Tuesday, July 31, 2012

डाक-मुंशी के पुत्र थे उपन्यास सम्राट प्रेमचन्द

हिन्दी साहित्य के इतिहास में उपन्यास सम्राट के रूप में अपनी पहचान बना चुके प्रेमचंद का वास्तविक नाम धनपत राय श्रीवास्तव था. वह एक कुशल लेखक, जिम्मेदार संपादक और संवेदशील रचनाकार थे. प्रेमचंद का जन्म 31 जुलाई, 1880 को वाराणसी से लगभग चार मील दूर लमही नामक ग्राम में हुआ था. इनका संबंध एक गरीब कायस्थ परिवार से था. इनकी माता का नाम आनन्दी देवी था. इनके पिता अजायब राय श्रीवास्तव डाकमुंशी के रूप में कार्य करते थे.ऐसे में प्रेमचंद का डाक-परिवार से अटूट सम्बन्ध था.

जब प्रेमचंद के पिता गोरखपुर में डाकमुंशी के पद पर कार्य कर रहे थे उसी समय गोरखपुर में रहते हुए ही उन्होंने अपनी पहली रचना लिखी. यह रचना एक अविवाहित मामा से सम्बंधित थी जिसका प्रेम एक छोटी जाति की स्त्री से हो गया था. वास्तव में कहानी के मामा कोई और नहीं प्रेमचंद के अपने मामा थे, जो प्रेमचंद को उपन्यासों पर समय बर्बाद करने के लिए निरन्तर डांटते रहते थे. मामा से बदला लेने के लिए ही प्रेमचंद ने उनकी प्रेम-कहानी को रचना में उतारा. हालांकि प्रेमचंद की यह प्रथम रचना उपलब्ध नहीं है, क्योंकि उनके मामा ने क्रुद्ध होकर पांडुलिपि को अग्नि को समर्पित कर दिया था.

प्रेमचंद बचपन से ही काफी खुद्दार रहे. 1920 का दौर... गाँधी जी के रूप में इस देश ने एक ऐसा नेतृत्व पा लिया था, जो सत्य के आग्रह पर जोर देकर स्वतन्त्रता हासिल करना चाहता था। ऐसे ही समय में गोरखपुर में एक अंग्रेज स्कूल इंस्पेक्टर जब जीप से गुजर रहा था तो अकस्मात एक घर के सामने आराम कुर्सी पर लेटे, अखबार पढ़ रहे एक अध्यापक को देखकर जीप रूकवा ली और बडे़ रौब से अपने अर्दली से उस अध्यापक को बुलाने को कहा । पास आने पर उसी रौब से उसने पूछा-‘‘तुम बडे़ मगरूर हो। तुम्हारा अफसर तुम्हारे दरवाजे के सामने से निकल जाता है और तुम उसे सलाम भी नहीं करते।’’ उस अध्यापक ने जवाब दिया-‘‘मैं जब स्कूल में रहता हूँ तब मैं नौकर हूँ, बाद में अपने घर का बादशाह हूँ।’’अपने घर का बादशाह यह शख्सियत कोई और नहीं, वरन् उपन्यास सम्राट प्रेमचंद थे, जो उस समय गोरखपुर में गवर्नमेन्ट नार्मल स्कूल में सहायक अध्यापक के पद पर कार्यरत थे।

प्रेमचंद बहुमुखी प्रतिभा संपन्न साहित्यकार थे. उनकी रचनाओं में तत्कालीन इतिहास की झलक साफ दिखाई देती है. यद्यपि प्रेमचंद के कालखण्ड में भारत कई प्रकार की प्रथाओं और रिवाजों, जो समाज को छोटे-बड़े और ऊंच-नीच जैसे वर्गों में विभाजित करती है, से परिपूर्ण था इसीलिए उनकी रचनाओं में भी इनकी उपस्थिति प्रमुख रूप से शामिल होती है. प्रेमचंद का बचपन बेहद गरीबी और दयनीय हालातों में बीता. मां का चल बसना और सौतेली मां का बुरा व्यवहार उनके मन में बैठ गए थे. वह भावनाओं और पैसे के महत्व को समझते थे. इसीलिए कहीं ना कहीं उनकी रचनाएं इन्हीं मानवीय भावनाओं को आधार मे रखकर लिखे जाते थे. उन्होंने अपनी रचनाओं में जन साधारण की भावनाओं, परिस्थितियों और उनकी समस्याओं का मार्मिक चित्रण किया था. उनकी कृतियाँ भारत के सर्वाधिक विशाल और विस्तृत वर्ग की कृतियाँ हैं. इसके अलावा प्रेमचंद ने लियो टॉल्सटॉय जैसे प्रसिद्ध रचनाकारों के कृतियों का अनुवाद भी किया जो काफी लोकप्रिय रहा.
प्रेमचंद जी के पिता अजायब राय डाक-कर्मचारी थे, अत: प्रेमचंद जी अपने ही परिवार के हुए।आज उनकी जयंती पर शत-शत नमन। डाक-परिवार अपने ऐसे सपूतों पर गर्व करता है व उनका पुनीत स्मरण करता है।प्रेमचंद की स्मृति में भारतीय डाक विभाग की ओर से 31 जुलाई, 1980 को उनकी जन्मशती के अवसर पर 30 पैसे मूल्य का एक डाक टिकट भी जारी किया गया !!

(प्रेमचंद जी पर मेरा विस्तृत आलेख साहित्याशिल्पी पर पढ़ सकते हैं)

Thursday, July 26, 2012

Postal department releases four stamps on Olympic Games

Department of Posts, India has issued a set of four commemorative postage stamps and a souvenir sheet for the London Olympic Games starting from July 27.

Talking to TOI, Krishna Kumar Yadav, Director Postal Services, Allahabad said "two postage stamps are available in Rs. 5/- denomination and two are of Rs. 20". He added that the printed stamps in the number 4 lacs each have the portrayal of sportsmen engaged in Volleyball, Rowing, Sailing and badminton.

Four lakh souvenir sheets are also issued in 'Wet Offset' printing process by Indian Security Press, Nasik. Yadav also maintained that the information brochure released with postage stamps has a detailed report in respect of London Olympic Games.

The London Olympic commencing on July 27 with the theme slogan 'Inspite a Generation' are a much awaited event for the sports enthusiasts across the globe. The slogan reflects one of London's key Olympic legacy pledges which is 'to inspire a generation of young people to take part in local volunteering, cultural and physical activity.

Director also informed that these stamps are available in philatelic bureau, Allahabad Head Post Office for sale.

There was a craze among philatelist and youth to purchase these stamps at first day of release.

Courtesy : Times of India

Wednesday, July 25, 2012

ओलम्पिक का क्रेज : भारतीय डाक विभाग ने जारी किए 4 डाक टिकट

भारतीय डाक विभाग ने लंदन में 27, जुलाई 2012 से शुरु होने वाले ओलम्पिक खेल के मद्देनजर 25, जुलाई 2012 को 4 डाक टिकट जारी किये। इनमें से 2 डाक टिकट 5/- रू0 मूल्य वर्ग के व अन्य 2 डाक टिकट 20/- रू0 मूल्य वर्ग में उपलब्ध हैं। चार-चार लाख की संख्या में छपे इन डाक टिकटों पर वालीबाल, रोविंग, सेलिंग एवं बैडमिन्टन खिलाडि़यों का सुन्दर चित्रण किया गया है। इण्डियन सिक्योरिटी प्रेस, नासिक द्वारा वेट आॅफसेट रूप में मुद्रित इन डाक टिकटों के साथ चार लाख स्मारिका शीट भी जारी की गयी हैं।

इन डाक टिकटों के साथ जारी सूचना विवरणिका में लदंन ओलम्पिक खेलों के बारे में विस्तृत जानकारी दी गयी है। गौरतलब है कि ’इंस्पायर ए जनरेशन’ के नारे के साथ 27 जुलाई, 2012 को शुरू होने वाले लंदन ओलम्पिक खेलों का पूरे विश्व के खेल प्रेमियों को बेसब्री से इंतजार है। इस नारे में लंदन की ओलम्पिक विरासत के प्रमुख नारों में से एक की झलक मिलती है, जो इस प्रकार है ’युवा पीढ़ी को स्थानीय स्वयंसेवा, सांस्कृतिक एवं शारीरिक कार्याकलापों में भाग लेने के लिए प्रेरित करना।’

ये डाक टिकट सभी फिलेटिलिक ब्यूरो में बिक्री के लिए उपलब्ध हैं। पहले दिन ही इन डाक टिकटों के लिए फिलेटलिस्ट एवं युवाओं में काफी क्रेज देखा गया।

Tuesday, July 24, 2012

Raksha Bandhan celebrations: Postal Dept. comes up with special rakhi envelopes

For the safe and sure delivery of 'rakhis', the postal department has introduced special tamper proof and waterproof 'rakhi' envelopes. These envelopes are available at the post offices across the country.

Director, postal services, Allahabad Region, Krishna Kumar Yadav said since Rakshabandhan is celebrated during monsoon season, when the weather is very humid, and paper envelopes get moist, these specially designed rakhi envelopes offer a better option.

These rakhi envelopes are offered in dimension of 11 cm x 22 cm these envelopes are priced at Rs. 7/- per envelop excluding Postal charges.

These designer envelopes are available in six varieties.

Special feature of these envelopes is "Peal and Seal" mechanism which do not require use of gums or adhesives and are easy to use and dispose off.

Yadav said that special arrangements have been made at all Head Post Offices of Allahabad Region including Allahabad Head Post Office and Allahabad Kutchery Head Post Office for safe and time bound delivery of Rakhi Mail.Besides this Special Post Boxes are arranged in the premises of these offices for the purpose of sending Rakhis and which are not mingled with other mails. Once sorted out they are dispatched to their respective destinations to ensure timely delivery.

Apart from this separate boxes are made available for metro cities like Delhi, Kolkata, Chennai and Mumbai to save time in sorting and speed up delivery on time. He further told that if the mail volume increases, additional arrangements will be made for delivery on time.


Courtesy : Times of India

Saturday, July 21, 2012

डाकघरों से रक्षाबंधन के पर्व पर डिजाइनदार राखी लिफाफों की ब्रिकी


राखी का त्यौहार भारतीय संस्कृति का एक प्रमुख त्यौहार है जो प्रत्येक वर्ष श्रावण मास में मनाया जाता है। इस वर्ष भाई-बहन के प्यार का प्रतीक यह पर्व 2 अगस्त को पड़ रहा है। आज इस आधुनिकता एवम विज्ञान के दौर में संसार मे सब कुछ हाईटेक हो गया है। वहीं हमारे त्यौहार भी हाईटेक हो गए है। इन्टरनेट व एस0एम0एस0 के माध्यम से आप किसी को कहीं भी राखी की बधाई दे सकते है। किन्तु जो प्यार, स्नेह, आत्मीयता एवं अपनेपन का भाव बहन द्वारा भाई की कलाई पर राखी बाँधने पर है वो इस हाईटेक राखी में नही है। इस सम्बन्ध में हिन्दी फिल्म का एक मशहूर गाना याद आता है-‘‘बहना ने भाई की कलाई पर प्यार बाँधा है, कच्चे धागे से सारा संसार बाँधा है।‘‘ इन पंक्तियों में छुपा भाव इस पर्व की सार्थकता में चार चाँद लगा देता है। डाक विभाग इन भावनाओं को हर साल आपके दरवाजे तक पहुँचाता है, सो इस साल भी तैयार है।

बहनों द्वारा राखियों को सुरक्षित एवं सुगमता से भेजने के लिए डाक विभाग ने छ: तरह के लिफाफे जारी किये गये हैं। 11 सेमी X 22 सेमी आकार के इन राखी लिफाफों का मूल्य रुपया 7/- है जो डाक शुल्क के अतिरिक्त है। ये लिफाफे पूर्णतया वाटर प्रूफ, मजबूत, पारगमन के दौरान न फटने, रंगबिरंगे एवं राखी की विभिन्न डिजाइनों से भरपूर है। राखी लिफाफों को चिपकाने हेतु इनमें विशेष स्टिकर का प्रयोग किया गया है जिससे लेई या गम की आवश्यकता नहीं होगी। इसके चलते जहाँ राखी प्राप्त करने वाले को प्रसन्नता होगी, वहीं इनकी छंटाई में भी आसानी होगी। यही नहीं राखी डाक को सामान्य डाक से अलग रखा जा रहा है। लोगों की सुविधा के लिए डाकघरों में अलग से डलिया लगाई गयी हैं, जिन पर स्थान का नाम लिखा है। पोस्ट की गई राखियों को उसी दिन विशेष बैग द्वारा सीधे गंतव्य स्थानों को प्रेषित कर दिया जा रहा है, ताकि उनके वितरण में किसी भी प्रकार की देरी न हो। ऐसे सभी भाई जो अपने घर से दूर है तथा देश की सीमा के सजग प्रहरी हमारे जवान जो बहुत ही दुर्गम परिस्थियो मे भी देश की सुरक्षा मे लगे है उन सभी की कलाई पर बँधने वाली राखी को सुरक्षित भेजे जाने के लिए भी डाक विभाग ने विशेष प्रबन्ध किये हैं। तो आप भी रक्षाबन्धन का इन्तजार कीजिए और इन्तजार कीजिए डाकिया बाबू का जो आपकी राखी को आप तक पहुँचाना सुनिश्चित करेंगे और भाई-बहन के इस प्यार भरे दिवस के गवाह बनेंगे।

Thursday, July 19, 2012

कहाँ गई वो चिट्ठियाँ



कहाँ गये वो दिन, जब आती थी चिट्ठियाँ
दुख-सुख का पैगाम, लाती थी चिट्ठियाँ।
दिल से लिखी इबारत, दिल में उतर जाती थी,
लिखने वाले की यादें, तरोताजा कर जाती थी चिट्ठियाँ।
पढ़ते-पढ़ते लिखने वाले की, तस्वीर उभर आती थी,
जब हाल-ए-दिल सुनाकर, बतियाती थी चिट्ठियाँ।
आँसू से लिखी चिट्ठियाँ, नयन डबडबाती थी,
भाव-विहवल कर ऑंखें, बरसाती थी चिट्ठियाँ।
चिट्ठी में लिख हर बात, दिल को छू जाती थीं,
दिल के तार हिलाती, कागज भिगों जाती थी चिट्ठियाँ।
गाँॅव का हाल सुनाकर, गाँव की याद कराती थी
अम्मा-बाबुजी की दुआओ, आशीषों से सहलाती थी चिट्ठियाँ।
खैर-खबर सुनाती नाचती-नचाती, हर्षाती थी,
बावला बनाती थी जब, हाथ में आती थी चिट्ठियाँ।
खुशियो की सौगात, प्यार की बरसात बन जाती थी,
भावनाओं के सागर में, गोते लगाती थी चिट्ठियाँ।
सब्र का बाँध तोड़कर बेकरारों सा बेचैन बनाती थी,
डाकिया का इंतजार करवाती, राह तकवाती थी चिट्ठियाँ।
जिन्हें पढ़ते-पढ़ते हम, खो जाते थे सीने से लगा,
सो जाते थे, ख्यालो-ख्वाबों में डूबाती थी चिट्ठियाँ ।
जिन्हें सहेज रखते थे, मीठी यादों की की तरह-दीवानों को तरह,
नायाब खजानों की तरह, जब संदूक में मिल जाती थी चिट्ठियाँ ।
अपनेपन का अहसास कराती हिचकियों का
राज बताती थी, तकिये के नीचे मिल जाती थी चिट्ठियाँ।
संदेशों का पैगाम सुनाती, बहुत सुकून पहुँचाती थी
जब अम्बा माथे से लगा, सीने से लगाती थी चिट्ठियाँ।
कहाँ गई वे अनमोल चिट्ठियाँ, जो जीने का सहारा बन जाती थी,
प्यार-दुलार जताती, हर्षो-उल्लास, उमंग से भर जाती चिट्ठियाँ।

-महेंद्र कुमार सिरोठिया, 119, मानस भवन,11, आर.एन.टी.मार्ग इंदौर

Friday, July 13, 2012

Postmen help determine consumer price index

The postmen in rural areas are also collecting the prices of different food products and consumer items. This is being done under an agreement signed between the Central Statistical Organisation (CSO) and the postal department to prepare consumer price index (CPI) of the rural areas, said director, postal services, Allahabad region, Krishna Kumar Yadav.

He said in rural areas, two different kinds of surveys are being conducted by the postal employees. One involves the cost survey of rice, wheat, sugar and kerosene provided to below poverty line (BPL) card holders or other customers under public distribution system (PDS).

The second is the survey of articles being sold in the selected rural areas. Yadav added that around 248 products like pulses, various milk products, oil, meat, fish, rice, wheat, cereals, corn, vegetables, fruits, sugar, honey, spices, tea, coffee, tobacco, beetle nut, fuel, shoes, cosmetics, clothes, bed sheets, mosquito net, medicines, tutor fee, sports material, phone charges, stationary, and various other domestic products and services are covered in the survey.

Giving the reasons for the involvement of rural areas in the index list, Yadav said: "CPI is a medium to find the rate of inflation. Earlier, inflation was calculated on the basis of the cost price of the products sold in the urban areas. However, around 70 per cent of the population lives in rural areas and markets are flourishing in these areas as well. So, there was a need to include the cost price of the articles sold in the rural market." Survey is done every month and finally the data is uploaded on the CSO website by the postal department.

The data collection work is going in 20 selected post offices in Allahabad region. Some of them are Sewaith (Phaphamau SO), Lawayan Kalan Uparhar (TSI, SO), Kokhraj Uperhar (Bharwari SO) and Panara Gopalpur (Sarai Akil SO) in Allahabad Division, in Ghazipur (Chhawani Line SO) Chhawani Vise, (Zamania SO), Nariyaon Urf Umarganj, in Mirzapur (Kachhawa SO) Mahamalpur,

Courtesy : Times of India

Thursday, July 12, 2012

आटा, दाल और चीनी का भाव भी रख रहा डाकिया

चिट्ठी, मनीआर्डर के अलावा डाकियों ने अब दाल, चावल, तेल, घी, चीनी और दवाओं समेत करीब ढाई सौ वस्तुओं के भाव की जानकारी करने का काम भी शुरू कर दिया है। ग्रामीण इलाकों से डाकिया द्वारा संकलित इस जानकारी के आधार पर ही उपभोक्ता मूल्य सूचकांक बन रहा है।

डाक विभाग अब राष्ट्रीय स्तर पर सटीक वास्तविक मूल्य सूचकांक तैयार करने में भी सहयोग कर रहा है। केंद्रीय सांख्यिकी संगठन ने इस कार्य के लिए डाक विभाग के देशव्यापी नेटवर्क का इस्तेमाल करने के लिए एक अनुबंध किया है। इसके तहत ग्रामीण इलाकों में डाटा एकत्रीकरण शुरू किया गया है।

इस संबंध में निदेशक डाक सेवाएं, कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के तहत ग्रामीण क्षेत्र में डाक कर्मियों के माध्यम से दो तरह के सर्वेक्षण कराए जा रहे हैं। पहला, जनवितरण प्रणाली के तहत प्रदान किए जाने वाले चावल, गेहूं, आटा, चीनी और केरोसिन को बीपीएल व अंत्योदय ग्राहकों को दिए जाने वाले मूल्यों का सर्वेक्षण। दूसरा, गांवों में लगने वाली बाजारों व दुकानों पर बिकने वाले सामानों के मूल्यों का सर्वेक्षण। इसमें करीब 248 वस्तुएं शामिल हैं। पूर्व में देश में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक शहर की दुकानों पर बिकने वाले रोजमर्रा के सामानों के आधार पर तैयार किया जाता था। अब गांवों के बाजारों में बिकने वाली रोजमर्रा की वस्तुओं के मूल्यों के बारे में जानकारी एकत्र करने का काम डाकिया कर रहे। इनमें इलाहाबाद के सेवइथ (फाफामऊ), लवायनकला उपरहार (टीएसएल नैनी), कोखराज उपरहार (भरवारी), पनारा गोपालपुर (सरायअकिल) समेत इलाहाबाद परिश्रेत्र में चयनित 20 डाकघरों के माध्यम से यह सर्वेक्षण कराया जा रहा है। डाक कर्मियों द्वारा एकत्रित 31 पृष्ठ के आंकड़ों को केंद्रीय सांख्यिकी संगठन की वेबसाइट पर डाक विभाग द्वारा फीड किया जा रहा है।


साभार : जागरण और प्रेसनोट

Thursday, July 5, 2012

Now, get 'prasad' of Vishwanath & Mahakal temple through post

With the start of holy month of Shrawan on Wednesday, the Indian Postal Service department too has come up with an auspicious announcement for the Shiva devotees. The department has entered into an agreement with the Kashi Vishwanath temple of Varanasi and Mahakaleshwar temple of Ujjain whereby it will deliver the 'prasad' from these two temples to the devotees via post.

Director postal services, Allahabad region, Krishna Kumar Yadav said, "Following an agreement between the Indian Postal Services and the Kashi Vishwanath temple trust, the Prasad of Kashi Vishwanath temple can be provided to any devotee through post. The individual will have to send a money order of Rs 60 in the name of Postal Superintendent, Varanasi (East) and in return the postal department would send a packet containing 'bhabhuti' (ashes), Rudraksh, a laminated photo of Lord Shiva and Shiv Chalisa to the sender, courtesy, the authorities of the temple's trust".

Yadav said devotees can also get 'prasad' of Mahakaleshwar Jyotirlinga temple of Ujjain. For getting the Prasad, an individual will have to send a money order of Rs 151 in the name of Manager Shri Mahakaleshwar temple management committee, Ujjain. The temple authorities, in return, would send the prasad through post. The prasad would comprise 200 grams of dry fruits, 200 grams of ladoo, 'bhabhuti' and the photo of Mahakaleshwar.

"The Prasad would be send in a water proof envelope so that it does not get damaged or spoil during its transportation, from the temple to the hands of devotees", said Yadav.

Courtesy : Times of India

Wednesday, July 4, 2012

डाक से घर बैठे पायें काशी विश्वनाथ और महाकाल का प्रसाद

सावन के मौसम में शिव की आराधना के लिए तमाम तैयारियां हो रही हैं. कहीं उनका दरबार सज रहा है तो कहीं आनलाइन आरती का प्रबंध किया जा रहा है. पर अब देश के किसी भी कोने में बैठे शिवभक्त काशी विश्वनाथ मंदिर, बनारस और महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन का प्रसाद भी घर बैठे ग्रहण कर सकेंगें. डाक विभाग यह सौगात लेकर आया है.

यह जानकारी देते हुए इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि डाक विभाग और काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट के बीच हुए एक एग्रीमेण्ट के तहत काशी विश्वनाथ मंदिर का प्रसाद डाक द्वारा भी लोगों को उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके तहत साठ रूपये का मनीआर्डर प्रवर डाक अधीक्षक, बनारस (पूर्वी) के नाम भेजना होता है और बदले में वहाँ से काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट के सौजन्य से मंदिर की भभूति, रूद्राक्ष, भगवान शिव की लेमिनेटेड फोटो और शिव चालीसा प्रेषक के पास प्रसाद रूप में भेज दिया जाता है।

श्री यादव ने बताया कि काशी विश्वनाथ मंदिर के अलावा उज्जैन के प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर का प्रसाद भी डाक द्वारा मंगाया जा सकता है। इसके लिए प्रशासक, श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबन्धन कमेटी, उज्जैन को 151 रूपये का मनीआर्डर करना पड़ेगा और इसके बदले में वहाँ से स्पीड पोस्ट द्वारा प्रसाद भेज दिया जाता है। इस प्रसाद में 200 ग्राम ड्राई फ्रूट, 200 ग्राम लड्डू, भभूति और भगवान श्री महाकालेश्वर जी का चित्र शामिल है। निदेशक श्री यादव ने बताया कि इस प्रसाद को प्रेषक के पास एक वाटर प्रूफ लिफाफे में स्पीड पोस्ट द्वारा भेजा जाता है, ताकि पारगमन में यह सुरक्षित और शुद्ध बना रहे। (साभार : हिंदुस्तान और दैनिक जागरण अख़बार में प्रकाशित समाचार)

Monday, July 2, 2012

डाक प्रशिक्षण केन्द्र, वड़ोदरा के स्वर्ण जयंती अवसर पर विशेष आवरण (Special Cover) का विमोचन

गुजरात, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश डाक परिमंडलों के कर्मचारियों की प्रशिक्षण सम्बन्धी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए डाक प्रशिक्षण केन्द्र, वड़ोदरा की स्थापना दिनांक ०१.०७.१९६२ को मानसिक अस्पताल परिसर, कारेली बाग़, वड़ोदरा में की गयी थी बाद में १९८५ में डाक प्रशिक्षण केन्द्र को अपने वर्तमान परिसर हवाई अड्डे के सामने, हरनी रोड, वडोदरा में स्थानांतरित किया गया इस केंद्र में डाक विभाग के समस्त कर्मचारियों और अधिकारीयों के प्रारंभिक व् सेवान्तगर्त आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कीये जाते है इस प्रशिक्षण केंद्र शुरू में भारतीय डाक की परंपरागत सेवाओं की संचालन प्रक्रियाओं पर प्रशिक्षण प्रदान दिया जाता था और अब इसके अलावा भारतीय डाक की प्रीमियम सेवाओं और सॉफ्टवेयर के संचालन की प्रक्रिया पर आधुनिक उपकरणों का उपयोग करके प्रशिक्षण दिया जाता है इस केंद्र में प्रशिक्षण कार्यक्रमों को अभिकल्पित व् आयोजित करने के सुविधा है तथा यह केंद्र की वार्षिक १००००० व्यक्ति दिन प्रशिक्षण नियंत्रित करने के क्षमता है

डाक प्रशिक्षण केन्द्र, वड़ोदरा के स्वर्ण जयंती समारोह पर एक विशेष आवरण (Special Cover) का विमोचन ०१.०७.२०१२ को डाक प्रशिक्षण केन्द्र, वड़ोदरा के पद्मिनी सभा गृह में आयोजित समारोह में किया गया श्री कमलेश्वर प्रसाद, सदस्य (एचआरडी), डाक सेवा बोर्ड, नई दिल्ली ने यह विशेष आवरण जारी किया इसी अवसर पर डाक प्रशिक्षण केन्द्र ने डाक संचालन और प्रबंधन पर एक त्रैमासिक पत्रिका का प्रकाशन भी शुरू किया है, इस पत्रिका का प्रथम अंक भी इस अवसर पर जारी किया गया

इस अवसर पर श्री गणेश वी. सावलेश्वरकर, निदेशक, डाक प्रशिक्षण केन्द्र, वडोदरा ने डाक प्रशिक्षण केन्द्र के इतिहास के बारे में जानकारी दी

श्री ए.के. ए. जोशी, पीएमजी, विजयवाड़ा और पूर्व निदेशक पीटीसी, वडोदरा, श्रीमती वी. टी. शेठ, सेवानिवृत्त मुख्य महा डाकपाल (CPMG), गुजरात सर्किल और पूर्व निदेशक, पीटीसी, वडोदरा ने भी समारोह में भाग लिया इस अवसर पर उपस्थित अन्य गणमान्य व्यक्तियों में पीएमजी, वडोदरा, पीएमजी, राजकोट, डीपीएस, वडोदरा और डीपीएस, अहमदाबाद भी सामिल थे

साभार : प्रशांत पंड्या

Tuesday, June 26, 2012

Now get more remittances under International Money Transfer Services from Post Offices

ALLAHABAD: The transferring of money from abroad has always been a problem. However, the International Money Transfer Scheme (IMTS) of the department of Posts has made it comparatively quick and easier.

Elaborating on various aspects of the scheme, director postal services, Allahabad region Krishna Kumar Yadav said that with the cooperation of private money transfer firm, the money sent through abroad can be obtained by the recipient in India within few minutes, in selected post offices. Basically this service is available for those NRIs, whose families reside in India. In this service a special code is issued to sender and receiver can obtained payment very easily through this code.

Yadav further intimated that under this scheme the number of remittance has been enhanced from 12 to 30 times for single beneficiary in a calendar year from June 2012. Due to this, there is great scope to transfer money from abroad. In this service there is no facility of remittance to abroad. In 2011; 6,253 transactions were done, while in current year upto May 2012; 2,198 transactions took place in Allahabad. Although about 500 IMTS transactions are being done every month, in Allahabad.

Yadav added that the maximum limit of USD 2,500 can be sent at a time as per RBI regulations, which must however be only for personal use. Due to this the payment under this service is made to the person not to any firm, company, trust or society. Amounts upto INR. 50,000/- may be paid to the beneficiary in cash. Any amount exceeding this limit shall be paid by means of account payee cheque or credited directly to the savings account in the post office in the name of the beneficiary. However, in case of foreign tourists, higher amounts can be payable in cash.

He said in Allahabad region there are 89 post offices including all head post offices, where this service is available. Among these there are 18 post offices in Allahabad division, where the service of IMTS is made available. Allahabad includes services at Allahabad HO, Kutchery HO, Allahabad city, high court, Cavalry Line, GTB Nagar, Bahadurganj, CDA Pension, Athrampur, Bharwari, Handia, Karchhana, Manjhanpur, Phoolpur, Naini, Sirathu and Soraon post offices. The post offices have been directed to treat the payee as "most favoured customers", which ensures courteous and efficient service to them.

Courtesy : Times of India

Friday, June 22, 2012

डाक विभाग की इण्टरनेशनल मनी ट्रान्सफर सेवा : अब 12 की बजाय साल भर में 30 बार विदेशों से धन मंगाने की सुविधा

विदेशों से धन मंगाना सदैव से एक समस्या रही है पर डाक विभाग की इण्टरनेशनल मनी ट्रान्सफर सेवा ने इसे बेहद सुगम, आसान और त्वरित बना दिया है। इलाहाबाद परिक्षेत्र के डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि वेस्टर्न यूनियन फाइनेन्सियल सर्विसेज प्रा0 लि0 के सहयोग से आरम्भ इस सेवा के अन्तर्गत प्रेषक द्वारा विदेशों से भेजी जाने वाली धनराशि चन्द मिनटों में ही प्राप्तकर्ता द्वारा प्राप्त की जा सकती है। यह सेवा मूलतः उन प्रवासीय भारतीयों के लिए है जिनके परिवार वाले भारत में रहते हैं। इसके अन्तर्गत एक विशेष कोड जारी किया जाता है, जिसको बताकर प्राप्तकर्ता यहाँ भारत में उसका भुगतान आसानी से ले सकता है।

डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि इस सेवा के तहत एक कैलेण्डर वर्ष में पहले एक व्यक्ति द्वारा मात्र 12 बार धन विदेशों से मंगाया जा सकता था, जिसे कि जून 2012 से बढ़ाकर 30 कर दिया गया हैं। इससे इस सेवा के तहत धन मंगाने की आमद में काफी वृद्धि होने की संभावना हैं। इस सेवा में मात्र विदेशों से धन मंगाने की सुविधा है, विदेशों को धन भेजने की नहीं। फिलहाल इलाहाबाद में हर माह लगभग 500 लोग आई0एम0टी0एस0 के माध्यम से विभिन्न देशों से धन मंगा रहे हैं। वर्ष 2011 में जहाँ 6253 बार डाकघरों से धन मंगाया गया, वहीं इस वर्ष माह मई तक 2198 बार धन मंगाया जा चुका हैं।

गौरतलब है कि इस सेवा के तहत एक बार में मंगायी गयी राशि 2500 यू0एस0 डालर से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। इसमें 50 हजार रूपये तक की धनराशि नकद एवं उससे ज्यादा धनराशि चेक/डिमाण्ड ड्राफ्ट के द्वारा दी जाती है। इस सेवा का उपयोग मात्र व्यक्तिगत उपयोग के लिए किया जा सकता है न कि किसी प्रकार के व्यवसायी उपयोग के लिए। इसी कारण इसका भुगतान मात्र व्यक्ति को किया जा सकता है, किसी फर्म, कम्पनी, ट्रस्ट, सोसाइटी को नहीं। श्री यादव ने बताया कि डाकघर में बिना असुविधा के प्राप्तकर्ता को धन प्राप्त होता है। इसके लिए उसे मात्र एक विशेष टी0आर0एम0 फार्म भरना पड़ता है और कुछ चुनिन्दा पहचान पत्र जैसे-पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेन्स, वोटर कार्ड, पैन कार्ड, राशन कार्ड, केन्द्र-राज्य कर्मचारियों के पहचान पत्र इत्यादि प्रस्तुत करना पड़ता है।

डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि इलाहाबाद परिक्षेत्र के सभी प्रधान डाकघरों सहित कुल 89 डाकघरों में यह सेवा उपलब्ध है। इनमें इलाहाबाद में कुल 18 डाकघरों में इण्टरनेशलन मनी ट्रान्सफर सेवा की विशेष सुविधा उपलब्ध करायी गयी हैं, जिनमें इलाहाबाद प्रधान डाकघर, कचेहरी प्रधान डाकघर, इलाहाबाद सिटी डाकघर, हाईकोर्ट डाकघर, केवेलरी लाइन्स, जीटीबी नगर, दारागंज, बहादुरगंज, सीडीए पेंन्शन, अटरामपुर, भरवारी, हंडिया, करछना, मन्झनपुर, फूलपुर, नैनी, सिराथू एवं सोरांव डाकघर शामिल हैं।

(साभार : दैनिक जागरण अख़बार में प्रकाशित समाचार)

Wednesday, June 20, 2012

Direct Post : Postal department offers alternate route to candidates

ALLAHABAD: Offering some respite to candidates contesting municipal elections, the postal department has provided a unique alternative to the candidates. As it will not be possible for candidates to reach each and every house in his /her ward and also following restrictions on processions and road shows, the scheme entitled 'Direct Post Scheme', offers to deliver pamphlets of candidates in any area of choice.

As per the scheme, candidates and parties can hand over their election pamphlets to the post office where the postman would then deliver it to all the houses in the area specified by them. The cost is a modest Rs 1.50 per pamphlet, but it is accompanied by a rider that the number of such leaflets and pamphlets should not be less than 1,000.

Giving this information director postal services, Allahabad region, Krishna Kumar Yadav said that with increasing commercial activity, the need for direct advertising of their products and services by the business organisations is growing. Direct Post is the un-addressed component of Direct Mail, and would comprise of un-addressed postal articles like letters, cards, brochures, questionnaires, pamphlets, samples, promotional items like CD's/floppies and Cassettes etc, coupons, posters, mailers or any other form of printed communication that is not prohibited by the Indian Post Office Act 1898 or Indian Post Office Rules 1933.

To avail the Direct Post scheme the organisation or the individual would have to give at least 1,000 articles. For the local distribution of articles, the India Post would charge Rs. 1.50 per articles for the first 20 grams, while Rs 2 per article for distribution anywhere in the country.However, for every additional 20 grams or part thereof both local and inter-city articles would be charged Rs. 1 extra. The India Post would not accept articles which exceed the length and width of an A3 size paper. Articles posted as Direct Post' should not bear any address or name and the same would be accepted only by the designated post offices and not in a letter box.

Yadav said that the article would certainly have more credibility, if the same is distributed at home by the postman, unlike it being distributed by a hired person on the roadside. Even in this scheme the senders of Direct Post can specify the numbers and areas, in which the sender wishes the Direct Post articles to be distributed. Besides, the department would also inform the sender that the articles handed over by him had been delivered according to his instructions.

Courtesy : Times of India

Monday, June 18, 2012

अब नेताओं के संदेश भी लायेगा डाकिया

वक़्त के साथ भारतीय डाक विभाग ने तमाम योजनायें लागू की हैं, उन्हीं में से एक है- 'डायरेक्ट पोस्ट'. डायरेक्ट पोस्ट के तहत बिना पता लिखी डाक को लक्षित जनता के दरबाजे तक पहुँचाया जाता है. भारतीय डाक विभाग की वेबसईट के अनुसार इस सेवा का उपयोग विभिन्न वर्ग के लोग कर सकते हैं, जिनमें राजनैतिक दल भी शामिल हैं. ऐसे में यदि भाजपा को वोट दें, साइकिल पर मुहर लगाएँ या कांग्रेस का हाथ आपके साथ, ऐसे नारे लिखे पर्चे या अपीलें लेकर डाकिया आपके घर पहुँचे तो हैरान होने की जरुरत नही । दरअसल अब नेताओं की बातें आप तक पहुँचाना उसकी नौकरी में शामिल हो गया है । डाक विभाग यह काम मुफ्त में नही बल्कि व्यावसायिक नजरिये से पैसे लेकर करता है । ऐसी ही सेवाएँ प्रचार चाहने वाले अन्य कार्य-क्षेत्रों को भी दी जा रही हैं.

इसके तहत राजनैतिक दलों ही नही उत्पादन, निर्माण और सेवा क्षेत्र के निजी या सरकारी संस्थान भी प्रचार के लिए इसका सहारा ले सकते हैं । मसलन किसी कम्पनी को अपने उत्पादों की खासियत उपभोक्ताओं तक पहुंचानी या फिर कोई धार्मिक-समाजिक संस्था अपनी बात लोगों तक पहुँचाना चाहती है तो उसके लिए भी डायरेक्ट पोस्ट सेवा के द्वार खुले है । इसके जरिये पर्चे, प्रचार, साहित्य, अपीलें ही नहीं सीडी, कैसेट और कम्प्यूटर फ्लापी भी मनचाहे क्षेत्रों में लोगों तक पहुँचाने का दायित्व डाक विभाग लेता है. इस सेवा का लाभ लेने से पहले सम्बन्धित संस्थान या व्यक्ति को कुछ शर्तों का पालन सुनिश्चित करना होगा। जैसे कि भेजने वाला निश्चित पते पर सामग्री नही भेज सकता । बस उसे इतनी छूट होगी कि वह क्षेत्र निर्धारित कर दे। वही सामग्री स्वीकार की जायेगी जो इंडियन आफिस एक्ट-1898 और इंडियन पोस्ट आफिस रुल्स 1933 में निषिद्ध नहीं की गयी है । इस सेवा में विभाग एक हजार से कम संख्या में सामग्री स्वीकार नहीं करेगा । एक जिले में अर्थात स्थानीय वितरण कार्य के लिए डेढ रुपये प्रति नग और एनी जगहों के लिए 2 रूपये प्रति 20 ग्राम की दर से शुल्क वसूला जायेगा । 20 ग्राम से अधिक वजन होने पर प्रति 20 ग्राम तक 1 रूपये ज्यादा चार्ज देने होंगें. शर्त यह भी है कि सामग्री का आकार ए-3 से अधिक न हो।

Saturday, June 16, 2012

तू पूरा जादूगर है डाकिया

रंग-बिरंगे खतों को झोले से
निकाल कर देता है
तू पूरा जादूगर है डाकिया

तू जानता है तेरी
जरा सी लापरवाही
रिश्तों को तोड़ सकती है
मुद्दतों तक किसी का खत
तेरे झोले से नहीं निकलना
तू उसकी मौत
की आहट जान
लेता है डाकिया

मैं जानता हूं जबसे
मोबाइल चल गया है
बहुत से घरों में तेरा
आना-जाना छुट गया है
उस छुटी हुई जगह में
यादों की पुट्टी भरी दुई

डाकिया
तूने प्रेम पत्रों को
परिणय के बंधन तक
पहुँचते देखा है
तू बहुत सी प्रेम गाथाओं
का मौन गवाह है
ईक दूत के रुप में
तेरी भूमिका किसी
महानायक से कम तो नही
माना कि खुशखबरी लाने पर
किसी ने राजाओं की तरह
अपने गले का हार तुझे तोड़
कर नहीं दिया पर वो एहसान मंद हो
ये एहसान भी कम तो नहीं

डाकिया
शहर फैलते जा रहे है
झोले खाली ही रहते है
लोग खत से हाल चाल
नहीं लेते
बदलते वक्त की चाल से
डाकिया हार ना जाये
वो हारा तो कई जिंदगी
भी हार सकती है
तू नहीं बल्कि ईक पूरा
इतिहास हार जायेगा
वो भी उन चंद पूंजीपति
टेलीकाम कंपनियों से
जिनका खुद का कोई
इतिहास नहीं।

इस इतिहास को बचाने के लिए
कुछ खत लिखो
खत तुम्हें भी ऐतिहासिक
बनाते हैं
वो सम्बंधों के मौन गवाह है
खत किसी भी प्रलोभन में
अपने बयान नहीं बदलेगे
वो हवा से उड़के
तुम्हारे पैरो में गिर भी जाये
तो भी गर्व से भरे ही रहेंगे
उन्हें तुमनतमस्तकसमझने की
भूल मत करना !!

--आलोक तिवारी
रत्ना निवास, पाठक वार्ड, कटनी (मध्य प्रदेश)

Friday, June 8, 2012

कैसे बना कबूतर डाकिया?

पुराने समय में ही नहीं, बल्कि 19 वीं सदी की शुरुआत में होने वाले पहले विश्वयुद्ध तक कबूतर से संदेश भेजा जाता था। कबूतरों में भी होमिंग प्रजाति इसके लिए विशेष रूप से जानी जाती थी। होमिंग प्रजाति के कबूतरों की विशेषता थी कि वे उन्हें एक जगह से अगर किसी जगह के लिए भेजा जाता तो वे अपना काम करने के बाद वापस लौटकर अपनी जगह आते थे। इससे संदेश पहुंच जाने की पुष्टि भी हो जाती थी।

बताया जाता है कि होमिंग प्रजाति के कबूतर अपनी जगह से 1600 किमी आगे उड़कर जाने पर भी रास्ता भटके बिना वापस लौट आते थे। उनके उड़ने की रफ्तार भी 60 मील प्रति घंटा होती थी, जोकि संदेश एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के लिए पर्याप्त थी।

पक्षी-विज्ञानी बताते हैं कि ये कबूतर सूर्य की दिशा, गंध और पृथ्वी के चुम्बकत्व से वापस लौटने की दिशा तय करते थे। टेलीग्राफ, टेलीफोन और संदेश पहुंचाने की नई व्यवस्थाओं के साथ कबूतर संदेश भेजना खत्म हो गया।

Tuesday, June 5, 2012

डाकिया का आगमन

अब कम ही दिखाई देता है डाकिया
जो रोज-रोज आता था घंटी बजाता था
ढेरों चिट्ठियां बिखेर जाता था
घर-आंगन में अब कम ही दिखाई
देता है डाकिया

उसका आगमन हमारे अरमानों,
खुशियों का आगमन था
उसका आगमन दोस्त-रिश्तेदारों की
खबरों का आगमन था,
उसका आगमन बिटिया की चिट्ठी
उसके सुख-दुख की खबर होती थी,
उसका आगमन बेटे की चिट्ठी होती थी
जो दूर शहर में पढ़ता था
उसका आगमन मां-बाबा की
खुशियों का आगमन था
जो बेटे-बेटियों की चिट्ठियों से
खुश हो लेते थे
उसका आगमन भाई-बहन का
प्यार होता था
उसका आगमन बेटे की नौकरी
लगने की खबर होती थी
उसका आगमन होती थी
होली, दिवाली, ईद की शुभकामनाएं
पर अब कम ही दिखाई देता है
डाकिया

मेरी उम्र के साथ बुढ़ा गया लगता है
डाकिया
बुढ़ा गई लगती हैं भावनाएं-संवेदनाएं
तभी तो अब कम ही दिखाई देता है
डाकिया
बारिश की फुहार की तरह
आज भी जब कभी कर जाता है
डाकिया

चिट्ठी-पत्री की फुहार घर-आंगन में
तो माटी की सौंधी गंध घुल जाती है
वातावरण में हो जाता है तरोताज़ा तन-मन
अब कम ही दिखाई देता है
डाकिया
जो रोज-रोज आता था घंटी बजाता था
ढेरों चिट्ठियां बिखेर जाता था
घर-आंगन में।

साभार

Saturday, June 2, 2012

डाक-टिकट पर आपकी खूबसूरत तस्वीर : माई स्टैम्प


भारतीय डाक विभाग डाक-टिकटों के क्षेत्र में नित नए और अनूठे प्रयोग कर रहा है. पिछले वर्षों में जहाँ चन्दन, गुलाब व जूही की सुगंध से सुवासित खुशबूदार डाक-टिकट और हालमार्क के साथ मिलकर सोने के डाक टिकट जारी किये गए, वहीँ अब 'माई स्टांप' या 'पर्सनालाईजड स्टैम्प' के साथ डाक-टिकट पर कोई व्यक्ति अपनी भी तस्वीर लगा सकता है. फ़िलहाल ये 17 डाक-टिकटों के साथ उपलब्ध हैं. इनमें ताजमहल, पंचतंत्र, एयरो फ्लाईट, स्टीम इंजन, वाइल्ड लाइफ डाक-टिकटों के साथ 12 राशियों के डाक टिकट भी उपलब्ध हैं.

दुनिया के कई देशों में 'माई स्टाम्प' सुविधा पहले से ही लागू है, पर भारत में पहली बार इसे भारतीय डाक विभाग द्वारा वर्ष 2000 में कोलकाता में 'इंदिपेक्स एशियाना' के आयोजन के दौरान जारी किया गया था. पर उस समय यह उतनी लोकप्रिय न हो सकी. पिछले वर्ष नई दिल्ली में विश्व डाक टिकट प्रदर्शनी (12-18 फरवरी 2011 ) के आयोजन के दौरान इसे पुन: लांच किया गया और लोगों ने इसे हाथों-हाथ लिया. नतीजन देखते ही देखते हजारों लोगों ने डाक टिकटों के साथ अपनी तस्वीर लगाकर इसका लुत्फ़ उठाया. उत्तर प्रदेश में 17 -19 दिसंबर, 2011 के दौरान लखनऊ में आयोजित राज्य स्तरीय डाक टिकट प्रदर्शनी में इसे जारी किया गया और अभी तक अकेले उत्तर प्रदेश में लगभग 5000 लोग इसे जारी करा चुके हैं, जिनमें से अधिकतर लोगों ने ताजमहल के साथ अपनी तस्वीर लगवानी पसंद की.

इस सेवा का लाभ उठाने के लिए अपने शहर में स्थित फिलाटेलिक ब्यूरो में पंजीकरण कराना होता है. एक फार्म भरकर उसके साथ अपनी फोटो और 300 /-जमा करने होते हैं. एक शीट में कुल 12 डाक-टिकटों के साथ फोटो लगाई जा सकती है. इसके लिए आप अपनी अच्छी तस्वीर डाक विभाग को दे सकते हैं, जो उसे स्कैन करके आपका खूबसूरत 'माई स्टांप' बना देगा. यदि कोई तत्काल भी फोटो खिंचवाना चाहे तो उसके लिए भी प्रबंध किया गया है. 'माई स्टैम्प' को ही 'पर्सनालाईजड स्टैम्प' भी कहा जाता है. इस पर सिर्फ जीवित व्यक्तियों की ही तस्वीर लगाई जा सकती है. सम्बंधित व्यक्ति को फिलाटेलिक ब्यूरो में व्यक्तिगत रूप से जाना पड़ता है, यदि किसी कारणवश न जा सके तो सम्बंधित संदेशवाहक से अपना फोटो युक्त परिचय पत्र भेजना पड़ता है.

तो अब देर किस बात की, किसी को उपहार देने का इससे नायब तरीका शायद ही हो. इसके लिए जेब भी ज्यादा नहीं ढीली करनी पड़ेगी, मात्र 300 रूपये में 12 डाक-टिकटों के साथ आपकी खूबसूरत तस्वीर. अब आप इसे चाहें अपने परिवारजनों को दें, मित्रों को या फिर अपने प्रेमी-प्रेमिका को. डाक-टिकट पर आप अपनों की तस्वीर भी छपवा कर उसे भेज सकते हैं. मतलब, आप किसी से बेशुमार प्यार करते हैं, तो इस प्यार को बेशुमार दिखाने का भी मौका है. पांच रुपए के डाक-टिकट, जिस पर आपकी तस्वीर होगी, वह देशभर में कहीं भी भेजी जा सकती है.

'माई स्टाम्प' पर सिर्फ आप अपनी तस्वीर ही नहीं देखते, बल्कि वक़्त की नजाकत के अनुसार इसे विभिन्न डाक-टिकटों के साथ देख सकते हैं. मसलन, प्रेम को दर्शाने के लिए ताजमहल, बच्चों के लिए पञ्चतंत्र, एडवेंचर के लिए वाइल्ड लाइफ से जुड़ा डाक टिकट या फिर एयरो फ्लाईट और स्टीम इंजन. यही नहीं अपनी राशि के अनुरूप भी डाक-टिकट पसंद कर उस पर अपनी फोटो लगवा सकते हैं!!

           (चित्र में : माई स्टैम्प के तहत ताजमहल के साथ कृष्ण कुमार यादव की तस्वीर)


- कृष्ण कुमार यादव
निदेशक डाक सेवाएँ, इलाहबाद परिक्षेत्र, इलाहबाद-211001

एक मूक और बधिर डाकिया की कहानी

उत्तर-पूर्वी चीन के ल्याओ निन्ग प्रांत के पहाड़ क्षेत्र में एक मूक और बधिर डाकिया है, वह नहीं सुन सकता और नहीं कह सकता, हर दिन वह अकेला मोटरसाइकिल चलाकर पहाड़ क्षेत्र के पांच हजार से अधिक परिवारों को पत्र,अखबर और पार्सल भेजता है, प्रति साल में वह 25 हज़ार कि.मी.का रास्ता चलता है।

ह्वांग वेई हर दिन लोन्ग थान कस्बे के लोगों को सेवा देता है। लोन्ग थान कस्बे में 120 से अधिक गांव हैं, ये गांव 300 से अधिक वर्ग किलोमीटर में स्थित हैं, बीते दस से अधिक सालों में ह्वांग वेई इस कस्बे में एकमात्र डाकिया है।

इस मूक और बधिर डाकिया का नाम है ह्वांग वेई, 37 साल की उम्र है। गांव में रहने वाली सुश्री वांग को अखबार चाहिए, इसलिए ह्वांग वेई सुश्री वांग का स्थाई अतिथि बन गया है। सुश्री वांग ने कहा- हर बार वह हमारे पत्रों को ला सकता है, ठीक समय पर।

लोन्ग थान कस्बे के 60 प्रतिशत की गांव पहाड़ों में स्थित हैं, दूसरे 30 से अधिक प्रतिशत की गांव हालांकि मार्ग से बहुत दूर नहीं है, लेकिन इस क्षेत्र में दसियों खान स्टेशन हैं, हर पत्र भेजने के लिए दस से अधिक कि.मी. की दूरी चलने की जरूरत है।

वर्ष 2000 के जरवरी में 26 साल की उम्र वाला ह्वांग वेई डाकिया बन गया है, उसे यह काम बहुत पसंद है, इसलिए वह मेहनत से काम करता है, लोन्ग थान कस्बा पोस्ट ब्यूरो के प्रधान मा श्याओ पो ने कहा:

ह्वांग वेई से पहले डाकिया ने पत्र को हर व्यक्ति को नहीं दिया, डाकिया ने सब पत्रों को गांव समिति के दफ़्तर में रखा, लेकिन ह्वांग वेई खुद पत्र को हर लोग को देता है।

पत्रों को भेजने के अलावा, डाकिया पार्सल भेजता है, पार्सल में ये शामिल हैं कि जीवन उत्पादन और कृषि उत्पादन, इसलिए कुछ समय ह्वांग वेई को भारी पार्सल भेजना है, एक साल के 365 दिनों में ह्वांग वेई काम करता है। इस के प्रति ह्वांग वेई की मां ने कहा

देखो, उस के पास दो बड़ा थैला हैं, जिन में धुलाई चूर्ण,अंगूर मदिरा,बाल द्रव,साबुन और कीटनाशकदवा भी है।

मूक और बधिर लोग के रुप में ह्वांग वेई को काम करते हुए अधिक कठिनाई तोड़ना है, ह्वांग वेई के पास अपना उपाय है, ह्वां वेई की मां ने कहा

वह कह नहीं सकता, नहीं बुला सकता, इसलिए काम करते हए ह्वांग वेई एक बाँसुरी का प्रयोग करता है, बाँसुरी की आवाज सुनकर लोगों को ह्वांग वेई आ रहा है मालूम है।

उपभोगताओं को अधिक सुविधा देने के लिए ह्वांग वेई एक विशेष मानचित्र लेता है, जिस में हर परिवार का पता,नाम और कैसे जाने की खबर रिखा जाता है।

पहाड़ों में रहने वालों के लिए पत्र एक प्रमुख बाहर विश्व के साथ संपर्क रकने वाला साधन है, पहाड़ों ने रहने वालों को पोस्ट स्टेशन के लिए विशेष भावना है। त्यौहारों के दौरान पहाड़ों के बाहर रहने वाले पहाड़ों में रहने वालों को पत्र भेजते हैं, इसलिए त्यौहार के दौरान ह्वांग वेई बहुत व्यस्त है। छ्यान चिन ज़ी गांव के श्यू श्यांग छै ने कहा: हमारी गांव में कई लोगों को समान नाम है, उदाहरण के लिए कई लोगों का नाम वांग श्वी है, और कई लोगों का नाम सून शी श्वै है, इसलिए ह्वांग वेई के काम के लिए बहुत कठिनाई है।

ह्वांग वेई संजीदगी से काम करता है, एक ग्रीष्म में ह्वांग वेई एक कंपनी को पत्र भेजने गया, लेकिन पत्र लेने वाला कंपनी में नहीं था,उस ने पत्र लेने वाले की प्रतीक्षा की। चीज़ भेजने के अलावा ह्वांग वेई किसान दोस्तों के लिए मौखिक पत्र भेजता है। छ्यान चिन ज़ी गांव में रहने वाले चाओ योन्ग बिन ने कहा:

ह्वांग वेई अकसर हमारे को मदद करता है, वह हमारे लिए वे चीज़ भेजता है जो हमें चाहिए।

बीते 12 सालों में ह्वांग वेई पत्र भेजने के लिए 2 लाख 50 हजार कि.मी.का मार्ग चला, और कुल 60 हज़ार पत्रों को भेजा है, पहाड़ों में रहने वाले ह्वांग वेई की प्रशंसा करते हैं।

साभार



Tuesday, May 8, 2012

प्यार का पहला ख़त लिखने में वक़्त तो लगता है


(पत्र-लेखन की विधा काफी प्राचीन है. जब दिल की बात होठों पर न आ सके तो फिर पत्र ही सहारा रह जाता है. संचार के क्षेत्र में नित नई तकनीकें आ रही हैं, पर चिठ्ठियों के साथ ही संवाद के कोमल पक्ष भी चले गये हैं। ऐसे में लोगों के मन की थाह भी लगाना मुश्किल हो गया है. ऐसे में कनु जी के ब्लॉग 'परवाज़' पर लिखी पोस्ट 'प्यार का पहला ख़त लिखने में वक़्त तो लगता है; बड़ी कोमलत के साथ मन की गहराइयों में पैठ कर जाता है. आप भी इन भावनाओं को महसूस करें-

फ़ोन की लम्बी लम्बी बातें कभी वो सुकून नहीं दे सकती जो चिट्ठी के चंद शब्द देते हैं .तुम्हे कभी लिखने का शौक नहीं था और पढने का भी नहीं तो मेरी न जाने कितनी चिट्ठियां मन की मन में रह गई न उन्हें कागज़ मिले न स्याही .तुम्हारे छोटे छोटे मेसेज भी मैं कितनी बार पढ़ती थी तुमने सोचा भी न होगा ,ये लिखते टाइम तुमने ये सोचा होगा ,ये गाना अपने मन में गुनगुनाया होगा शायद परिचित सी मुस्कराहट तुम्हारे होठों पर होगी जब वो सब यादें आती है तो बड़ा सुकून सा मिलता है ..और एक ही कसक रह जाती है काश तुमने कुछ चिट्ठियां भी लिखी होती मुझे तो ये सूरज जो कभी कभी अकेले डूब जाता है,ये चाँद जो रात में हमें मुस्कुराते न देखकर उदास हो जाता है तुम्हारे पास होने पर भी जब तुम्हारी यादें आ कर मेरे सरहाने बेठ जाती हैं इन सबको आसरा मिल जाता ..ये अकेलापन भी इतना अकेला न महसूस करता ....अब तो सोचती हु तुमने न लिखी तो में कुछ चिट्ठियां लिख लू पर जिस तरह तुम खो रहे हो दुनिया की भीड़ में अब तो तुम्हारे दिल का सही सही पता भी खोने लगा है बड़ा डर सा लगता है की मेरी ये चिट्ठियां तुम तक पहुंचेगी भी या नहीं ? तुम तक पहुँच भी गई गई तो जानती हु तुम पढोगे नहीं .....पर फिर भी मेरी विरासत रहेगी किसी प्यार करने वाले के लिए ..

क्या कहते हो ? लिखू या रहने दू।

तुम्हे चिट्ठियां लिखने की तमन्ना होती है कई बार
पर तुम्हारे दिल की तरह तुम्हारे घर का पता भी
पिछली राहों पर छोड़ दिया कहीं भटकता सा
अब बस कुछ छोटी छोटी यादों की चिड़िया हैं
जो अकेले में कंधे पर आ बैठती है
उनके साथ तुम्हारा नाम आ जाता है होठों पर
और कुछ देर उन चिड़ियों के साथ खेलकर
तुम्हारा नाम भी फुर्र हो जाता है
अगली बार फिर मिलने का वादा करके......
पर सब जानते है कुछ चिट्ठियां कभी लिखी नहीं जाती
कुछ नाम कभी ढले नहीं जाते शब्दों में
कुछ लोग बस याद बनने के लिए ही आते है जिंदगी में
और कुछ वादें अधूरे ही रहे तो अच्छा है.....

आज ये ग़ज़ल सुबह से गुनगुना रही हू....प्यार का पहला ख़त लिखने में वक़्त तो लगता है !!

Tuesday, April 24, 2012

अक्षय तृतीया के अवसर पर डाकघरों से छ: प्रतिशत छूट पर सोने के सिक्के

सोने के सिक्कों के लिए अब सुनार के पास नहीं, बल्कि डाक-घर पहुंचिए। भारतीय डाक विभाग ने अक्षय तृतीया के अवसर पर सोने के सिक्‍के पर छ: प्रतिशत छूट देने की घोषणा की है। अक्षय तृतीया 24 अप्रैल को पड़ रही है। इसे वर्ष के सबसे शुभ दिनों में से एक माना जाता है। अक्षय तृतीया अक्‍खा तीज के नाम से भी जानी जाती है। लोग इस दिन सोना खरीदना शुभ मानते है और घरों में धन की देवी लक्ष्‍मी की पूजा करते है। डाक-घरों में ये सोने के सिक्‍के 0.5 ग्राम, 1 ग्राम, 5 ग्राम, 8 ग्राम, 10 ग्राम, 20 ग्राम,50 ग्राम वज़न में 99.99 शुद्धता के साथ 24 कैरेट में मिलेंगे।

गौरतलब है कि वर्ल्‍ड गोल्‍ड काउंसिल और रिलांयस मनी इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर लिमिटेड के साथ मिलकर भारतीय डाक सोने के सिक्‍कों की बिक्री कर रहा है। वालकाम्‍बी, स्‍वीटजरलैंड में निर्मित सोने के सिक्‍कों की बिक्री अक्‍तूबर, 2008 में देशभर के कुछ डाकघरों में शुरू की गई थी। आज देश के 800 से ज्‍यादा डाकघरों में सोने के सिक्‍के उपलब्‍ध है।

Friday, April 20, 2012

ये ख़त है




ये ख़त है
जो कभी
तुमने लिखे थे
मुझको.

उसका अक्षर-अक्षर
तेरा अक्श बन
उभर आता है
आज भी
मेरे जेहन में
चाहे-अनचाहे.

क्योंकि
इन खतों में हैं
कुछ हँसते,
खिल-खिलाते पल,
कुछ सिसकते,
सहलाते पल.
बांटा था जिन्हें
हमने
आपस में
मिल-बैठ कर.

इन पलों में
आज भी
सिमटी है
तुमसे मिलने की चाह,
न मिल पाने का गम
दूर रहकर भी
पास होने का भ्रम
जो पलता रहा है,
बढ़ता रहा है
सदा
साथ-साथ

तेज होती
धडकनों के साथ
पलती है
प्यार की तपिश
जो देती है
झुलसने का अहसास.

ये सब सिलवटें हैं
शब्दों के घरौंदे
घरौंदा
जो घर हो गया है
बीती बातों का,
आशाओं का,
अरमानों का,
धड़कनों में छिपी
विवशता का,
बैचैनी का
टूटते-बनते रिश्तों का.

मेरे-तुम्हारे होने का
एक-दूसरे से अलग
एक-दूसरे के साथ
जीवनपर्यंत
एक सिलसिला बनकर.

- राजीव पुष्पराज
rajivpushpraj@gmail.com

Friday, April 13, 2012

जौनपुर प्रधान डाकघर में सोने के सिक्कों की बिक्री का डाक-निदेशक के.के. यादव ने किया उद्घाटन

जौनपुर : प्रधान डाकघर में शुक्रवार,13 अप्रैल, 2012 को सोने के सिक्कों की बिक्री का शुभारम्भ इलाहाबद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ कृष्ण कुमार यादव ने किया। इस दौरान उन्होंने पहले, दूसरे ग्राहक देवेश चन्द उपाध्याय व अच्छेलाल गुप्ता को सोने का सिक्का सौंपकर बिक्री का शुभारम्भ किया।

डाक निदेशक श्री यादव ने कहा कि इलाहाबाद परिक्षेत्र में वर्तमान में इलाहाबाद प्रधान डाकघर, कचहरी प्रधान डाकघर, वाराणसी प्रधान डाकघर, गाजीपुर, हंडिया, वाराणसी कैण्ट, फूलपुर डाकघर में सोने के सिक्कों की बिक्री की जा रही है। लोकप्रियता को देखते हुए जौनपुर में भी इसकी शुरुआत की जा रही है। 24 कैरेट शुद्धता वाले सोने के सिक्कों पर डाक विभाग का लोगो अंकित है। जो सिक्के वैलकैम्बी स्विटरजरलैण्ड द्वारा प्रमाणित है। अक्षय तृतीया के पर्व को देखते हुए 30 जून तक इन सिक्कों की खरीद पर छह प्रतिशत की विशेष छूट दी जायेगी। उन्होंने बताया कि जौनपुर के प्रधान डाकघर का चयन कोर बैकिंग सर्विस के तहत पहले फेस में किया गया है। जिसके तहत आने वाले समय में उपभोक्ता डाक विभाग के एटीएम से पैसा निकाल सकते है। जिले के 55 डिपार्टमेंटल डाकघरों को कम्प्यूटर से जोड़ा जा रहा है।

डाक अधीक्षक सीबी सिंह ने बताया कि डाकघरों में सोने के सिक्कों की बिक्री रिलायन्स के साथ करार के तहत की जा रही है। डाकघर में 0.5, एक, पांच, आठ, 10, 20, व 50 ग्राम तक सोने के सिक्के मिल रहे है।

इसके पहले डाक निदेशक ने पूरे कार्यालय का निरीक्षण किया। इस मौके पर उन्होंने सभी अधिकारियों व कर्मचारियों के साथ समीक्षा बैठक की। जिसमें उन्होंने डाक विभाग के चलने वाली विभिन्न योजनाओं की जिले में स्थिति जानी। इसके साथ ही उन्होंने कर्मचारियों को काम में लापरवाही न बरतने का निर्देश भी दिया। उन्होंने पोस्टमैनो से कार्य को कुशलता से करने का निर्देश दिया।

इस मौके पर पोस्ट मास्टर केएन यादव, सहायक अधीक्षक विनय कुमार यादव, पीएल गुप्ता, बीके शर्मा, परिवाद निरीक्षक अजय कुमार, डाक निरीक्षक एके शुक्ला, विपिन यादव, तरुण अग्रवाल, स्पीड पोस्ट मैनेजर लालचन्द्र मिश्र, विष्णु मिश्र, श्रीकांत कुमार, दिनेश त्रिवेदी आदि मौजूद रहे।

साभार : जागरण

Thursday, April 12, 2012

डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव ने किया गाजीपुर प्रधान डाकघर में सोने के सिक्कों की बिक्री का उद्घाटन

गाजीपुर : प्रधान डाकघर में सोने के सिक्कों की बिक्री गुरुवार, 12 अप्रैल, 2012 से शुरू हो गयी। इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक कृष्ण कुमार यादव ने प्रधान डाकघर में सोने के सिक्कों की बिक्री का उद्घाटन विधिवत फीता काटकर किया। प्रथम ग्राहक विजय शंकर को सोने का सिक्का देकर बिक्री का शुभारम्भ किया।

उन्होंने कहा कि इलाहाबाद परिक्षेत्र में वर्तमान में इलाहाबाद, कचेहरी, वाराणसी प्रधान डाकघर में सोने के सिक्कों की बिक्री हो रही है। इसकी लोकप्रियता के मद्देनजर अब इलाहाबाद परिक्षेत्र में गाजीपुर, वाराणसी कैण्ट, भदोही, चंदौली, जौनपुर, मिर्जापुर, ओबरा, शक्तिनगर, फूलपुर, हण्डिया सहित 10 डाकघरों में बिक्री शुरू की जा रही है। कहा कि चयनित डाकघरों में 24 कैरेट (99.99) शुद्धता वाले इन सोने के सिक्कों पर डाक विभाग लोगो अंकित है। सिक्के वैलकैम्बी स्विटजरलैण्ड द्वारा प्रमाणित है। इन सिक्कों की खासियत है कि इनमें किसी तरह की टेम्परिंग नहीं की जा सकती। अक्षय तृतीया पर्व पर 30 जून तक सिक्कों की खरीद पर छह प्रतिशत की विशेष छूट दी जायेगी। डाक अधीक्षक एमपी मिश्र ने बताया कि डाकघरों में सोने के सिक्कों की बिक्री रिलायंस के साथ करार के तहत की जा रही है। चयनित डाकघरों में 0.5 ग्राम, एक ग्राम, पांच, 10, 20 व 50 ग्राम के सोने के सिक्के बिक्री के लिए उपलब्ध होंगे। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि जिला सहकारी बैंक के पूर्व चेयरमैन अरुण सिंह, सहायक अधीक्षक आरएन यादव, सहायक अधीक्षक प्रभाकर त्रिपाठी, विनय कुमार यादव, आरसी राम, संजय गुप्ता, पीके पाठक, मारुत नंदन, जेएस यादव, बब्बन राय आदि शामिल रहे।

-साभार : नई खबर