Tuesday, June 14, 2011

डाक विभाग करेगा फैब इंडिया के उत्पादों की बिक्री

फैब इंडिया के अपने मुख्य स्टोर पर भारतीय डाक का एक अलग काउंटर खोला है जहां से ग्राहक देश ही नहीं, विदेश तक में स्टोर से खरीदा गया माल भेज सकते हैं। यह भारतीय डाक और फैब इंडिया के बीच पहली पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप की शुरूआत की है। 14 जून, 2011, मंगलावर को नई दिल्ली में ग्रेटर कैलाश स्थित स्टोर पर इस काउंटर का संयुक्त रूप से उद्घाटन केंद्र सरकार में डाक विभाग की राधिका दुरईस्वामी और फेबइंडिया ओवरसीज़ प्रा. लिमिटेड के प्रबंध निदेशक विलियम बिसेल ने किया।
 
संयुक्त उद्यम के रूप में खोले गए इस काउंटर के माध्यम से भारतीय डाक ग्राहकों को फैब इंडिया के उत्पाद आसानी से खरीदने, पैक करने और भारत व विदेश में कहीं भी भेजने की सुविधा उपलब्ध कराएगा। डाक सर्कल कर्मचारी इस काउंटर पर उपलब्ध रहेंगे ताकि ग्राहकों को अपना कन्साइनमेंट बुक करने में सुविधा हो।
 
बता दें कि भारत के 58 शहरों में 140 और चार अंतरराष्ट्रीय स्टोरों के साथ फैब इंडिया ओवरसीज़ प्राइवेट लिमिटेड भारत का अकेला ऐसा रिटेल प्लेटफॉर्म है, जो ग्रामीण इलाकों में रहने वाले दस्तकारों द्वारा तैयार की गई सामग्री उपलब्ध कराता है।

Monday, June 13, 2011

अंडमान में उत्कृष्ट डाक कर्मियों का सम्मान


अंडमान निकोबार द्वीप समूह में डाक विभाग द्वारा 09 जून 2011 को पोर्टब्लेयर के मेगापोस्ट नेस्ट रिसोर्ट में वित्तीय वर्ष 2010-11 में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए डाक-कर्मियों और अधिक राजस्व देने हेतु महत्वपूर्ण संस्थानों के प्रमुखों को सम्मानित किया गया. इस समारोह के मुख्य अतिथि अंडमान-निकोबार के प्रधान वन सचिव श्री एस.एस. चौधरी तथा अध्यक्षता अंडमान निकोबार द्वीप समूह के डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव द्वारा किया गया। विशिष्ट अतिथि के रूप में इंदिरा गांधी मुक्त विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय निदेशक, डाॅ. एस. श्रीनिवास उपस्थित थे। इस अवसर पर 25 डाक कर्मचारियों को उत्कृष्टता सम्मान तथा चार संस्थानों को स्मृति चिन्हों से नवाजा गया।

डाक-कर्मियों को सम्मानित करते हुए मुख्य अतिथि प्रधान वन सचिव श्री एस.एस. चौधरी ने दूरदराज के द्वीपों तक विस्तृत डाक-सेवाओं की सराहना करते हुए डाक कर्मियों के समर्पित कार्यो की सराहना की और द्वीपों के लोगों की सेवा के प्रति प्रतिबद्धता के साथ निरंतर कार्य करते रहने के लिए उन्हें प्रोत्साहित किया । इस अवसर पर प्रतिष्ठित संस्थनों तथा व्यापारोन्मुख ग्राहकों को भी सम्मानित किया गया, जिनमें भारतीय स्टेट बैक, पोर्टब्लेयर के उप प्रबंधक तनमोय मंडल, वेतन एंव लेखा कार्यालय के निदेशक राजेश पूरी एवं एक्सिस बैक के प्रबंधक प्रकाश कुमार तथा डिगनाबाद निवासी रुबिन फर्नाडो शामिल थे ।


समारोह की अध्यक्षता करते हुए डाक सेवा निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने रोजमर्रा के जीवन में लोगों और व्यापार में डाक क्षेत्र की भूमिका तथा सामाजिक एंव अर्थिक विकास में इसके योगदान का उल्लेख किया। श्री यादव ने द्वीप-समूहों में संचालित तमाम डाक सेवाओं के बारे में भी बताया और बदलते दौर में डाक सेवाओं की बदलती भूमिका को रेखांकित किया.

विशिष्ट अतिथि के रूप में पधारे इग्नू के क्षेत्रीय निदेशक डाॅ एस श्रीनिवास ने अपने संबोधन में द्वीपों के अलग-अलग क्षेत्रों में स्थित डाक घरों द्वारा प्रदान की जा रही सेवाओं की गुणवता की चर्चां की और विभिन्न क्षेत्रों में अनुकरणीय सेवाओं के लिए पुरस्कार प्राप्त करने वाले डाक विभाग के सदस्यों को बधाई दी ।

इस अवसर पर डाक जीवन बीमा के क्षेत्र में मलाकोंडैया, स्टीफन फर्नाडीज, एम आर सरकार तो ग्रामीण डाक जीवन बीमा में उत्कृष्ट प्रदर्शन हेतु दुलाल बिश्वास, श्रीमती इन्दिरा देवी, प्रदीप पाॅल को सम्मानित किया गया. स्पीड पोस्ट में अधिकतम कारोबार के लिए कमल बिश्वास, श्रीमती गोरेती लकडा, श्रीमती लता को सम्मानित किया गया। सर्वाधिक बचत बैक खाते खोलने में योगदान देने के लिए एस. वेंकटस्वामी, सी एच यारन्ना तथा वी सी जाॅनी को पुरस्कृत किया गया। डाकघरों में टेक्नालाजी के सम्यक क्रियान्वयन के लिए वी वी एस सत्यानारायण, किशोर वर्मा तथा मिहिर कुमार पाॅल सम्मानित हुए. इसी प्रकार विभिन्न कैडरों के तहत भी पुरस्कार प्रदान किया गया। सुपरवाइजर वर्ग में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए पी नीलाचलम तथा श्रीमती एस जयरानी, डाक सहायक संवर्ग में के. एस. एन. मूर्ति, शंकर हालदार, श्रीमती शांता देब, डाकिया कैडर में ए. के. मंडल, एन करुणाकरण तथा ग्रुप-दी संवर्ग में श्रीमती रत्ना कुमारी, ग्रामीण डाक सेवक संवर्ग में साहुल हमीद तथा आर. एम. दास को पुरस्कृत किया गया. सर्वश्रेष्ठ बचत बैंक एजेंट के लिए डाक एजेंट श्रीमती कृष्णा जाना को भी सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर डाक परिवार के सदस्यों के अलावा तमाम गणमान्य नागरिक, मीडिया-प्रतिनिधि भी उपस्थित थे. सहायक डाक अधीक्षक ड़ी. मुर्मू ने उपस्थित जनों का का स्वागत किया, जबकि सहायक पोस्टमास्टर एम. गणपति ने आभार-ज्ञापन दिया !!
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The Department of Posts felicitated Postal Employees as well as Important Business Customers at a function organized at Megapode Nest , Port Blair on 9.6.2011. Mr. S.S Choudhury, Pr. Chief Conservator of Forests , A&N Islands was the Chief Guest on this auspicious occasion. Mr. Krishna Kumar Yadav, Director Postal Services, A&N Islands has presided over the function and Dr. S.Srinivas, Regional Director , IGNOU was the Guest of Honour.

Addressing the gathering on the occasion, Mr. S.S Choudhury , Pr. Chief Conservator of Forests , A&N Islands appreciated the dedication of the postal staff working in remote islands and encouraged them to work with even greater commitment towards serving the people of this Islands.

Mr. Krishna Kumar Yadav, Director Postal Services in his address described the role of the postal sector in peoples and businesses every day lives and its contribution to the social and economic development . He further said that emphasis will be given for creating more awareness among general public about the benefits of postal services. He urged the employees to be prepared to meet the challenges ahead due to the technology changes taking place every now and them. He also focused on some of the important achievements of the Department.

Dr. S. Srinivas, Regional Director, IGNOU also spoke about quality of services provided by the Post offices to the remotest corner of this Islands. and congratulated all for achieving the awards for showing exemplary services in various fields .

The Chief Guest, Mr. S.S Choudhury gave away prizes with the appreciation certificate to the Postal Employees & Postal Agents who achieved the maximum business during the year 2010-11 .On this occasion, the reputed Institutions / business oriented customers which had provided more business were also honored. Shri. Shantanu Gupta, Chief Manager SBI, Port Blair, Shri. Rajesh Puri , Director , Pay & Account Office, Shri. Prakash Kumar , Manager ,Axis Bank , Shri. Rubin Fernando R/o Dignabad were amongst them.

S/Shri. Malakondaiah, Stephen Fernandez, M.R Sarkar were awarded Ist, 2nd & 3rd prizes for procurement of Postal Life Insurance Business whereas Shri. Dulal Biswas, Smt. Indira Devi, Shri. Pradip Paul were awarded Ist, 2nd & 3rd prizes for procurement of Rural postal life insurance business on this occasion. For giving maximum business in Speed Post., Shri. Kamal Biswas, Smt. Goreti Lakra , Smt. Eswari Latha were felicitated whereas S/Shri. S. Venkataswamy, C.H Yarrana, V.C Johney were awarded for their contribution in opening of Saving Bank accounts. In technology field, Shri VVS Satyanarayana, Shri Kishore Verma and Shri Mihir Kr. Paul were also felicitated ,

Similarly, prizes were also given in various Cadres such as for best performances in Supervisory Category, Shri. P. Neelachalam & Smt. S Jayarani were selected. For PA Cadre , Shri K. S.N Murthy, Shri. Shankar Halder, Smt. Shanta Deb have got prizes whereas for Postman and Gr.D Cadre , Shri. A.K Mandal ,Shri. N. Karunakaran & Smt. Ratna Kumari were awarded . In GDS Category, S/Shri. Shahul Hameed & R.M Das were selected.. Smt. Krishna Jana , Postal Agent was also awarded for best Saving Bank agent.

Earlier Shri. D. Murmu, Asstt. Supdt ,Port Blair HO welcomed the gathering while the programme concluded with the vote of thanks by Shri.M.Ganapathy, Asstt. Postmaster ,Port Blair HO.


अब मोबाइल से जायेगा मनीआर्डर

भारतीय डाक वक़्त के साथ कदमताल की प्रक्रिया में नित नई-नई योजनायें आरंभ कर रहा है. टेक्नालाजी का बढ़ता प्रयोग डाक विभाग को और असरदार बना रहा है. इसी क्रम में 1 जून को डाक विभाग ने मोबाइल फोन पर एसएमएस के माध्यम से मनीआर्डर भेजने की योजना चंडीगढ़ में आरंभ की । इसका शुभारम्भ केंद्रीय गृह राज्य राज्य एवं सूचना प्रोद्योगिकी मंत्री गुरुदास कामत ने किया. योजना के तहत देश भर में मोबाइल से मनीआर्डर भेजे जा सकेंगे। फिलहाल यह योजना पंजाब-बिहार के 20 डाक घरों में शुरू की गई है।

गौरतलब है कि भारतीय डाक दुनिया का सबसे बड़ा डाक-नेटवर्क है। इसके तहत 9 करोड़ मनीआर्डर हर साल डाक द्वारा देशभर में भेजे जाते हैं। अभी तक ई-पोस्ट द्वारा पत्रों को पंख लग गए थे, अब मोबाइल फोन पर एसएमएस के माध्यम से मनीआर्डर भेजने से काफी सहूलियत हो जाएगी. इससे पहले डाक विभाग ने इंस्टेंट मनीआर्डर और इलेक्ट्रानिक मनीआर्डर सेवा भी आरंभ की है.

वाकई, डाक विभाग ने इस योजना से मनीआर्डर से पैसा पहुँचाने को गति दी है। भविष्य में इसे उन राज्यों में शुरु किया जाएगा, जहाँ से बड़ी संख्या में मनीआर्डर भेजे जाते हैं।

मोबाइल मनीआर्डर से जिस व्यक्ति को पैसा भेजना है उसका नाम-पता व मोबाइल नंबर डाकखाने में देना होगा। इसके बाद धनराशि का भुगतान करते ही यह सूचना एसएमएस के माध्यम से मनीआर्डर पाने वाले व संबंधित क्षेत्र के डाकघर को चली जाएगी। मनीआर्डर लेने वाला व्यक्ति उस डाकघर में जाकर या अपने घर पर धनराशि हासिल कर सकेगा। इससे 50 हजार तक राशि भेजी जा सकती है।

Friday, June 10, 2011

राष्ट्रीय लघु बचत निधि की व्यापक समीक्षा रिपोर्ट


राष्ट्रीय लघु बचत निधि (एनएसएसएफ) की व्यापक समीक्षा के लिए भारतीय रिजर्व बैंक की डिप्टी गवर्नर श्यामला गोपीनाथ के नेतृत्व में गठित समिति ने अपनी रिपोर्ट केंद्रीय वित्तमंत्री प्रणव मुखर्जी को 7 जून 2011 को सौंप दी. समिति ने अपनी रिपोर्ट में निम्नलिखित सिफारिशें की.

• समिति ने सभी लघु बचत योजनाओं, उन पर देय ब्याज, उनकी परिपक्वता अवधि एवं अन्य पहलुओं की जांच की.
• किसान विकास पत्र को रोकने एवं अन्य योजनाओं में से कुछ में उचित संशोधन करके उन्हें जारी रखना.
• मासिक आय योजना एवं राष्ट्रीय बचत प्रमाण-पत्र की परिपक्वता अवधि 6 वर्ष से घटाकर 5 वर्ष करना.
• 10 वर्ष की एनएससी योजना शुरू करने और डाकघर बचत खाते पर ब्याज दरें 3.5 प्रतिशत से बढ़कर 4 प्रतिशत करना.
• केन्द्र सरकार की प्रतिभूतियों में लघु बचत वसूली के आवश्यक घटक 80 प्रतिशत को घटाकर 50 प्रतिशत करने और आवश्यकतानुसार अन्य राज्यों को दिए गए ऋण की वर्तमान अवधि 25 वर्ष को घटाकर 10 वर्ष करना.

विदित हो कि इस समिति का गठन योजनाओं में पारदर्शिता बाजार से जुड़ी दरें एवं बहुत आवश्यक सुधारों को लाने के उद्देश्य से एनएसएसएफ की रूपरेखा एवं प्रशासन के सभी पहलुओं की जांच के संबंध में 13वें वित्त आयोग की सिफारिशों को सिद्धांत रूप में स्वीकार करने के बाद किया गया था.

समिति का कार्य एनएसएसएफ से केन्द्र एवं राज्यों को दिए गए ऋणों की वर्तमान शर्तों के मूल्यांकन, लघु बचत की कुल वसूली को केन्द्र एवं राज्यों को उधार देने की व्यवस्था में अपेक्षित परिवर्तनों की सिफारिश करना, लघु बचत से प्राप्त कुल राशि के निवेश के अन्य संभावित अवसरों की समीक्षा, राज्यों एवं केन्द्र को दिए एनएसएसएफ ऋणों के पुनर्भुगतान की प्रक्रियाओं और राज्यों द्वारा लघु बचतों के निवेशों पर दिए गए प्रोत्साहनों की समीक्षा करनी थी. समिति के अन्य सदस्य आर श्रीधरन प्रबंध निदेशक भारतीय स्टेट बैंक, शक्तिकांत दास अपर सचिव (बजट) वित्त मंत्रालय, डॉ. राजीव कुमार पूर्व निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संबंधों पर भारतीय अनुसंधान परिषद जो वर्तमान में महानिदेशक फिक्की है, अनिल बिसन आर्थिक सलाहकार (वित्त मंत्रालय) हैं.

Courtesy : Jagran Josh

Tuesday, June 7, 2011

डाक घरों की लघु बचत योजनाएं होंगी अधिक फायदेमंद


लघु बचत योजनाओं को और प्रभावी बनाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक की डिप्टी गवर्नर श्यामला गोपीनाथ की अध्यक्षता वाली कमेटी ने सरकार को 7 जून, 2011 को सौंपी गई अपनी रिपोर्ट में कुछेक प्रभावी सुझाव दिए हैं. इनमें से तमाम सुझाव डाक-घरों में बचत बैंक की स्थिति को सुदृढ़ करते हैं-

-लघु बचत योजनाओं पर मिलने वाले रिटर्न को सरकारी प्रतिभूतियों पर मिल रही ब्याज दरों से जोड़ दिया जाए.

-पोस्ट ऑफिस बचत योजना पर भी 4%ब्याज दिया जाए.

-एनएससी की परिपक्वता अवधि मौजूदा 6 वर्ष से घटाकर 5 वर्ष कर दी जाए.

-किसान विकास पत्र (केवीपी) को बंद कर इसकी जगह 10 वर्ष अवधि वाला एनएससी जारी किया जाए.

-पीपीएफ में निवेश की मौजूदा सीमा 70,000 रुपये से बढ़ाकर एक लाख रुपये कर दी जाए.

-सिफारिश के लागू होने के बाद एक साल की जमा योजना पर ब्याज दर मौजूदा 6.25% से बढ़कर 6.8% हो जाए.

-पीपीएफ पर रिटर्न मौजूदा 8% से बढ़कर 8.2% हो जाए.

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार इस कमेटी के सुझावों पर अमल करती है तो जल्द ही छोटे निवेशकों को काफी फायदा मिल सकता है। कमेटी ने जो सुझाव दिए हैं उनका मुख्य उद्देश्य बढ़ती महंगाई के इस दौर में लघु बचत योजनाओं की ब्याज दरों को मार्केट से जोडऩा है, जिससे निवेशकों को ज्यादा फायदा हो। इसके अलावा किसान विकास पत्र (केवीपी) के स्थान पर जो 10 साल अवधि के राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र (एनएससी) लाने की बात कही गई है, इससे लंबी अवधि के लिए निवेश करने वाले निवेशकों को भी फायदा होगा।

इसी प्रकार ,लघु बचत योजनाओं की तुलना में बैंक ज्यादा ब्याज दे रहे हैं, इससे इनकी ओर लोगों का रुझान कम हो रहा है। ऐसे में यदि सरकार पोस्ट ऑफिस बचत पर चार प्रतिशत ब्याज के प्रस्ताव को मान लेती है तो इससे छोटे निवेशकों को तो फायदा होगा ही साथ ही सरकार के खजाने में भी वृद्धि होगी। पब्लिक प्रोविडेंट फंड, जो बचत के साथ ही आयकर में छूट पाने का सबसे बेहतर जरिया है, में निवेश की सीमा भी अगर 70,000 रुपये से बढ़ कर एक लाख रुपये हो जाती है तो लंबी अवधि में यह बहुत ही सकारात्मक कदम साबित होगा।

..फ़िलहाल कमेटी की रिपोर्ट चर्चा में है और लोगों के इसके फलीभूत होने का इंतजार है !!

Wednesday, June 1, 2011

डाकघर की बचत योजनाएं



पोस्ट ऑफिस बचत खाता (SB) : इस पर 3.50 प्रतिशत वार्षिक ब्याज मिलता है और इसके एकल खाते में अधिकतम 1 लाख और संयुक्त खाते में 2 लाख रुपये निवेश किए जा सकते हैं। न्यूनतम 50 रूपये से खाता खोलने की सुविधा.इसका ब्याज कर-मुक्त है.इसमें चेक-सुविधा उपलब्ध है.चेक सुविधा के लिए न्यूनतम 500 रूपये से खाता खोलने की सुविधा.

पोस्ट ऑफिस टाइम डिपोजिट (TD): इस योजना के तहत एक वर्ष के लिए 6.25, दो वर्ष के लिए 6.50, तीन वर्ष के लिए 7.25 और पांच वर्ष के लिए 7.50 प्रतिशत ब्याज देय है। ब्याज वार्षिक रूप से देय, पर गणना त्रैमासिक आधार पर.इसका ब्याज कर-मुक्त है.मात्र पाँच वर्षीय स्कीम पर आयकर-छूट उपलब्ध है.

पोस्ट ऑफिस आवर्ती जमा योजना (RD): हर माह जमा आधार. न्यूनतम 10/-, अधिकतम कोई सीमा नहीं. 5 वर्ष की परिपक्वता अवधि वाली इस योजना पर वार्षिक 7.5 प्रतिशत ब्याज देय है । अगले पाँच वर्ष के लिए उसी ब्याज दर पर बढ़ने की सुविधा उपलब्ध. (उदाहरण-10/- प्रतिमाह जमा करने पर पाँच साल बाद 728.90/- की प्राप्ति)

पोस्ट ऑफिस मासिक आय योजना (MIS) : 6 वर्ष की परिपक्वता अवधि वाली इस योजना पर मासिक 8 प्रतिशत ब्याज देय है और आयकर की धारा 80एल के तहत इस पर आयकर छूट का भी प्रावधान है। (उदाहरानार्थ- 12,000 रूपये पर हर माह 80/-). एकल खाते में अधिकतम निवेश की सीमा 4.5 लाख और संयुक्त खाते में 9 लाख रुपये है। परिपक्वता के बाद 5 प्रतिशत बोनस भी प्राप्त होता है.इसका ब्याज कर-मुक्त है.

राष्ट्रीय बचत पत्र (NSC) : इस पर 8.16 प्रतिशत ब्याज मिलता है और इसकी परिपक्वता अवधि छह वर्ष है। ब्याज की गणना छमाही आधार पर पर भुगतान मैचयोरती के बाद. इसमें भी 100 रुपये से निवेश प्रारंभ किया जा सकता है और अधिकतम निवेश की कोई सीमा नहीं है। इस पर आयकर छूट का फायदा भी मिलता है।

किसान विकास पत्र (KVP): इसमें फिलहाल निवेशित धन राशि आठ वर्ष सात माह में लगभग दोगुनी हो जाती है। इसमें कम से कम 100 रुपये से निवेश प्रारंभ किया जा सकता है और निवेश की कोई अधिकतम सीमा नहीं है। इस योजना पर आयकर छूट का कोई लाभ नहीं है।

पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) : वर्तमान में इसमें अधिकतम निवेश की सीमा 70,000 रुपये हैं और इस पर 8 प्रतिशत ब्याज मिलता है। 15 वर्ष की परिपक्वता अवधि वाली इस योजना पर आयकर छूट का भी लाभ प्राप्त होता है।लोन सुविधा उपलब्ध.

वरिष्ठ नागरिक बचत योजना (SCSS) : पांच वर्ष की परिपक्वता अवधि वाली इस योजना पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज मिलता है। निवेशक चाहे तो इसे तीन साल के लिए और बढ़ा सकता है। त्रैमासिक आधार पर ब्याज देय.इमसें निवेश की न्यूनतम सीमा 1,000 और अधिकतम सीमा 15,00,000 रुपये है।

Sunday, May 8, 2011

रवीद्रनाथ ठाकुर के 150वें जन्मदिन पर डाक टिकट


भारतीय डाक विभाग ने रवीद्रनाथ ठाकुर के 150वें जन्मदिन के अवसर पर 7 मई 2011 को दो डाक टिकटों का एक सेट जारी किया है। इन डाक टिकटों का मूल्य 5 रुपये प्रति है। डाक टिकट के डिजाइन में रचना कर्म में लीन रवीद्रनाथ ठाकुर -पृष्ठभूमि में शांतिनिकेतन का उपासना घर, अपने नाटक वाल्मीकि प्रतिभा में अभिनय करते हुए रवीद्रनाथ ठाकुर तथा उनकी एक पेंटिग को दर्शाया गया है। इन डाक टिकटों के साथ मिनिएचर शीट भी जारी की गई है, जिसका मूल्य 10 रुपये है, जिस पर रविंद्रनाथ ठाकुर का जन्म स्थान, उनकी कुछ कविताओं की पांडुलिपियां और नोबेल पुरस्कार को दिखाया गया है। इसके साथ ही प्रथम दिवस आवरण व विवरणिका भी जारी किए गए हैं, जिसमें उनकी पेंटिंग तथा हस्तलिपि एवं चित्राकंन दर्शाया गया है।

(रबीन्द्रनाथ ठाकुर के व्यक्तित्व-कृतित्व पर कृष्ण कुमार यादव का आलेख 'सृजनगाथा' पर 'कवीन्द्र-रविन्द्र और उनके विमर्श' शीर्षक से पढ़ा जा सकता है)


Tuesday, April 26, 2011

प्यार की चिट्ठी

'प्यार की चिट्ठी' भला किसे न सुहाए. टेक्नालाजी कहाँ की कहाँ पहुँच गई, पर अभी भी उन प्यार भरे चिट्ठियों की बात होते ही मन में सिहरन सी उठने लगती है. ऐसी ही इक प्यार भरी चिट्ठी जनसत्ता के समान्तर स्तम्भ में 21 अप्रैल, 2011 को पढ़ी, तो सोचा की इसे यहाँ भी बांच लूं. इस प्यार भरी चिट्ठी के लेखक हैं सिद्धेश्वर जी. उनकी (प्रेम) पत्र - लेखन और (प्रेम) पत्र - पठन के (वे) दिन पोस्ट यहाँ पर साभार प्रस्तुत है !!


तब रंगीन लगती थीं श्वेत श्याम तस्वीरें
और किताबों के बीच चुपके से रखे गए सूखे फूल
बोसीदा कमरे में भर में भर देते थे सुगन्ध।


रात के दो के आसपास का समय था।वोल्वो तेज रफ्तार से भाग रही थी. बस में थोड़े-थोड़े अंतराल पर एक ही गाना बार-बार बज रहा था-'चिठ्ठी आई है ,वतन से चिठ्ठी आई है'.लग रहा था कि बस के ड्राइवर और स्टाफ को घर की याद आ रही होगी. मैं ऐसा शायद इसलिए भी अनुमान कर रहा क्योंकि स्वयं घर से दूर था - हजारों मील, लेकिन घर की याद बिना किसी टिकट भाड़े नजदीक और नजदीक चली आ रही थी. मुझसे आगे की सीट पर बैठा युवक अपनी साथी को बता रहा था-'नाम फिल्म इसी गाने से पंकज उधास का नाम फेमस हुआ था'.शुक्र है कि युवती ने 'कौन पंकज, कौन उधास?' नहीं पूछा.मुझे याद आया कि एक सहकर्मी ने एक दिन बताया था कि उन दिनों जब यह गाना खूब चला था तब उन्होंने इसी से 'प्रेरणा'लेकर गणित में एम.एस-सी.करने के तत्काल बाद एक विदेशी स्कूल की नौकरी के बदले अपने कस्बेनुमा शहर की मास्टरी को इसलिए तरजीह दी थी कि 'उमर बहुत है छोटी,अपने घर में भी है रोटी'.हालांकि बाद में,थोड़ी तरलता आने पर उन्होंने बेहद मीठे और मुलायम अंदाज में यह भी खुलासा किया था कि इस निर्णय के केन्द्र में 'प्रेम' भी (शायद प्रेम ही!) एक मजबूत कारण या आधार था.और यह भी कि उन दिनों वह रोजाना बिला नागा 'उसे' एक पत्र लिखा करते थे - प्रेम पत्र.

वह कोई दूसरा समय था
इतिहास का एक बनता हुई कालखंड
समय की खराद पर
उसी में ढलना था हम सबका जीवन।

आजकल पत्र कौन लिखता है? सरकारी,व्यव्सायी,नौकरी-चाकरी के आवेदन-बुलावा आदि के अतिरिक्त पारिवारिक-सामाजिक पत्र हमारी जिंदगी के हाशिए से भी सरक गए लगते है.क्या ऐसा संचार के वैकल्पिक संसाधनों-साधनों की सहज - सरल - सस्ती उपलब्धता के कारण हुआ है? या कि समय का अभाव,पारिवारिक-सामाजिक संरचना के तंतुजाल में दरकाव,पेपरलेस कम्युनिकेशन की ओर अग्रगामिता आदि-इत्यादि चीजें इसकी वजहें हैं? बहरहाल, इस गुरु-गंभीर विषय पर विमर्श की विचार-वीथिका में वरिष्ठ-गरिष्ठ विद्वानों को विचरण करने का सुअवसर प्रदान करते हुए मैं तो बस यही कहना चाह रहा हूं कि कहां गए वो दिन? वो पत्र-लेखन और पत्र-पठन के दिन अब तो पत्र-लेखन कला स्कूली पाठ्यक्रमों में सिमट कर रह-सी गई है।

दुनिया बदलती जा रही है पल-प्रतिपल।
तमाम जतन और जुगत के बावजूद
हर ओर सतत जारी है कुरूपताओं का कारोबार
बढ़ता ही जा रहा है कूड़ा कबाड़
फिर भी मन का कोई कोई कोना
खोजता है एकान्त

कुछ लोग कहेंगे कि ई मेल ,एसएमएस,इंस्टैन्ट मैसेजिंग आदि पर मेरी नजर क्यों नहीं जा रही है. हां,ये भी पत्र के विकल्प रूप - प्रारूप हैं और इनके जरिए व्यक्त की जाने वाली संवेदना तथा उसके शिल्प को मैं नकार भी नहीं रहा हूं किन्तु यहां मेरी मुराद कागज पर लिखे जाने वाले उस पत्र से है जिससे तमाम भाषाओं का विपुल साहित्य भरा पड़ा है,जिसको लेकर रचा गया समूचे संसार का शास्त्रीय-उपशास्त्रीय-लोक-फ़ोक संगीत अनंत काल तक दिग्-दिगंत में गूंजता रहेगा,जो कभी मानवीय संबंधों की ऊष्मा का कागजी पैरहन था,जो कभी सूखे हुए फूलों के साथ किताबों के पन्नों में मिला करता था और दिक्काल की सीमाओं को एक झटके में तिरोहित कर जीवन-जगत के तमस में आलोक का आश्चर्य भर देता था.

अब भी मँडराती हैं
ढेर सारी कटी पतंगे
तलाशती हुईं अपनी डोरियाँ
अपनी लटाइयाँ
और अपने-अपने हिस्से का आकाश।

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सिद्धेश्वर

Wednesday, April 20, 2011

ब्रिटेन और आस्ट्रेलिया में विलियम-केट की शाही शादी पर डाक टिकट

ब्रिटेन के राजकुमार प्रिंस विलियम और केट मिडिलटन की शाही शादी से पहले ब्रिटिश डाक विभाग ने उनके सम्मान में डाक टिकट निकालने की तैयारी की है। यह डाक टिकट दो तरह के होंगे जिन पर यह जोड़ी आलिंगनबद्ध दिखाई देगी। इसके लिए फोटोग्राफर मारिया टेस्टिनो द्वारा खींची गई तस्वीर का इस्तेमाल किया जाएगा। ‘डेली एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक 1981 में चार्ल्स और डायना की शादी के समय उनके सम्मान में दो डाक टिकट जारी किए गए थे। विलियम इससे पहले भी दो बार डाक टिकटों पर दिख चुके हैं। पहली बार महारानी के 100वें जन्मदिन के उपलक्ष्य में। दूसरी बार अपने 21वें जन्मदिन के अवसर पर। इन टिकटों की बिक्री 21 अप्रैल से शुरु होगी। उल्लेखनीय है कि विलियम और केट की शादी 29 अप्रैल 2011 को होगी।


गौरतलब है कि 11 अप्रैल को आस्ट्रेलिया ने भी ब्रिटेन के राजकुमार प्रिंस विलियम और केट मिडलटन की शादी की स्मृति में एक विशेष डाक टिकट जारी किया है, जिसमें इस भावी दंपति को सगाई की रस्म के बाद की मुद्रा में दिखाया गया है। विभाग के प्रमुख अहमद फाहूर ने कहा,’हमें विश्वास है कि विशेष डाक टिकट लोगों को इस ऐतिहासिक और खुशी के मौके को अपनी यादों में संजोकर रखने का एक मौका देगा।’

Monday, April 18, 2011

सुब्रत राय 'सहारा' पर डाक टिकट ....??

ब्रिटेन की राष्ट्रीय डाक सेवा रायल मेल भारतीय कार्पोरेट दिग्गज एवं सहारा समूह के अध्यक्ष सुब्रत राय के सम्मान में डाक टिकट जारी करेगी। ब्रिटेन ने उनकी उपलब्धियों को देखते हुए प्रथम श्रेणी का डाक टिकट जारी करने की घोषणा की है। इस सम्मान पर श्री राय ने कहा, ‘मेरे पास रायल मेल का आभार व्यक्त करने के लिए शब्द नहीं हैं, मुझे नहीं लगता कि मैं इसके लायक हूँ। मैं इस सम्मान की गरिमा बनाए रखने की कोशिश करुँगा।’ ब्रिटेन की संसद के प्रवक्ता जान बर्को ने शिक्षा, खेल और प्रौढ़ शिक्षा के क्षेत्र में समूह की उपलब्धियों का स्वागत करते हुए कहा, ‘हम आपकी उपलब्धियों को सलाम करते हैं।’


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सुब्रत राय पर ब्रिटेन के डाक विभाग द्वारा जारी होने वाले डाक टिकट की खबर तमाम अख़बारों में धड़ल्ले से छपी. कुछ समय पहले भोजपुरी गायक और अभिनेता मनोज तिवारी पर भी एक देश द्वारा डाक टिकट छपने की बातें मीडिया में आई थीं. पर इनका रहस्य ही कुछ और है ? वस्तुत: तमाम देश इस तरह के डाक टिकटों को कमर्शियल आधार पर बढ़ावा देते हैं. हाल ही में भारत में भी पर्सनालाइज्ड डाक टिकट आरंभ किये गए हैं, जिन्हें पिछले दिनों INDIPEX के दौरान बखूबी जारी भी किया गया. Business Standard अख़बार ने इस प्रकरण पर पूरी विस्तृत रिपोर्ट भी प्रकाशित की है. अख़बार लिखता है कि -'' A Royal Mail spokesperson said, “Royal Mail has a range of services which allow individuals or businesses to create a personalised label, which can feature their own image or logo next to a postage stamp.” “Companies and individuals around the world purchase Royal Mail’s customised stamp sheets and we are delighted to have produced these limited edition Business Customised sheets to mark this occasion. Our customised stamp products, Smilers and Business Customised services, are very popular with businesses and individuals, who create and purchase them to celebrate events which range from the birth of a baby to a significant event or achievement within their business.” .....तो क्या इंडियन सेलिब्रेटीज अपने को चर्चित बनाने के लिए इस तरह की ट्रिक का इस्तेमाल कर रहे हैं और मीडिया के माध्यम से उसे भुना भी रहे हैं. ऐसे डाक-टिकटों के पीछे छिपा हुआ यह वाकई रोचक पहलू है.

Tuesday, April 12, 2011

एलिजाबेथ टेलर के साथ दफन हुआ प्रेम पत्र भी

पत्र दिल के कितने करीब होते हैं, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि हाॅलीवुड की प्रख्यात अभिनेत्री एलिजाबेथ टेलर की कब्र में उनके पूर्व पति रिचर्ड बर्टन द्वारा उनके आखिरी दिनों में उन्हें भेजा गया पत्र भी रखा गया। अभिनेत्री एलिजाबेथ टेलर की मौत 23 मार्च 2011 को हुई थी और उन्हें लाॅस एंजिल्स के फारेस्ट लाॅन कब्रगाह में दफना दिया गया। हाॅलीवुड में दोनों का रोमांस यादगार माना जाता है। टेलर ने बर्टन के साथ दो बार शादी की थी। दूसरी बार टेलर से तलाक लेने के बाद बर्टन ने सुसान हंट से शादी की, लेकिन अपनी पहली पत्नी को नहीं भूल पाए। 1984 में उन्होंने टेलर को वापस लौटने के लिए प्यार भरा पत्र लिखा था। उसके बाद बर्टन की 58 साल की उम्र में मौत हो गई थी। टेलर पिछले 27 साल से यह पत्र अपने बिस्तर के पास रखती आ रही थीं।

Friday, March 18, 2011

अब भारत में भी ई-डाकघर अपनाएं


भारतीय डाक विभाग भी अब बदलते वक़्त के साथ रफ़्तार लगाने को तैयार है. केंद्रीय संचार और सूचना प्रौद्योगि‍की मंत्री कपि‍ल सि‍ब्‍बल ने पिछले दिनों भारतीय डाक के ई-कॉमर्स पोर्टल ई-डाकघर का शुभारंभ कि‍या। इस पोर्टल से उपभोक्‍ता कहीं भी कि‍सी भी समय डेबि‍ट कार्ड और क्रेडि‍ट कार्ड का इस्‍तेमाल करके डाक संबंधी कोई भी कार्य कर सकेंगे। इस अवसर पर श्री सि‍ब्‍बल ने कहा कि‍ बदलती दुनि‍या में रहन-सहन का तरीका भी बदल रहा है, ई-पोस्‍ट की शुरूआत इस दि‍शा में एक कदम है, जि‍ससे उपभोक्‍ताओं को वि‍भि‍न्‍न सेवाएं मि‍ल सकेंगी। इस पहल का स्‍वागत करते हुए संचार राज्‍य मंत्री सचि‍न पायलट ने कहा कि‍ ई-दवाएं, ई-वाणि‍ज्‍य, ई-शि‍क्षा के बाद ई-डाक एक वाजि‍ब कदम है। श्री पायलट ने इस बात पर भी जोर दिया कि यह पोर्टल क्षेत्रीय भाषा में भी उपलब्‍ध कराया जाना चाहि‍ए, ताकि‍ आम आदमी भी इससे लाभान्वित हो सके.

गौरतलब है कि प्रोजेक्ट एरो की सफलता के बाद भारतीय डाक विभाग की एक महत्‍वाकांक्षी परि‍योजना के रूप में शुरू कि‍या गया ई-डाकघर, पहले चरण में सात सेवाएं देगा। इनमें इलेक्‍ट्रॉनि‍क मनीआर्डर (ईएमओ), तत्‍काल मनीऑर्डर (आईएमओ), डाक टि‍कटों की बि‍क्री, डाक सूचना, जहाज से भेजे गए एक्‍सप्रेस और अंतरराष्‍ट्रीय सामान पर नजर, पि‍न कोड तलाश करना और जानकारी एवं शि‍कायतों की रजि‍स्‍ट्री शामि‍ल हैं। इस सेवा के शुरू होने के साथ ही डाक वि‍भाग ने डाक सेवा की देश के नागरि‍कों तक पहुंच बढ़ाने का अपना वादा पूरा करने की दि‍शा में एक महत्‍वपूर्ण कदम उठाया है।

Friday, March 4, 2011

जब खूबसूरत अभिनेत्रियाँ उतरीं डाक-टिकटों पर

भारतीय डाक विभाग समय-समय पर तमाम विभूतियों पर स्मारक डाक टिकट जारी करता है. इनमें हाल ही में INDIPEX-2011 के दौरान 13 फरवरी, 2011 को भारतीय सिनेमा की छह महान अभिनेत्रियों पर जारी डाक टिकटों का क्रेज खूब दिख रहा है. इन अभिनेत्रियों में मीना कुमारी, नूतन, कानन देवी, देविका रानी, लीला नायडू और सावित्री देवी शामिल हैं।




इससे पूर्व चर्चित अभिनेत्री मधुबाला पर भी वर्ष 2008 में डाक टिकट जारी हो चुका है.






मधुबाला का डाक टिकट तो सोने के डाक टिकट रूप में भी ढाला जा चुका है.


30 दिसंबर, 1993 को पद्मश्री से सम्मानित प्रथम हिंदी अभिनेत्री और अपने ज़माने की मशहूर अभिनेत्री नर्गिस दत्त पर जारी डाक टिकट तो अब ढूंढे हुए भी नहीं मिलते, वाकई बेहतरीन.





फ़िल्मी दुनिया से जुडी तमाम हस्तियों पर डाक टिकट जारी होते रहे हैं और अभी भी उनका क्रेज बरकरार है.

Thursday, February 24, 2011

पोस्टकार्ड की दुनिया...

पोस्टकार्ड की दुनिया भी निराली है। सब कुछ खुला-खुला, कुछ भी छुपा नहीं. दूसरे शब्दों में कहें तो पारदर्शिता का सबसे सुन्दर उदहारण. दाम भी सबकी हैसियत के अन्दर. वैसे यह भी अजीब लगता है कि एक पचीस या पचास पैसे का पोस्टकार्ड इतनी कम लागत पर पूरे भारत की सैर कर लेता है. पोस्टकार्ड भी कई तरह के हो गए- साधारण पोस्टकार्ड, जवाबी पोस्टकार्ड, मेघदूत पोस्टकार्ड, प्रिंटेड पोस्टकार्ड, कम्पटीशन पोस्टकार्ड. हर पोस्टकार्ड की अपनी खूबियाँ हैं. मसलन, मेघदूत पोस्टकार्ड के एक ही हिस्से में लिखा जा सकता है, दूसरी ओर विज्ञापन होता है. तभी तो यह सबसे सस्ता अर्थात मात्र पचीस पैसे का है. कम्पटीशन पोस्टकार्ड किसी भी प्रतियोगिता सम्बन्धी जवाब के लिए प्रयुक्त होता है. अब कोई पहले भी कह ले कि पोस्टकार्ड का उतना चलन नहीं रहा, पर साहित्य की दुनिया तो इसके बिना अधूरी है. किसी पत्र-पत्रिका में कोई कविता, कहानी या लेख पसंद आया तो झट से पोस्टकार्ड पर दो लाइन लिखकर भेज दिया. कवि और लेखक भी खुश कि उनके चाहने वाले हैं और पोस्टकार्ड से ही आभार भी व्यक्त कर दिया. अब तो सुप्रीम कोर्ट भी पोस्टकार्ड द्वारा भेजी गई शिकायतों का संज्ञान लेता है. तमाम राजनैतिक दल और एन. जी. ओ. भी पोस्टकार्ड पर सन्देश लिखकर लोगों को जागरूक बनाये रखते हैं. जब भी कभी किसी मुद्दे पर आवाज़ उठानी हो तो हजारों पोस्टकार्ड पर सन्देश लिखकर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री इत्यादि के पास पोस्ट करवा देते हैं.

आज की व्यस्त भरी दुनिया में पोस्टकार्ड बड़े काम की चीज है. कोई कहेगा कि एस. एम. एस. सस्ता होता है, पर मोबाईल खरीदने का झंझट और फिर हर किसी का मोबाईल नंबर हर किसी के पास हो जरुरी भी नहीं. ई-मेल करने के लिए कम्यूटर और इंटरनेट-कनेक्शन होना चाहिए पर पोस्टकार्ड के लिए ऐसा कुछ भी नहीं. किसी को भी सुन्दर से शब्द लिखिए और टहलते-टहलते नजदीक के लेटर-बाक्स में पोस्ट कर आइये. इसी बहाने थोडा घूमना-फिरना भी हो जायेगा वरना इस ई-मेल और मोबाईल ने तो आदमी को जड़ ही बना दिया है. इंस्टेंट होने के चक्कर में न जाने कितनी बीमारियाँ व्यक्ति को घेरे जा रही हैं. कभी गुरु जी लोग बच्चों की राइटिंग देखकर उसके होनहार गुणों को पहचान लेते थे और ज्योतिषी इसी आधार पर लोगों का व्यक्तित्व भी गढ़ देते थे, पर अब तो सुलेखन बीते दिनों की बात हो गई. तो आइये न एक बार फिर से किसी को सुन्दर सा पोस्टकार्ड लिखते हैं की वह रायटिंग देखकर दूर से ही पहचान ले कि किसने यह सुन्दर सा पोस्टकार्ड भेजा है !!

Friday, February 18, 2011

एयर मेल सर्विस के 100 साल


डाक सेवा का विचार सबसे पहले ब्रिटेन में और हवाई जहाज का विचार सबसे पहले अमेरिका में राइट बंधुओं ने दिया वहीं चिट्ठियों ने विश्व में सबसे पहले भारत में हवाई उड़ान भरी। यह ऐतिहासिक घटना 18 फरवरी 1911 को इलाहाबाद में हुई। संयोग से उस साल कुंभ का मेला भी लगा था। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार उस दिन एक लाख से अधिक लोगों ने इस घटना को देखा था जब एक विशेष विमान ने शाम को साढ़े पांच बजे यमुना नदी के किनारों से उड़ान भरी और वह नदी को पार करता हुआ 15 किलोमीटर का सफर तय कर नैनी जंक्शन के नजदीक उतरा जो इलाहाबाद के बाहरी इलाके में सेंट्रल जेल के नजदीक था। आयोजन स्थल एक कृषि एवं व्यापार मेला था जो नदी के किनारे लगा था और उसका नाम ‘यूपी एक्जीबिशन’ था। इस प्रदर्शनी में दो उड़ान मशीनों का प्रदर्शन किया गया था। विमान का आयात कुछ ब्रिटिश अधिकारियों ने किया था। इसके कलपुर्जे अलग अलग थे जिन्हें आम लोगों की मौजूदगी में प्रदर्शनी स्थल पर जोड़ा गया।

आंकड़ों के अनुसार कर्नल वाई विंधाम ने पहली बार हवाई मार्ग से कुछ मेल बैग भेजने के लिए डाक अधिकारियों से संपर्क किया जिस पर उस समय के डाक प्रमुख ने अपनी सहर्ष स्वीकृति दे दी।
मेल बैग पर ‘पहली हवाई डाक’ और ‘उत्तर प्रदेश प्रदर्शनी, इलाहाबाद’ लिखा था। इस पर एक विमान का भी चित्र प्रकाशित किया गया था। इस पर पारंपरिक काली स्याही की जगह मैजेंटा स्याही का उपयोग किया गया था। आयोजक इसके वजन को लेकर बहुत चिंतित थे, जो आसानी से विमान में ले जाया जा सके। प्रत्येक पत्र के वजन को लेकर भी प्रतिबंध लगाया गया था और सावधानीपूर्वक की गई गणना के बाद सिर्फ 6,500 पत्रों को ले जाने की अनुमति दी गई थी। विमान को अपने गंतव्य तक पहुंचने में 13 मिनट का समय लगा। विमान को फ्रेंच पायलट मोनसियर हेनरी पिक्वेट ने उड़ाया।

(चित्र में : प्रथम एयर मेल की स्वर्ण जयंती पर जारी प्रथम दिवस आवरण और डाक टिकट का विरूपण, कर्नल वाई विंधाम , भारतीय डाक द्वारा वर्तमान में प्रयुक्त फ्रेटर)

Monday, February 14, 2011

खादी का डाक टिकट प्रदर्शनी का आकर्षण

राजधानी दिल्ली के प्रगति मैदान में शनिवार से शुरू हुई डाक टिकटों की विश्वस्तरीय प्रदर्शनी में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पसंदीदा व स्वदेशी की पहचान ‘खादी’ पर छपा डाक टिकट मुख्य आकर्षण बना हुआ है।

राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील ने प्रगति मैदान में सप्ताह भर चलने वाले ‘इंडीपेक्स-2011’ का उद्घाटन करते हुए कहा कि महात्मा गांधी पर पहली बार एक विशेष खादी का डाक टिकट जारी किया जा रहा है और इसे जारी कर मैं खुद सम्मानित हुई हूं।

प्रदर्शनी के आयोजक, भारतीय डाक ने कहा कि कुल 71 देशों से कोई 595 टिकट संग्राहक इस प्रदर्शनी में हिस्सा ले रहे हैं। इसके अलावा टिकट संग्रह से जुड़े दुनिया भर के 28 व्यापारी और 31 डाक प्रशासन भी हिस्सा ले रहे हैं। इसके पहले भारत ने 1954 और 1997 के बीच इस तरह की पांच प्रदर्शनियों का आयोजन किया था।

खादी डाक टिकट वास्तव में घरेलू स्तर पर तैयार किए गए खादी के कपड़े पर छपा है, जिस पर मोहनदास करमचंद गांधी यानी महात्मा गांधी का चित्र है।

यह टिकट एक सीमित संस्करण है, जो एक विशेष संग्राहक के पास उपलब्ध है। इस टिकट की कीमत 250 रुपये है और इंडीपेक्स की वेबसाइट पर इसे ऑनलाइन बुक किया जा सकता है। कोई भी व्यक्ति अधिकतम 10 टिकटों का आर्डर दे सकता है। इस टिकट की पहली खेप यहां चंद मिनटों में ही बिक गई।

भारतीय डाक ने कहा कि कई देशों ने डाक टिकट छापने के लिए सिल्क जैसी वैकल्पिक सामग्रियों के साथ प्रयोग किया है। भारतीय डाक ने हालांकि सिर्फ कागज पर टिकट छापें हैं। इसमें तीन सेट सुगंधित टिकट भी शामिल हैं। लेकिन पहली बार खादी पर छपा एक विशेष डाक टिकट जारी हुआ है।

भारतीय डाक ने कहा है कि प्रदर्शनी का दूसरा आकर्षण ‘मेरे डाक टिकट’ है। इस टिकट पर कोई व्यक्ति अपने चित्र छपा हुआ पा सकता है और इसका इस्तेमाल सगाई व बेटे के जन्म दिन का उत्सव मनाने या किसी को शुभकामना संदेश भेजने में किया जा सकता है।

इसके अलावा सूर्य, विमान, रेल इंजन, वन्य जीव, ताज महल और भारतीय लोक कथा, पंचतंत्र से लिए गए चित्रों वाले टिकट शीट भी उपलब्ध हैं। एक टिकट शीट की कीमत 150 रुपये है।

प्रदर्शनी का अन्य आकर्षण होगा भारतीय सिनेमा की छह महान अभिनेत्रियों पर जारी होने वाले डाक टिकटों का सेट। इन अभिनेत्रियों में मीना कुमारी, नूतन, कानन देवी, देविका रानी, लीला नायडू और सावित्री देवी शामिल हैं। ये टिकट रविवार को जारी होंगे।

साभार : हिंदुस्तान

डाक टिकट में देखें अपनी तस्वीर


देश में पहली बार लांच हुई ‘माई स्टाम्प’ तकनीक लोगों के लिए खासा रोमांचक और आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। इस स्कीम के तहत अपनी पसंद के थीम टिकटों पर अपनी तस्वीर लगवा सकते हैं। INDIPEX-2011 में 17 थीम बनाई गई हैं।

महात्मा गांधी और जवाहर लाल नेहरू जैसी महान हस्तियों की फोटो वाली डाक टिकटें तो सभी ने देखी होगी, लेकिन इन टिकटों पर गांधी जी और पंडित नेहरू की जगह खुद की तस्वीर अंकित हो जाए तो यह आपके लिए अनूठा अनुभव होगा। इन दिनों कुछ ऐसा ही प्रगति मैदान के हॉल संख्या 9 में हो रहा है। दिल्लीवाले अपनी इस ख्वाहिश को पूरा करने के लिए भारी संख्या में यहां पहुंच रहे हैं। शुक्रवार से प्रगति मैदान में शुरू हुए विश्व फिलाटेलिक प्रदर्शनी INDIPEX-2011 में यह नजारा देखने को मिल रहा है।

यहां देश में पहली बार लांच हुई ‘माई स्टाम्प’ तकनीक लोगों के लिए खासा रोमांचक और आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। लोग अपनी पसंद के थीम टिकटों पर अपनी तस्वीर लगवा रहे हैं। बच्चे जहां पंचतंत्र और हवाई जहाज जैसी थीम को पसंद कर रहे हैं तो वहीं कई लोग राशिफल और ताजमहल वाली थीम को चुन रहे हैं। यहां ऐसी 17 थीम बनाई गई हैं।

राजौरी गार्डन से आए रोशन ने बताया कि उन्हें टिकट कलेक्शन का शौक है। डाक तकनीक ‘माई स्टाम्प’ मेरे कलेक्शन में नई जान डाल देगी। पर्सनलाइज्ड स्टाम्प के नाम से मशहूर इस रोमांचक तकनीक से लोग अपने यादगार लम्हों को भी टिकट के रूप में छपवा रहे हैं।

66 वर्षीय अरुण ने बताया कि यह तकनीक लम्हों को सम्हालने और यादगार बनाने के लिए एक बढ़िया माध्यम है। इसलिए वह अपने बचपन की फैमिली फोटो छपवाना चाहते हैं। इसके अलावा यहां हॉल संख्या 8-11 में 70 देशों के प्रतिनिधि अपने देश के डाक टिकटों को लाए हुए हैं। इसके अलावा यहां पूरे विश्व के दुर्लभ डाक टिकट, लिफाफे और सिक्कों की विस्तृत प्रदर्शनी भी दिल्ली वालों के लिए खासा आकर्षण का केंद्र है। इंडीपेक्स-2011 के प्रबंधकों ने बताया कि डाक टिकट किसी भी देश के इतिहास, संस्कृति, कला, व्यक्तित्वों और संसाधनों के बारे में जानने का रोमांचक तरीका है। यहां दिल्लीवासियों को अलग-अलग देशों की टिकटों से यह सब जानने को मिलेगा। इसके अलावा डाक टिकट कलेक्शन के रोमांचक शौक को युवाओं और बच्चों में लोकप्रिय बनाना भी है।

पिछले साल आयोजित दिसम्बर में सेव द टाइगर थीम पर आधारित पत्र लेखन प्रतियोगिता और डाक टिकट डिजाइनिंग प्रतियोगिता के विजेताओं के नाम भी घोषित किए गए और लोगों को देखने के लिए उनकी इन कृतियों को यहां विशेष रूप से प्रदर्शित भी किया गया है।

बता दें कि भारत में यह प्रदर्शनी इससे पहले आजादी की पचासवीं वर्षगांठ के अवसर पर 1997 में यहां लगाई गई थी। इस प्रदर्शनी का मजा यहां 18 फरवरी तक लिया जा सकेगा।

साभार : दैनिक भास्कर

Friday, February 11, 2011

कई मायनों में यादगार होगा INDIPEX-2011

दिल्ली के प्रगति मैदान में कल 12 से 18 फरवरी तक होने वाली अंतरराष्ट्रीय डाक टिकट प्रदर्शनी-इंडिपेक्स 2011 'INDIPEX-2011'कई मायनों में यादगार होगी. इस दौरान डाक विभाग तमाम नए आयाम स्थापित करने की कोशिश करेगा, वहीँ डाक टिकटों के प्रति लोगों में क्रेज पैदा करने और देखने का भी यह सुनहरा अवसर है. गौरतलब है कि भारत में पहली अन्तराष्ट्रीय डाक टिकट (फिलेटलिक) प्रदर्शनी का आयोजन 1954 में डाक टिकटों की शताब्दी वर्ष में हुआ था.

इंडिपेक्स 2011 'INDIPEX-2011' का उद्घाटन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल करेंगी। इस प्रदर्शनी में 70 देशों से 595 प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। इस प्रदर्शनी में स्वीडन के दुर्लभ डाक टिकट ट्रेस्किलिंग एलो को भी रखा जाएगा जिसका बाजार में अनुमानित मूल्य 16 लाख पौंड है। भारतीय डाक टिकटों में सबसे कीमती 1854 में जारी चार आना टिकट है।

इंडिपेक्स 2011 'INDIPEX-2011' डाक टिकट प्रदर्शनी का महत्त्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि भारत ने ही दुनिया में सर्वप्रथम इलाहबाद से नैनी के मध्य प्रतीकात्मक रूप में एयर-मेल सेवा आरंभ की. यह ऐतिहासिक घटना 18 फरवरी 1911 को इलाहाबाद में हुई। अर्थात जिस दिन 'INDIPEX-2011' के आयोजन का अंतिम दिन होगा, उसी दिन इस ऐतिहासिक घटना के 100 साल भी पूरे हो जायेंगें. इस दौरान छोटे सोमर हवाई जहाज से इलाहाबाद से नैनी तक 6,500 चिठ्ठियां ले जाने वाली दुनिया की पहली आधिकारिक एयरमेल सेवा पर भी तीन विशेष डाक टिकट जारी किए जाएंगे। इस छोटे हवाई जहाज को 18 फरवरी 1911 को फ्रांस के पायलट हेनरी पेक्वेट ने उड़ाया था। इस विमान के माध्यम से भेजी गई चिठ्ठियों में पंडित जवाहरलाल नेहरू के अलावा कई गणमान्य लोगों के पत्र शामिल थे। भारतीय वायुसेना की ओर से इस अवसर पर 12 फरवरी को इलाहाबाद से नैनी तक विशेष विमान उड़ान भरेगा।

प्रदर्शनी के दौरान ग्राहकों की पसंद का डाक टिकट तैयार करने की शुरूआत भी हो रही है। माई स्टाम्प नामक इस योजना का मकसद डाक टिकटों के माध्यम से डाक विभाग की आय बढ़ाना है। ऐसे प्रत्येक स्टाम्प की कीमत 150 रूपए होगी। इस तरह की सेवा ब्रिटेन की रायल मेल, फ्रांस की ला पोस्ट, जर्मनी की डोएचे पोस्ट, अमेरिकी पोस्टल सर्विस में पहले से उपलब्ध है।

दुनिया के कई देशों ने कागज के अलावा वस्त्रों सहित अन्य वस्तुओं पर भी डाक टिकट जारी किए हैं लेकिन भारत में अब तक कागज पर डाक टिकट जारी करने का चलन है। लेकिन पहली बार कागज के अतिरिक्त खादी के वस्त्र पर डाक टिकट जारी किए जा रहे हैं। इस तरह के पहले टिकट खादी के कपड़े पर जारी किए जा रहे हैं जो महात्मा गांधी को समर्पित होंगे। इसकी कीमत 250 रूपए रखी गई है।

भारतीय डाक विभाग द्वारा समय-समय पर भारतीय अभिनेताओं पर तमाम डाक टिकट जारी किए गए हैं, मगर अभिनेत्रियों में अभी तक मात्र यह सौभाग्य नर्गिस और मधुबाला को मिला है. दिल्ली के प्रगति मैदान में कल 12 से 18 फरवरी तक होने वाली अंतरराष्ट्रीय डाक टिकट प्रदर्शनी-इंडिपेक्स 2011 में छह अभिनेत्रियों पर भी डाक टिकट जारी किये जायेंगें. रूपहले पर्दे पर अपने सशक्त अभिनय और अप्रतिम सौन्दर्य से मंत्रमुग्ध करने वाली गुजरे जमाने की अदाकारा सावित्री, लीला नायडू, देविका रानी, कानन देवी, नूतन और मीना कुमारी के सम्मान में ये डाक टिकट जारी होंगे।

प्रदर्शनी में भारतीय सिनेमा एक प्रमुख आकर्षण होगा जहां सावित्री, लीला नायडू, देविका रानी, कानन देवी, नूतन और मीना कुमारी पर जारी डाक टिकट भी रखे जाएंगे। पूर्व में मधुबाला, राजकपूर, गुरूदत्त, के एल सहगल, मुकेश, किशोर कुमार, मोहम्मद रफी, हेमंत कुमार और बेगम अख्तर पर जारी डाक टिकट भी यहां प्रदर्शित होंगे।

मीना कुमारी, नूतन, देविका रानी.. अब डाक टिकटों पर

भारतीय डाक विभाग द्वारा समय-समय पर भारतीय अभिनेताओं पर तमाम डाक टिकट जारी किए गए हैं, मगर अभिनेत्रियों में अभी तक मात्र यह सौभाग्य नर्गिस और मधुबाला को मिला है. दिल्ली के प्रगति मैदान में कल 12 से 18 फरवरी तक होने वाली अंतरराष्ट्रीय डाक टिकट प्रदर्शनी-इंडिपेक्स 2011 में छह अभिनेत्रियों पर भी डाक टिकट जारी किये जायेंगें. रूपहले पर्दे पर अपने सशक्त अभिनय और अप्रतिम सौन्दर्य से मंत्रमुग्ध करने वाली गुजरे जमाने की अदाकारा सावित्री, लीला नायडू, देविका रानी, कानन देवी, नूतन और मीना कुमारी के सम्मान में ये डाक टिकट जारी होंगे।

पहली बार खादी पर डाक टिकट

दिल्ली के प्रगति मैदान में कल 12 से 18 फरवरी तक होने वाली अंतरराष्ट्रीय डाक टिकट प्रदर्शनी-इंडिपेक्स 2011 में पहली बार डाक विभाग खादी के कपड़े पर गांधी जी की फोटो छपा विशेष डाक टिकट जारी करने वाला है। खादी पर स्याही फैलने के कारण छपाई अधिकारियों के सामने यह काम एक चुनौती था। इसके लिए देश के भिन्न भागों में पैदा होने वाले कपास के तैयार खादी पर छपाई करके देखी गई। अधिकारियों के खुशी का ठिकाना न रहा जब उन्होंने पाया कि पश्चिम बंगाल के कपास से बुनी गई खादी पर स्याही नहीं फैली। भारतीय डाक विभाग ने खादी पर गांधी जी की फोटो वाले एक लाख टिकट छापे हैं। राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल इस अदभुत डाक टिकट का प्रदर्शनी के दौरान अनावरण करेंगी।

अब खुद का फोटो डाक टिकट पर

डाक टिकट पर छपा महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, जगदीशचंद्र बोस या ऐसी अन्य हस्तियों का फोटो क्या कहता है। अब इन प्रतिष्ठित शख्सियतों में एक और नाम जुड़ने वाला है- आपका। जी हां, आप भी इस प्रतिष्ठा के हकदार बन पाएंगे और अपनी तस्वीर वाली डाक टिकट छपवाने की आपकी हसरत पूरी हो पाएगी। जी हाँ , अब कोई भी व्यक्ति जब चाहे डाक टिकट पर अपनी फोटो छपवा सकता है, वह भी मात्र 10 मिनट में। भारतीय डाक विभाग 'माई पोस्ट' नाम की यह योजना शुरू कर रहा है।

दिल्ली के प्रगति मैदान में कल 12 से 18 फरवरी तक होने वाली अंतरराष्ट्रीय डाक टिकट प्रदर्शनी-इंडिपेक्स 2011 में यह योजना शुरू होगी।इस योजना का उद्घाटन होने के बाद डाकघर जाने के बाद अपनी फोटो वाली डाक टिकट पाने के इच्छुक व्यक्ति 10 मिनट में यह टिकट अपने हाथ में पाएगा। अपना यह शौक पूरा करने लिए आपको मात्र 150 रुपये देने होंगे। गौरतलब है कि यह योजना दुनिया भर में लोकप्रिय है मगर सुरक्षा कारणों से अब इसे भारत में शुरू नहीं किया गया था। तो देर किस बात कि, आप भी पहुँचिये डाक टिकटों पर अपनी फोटो देखने के लिए...!!

विश्व डाक टिकट प्रदर्शनी INDIPEX-2011 12 से 18 फरवरी तक

'INDIPEX-2011' का आयोजन 12-18 फरवरी, 2011 के मध्य प्रगति मैदान, दिल्ली में किया जा रहा है. भारत में पहली अन्तराष्ट्रीय डाक टिकट (फिलेटलिक) प्रदर्शनी का आयोजन 1954 में डाक टिकटों की शताब्दी वर्ष में हुआ था. इस डाक टिकट प्रदर्शनी का महत्त्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि भारत ने ही दुनिया में सर्वप्रथम इलाहबाद से नैनी के मध्य प्रतीकात्मक रूप में एयर-मेल सेवा आरंभ की. यह ऐतिहासिक घटना 18 फरवरी 1911 को इलाहाबाद में हुई। अर्थात जिस दिन 'INDIPEX-2011' के आयोजन का अंतिम दिन होगा, उसी दिन इस ऐतिहासिक घटना के 100 साल भी पूरे हो जायेंगें. 'INDIPEX-2011' के बारे में ज्यादा जानकारी के लिए इन लिंकों पर जाएँ-
'INDIPEX-2011'
'INDIPEX-2011'

भारत के चार राजघराने वाले राज्यों पर डाक टिकटों का सैट

डाक विभाग ने इंडिपेक्स 2011 विश्व डाक टिकट संग्रह प्रदर्शनी के कर्टन रेजर के रूप में भारत के राजघरानों के बारे में चार डाक टिकटों का सैट जारी किया। यह प्रदर्शनी 12 फरवरी से 18 फरवरी, 2011 तक प्रगति मैदान, नई दिल्ली में आयोजित की जाएगी। इन टिकटों को दिल्ली क्षेत्र की मुख्य पोस्टमास्टर जनरल सुश्री रामेश्वरी हांडा ने पहले संसद मार्ग मुख्य डाकघर में जारी किया था। चार स्मारक डाक टिकटों के इस सैट में सिरमौर, इंदौर, बामरा तथा कोचीन द्वारा जारी डाक टिकटों को दर्शाया गया है। ये डाक टिकटें दुनिया भर की दुर्लभ और बहुमूल्य डाक टिकटों की श्रेणी में आती हैं।

स्वतंत्रता से पूर्व भारत में 568 राज्य थे जिनका स्वतंत्रता के बाद अस्तित्व समाप्त हो गया। यहां यह उल्लेखनीय है कि पांच सौ से अधिक राज्यों में से केवल चालीस राज्यों ने अपनी सार्वभौमिकता की निशानी के रूप में डाक टिकटें जारी की थीं। इन राज्यों द्वारा जारी डाक टिकटों में राजाओं और राज कुमारों तथा राजसी प्रतीकों को चित्रित किया गया है। इन पर अनेक पध्दतियों तथा रंगों का प्रयोग करके छपाई की गई। कहा जा सकता है कि राज घराने वाले कुछ राज्यों ने एक पैतृक संपत्ति छोड़ी है जो डाक टिकट संग्रहण क्षेत्र के लिए बहुमूल्य है।

यह इस क्रम में दूसरा सैट है जैसा कि दिल्ली, शिमला, उदगमंडलम, कूच बिहार, नागपुर तथा लखनऊ मुख्य डाकघरों सहित प्राचीन डाक भवनों के छ: टिकटों का पहला सैट 12 मई 2010 को जारी किया गया था। इसका उद्देश्य विश्व के समक्ष भारतीय डाक की गौरवपूर्ण विरासत को प्रदर्शित करना था।

Tuesday, February 1, 2011

पोस्टमैन

(कविवर सोहन लाल द्विवेदी ने भी डाकिया को अपने शब्दों में ढाला है। मार्च 1957 में प्रकाशित उनकी कविता ‘पोस्टमैन‘ वाकई एक बेहतरीन कविता है। )

किस समय किसे दोगे क्या तुम
यह नहीं किसी को कभी ज्ञान
उत्सुकता में, उत्कंठा में
देखा करता जग महान
आ गई लाटरी निर्धन की
कैसी उसकी तकदीर फिरी
हो गया खड़ा वह उच्च भवन
तोरण, झंडी सुख की फहरी
यह भाग्य और दुर्भाग्य
सभी का फल लेकर तुम जाते
कोई रोता कोई हँसता
तुम पत्र बाँटते ही जाते
इस जग का सारा रहस्य
तुम थैले में प्रतिदिन किए बंद
आते रहते हो तुम पथ में
विधि के रचते से नए छंद।