Tuesday, June 26, 2012

Now get more remittances under International Money Transfer Services from Post Offices

ALLAHABAD: The transferring of money from abroad has always been a problem. However, the International Money Transfer Scheme (IMTS) of the department of Posts has made it comparatively quick and easier.

Elaborating on various aspects of the scheme, director postal services, Allahabad region Krishna Kumar Yadav said that with the cooperation of private money transfer firm, the money sent through abroad can be obtained by the recipient in India within few minutes, in selected post offices. Basically this service is available for those NRIs, whose families reside in India. In this service a special code is issued to sender and receiver can obtained payment very easily through this code.

Yadav further intimated that under this scheme the number of remittance has been enhanced from 12 to 30 times for single beneficiary in a calendar year from June 2012. Due to this, there is great scope to transfer money from abroad. In this service there is no facility of remittance to abroad. In 2011; 6,253 transactions were done, while in current year upto May 2012; 2,198 transactions took place in Allahabad. Although about 500 IMTS transactions are being done every month, in Allahabad.

Yadav added that the maximum limit of USD 2,500 can be sent at a time as per RBI regulations, which must however be only for personal use. Due to this the payment under this service is made to the person not to any firm, company, trust or society. Amounts upto INR. 50,000/- may be paid to the beneficiary in cash. Any amount exceeding this limit shall be paid by means of account payee cheque or credited directly to the savings account in the post office in the name of the beneficiary. However, in case of foreign tourists, higher amounts can be payable in cash.

He said in Allahabad region there are 89 post offices including all head post offices, where this service is available. Among these there are 18 post offices in Allahabad division, where the service of IMTS is made available. Allahabad includes services at Allahabad HO, Kutchery HO, Allahabad city, high court, Cavalry Line, GTB Nagar, Bahadurganj, CDA Pension, Athrampur, Bharwari, Handia, Karchhana, Manjhanpur, Phoolpur, Naini, Sirathu and Soraon post offices. The post offices have been directed to treat the payee as "most favoured customers", which ensures courteous and efficient service to them.

Courtesy : Times of India

Friday, June 22, 2012

डाक विभाग की इण्टरनेशनल मनी ट्रान्सफर सेवा : अब 12 की बजाय साल भर में 30 बार विदेशों से धन मंगाने की सुविधा

विदेशों से धन मंगाना सदैव से एक समस्या रही है पर डाक विभाग की इण्टरनेशनल मनी ट्रान्सफर सेवा ने इसे बेहद सुगम, आसान और त्वरित बना दिया है। इलाहाबाद परिक्षेत्र के डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि वेस्टर्न यूनियन फाइनेन्सियल सर्विसेज प्रा0 लि0 के सहयोग से आरम्भ इस सेवा के अन्तर्गत प्रेषक द्वारा विदेशों से भेजी जाने वाली धनराशि चन्द मिनटों में ही प्राप्तकर्ता द्वारा प्राप्त की जा सकती है। यह सेवा मूलतः उन प्रवासीय भारतीयों के लिए है जिनके परिवार वाले भारत में रहते हैं। इसके अन्तर्गत एक विशेष कोड जारी किया जाता है, जिसको बताकर प्राप्तकर्ता यहाँ भारत में उसका भुगतान आसानी से ले सकता है।

डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि इस सेवा के तहत एक कैलेण्डर वर्ष में पहले एक व्यक्ति द्वारा मात्र 12 बार धन विदेशों से मंगाया जा सकता था, जिसे कि जून 2012 से बढ़ाकर 30 कर दिया गया हैं। इससे इस सेवा के तहत धन मंगाने की आमद में काफी वृद्धि होने की संभावना हैं। इस सेवा में मात्र विदेशों से धन मंगाने की सुविधा है, विदेशों को धन भेजने की नहीं। फिलहाल इलाहाबाद में हर माह लगभग 500 लोग आई0एम0टी0एस0 के माध्यम से विभिन्न देशों से धन मंगा रहे हैं। वर्ष 2011 में जहाँ 6253 बार डाकघरों से धन मंगाया गया, वहीं इस वर्ष माह मई तक 2198 बार धन मंगाया जा चुका हैं।

गौरतलब है कि इस सेवा के तहत एक बार में मंगायी गयी राशि 2500 यू0एस0 डालर से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। इसमें 50 हजार रूपये तक की धनराशि नकद एवं उससे ज्यादा धनराशि चेक/डिमाण्ड ड्राफ्ट के द्वारा दी जाती है। इस सेवा का उपयोग मात्र व्यक्तिगत उपयोग के लिए किया जा सकता है न कि किसी प्रकार के व्यवसायी उपयोग के लिए। इसी कारण इसका भुगतान मात्र व्यक्ति को किया जा सकता है, किसी फर्म, कम्पनी, ट्रस्ट, सोसाइटी को नहीं। श्री यादव ने बताया कि डाकघर में बिना असुविधा के प्राप्तकर्ता को धन प्राप्त होता है। इसके लिए उसे मात्र एक विशेष टी0आर0एम0 फार्म भरना पड़ता है और कुछ चुनिन्दा पहचान पत्र जैसे-पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेन्स, वोटर कार्ड, पैन कार्ड, राशन कार्ड, केन्द्र-राज्य कर्मचारियों के पहचान पत्र इत्यादि प्रस्तुत करना पड़ता है।

डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि इलाहाबाद परिक्षेत्र के सभी प्रधान डाकघरों सहित कुल 89 डाकघरों में यह सेवा उपलब्ध है। इनमें इलाहाबाद में कुल 18 डाकघरों में इण्टरनेशलन मनी ट्रान्सफर सेवा की विशेष सुविधा उपलब्ध करायी गयी हैं, जिनमें इलाहाबाद प्रधान डाकघर, कचेहरी प्रधान डाकघर, इलाहाबाद सिटी डाकघर, हाईकोर्ट डाकघर, केवेलरी लाइन्स, जीटीबी नगर, दारागंज, बहादुरगंज, सीडीए पेंन्शन, अटरामपुर, भरवारी, हंडिया, करछना, मन्झनपुर, फूलपुर, नैनी, सिराथू एवं सोरांव डाकघर शामिल हैं।

(साभार : दैनिक जागरण अख़बार में प्रकाशित समाचार)

Wednesday, June 20, 2012

Direct Post : Postal department offers alternate route to candidates

ALLAHABAD: Offering some respite to candidates contesting municipal elections, the postal department has provided a unique alternative to the candidates. As it will not be possible for candidates to reach each and every house in his /her ward and also following restrictions on processions and road shows, the scheme entitled 'Direct Post Scheme', offers to deliver pamphlets of candidates in any area of choice.

As per the scheme, candidates and parties can hand over their election pamphlets to the post office where the postman would then deliver it to all the houses in the area specified by them. The cost is a modest Rs 1.50 per pamphlet, but it is accompanied by a rider that the number of such leaflets and pamphlets should not be less than 1,000.

Giving this information director postal services, Allahabad region, Krishna Kumar Yadav said that with increasing commercial activity, the need for direct advertising of their products and services by the business organisations is growing. Direct Post is the un-addressed component of Direct Mail, and would comprise of un-addressed postal articles like letters, cards, brochures, questionnaires, pamphlets, samples, promotional items like CD's/floppies and Cassettes etc, coupons, posters, mailers or any other form of printed communication that is not prohibited by the Indian Post Office Act 1898 or Indian Post Office Rules 1933.

To avail the Direct Post scheme the organisation or the individual would have to give at least 1,000 articles. For the local distribution of articles, the India Post would charge Rs. 1.50 per articles for the first 20 grams, while Rs 2 per article for distribution anywhere in the country.However, for every additional 20 grams or part thereof both local and inter-city articles would be charged Rs. 1 extra. The India Post would not accept articles which exceed the length and width of an A3 size paper. Articles posted as Direct Post' should not bear any address or name and the same would be accepted only by the designated post offices and not in a letter box.

Yadav said that the article would certainly have more credibility, if the same is distributed at home by the postman, unlike it being distributed by a hired person on the roadside. Even in this scheme the senders of Direct Post can specify the numbers and areas, in which the sender wishes the Direct Post articles to be distributed. Besides, the department would also inform the sender that the articles handed over by him had been delivered according to his instructions.

Courtesy : Times of India

Monday, June 18, 2012

अब नेताओं के संदेश भी लायेगा डाकिया

वक़्त के साथ भारतीय डाक विभाग ने तमाम योजनायें लागू की हैं, उन्हीं में से एक है- 'डायरेक्ट पोस्ट'. डायरेक्ट पोस्ट के तहत बिना पता लिखी डाक को लक्षित जनता के दरबाजे तक पहुँचाया जाता है. भारतीय डाक विभाग की वेबसईट के अनुसार इस सेवा का उपयोग विभिन्न वर्ग के लोग कर सकते हैं, जिनमें राजनैतिक दल भी शामिल हैं. ऐसे में यदि भाजपा को वोट दें, साइकिल पर मुहर लगाएँ या कांग्रेस का हाथ आपके साथ, ऐसे नारे लिखे पर्चे या अपीलें लेकर डाकिया आपके घर पहुँचे तो हैरान होने की जरुरत नही । दरअसल अब नेताओं की बातें आप तक पहुँचाना उसकी नौकरी में शामिल हो गया है । डाक विभाग यह काम मुफ्त में नही बल्कि व्यावसायिक नजरिये से पैसे लेकर करता है । ऐसी ही सेवाएँ प्रचार चाहने वाले अन्य कार्य-क्षेत्रों को भी दी जा रही हैं.

इसके तहत राजनैतिक दलों ही नही उत्पादन, निर्माण और सेवा क्षेत्र के निजी या सरकारी संस्थान भी प्रचार के लिए इसका सहारा ले सकते हैं । मसलन किसी कम्पनी को अपने उत्पादों की खासियत उपभोक्ताओं तक पहुंचानी या फिर कोई धार्मिक-समाजिक संस्था अपनी बात लोगों तक पहुँचाना चाहती है तो उसके लिए भी डायरेक्ट पोस्ट सेवा के द्वार खुले है । इसके जरिये पर्चे, प्रचार, साहित्य, अपीलें ही नहीं सीडी, कैसेट और कम्प्यूटर फ्लापी भी मनचाहे क्षेत्रों में लोगों तक पहुँचाने का दायित्व डाक विभाग लेता है. इस सेवा का लाभ लेने से पहले सम्बन्धित संस्थान या व्यक्ति को कुछ शर्तों का पालन सुनिश्चित करना होगा। जैसे कि भेजने वाला निश्चित पते पर सामग्री नही भेज सकता । बस उसे इतनी छूट होगी कि वह क्षेत्र निर्धारित कर दे। वही सामग्री स्वीकार की जायेगी जो इंडियन आफिस एक्ट-1898 और इंडियन पोस्ट आफिस रुल्स 1933 में निषिद्ध नहीं की गयी है । इस सेवा में विभाग एक हजार से कम संख्या में सामग्री स्वीकार नहीं करेगा । एक जिले में अर्थात स्थानीय वितरण कार्य के लिए डेढ रुपये प्रति नग और एनी जगहों के लिए 2 रूपये प्रति 20 ग्राम की दर से शुल्क वसूला जायेगा । 20 ग्राम से अधिक वजन होने पर प्रति 20 ग्राम तक 1 रूपये ज्यादा चार्ज देने होंगें. शर्त यह भी है कि सामग्री का आकार ए-3 से अधिक न हो।

Saturday, June 16, 2012

तू पूरा जादूगर है डाकिया

रंग-बिरंगे खतों को झोले से
निकाल कर देता है
तू पूरा जादूगर है डाकिया

तू जानता है तेरी
जरा सी लापरवाही
रिश्तों को तोड़ सकती है
मुद्दतों तक किसी का खत
तेरे झोले से नहीं निकलना
तू उसकी मौत
की आहट जान
लेता है डाकिया

मैं जानता हूं जबसे
मोबाइल चल गया है
बहुत से घरों में तेरा
आना-जाना छुट गया है
उस छुटी हुई जगह में
यादों की पुट्टी भरी दुई

डाकिया
तूने प्रेम पत्रों को
परिणय के बंधन तक
पहुँचते देखा है
तू बहुत सी प्रेम गाथाओं
का मौन गवाह है
ईक दूत के रुप में
तेरी भूमिका किसी
महानायक से कम तो नही
माना कि खुशखबरी लाने पर
किसी ने राजाओं की तरह
अपने गले का हार तुझे तोड़
कर नहीं दिया पर वो एहसान मंद हो
ये एहसान भी कम तो नहीं

डाकिया
शहर फैलते जा रहे है
झोले खाली ही रहते है
लोग खत से हाल चाल
नहीं लेते
बदलते वक्त की चाल से
डाकिया हार ना जाये
वो हारा तो कई जिंदगी
भी हार सकती है
तू नहीं बल्कि ईक पूरा
इतिहास हार जायेगा
वो भी उन चंद पूंजीपति
टेलीकाम कंपनियों से
जिनका खुद का कोई
इतिहास नहीं।

इस इतिहास को बचाने के लिए
कुछ खत लिखो
खत तुम्हें भी ऐतिहासिक
बनाते हैं
वो सम्बंधों के मौन गवाह है
खत किसी भी प्रलोभन में
अपने बयान नहीं बदलेगे
वो हवा से उड़के
तुम्हारे पैरो में गिर भी जाये
तो भी गर्व से भरे ही रहेंगे
उन्हें तुमनतमस्तकसमझने की
भूल मत करना !!

--आलोक तिवारी
रत्ना निवास, पाठक वार्ड, कटनी (मध्य प्रदेश)

Friday, June 8, 2012

कैसे बना कबूतर डाकिया?

पुराने समय में ही नहीं, बल्कि 19 वीं सदी की शुरुआत में होने वाले पहले विश्वयुद्ध तक कबूतर से संदेश भेजा जाता था। कबूतरों में भी होमिंग प्रजाति इसके लिए विशेष रूप से जानी जाती थी। होमिंग प्रजाति के कबूतरों की विशेषता थी कि वे उन्हें एक जगह से अगर किसी जगह के लिए भेजा जाता तो वे अपना काम करने के बाद वापस लौटकर अपनी जगह आते थे। इससे संदेश पहुंच जाने की पुष्टि भी हो जाती थी।

बताया जाता है कि होमिंग प्रजाति के कबूतर अपनी जगह से 1600 किमी आगे उड़कर जाने पर भी रास्ता भटके बिना वापस लौट आते थे। उनके उड़ने की रफ्तार भी 60 मील प्रति घंटा होती थी, जोकि संदेश एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के लिए पर्याप्त थी।

पक्षी-विज्ञानी बताते हैं कि ये कबूतर सूर्य की दिशा, गंध और पृथ्वी के चुम्बकत्व से वापस लौटने की दिशा तय करते थे। टेलीग्राफ, टेलीफोन और संदेश पहुंचाने की नई व्यवस्थाओं के साथ कबूतर संदेश भेजना खत्म हो गया।

Tuesday, June 5, 2012

डाकिया का आगमन

अब कम ही दिखाई देता है डाकिया
जो रोज-रोज आता था घंटी बजाता था
ढेरों चिट्ठियां बिखेर जाता था
घर-आंगन में अब कम ही दिखाई
देता है डाकिया

उसका आगमन हमारे अरमानों,
खुशियों का आगमन था
उसका आगमन दोस्त-रिश्तेदारों की
खबरों का आगमन था,
उसका आगमन बिटिया की चिट्ठी
उसके सुख-दुख की खबर होती थी,
उसका आगमन बेटे की चिट्ठी होती थी
जो दूर शहर में पढ़ता था
उसका आगमन मां-बाबा की
खुशियों का आगमन था
जो बेटे-बेटियों की चिट्ठियों से
खुश हो लेते थे
उसका आगमन भाई-बहन का
प्यार होता था
उसका आगमन बेटे की नौकरी
लगने की खबर होती थी
उसका आगमन होती थी
होली, दिवाली, ईद की शुभकामनाएं
पर अब कम ही दिखाई देता है
डाकिया

मेरी उम्र के साथ बुढ़ा गया लगता है
डाकिया
बुढ़ा गई लगती हैं भावनाएं-संवेदनाएं
तभी तो अब कम ही दिखाई देता है
डाकिया
बारिश की फुहार की तरह
आज भी जब कभी कर जाता है
डाकिया

चिट्ठी-पत्री की फुहार घर-आंगन में
तो माटी की सौंधी गंध घुल जाती है
वातावरण में हो जाता है तरोताज़ा तन-मन
अब कम ही दिखाई देता है
डाकिया
जो रोज-रोज आता था घंटी बजाता था
ढेरों चिट्ठियां बिखेर जाता था
घर-आंगन में।

साभार

Saturday, June 2, 2012

डाक-टिकट पर आपकी खूबसूरत तस्वीर : माई स्टैम्प


भारतीय डाक विभाग डाक-टिकटों के क्षेत्र में नित नए और अनूठे प्रयोग कर रहा है. पिछले वर्षों में जहाँ चन्दन, गुलाब व जूही की सुगंध से सुवासित खुशबूदार डाक-टिकट और हालमार्क के साथ मिलकर सोने के डाक टिकट जारी किये गए, वहीँ अब 'माई स्टांप' या 'पर्सनालाईजड स्टैम्प' के साथ डाक-टिकट पर कोई व्यक्ति अपनी भी तस्वीर लगा सकता है. फ़िलहाल ये 17 डाक-टिकटों के साथ उपलब्ध हैं. इनमें ताजमहल, पंचतंत्र, एयरो फ्लाईट, स्टीम इंजन, वाइल्ड लाइफ डाक-टिकटों के साथ 12 राशियों के डाक टिकट भी उपलब्ध हैं.

दुनिया के कई देशों में 'माई स्टाम्प' सुविधा पहले से ही लागू है, पर भारत में पहली बार इसे भारतीय डाक विभाग द्वारा वर्ष 2000 में कोलकाता में 'इंदिपेक्स एशियाना' के आयोजन के दौरान जारी किया गया था. पर उस समय यह उतनी लोकप्रिय न हो सकी. पिछले वर्ष नई दिल्ली में विश्व डाक टिकट प्रदर्शनी (12-18 फरवरी 2011 ) के आयोजन के दौरान इसे पुन: लांच किया गया और लोगों ने इसे हाथों-हाथ लिया. नतीजन देखते ही देखते हजारों लोगों ने डाक टिकटों के साथ अपनी तस्वीर लगाकर इसका लुत्फ़ उठाया. उत्तर प्रदेश में 17 -19 दिसंबर, 2011 के दौरान लखनऊ में आयोजित राज्य स्तरीय डाक टिकट प्रदर्शनी में इसे जारी किया गया और अभी तक अकेले उत्तर प्रदेश में लगभग 5000 लोग इसे जारी करा चुके हैं, जिनमें से अधिकतर लोगों ने ताजमहल के साथ अपनी तस्वीर लगवानी पसंद की.

इस सेवा का लाभ उठाने के लिए अपने शहर में स्थित फिलाटेलिक ब्यूरो में पंजीकरण कराना होता है. एक फार्म भरकर उसके साथ अपनी फोटो और 300 /-जमा करने होते हैं. एक शीट में कुल 12 डाक-टिकटों के साथ फोटो लगाई जा सकती है. इसके लिए आप अपनी अच्छी तस्वीर डाक विभाग को दे सकते हैं, जो उसे स्कैन करके आपका खूबसूरत 'माई स्टांप' बना देगा. यदि कोई तत्काल भी फोटो खिंचवाना चाहे तो उसके लिए भी प्रबंध किया गया है. 'माई स्टैम्प' को ही 'पर्सनालाईजड स्टैम्प' भी कहा जाता है. इस पर सिर्फ जीवित व्यक्तियों की ही तस्वीर लगाई जा सकती है. सम्बंधित व्यक्ति को फिलाटेलिक ब्यूरो में व्यक्तिगत रूप से जाना पड़ता है, यदि किसी कारणवश न जा सके तो सम्बंधित संदेशवाहक से अपना फोटो युक्त परिचय पत्र भेजना पड़ता है.

तो अब देर किस बात की, किसी को उपहार देने का इससे नायब तरीका शायद ही हो. इसके लिए जेब भी ज्यादा नहीं ढीली करनी पड़ेगी, मात्र 300 रूपये में 12 डाक-टिकटों के साथ आपकी खूबसूरत तस्वीर. अब आप इसे चाहें अपने परिवारजनों को दें, मित्रों को या फिर अपने प्रेमी-प्रेमिका को. डाक-टिकट पर आप अपनों की तस्वीर भी छपवा कर उसे भेज सकते हैं. मतलब, आप किसी से बेशुमार प्यार करते हैं, तो इस प्यार को बेशुमार दिखाने का भी मौका है. पांच रुपए के डाक-टिकट, जिस पर आपकी तस्वीर होगी, वह देशभर में कहीं भी भेजी जा सकती है.

'माई स्टाम्प' पर सिर्फ आप अपनी तस्वीर ही नहीं देखते, बल्कि वक़्त की नजाकत के अनुसार इसे विभिन्न डाक-टिकटों के साथ देख सकते हैं. मसलन, प्रेम को दर्शाने के लिए ताजमहल, बच्चों के लिए पञ्चतंत्र, एडवेंचर के लिए वाइल्ड लाइफ से जुड़ा डाक टिकट या फिर एयरो फ्लाईट और स्टीम इंजन. यही नहीं अपनी राशि के अनुरूप भी डाक-टिकट पसंद कर उस पर अपनी फोटो लगवा सकते हैं!!

           (चित्र में : माई स्टैम्प के तहत ताजमहल के साथ कृष्ण कुमार यादव की तस्वीर)


- कृष्ण कुमार यादव
निदेशक डाक सेवाएँ, इलाहबाद परिक्षेत्र, इलाहबाद-211001

एक मूक और बधिर डाकिया की कहानी

उत्तर-पूर्वी चीन के ल्याओ निन्ग प्रांत के पहाड़ क्षेत्र में एक मूक और बधिर डाकिया है, वह नहीं सुन सकता और नहीं कह सकता, हर दिन वह अकेला मोटरसाइकिल चलाकर पहाड़ क्षेत्र के पांच हजार से अधिक परिवारों को पत्र,अखबर और पार्सल भेजता है, प्रति साल में वह 25 हज़ार कि.मी.का रास्ता चलता है।

ह्वांग वेई हर दिन लोन्ग थान कस्बे के लोगों को सेवा देता है। लोन्ग थान कस्बे में 120 से अधिक गांव हैं, ये गांव 300 से अधिक वर्ग किलोमीटर में स्थित हैं, बीते दस से अधिक सालों में ह्वांग वेई इस कस्बे में एकमात्र डाकिया है।

इस मूक और बधिर डाकिया का नाम है ह्वांग वेई, 37 साल की उम्र है। गांव में रहने वाली सुश्री वांग को अखबार चाहिए, इसलिए ह्वांग वेई सुश्री वांग का स्थाई अतिथि बन गया है। सुश्री वांग ने कहा- हर बार वह हमारे पत्रों को ला सकता है, ठीक समय पर।

लोन्ग थान कस्बे के 60 प्रतिशत की गांव पहाड़ों में स्थित हैं, दूसरे 30 से अधिक प्रतिशत की गांव हालांकि मार्ग से बहुत दूर नहीं है, लेकिन इस क्षेत्र में दसियों खान स्टेशन हैं, हर पत्र भेजने के लिए दस से अधिक कि.मी. की दूरी चलने की जरूरत है।

वर्ष 2000 के जरवरी में 26 साल की उम्र वाला ह्वांग वेई डाकिया बन गया है, उसे यह काम बहुत पसंद है, इसलिए वह मेहनत से काम करता है, लोन्ग थान कस्बा पोस्ट ब्यूरो के प्रधान मा श्याओ पो ने कहा:

ह्वांग वेई से पहले डाकिया ने पत्र को हर व्यक्ति को नहीं दिया, डाकिया ने सब पत्रों को गांव समिति के दफ़्तर में रखा, लेकिन ह्वांग वेई खुद पत्र को हर लोग को देता है।

पत्रों को भेजने के अलावा, डाकिया पार्सल भेजता है, पार्सल में ये शामिल हैं कि जीवन उत्पादन और कृषि उत्पादन, इसलिए कुछ समय ह्वांग वेई को भारी पार्सल भेजना है, एक साल के 365 दिनों में ह्वांग वेई काम करता है। इस के प्रति ह्वांग वेई की मां ने कहा

देखो, उस के पास दो बड़ा थैला हैं, जिन में धुलाई चूर्ण,अंगूर मदिरा,बाल द्रव,साबुन और कीटनाशकदवा भी है।

मूक और बधिर लोग के रुप में ह्वांग वेई को काम करते हुए अधिक कठिनाई तोड़ना है, ह्वांग वेई के पास अपना उपाय है, ह्वां वेई की मां ने कहा

वह कह नहीं सकता, नहीं बुला सकता, इसलिए काम करते हए ह्वांग वेई एक बाँसुरी का प्रयोग करता है, बाँसुरी की आवाज सुनकर लोगों को ह्वांग वेई आ रहा है मालूम है।

उपभोगताओं को अधिक सुविधा देने के लिए ह्वांग वेई एक विशेष मानचित्र लेता है, जिस में हर परिवार का पता,नाम और कैसे जाने की खबर रिखा जाता है।

पहाड़ों में रहने वालों के लिए पत्र एक प्रमुख बाहर विश्व के साथ संपर्क रकने वाला साधन है, पहाड़ों ने रहने वालों को पोस्ट स्टेशन के लिए विशेष भावना है। त्यौहारों के दौरान पहाड़ों के बाहर रहने वाले पहाड़ों में रहने वालों को पत्र भेजते हैं, इसलिए त्यौहार के दौरान ह्वांग वेई बहुत व्यस्त है। छ्यान चिन ज़ी गांव के श्यू श्यांग छै ने कहा: हमारी गांव में कई लोगों को समान नाम है, उदाहरण के लिए कई लोगों का नाम वांग श्वी है, और कई लोगों का नाम सून शी श्वै है, इसलिए ह्वांग वेई के काम के लिए बहुत कठिनाई है।

ह्वांग वेई संजीदगी से काम करता है, एक ग्रीष्म में ह्वांग वेई एक कंपनी को पत्र भेजने गया, लेकिन पत्र लेने वाला कंपनी में नहीं था,उस ने पत्र लेने वाले की प्रतीक्षा की। चीज़ भेजने के अलावा ह्वांग वेई किसान दोस्तों के लिए मौखिक पत्र भेजता है। छ्यान चिन ज़ी गांव में रहने वाले चाओ योन्ग बिन ने कहा:

ह्वांग वेई अकसर हमारे को मदद करता है, वह हमारे लिए वे चीज़ भेजता है जो हमें चाहिए।

बीते 12 सालों में ह्वांग वेई पत्र भेजने के लिए 2 लाख 50 हजार कि.मी.का मार्ग चला, और कुल 60 हज़ार पत्रों को भेजा है, पहाड़ों में रहने वाले ह्वांग वेई की प्रशंसा करते हैं।

साभार



Tuesday, May 8, 2012

प्यार का पहला ख़त लिखने में वक़्त तो लगता है


(पत्र-लेखन की विधा काफी प्राचीन है. जब दिल की बात होठों पर न आ सके तो फिर पत्र ही सहारा रह जाता है. संचार के क्षेत्र में नित नई तकनीकें आ रही हैं, पर चिठ्ठियों के साथ ही संवाद के कोमल पक्ष भी चले गये हैं। ऐसे में लोगों के मन की थाह भी लगाना मुश्किल हो गया है. ऐसे में कनु जी के ब्लॉग 'परवाज़' पर लिखी पोस्ट 'प्यार का पहला ख़त लिखने में वक़्त तो लगता है; बड़ी कोमलत के साथ मन की गहराइयों में पैठ कर जाता है. आप भी इन भावनाओं को महसूस करें-

फ़ोन की लम्बी लम्बी बातें कभी वो सुकून नहीं दे सकती जो चिट्ठी के चंद शब्द देते हैं .तुम्हे कभी लिखने का शौक नहीं था और पढने का भी नहीं तो मेरी न जाने कितनी चिट्ठियां मन की मन में रह गई न उन्हें कागज़ मिले न स्याही .तुम्हारे छोटे छोटे मेसेज भी मैं कितनी बार पढ़ती थी तुमने सोचा भी न होगा ,ये लिखते टाइम तुमने ये सोचा होगा ,ये गाना अपने मन में गुनगुनाया होगा शायद परिचित सी मुस्कराहट तुम्हारे होठों पर होगी जब वो सब यादें आती है तो बड़ा सुकून सा मिलता है ..और एक ही कसक रह जाती है काश तुमने कुछ चिट्ठियां भी लिखी होती मुझे तो ये सूरज जो कभी कभी अकेले डूब जाता है,ये चाँद जो रात में हमें मुस्कुराते न देखकर उदास हो जाता है तुम्हारे पास होने पर भी जब तुम्हारी यादें आ कर मेरे सरहाने बेठ जाती हैं इन सबको आसरा मिल जाता ..ये अकेलापन भी इतना अकेला न महसूस करता ....अब तो सोचती हु तुमने न लिखी तो में कुछ चिट्ठियां लिख लू पर जिस तरह तुम खो रहे हो दुनिया की भीड़ में अब तो तुम्हारे दिल का सही सही पता भी खोने लगा है बड़ा डर सा लगता है की मेरी ये चिट्ठियां तुम तक पहुंचेगी भी या नहीं ? तुम तक पहुँच भी गई गई तो जानती हु तुम पढोगे नहीं .....पर फिर भी मेरी विरासत रहेगी किसी प्यार करने वाले के लिए ..

क्या कहते हो ? लिखू या रहने दू।

तुम्हे चिट्ठियां लिखने की तमन्ना होती है कई बार
पर तुम्हारे दिल की तरह तुम्हारे घर का पता भी
पिछली राहों पर छोड़ दिया कहीं भटकता सा
अब बस कुछ छोटी छोटी यादों की चिड़िया हैं
जो अकेले में कंधे पर आ बैठती है
उनके साथ तुम्हारा नाम आ जाता है होठों पर
और कुछ देर उन चिड़ियों के साथ खेलकर
तुम्हारा नाम भी फुर्र हो जाता है
अगली बार फिर मिलने का वादा करके......
पर सब जानते है कुछ चिट्ठियां कभी लिखी नहीं जाती
कुछ नाम कभी ढले नहीं जाते शब्दों में
कुछ लोग बस याद बनने के लिए ही आते है जिंदगी में
और कुछ वादें अधूरे ही रहे तो अच्छा है.....

आज ये ग़ज़ल सुबह से गुनगुना रही हू....प्यार का पहला ख़त लिखने में वक़्त तो लगता है !!

Tuesday, April 24, 2012

अक्षय तृतीया के अवसर पर डाकघरों से छ: प्रतिशत छूट पर सोने के सिक्के

सोने के सिक्कों के लिए अब सुनार के पास नहीं, बल्कि डाक-घर पहुंचिए। भारतीय डाक विभाग ने अक्षय तृतीया के अवसर पर सोने के सिक्‍के पर छ: प्रतिशत छूट देने की घोषणा की है। अक्षय तृतीया 24 अप्रैल को पड़ रही है। इसे वर्ष के सबसे शुभ दिनों में से एक माना जाता है। अक्षय तृतीया अक्‍खा तीज के नाम से भी जानी जाती है। लोग इस दिन सोना खरीदना शुभ मानते है और घरों में धन की देवी लक्ष्‍मी की पूजा करते है। डाक-घरों में ये सोने के सिक्‍के 0.5 ग्राम, 1 ग्राम, 5 ग्राम, 8 ग्राम, 10 ग्राम, 20 ग्राम,50 ग्राम वज़न में 99.99 शुद्धता के साथ 24 कैरेट में मिलेंगे।

गौरतलब है कि वर्ल्‍ड गोल्‍ड काउंसिल और रिलांयस मनी इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर लिमिटेड के साथ मिलकर भारतीय डाक सोने के सिक्‍कों की बिक्री कर रहा है। वालकाम्‍बी, स्‍वीटजरलैंड में निर्मित सोने के सिक्‍कों की बिक्री अक्‍तूबर, 2008 में देशभर के कुछ डाकघरों में शुरू की गई थी। आज देश के 800 से ज्‍यादा डाकघरों में सोने के सिक्‍के उपलब्‍ध है।

Friday, April 20, 2012

ये ख़त है




ये ख़त है
जो कभी
तुमने लिखे थे
मुझको.

उसका अक्षर-अक्षर
तेरा अक्श बन
उभर आता है
आज भी
मेरे जेहन में
चाहे-अनचाहे.

क्योंकि
इन खतों में हैं
कुछ हँसते,
खिल-खिलाते पल,
कुछ सिसकते,
सहलाते पल.
बांटा था जिन्हें
हमने
आपस में
मिल-बैठ कर.

इन पलों में
आज भी
सिमटी है
तुमसे मिलने की चाह,
न मिल पाने का गम
दूर रहकर भी
पास होने का भ्रम
जो पलता रहा है,
बढ़ता रहा है
सदा
साथ-साथ

तेज होती
धडकनों के साथ
पलती है
प्यार की तपिश
जो देती है
झुलसने का अहसास.

ये सब सिलवटें हैं
शब्दों के घरौंदे
घरौंदा
जो घर हो गया है
बीती बातों का,
आशाओं का,
अरमानों का,
धड़कनों में छिपी
विवशता का,
बैचैनी का
टूटते-बनते रिश्तों का.

मेरे-तुम्हारे होने का
एक-दूसरे से अलग
एक-दूसरे के साथ
जीवनपर्यंत
एक सिलसिला बनकर.

- राजीव पुष्पराज
rajivpushpraj@gmail.com

Friday, April 13, 2012

जौनपुर प्रधान डाकघर में सोने के सिक्कों की बिक्री का डाक-निदेशक के.के. यादव ने किया उद्घाटन

जौनपुर : प्रधान डाकघर में शुक्रवार,13 अप्रैल, 2012 को सोने के सिक्कों की बिक्री का शुभारम्भ इलाहाबद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ कृष्ण कुमार यादव ने किया। इस दौरान उन्होंने पहले, दूसरे ग्राहक देवेश चन्द उपाध्याय व अच्छेलाल गुप्ता को सोने का सिक्का सौंपकर बिक्री का शुभारम्भ किया।

डाक निदेशक श्री यादव ने कहा कि इलाहाबाद परिक्षेत्र में वर्तमान में इलाहाबाद प्रधान डाकघर, कचहरी प्रधान डाकघर, वाराणसी प्रधान डाकघर, गाजीपुर, हंडिया, वाराणसी कैण्ट, फूलपुर डाकघर में सोने के सिक्कों की बिक्री की जा रही है। लोकप्रियता को देखते हुए जौनपुर में भी इसकी शुरुआत की जा रही है। 24 कैरेट शुद्धता वाले सोने के सिक्कों पर डाक विभाग का लोगो अंकित है। जो सिक्के वैलकैम्बी स्विटरजरलैण्ड द्वारा प्रमाणित है। अक्षय तृतीया के पर्व को देखते हुए 30 जून तक इन सिक्कों की खरीद पर छह प्रतिशत की विशेष छूट दी जायेगी। उन्होंने बताया कि जौनपुर के प्रधान डाकघर का चयन कोर बैकिंग सर्विस के तहत पहले फेस में किया गया है। जिसके तहत आने वाले समय में उपभोक्ता डाक विभाग के एटीएम से पैसा निकाल सकते है। जिले के 55 डिपार्टमेंटल डाकघरों को कम्प्यूटर से जोड़ा जा रहा है।

डाक अधीक्षक सीबी सिंह ने बताया कि डाकघरों में सोने के सिक्कों की बिक्री रिलायन्स के साथ करार के तहत की जा रही है। डाकघर में 0.5, एक, पांच, आठ, 10, 20, व 50 ग्राम तक सोने के सिक्के मिल रहे है।

इसके पहले डाक निदेशक ने पूरे कार्यालय का निरीक्षण किया। इस मौके पर उन्होंने सभी अधिकारियों व कर्मचारियों के साथ समीक्षा बैठक की। जिसमें उन्होंने डाक विभाग के चलने वाली विभिन्न योजनाओं की जिले में स्थिति जानी। इसके साथ ही उन्होंने कर्मचारियों को काम में लापरवाही न बरतने का निर्देश भी दिया। उन्होंने पोस्टमैनो से कार्य को कुशलता से करने का निर्देश दिया।

इस मौके पर पोस्ट मास्टर केएन यादव, सहायक अधीक्षक विनय कुमार यादव, पीएल गुप्ता, बीके शर्मा, परिवाद निरीक्षक अजय कुमार, डाक निरीक्षक एके शुक्ला, विपिन यादव, तरुण अग्रवाल, स्पीड पोस्ट मैनेजर लालचन्द्र मिश्र, विष्णु मिश्र, श्रीकांत कुमार, दिनेश त्रिवेदी आदि मौजूद रहे।

साभार : जागरण

Thursday, April 12, 2012

डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव ने किया गाजीपुर प्रधान डाकघर में सोने के सिक्कों की बिक्री का उद्घाटन

गाजीपुर : प्रधान डाकघर में सोने के सिक्कों की बिक्री गुरुवार, 12 अप्रैल, 2012 से शुरू हो गयी। इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक कृष्ण कुमार यादव ने प्रधान डाकघर में सोने के सिक्कों की बिक्री का उद्घाटन विधिवत फीता काटकर किया। प्रथम ग्राहक विजय शंकर को सोने का सिक्का देकर बिक्री का शुभारम्भ किया।

उन्होंने कहा कि इलाहाबाद परिक्षेत्र में वर्तमान में इलाहाबाद, कचेहरी, वाराणसी प्रधान डाकघर में सोने के सिक्कों की बिक्री हो रही है। इसकी लोकप्रियता के मद्देनजर अब इलाहाबाद परिक्षेत्र में गाजीपुर, वाराणसी कैण्ट, भदोही, चंदौली, जौनपुर, मिर्जापुर, ओबरा, शक्तिनगर, फूलपुर, हण्डिया सहित 10 डाकघरों में बिक्री शुरू की जा रही है। कहा कि चयनित डाकघरों में 24 कैरेट (99.99) शुद्धता वाले इन सोने के सिक्कों पर डाक विभाग लोगो अंकित है। सिक्के वैलकैम्बी स्विटजरलैण्ड द्वारा प्रमाणित है। इन सिक्कों की खासियत है कि इनमें किसी तरह की टेम्परिंग नहीं की जा सकती। अक्षय तृतीया पर्व पर 30 जून तक सिक्कों की खरीद पर छह प्रतिशत की विशेष छूट दी जायेगी। डाक अधीक्षक एमपी मिश्र ने बताया कि डाकघरों में सोने के सिक्कों की बिक्री रिलायंस के साथ करार के तहत की जा रही है। चयनित डाकघरों में 0.5 ग्राम, एक ग्राम, पांच, 10, 20 व 50 ग्राम के सोने के सिक्के बिक्री के लिए उपलब्ध होंगे। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि जिला सहकारी बैंक के पूर्व चेयरमैन अरुण सिंह, सहायक अधीक्षक आरएन यादव, सहायक अधीक्षक प्रभाकर त्रिपाठी, विनय कुमार यादव, आरसी राम, संजय गुप्ता, पीके पाठक, मारुत नंदन, जेएस यादव, बब्बन राय आदि शामिल रहे।

-साभार : नई खबर

Wednesday, April 11, 2012

इलाहाबाद के हंडिया और फूलपुर डाकघर भी हुए सोने के सिक्कों की बिक्री के नेटवर्क में शामिल


हंडिया, इलाहाबाद : डाकघरों में ‘सोने के सिक्कों‘ की बिक्री की लोकप्रियता के मद्देनजर इलाहाबाद परिक्षेत्र के 10 अन्य डाकघरों को भी शामिल कर लिया गया है. इनमें इलाहाबाद डाक मण्डल के हण्डिया एवं फूलपुर के अलावा वाराणसी कैन्ट, भदोही, चन्दौली, गाजीपुर, जौनपुर, मिर्जापुर, ओबरा एवं शक्तिनगर स्थित डाकघर शामिल हैं. गौरतलब है कि इलाहाबाद परिक्षेत्र में मात्र तीन डाकघरों- इलाहाबाद प्रधान डाकघर, कचेहरी प्रधान डाकघर और वाराणसी प्रधान डाकघर में सोने के सिक्कों की बिक्री की जा रही है.इसी क्रम में हण्डिया उपडाकघर में सोने के सिक्कों की बिक्री का उद्घाटन दिनांक 11 अप्रैल 2012 को इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएं, श्री कृष्ण कुमार यादव द्वारा किया गया। इस अवसर पर श्री यादव ने प्रथम ग्राहक के रूप में डा0 वी.के. सिंह एवं श्री रवि कुमार (एडवोकेट) को सोने के सिक्के सौंप कर बिक्री का उद्घाटन किया। श्री यादव ने इस अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा 24 कैरेट (99.99 ) शुद्धता वाले इन सोने के सिक्कों पर डाक विभाग का लोगो अंकित है एवं ये सिक्के ‘वैलकैम्बी स्विटज़रलैंन्ड‘ द्वारा प्रमाणित है। इन सिक्कों की खासियत यह है कि इनमें किसी तरह की टेम्परिंग नही की जा सकती । उन्होंने बताया कि अक्षय-तृतीया पर्व के अवसर पर 30 जून 2012 तक इन सिक्कों की खरीद पर 6 प्रतिषत की विशेष छूट भी दी जायेगी । कार्यक्रम में प्रवर डाक अधीक्षक इलाहाबाद मण्डल श्री राम नारायण ने बताया कि डाकघरों में सोने के सिक्कों की बिक्री रिलायन्स के साथ करार के तहत की जा रही है। चयनित डाकघरों में 0.5 ग्राम, 1 ग्राम, 5 ग्राम, 8 ग्राम, 10 ग्राम, 20 ग्राम और 50 ग्राम के सोने के सिक्के बिक्री के लिए उपलब्ध होंगे।

इस अवसर पर स्थानीय लोगों में डाकघर द्वारा सोने के सिक्कों की बिक्री के प्रति काफी उत्साह देखा गया। उद्घाटन के दौरान ही 200 ग्राम से ज्यादा सोने के सिक्के बिक्री हो गए. कार्यक्रम में हंडिया के उपजिलाधिकारी श्री सीताराम गुप्ता, कोतवाल श्री चंद्रधर गौड़, श्री टी बी सिंह सहायक निदेषक, श्री प्रभाकर त्रिपाठी सहायक अधीक्षक, श्री विनय कुमार यादव सहायक अधीक्षक, श्री ए. के. सिंह डाक निरीक्षक, श्री वी के शुक्ल उपडाकपाल आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

Saturday, March 31, 2012

उत्तर प्रदेश के युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के पास रोज पहुँच रहे हजारों पत्र

पत्रों की दुनिया बेहद निराली है. जहाँ कोई नहीं पहुँच सकता, वहाँ पहुँचते हैं पत्र. फिर चाहे कोई व्यक्ति कितने बड़े ही पद पर क्यों न आसीन हो. अब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव को ही लें. उनके चाहने वालों और फरियादी लोगों के इतने पत्र उनके पास पहुँच रहे हैं कि डाक-विभाग को भी अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ रही है. मिल नहीं सकते, फोन नहीं कर सकते..तो क्या हुआ. पत्रों की दुनिया अभी भी कायम है. जो काम कोई नहीं करा सकता, कई बार वह एक पत्र ही कर जाता है।

इसी सन्दर्भ में आज Hindustan Times में प्रकाशित उपरोक्त समाचार की क्लिप देखें और पढ़े !!

Friday, March 23, 2012

भारतीय स्टेट बैंक, इलाहाबाद शाखा के 150 वर्ष पर स्पेशल-कवर जारी

भारतीय स्टेट बैंक, इलाहाबाद शाखा के 150वें गौरवमयी वर्ष में प्रवेश करने के अवसर पर भारतीय डाक विभाग के चीफ पोस्टमास्टर जनरल, उत्तर प्रदेश परिमंडल द्वारा एक विशिष्ट आवरण जारी किया गया.भारतीय स्टेट बैंक, इलाहाबाद के प्रांगण में 17 मार्च, 2012 को आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ श्री कृष्ण कुमार यादव ने यह विशिष्ट आवरण जारी किया. इस आवरण को रिमोट सेंसिंग के माध्यम से भी जारी किया गया. इस विशिष्ट आवरण को श्री यादव ने भारतीय स्टेट बैंक के उत्तर प्रदेश के चीफ जनरल मैनेजर श्री के. रामचंद्रन को प्रदान कर इस अवसर पर अपनी शुभकामनाएं दीं. कार्यक्रम के आरंभ में इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ श्री कृष्ण कुमार यादव, भारतीय स्टेट बैंक के उत्तर प्रदेश के चीफ जनरल मैनेजर श्री के. रामचंद्रन, इलाहाबाद के उप पुलिस महानिरीक्षक श्री डी. प्रकाश इत्यादि ने द्वीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया. निदेशक डाक सेवाएँ श्री कृष्ण कुमार यादव ने आपने संबोधन में कहा कि डाक विभाग ऐसे अवसरों को न सिर्फ खूबसूरती से संजोता है, बल्कि उन्हें इतिहास में भी सुरक्षित रखता है. उन्होंने डाक टिकट संग्रह के बारे में भी लोगों को बदलते आयामों के साथ परिचित कराया. भारतीय स्टेट बैंक के उत्तर प्रदेश के चीफ जनरल मैनेजर श्री के. रामचंद्रन ने आपने संबोधन में डाक-विभाग और श्री यादव का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह दिन एक ऐतिहासिक दिन है और बैंक की गरिमा में भी वृद्धि करता है.
































Thursday, February 23, 2012

Postal Services in Andaman & Nicobar Islands













India Post provides postal services to the public through a large nation wide network of 1.55 lac Post offices. India Post was established on 1st October 1854 and besides communication services, it performs Financial Services, as Savings Bank, Sale of cash certificates, Postal life Insurance, Rural PLI, Payment of pension and value added services such as Speed Post , Business Post, Direct Post etc. In A & N Islands postal services are also running in broad way like in mainland.

During the British time there was only one post office at Ross Island for the entire group of Islands, where the then rules had their Headquarter.
At the end of the second world war the office of the Commissioner was shifted to the location where the Secretariat is situated now and along with it moved the Post Office also. This sub Post office was under the account jurisdiction of Head Post office of Pegu (Rangoon). At that time the mails were coming to Port Blair from three stations- Burma, Calcutta and Madras. Initially the frequency of ships was once in a month from Calcutta and Madras, and from Rangoon twice in a month. In the meantime two more Post office were opened at Chatham and Long Island. Thus when the British finally left India in the year 1947 there were three post offices in these group of islands. After Independence A & N Islands remained with India and so the Post offices were placed under account jurisdiction of Barrackpore Head Post office and administration of these Islands passed under the control of the Presidency Division, West Bengal with head quarter at Barrackpore. Subsequently, the Presidency Division was bifurcated and administrative control was vested with South Presidency Division with head quarter at Calcutta. With a view to cope up with the increasing demand from the administration as well as the settlers the first Postal sub division was created in May, 1961 and led to the creation of a full fledged Postal Division under the Administrative control of Superintendent of Post office on 27th April,1971. Thereafter, w.e.f. 19th September 1988 this Division has been placed under the Administrative control of the Director of Postal Services (JAG). A & N Division consist of 100 Post offices including Port Blair Head Post office with its 26 Sub Post offices and 73 Branch Post offices. The staff strength of the Dn is 158 and also 214 GDS employee. For mail collection 220 no. of letter boxes have been installed and for delivery 22 Postmen and 100 Gramin Dak Sevaks have been employed in Islands.

India Post has taken determined steps in accelerating computerization of Post office and introduction of IT enabled services in the islands. Port Blair Head Post Office is a Project Arrow office with its main objective to focus on cent percent efficiency , faster mail system, remittances, savings bank and office service level and modernize the look and feel with focus on branding, information technology, human resource and infrastructure in the Post office. 22 Sub Post Offices has been also covered under Project Arrow Phase-V.

With the induction of technology, the Department of Posts has computerized its 27 Post offices . For imparting training to the staff on departmental softwares , one Workplace computer Training Centre (WCTC) at Port Blair HO campus has been set up w.e.f 27.11.2010 at Port Blair HO Campus. For prompt redressal of Public complaints Computerized Customer Care Centres are working at Director office, Portblair HO and all 22 Project Arrow Post Office. For Speedy Service, Money Orders are converted into Electronic Money Orders (eMO) now without any extra charges. Apart from this an instant web based money transfer service Instant Money Order (iMO) has been introduced in Port Blair HO ,Junglighat SO, Haddo SO ,Aberdeen Bazar SO, Rangat SO and Mayabunder SO. It is very popular amongst business men and parents whose children are studying in mainland. It involves transfer of money from Rs.1,000/- to Rs. 50,000/-( Rs. 330/- commission for sending Rs.50,000/-, which is lesser than a DD commission ). International Money Transfer service (IMTS) is available in Port Blair HO, Havelock & Bambooflat, which allows instant payment of money within minutes of its transfer from more than 200 countries. India Posts has been engaged as a Registrar for providing enrollment facility to the citizen for procurement of Aaadhar Card issud by the Unique Identification Authority of India (UIDAI). Port Blair HO has been identified as UIDAI enrolment station which has been started enrolment since October 2011. Till the date, 515 no.of enrolment done.


Savings Bank facilities have been expanded in all the Post offices in A&N Islands offering a variety of savings options such as Saving Bank, Recurring Deposit, Time Deposit Monthly Income scheme , PPF, SCSS, NSC. These schemes are having attractive interest rates and also tax benefits. In Islands more than 1.6 lakh Savings accounts are running in Post Offices and about Rs. 68 crore has been deposited in POs upto Dec.2011. Payment of wages under NREGA is being disbursed to unskilled workers through 671 Accounts in Post offices in Islands. Postal Life Insurance (Estd 1884) is open for employees of all Central and State Government departments, Nationalized Banks, Public Sector Undertakings, Financial Institutions, Local Bodies like Municipalities and Zilla Parisads, Educational Institutions aided by the Government etc. for Govt. and semi Govt. Employees. Rural postal life insurance is also available for rural public. PLI/RPLI melas are being conducted in different Post Offices & other institutes for coverage of Insurance. 26 Dak Melas were conducted since April – Dec 2011 and procured 185 PLI and 382 RPLI policies with sums assured of Rs. 10.29 crore and Rs. 4.69 Crores respectively.


During the recent years, India Post has introduced many value added services. while Speed Post remain most popular premium service available in all Departmental Post offices in Islands. Speed Post is today the largest courier in India. Port Blair HPO is now converted in a Speed Post Intra Circle Hub. For corporate customers and to regular users Speed post offers home collection, credit facilities, on-line tracking, account management and personalized services. Express parcel post service is also available upto 35 kg. Business Post offers total business solution for all mailing activities includes collection, inserting, addressing, franking etc. Media Post provides opportunities to corporate customer /government organizations and other large private institutions to have their products /services advertised on the postal stationeries, letter boxes, mail van, post office premises etc. Bill Mail service provides posting of financial statements, bills etc. for Posting at least in 90 days, min. 5000 Articles, Rs. 3/- for 50 gms (for National Bill Mail Service-10000 articles). Under Direct post service delivery of Un-addressed mails, cards, brochures, questionnaires, Pamphlets, samples, promotional items like CDs/ Cassettes etc. are done through postman, whereas Retail Post offer sale of products/services through Post office Counters. e-Post is facility of transmitting and receiving messages through internet even for those who are not connected with the net. By using e-Post, e mail can be sent to a Post office for delivery through the Postman.

Collection of stamps and its study (Philately) is one of the oldest hobbies, which is still very popular. India Post issues Commemorative Stamps with First day covers and information Brochures. A number of beautiful stamps and philatelic materials have been brought out by the Department on various themes such as Indian Heritage, History, Forest, flora and fauna, Bridges, National Parks, Festivals of India, Famous Personalities etc. A Philatelic deposit account can opened with an amount of Rs.200/- or more at Head post office. India Post issued stamps related to A&N Islands viz Andaman Teal (23th Nov.1994), B.D Savarkar (20th May 1970), Cellular Jail (30th Dec. 1997), International Year of Ocean (30th Dec.1998), Ist sunrise of the Millennium at Katchal Island (Ist Jan 2000), Corals of India (22th Aug 2001), Endemic Butterflies of A&N Islands (2nd Jan 2008), Aldabra Tortoise (2nd Aug 2008).

Thus, India Post proposes to continue its efforts to harness its traditional strengths to modern management practices and appropriate technologies to become more responsive to public needs and expectation, and to make the services more customer friendly, while identifying new opportunities new opportunities to provide value added services and greater access to postal services, in a cost effective manner.

Krishna Kumar Yadav,Director Postal Services,Andaman & Nicobar Islands, Port Blair-744101

अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में डाक सेवाओं का विस्तार


संचार सेवायें सदैव से मानवीय जीवन का अभिन्न अंग रही है। संचार के क्षेत्र में डाक सेवाओं का सदैव से प्रमुख स्थान रहा है । वर्तमान में सूचना एवं संचार क्रान्ति के चलते तमाम नवीन तकनीकों का आविष्कार हुआ है, पर डाक-विभाग ने समय के साथ नव-तकनीक के प्रवर्तन, अपनी सेवाओं में विविधता एवं अपने व्यापक नेटवर्क के चलते विभिन्न संगठनों के उत्पादों व सेवाओं के वितरण एवं बिक्री हेतु उनसे गठजोड़ करके अपनी निरन्तरता कायम रखी है। डाक सेवाओं का इतिहास बहुत पुराना है, पर भारत में एक विभाग के रूप में इसकी स्थापना 1 अक्तूबर 1854 को लार्ड डलहौजी के काल में हुई। 1 अक्तूबर 1854 को ही पूरे भारत हेतु प्रथम बार डाक टिकट जारी किये गये। डाक टिकट के परिचय के साथ ही बिना दूरी का ध्यान रखे ‘एक समान डाक दर‘ को लागू किया गया तो इसी दौरान सर्वप्रथम लेटर बाक्स भी स्थापित किये गये। डाकघरों में बुनियादी डाक सेवाओं के अतिरिक्त बैंकिंग, वित्तीय व बीमा सेवाएं भी उपलब्ध हैं। एक तरफ जहाँ डाक-विभाग सार्वभौमिक सेवा दायित्व के तहत सब्सिडी आधारित विभिन्न डाक सेवाएं दे रहा है, वहीं पहाड़ी, जनजातीय व दूरस्थ क्षेत्रों में भी उसी दर पर डाक सेवाएं उपलब्ध करा रहा है।

सामरिक रूप से महत्वपूर्ण होने के कारण ब्रिटिश शासन काल से ही अंग्रेजों ने अंडमान व निकोबार द्वीप समूह में भी संचार साधनों की प्रमुखता पर जोर दिया। इनमें डाक सेवायें सर्वप्रमुख थीं। ब्रिटिश-काल के दौरान यहाँ एकमात्र डाकघर रास आइलैण्ड पर अवस्थित था, जो द्वितीय विश्वयुद्ध की समाप्ति पर कमिश्नर आफिस के साथ ही वर्तमान सचिवालय स्थान पर स्थानांतरित हो गया। यह उप डाकघर उस समय प्रधान डाकघर पेगू (बर्मा) के अधीन था और बर्मा के अलावा कलकत्ता व मद्रास से जलयान द्वारा डाक प्राप्त करता था। स्वतंत्रता पश्चात यह उप डाकघर बैरकपुर प्रधान डाकघर, कलकत्ता के अधीन आ गया। ब्रिटिश काल के दौरान पोर्टब्लेयर के अलावा चाथम एवं लांग-आइलैंड में भी डाकघर खोले गए अर्थात आजादी के समय यहाँ कुल तीन डाकघर थे । आजादी पश्चात इन तीनों डाकघरों का प्रशासन प्रेसीडेंसी डिवीजन ( मुख्यालय बैरकपुर ) द्वारा संचालित होता था। बाद में प्रेसीडेंसी डिवीजन के विभाजन पश्चात द्वीपों के डाकघर साउथ प्रेसीडेंसी डिवीजन (मुख्यालय कलकत्ता) के अधीन आ गए। जैसे-जैसे द्वीप समूहों में लोगों का पुनर्वास हुआ, डाक सेवाओं की माँग बढ़ने लगी। इसी क्रम में मई 1961 में यहाँ प्रथम उपमंडल की स्थापना एक निरीक्षक के अधीन हुई। 27 अप्रैल 1971 को यहाँ एक स्वतंत्र डिवीजन की स्थापना डाक अधीक्षक के अधीन हुई। जैसे-जैसे द्वीप समूहों में डाक-सेवाओं का विस्तार होता गया, डाकघरों की संख्या व कार्य भी बढ़ते गए। 19 सितंबर 1988 को इसे एक निदेशक के अधीन लाया गया, जो कि भारतीय डाक सेवा के जूनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रेड का अधिकारी होता है। श्रीमती कल्पना तिवारी यहाँ प्रथम निदेशक (19.09.1988-25.10.1990) थीं और वर्तमान में श्री कृष्ण कुमार यादव (22.01.2010 से निरंतर..)निदेशक डाक सेवाएं पद पर पदस्थ हैं। निदेशक डाक सेवाएं द्वीप-समूहों का शीर्षस्थ डाक अधिकारी है। फिलहाल द्वीप-समूहों में 100 डाकघरों के माध्यम से डाक सेवाएं संचालित हैं, जिनमें प्रधान डाकघर पोर्टब्लेयर के अलावा 26 उपडाकघर व 73 शाखा डाकघर शामिल हैं। इनमें 12 डाकघर नगरीय व 88 ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत हैं। द्वीप-समूहों में कुल 158 डाक कर्मचारी हैं व 214 ग्रामीण डाक सेवक हैं। डाक के एकत्रीकरण हेतु 199 लेटर बाक्स हैं जबकि वितरण हेतु 22 पोस्टमैन व 101 ग्रामीण डाक सेवक कार्यरत हैं।

अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में वह सभी प्रमुख डाक सेवाएं उपलब्ध हैं, जो मुख्य भूमि में मिलती हैं। 26 दिसम्बर 2009 को पोर्टब्लेयर प्रधान डाकघर को भारतीय डाक की महत्वाकांक्षी परियोजना ‘‘प्रोजेक्ट एरो‘‘ के तहत शामिल किया गया, जिसके तहत डाकघर की कार्यप्रणाली को सभी क्षेत्रों में सुधार एवं उच्चीकृत करके पारदर्शी, सुस्पष्ट एवं उल्लेखनीय प्रदर्शन के आधार पर और आधुनिक बनाया गया है। डाक वितरण, डाकघरों के बीच धन प्रेषण, बचत बैंक सेवाओं और ग्राहकों की सुविधा पर जोर के साथ नवीनतम टेक्नोलाजी, मानव संसाधन के समुचित उपयोग एवं आधारभूत अवस्थापना में उन्नयन द्वारा विभाग अपनी ब्राण्डिंग पर भी ध्यान केन्द्रित कर रहा है। 22 उपडाकघरों को भी अब प्रोजेक्ट एरो में शामिल कर लिया गया है। द्वीप समूह में कुल 24 डाकघर कम्यूटरीकृत हैं। स्टाफ के प्रशिक्षण हेतु पोर्टब्लेयर प्रधान डाकघर कैंपस में ”वर्किंग कंप्यूटर टेªनिंग सेंटर“ 27 नवम्बर 2010 से कार्यरत है। जन-शिकायत के निवारण के लिए निदेशक कार्यालय, पोर्टब्लेयर प्रधान डाकघर व 22 प्रोजेक्ट एरो डाकघरों में कंप्यूटरीकृत कस्टमर केयर सेंटर स्थापित किये गए हैं, जहाँ वेब-आधारित शिकायतें स्वीकार कर उनका त्वरित निस्तारण किया जाता है। डाक विभाग अब लोगों के लिए एड्रेस प्रूफ कार्ड भी जारी कर रहा है।
द्वीप समूह के डाकघरों से बचत खाता, आवर्ती जमा, सावधि जमा, मासिक आय स्कीम, लोक भविष्य निधि, वरिष्ठ नागरिक, राष्ट्रीय बचत पत्र और बचत स्कीम की खुदरा बिक्री की जाती है। ज्ञातव्य है कि ये सभी जमा राशियाँ केन्द्र सरकार द्वारा राज्यों के विकास कार्यों के लिए दी जाती हैं। डाकघर की जमा योजनाओं में आकर्षक ब्याज दरें हैं। द्वीप समूह में वर्तमान में लगभग 1.6 लाख खाते चल रहे हैं और वित्तीय वर्ष 2011-12 के दौरान अब तक लगभग 68 करोड़ रूपये डाकघरों में जमा हुए। वर्तमान परिवेश में डाक विभाग वन स्टाप शाप के तहत बचत, बीमा, गैर बीमा, म्युचुअल फण्ड, पेंशन प्लान इत्यादि सेवायें प्रदान कर रहा है। इनमें से कई सेवायें अन्य फर्मों के साथ अनुबंध के तहत आरम्भ की गयी हैं। मनरेगा के तहत रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में डाकघर मजदूरी का भुगतान करने का माध्यम भी बन चुका है। द्वीप समूह में मनरेगा के 671 खातों द्वारा भुगतान किया जा रहा हैं। भारत में सबसे पुरानी बीमा सेवा ’’डाक जीवन बीमा’’ (1884) प्रदान करने वाले भारतीय डाक ने 1995 में ग्रामीण जनता को बीमा कवर उपलब्ध कराने हेतु ’’ग्रामीण डाक जीवन बीमा’’ का शुभारम्भ किया। वित्तीय वर्ष 2011-12 में अब तक डाक जीवन बीमा में रू0 10.29 करोड़ से ज्यादा का व्यवसाय हो चुका है। डाकघरों की मनीआर्डर सेवा को द्रुतगामी बनाते हुए इसे ई-मनीआर्डर में तब्दील कर दिया गया है। राजभाषा नीति के श्रेष्ठ निष्पादन हेतु निदेशक डाक सेवाएं को वर्ष 2010-11 के लिए नराकास द्वारा केन्द्र सरकार के प्रतिष्ठानों में द्वितीय पुरस्कार भी प्रदान किया गया है।

परंपरागत डाक सेवाओं को मूल्यवर्द्धित बनाकर उन्हें और आर्काक बनाया गया है। स्पीड पोस्ट व एक्सप्रेस पार्सल पोस्ट सेवा निश्चित समय के भीतर सुनिश्चित वितरण की गारंटी देते हैं। पोर्ट ब्लेयर में इंट्रा सर्किल स्पीड पोस्ट सार्टिंग हब स्थापित किया गया है। यहाँ सभी विभागीय डाकघरों में स्पीड पोस्ट बुकिंग का कार्य होता है। स्पीड पोस्ट सेवा में बुक नाउ-पे लेटर स्कीम की सुविधा भी उपलब्ध है। “बिजनेस पोस्ट” सेवा के अन्तर्गत डाक के एकत्रीकरण से लेकर पता लेखन, फ्रैंकिंग, पैकिंग आदि सम्पूर्ण गतिविधियों का एक ही स्थान पर समाधान किया जाता है तो ”मीडिया पोस्ट“ के अन्तर्गत डाक-स्टेशनरी, लेटर बाक्स, मेल गाड़ी व डाकघरों में विज्ञापन लगाने की सुविधा प्राप्त है। “बिल मेल पोस्ट” हर तिमाही न्यूनतम 5,000 प्रपत्र व बिल एक ही जिले में प्रेषित करने वालों हेतु सामान्य दरों से कम पर सुविधा उपलब्ध कराता है। इसके अलावा बाहरी डाक हेतु ”नेशनल बिल मेल सर्विस“ भी उपलब्ध है। डाकियों द्वारा उत्पादों के प्रचार-प्रसार हेतु पम्फलेट बाँटने के निमित्त’’डायरेक्ट पोस्ट सेवा’’ का इजाद किया गया तो ”रिटेल पोस्ट“ के तहत डाकघर काउण्टरों से टेलीफोन बिलों का एकत्रीकरण, विभिन्न फार्मों की बिक्री इत्यादि कार्य होते हैं। ”स्पीड पोस्ट पासपोर्ट सेवा“ के तहत पोर्टब्लेयर प्रधान डाकघर से पासपोर्ट फार्मों की बिक्री व जमा करने की सुविधा है। अब तो डाकिया डाक वितरण के दौरान पत्रों का एकत्रीकरण व डाक-स्टेशनरी की बिक्री भी करता है। डाक विभाग नई टेक्नालोजी का भी उपयोग कर रहा है, जिसमें “ई-पोस्ट” सेवा में ई-मेल द्वारा संदेश भेजे जाते हैं जिन्हें डाकघरों में प्रिन्टआउट निकालकर सम्बन्धित व्यक्ति के घर पर डाकिया द्वारा वितरित करा दिया जाता है। “इंस्टेंट मनीआर्डर सेवा’” के तहत संपूर्ण भारत में आॅनलाइन मनी ट्रांसफर के तहत धनादेश भेजने व प्राप्त करने की सुविधा है। विदेशों में रह रहे व्यक्तियों द्वारा द्वीप समूहों में अपने परिजनों को तत्काल धन अन्तरण सुलभ कराने हेतु ’’वेस्टर्न यूनियन’’ के सहयोग से ’’अंतर्राष्ट्रीय धन अन्तरण सेवा’’ पोर्टब्लेयर, बम्बूफलाट और हैवलाॅक डाकघरों में उपलब्ध है। केन्द्रीय सांख्यिकी संगठन से अनुबंध के अनुसार राष्ट्रीय स्तर पर सटीक वास्तविक मूल्य सूचकांक तैयार करने में द्वीप समूहों में हटबे, कैंबलबे, पेरका, बकुलतला और विम्बर्लीगंज में उपभोक्ता वस्तुओं के मूल्यों का संकलन कर डाक विभाग द्वारा सर्वेक्षण भी किया जा रहा है। डाक विभाग 8 जनवरी 2012 को पोर्टब्लेयर में बच्चों में पत्र-लेखन की कला को बढ़ावा देने के लिए 41वीं यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन पत्र लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया।

डाक टिकटों के क्षेत्र में भी डाक विभाग नित नये अनूठे प्रयोग कर रहा है। पिछले वर्षों में चन्दन, गुलाब और जूही वाले खुशबूदार डाक टिकट जारी किये गये हैं तो भारत के गौरव की झांकी पेश करने वाले 25 स्वर्णिम डाक टिकटों को जारी करने हेतु डाक विभाग ने लंदन स्थिति कम्पनी हालमार्क ग्रुप को अधिकृत किया है। डाक विभाग द्वारा सन् 1999 से प्रति वर्ष आयोजित ‘डाक टिकट डिजाइन प्रतियोगिता’ के विजेता की डिजाइन को अगले बाल दिवस पर डाक-टिकट के रूप में जारी किया जाता है। डाक टिकट किसी भी राष्ट्र की सभ्यता, संस्कृति एवं विरासत के प्रतिबिम्ब है, जिसके माध्यम से वहाँ के इतिहास, कला, विज्ञान, व्यक्तित्व, वनस्पति, जीव-जन्तु, राजनयिक सम्बन्ध एवं जनजीवन से जुडे़ विभिन्न पहलुओं की जानकारी मिलती है। ‘फिलेटलिक डिपाजिट एकाउण्ट‘ के तहत डाकघरों में न्यूनतम 200 रूपये से एकाउण्ट खोला जा सकता है और हर माह घर बैठे डाक टिकटें व अन्य मदें प्राप्त होती रहेंगी। अंडमान व निकोबार द्वीप समूह से जुड़े डाक टिकट भी डाक विभाग द्वारा समय-समय पर जारी किए गए हैं और इस संबध में अन्य प्रस्तावों की भी अपेक्षा है। यहाँ से जुड़े डाक टिकटों में वी0 डी0 सावरकर (20 मई 1970), अंडमान टील (23 नवम्बर 1994), सेलुलर जेल (30 दिसम्बर 1997), इंटरनेशनल ईयर आफ ओशन (30 दिसम्बर 1998), कोरल्स आफ इंडिया (22 अगस्त 2001), अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की स्थानिक तितलियाँ (20जनवरी 2008), अलडाबरा कछुआ (2 अगस्त 2008), शताब्दी का प्रथम सूर्योदय कछाल द्वीप में (1जनवरी 2000) इत्यादि प्रमुख हैं। भारतीय डाक विभाग ने अंडमान में पर्यटन को बढ़ावा देने वाले मेघदूत पोस्टकार्ड भी जारी किए हैं, जिनमें सेलुलर जेल, बैरन ज्वालामुखी, रास और स्मित आइलैंड इत्यादि के चित्रों को प्रदशित किया गया है और इसे सूचना-प्रसार एवं पर्यटन निदेशालय, अंडमान व निकोबार प्रशासन द्वारा विज्ञापित किया गया है।

आज अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में डाक सेवायें अपने व्यापक नेटवर्क, विश्वसनीयता और तमाम नई सेवाओं के साथ कदम फैला रही हैं। तमाम देशों ने आज जहाँ डोर-टू-डोर डिलीवरी खत्म कर दी है वहीं अभी भी अपने देश में डाकिया हर दरवाजे पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराता है और लोगों के सुख-दुख में शरीक होता है। डाक सेवायें समाज के अन्तिम व्यक्ति के साथ एक भावनात्मक व अटूट सम्बन्ध में अभी भी जुड़ी हुई है और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह भी इसका अपवाद नहीं है।




(कृष्ण कुमार यादव, भारतीय डाक सेवा,निदेशक डाक सेवाएं,अंडमान व निकोबार द्वीप समूह, पोर्टब्लेयर-744101)


































- कृष्ण कुमार यादव, निदेशक डाक सेवाएँ, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह, पोर्टब्लेयर-744101