महामारी का प्रकोप फैला था तो डाक विभाग ने घर-घर जाकर कुनैन दवाएँ बाँटी थीं। डाक विभाग सदैव 'अहर्निशं सेवामहे' भाव से कार्य करता रहा है। अब कोरोना संकट की इस घड़ी में भी लोगों को दवा पहुंचाने से लेकर घर बैठे नकद उपलब्ध कराने में डाककर्मी अपने अदम्य कर्तव्यनिष्ठा व साहस का परिचय दे रहे हैं। डाकघरों के माध्यम से पीपीई किट्स, मास्क, वेंटिलेटर, कोविड 19 टेस्टिंग किट्स तक पहुँचाई जा रही हैं। डाक विभाग सदैव से ही लोगों के सुख-दुःख का साथी रहा है  और संकट की इस घड़ी ने एक बार फिर से इसे सिद्ध कर दिया है। हम सब अपने कर्तव्यों के निर्वहन के साथ मानवीय सेवा भी कर रहे हैं। निश्चित रूप से कोरोना हारेगा और देश जीतेगा।"
कोरोना ने दूरदराज के इलाकों में कार्य करने वाले डाकियों और ग्रामीण डाक सेवकों को एक नई पहचान भी दी है। अयोध्या में धनैचा गाँव के शाखा डाकपाल राजेन्द्र यादव को लोग देखते ही 'डाकिया बैंक लाया' कहकर स्वागत करते हैं और फिर वे उसी उत्साह से कभी खेतों में, कभी कुएँ की जगत पर, कभी दरवाजे पर अपने माइक्रो एटीएम से उनके बैंक खातों से राशि निकालकर देते हैं। केंद्रीय संचार मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने भी कुएँ की जगत पर भुगतान करते उनकी एक फोटो ट्विटर पर शेयर की तो वे और भी प्रोत्साहित हुए। अयोध्या में तो सरयू नदी में नाव पर भुगतान काफी चर्चित रहा। 
सीतापुर जिले में इटिया गाँव के शाखा डाकपाल चन्द्र भूषण शुक्ल कहते हैं कि, लॉकडाउन और कोरोना ने हम सभी को यह मौका दिया कि समाज के लिए कुछ कर सकें। सीतापुर में कई बार तो हमारे विभागीय साथी अपनी जान हथेली पर लेकर हॉटस्पॉट इलाके में भी लोगों को आधार इनेबल्ड पेमेंट सिस्टम के माध्यम से पैसे निकालने की सुविधा देने के लिए गए। कोरोना से बचाव के लिए हम लोग सोशल डिस्टेंसिंग के साथ मास्क, ग्लव्ज, सेनिटाइजर का भरपूर इस्तेमाल करते हैं। सभी तरह की सावधानियां बरतने के बाद भी कई बार डर लगता है, पर विपत्ति की इस घड़ी में लोग हमें देवदूत की तरह देखते हैं।
लॉकडाउन के बीच में ही  रमज़ान का महीना भी आया। लखनऊ में लौलाई गाँव के शाखा डाकपाल ताहिर रज़ा तो रोजे के साथ-साथ लोगों के दरवाजे पर पहुँचकर उन्हें दवा वितरित करना, जरूरतमंद लोगों के बैंक खातों से नकद निकालकर तुरन्त उन्हें देना जैसी जिम्मेदारियाँ भी निभाते चले गए। जिन लोगों ने लम्बे समय से सुध नहीं ली, वे भी उन्हें फोन करके अपने घर आने का लगातार अनुरोध करते हैं। कुर्सी रोड स्थित एक अस्पताल में एक बुजुर्ग मरीज के पास इलाज हेतु पैसे खत्म हो गए तो उनके परिजनों ने फोन किया और फिर वहीं पर जाकर उनके बैंक खाते से नकद निकालकर दिया।
रायबरेली में छटोह गाँव के शाखा डाकपाल गिरीश श्रीवास्तव ने बताया कि, लोगों को घर पर पैसे देने के साथ-साथ हम लोग उन्हें कोविड 19 से लड़ने हेतु जागरूक भी कर रहे हैं। सरकार लोगों के बैंक खातों में डीबीटी राशि ट्रांसफर कर रही है, पर बैंकों पर बढ़ती भीड़ और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन न हो पाने के चलते कई बार लोग उदास लौट आते हैं। ऐसे में डाक विभाग की 'इण्डिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक' की 'आधार इनेबल्ड पेमेंट सिस्टम' सुविधा लोगों के लिए वरदान साबित हुई है। कई बार किसानों को उनके खेत में ही जाकर भुगतान किया।
 अम्बेडकरनगर जिले में नागपुर जलालपुर के शाखा डाकपाल मृत्युंजय उपाध्याय कहते हैं कि,  डाकघर ' दुनिया का एक ऐसा विभाग है जिसमें 'घर' शब्द का प्रयोग होता है। इसीलिए लोगों का डाकघरों से आत्मीय रिश्ता होता है। गाँवों में लोग हमारी तरफ आशा भरी निगाहों से देखते हैं। कई बार अपने पैसों से भी जरूरतमंदों को राशन व फूड पैकेट उपलब्ध कराया है। एक दिव्यांग को पैसों की जरूरत पड़ी तो उसके घर पर जाकर भुगतान किया। लोगों को बैंकों तक जाकर न भटकना पड़े, इसलिए उनके दरवाजे पर ही पैसे निकालकर देते हैं। बुजुर्गों, महिलाओं, मरीजों व दिव्यांगों को इससे काफी सहूलियत हो गई है। कोरोना संक्रमण के दौरान बाहर निकलने पर परिवार वाले घबराते हैं, लेकिन लोगों की सेवा करने के लिए हौसला भी बढाते हैं।
संकट की इस घड़ी में महिला डाककर्मी भी पीछे नहीं हैं। बाराबंकी जिले में मोहम्मदपुर गाँव की शाखा डाकपाल अन्नपूर्णा सिंह कहती हैं कि, कोरोना के बीच आरम्भ में कार्य करने में बहुत डर लगता था। परिवार वालों को भी संक्रमण की बड़ी चिंता रहती थी। पर यह भी लगा कि यह गाँव भी तो अपना परिवार है। यदि आज विपदा में हम अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह नहीं करेंगे तो अंतरात्मा हमेशा कचोटेगी। बस इसी भावना से लोगों को माइक्रो एटीएम द्वारा घर-घर जाकर उनके बैंक खातों से पैसे निकालकर देना आरम्भ किया। गाँव की तमाम महिलाओं के इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक में खाते खुलवाकर उन्हें डिजिटल बैंकिंग भी सिखाई। अब तो लोगों के चेहरे की खुशी देखकर अपना डर भूल गई हूँ।




Post offices in Uttar Pradesh will now sell hand sanitizers to fight against Corona



कोरोना से जंग में डाक विभाग अब एक और महत्वपूर्ण भूमिका निभाने को तैयार है। अब उत्तर प्रदेश के डाकघरों से हैण्ड सेनेटाइजर्स की बिक्री भी की जाएगी। इस सम्बन्ध में जानकारी देते हुए उत्तर प्रदेश  परिमण्डल के चीफ पोस्टमास्टर जनरल श्री कौशलेन्द्र कुमार सिन्हा ने बताया कि डाक विभाग मेघदूत ग्रामोद्योग सेवा संस्थान द्वारा निर्मित हैन्ड सैनेटाइजर और अन्य उत्पादों की बिक्री उत्तर प्रदेश में सभी प्रधान डाकघरों, मुख्य डाकघरों सहित 500 चयनित डाकघरों के माध्यम से करेगा। इस हेतु दोनों के मध्य  9 जून को एक एमओयू पर हस्ताक्षर किया गया है। इसके तहत अब उत्तर प्रदेश के चयनित डाकघरों में मेघदूत ग्रामोद्योग सेवा संस्थान के उत्पाद अगले एक साल (15 जून 2020 से 14 जून 2021) तक बिक्री हेतु उपलब्ध होंगे। प्रोजेक्ट की सफलता को देखते हुए डाक विभाग इस करार को आगे बढ़ाने पर भी विचार कर सकता है।
चीफ पोस्टमास्टर जनरल श्री कौशलेन्द्र कुमार सिन्हा ने कहा कि कोरोना से बचाव में  हैण्ड सेनेटाइजर्स की अहम भूमिका है।  ऐसे में आमजन को अच्छा व उचित मूल्य पर हैन्ड सैनेटाइजर उपलब्ध कराने के लिए डाक विभाग द्वारा यह करार किया गया है। मेघदूत ग्रामोद्योग सेवा संस्थान के ये उत्पाद 15 जून से उत्तर प्रदेश के चयनित डाकघरों से बिक्री हेतु उपलब्ध होगें।
लखनऊ मुख्यालय परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि बिक्री की मॉनिटरिंग व एकाउंटिंग के लिये लखनऊ जीपीओ को नोडल ऑफिस बनाया गया है। राजधानी में कुल 19 डाकघरों - जीपीओ, चौक, गोमतीनगर, अमीनाबाद पार्क, दिलकुशा, राजेंद्रनगर, महानगर, न्यू हैदराबाद, जानकीपुरम, विकासनगर, अलीगंज,  वृंदावन कालोनी, आवास विकास कालोनी, आलमबाग, हाईकोर्ट बेंच, निरालानगर, इंदिरानगर, मोहनलालगंज, मलिहाबाद में हैन्ड सैनेटाइजर्स की बिक्री की जाएगी। हैंड सैनेटाइजर्स की कीमत 60 मिली. के लिए रूपये 30/-, 100 मिली. के लिए रूपये 50/-, 210 मिली. के लिए रूपये 105/- एवं 500 मिली के लिए रूपये 250/- होगी।








पहल : कोरोना से लड़ने के लिए उत्तर प्रदेश में डाकघरों से भी होगी हैण्ड सेनेटाइजर्स की बिक्री

डाक विभाग व मेघदूत ग्रामोद्योग सेवा संस्थान के मध्य हुआ करार, उत्तर प्रदेश के 500 डाकघरों से होगी बिक्री

Tuesday, June 9, 2020

उत्तर प्रदेश डाक परिमंडल ने बनाया रिकॉर्ड : एक दिन में 3.60 लाख लोगों को आधार इनेबल्ड पेमेंट्स सिस्टम से किया 43.75 करोड़ रुपये का भुगतान

लोगों को घर बैठे  उनके दरवाजे पर पैसे निकालने की सुविधा देने के क्रम में डाक विभाग ने उत्तर प्रदेश में 08 जून, 2020 को आधार इनेबल्ड पेमेंट सिस्टम का महाअभियान चलाकर एक दिन में 3.60 लाख लोगों को लाभान्वित किया। उत्तर प्रदेश के चीफ पोस्ट मास्टर जनरल श्री कौशलेन्द्र कुमार सिन्हा ने बताया कि, इसके तहत 43.75 करोड़ रूपये से अधिक की राशि लोगों को घर बैठे प्रदान की गई। इसी के साथ उत्तर प्रदेश डाक परिमंडल ने पूरे भारत में एक दिन में सर्वाधिक लोगों को भुगतान करने का रिकॉर्ड भी बना दिया।

विपदा के इस दौर में डाक विभाग की इस पहल को काफी सराहना मिल रही है। श्री सिन्हा ने बताया कि लॉक डाउन से अब तक उत्तर प्रदेश में 33.29 लाख से अधिक लोगों को 5 अरब 48 करोड़ रुपये की राशि उनके  बैंक खातों से निकालकर घर बैठे डाकिया द्वारा प्रदान की जा चुकी है। 
उत्तर प्रदेश परिमंडल के चीफ पोस्टमास्टर जनरल श्री कौशलेन्द्र कुमार सिन्हा ने कहा कि आईपीपीबी के माध्यम से डाक विभाग डाकिया और ग्रामीण डाक सेवक द्वारा घर-घर जाकर किसी भी बैंक से पैसा निकाल कर ग्राहकों को उपलब्ध करा रहा है। अत्यधिक संख्या में लोग इस सेवा का लाभ ले रहे हैं। राज्य व केंद्र सरकारों के द्वारा विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के तहत भेजी जा रही राशि लोग घर बैठे ही डाकिया के माध्यम से निकाल पा रहे हैं। साथ ही, असहाय लोग जो कि शारीरिक रूप से अक्षम हैं, वृद्ध या फिर सुदूर ग्रामीण क्षेत्र जहां पर एटीएम की सुविधा उपलब्ध नहीं है वहां पर भी डाकिया व ग्रामीण डाक सेवक जाकर बैंक से पैसे निकाल कर लोगों को उपलब्ध करा रहे हैं।
लखनऊ मुख्यालय परिक्षेत्र के  निदेशक डाक सेवाएँ श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि, डाकियों के पास उपलब्ध माइक्रो एटीएम से प्रतिदिन एक व्यक्ति अपने आधार लिंक्ड बैंक खाते से दस हजार रूपए तक की रकम निकाल सकता है। कोरोना महामारी के इस दौर में डाककर्मी सोशल डिस्टेंसिंग व पूरी एहतियात बरतते हुए समर्पण भाव के साथ कोरोना योद्धा के रूप में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं।






Monday, June 8, 2020

Corona Warriors India Post : लॉकडाउन में अस्पतालों और मरीजों के लिए संजीवनी बना डाक विभाग, पीपीई किट्स और कोविड टेस्टिंग किट्स भी पहुँचा रहा

'डाकिया डाक लाया' गीत हम सभी लम्बे समय से सुनते आ रहे हैं। पर लॉकडाउन में डाकिया के थैले में अब सिर्फ चिट्ठियां व पैसे ही नहीं बल्कि दवाएं, मास्क पीपीई किट्स और अन्य मेडिकल उपकरण भी हैं। कोरोना महामारी के चलते पूरे देश में लागू लॉकडाउन ने अस्पतालों और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए समस्याएं खड़ी कर दीं। प्लेन, ट्रेन और बसों सहित ट्रांसपोर्ट के प्राय: सभी साधन बंद होने से आवश्यक दवाओं की आपूर्ति एक अहम समस्या हो गई। कूरियर कंपनियों ने भी हाथ खड़े कर दिए। एक तो लॉकडाउन में बाहर निकल नहीं सकते, उस पर से कोरोना के डर से लोग को अस्पताल जाने में भी झिझकने लगे। ऐसे में डाक विभाग लोगों के लिए संजीवनी बनकर सामने आया। डाककर्मी विशेषकर डाकिया इस समय 'कोरोना योद्धा' के रूप में लगातार कार्य कर रहे हैं। स्वयं संचार मंत्री श्री रविशंकर प्रसाद भी लॉक डाउन के दौरान उत्तर प्रदेश में डाक विभाग द्वारा किये जा रहे  तमाम कार्यों के बारे में ट्वीट करके  प्रशंसा कर चुके हैं।
उत्तर प्रदेश परिमंडल के चीफ पोस्टमास्टर जनरल श्री कौशलेन्द्र कुमार सिन्हा ने कहा कि, लॉकडाउन में आम जनमानस को दवाइयों तथा अन्य जीवनोपयोगी वस्तुओं के लिए परेशानी का सामना न करना पड़े, इस जिम्मेदारी को उठाते हुए डाक विभाग लगातार जीवनरक्षक दवाओं, एन 95 मास्क, पीपीई किट्स तथा वेंटिलेटर्स इत्यादि मेडिकल उपकरणों की बुकिंग व विभिन्न शहरों में उनका समयबद्ध तरीके से वितरण सुनिश्चित कर रहा है।
श्री सिन्हा ने कहा कि, ई कॉमर्स कंपनी नेटमेड्स, सिप्ला से लेकर इंडियन ड्रग मैनुफैक्चर एसोसिएशन तक डाकघरों से दवाएँ भेज रहे हैं । नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ मलेरिया रिसर्च, नई दिल्ली से  कोविड-19 टेस्टिंग किट्स कोल्ड चेन सिस्टम के अंतर्गत संजय गाँधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ (एसजीपीजीआई) में 18 घंटे के भीतर पहुँचाई गई।
लखनऊ मुख्यालय परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि, अकेले लखनऊ के डाकघरों से अब तक लगभग 23 टन दवाएं स्पीड पोस्ट और पार्सल के माध्यम से देश के विभिन्न भागों में भेजी जा चुकी हैं। कोरोना से जंग में अहम भूमिका निभाते हुए ढाई लाख  कोविड-19 टेस्टिंग किट्स भी लखनऊ के डाकघरों से स्पीड पोस्ट के माध्यम से बुक होकर उत्तर प्रदेश के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों व सरकारी अस्पतालों में वितरित की जा चुकी हैं। इन्हें 24 घंटे के भीतर कोल्ड चेन सिस्टम में पहुँचाना होता है, ताकि ये खराब न हों।
श्री यादव ने कहा कि, अन्य राज्यों व जनपदों  से प्राप्त मेडिकल उपकरणों को प्राथमिकता के आधार पर तुरंत लोगों को पहुँचाया जा रहा है। लखनऊ में इसके लिए विशेष वाहनों की व्यवस्था की गई है, ताकि जरूरत पड़ने पर एकदम सुबह या देर शाम में भी दवाओं व मेडिकल उपकरणों को एसजीपीजीआई, केजीएमयू या अन्य संस्थानों और व्यक्तियों तक पहुँचाया जा सके।
चीफ पोस्टमास्टर जनरल कौशलेन्द्र कुमार सिन्हा ने कहा कि, ट्रांसपोर्ट के सभी साधन बंद होने पर डाक के आदान-प्रदान के लिए डाक विभाग ने अपने रोड ट्रांसपोर्ट नेटवर्क को विकसित किया ताकि इसके माध्यम से नागरिकों को अंतिम छोर तक सुचारु रूप से डाक सेवाएँ पहुँचाई जा सकें। डाक विभाग की लाल रंग की मेल मोटर्स से दवाइयों के पार्सल एवं अन्य आवश्यक वस्तुओं का सफलतापूर्वक बुकिंग और वितरण सुनिश्चित किया जा रहा। इस दौरान सभी डाककर्मी सोशल डिस्टेंसिंग व पूरी एहतियात बरतते हुए समर्पण भाव के साथ कार्य कर रहे हैं।








कोरोना योद्धा : लॉकडाउन में अस्पतालों और मरीजों के लिए संजीवनी बना डाक विभाग

दवाओं के साथ मास्क, पीपीई  किट्स, वेंटिलेटर और कोविड टेस्टिंग किट्स भी पहुँचा रहा डाक विभाग

लखनऊ के डाकघरों से भेजी गईं 23 टन दवाएं और ढाई लाख कोविड-19 टेस्टिंग किट्स



Thursday, May 21, 2020

India Post 'Aapka Bank Aapke Dwaar' : लॉकडाउन में रमजान माह से लेकर मंदिर-मठों तक डाकघर की अनूठी पहल ने दी लोगों को घर बैठे सुविधा

कोरोना महामारी से उत्पन्न लॉकडाउन में डाक विभाग की आधार इनेबल्ड पेमेंट सिस्टम लोगों के लिए संजीवनी का कार्य कर रही है। रमजान माह में रोजा के चलते जो लोग बाहर नहीं निकल पा रहे हैं, वह भी घर बैठे डाकिया को फोन करके अपने बैंक खातों से पैसे निकाल रहे हैं। इसी प्रकार मंदिर और मठों में भी साधु-संत डाकिया के माध्यम से अपने बैंक खातों से पैसे निकाल पा रहे हैं। डाक विभाग इस समय गंगा-जमुनी तहजीब को कायम रखते हुए सभी के दरवाजे पर जाकर "आपका बैंक, आपके द्वार" को फलीभूत कर रहा है।  
लखनऊ मुख्यालय परिक्षेत्र के अधीन लखनऊ से लेकर अयोध्या, बाराबंकी, सीतापुर व रायबरेली तक में लोग घर बैठे पैसे निकालने की इस सुविधा से खुश नजर आ रहे हैं। लखनऊ मुख्यालय परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि लॉक डाउन की अवधि में लखनऊ परिक्षेत्र में 3.15 लाख लोगों ने घर बैठे 4.25 करोड़ रूपये की राशि आहरित की।  
अयोध्या में बाबरी मस्जिद के पक्षकार रहे इकबाल अंसारी को जब एटीएम होते हुए भी पैसे निकालने में समस्या हुई तो उन्होंने इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक की एईपीएस सेवा के माध्यम से अपने बैंक खाते से पैसे निकाले तथा इस सेवा से प्रभावित होकर तुरंत इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक का खाता भी खुलवाया। गोलाघाट, अयोध्या के शाखा डाकपाल प्रवेश यादव ने उनके घर पर पहुँचकर खाता खोला। इकबाल अंसारी इससे काफी खुश हुए और पवित्र रमज़ान माह में घर बैठे यह सुविधा उपलब्ध कराने हेतु डाक विभाग के साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संचार मंत्री रविशंकर प्रसाद का शुक्रिया अदा किया।
लॉकडाउन में अयोध्या स्थित प्रसिद्ध हनुमानगढ़ी मंदिर परिसर में साधु-संतों को भी 'आधार इनेबल्ड पेमेंट सिस्टम' के माध्यम से डाक विभाग ने उनके बैंक खातों से राशि निकाल कर दी। श्री संजय दास, राष्ट्रीय अध्यक्ष, संकट मोचक सेना, हनुमान गढ़ी के साथ तमाम साधु-संतों ने इस सुविधा का लाभ लिया और डाकघर की इस पहल को सराहा। इस अनूठी सुविधा के लिए उन्होंने भी डाक विभाग के साथ-साथ प्रधानमंत्री व संचार मंत्री का आभार व्यक्त किया।